गुरुवार, 1 जनवरी 2026

सुसंस्कार सहित शिक्षा का महत्व

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सुसंस्कार सहित शिक्षा का महत्व ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष शुक्ल  चतुर्दशी ,शुक्रवार 2 जनवरी  2026 कलि काल के   चौथे तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री अभिनंदन नाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अभिनंदन नाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष पूर्णिमा , शनिवार 3 जनवरी  2026 कलि काल के   15 वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री धर्मनाथ  भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री धर्मनाथ  भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जनवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 08,15,17,18,20,22,24,28 व 30( 30 को बारस+तेरस समाहित तिथि )तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 11 व 26  जनवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 जनवरी  को है।*
*🔔🐎षोडष कारण महापर्व 04 जनवरी से 02 फरवरी को है।* 
*✅🔔 बसंत पंचमी 23 जनवरी*
*🎪🪔दशलक्षण महापर्व 22 से 31 जनवरी 👉30 जनवरी से 01 फरवरी रत्नत्रय व्रत* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  जनवरी माह में  नहीं है बसंत पंचमी का 23 जनवरी को स्वयं सिद्ध मुहूर्त है 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,12,14,19,21,28 व 29 जनवरी 🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 03040708,13,14,23,24 व 29 जनवरी ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  23 से 26 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*✅ सुसंस्कार सहित शिक्षा का महत्व⏰* 

    *🔑उदारता*  
*उदारता सिर्फ पैसे का दान नहीं होती, बल्कि यह इंसान के अच्छे मन और बड़े दिल की पहचान है। उदार सोच हमारे विचारों को फैलाती है और खुद पर भरोसा बढ़ाती है। जो व्यक्ति बिना स्वार्थ के दूसरों की मदद करता है, सहनशील रहता है और सेवा को अपना स्वभाव बनाता है, वही सच में जीवन में मन की शांति और संतोष पाता है।*
*✅🪔आज भारत देश में भ्रष्टाचार युक्त राजनीति के कारण शिक्षा में मिलावट और बहुत कुछ परिवर्तन कर दिया।इसका मुख्य कारण यह है कि भारतवासियों ने अपने बहुमूल्य वोट का महत्व नहीं समझा और भ्रष्टाचार युक्त राजनीति के भ्रष्ट राजनेताओं ने शिक्षा को व्यवसाय बना कर संस्कृति को समाप्त कर दिया।*
⬇️⬇️⬇️✅⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️✅⬆️⬆️⬆️

एक छोटे से कस्बे में हरिनाथ नाम का एक साधारण शिक्षक रहता था। वे न तो बहुत धनी थे, न ही किसी बड़े पद पर—पर उनके भीतर एक असाधारण उदारता थी। उनकी उदारता पैसे में नहीं, बल्कि समय, ध्यान और विश्वास में झलकती थी।
हर सुबह स्कूल खुलने से पहले वे आ जाते और उन बच्चों को पढ़ाते जो फीस नहीं दे पाते थे। कई लोग उनसे कहते,
“आप इतना समय क्यों गंवाते हैं? इससे आपको क्या मिलेगा?”
हरिनाथ मुस्कुरा कर बस इतना कहते,
“जो मिलेगा, वह हिसाब में नहीं आता।”
एक दिन स्कूल का एक छात्र मोहन, जो पढ़ाई में कमजोर था, परीक्षा में फिर असफल हो गया। पिता ने गुस्से में उसकी पढ़ाई छुड़वाने का निर्णय ले लिया। हरिनाथ यह सुनकर खुद मोहन के घर गए। उन्होंने न तो उपदेश दिया, न ही दबाव बनाया। बस इतना कहा,
“इसे एक साल और मुझे दीजिए, मैं जिम्मेदारी लूंगा।”
उस साल हरिनाथ ने मोहन को रोज़ अतिरिक्त समय निकालकर शिक्षा के साथ सुसंस्कार दिया —कभी स्कूल के बाद, कभी रविवार को। बदले में उन्हें कुछ नहीं मिला, सिवाय थकान के। लेकिन उनके भीतर एक शांति थी।
समय बीता। मोहन न केवल पास हुआ, बल्कि आगे चलकर एक सफल इंजीनियर बना। वर्षों बाद वही मोहन उस कस्बे में एक बड़ा प्रशिक्षण केंद्र खोलता है—निःशुल्क शिक्षा के लिए। उद्घाटन के दिन उसने मंच से कहा,
“अगर हरिनाथ गुरुजी ने अपना समय, धैर्य और विश्वास उदारता से न दिया होता, तो मैं आज यहां नहीं होता।”
हरिनाथ चुपचाप पीछे खड़े थे। उनकी आंखों में संतोष था—वह आत्मसंतोष, जो किसी धन, पुरस्कार या प्रशंसा से कहीं बड़ा होता है। 
*✅🪔🔑नोट:-आज आवश्यक है कि हमें भी हरिनाथ बनकर अपनी शक्ति अनुसार कम से कम एक व्यक्ति विशेष को सुसंस्कार सहित शिक्षा प्रदान कर जीवन सार्थक करना आवश्यक है।*

*🎪🪔⏰✅विशेष: - भव्य आत्मओं ,सच्ची उदारता वही है, जो स्वार्थ से नहीं, सद्भाव से उपजती है। सही व्यक्ति और सही उद्देश्य के लिए दिया गया समय, श्रम और प्रेम—समाज को बदलने की सबसे बड़ी पूंजी बन जाता है।आज भारतवासियों को आवश्यक है कि सुसंस्कार व शिक्षा की आवश्यकता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें