रविवार, 28 दिसंबर 2025

दादी का अंत

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  दादी का अंत ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष शुक्ल  10 , 29 दिसंबर    सोमवार 2025 कलि काल के  16 वें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री शांतिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री शांतिनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष शुक्ल  ग्यारस , 30 दिसंबर  मंगलवार 2025 कलि काल के  2 रें तीर्थंकर  श्री अजितनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अजितनाथ  भगवान जी का  केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 , 29 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  दिसंबर माह में  04,05,06 व 11 दिसंबर को है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20,26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  24 से 29 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*🪔दादी का अंत 🪔* 

*✅यह कहानी एक सच्चाई है इसे कहानी समझकर ना पढ़े। दादी की जगह स्वयं को रखकर विचार करें तो आपका वर्तमान के साथ भविष्य सुरक्षित होगा। सभी को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है किंतु जैनदर्शन में उन कर्मों को समाप्त करने का उपाय बताया है।यह आप पर निर्भर करता है कि आप किसी के सहायक बनोगे तो आपका भी कोई सहायक बनकर अंतिम समय सार्थक करेगा।*

समय के साथ घर बड़े होते चले गए, पर दिल छोटे होते गए। तकनीक ने हाथों को व्यस्त कर दिया और रिश्तों को मौन। इसी मौन में सबसे पहले जो आवाज़ दबती है, *वह बुज़ुर्गों की होती है* —जो कभी पूरे घर की धड़कन हुआ करते थे।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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शहर की पुरानी गलियों के बीचों-बीच एक दोमंज़िला घर था। कभी यह घर हँसी, बातों और रिश्तों की गर्माहट से भरा रहता था। पर आज उसी घर की पहली मंज़िल के आख़िरी कमरे में 91 वर्ष की एक दादी रहती थीं। उनका दरवाज़ा हमेशा आधा खुला रहता—जैसे वे अब भी किसी के आने की आस लगाए बैठी हों। कमरे में पसरा सन्नाटा उम्र से नहीं, उपेक्षा से उपजा हुआ था।

कभी यही दादी इस घर की आत्मा थीं। सुबह चार बजे पूजा की घंटी, रसोई से उठती मसालों की खुशबू, बच्चों की हँसी और बहुओं की चुहल—हर जगह उनकी मौजूदगी थी। उनकी कहानियों में पूरा मोहल्ला साँस लेता था और उनकी रसोई में सिर्फ़ खाना नहीं, अपनापन पकता था।
लेकिन समय बदला। बदलाव ऐसे चुपचाप आए कि किसी को पता ही नहीं चला कि दादी कब अकेली हो गईं।

धीरे-धीरे सब व्यस्त हो गए। बेटे नौकरी में उलझे, बहुएँ मीटिंग्स और मोबाइल में, पोते-पोतियाँ दादी की कहानियों से ज़्यादा स्क्रीन की रोशनी में खोने लगे। दादी वही थीं, घर वही था—बस रिश्तों का अर्थ बदल गया था।

अब उनकी दुनिया एक कमरे तक सिमट चुकी थी—एक चारपाई, पुरानी अलमारी, तस्वीरों से भरा एलबम और एक खिड़की, जिससे बाहर की दुनिया तो दिखती थी, पर भीतर कोई झाँकता नहीं था। उनके पास अनुभव का सागर था, पर उसे सुनने वाला कोई किनारा नहीं।

बहू रोज़ थाली रख जाती—
“दादी, खा लीजिए, मुझे जल्दी है।”
दादी चुपचाप थाली देखती रह जातीं, जैसे शब्दों से ज़्यादा मौन ही उनका उत्तर बन गया हो।

कभी पोता झाँकता—
“दादी, अभी नहीं… मेरा गेम चल रहा है।”
और पूरा दिन यूँ ही बीत जाता, बिना यह पूछे कि दादी कैसी हैं।

दादी समझ गई थीं— *मौत अचानक नहीं आती। वह पहले रिश्तों से दूर करती है, फिर आवाज़ों से, फिर सवालों से। और एक दिन इंसान अपने ही घर में पराया हो जाता है।* कमरे में घड़ी की टिक-टिक उन्हें याद दिलाती कि समय ही नहीं, लोग भी उनसे आगे निकल चुके हैं।

एक शाम वे चारपाई पर बैठी ढलते सूरज को देख रही थीं। बाहर रोशनी कम हो रही थी, और भीतर उम्मीद भी। उन्होंने धीरे से पुकारा,
“कोई है?”
पर जवाब में टीवी की आवाज़ आई—इंसानों की नहीं।

अगले दिन पोती आई, हाथ में मोबाइल था।
“दादी, आपने सुबह फोन किया था?”
दादी मुस्कराईं, “बस तुमसे थोड़ी बात करनी थी।”
“अभी क्लास है दादी, बाद में,” कहकर वह चली गई।
दादी ने कुछ नहीं कहा, पर भीतर कुछ हमेशा के लिए टूट गया।

दिन सरकते गए... सहेलियाँ एक-एक कर विदा हो गईं... रिश्तेदार कम होते गए.. रात को दादी एलबम खोलकर तस्वीरों से बातें करतीं—क्योंकि तस्वीरें कभी यह नहीं कहती थीं, ‘अभी समय नहीं है।’

एक सर्द रात उनकी तबियत बिगड़ गई। हड्डियाँ दर्द से कराह रही थीं। उन्होंने पानी के लिए आवाज़ लगाई—
“कोई पानी दे दो…”
पर घर जाग रहा था, दादी के लिए नहीं—टीवी, मोबाइल, काम… सब चल रहा था। उनका कमरा पहले से भी ज़्यादा खाली हो गया।

उन्हें समझ आ गया कि अकेलापन शरीर को नहीं, आत्मा को मारता है। और जब आत्मा हार जाती है, तो शरीर का टिके रहना मुश्किल हो जाता है।

सुबह बहू ने दरवाज़ा खोला। दादी तकिये के सहारे शांत लेटी थीं। चेहरे पर अजीब-सी शांति थी और आँखों में हल्की नमी—जैसे किसी का इंतज़ार करते-करते नींद आ गई हो।

घर में रोना-धोना मच गया। सब कह रहे थे—“दादी चली गईं।”
पर सच यह था कि दादी उस दिन नहीं गई थीं…
वे तो बहुत पहले चली गई थीं—उस दिन, जब उनसे बात करना बंद कर दिया गया था।

91 साल की दादी का सबसे बड़ा दर्द उम्र नहीं थी, बीमारी नहीं थी—दर्द था रिश्तों की चुप्पी। उनके पास जीवन था, पर अपनापन नहीं। साँसें थीं, पर सुनने वाला कोई नहीं।
*🔔नोट:-इस कहानी को रिश्तेदार मित्रों व अन्य लोगों तक शेयर अवश्य करे शायद इससे किसी दादा-दादी ,नाना-नानी का भला हो।* 

*✅🌞🔔🎪 विशेष :-भव्य आत्माओं,आज हमारे घरों में जो बुज़ुर्ग हैं, वही हमारे अतीत की जड़ और भविष्य का आईना हैं। उन्हें समय, सम्मान और संवाद दीजिए। क्योंकि जो आज किसी की आवाज़ अनसुनी करता है, कल उसकी आवाज़ भी इसी सन्नाटे में खो जाती है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 17 दिसंबर 2025

आत्मविश्वास की शक्ति

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 आत्मविश्वास की शक्ति ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष कृष्ण  चतुर्दशी , 18 दिसंबर गुरुवार 2025 कलि काल के  10 वें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री शीतलनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री शीतलनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28  दिसंबरको है। चतुर्दशी तिथि 03 व 18 दिसंबर  को है।*
*🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20, 26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  24 से 25 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*आत्मविश्वास की शक्ति* 

कभी-कभी हालात ऐसे होते हैं कि बाहर की गर्मी से ज़्यादा, हमारे भीतर कुछ उबल रहा होता है— झुंझलाहट, असंतोष और शिकायतें। और तभी जीवन हमें आईना दिखाने के लिए किसी छोटे से कंधे पर बड़ा बोझ रखकर हमारे सामने खड़ा कर देता है ।यह सबकुछ जब हमारा आत्मविश्वास हम गंवा चुके होते है तब ही महसूस होता है।
राजस्थान के उस तपते कस्बे में जून की दोपहर मानो साँस ले रही थी— लू के साथ। कल रात से बिजली बंद थी, और आज गर्मी अपने चरम पर।
मैं घर पहुँचा। जैसे ही फ्रिज खोला, उसमें से उठी गर्म भभक ने मेरे सब्र को जला दिया।
“इसे भी अभी खराब होना था…” मैं बड़बड़ाया।
पानी की बोतलें, जूस के पैकेट— सब उबलते हुए से लग रहे थे। प्यास से हलक सूख रहा था।
किचन से नॉर्मल पानी का गिलास उठाया, होठों से लगाया—
“छि…!” कोई इतना गर्म पानी कैसे पी सकता है!
मुंह में भरा पानी बाहर उगल दिया। गुस्से में गिलास समेत सिंक में पटक दिया और तेज़ कदमों से बाहर निकल पड़ा।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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“अंकल… एक चिल्ड पानी और एक चिल्ड कोल्ड ड्रिंक।” मैंने सौ का नोट बढ़ाया।
दुकानदार की आँखों में मजबूरी थी। “बेटा, ठंडी नहीं है… कल से लाइट नहीं है यहाँ। ऐसी ही चलेगी?”
मेरे अंदर कुछ और टूट गया। नोट जेब में डाला और बिना कुछ कहे आगे बढ़ गया।
शायद आज मुझे प्यास से ज़्यादा ठंडे पानी की ज़िद लगी हुई थी।
दूसरे इलाके तक पहुँचने के लिए एक खुला मैदान पार करना पड़ता था। चारों तरफ़ से आती लू ऐसे लग रही थी जैसे कोई अदृश्य हाथ मुझे धधकती भट्टी में धकेल रहा हो।
तभी… मेरी नज़र पड़ी—
नन्हे हाथ, काँपते कदम, और उन हाथों में दो खाली बर्तन।
एक छोटी-सी बच्ची मेरे पास से गुज़री।

मेरे तो पूरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई।

“बेटा इतनी भयानक गर्मी में नंगे पैर कहाँ जा रही हो?” मैने तुनककर पूछा।
वह रुकी नहीं, बस सहज-सी बोली— “पानी भरने… सड़क के उस पार।”
“घर में कोई बड़ा नहीं है?”
“माँ है… बीमार है।”
मैं अनायास ही उसके साथ चल पड़ा।
“तो स्कूल नहीं जाती?”
“जाती हूँ…”
“रोज पानी लाती हो?”
उसने मेरी ओर देखा, मुस्कराई और बोली— “पानी तो रोज चाहिए होता है ना, भैया…”
मेरे दिमाग में सिंक में बहता हुआ पानी कौंध गया।
“गुस्सा नहीं आता?” अब हवा कुछ ठंडी लगने लगी थी।
“किस पर?”
“किस्मत पर… इतनी गर्मी, इतनी दूर…”
वह बोली— “आधा दिन स्कूल में निकल जाता है। फिर माँ का काम, पानी भरना, पढ़ाई, छोटे भाई को देखना…”
मैंने धीमे से पूछा, “फिर?”
उसकी आँखों में चमक थी। वह हँस पड़ी—
“फिर वक्त ही नहीं मिलता…”
“किसके लिए?”
“गुस्सा करने के लिए।”
उसकी हँसी ने मेरे भीतर जमी सारी झुंझलाहट पिघला दी। जो लू मुझे जलाती लग रही थी, वही अब किसी ठंडे हाथ की तरह मुझे सहला रही थी।....... भव्य आत्माओं इस कहानी को साझा करने का उद्देश्य।।।
 यह कहानी ठंडे पानी की नहीं है, यह  बताने की कोशिश भर है कि अगर इंसान थोड़ा-सा संतोष सीख ले, तो हालात कितने भी कठिन हों, जीवन हल्का हो जाता है।
 प्रकृति ने हमें जो दिया है, वह भी बहुतों का सपना है। घर में बुजुर्ग कहा करते थे—“अगर हमेशा अपने से आगे वालों को देखोगे, तो ईर्ष्या मिलेगी। लेकिन अगर अपने से कमजोर को देखोगे, तो कृतज्ञता मिलेगी— और वहीं से सुकून शुरू होता है।”।
 उस दिन मुझे ठंडा पानी नहीं मिला, पर उस बच्ची ने बिना कुछ कहे मुझे यह बात फिर से याद दिला दी कि स्वयं का आत्मविश्वास सही है तो विषम परिस्थिति भी कुछ नहीं बिगाड़ सकती।
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 14 दिसंबर 2025

मन की वक्रता का उपाय

पंचकल्याणक महोत्सव व कहानी 
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  मन की वक्रता का उपाय ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष कृष्ण  ग्यारस , 15 दिसंबर    सोमवार 2025 कलि काल के  अष्टम  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री चद्रप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से चंद्र की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री चंद्रप्रभ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष कृष्ण  ग्यारस , 15 दिसंबर  सोमवार 2025 कलि काल के  23 वें तीर्थंकर  उपसर्ग विजेता श्री पार्श्वनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से केतु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री पार्श्वनाथ  भगवान जी का जन्म व तप  कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28  दिसंबरको है। चतुर्दशी तिथि 03 व 18 दिसंबर  को है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  दिसंबर माह में  04,05,06 व 11 दिसंबर को है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20,26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  24 से 25 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*मन की वक्रता का उपाय*
आज हम स्वयं के मन की वक्रता को सिधा सरल बनाने कि प्रक्रिया को सरल शब्दों में समझते है।इस प्रक्रिया का हम जैसे जैसे निरंतर अभ्यास करते है वैसी हमारे मन की वक्रता समाप्त होना चालू हो जाती है।अब हमारा चौरासी लाख योनियों का भ्रमण कम होना निश्चित है।

*_भक्ति की राह — मन को गूँधने की साधना_* 

आज के सत्संग में गुरुवर ने अत्यन्त सरल शब्दों में बताया कि सच्चे देव शास्त्र गुरु की भक्ति में भजन-सुमिरन की राह कठिन नहीं होती, बस निरन्तरता और सावधानी आवश्यक है। 
उन्होंने कहा— *“जैसे बारिश के बाद रास्ता फिसलन भरा हो तो हम टिके-टिके कदम रखते हैं, वैसे ही आध्यात्मिक मार्ग पर भी मन को संभालकर चलाना पड़ता है। जो संभलकर चलता है, वह गिरता नहीं।”*
इसके बाद उन्होंने एक सुंदर उदाहरण दिया— 
*“जब आटा गूँधना शुरू करते हैं तो वह हाथों और बर्तन में चिपकता है। लेकिन थोड़ी देर में जब वह अच्छी तरह गूँध जाता है, तो न हाथों को चिपकता है और न बर्तन को।”*
मन भी ऐसा ही है— शुरू में इच्छाओं, आदतों और संसारिक बातों में चिपकता है; पर निरंतर सुमिरन से धीरे-धीरे इतना परिपक्व हो जाता है कि संसार की चिपचिपाहट स्वयं ही छूटने लगती है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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एक आश्रम में एक छोटा-सा बाग़ था। वहाँ एक बेल थी जो जैसे-जैसे बढ़ती, पेड़ के तने, बाड़ और पास की झोपड़ी—जिसे भी पाती—उसी से लिपट जाती। हर सुबह माली आता और उसे सीधा करने की कोशिश करता, पर बेल फिर तिरछी होकर किसी न किसी चीज़ से चिपक जाती।

एक दिन एक युवा शिष्य ने माली से पूछा— “तुम इसे बार-बार सीधा क्यों करते हो? यह तो रोज़ फिर उलझ जाती है।”

माली मुस्कुराया और बोला— “बेल को एक ही बार नहीं, रोज़ थोड़ा-थोड़ा सीधा करना पड़ता है। अगर कई दिनों तक छोड़ दूँ, तो यह पूरी झोपड़ी को जकड़ लेगी। लेकिन यदि प्रतिदिन इसे थोड़ा-सा भी दिशा दे दूँ, तो कुछ महीनों में यह बिल्कुल सीधी खड़ी हो जाएगी। शुरू में यह विरोध करेगी, इधर-उधर चिपकेगी, पर धीरे-धीरे अपना स्वभाव सुधार लेगी।”

शिष्य ने आश्चर्य से पूछा— “और यह कब रुकेगी?”

माली ने हँसते हुए कहा— “जब इसकी कोमल डाली कड़ी हो जाएगी—यानी जब यह परिपक्व हो जाएगी। तब इसे किसी सहारे की जरूरत नहीं रहेगी, न यह किसी चीज़ से चिपकेगी। अपने आप सीधी खड़ी रहेगी।”

यह सुनकर शिष्य समझ गया कि मन भी उसी बेल जैसा है— शुरू में कहीं भी चिपक जाता है—लालसा में, क्रोध में, आदतों में, लोगों में। लेकिन यदि रोज़ थोड़ा-सा सुमिरन और साधना से उसे सीधी राह दिखाते रहें, तो एक दिन मन भी परिपक्व हो जाता है— 
न किसी इच्छाओं से चिपकता है, न संसार के सहारों पर टिकता है।

*🌞✅✍️🔔 विशेष:- देव-शास्त्र-गुरु की भक्ति एक दिन की साधना नहीं— यह मन को रोज़-रोज़ गूँधने, सीधा करने और स्थिर करने की प्रक्रिया है। जब मन परिपक्व हो जाता है— मोह हल्का हो जाता है, इच्छाएँ शांत हो जाती हैं, और भीतर एक अद्भुत स्थिरता उतर आती है। संतों ने ठीक ही कहा है— “संसार में रहो, पर संसार को अपने मन में  मत बसने दो।”🪔*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 5 दिसंबर 2025

सत्य आचरण का फल

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सत्य आचरण का अप्रत्याशित फल ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष कृष्ण  दूज , 06 दिसंबर शनिवार 2025 कलि काल के  19 वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री मल्लिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से केतु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मल्लिनाथ  भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28  दिसंबरको है। चतुर्दशी तिथि 03 व 18 दिसंबर  को है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  दिसंबर माह में  04,05,06 व 11 दिसंबर को है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20,26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  24 से 25 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*भव्य आत्माओं आज प्राचीन प्रथमानुयोग शास्त्र  की बातें इस कहानी के माध्यम से आप के सामने प्रस्तुत है।मनुष्य के जीवन में सच्चे दिगंबर संतों और गुरुओं के उपदेश दीपक की तरह होते हैं—जो अंधकार मिटाकर रास्ता दिखाते हैं। परंतु अक्सर हम यह सोचकर उनकी बातों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं कि “यह सब हमारे काम का नहीं।” लेकिन सत्य यह है कि सच्चे साधु-संतों की वाणी इतनी प्रभावशाली होती है कि यदि उसका थोड़ा-सा अंश भी जीवन में उतर जाए, तो भाग्य तक बदल सकता है ।*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 *सत्य आचरण का अप्रत्याशित फल* 

किसी नगर में एक बूढ़ा चोर रहता था। उसका एक सोलह वर्षीय बेटा था। जब चोर बूढ़ा होने लगा, तो उसने बेटे को चोरी की विद्या सिखानी शुरू कर दी। कुछ ही दिनों में लड़के ने चोरी की सब गुर विद्या सीख ली और दोनों आराम से जीवन बिताने लगे।

एक दिन बूढ़े चोर ने बेटे से कहा— “बेटा, हम चोरी के धंधे में है इसलिए साधु-संतों की बात कभी मत सुनना। अगर कहीं कोई महात्मा उपदेश दे रहे हों, तो कान में उंगली देकर तुरंत भाग जाना।” 
लड़के ने भी सिर हिलाकर कहा, “हाँ बापू, समझ गया।”
कुछ दिन बाद लड़के के मन में आया कि क्यों न आज राजा के महल में ही हाथ साफ किया जाए। वह महल की ओर निकल पड़ा। रास्ते में देखा—कुछ लोग एकत्र हैं। उसने पूछा, “इतनी भीड़ क्यों?” उत्तर मिला—“वहाँ एक महात्मा उपदेश दे रहे हैं।”
यह सुनकर लड़के को बाप की बात याद आई। उसने तुरंत अपने कान बंद कर लिए और इधर से निकलने लगा। लेकिन ठोकर लगने से वह गिर पड़ा। उसी पल महात्मा की दो बातें उसके कानों में पड़ गईं—
1. *“कभी झूठ मत बोलो।”* 
2 *. “जिसका नमक खाओ, उसका बुरा मत सोचो।”* 
वह फौरन उठकर कान और कसकर ढकते हुए महल की ओर बढ़ गया।
महल के द्वार पर पहरेदार ने रोककर पूछा— “कौन हो? कहाँ जा रहे हो?” 
उसे महात्मा की पहली बात याद आई। सोचा—आज सच बोलकर देखते हैं। 
वह बोला— “मैं चोर हूँ… चोरी करने आया हूँ।” पहरेदार ने हँसते हुए कहा—“अच्छा जाओ।” सोचा लड़का मजाक कर रहा होगा ।
लड़का अंदर चला गया। कमरे में सोना-चाँदी देखकर उसकी आंखें चमक उठीं। उसने एक थैला भर लिया। फिर वह रसोई में गया—वहाँ तरह-तरह के पकवान देखकर खाने बैठ गया। खाने के बाद जैसे ही वह चोरी का थैला उठाने लगा, दूसरी बात याद आई— *“जिसका नमक खाओ, उसका बुरा मत सोचो।”* 
उसने सोचा—“राजा का खाना खाया, उसमें नमक भी था… अब उसका बुरा कैसे करूँ?” उसने थैला वहीं छोड़ दिया और बाहर चला आया।
पहरेदार ने चकित होकर पूछा— “लो, चोरी क्यों नहीं की?” लड़के ने सादगी से उत्तर दिया— “राजा का नमक खाया है… उनका बुरा नहीं कर सकता। थैला रसोई में ही छोड़ आया हूँ।”
उधर रसोइया शोर मचाता दौड़ता हुआ आया—“अरे पकड़ो! चोर भाग रहा है!” पहरेदार ने लड़के को पकड़कर दरबार में पेश कर दिया।
राजा ने पूछा— “सारी बात सच-सच बताओ।”
लड़के ने पूरी घटना सादगी से बता दी। सत्य सुनकर राजा अत्यंत प्रसन्न हुआ और बोला— “तुम जैसा सच्चा व्यक्ति चोर नहीं, मेरा विश्वासपात्र हो सकता है।” राजा ने उसे तुरंत नौकरी दे दी।
चार दिन तक घर न लौटने पर बाप को चिंता हुई। जब लड़का अच्छे कपड़ों में घर लौटा, तो बाप हैरान रह गया। लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा—
“बापू, आप कहते थे संतों की बात मत सुनना… पर मैंने एक महात्मा की दो बातें सुन लीं और उसी पर चल पड़ा—देखिए, आज सच्चाई ने मुझे चोर से राजमहल का कर्मचारी बना दिया।”
तभी बूढ़े चोर को भी एहसास हुआ कि जिस ज्ञान को वह व्यर्थ समझता था, वही उसके बेटे की किस्मत बदलने वाला सिद्ध हुआ।
लड़के ने सिर झुकाकर कहा— “सोचिए बापू… अगर सिर्फ दो वचन ने मेरी राह बदल दी, तो यदि हम संतों और गुरुवरों की सारी शिक्षाएँ मान लें—तो जीवन कितना उज्ज्वल और सफल हो सकता है!”
यह सुनकर बूढ़ा चोर मौन हो गया। उसे जीवन में पहली बार लगा कि सच्चा धन चोरी नहीं, बल्कि सच्चे दिगंबर संतों की वाणी  हैं—जो मनुष्य के भाग्य को पलटने की शक्ति रखते हैं।
अतः उस बूढ़े चोर ने अंतर्मन से पश्चाताप किया और  राजमहल जाकर राजा के सामने अपनी सभी गलतियां स्वीकार कर ली।राजा ने अपने कर्मचारियों के निरीक्षण में उसे गौशाला में उसके योग्य कार्य पर उसे रख दिया।वह गौशाला में पशुओं की सेवा करते हुए जीवन धन्य करने लगा।

 *👨‍👨‍👦‍👦⏰🌞🔔✍️विशेष :- भव्य आत्माओं, सच्चे दिगंबर संतों की वाणी में वह शक्ति होती है, जो पत्थर दिल को भी मोम बना दे। यदि उनके उपदेशों का थोड़ा-सा भी पालन कर लिया जाए, तो जीवन की दिशा बदल सकती है, और सफलता स्वयं कदम चूम लेती है। अतः आप सभी सच्चे देव शास्त्र गुरु के बताए षट् आवश्यक कर्म प्रतिदिन करोगे तो एक समय ऐसा आयेगा कि स्वयं सिद्ध हो जाओगे।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

मंगलवार, 2 दिसंबर 2025

आज की हमारी विचारधारा

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 आज की हमारी विचारधारा ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 मार्गशीर्ष शुक्ल 14 , 03 दिसंबर बुधवार 2025 कलि काल के  18 वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री अरनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अरनाथ  भगवान जी का जन्म  कल्याणक महोत्सव है।*
*🔑 मार्गशीर्ष पूर्णिमा , 04 दिसंबर गुरुवार 2025 कलि काल के  तृतीय तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री संभवनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री संभवनाथ भगवान जी का  तप कल्याणक महोत्सव है।*

  < *🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28  दिसंबरको है। चतुर्दशी तिथि 03 व 18 दिसंबर  को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  दिसंबर माह में  04,05,06   दिसंबर को है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20,26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक 1व 24 से 25 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

👨‍👨‍👦‍👦आज की हमारी विचारधारा 🔔 

आइए आज हम इस कहानी के माध्यम से समझते हैं कि होता कुछ है और दिखाई कुछ और ही देता है। क्या यह विचारधारा हमारे लिए ठीक है?

*“धक्का” —* 
 *एक अनदेखा आईना* 

किसी व्यक्ति का असली स्वरूप तब सामने आता है, जब वह कठिन परिस्थितियों से गुजरता है। वह अपनी गलती को स्वीकार करता है या दूसरों को दोष देता है — यही उसके चरित्र का आईना होता है।
आप कितनी महंगी कार में चलते हैं, किस ब्रांड के कपड़े पहनते हैं या आपके पास कितनी आलीशान नौकरी और घर है — ये सब बाहरी दिखावे हैं। असली पहचान तो यह है कि आप दूसरों से कैसा व्यवहार करते हैं। सफलता, संबंध, सम्मान — सबकुछ इसी एक गुण से जुड़ा है: *व्यवहार* ।
कल्पना कीजिए, आप एक सुंदर, मजबूत और चमकदार थैला लिए सड़क पर चल रहे हैं। थैला बाहर से शानदार दिखता है, पर भीतर क्या है, यह कोई नहीं जानता।
तभी अचानक पीछे से कोई आपको धक्का देता है। आप लड़खड़ाते हैं, और थैला ज़मीन पर गिरकर खुल जाता है। उसके भीतर की हर चीज़ बाहर आ जाती है।
अब राह चलते लोग क्या देखेंगे?
- अगर थैले में किताबें थीं, तो उनके पन्ने उड़ने लगेंगे।
- अगर काँच था, तो वह टूटकर चुभेगा।
- अगर फूल थे, तो सुगंध फैल जाएगी।
- और अगर गंदगी थी, तो बदबू दूर तक जाएगी।
ध्यान दीजिए — लोगों को यह याद नहीं रहेगा कि धक्का किसने दिया, क्यों दिया। वे सिर्फ यही याद रखेंगे कि 
 *थैले से क्या निकला।* 
अब सोचिए — वो थैला *आप* हैं।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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जब जीवन आपको अचानक धक्का देता है — 
कोई धोखा, कोई असफलता, अपमान, दुख, या कोई मुश्किल घड़ी —
तब आपके भीतर जो है, वही बाहर आता है।
आप बाहर से चाहे जितने भी सभ्य, शिक्षित, या आकर्षक दिखें — धक्के के बाद आप क्या प्रतिक्रिया देते हैं, यही असली आप हैं।
• कोई क्रोध में फट पड़ता है।
• कोई चुपचाप रोता है।
• कोई दूसरों को दोष देता है।
• और कोई मुस्कुराकर सब सह लेता है।
जैसे संतरे को निचोड़ने पर सिर्फ संतरे का रस ही निकलेगा — सेब का नहीं। क्योंकि जो भीतर है, वही बाहर आता है।

एक वृद्ध संत के पास एक व्यक्ति आया और बोला, "गुरुजी, जब लोग मुझे अपमानित करते हैं, मैं आपा खो देता हूँ। मैं क्रोधित हो जाता हूँ।"
संत मुस्कराए और पास रखे एक प्याले से गरम चाय उठाकर उस पर छलक दी।
व्यक्ति चौंका, "यह क्या किया आपने? मेरे कपड़े गीले हो गए!"
संत बोले, "देखा? इस प्याले में चाय थी, तो वही बाहर आई। अगर इसमें पानी होता, तो वह निकलता।"
"जब तुम्हें धक्का लगता है और तुम क्रोधित होते हो, तो वह क्रोध तुम्हारे भीतर का ही हिस्सा है — बस जीवन ने उसे बाहर ला दिया।"
इसलिए, अपना परीक्षण कीजिये और अपने भीतर को रोज़ भरिए —
• अच्छे विचारों से
• करुणा से
• क्षमा और सहनशीलता से
• आत्मबल और सकारात्मकता से।
क्योंकि धक्के तो जीवन का हिस्सा हैं, पर उनसे निपटने की तैयारी — वो तो हमारे हाथ में है।
*🌞👨‍👨‍👦‍👦⏰🐎✍️विशेष:-भव्य आत्माओं,अंततः याद रखिए: जब जीवन आपको झकझोरता है, तब वही बिखरेगा जो आपके भीतर है। और वही बनती है आपकी असली पहचान। इसलिए अपने भीतर सज्जनता, विनम्रता, प्रेम और सच्चाई संजोइए — यही धक्का लगने पर बाहर आएगा, और यही लोग हमेशा याद रखेंगे।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 30 नवंबर 2025

हमारे विचारों का सोमवार

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 हमारे विचारों का सोमवार ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 मार्गशीर्ष शुक्ल 11 , 01 दिसंबर सोमवार 2025 कलि काल के  19 वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री मल्लिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से केतू की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  मल्लिनाथ  भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔑 मार्गशीर्ष शुक्ल 11 , 01 दिसंबर सोमवार 2025 कलि काल के  21 वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री नमिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से राहू की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री नमिनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 व 30 तारीख को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28  दिसंबरको है। चतुर्दशी तिथि 03 व 18 दिसंबर  को है।*

*🔔🐎अष्टान्हिका महापर्व 29 अक्टूबर से 05 नवंबर को है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  दिसंबर माह में  04,05,06   दिसंबर को है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20,26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक 1 व 24 से 25 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

आइए आज समझते है हमारे विचारों का सोमवार हमें क्यों परेशान करता है इसका हल हम स्वयं ही है। बाहर ढूंढ रहे है इसका मुख्य कारण हमारे विचारो में मलिनता है।

 *सोमवार की नई शुरुआत* 

किसी भी दिन की शुरुआत कैसी होगी—यह दिन नहीं, हमारी सोच तय करती है। सप्ताहांत की ढीली दिनचर्या के बाद सोमवार को अक्सर भारी माना जाता है, लेकिन सच यह है कि सोमवार का बोझ बाहर से नहीं, भीतर से आता है। जैसा कहा गया है—

 *“दृष्टिकोण बदलो, दृश्य स्वयं बदल जाएंगे।”* 

यदि मन हल्का हो और सोच सकारात्मक—तो वही सोमवार थकान नहीं, एक नई ऊर्जा का द्वार बन सकता है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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रवि हर रविवार की रात एक ही बात सोचता—“काश सोमवार कभी आए ही न!” उसके लिए सोमवार का मतलब था—दफ़्तर की फ़ाइलें, बॉस की डांट और ट्रैफ़िक का तनाव। उसे लगता था कि यह दिन उसकी खुशियों का सबसे बड़ा दुश्मन है।

एक सोमवार को भी वही हुआ। सुस्ती से उठते रवि को उसकी माँ ने मुस्कुराकर पूछा, “क्या हुआ बेटा? फिर सोमवार का डर?”

रवि बोला, “माँ, यह दिन मनहूस है। कुछ अच्छा होता ही नहीं।”
माँ ने शांत स्वर में कहा, “दिन कभी मनहूस नहीं होता, बेटा। मन मनहूस हो तो सब कुछ वैसा लगता है। सोच बदलकर देख—सोमवार भी नई शुरुआत बन सकता है।”

माँ के शब्दों ने रवि को छू लिया। उसने निश्चय किया कि आज वह अपनी सोच को ही बदलकर देखेगा।

ऑफिस पहुँचा तो सबके चेहरों पर वही सोमवार वाली थकान थी। रवि ने सभी से मुस्कुराकर कहा, “गुड मॉर्निंग दोस्तों! चलिए हफ्ते की अच्छी शुरुआत करते हैं।”

उसकी मुस्कान और ऊर्जा धीरे-धीरे पूरे माहौल में फैल गई। उसने अधूरे प्रोजेक्ट में समाधान ढूँढने शुरू किए, शिकायतें नहीं।

बॉस, जो अक्सर नाराज़ रहते थे, पहली बार बोले—
“रवि, आज तुम्हारा रवैया देखकर बहुत अच्छा लगा। यही एटीट्यूड चाहिए टीम में।”

शाम को घर पहुँच कर रवि बोला, “माँ, आज पहली बार सोमवार अच्छा लगा। मैं समझ गया—दिन बुरा नहीं था, मेरी सोच गलत थी।”
माँ ने कहा, 
 *“यही जीवन का रहस्य है बेटा—सोच सही हो तो हर दिन अवसर बन जाता है।”* 

धीरे-धीरे रवि सोमवार से डरने वाला आदमी नहीं, सोमवार को प्रेरणा बनाने वाला व्यक्ति बन गया। वह सबको कहने लगा—
“जो सोमवार से डरता है, वह मेहनत से डरता है; जो उसे मुस्कुराकर अपनाता है, सफलता उसी की राह देखती है।”
*🔔👨‍👨‍👦‍👦⏰✅विशेष:- सोमवार कभी बुरा नहीं होता—बुरा होता है हमारा रवैया। हर सुबह एक नया मौका है खुद को बेहतर, मजबूत और सफल बनाने का। अगली बार जब सोमवार आए, तो उसे मुस्कुराकर स्वीकार कीजिए—क्योंकि वही दिन आपकी जीत की शुरुआत बन सकता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

शनिवार, 29 नवंबर 2025

अनावश्यक खर्च

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 अनावश्यक खर्च ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 मार्गशीर्ष शुक्ल 10 , 30 नवंबर रविवार 2025 कलि काल के  18 वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री अरनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  अरनाथ  भगवान जी का  तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 व 30 तारीख को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28  दिसंबरको है। चतुर्दशी तिथि 03 व 18 दिसंबर  को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  दिसंबर माह में  04,05,06   दिसंबर को है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20,26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक 1व 24 से 25 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*अनावश्यक खर्च — एक सीख* 

जीवन में समझदारी केवल कमाने से नहीं, बल्कि खर्च करने से भी दिखाई देती है। आज के समय में लोग अक्सर दूसरों की देखा-देखी अपनी क्षमता से ऊपर खर्च कर देते हैं। मॉल में या सोशल साइट्स पर मिलने वाले बड़े-बड़े डिस्काउंट देखकर कई बार ऐसी वस्तुएँ भी खरीद लेते हैं जिनकी उन्हें कोई जरूरत नहीं होती। नतीजा यह होता है कि उनका बजट बिगड़ जाता है और बाद में पछताना पड़ता है। जबकि सच्ची बुद्धिमानी उसी में है कि व्यक्ति अपनी जरूरत, परिस्थिति और सामर्थ्य के अनुसार खर्च करे। यही बात इस कहानी में सुंदर ढंग से झलकती है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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गांव में एक बैल व्यापारी कई बैल लेकर बेचने के लिए आया। उसने बैलों के जो दाम रखे थे, वे इतने सस्ते थे कि गांव के लगभग हर किसान ने एक-एक बैल खरीद लिया। लेकिन धरमू ने एक भी बैल नहीं खरीदा। सबने सोचा कि धरमू शायद कंजूस है या उसके पास समझ नहीं।

कुछ महीने बाद, उसी गांव में एक और व्यापारी आया। इस बार बैल मजबूत, स्वस्थ और पहले वाले से कहीं बेहतर थे, किंतु कीमत भी पहले से ज्यादा थी। अब गांव के किसी व्यक्ति ने बैल नहीं खरीदा, लेकिन धरमू ने बिना झिझक एक बैल खरीद लिया।

यह देखकर गांव वाले हैरान रह गए। उन्होंने धरमू से पूछा, “जब पहले व्यापारी ने इतने सस्ते बैल दिए थे, तब तो तुमने नहीं खरीदा, और अब बढ़ी कीमत देकर खरीद लिया? इसमें तो नुकसान है!”

धरमू मुस्कुराया और बोला, “नुकसान नहीं, लाभ हुआ है । दोस्तों, जब पहले व्यापारी आया था, तब मेरे पास पैसे भी नहीं थे और बैलों की आवश्यकता भी नहीं थी। इसलिए उस वक्त मेरे लिए सस्ता भी महंगा था। लेकिन अब मेरे पास बैल खरीदने के लिये पर्याप्त पैसे हैं और आवश्यकता भी बन गई है, इसलिए यह ज्यादा कीमत वाला बैल भी मेरे लिए सस्ता है।”

वह थोड़ी देर रुका और फिर समझाते हुए बोला, 

 *“समय और परिस्थिति के अनुसार खर्च करना ही बुद्धिमानी है। जब पैसे कम हों, तो बचाना ही कमाई होती है। जो लोग दूसरों से उधार लेकर अनावश्यक चीज़ें खरीदते हैं, वे बाद में ब्याज समेत उसकी कीमत कई गुना चुका देते हैं। इसलिए खर्च हमेशा अपनी क्षमता देखकर ही करना चाहिए।”*
*🔔नोट:- वर्तमान में आपमें से  कुछ व्यक्ति विशेष धनराशि देकर विशेषज्ञ से आनलाइन सिखते है। उसमें अनावश्यक प्रश्न करके स्वयं के साथ दुसरो का भी समय व्यर्थ में व्यतित करते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए।*
धरमू की बात सुनकर सभी गांववाले सोच में पड़ गए। उन्हें एहसास हुआ कि *सस्ता या महंगा वस्तु में नहीं, बल्कि हमारी स्थिति और जरूरत की समझ में छिपा होता है।*

*⏰🌞🐎✅विशेष : भव्य आत्माओं,फिजूल खर्च करने से बेहतर है समझदारी से खर्च करना। आज के दौर में दिखावे या डिस्काउंट के झांसे में आकर अपनी क्षमता से अधिक खर्च करना मूर्खता है। असली अमीरी धन की नहीं, बल्कि सोच की होती है — जो अपनी जरूरत, समय और परिस्थिति को समझकर निर्णय लेता है, वही सच्चा बुद्धिमान है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 20 नवंबर 2025

हमारी दोहरी विचारधारा

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 हमारी दोहरी विचारधारा ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 मार्गशीर्ष शुक्ल एकम , 21 नवंबर शुक्रवार 2025 कलि काल के  9वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री सुविधिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से शुक्र की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  सुविधिनाथ  भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*

*🔔 नवंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 02,05,14, 21 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस नवंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28 नवंबर को है। चतुर्दशी तिथि 04 व 18 नवंबर को है।*

*🔔🐎अष्टान्हिका महापर्व 29 अक्टूबर से 05 नवंबर को है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  नवंबर माह में    1,2, 3,8, 12 ,15,16,22,23 व 25 नवंबर को है। 🔔 वाहन खरीद मुहूर्त 3,7,9,10,17,20,21,26,28 व 30🏠 प्रापर्टी मुहूर्त 1,9,10,14,19,20,21 व 30 गृह प्रवेश मुहूर्त 03,07,14,15,17,20 व 21 नवंबर को है।।*
*🐎✍️ पंचक 1,2,3,4 व 27,28,29,30 नवंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

हमारी दोहरी विचारधारा 


 *विपरीत परिस्थिति निर्माण — जब विश्वास की परीक्षा होती है* 

जीवन में हर व्यक्ति कभी न कभी ऐसी परिस्थितियों से गुजरता है, जहाँ सही और गलत, आस्था और तर्क, धर्म और व्यवहार — सब एक-दूसरे से टकराने लगते हैं। यही टकराव “विपरीत परिस्थिति” का निर्माण करता है। ऐसे समय में यह स्पष्ट होता है कि हम वास्तव में किस पर विश्वास करते हैं। — 
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 *ईश्वर पर,* 
 *भाग्य पर* 
 *या केवल अपने शब्दों पर।* 
इसी सच्चाई को उजागर करती है — साल 2007 की टेक्सास (अमेरिका) की यह रोचक घटना।
 *एक अजीब मुकदमे की कहानी* 
अमेरिका के छोटे से गाँव माउंट वर्नन (Mt. Vernon) में एक व्यवसायी ने यह निश्चय किया कि वह बैपटिस्ट चर्च के ठीक बगल में एक शराबखाना (liquor shop) खोलेगा। यह बात चर्च के अनुयायियों को बेहद खटक गई। उन्होंने पहले नगर प्रशासन से शिकायत की, और जब वहाँ से कोई परिणाम नहीं मिला, तो हर रात चर्च में बैठकर उस शराबखाने के विरुद्ध प्रार्थनाएँ करने लगे।
फिर भी शराबखाने का निर्माण जारी रहा। समय बीतता गया, और जब इमारत लगभग तैयार हो गई — तभी एक रात बिजली का प्रचंड झटका गिरा, जिसने शराबखाने की पूरी इमारत को राख कर दिया।
विश्वास और तर्क का टकराव
चर्च के लोगों ने इसे “ईश्वर की कृपा” बताते हुए खुशी से कहा —
 *“प्रभु ने हमारी प्रार्थना सुन ली!”* 
परंतु यहीं से परिस्थितियों का मोड़ शुरू हुआ। शराबखाना मालिक ने चर्च और उसके लोगों पर दो मिलियन डॉलर (20 लाख डॉलर) का मुकदमा ठोक दिया, कहते हुए कि उनकी प्रार्थनाओं ने ही उसका व्यवसाय नष्ट किया है।
मामला अदालत पहुँचा। चर्च ने इस आरोप से पूरी तरह इनकार किया। उन्होंने प्रमाण में वैज्ञानिक अध्ययन प्रस्तुत किए — हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के डॉ. हर्बर्ट बेंसन की रिपोर्ट, जिसमें कहा गया था कि *प्रार्थनाओं का भौतिक घटनाओं पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं होता।* 
 *शराबखाने के मालिक का तर्क —* “चर्च की प्रार्थनाओं की वजह से ही यह बिजली गिरी।”
यही वह क्षण था जब विश्वास और तर्क आमने-सामने खड़े हो गए।
 *मनुष्य की दोहरी प्रवृत्ति* 
यह एक आम मानवीय प्रवृत्ति है कि लोग ईश्वर पर विश्वास तो करते हैं, लेकिन अपने लाभ और हानि के अनुसार तार्किक और व्यावहारिक विश्लेषण करने लगते हैं। क्योंकि विश्वास और तर्क, दोनों ही जीवन के अलग-अलग पहलुओं को संबोधित करते हैं। विश्वास हमें आंतरिक शक्ति और आध्यात्मिक सहारा देता है, जबकि तर्क हमें निर्णय लेने और समस्याओं का व्यावहारिक समाधान खोजने में मदद करता है।
मगर जब यही दोनों पक्ष विपरीत दिशा में खिंचने लगते हैं, तो मनुष्य भ्रमित हो जाता है — ठीक वैसे ही जैसे इस कहानी में हुआ।
 *न्यायाधीश का व्यंग्यपूर्ण निष्कर्ष* 
जब दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बातें रखीं, तो न्यायाधीश मुस्कराकर बोले —
“यह बहुत ही विचित्र मामला है! हमारे पास एक शराबखाना मालिक है, जिसे कभी प्रार्थना पर विश्वास नहीं था अब प्रार्थना की शक्ति पर पूरा विश्वास है, और एक पूरा चर्च समुदाय है, जिसे अपनी ही प्रार्थनाओं की शक्ति पर अब कोई विश्वास नहीं!”
 यह घटना हमें यह सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियाँ केवल कठिनाई नहीं लातीं, बल्कि हमारे भीतर छिपे विरोधाभासों को उजागर करती हैं। हम क्या कहते हैं और वास्तव में क्या मानते हैं — यह फर्क तभी सामने आता है, जब हालात हमारे विरुद्ध होते हैं।
चर्च के लोगों ने जो प्रार्थना की थी, वही जब फलित प्रतीत हुई, तो उन्होंने तर्क का सहारा लेकर उस परिणाम से मुंह मोड़ लिया। जबकि शराबखाना मालिक, जो स्वयं धार्मिक नहीं था, उसने उन प्रार्थनाओं की शक्ति को स्वीकार कर लिया।
यही “विपरीत परिस्थिति” का असली संदेश है — वह हमें हमारी आस्था की गहराई और तर्क की सीमा दोनों से परिचित कराती है।

 *🌞✅🎪🐎विशेष:-भव्य आत्माओं, विश्वास तब सच्चा होता है जब वह सुविधा से नहीं, सत्य से जुड़ा हो। विपरीत परिस्थितियाँ हमें गिराने नहीं आतीं, बल्कि यह दिखाने आती हैं कि हम किस आधार पर खड़े हैं — आस्था पर या तर्क पर। और जो व्यक्ति दोनों में संतुलन बना लेता है, वही जीवन में स्थिर और शांत रहता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 13 नवंबर 2025

भगवान जी का बहीखाता

*⛳ सिद्धम नमः ⛳*
*ॐ वसुनंदी गुरुवे नमः ॐ* 
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 भगवान जी का बहीखाता ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष 10 , शुक्रवार 14 नवंबर  2025 कलि काल के  शासन नायक उपसर्ग विजेता अंतिम तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री वर्धमान स्वामी जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री वर्धमान  स्वामी जी का तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 नवंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 02,05,14, 21 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस नवंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28 नवंबर को है। चतुर्दशी तिथि 04 व 18 नवंबर को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  नवंबर माह में    1,2, 3,8, 12 ,15,16,22,23 व 25 नवंबर को है। 🔔 वाहन खरीद मुहूर्त 3,7,9,10,17,20,21,26,28 व 30🏠 प्रापर्टी मुहूर्त 1,9,10,14,19,20,21 व 30 गृह प्रवेश मुहूर्त 03,07,14,15,17,20 व 21 नवंबर को है।।*
*🐎✍️ पंचक  27,28,29,30 नवंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

भगवान जी का बहीखाता 

कहने में आता है भगवान सबका हिसाब रखते है !
जैनदर्शन के अनुसार जैसा बीज बोएगें वैसा फल प्राप्त होता है।
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अस्पताल में एक पेशेंट का केस आया। मरीज बेहद सीरियस था। 
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अस्पताल के मालिक डॉक्टर ने तत्काल खुद जाकर आईसीयू में केस की जांच की। 
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दो-तीन घंटे के आपरेशन के बाद डॉक्टर बाहर आया और अपने स्टाफ को कहा कि इस व्यक्ति को किसी प्रकार की कमी या तकलीफ ना हो और उससे इलाज व दवा के पैसे न लेने के लिए भी कहा।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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मरीज तकरीबन 15 दिन तक मरीज अस्पताल में रहा। जब बिल्कुल ठीक हो गया और उसको डिस्चार्ज करने का दिन आया... 
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उस मरीज का तकरीबन तीन लाख रुपये का बिल अस्पताल के मालिक और डॉक्टर की टेबल पर आया। 
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डॉक्टर ने अपने अकाउंट मैनेजर को बुला करके कहा … इस व्यक्ति से एक पैसा भी नहीं लेना है। 
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ऐसा करो तुम उस मरीज को लेकर मेरे चेंबर में आओ। मरीज व्हीलचेयर पर चेंबर में लाया गया।
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डॉक्टर ने मरीज से पूछा, भाई ! मुझे पहचानते हो?
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मरीज ने कहा, लगता तो है कि मैंने आपको कहीं देखा है। 
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डॉक्टर ने कहा, याद करो, अंदाजन दो साल पहले सूर्यास्त के समय शहर से दूर उस जंगल में तुमने एक गाड़ी ठीक की थी। 
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उस रोज मैं परिवार सहित पिकनिक मनाकर लौट रहा था कि अचानक कार में से धुआं निकलने लगा और गाड़ी बंद हो गई। 
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कार एक तरफ खड़ी कर हम लोगों ने चालू करने की कोशिश की, परंतु कार चालू नहीं हुई।
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अंधेरा थोड़ा-थोड़ा घिरने लगा था। चारों और घना जंगल और सुनसान था। परिवार के हर सदस्य के चेहरे पर चिंता और भय की लकीरें दिखने लगी थी और सब भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि कोई मदद मिल जाए। 
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थोड़ी ही देर में चमत्कार हुआ। बाइक के ऊपर आप आते दिखाई पड़े । हम सब ने दया की नजर से हाथ ऊंचा करके तुमको रुकने का इशारा किया।
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आपने बाईक खड़ी कर के हमारी परेशानी का कारण पूछा। आपने कार का बोनट खोलकर चेक किया और कुछ ही क्षणों में कार चालू कर दी। 
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हम सबके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। हमको ऐसा लगा कि जैसे भगवान ने आपको फरिश्ता बनाकर हमारे पास  भेजा है क्योंकि उस सुनसान जंगल में रात गुजारने के ख्याल मात्र से ही हमारे रोगंटे खड़े हो रहे थे। 
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आपने मुझे बताया था कि तुम एक गैराज चलाते हो। मैंने तुम्हारा आभार जताते हुए कहा था कि रुपए पास होते हुए भी ऐसी मुश्किल समय में मदद नहीं मिलती।
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आपने ऐसे कठिन समय में हमारी मदद की, इस मदद की कोई कीमत नहीं है, यह अमूल्य है।
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परंतु फिर भी मैं पूछना चाहता हूँ कि आपको कितने पैसे दूं ? 
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उस समय आपने मेरे आगे हाथ जोड़कर जो शब्द कहे थे, वह शब्द मेरे जीवन की प्रेरणा बन गये हैं।
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आपने कहा था कि मेरा नियम और सिद्धांत है कि मैं मुश्किल में पड़े व्यक्ति की मदद के बदले कभी कुछ नहीं लेता। 
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मेरी इस मजदूरी का हिसाब भगवान् रखते हैं।
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उसी दिन मैंने सोचा कि जब एक सामान्य आय का व्यक्ति इस प्रकार के उच्च विचार रख सकता है, और उनका संकल्प पूर्वक पालन कर सकता है, तो मैं क्यों नहीं कर सकता। 
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और मैंने भी अपने जीवन में यही संकल्प ले लिया है। 
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दो साल हो गए है, मुझे कभी कोई कमी नहीं पड़ी, अपेक्षा पहले से भी अधिक मिल रहा है। 
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यह अस्पताल मेरा है। आप यहां मेरे मेहमान हो और आपके ही बताए हुए नियम के अनुसार मैं आपसे कुछ भी नहीं ले सकता।
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ये तो भगवान् की कृपा है कि उसने मुझे ऐसी प्रेरणा देने वाले फ़रिश्ते की सेवा करने का मौका मुझे दिया। 
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ऊपर वाले ने आपकी मजदूरी का हिसाब रखा और वो हिसाब आज उसने चुका दिया। 
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मेरी मजदूरी का हिसाब भी ऊपर वाला रखेगा और कभी जब मुझे जरूरत होगी, वो जरूर चुका देगा। 
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डॉक्टर ने मरीज से कहा, तुम आराम से घर जाओ, और कभी भी कोई तकलीफ हो तो बिना संकोच के मेरे पास आ सकते हो।
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मरीज ने जाते हुए चेंबर में रखी भगवान् महावीर स्वामी की तस्वीर के सामने हाथ जोड़कर कहा कि हे प्रभु ! आपने आज मेरे कर्म का पूरा हिसाब ब्याज समेत चुका दिया। 
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*👨‍👨‍👦‍👦🌞🐎💯विशेष:-भव्य आत्माओं, सदैव याद रखें कि आपके द्वारा किये गए कर्म आपके पास लौट कर आते है। और वो भी ब्याज समेत।*
.*वर्तमान में हुण्डावणी कालचक्र में पंचम काल चल रहा है। जितना हो सकता है स्वयं की बुद्धि विवेक पूर्वक लोगों की मदद करें। आपका हिसाब ब्याज समेत आपके खाते में जमा होगा  जिसे विश्व की कोई भी शक्ति ना चुरा सकती है और ना ही खर्च कर सकती है।उस जमा-पूंजी के आप स्वयं हिस्सेदार हो आप चाहें तो उससे चक्रवर्ती पद के भी उत्तराधिकारी बन सकते हो।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 4 नवंबर 2025

विचारों के दो मतलब

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 विचारों के दो मतलब ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 कार्तिक पूर्णिमा , 5 नवंबर बुधवार 2025 कलि काल के  तिसरे तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री संभवनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री संभवनाथ   भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 नवंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 02,05,14, 21 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस नवंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28 नवंबर को है। चतुर्दशी तिथि 04 व 18 नवंबर को है।*
*🔔🐎अष्टान्हिका महापर्व 29 अक्टूबर से 05 नवंबर को है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  नवंबर माह में    1,2, 3,8, 12 ,15,16,22,23 व 25 नवंबर को है। 🔔 वाहन खरीद मुहूर्त 3,7,9,10,17,20,21,26,28 व 30🏠 प्रापर्टी मुहूर्त 1,9,10,14,19,20,21 व 30 गृह प्रवेश मुहूर्त 03,07,14,15,17,20 व 21 नवंबर को है।।*
*🐎✍️ पंचक 1,2,3,4 व 27,28,29,30 नवंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

विचारों के दो मतलब

एक सिक्के के दो पहलू यह तो आप सभी ने सुना ही होगा किन्तु आज आपको मतलब के दो विचारों की सच्ची घटनाओं से कुछ समझ में आ जाएं तो हम सभी का जीवन धन्य हो जाएगा।

 *विपरीत परिस्थिति निर्माण — जब विश्वास की परीक्षा होती है* 

जीवन में हर व्यक्ति कभी न कभी ऐसी परिस्थितियों से गुजरता है, जहाँ सही और गलत, आस्था और तर्क, धर्म और व्यवहार — सब एक-दूसरे से टकराने लगते हैं। यही टकराव “विपरीत परिस्थिति” का निर्माण करता है। ऐसे समय में यह स्पष्ट होता है कि हम वास्तव में किस पर विश्वास करते हैं — 
 *ईश्वर पर,* 
 *भाग्य पर* 
 *या केवल अपने शब्दों पर।* 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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इसी सच्चाई को उजागर करती है — साल 2007 की टेक्सास (अमेरिका) की यह रोचक घटना।
 *एक अजीब मुकदमे की कहानी* 
अमेरिका के छोटे से गाँव माउंट वर्नन (Mt. Vernon) में एक व्यवसायी ने यह निश्चय किया कि वह बैपटिस्ट चर्च के ठीक बगल में एक शराबखाना (liquor shop) खोलेगा। यह बात चर्च के अनुयायियों को बेहद खटक गई। उन्होंने पहले नगर प्रशासन से शिकायत की, और जब वहाँ से कोई परिणाम नहीं मिला, तो हर रात चर्च में बैठकर उस शराबखाने के विरुद्ध प्रार्थनाएँ करने लगे।
फिर भी शराबखाने का निर्माण जारी रहा। समय बीतता गया, और जब इमारत लगभग तैयार हो गई — तभी एक रात बिजली का प्रचंड झटका गिरा, जिसने शराबखाने की पूरी इमारत को राख कर दिया।
विश्वास और तर्क का टकराव
चर्च के लोगों ने इसे “ईश्वर की कृपा” बताते हुए खुशी से कहा —
 *“प्रभु ने हमारी प्रार्थना सुन ली!”* 
परंतु यहीं से परिस्थितियों का मोड़ शुरू हुआ। शराबखाना मालिक ने चर्च और उसके लोगों पर दो मिलियन डॉलर (20 लाख डॉलर) का मुकदमा ठोक दिया, कहते हुए कि उनकी प्रार्थनाओं ने ही उसका व्यवसाय नष्ट किया है।
मामला अदालत पहुँचा। चर्च ने इस आरोप से पूरी तरह इनकार किया। उन्होंने प्रमाण में वैज्ञानिक अध्ययन प्रस्तुत किए — हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के डॉ. हर्बर्ट बेंसन की रिपोर्ट, जिसमें कहा गया था कि *प्रार्थनाओं का भौतिक घटनाओं पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं होता।* 
 *शराबखाने के मालिक का तर्क —* “चर्च की प्रार्थनाओं की वजह से ही यह बिजली गिरी।”
यही वह क्षण था जब विश्वास और तर्क आमने-सामने खड़े हो गए।
 *मनुष्य की दोहरी प्रवृत्ति* 
यह एक आम मानवीय प्रवृत्ति है कि लोग ईश्वर पर विश्वास तो करते हैं, लेकिन अपने लाभ और हानि के अनुसार तार्किक और व्यावहारिक विश्लेषण करने लगते हैं। क्योंकि विश्वास और तर्क, दोनों ही जीवन के अलग-अलग पहलुओं को संबोधित करते हैं। विश्वास हमें आंतरिक शक्ति और आध्यात्मिक सहारा देता है, जबकि तर्क हमें निर्णय लेने और समस्याओं का व्यावहारिक समाधान खोजने में मदद करता है।
मगर जब यही दोनों पक्ष विपरीत दिशा में खिंचने लगते हैं, तो मनुष्य भ्रमित हो जाता है — ठीक वैसे ही जैसे इस कहानी में हुआ।
 *न्यायाधीश का व्यंग्यपूर्ण निष्कर्ष* 
जब दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बातें रखीं, तो न्यायाधीश मुस्कराकर बोले —
“यह बहुत ही विचित्र मामला है! हमारे पास एक शराबखाना मालिक है, जिसे कभी प्रार्थना पर विश्वास नहीं था अब प्रार्थना की शक्ति पर पूरा विश्वास है, और एक पूरा चर्च समुदाय है, जिसे अपनी ही प्रार्थनाओं की शक्ति पर अब कोई विश्वास नहीं!”
 यह घटना हमें यह सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियाँ केवल कठिनाई नहीं लातीं, बल्कि हमारे भीतर छिपे विरोधाभासों को उजागर करती हैं। हम क्या कहते हैं और वास्तव में क्या मानते हैं — यह फर्क तभी सामने आता है, जब हालात हमारे विरुद्ध होते हैं।
चर्च के लोगों ने जो प्रार्थना की थी, वही जब फलित प्रतीत हुई, तो उन्होंने तर्क का सहारा लेकर उस परिणाम से मुंह मोड़ लिया। जबकि शराबखाना मालिक, जो स्वयं धार्मिक नहीं था, उसने उन प्रार्थनाओं की शक्ति को स्वीकार कर लिया।
यही “विपरीत परिस्थिति” का असली संदेश है — वह हमें हमारी आस्था की गहराई और तर्क की सीमा दोनों से परिचित कराती है।..
🌸 *विशेष : - भव्य आत्माओं,विश्वास तब सच्चा होता है जब वह सुविधा से नहीं, सत्य से जुड़ा हो। विपरीत परिस्थितियाँ हमें गिराने नहीं आतीं, बल्कि यह दिखाने आती हैं कि हम किस आधार पर खड़े हैं — आस्था पर या तर्क पर। और जो व्यक्ति दोनों में संतुलन बना लेता है, वही जीवन में स्थिर और शांत रहता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 1 नवंबर 2025

सच्चा सुख

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सच्चा सुख ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 कार्तिक शुक्ल 12, 2 नवंबर रविवार 2025 कलि काल के 18  वें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री अरनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अरनाथ   भगवान जी का केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 नवंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 02,05,14, 21 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस नवंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28 नवंबर को है। चतुर्दशी तिथि 04 व 18 नवंबर को है।*

*🔔🐎अष्टान्हिका महापर्व 29 अक्टूबर से 05 नवंबर को है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  नवंबर माह में    1,2, 3,8, 12 ,15,16,22,23 व 25 नवंबर को है। 🔔 वाहन खरीद मुहूर्त 3,7,9,10,17,20,21,26,28 व 30🏠 प्रापर्टी मुहूर्त 1,9,10,14,19,20,21 व 30 गृह प्रवेश मुहूर्त 03,07,14,15,17,20 व 21 नवंबर को है।।*
*🐎✍️ पंचक 1,2,3,4 व 27,28,29,30 नवंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*"लंबी उम्र का सपना और सच्चा सुख"* 

आज की तेज़ रफ़्तार दुनिया में इंसान ने लगभग हर चीज़ खरीदना सीख लिया—आराम, प्रतिष्ठा, सुख के क्षणिक नख़रें। पर क्या असली शांति, असली संतोष और जीवन का स्थायी सुख खरीदा जा सकता है?  

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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जब हम माहात्मा बुद्ध की कहानी को देखते हैं तो 
तो एक बात साफ होती है राजकुमार सिद्धार्थ के पास तो सब कुछ था: राजपाट के साथ राजसी जीवन, ऐशो-आराम, परिवार, ऐश्वर्य सब कुछ। फिर भी एक दिन उन्होंने सब कुछ त्याग दिया। कारण साधारण था पर गहरा भी — 
बाहरी भोग-विलास से मन की शांति नहीं मिलती। उन्होंने ध्यान, तपस्या और आत्मचिंतन को चुना। उनकी खोज ने उन्हें बोधि-वृक्ष के नीचे से जो शांति मिली, वह किसी बाज़ार की चीज़ नहीं थी; वह भीतर से जगी हुई समझ थी — दुख का कारण और उसकी मुक्ति का रास्ता। यही आंतरिक बोध बाद में उन्हें बुद्ध बनाता है। 

आखिर क्यों? 

क्योंकि उन्हें एहसास हुआ कि असली शांति और संतोष इन बाहरी चीजों में नहीं है। उन्होंने जो खोजा, वह था आंतरिक सुख, जिसे पाने के लिए उन्होंने कठिन साधना और आत्मचिंतन का रास्ता अपनाया। यही उन्हें बोधिसत्व और फिर बुद्ध बनने की ओर ले गया।

 *कभी-कभी पाने के लिए छोड़ना भी ज़रूरी होता है — और यही त्याग भीतर की दुनिया को खोलता है।* 

हम सब जानते है, आधुनिक दुनिया के सबसे मशहूर सिंगर, डांसर और अमीर कलाकारों में से एक थे माइकल जैक्सन। 14 साल की उम्र में स्टार बन चुके थे और 25 साल की उम्र तक किंग आफ पाप बन गये थे। इनकी एक झलक पाने के लिए लोग तरसते रहते थे, उनके पास बेशुमार दौलत थी उनका सपना था कि वे 150 या और अधिक सालों तक जिएं। इसके लिए उन्होंने हर मुमकिन कोशिश की। उनके पास 12 डॉक्टरों की टीम थी जो हर दिन उनका पूरा चेकअप करती थी। खाना लैब में टेस्ट होता था, वर्कआउट पर 15 लोगों की टीम निगरानी रखती थी, और यहां तक कि अंगदान देने के लिए लोग तैयार बैठे थे। उनका बिस्तर भी इतनी तकनीक से भरा था कि वह ऑक्सीजन लेवल कंट्रोल करता था।
पर जानते हो, फिर भी, 25 जून 2009 को, सिर्फ 50 साल की उम्र में उनका दिल काम करना बंद कर गया। तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें कोई नहीं बचा सका। उस दिन पूरी दुनिया हिल गई। करोड़ों लोग इंटरनेट पर उन्हें खोजने लगे। वेबसाइटें क्रैश हो गईं। उनकी अंतिम यात्रा को लाखों लोगों ने लाइव देखा। 

लेकिन सवाल वही रहा क्या वो 150 साल जी पाए? 

नहीं।

ये कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है। चाहे हमारे पास कितना भी पैसा हो, कितनी भी तकनीक हो, या दुनिया की सबसे बेहतरीन मेडिकल टीम क्यों न हो हम प्रकृति से आगे नहीं जा सकते। मौत अटल है, और जीवन की सबसे गहरी ज़रूरतें शांति, संतोष और आत्मिक सुख कभी खरीदी नहीं जा सकतीं।

अंत में बस यही समझ आता है कि जो असली सुख है, वह हमारे भीतर से आता है। और उसे पाने के लिए त्याग, समझ, और आत्मचिंतन की जरूरत होती है  न कि सिर्फ साधनों और दौलत की।

"जियो सरलता से, सोचो गहराई से, और खोजो सच्चे सुख को।

एक गांव का व्यापारी था — उसके पास महल, सोना-चाँदी, सेवक सब कुछ। उसने सुना कि दूर के पर्वत पर एक झरना है, जिसकी बूंदें पिने से आदमी लंबा जीता है। व्यापारी ने तमाम दौलत खर्च करके झरने तक पहुँचने की ठानी। घंटों की यात्रा के बाद उसने देखा कि झरने के पास एक वृद्ध साधु बैठा है, शांत और संतुष्ट। साधु मुस्कुराया और बोला — “तुमने दौड़ कर यहाँ तक पहुंचकर क्या पाया?” व्यापारी ने कहा, “लंबी उम्र की आशा।” साधु ने कहा, “असली लंबी उम्र वह है जो तुम हर सुबह अपने भीतर से जियो — प्रेम, शांति और संतोष के साथ; उसे न खरीद सकते हो, न बेच सकते हो, बस उसे जिया जा सकता है।” 
व्यापारी को तब समझ आया कि दौलत से रास्ते मिलते हैं, मगर भीतर की शांति का रास्ता स्वयं की समझ और साधना से बनता है । 

*विशेष:- भव्य आत्माओं,बाहरी साधन और चिकित्सा सहायता जीवन की गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं — यह ठीक है। पर जीवन का अन्तिम सत्य यह है कि सच्चा सुख भीतर होता है, और उसे पाने के लिए समझ, त्याग, आत्मनिरीक्षण और आत्मिक परिपक्वता चाहिए — न कि सिर्फ़ पैसे या तकनीक। सम्यक दर्शन सम्यक ज्ञान सम्यक चारित्र यह रत्नत्रय ही हम सभी की अनमोल दौलत है।*

 _*जियो सरलता से,*_ 
 *_सोचो गहराई से,_* 
 *_और खोजो सच्चे सुख को —_* 
 _*यही जीवन की असली धन-राशि है*_

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 18 अक्टूबर 2025

धन्य तेरस

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 धन्य तेरस ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 कार्तिक कृष्ण 13, 19 अक्टूबर रविवार 2025 कलि काल के  छठवें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री पद्मप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से सूर्य की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  पद्मप्रभ  भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 कार्तिक अमावस्या, 21 अक्टूबर मंगलवार 2025 कलि काल के  अंतिम तीर्थंकर उपसर्ग विजेता शासन नायक    सर्व सुखकारी  श्री वर्धमान भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  वर्धमान  भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*⛳🪔👨‍👨‍👦‍👦नोट:-आज सांयकाल में गौतम गणधर परमेष्ठि को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई थी ।इस अवसर मंदिर जी और घर-प्रतिष्ठान में दीपोत्सव मनायेंगे।*

*🎪 माह अक्टूबर  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 07,10, 19,21,23 व 27 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎  अक्टूबर माह में अष्टमी तिथि 14 व 30 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 6 व 20 अक्टूबर  को है।*
*<👨‍👨‍👦‍👦⛳🪔🔔अक्टूबर 29 से 05 नवंबर तक अष्टान्हिका महापर्व*

*✅🔔⏰🐎 नोट अक्टूबर  माह में 31अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह आदि  शुभ कार्यों के मुहूर्त नहीं है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*जैन धर्म में धन्य तेरस का महत्व*

जैन आगम में धनतेरस को 'धन्य तेरस' या 'ध्यान तेरस' भी कहते हैं। अंतिम तीर्थंकर शासन नायक भगवान महावीर स्वामी ने इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिये चले गये थे। तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुये। तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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जैन धर्म में धन्य तेरस केवल भौतिक समृद्धि का पर्व नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक समृद्धि, दान और धर्म के पालन की याद भी दिलाता है।. इस दिन जैन समुदाय को लोग सिर्फ धन, सोना-चांदी की पूजा नहीं करते बल्कि धार्मिक ग्रंथों, ज्ञान और साधना के साधनों की भी पूजा की जाती है। घर और व्यवसाय में यह पूजा संपत्ति की सुरक्षा, व्यापार में वृद्धि और परिवार में सुख-शांति लाने के लिए की जाती है। इस बार धनतेरस 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

इस दिन दान और परोपकार का विशेष महत्व होता है।इस दिन दिगंबर साधुओं के रत्नत्रय में सभी को अपनी शक्ति अनुसार सहायक बनकर जीवन धन्य करना चाहिए।गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और आवश्यक वस्तुएं दान करना पुण्य माना जाता है। धन्यतेरस हमें सिखाता है कि धन का सही उपयोग और त्याग जीवन में सच्ची समृद्धि लाते हैं।हम सभी के आवश्यक कर्तव्यों के करने से हमारे कर्मों का क्षय होता है।
जैन धर्म में दान और परोपकार का महत्व
धन्यतेरस के दिन जैन धर्म में दान और परोपकार का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, पैसे और अन्य आवश्यक वस्तुएं दान करना शुभ माना जाता है. जैन धर्म के अनुसार, दान केवल आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि यह कर्म और पुण्य का माध्यम भी है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक संतोष लाता है।. धन्य तेरस पर किया गया दान परिवार में खुशहाली, सुख-शांति और सामंजस्य बढ़ाने में मदद करता है। यह परंपरा हमें सिखाती है कि धन का सही उपयोग और दूसरों की मदद करना जीवन में सच्ची समृद्धि लाता है।

भगवान महावीर से जुड़ी परंपरा
धनतेरस का दिन जैन धर्म में भगवान महावीर से भी जुड़ा हुआ है.। जैन परंपरा के अनुसार, इस दिन भगवान महावीर ने अपने जीवन में बाहरी संपत्ति समवशरण का  त्याग कर अपने आत्म ध्यान में लीन हो गए थे। उनके इस मार्ग ने जैन अनुयायियों को सच्चे जीवन मूल्यों, संयम और आत्मिक विकास की प्रेरणा दी है इसलिए धन्यतेरस पर केवल भौतिक धन, सोना या चांदी की खरीद नहीं की जाती, बल्कि धार्मिक ग्रंथों, ज्ञान और साधना के साधनों का भी पूजन किया जाता है।. यह परंपरा याद दिलाती है कि धन्य है आज का दिन जिसका सही उपयोग और आध्यात्मिक साधना जीवन में संतुलन और सच्ची समृद्धि लाता है।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025

भ्रष्टाचार युक्त राजनीति व व्यापारी

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 भ्रष्टाचार युक्त राजनीति व व्यापारी ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 कार्तिक कृष्ण 4, 10 अक्टूबर शुक्रवार 2025 कलि काल के  तिसरे  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री संभवनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  संभवनाथ  भगवान जी का केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 माह अक्टूबर  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 07,10, 19,21,23 व 27 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎  अक्टूबर माह में अष्टमी तिथि 14 व 30 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 6 व 20 अक्टूबर  को है।*
*<👨‍👨‍👦‍👦⛳🪔🔔अक्टूबर 29 से 05 नवंबर तक अष्टान्हिका महापर्व*

*✅🔔⏰🐎 नोट अक्टूबर  माह से 31अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह आदि  शुभ कार्यों के मुहूर्त नहीं है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*भ्रष्टाचार युक्त राजनीति व व्यापारी* 

कहते हैं राजनीति और व्यापार, दोनों ही ऐसे अखाड़े हैं जहाँ हर कोई अपनी गोटी फिट करने में लगा रहता है। कोई सत्ता की ताक़त दिखाता है, तो कोई लाभ-हानि का हिसाब लगाता है। लेकिन जब दोनों आमने-सामने आ जाएँ, तो हास्य और विडंबना की स्थिति भी बन जाती है। 
यह कहानी आज की वर्तमान भ्रष्टाचार युक्त राजनेता व लोभी व्यापारी उसीपर आधारित एक नमूना है।

"मंत्रीजी, मेरे नए शोरूम का उद्घाटन आपके करकमलों से ही होना चाहिए," – दोनों हाथ जोड़ते हुए अग्रवालजी ने प्रार्थना की।

मंत्रीजी ने अकड़ते हुए कहा – "ठीक है-ठीक है, तारीख़ मेरे पीए को बता दो, मैं कोशिश करूँगा।"

"नहीं साहब, आप आए बिना यह संभव नहीं," – 

अग्रवाल जी ने मान-मनुहार शुरू कर दी।

मंत्रीजी ने गले को साफ़ करते हुए आदेशात्मक अंदाज़ में कहा – "तो फिर आ ही जाऊँगा।"

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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समय पर मंत्रीजी अपनी पूरी फ़ौज-फटकार के साथ पहुँचे। ढोल-नगाड़े बजे, फूल बरसे और फीता कटते ही शोरूम चमक उठा।
*🪔कुछ समय पहले सभी भाषाओं में भारत में मन की बात का मायाजाल फैलाया गया।उस मन की बात की सच्चाई आजतक किसी ने सपने में भी सच होते नहीं देखी। यह सच्चाई आजतक लोगों की समझ में नहीं आई।*

अंदर घुसते ही मंत्रीजी की नज़रें चमकदार इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर टिकीं। टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एसी – सब कुछ देखते देखते उनकी नज़र खासतौर पर एक विशाल एलइडी टीवी पर अटक गई। "अग्रवाल जी, यह कितने का है?" – उन्होंने ऐसे पूछा मानो सौदा करने ही आए हों। 
"सर, मात्र दो लाख का," – अग्रवाल जी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
मंत्रीजी की आँखें गोलगप्पे की तरह फैल गईं। 

पेशे से पक्के मझे हुए व्यवसायी अनुभवी अग्रवालजी को समझते ये देर न लगी कि मंत्रीजी को टीवी भा गया है । उन्होंने सोचा –अगर यह टीवी गिफ्ट कर दूँ तो भविष्य में जीएसटी, लाइसेंस फीस, निरीक्षण शुल्क जैसी तमाम सरकारी विभागीय उलझनों से छुटकारा मिल जाएगा।

"मंत्रीजी, यह टीवी मैं आपको उपहार स्वरूप भेंट करता हूँ," –
अग्रवालजी ने तुरंत पासा फेंका।

मंत्रीजी के भीतर तो लड्डू फूटने लगे, मगर चेहरे पर गंभीरता लाते हुए बोले – "अग्रवालजी, मैं मुफ़्त का सामान नहीं लेता। मेरी ईमानदारी पूरे इलाके में मशहूर है। इसकी कीमत चुकानी ही होगी।"
यह कहकर मंत्रीजी अपने अनुभव अनुसार चेहरे पर भाव लाते हुये बाहर निकलने लगे।

अग्रवालजी ने मौका भाँपते हुए कहा – "ठीक है सर, फिर प्रतीकात्मक रूप से पाँच रुपये ही दे दीजिए।"

मंत्रीजी ने जेब से दस का नोट निकाला और पकड़ा दिया। 

शो रूम की तो आज शुरुआत ही थी । वापसी के पांच रुपये खुले ही नहीं मिले। पूरे शोरूम में अफरा-तफरी मच गई – पाँच रुपये छुट्टा किसी के पास नहीं!
हारकर अग्रवाल जी बोले – "साहब, अभी 5 रुपया छुट्टा नहीं है… आप टीवी तो ले जाइए।"

मंत्रीजी हँसते हुए बोले – "खुल्ले नहीं हैं... अरे अरे अग्रवालजी, चिंता क्यों करते हो?… पाँच रुपये के एवज में यह फ्रिज भी पैक करा दो।"

और इस तरह मंत्रीजी दो लाख का टीवी और पचहत्तर हज़ार का फ्रिज, दोनों लेकर चलते बने। लेकिन हाँ, ईमानदार मंत्रीजी ने  टीवी और फ्रिज की कीमत अग्रवालजी के कहे अनुसार पूरी चुकाई ।

अग्रवाल जी ने माथा पीटते हुए कर्मचारियों को डाँटा –
 "निकम्मों! तुम लोग खुल्ले क्यों नहीं रखते?  शुक्र है कि मंत्रीजी ने बीस का नोट नहीं दिया, नहीं तो मंत्रीजी अपने साथ एसी औऱ वाशिंग मशीन भी उठा ले जाते " ........!!

*⏰👨‍👨‍👦‍👦▶️आज तक में जो वस्तुएं एक,दो, पांच व दस रुपए में मिलती थी जिनपर 14 प्रतिशत जीएसटी लगता था आज उन पर पांच प्रतिशत जीएसटी कर दिया गया है किंतु आज भी वह वस्तुएं उतनी ही किमत पर उपलब्ध हो रही है। उदाहरण के लिए समझें जो शेप्पू एक रुपए में मिलता था आज भी वह उसी क्वान्टिटी में एक रुपए में मिल रहा है।*

*👨‍👨‍👦‍👦🌞🪔🔑विशेष:-भव्य आत्माओं , यह व्यंग्य हमें यह सिखाता है कि लालच और जोड़-तोड़ से अर्जित लाभ अंततः नुकसान ही पहुँचाता है। मंत्रीजी ने अपनी ईमानदारी का अनोखा प्रदर्शन किया, तो व्यापारी ने भी शॉर्टकट से फायदा लेने की कोशिश की। परंतु सच्चाई यह है कि भ्रष्टाचार केवल लेने वाले की गलती नहीं, बल्कि देने वाला भी उतना ही अपराधी है। यह बुराई दोनों पक्षों को धीरे-धीरे खोखला करती है।  समाज तभी स्वस्थ और सशक्त बनेगा जब ईमानदारी दिखाने के लिए दिखावा नहीं, बल्कि आचरण में सच्चाई होगी—और व्यापारी हो या नेता या कर्मचारी, सभी यह संकल्प लें कि न तो रिश्वत देंगे और न ही लेंगे।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 6 अक्टूबर 2025

त्याग या संग्रह

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 कार्तिक कृष्ण एकम, 07 अक्टूबर मंगलवार 2025 कलि काल के  14वें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री अनंतनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  अनंतनाथ  भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 माह अक्टूबर  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 07,10, 19,21,23 व 27 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎  अक्टूबर माह में अष्टमी तिथि 14 व 30 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 6 व 20 अक्टूबर  को है।*
*<👨‍👨‍👦‍👦⛳🪔🔔अक्टूबर 29 से 05 नवंबर तक अष्टान्हिका महापर्व*

*✅🔔⏰🐎 नोट अक्टूबर  माह से 31अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह आदि  शुभ कार्यों के मुहूर्त नहीं है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*त्याग या संग्रह*

 *जीवन की यात्रा का बोझ कम करे ।* 

अतीत का बोझ ढोना ऐसा है जैसे सिर पर भारी पत्थर उठाकर जीवन की राह पर चलना। यह बोझ हमें वर्तमान की खुशियों से दूर कर देता है और भीतर से खोखला बना देता है। जीवन को हल्का बनाने के लिए तीन सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं—पहला, यह स्वीकार करना कि अतीत बदला नहीं जा सकता, इसलिए उसे छोड़ देना ही उचित है। दूसरा, स्वयं और दूसरों को क्षमा करना, ताकि मन का बोझ हल्का हो। और तीसरा, पूरी तरह वर्तमान में जीना, क्योंकि वास्तविक आनंद और शांति केवल इसी क्षण में संभव है। यही सच्चे जीवन का सार है।
जीवन को आप कैसे देखते हैं, यह पूरी तरह आपके दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। जब आप अनावश्यक बोझ कम कर देते हैं, तो आपका जीवन फूलों की तरह सुगंधित और प्रकाशित हो जाता है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 *इस कहानी के माध्यम से सच्चाई समझते  हैं।* 

एक समय की बात है, एक गाँव में एक धार्मिक व्यक्ति रहता था। कुछ लोग उसे सिद्ध संत मानते थे, तो कुछ उसे असामान्य और पागल समझते थे। गाँव के बच्चे उसे “खिलौना बाबा” कहते थे, क्योंकि वह हमेशा उन्हें खिलौने और मिठाइयाँ बाँटता था।

वह भिक्षुक की तरह केवल उतना ही दान स्वीकार करता, जितना उसे एक दिन के लिए चाहिए होता। चाहे कोई चावल दे, रोटी या सब्ज़ी—वह सबको कृतज्ञता से स्वीकार करता। लेकिन उसके पास एक अनोखी शर्त थी—वह भोजन के साथ खिलौने और मिठाइयाँ भी माँगता। जो लोग उसका आदर करते, वे यह अतिरिक्त वस्तुएँ भी दे देते। बाबा उन सबको अपने बड़े थैले में रखकर गाँव के बच्चों में बाँट देता।

उसके व्यवहार में उदारता और उपस्थिति में दिव्यता झलकती थी। लेकिन कई लोग यह समझ नहीं पाते थे कि अगर वह इतना ज्ञानी है, तो गंदे कपड़े पहनकर भारी थैला उठाए इधर-उधर क्यों घूमता है? क्यों वह उपदेश देने के बजाय बच्चों में खिलौने बाँटने में व्यस्त रहता है?
एक दिन गाँव के कुछ लोग, जो बरगद के पेड़ के नीचे ताश खेल रहे थे, उस साधु को रोककर हँसते हुए बोले— “बाबा! हमें भी थोड़ा ज्ञान दीजिए। हमें विश्वास है कि आपके इस बड़े झोले में अवश्य ही वेद छिपे होंगे।”

साधु ने बिना कुछ कहे अपना थैला ज़मीन पर पटक दिया और बोला— “यही है आत्मा का बोध! मैंने आपको पूरे वेदों का सार समझा दिया।”

सब लोग हैरान रह गए। उनमें से एक बुद्धिमान व्यक्ति ने पूछा— “इसका क्या अर्थ हुआ बाबा? थैला गिराने से वेदों का सार कैसे समझा जा सकता है?”

साधु मुस्कुराया और बोला— “यह थैला, जिसे मैं ढो रहा था, मेरे लिए एक बड़ा भार था। जब मैंने इसे नीचे रख दिया, तब मैं मुक्त हो गया। यही संदेश है*   _*अपना बोझ छोड़ दो। बेकार की चिन्ताएँ, क्रोध, ईर्ष्या और स्वार्थ का भार मत ढोओ। तभी तुम स्वतंत्र होकर जी सकोगे।”*_ 
यह सुनकर सब लोग श्रद्धा से भर गए। उनमें से एक ने फिर पूछा— “बाबा, यदि यही सब कुछ है, तो अगला चरण क्या है?”

साधु ने अपना थैला दोबारा उठाया और बच्चों की ओर बढ़ते हुए बोला— *“अब यह बोझ नहीं, बल्कि आनंद का साधन है। इसमें बच्चों की खुशी छिपी है। यह आपकी दृष्टि पर निर्भर करता है कि किसी वस्तु को आप बोझ मानते हैं या अपना धर्म।”* 

यह कहकर बाबा अपने मार्ग पर चल दिए।

 *👨‍👨‍👦‍👦🔔🪔⛳विशेष:- भव्य आत्माओं,जीवन का वास्तविक सुख त्याग और स्वतंत्रता में है। अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए मन का थैला—भय, चिंताओं और नकारात्मक भावनाओं से खाली कर दो। तभी आप निडर, मुक्त और आनंदमय जीवन जी पाओगे।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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