रविवार, 30 नवंबर 2025

हमारे विचारों का सोमवार

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 हमारे विचारों का सोमवार ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 मार्गशीर्ष शुक्ल 11 , 01 दिसंबर सोमवार 2025 कलि काल के  19 वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री मल्लिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से केतू की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  मल्लिनाथ  भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔑 मार्गशीर्ष शुक्ल 11 , 01 दिसंबर सोमवार 2025 कलि काल के  21 वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री नमिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से राहू की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री नमिनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 व 30 तारीख को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28  दिसंबरको है। चतुर्दशी तिथि 03 व 18 दिसंबर  को है।*

*🔔🐎अष्टान्हिका महापर्व 29 अक्टूबर से 05 नवंबर को है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  दिसंबर माह में  04,05,06   दिसंबर को है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20,26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक 1 व 24 से 25 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

आइए आज समझते है हमारे विचारों का सोमवार हमें क्यों परेशान करता है इसका हल हम स्वयं ही है। बाहर ढूंढ रहे है इसका मुख्य कारण हमारे विचारो में मलिनता है।

 *सोमवार की नई शुरुआत* 

किसी भी दिन की शुरुआत कैसी होगी—यह दिन नहीं, हमारी सोच तय करती है। सप्ताहांत की ढीली दिनचर्या के बाद सोमवार को अक्सर भारी माना जाता है, लेकिन सच यह है कि सोमवार का बोझ बाहर से नहीं, भीतर से आता है। जैसा कहा गया है—

 *“दृष्टिकोण बदलो, दृश्य स्वयं बदल जाएंगे।”* 

यदि मन हल्का हो और सोच सकारात्मक—तो वही सोमवार थकान नहीं, एक नई ऊर्जा का द्वार बन सकता है।

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रवि हर रविवार की रात एक ही बात सोचता—“काश सोमवार कभी आए ही न!” उसके लिए सोमवार का मतलब था—दफ़्तर की फ़ाइलें, बॉस की डांट और ट्रैफ़िक का तनाव। उसे लगता था कि यह दिन उसकी खुशियों का सबसे बड़ा दुश्मन है।

एक सोमवार को भी वही हुआ। सुस्ती से उठते रवि को उसकी माँ ने मुस्कुराकर पूछा, “क्या हुआ बेटा? फिर सोमवार का डर?”

रवि बोला, “माँ, यह दिन मनहूस है। कुछ अच्छा होता ही नहीं।”
माँ ने शांत स्वर में कहा, “दिन कभी मनहूस नहीं होता, बेटा। मन मनहूस हो तो सब कुछ वैसा लगता है। सोच बदलकर देख—सोमवार भी नई शुरुआत बन सकता है।”

माँ के शब्दों ने रवि को छू लिया। उसने निश्चय किया कि आज वह अपनी सोच को ही बदलकर देखेगा।

ऑफिस पहुँचा तो सबके चेहरों पर वही सोमवार वाली थकान थी। रवि ने सभी से मुस्कुराकर कहा, “गुड मॉर्निंग दोस्तों! चलिए हफ्ते की अच्छी शुरुआत करते हैं।”

उसकी मुस्कान और ऊर्जा धीरे-धीरे पूरे माहौल में फैल गई। उसने अधूरे प्रोजेक्ट में समाधान ढूँढने शुरू किए, शिकायतें नहीं।

बॉस, जो अक्सर नाराज़ रहते थे, पहली बार बोले—
“रवि, आज तुम्हारा रवैया देखकर बहुत अच्छा लगा। यही एटीट्यूड चाहिए टीम में।”

शाम को घर पहुँच कर रवि बोला, “माँ, आज पहली बार सोमवार अच्छा लगा। मैं समझ गया—दिन बुरा नहीं था, मेरी सोच गलत थी।”
माँ ने कहा, 
 *“यही जीवन का रहस्य है बेटा—सोच सही हो तो हर दिन अवसर बन जाता है।”* 

धीरे-धीरे रवि सोमवार से डरने वाला आदमी नहीं, सोमवार को प्रेरणा बनाने वाला व्यक्ति बन गया। वह सबको कहने लगा—
“जो सोमवार से डरता है, वह मेहनत से डरता है; जो उसे मुस्कुराकर अपनाता है, सफलता उसी की राह देखती है।”
*🔔👨‍👨‍👦‍👦⏰✅विशेष:- सोमवार कभी बुरा नहीं होता—बुरा होता है हमारा रवैया। हर सुबह एक नया मौका है खुद को बेहतर, मजबूत और सफल बनाने का। अगली बार जब सोमवार आए, तो उसे मुस्कुराकर स्वीकार कीजिए—क्योंकि वही दिन आपकी जीत की शुरुआत बन सकता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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