*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 आज की हमारी विचारधारा ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨👨👦👦🐎🔑 मार्गशीर्ष शुक्ल 14 , 03 दिसंबर बुधवार 2025 कलि काल के 18 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री अरनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अरनाथ भगवान जी का जन्म कल्याणक महोत्सव है।*
*🔑 मार्गशीर्ष पूर्णिमा , 04 दिसंबर गुरुवार 2025 कलि काल के तृतीय तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री संभवनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री संभवनाथ भगवान जी का तप कल्याणक महोत्सव है।*
< *🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 व 30 तारीख को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨👨👦👦🔔🐎इस दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28 दिसंबरको है। चतुर्दशी तिथि 03 व 18 दिसंबर को है।*
*👨👨👦👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त दिसंबर माह में 04,05,06 दिसंबर को है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20,26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक 1व 24 से 25 दिसंबर को है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
👨👨👦👦आज की हमारी विचारधारा 🔔
आइए आज हम इस कहानी के माध्यम से समझते हैं कि होता कुछ है और दिखाई कुछ और ही देता है। क्या यह विचारधारा हमारे लिए ठीक है?
*“धक्का” —*
*एक अनदेखा आईना*
किसी व्यक्ति का असली स्वरूप तब सामने आता है, जब वह कठिन परिस्थितियों से गुजरता है। वह अपनी गलती को स्वीकार करता है या दूसरों को दोष देता है — यही उसके चरित्र का आईना होता है।
आप कितनी महंगी कार में चलते हैं, किस ब्रांड के कपड़े पहनते हैं या आपके पास कितनी आलीशान नौकरी और घर है — ये सब बाहरी दिखावे हैं। असली पहचान तो यह है कि आप दूसरों से कैसा व्यवहार करते हैं। सफलता, संबंध, सम्मान — सबकुछ इसी एक गुण से जुड़ा है: *व्यवहार* ।
कल्पना कीजिए, आप एक सुंदर, मजबूत और चमकदार थैला लिए सड़क पर चल रहे हैं। थैला बाहर से शानदार दिखता है, पर भीतर क्या है, यह कोई नहीं जानता।
तभी अचानक पीछे से कोई आपको धक्का देता है। आप लड़खड़ाते हैं, और थैला ज़मीन पर गिरकर खुल जाता है। उसके भीतर की हर चीज़ बाहर आ जाती है।
अब राह चलते लोग क्या देखेंगे?
- अगर थैले में किताबें थीं, तो उनके पन्ने उड़ने लगेंगे।
- अगर काँच था, तो वह टूटकर चुभेगा।
- अगर फूल थे, तो सुगंध फैल जाएगी।
- और अगर गंदगी थी, तो बदबू दूर तक जाएगी।
ध्यान दीजिए — लोगों को यह याद नहीं रहेगा कि धक्का किसने दिया, क्यों दिया। वे सिर्फ यही याद रखेंगे कि
*थैले से क्या निकला।*
अब सोचिए — वो थैला *आप* हैं।
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जब जीवन आपको अचानक धक्का देता है —
कोई धोखा, कोई असफलता, अपमान, दुख, या कोई मुश्किल घड़ी —
तब आपके भीतर जो है, वही बाहर आता है।
आप बाहर से चाहे जितने भी सभ्य, शिक्षित, या आकर्षक दिखें — धक्के के बाद आप क्या प्रतिक्रिया देते हैं, यही असली आप हैं।
• कोई क्रोध में फट पड़ता है।
• कोई चुपचाप रोता है।
• कोई दूसरों को दोष देता है।
• और कोई मुस्कुराकर सब सह लेता है।
जैसे संतरे को निचोड़ने पर सिर्फ संतरे का रस ही निकलेगा — सेब का नहीं। क्योंकि जो भीतर है, वही बाहर आता है।
एक वृद्ध संत के पास एक व्यक्ति आया और बोला, "गुरुजी, जब लोग मुझे अपमानित करते हैं, मैं आपा खो देता हूँ। मैं क्रोधित हो जाता हूँ।"
संत मुस्कराए और पास रखे एक प्याले से गरम चाय उठाकर उस पर छलक दी।
व्यक्ति चौंका, "यह क्या किया आपने? मेरे कपड़े गीले हो गए!"
संत बोले, "देखा? इस प्याले में चाय थी, तो वही बाहर आई। अगर इसमें पानी होता, तो वह निकलता।"
"जब तुम्हें धक्का लगता है और तुम क्रोधित होते हो, तो वह क्रोध तुम्हारे भीतर का ही हिस्सा है — बस जीवन ने उसे बाहर ला दिया।"
इसलिए, अपना परीक्षण कीजिये और अपने भीतर को रोज़ भरिए —
• अच्छे विचारों से
• करुणा से
• क्षमा और सहनशीलता से
• आत्मबल और सकारात्मकता से।
क्योंकि धक्के तो जीवन का हिस्सा हैं, पर उनसे निपटने की तैयारी — वो तो हमारे हाथ में है।
*🌞👨👨👦👦⏰🐎✍️विशेष:-भव्य आत्माओं,अंततः याद रखिए: जब जीवन आपको झकझोरता है, तब वही बिखरेगा जो आपके भीतर है। और वही बनती है आपकी असली पहचान। इसलिए अपने भीतर सज्जनता, विनम्रता, प्रेम और सच्चाई संजोइए — यही धक्का लगने पर बाहर आएगा, और यही लोग हमेशा याद रखेंगे।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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