शुक्रवार, 5 दिसंबर 2025

सत्य आचरण का फल

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सत्य आचरण का अप्रत्याशित फल ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष कृष्ण  दूज , 06 दिसंबर शनिवार 2025 कलि काल के  19 वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री मल्लिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से केतु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मल्लिनाथ  भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28  दिसंबरको है। चतुर्दशी तिथि 03 व 18 दिसंबर  को है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  दिसंबर माह में  04,05,06 व 11 दिसंबर को है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20,26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  24 से 25 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*भव्य आत्माओं आज प्राचीन प्रथमानुयोग शास्त्र  की बातें इस कहानी के माध्यम से आप के सामने प्रस्तुत है।मनुष्य के जीवन में सच्चे दिगंबर संतों और गुरुओं के उपदेश दीपक की तरह होते हैं—जो अंधकार मिटाकर रास्ता दिखाते हैं। परंतु अक्सर हम यह सोचकर उनकी बातों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं कि “यह सब हमारे काम का नहीं।” लेकिन सत्य यह है कि सच्चे साधु-संतों की वाणी इतनी प्रभावशाली होती है कि यदि उसका थोड़ा-सा अंश भी जीवन में उतर जाए, तो भाग्य तक बदल सकता है ।*

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 *सत्य आचरण का अप्रत्याशित फल* 

किसी नगर में एक बूढ़ा चोर रहता था। उसका एक सोलह वर्षीय बेटा था। जब चोर बूढ़ा होने लगा, तो उसने बेटे को चोरी की विद्या सिखानी शुरू कर दी। कुछ ही दिनों में लड़के ने चोरी की सब गुर विद्या सीख ली और दोनों आराम से जीवन बिताने लगे।

एक दिन बूढ़े चोर ने बेटे से कहा— “बेटा, हम चोरी के धंधे में है इसलिए साधु-संतों की बात कभी मत सुनना। अगर कहीं कोई महात्मा उपदेश दे रहे हों, तो कान में उंगली देकर तुरंत भाग जाना।” 
लड़के ने भी सिर हिलाकर कहा, “हाँ बापू, समझ गया।”
कुछ दिन बाद लड़के के मन में आया कि क्यों न आज राजा के महल में ही हाथ साफ किया जाए। वह महल की ओर निकल पड़ा। रास्ते में देखा—कुछ लोग एकत्र हैं। उसने पूछा, “इतनी भीड़ क्यों?” उत्तर मिला—“वहाँ एक महात्मा उपदेश दे रहे हैं।”
यह सुनकर लड़के को बाप की बात याद आई। उसने तुरंत अपने कान बंद कर लिए और इधर से निकलने लगा। लेकिन ठोकर लगने से वह गिर पड़ा। उसी पल महात्मा की दो बातें उसके कानों में पड़ गईं—
1. *“कभी झूठ मत बोलो।”* 
2 *. “जिसका नमक खाओ, उसका बुरा मत सोचो।”* 
वह फौरन उठकर कान और कसकर ढकते हुए महल की ओर बढ़ गया।
महल के द्वार पर पहरेदार ने रोककर पूछा— “कौन हो? कहाँ जा रहे हो?” 
उसे महात्मा की पहली बात याद आई। सोचा—आज सच बोलकर देखते हैं। 
वह बोला— “मैं चोर हूँ… चोरी करने आया हूँ।” पहरेदार ने हँसते हुए कहा—“अच्छा जाओ।” सोचा लड़का मजाक कर रहा होगा ।
लड़का अंदर चला गया। कमरे में सोना-चाँदी देखकर उसकी आंखें चमक उठीं। उसने एक थैला भर लिया। फिर वह रसोई में गया—वहाँ तरह-तरह के पकवान देखकर खाने बैठ गया। खाने के बाद जैसे ही वह चोरी का थैला उठाने लगा, दूसरी बात याद आई— *“जिसका नमक खाओ, उसका बुरा मत सोचो।”* 
उसने सोचा—“राजा का खाना खाया, उसमें नमक भी था… अब उसका बुरा कैसे करूँ?” उसने थैला वहीं छोड़ दिया और बाहर चला आया।
पहरेदार ने चकित होकर पूछा— “लो, चोरी क्यों नहीं की?” लड़के ने सादगी से उत्तर दिया— “राजा का नमक खाया है… उनका बुरा नहीं कर सकता। थैला रसोई में ही छोड़ आया हूँ।”
उधर रसोइया शोर मचाता दौड़ता हुआ आया—“अरे पकड़ो! चोर भाग रहा है!” पहरेदार ने लड़के को पकड़कर दरबार में पेश कर दिया।
राजा ने पूछा— “सारी बात सच-सच बताओ।”
लड़के ने पूरी घटना सादगी से बता दी। सत्य सुनकर राजा अत्यंत प्रसन्न हुआ और बोला— “तुम जैसा सच्चा व्यक्ति चोर नहीं, मेरा विश्वासपात्र हो सकता है।” राजा ने उसे तुरंत नौकरी दे दी।
चार दिन तक घर न लौटने पर बाप को चिंता हुई। जब लड़का अच्छे कपड़ों में घर लौटा, तो बाप हैरान रह गया। लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा—
“बापू, आप कहते थे संतों की बात मत सुनना… पर मैंने एक महात्मा की दो बातें सुन लीं और उसी पर चल पड़ा—देखिए, आज सच्चाई ने मुझे चोर से राजमहल का कर्मचारी बना दिया।”
तभी बूढ़े चोर को भी एहसास हुआ कि जिस ज्ञान को वह व्यर्थ समझता था, वही उसके बेटे की किस्मत बदलने वाला सिद्ध हुआ।
लड़के ने सिर झुकाकर कहा— “सोचिए बापू… अगर सिर्फ दो वचन ने मेरी राह बदल दी, तो यदि हम संतों और गुरुवरों की सारी शिक्षाएँ मान लें—तो जीवन कितना उज्ज्वल और सफल हो सकता है!”
यह सुनकर बूढ़ा चोर मौन हो गया। उसे जीवन में पहली बार लगा कि सच्चा धन चोरी नहीं, बल्कि सच्चे दिगंबर संतों की वाणी  हैं—जो मनुष्य के भाग्य को पलटने की शक्ति रखते हैं।
अतः उस बूढ़े चोर ने अंतर्मन से पश्चाताप किया और  राजमहल जाकर राजा के सामने अपनी सभी गलतियां स्वीकार कर ली।राजा ने अपने कर्मचारियों के निरीक्षण में उसे गौशाला में उसके योग्य कार्य पर उसे रख दिया।वह गौशाला में पशुओं की सेवा करते हुए जीवन धन्य करने लगा।

 *👨‍👨‍👦‍👦⏰🌞🔔✍️विशेष :- भव्य आत्माओं, सच्चे दिगंबर संतों की वाणी में वह शक्ति होती है, जो पत्थर दिल को भी मोम बना दे। यदि उनके उपदेशों का थोड़ा-सा भी पालन कर लिया जाए, तो जीवन की दिशा बदल सकती है, और सफलता स्वयं कदम चूम लेती है। अतः आप सभी सच्चे देव शास्त्र गुरु के बताए षट् आवश्यक कर्म प्रतिदिन करोगे तो एक समय ऐसा आयेगा कि स्वयं सिद्ध हो जाओगे।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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