शनिवार, 18 अक्टूबर 2025

धन्य तेरस

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 धन्य तेरस ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 कार्तिक कृष्ण 13, 19 अक्टूबर रविवार 2025 कलि काल के  छठवें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री पद्मप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से सूर्य की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  पद्मप्रभ  भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 कार्तिक अमावस्या, 21 अक्टूबर मंगलवार 2025 कलि काल के  अंतिम तीर्थंकर उपसर्ग विजेता शासन नायक    सर्व सुखकारी  श्री वर्धमान भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  वर्धमान  भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*⛳🪔👨‍👨‍👦‍👦नोट:-आज सांयकाल में गौतम गणधर परमेष्ठि को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई थी ।इस अवसर मंदिर जी और घर-प्रतिष्ठान में दीपोत्सव मनायेंगे।*

*🎪 माह अक्टूबर  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 07,10, 19,21,23 व 27 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎  अक्टूबर माह में अष्टमी तिथि 14 व 30 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 6 व 20 अक्टूबर  को है।*
*<👨‍👨‍👦‍👦⛳🪔🔔अक्टूबर 29 से 05 नवंबर तक अष्टान्हिका महापर्व*

*✅🔔⏰🐎 नोट अक्टूबर  माह में 31अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह आदि  शुभ कार्यों के मुहूर्त नहीं है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*जैन धर्म में धन्य तेरस का महत्व*

जैन आगम में धनतेरस को 'धन्य तेरस' या 'ध्यान तेरस' भी कहते हैं। अंतिम तीर्थंकर शासन नायक भगवान महावीर स्वामी ने इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिये चले गये थे। तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुये। तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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जैन धर्म में धन्य तेरस केवल भौतिक समृद्धि का पर्व नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक समृद्धि, दान और धर्म के पालन की याद भी दिलाता है।. इस दिन जैन समुदाय को लोग सिर्फ धन, सोना-चांदी की पूजा नहीं करते बल्कि धार्मिक ग्रंथों, ज्ञान और साधना के साधनों की भी पूजा की जाती है। घर और व्यवसाय में यह पूजा संपत्ति की सुरक्षा, व्यापार में वृद्धि और परिवार में सुख-शांति लाने के लिए की जाती है। इस बार धनतेरस 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

इस दिन दान और परोपकार का विशेष महत्व होता है।इस दिन दिगंबर साधुओं के रत्नत्रय में सभी को अपनी शक्ति अनुसार सहायक बनकर जीवन धन्य करना चाहिए।गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और आवश्यक वस्तुएं दान करना पुण्य माना जाता है। धन्यतेरस हमें सिखाता है कि धन का सही उपयोग और त्याग जीवन में सच्ची समृद्धि लाते हैं।हम सभी के आवश्यक कर्तव्यों के करने से हमारे कर्मों का क्षय होता है।
जैन धर्म में दान और परोपकार का महत्व
धन्यतेरस के दिन जैन धर्म में दान और परोपकार का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, पैसे और अन्य आवश्यक वस्तुएं दान करना शुभ माना जाता है. जैन धर्म के अनुसार, दान केवल आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि यह कर्म और पुण्य का माध्यम भी है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक संतोष लाता है।. धन्य तेरस पर किया गया दान परिवार में खुशहाली, सुख-शांति और सामंजस्य बढ़ाने में मदद करता है। यह परंपरा हमें सिखाती है कि धन का सही उपयोग और दूसरों की मदद करना जीवन में सच्ची समृद्धि लाता है।

भगवान महावीर से जुड़ी परंपरा
धनतेरस का दिन जैन धर्म में भगवान महावीर से भी जुड़ा हुआ है.। जैन परंपरा के अनुसार, इस दिन भगवान महावीर ने अपने जीवन में बाहरी संपत्ति समवशरण का  त्याग कर अपने आत्म ध्यान में लीन हो गए थे। उनके इस मार्ग ने जैन अनुयायियों को सच्चे जीवन मूल्यों, संयम और आत्मिक विकास की प्रेरणा दी है इसलिए धन्यतेरस पर केवल भौतिक धन, सोना या चांदी की खरीद नहीं की जाती, बल्कि धार्मिक ग्रंथों, ज्ञान और साधना के साधनों का भी पूजन किया जाता है।. यह परंपरा याद दिलाती है कि धन्य है आज का दिन जिसका सही उपयोग और आध्यात्मिक साधना जीवन में संतुलन और सच्ची समृद्धि लाता है।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025

भ्रष्टाचार युक्त राजनीति व व्यापारी

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 भ्रष्टाचार युक्त राजनीति व व्यापारी ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 कार्तिक कृष्ण 4, 10 अक्टूबर शुक्रवार 2025 कलि काल के  तिसरे  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री संभवनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  संभवनाथ  भगवान जी का केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 माह अक्टूबर  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 07,10, 19,21,23 व 27 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎  अक्टूबर माह में अष्टमी तिथि 14 व 30 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 6 व 20 अक्टूबर  को है।*
*<👨‍👨‍👦‍👦⛳🪔🔔अक्टूबर 29 से 05 नवंबर तक अष्टान्हिका महापर्व*

*✅🔔⏰🐎 नोट अक्टूबर  माह से 31अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह आदि  शुभ कार्यों के मुहूर्त नहीं है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*भ्रष्टाचार युक्त राजनीति व व्यापारी* 

कहते हैं राजनीति और व्यापार, दोनों ही ऐसे अखाड़े हैं जहाँ हर कोई अपनी गोटी फिट करने में लगा रहता है। कोई सत्ता की ताक़त दिखाता है, तो कोई लाभ-हानि का हिसाब लगाता है। लेकिन जब दोनों आमने-सामने आ जाएँ, तो हास्य और विडंबना की स्थिति भी बन जाती है। 
यह कहानी आज की वर्तमान भ्रष्टाचार युक्त राजनेता व लोभी व्यापारी उसीपर आधारित एक नमूना है।

"मंत्रीजी, मेरे नए शोरूम का उद्घाटन आपके करकमलों से ही होना चाहिए," – दोनों हाथ जोड़ते हुए अग्रवालजी ने प्रार्थना की।

मंत्रीजी ने अकड़ते हुए कहा – "ठीक है-ठीक है, तारीख़ मेरे पीए को बता दो, मैं कोशिश करूँगा।"

"नहीं साहब, आप आए बिना यह संभव नहीं," – 

अग्रवाल जी ने मान-मनुहार शुरू कर दी।

मंत्रीजी ने गले को साफ़ करते हुए आदेशात्मक अंदाज़ में कहा – "तो फिर आ ही जाऊँगा।"

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समय पर मंत्रीजी अपनी पूरी फ़ौज-फटकार के साथ पहुँचे। ढोल-नगाड़े बजे, फूल बरसे और फीता कटते ही शोरूम चमक उठा।
*🪔कुछ समय पहले सभी भाषाओं में भारत में मन की बात का मायाजाल फैलाया गया।उस मन की बात की सच्चाई आजतक किसी ने सपने में भी सच होते नहीं देखी। यह सच्चाई आजतक लोगों की समझ में नहीं आई।*

अंदर घुसते ही मंत्रीजी की नज़रें चमकदार इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर टिकीं। टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एसी – सब कुछ देखते देखते उनकी नज़र खासतौर पर एक विशाल एलइडी टीवी पर अटक गई। "अग्रवाल जी, यह कितने का है?" – उन्होंने ऐसे पूछा मानो सौदा करने ही आए हों। 
"सर, मात्र दो लाख का," – अग्रवाल जी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
मंत्रीजी की आँखें गोलगप्पे की तरह फैल गईं। 

पेशे से पक्के मझे हुए व्यवसायी अनुभवी अग्रवालजी को समझते ये देर न लगी कि मंत्रीजी को टीवी भा गया है । उन्होंने सोचा –अगर यह टीवी गिफ्ट कर दूँ तो भविष्य में जीएसटी, लाइसेंस फीस, निरीक्षण शुल्क जैसी तमाम सरकारी विभागीय उलझनों से छुटकारा मिल जाएगा।

"मंत्रीजी, यह टीवी मैं आपको उपहार स्वरूप भेंट करता हूँ," –
अग्रवालजी ने तुरंत पासा फेंका।

मंत्रीजी के भीतर तो लड्डू फूटने लगे, मगर चेहरे पर गंभीरता लाते हुए बोले – "अग्रवालजी, मैं मुफ़्त का सामान नहीं लेता। मेरी ईमानदारी पूरे इलाके में मशहूर है। इसकी कीमत चुकानी ही होगी।"
यह कहकर मंत्रीजी अपने अनुभव अनुसार चेहरे पर भाव लाते हुये बाहर निकलने लगे।

अग्रवालजी ने मौका भाँपते हुए कहा – "ठीक है सर, फिर प्रतीकात्मक रूप से पाँच रुपये ही दे दीजिए।"

मंत्रीजी ने जेब से दस का नोट निकाला और पकड़ा दिया। 

शो रूम की तो आज शुरुआत ही थी । वापसी के पांच रुपये खुले ही नहीं मिले। पूरे शोरूम में अफरा-तफरी मच गई – पाँच रुपये छुट्टा किसी के पास नहीं!
हारकर अग्रवाल जी बोले – "साहब, अभी 5 रुपया छुट्टा नहीं है… आप टीवी तो ले जाइए।"

मंत्रीजी हँसते हुए बोले – "खुल्ले नहीं हैं... अरे अरे अग्रवालजी, चिंता क्यों करते हो?… पाँच रुपये के एवज में यह फ्रिज भी पैक करा दो।"

और इस तरह मंत्रीजी दो लाख का टीवी और पचहत्तर हज़ार का फ्रिज, दोनों लेकर चलते बने। लेकिन हाँ, ईमानदार मंत्रीजी ने  टीवी और फ्रिज की कीमत अग्रवालजी के कहे अनुसार पूरी चुकाई ।

अग्रवाल जी ने माथा पीटते हुए कर्मचारियों को डाँटा –
 "निकम्मों! तुम लोग खुल्ले क्यों नहीं रखते?  शुक्र है कि मंत्रीजी ने बीस का नोट नहीं दिया, नहीं तो मंत्रीजी अपने साथ एसी औऱ वाशिंग मशीन भी उठा ले जाते " ........!!

*⏰👨‍👨‍👦‍👦▶️आज तक में जो वस्तुएं एक,दो, पांच व दस रुपए में मिलती थी जिनपर 14 प्रतिशत जीएसटी लगता था आज उन पर पांच प्रतिशत जीएसटी कर दिया गया है किंतु आज भी वह वस्तुएं उतनी ही किमत पर उपलब्ध हो रही है। उदाहरण के लिए समझें जो शेप्पू एक रुपए में मिलता था आज भी वह उसी क्वान्टिटी में एक रुपए में मिल रहा है।*

*👨‍👨‍👦‍👦🌞🪔🔑विशेष:-भव्य आत्माओं , यह व्यंग्य हमें यह सिखाता है कि लालच और जोड़-तोड़ से अर्जित लाभ अंततः नुकसान ही पहुँचाता है। मंत्रीजी ने अपनी ईमानदारी का अनोखा प्रदर्शन किया, तो व्यापारी ने भी शॉर्टकट से फायदा लेने की कोशिश की। परंतु सच्चाई यह है कि भ्रष्टाचार केवल लेने वाले की गलती नहीं, बल्कि देने वाला भी उतना ही अपराधी है। यह बुराई दोनों पक्षों को धीरे-धीरे खोखला करती है।  समाज तभी स्वस्थ और सशक्त बनेगा जब ईमानदारी दिखाने के लिए दिखावा नहीं, बल्कि आचरण में सच्चाई होगी—और व्यापारी हो या नेता या कर्मचारी, सभी यह संकल्प लें कि न तो रिश्वत देंगे और न ही लेंगे।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 6 अक्टूबर 2025

त्याग या संग्रह

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 कार्तिक कृष्ण एकम, 07 अक्टूबर मंगलवार 2025 कलि काल के  14वें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री अनंतनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  अनंतनाथ  भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 माह अक्टूबर  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 07,10, 19,21,23 व 27 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎  अक्टूबर माह में अष्टमी तिथि 14 व 30 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 6 व 20 अक्टूबर  को है।*
*<👨‍👨‍👦‍👦⛳🪔🔔अक्टूबर 29 से 05 नवंबर तक अष्टान्हिका महापर्व*

*✅🔔⏰🐎 नोट अक्टूबर  माह से 31अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह आदि  शुभ कार्यों के मुहूर्त नहीं है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*त्याग या संग्रह*

 *जीवन की यात्रा का बोझ कम करे ।* 

अतीत का बोझ ढोना ऐसा है जैसे सिर पर भारी पत्थर उठाकर जीवन की राह पर चलना। यह बोझ हमें वर्तमान की खुशियों से दूर कर देता है और भीतर से खोखला बना देता है। जीवन को हल्का बनाने के लिए तीन सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं—पहला, यह स्वीकार करना कि अतीत बदला नहीं जा सकता, इसलिए उसे छोड़ देना ही उचित है। दूसरा, स्वयं और दूसरों को क्षमा करना, ताकि मन का बोझ हल्का हो। और तीसरा, पूरी तरह वर्तमान में जीना, क्योंकि वास्तविक आनंद और शांति केवल इसी क्षण में संभव है। यही सच्चे जीवन का सार है।
जीवन को आप कैसे देखते हैं, यह पूरी तरह आपके दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। जब आप अनावश्यक बोझ कम कर देते हैं, तो आपका जीवन फूलों की तरह सुगंधित और प्रकाशित हो जाता है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 *इस कहानी के माध्यम से सच्चाई समझते  हैं।* 

एक समय की बात है, एक गाँव में एक धार्मिक व्यक्ति रहता था। कुछ लोग उसे सिद्ध संत मानते थे, तो कुछ उसे असामान्य और पागल समझते थे। गाँव के बच्चे उसे “खिलौना बाबा” कहते थे, क्योंकि वह हमेशा उन्हें खिलौने और मिठाइयाँ बाँटता था।

वह भिक्षुक की तरह केवल उतना ही दान स्वीकार करता, जितना उसे एक दिन के लिए चाहिए होता। चाहे कोई चावल दे, रोटी या सब्ज़ी—वह सबको कृतज्ञता से स्वीकार करता। लेकिन उसके पास एक अनोखी शर्त थी—वह भोजन के साथ खिलौने और मिठाइयाँ भी माँगता। जो लोग उसका आदर करते, वे यह अतिरिक्त वस्तुएँ भी दे देते। बाबा उन सबको अपने बड़े थैले में रखकर गाँव के बच्चों में बाँट देता।

उसके व्यवहार में उदारता और उपस्थिति में दिव्यता झलकती थी। लेकिन कई लोग यह समझ नहीं पाते थे कि अगर वह इतना ज्ञानी है, तो गंदे कपड़े पहनकर भारी थैला उठाए इधर-उधर क्यों घूमता है? क्यों वह उपदेश देने के बजाय बच्चों में खिलौने बाँटने में व्यस्त रहता है?
एक दिन गाँव के कुछ लोग, जो बरगद के पेड़ के नीचे ताश खेल रहे थे, उस साधु को रोककर हँसते हुए बोले— “बाबा! हमें भी थोड़ा ज्ञान दीजिए। हमें विश्वास है कि आपके इस बड़े झोले में अवश्य ही वेद छिपे होंगे।”

साधु ने बिना कुछ कहे अपना थैला ज़मीन पर पटक दिया और बोला— “यही है आत्मा का बोध! मैंने आपको पूरे वेदों का सार समझा दिया।”

सब लोग हैरान रह गए। उनमें से एक बुद्धिमान व्यक्ति ने पूछा— “इसका क्या अर्थ हुआ बाबा? थैला गिराने से वेदों का सार कैसे समझा जा सकता है?”

साधु मुस्कुराया और बोला— “यह थैला, जिसे मैं ढो रहा था, मेरे लिए एक बड़ा भार था। जब मैंने इसे नीचे रख दिया, तब मैं मुक्त हो गया। यही संदेश है*   _*अपना बोझ छोड़ दो। बेकार की चिन्ताएँ, क्रोध, ईर्ष्या और स्वार्थ का भार मत ढोओ। तभी तुम स्वतंत्र होकर जी सकोगे।”*_ 
यह सुनकर सब लोग श्रद्धा से भर गए। उनमें से एक ने फिर पूछा— “बाबा, यदि यही सब कुछ है, तो अगला चरण क्या है?”

साधु ने अपना थैला दोबारा उठाया और बच्चों की ओर बढ़ते हुए बोला— *“अब यह बोझ नहीं, बल्कि आनंद का साधन है। इसमें बच्चों की खुशी छिपी है। यह आपकी दृष्टि पर निर्भर करता है कि किसी वस्तु को आप बोझ मानते हैं या अपना धर्म।”* 

यह कहकर बाबा अपने मार्ग पर चल दिए।

 *👨‍👨‍👦‍👦🔔🪔⛳विशेष:- भव्य आत्माओं,जीवन का वास्तविक सुख त्याग और स्वतंत्रता में है। अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए मन का थैला—भय, चिंताओं और नकारात्मक भावनाओं से खाली कर दो। तभी आप निडर, मुक्त और आनंदमय जीवन जी पाओगे।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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