*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 धन्य तेरस ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨👨👦👦🐎🔑 कार्तिक कृष्ण 13, 19 अक्टूबर रविवार 2025 कलि काल के छठवें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री पद्मप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से सूर्य की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री पद्मप्रभ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨👨👦👦🐎🔑 कार्तिक अमावस्या, 21 अक्टूबर मंगलवार 2025 कलि काल के अंतिम तीर्थंकर उपसर्ग विजेता शासन नायक सर्व सुखकारी श्री वर्धमान भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री वर्धमान भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*⛳🪔👨👨👦👦नोट:-आज सांयकाल में गौतम गणधर परमेष्ठि को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई थी ।इस अवसर मंदिर जी और घर-प्रतिष्ठान में दीपोत्सव मनायेंगे।*
*🎪 माह अक्टूबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 07,10, 19,21,23 व 27 तारीख को है।*
*👨👨👦👦🔔🐎 अक्टूबर माह में अष्टमी तिथि 14 व 30 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 6 व 20 अक्टूबर को है।*
*<👨👨👦👦⛳🪔🔔अक्टूबर 29 से 05 नवंबर तक अष्टान्हिका महापर्व*
*✅🔔⏰🐎 नोट अक्टूबर माह में 31अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह आदि शुभ कार्यों के मुहूर्त नहीं है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*जैन धर्म में धन्य तेरस का महत्व*
जैन आगम में धनतेरस को 'धन्य तेरस' या 'ध्यान तेरस' भी कहते हैं। अंतिम तीर्थंकर शासन नायक भगवान महावीर स्वामी ने इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिये चले गये थे। तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुये। तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र रजिस्टर संस्था के 📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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जैन धर्म में धन्य तेरस केवल भौतिक समृद्धि का पर्व नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक समृद्धि, दान और धर्म के पालन की याद भी दिलाता है।. इस दिन जैन समुदाय को लोग सिर्फ धन, सोना-चांदी की पूजा नहीं करते बल्कि धार्मिक ग्रंथों, ज्ञान और साधना के साधनों की भी पूजा की जाती है। घर और व्यवसाय में यह पूजा संपत्ति की सुरक्षा, व्यापार में वृद्धि और परिवार में सुख-शांति लाने के लिए की जाती है। इस बार धनतेरस 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
इस दिन दान और परोपकार का विशेष महत्व होता है।इस दिन दिगंबर साधुओं के रत्नत्रय में सभी को अपनी शक्ति अनुसार सहायक बनकर जीवन धन्य करना चाहिए।गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और आवश्यक वस्तुएं दान करना पुण्य माना जाता है। धन्यतेरस हमें सिखाता है कि धन का सही उपयोग और त्याग जीवन में सच्ची समृद्धि लाते हैं।हम सभी के आवश्यक कर्तव्यों के करने से हमारे कर्मों का क्षय होता है।
जैन धर्म में दान और परोपकार का महत्व
धन्यतेरस के दिन जैन धर्म में दान और परोपकार का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, पैसे और अन्य आवश्यक वस्तुएं दान करना शुभ माना जाता है. जैन धर्म के अनुसार, दान केवल आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि यह कर्म और पुण्य का माध्यम भी है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक संतोष लाता है।. धन्य तेरस पर किया गया दान परिवार में खुशहाली, सुख-शांति और सामंजस्य बढ़ाने में मदद करता है। यह परंपरा हमें सिखाती है कि धन का सही उपयोग और दूसरों की मदद करना जीवन में सच्ची समृद्धि लाता है।
भगवान महावीर से जुड़ी परंपरा
धनतेरस का दिन जैन धर्म में भगवान महावीर से भी जुड़ा हुआ है.। जैन परंपरा के अनुसार, इस दिन भगवान महावीर ने अपने जीवन में बाहरी संपत्ति समवशरण का त्याग कर अपने आत्म ध्यान में लीन हो गए थे। उनके इस मार्ग ने जैन अनुयायियों को सच्चे जीवन मूल्यों, संयम और आत्मिक विकास की प्रेरणा दी है इसलिए धन्यतेरस पर केवल भौतिक धन, सोना या चांदी की खरीद नहीं की जाती, बल्कि धार्मिक ग्रंथों, ज्ञान और साधना के साधनों का भी पूजन किया जाता है।. यह परंपरा याद दिलाती है कि धन्य है आज का दिन जिसका सही उपयोग और आध्यात्मिक साधना जीवन में संतुलन और सच्ची समृद्धि लाता है।
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*