गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025

भ्रष्टाचार युक्त राजनीति व व्यापारी

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 भ्रष्टाचार युक्त राजनीति व व्यापारी ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 कार्तिक कृष्ण 4, 10 अक्टूबर शुक्रवार 2025 कलि काल के  तिसरे  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री संभवनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  संभवनाथ  भगवान जी का केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 माह अक्टूबर  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 07,10, 19,21,23 व 27 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎  अक्टूबर माह में अष्टमी तिथि 14 व 30 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 6 व 20 अक्टूबर  को है।*
*<👨‍👨‍👦‍👦⛳🪔🔔अक्टूबर 29 से 05 नवंबर तक अष्टान्हिका महापर्व*

*✅🔔⏰🐎 नोट अक्टूबर  माह से 31अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह आदि  शुभ कार्यों के मुहूर्त नहीं है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*भ्रष्टाचार युक्त राजनीति व व्यापारी* 

कहते हैं राजनीति और व्यापार, दोनों ही ऐसे अखाड़े हैं जहाँ हर कोई अपनी गोटी फिट करने में लगा रहता है। कोई सत्ता की ताक़त दिखाता है, तो कोई लाभ-हानि का हिसाब लगाता है। लेकिन जब दोनों आमने-सामने आ जाएँ, तो हास्य और विडंबना की स्थिति भी बन जाती है। 
यह कहानी आज की वर्तमान भ्रष्टाचार युक्त राजनेता व लोभी व्यापारी उसीपर आधारित एक नमूना है।

"मंत्रीजी, मेरे नए शोरूम का उद्घाटन आपके करकमलों से ही होना चाहिए," – दोनों हाथ जोड़ते हुए अग्रवालजी ने प्रार्थना की।

मंत्रीजी ने अकड़ते हुए कहा – "ठीक है-ठीक है, तारीख़ मेरे पीए को बता दो, मैं कोशिश करूँगा।"

"नहीं साहब, आप आए बिना यह संभव नहीं," – 

अग्रवाल जी ने मान-मनुहार शुरू कर दी।

मंत्रीजी ने गले को साफ़ करते हुए आदेशात्मक अंदाज़ में कहा – "तो फिर आ ही जाऊँगा।"

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समय पर मंत्रीजी अपनी पूरी फ़ौज-फटकार के साथ पहुँचे। ढोल-नगाड़े बजे, फूल बरसे और फीता कटते ही शोरूम चमक उठा।
*🪔कुछ समय पहले सभी भाषाओं में भारत में मन की बात का मायाजाल फैलाया गया।उस मन की बात की सच्चाई आजतक किसी ने सपने में भी सच होते नहीं देखी। यह सच्चाई आजतक लोगों की समझ में नहीं आई।*

अंदर घुसते ही मंत्रीजी की नज़रें चमकदार इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर टिकीं। टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एसी – सब कुछ देखते देखते उनकी नज़र खासतौर पर एक विशाल एलइडी टीवी पर अटक गई। "अग्रवाल जी, यह कितने का है?" – उन्होंने ऐसे पूछा मानो सौदा करने ही आए हों। 
"सर, मात्र दो लाख का," – अग्रवाल जी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
मंत्रीजी की आँखें गोलगप्पे की तरह फैल गईं। 

पेशे से पक्के मझे हुए व्यवसायी अनुभवी अग्रवालजी को समझते ये देर न लगी कि मंत्रीजी को टीवी भा गया है । उन्होंने सोचा –अगर यह टीवी गिफ्ट कर दूँ तो भविष्य में जीएसटी, लाइसेंस फीस, निरीक्षण शुल्क जैसी तमाम सरकारी विभागीय उलझनों से छुटकारा मिल जाएगा।

"मंत्रीजी, यह टीवी मैं आपको उपहार स्वरूप भेंट करता हूँ," –
अग्रवालजी ने तुरंत पासा फेंका।

मंत्रीजी के भीतर तो लड्डू फूटने लगे, मगर चेहरे पर गंभीरता लाते हुए बोले – "अग्रवालजी, मैं मुफ़्त का सामान नहीं लेता। मेरी ईमानदारी पूरे इलाके में मशहूर है। इसकी कीमत चुकानी ही होगी।"
यह कहकर मंत्रीजी अपने अनुभव अनुसार चेहरे पर भाव लाते हुये बाहर निकलने लगे।

अग्रवालजी ने मौका भाँपते हुए कहा – "ठीक है सर, फिर प्रतीकात्मक रूप से पाँच रुपये ही दे दीजिए।"

मंत्रीजी ने जेब से दस का नोट निकाला और पकड़ा दिया। 

शो रूम की तो आज शुरुआत ही थी । वापसी के पांच रुपये खुले ही नहीं मिले। पूरे शोरूम में अफरा-तफरी मच गई – पाँच रुपये छुट्टा किसी के पास नहीं!
हारकर अग्रवाल जी बोले – "साहब, अभी 5 रुपया छुट्टा नहीं है… आप टीवी तो ले जाइए।"

मंत्रीजी हँसते हुए बोले – "खुल्ले नहीं हैं... अरे अरे अग्रवालजी, चिंता क्यों करते हो?… पाँच रुपये के एवज में यह फ्रिज भी पैक करा दो।"

और इस तरह मंत्रीजी दो लाख का टीवी और पचहत्तर हज़ार का फ्रिज, दोनों लेकर चलते बने। लेकिन हाँ, ईमानदार मंत्रीजी ने  टीवी और फ्रिज की कीमत अग्रवालजी के कहे अनुसार पूरी चुकाई ।

अग्रवाल जी ने माथा पीटते हुए कर्मचारियों को डाँटा –
 "निकम्मों! तुम लोग खुल्ले क्यों नहीं रखते?  शुक्र है कि मंत्रीजी ने बीस का नोट नहीं दिया, नहीं तो मंत्रीजी अपने साथ एसी औऱ वाशिंग मशीन भी उठा ले जाते " ........!!

*⏰👨‍👨‍👦‍👦▶️आज तक में जो वस्तुएं एक,दो, पांच व दस रुपए में मिलती थी जिनपर 14 प्रतिशत जीएसटी लगता था आज उन पर पांच प्रतिशत जीएसटी कर दिया गया है किंतु आज भी वह वस्तुएं उतनी ही किमत पर उपलब्ध हो रही है। उदाहरण के लिए समझें जो शेप्पू एक रुपए में मिलता था आज भी वह उसी क्वान्टिटी में एक रुपए में मिल रहा है।*

*👨‍👨‍👦‍👦🌞🪔🔑विशेष:-भव्य आत्माओं , यह व्यंग्य हमें यह सिखाता है कि लालच और जोड़-तोड़ से अर्जित लाभ अंततः नुकसान ही पहुँचाता है। मंत्रीजी ने अपनी ईमानदारी का अनोखा प्रदर्शन किया, तो व्यापारी ने भी शॉर्टकट से फायदा लेने की कोशिश की। परंतु सच्चाई यह है कि भ्रष्टाचार केवल लेने वाले की गलती नहीं, बल्कि देने वाला भी उतना ही अपराधी है। यह बुराई दोनों पक्षों को धीरे-धीरे खोखला करती है।  समाज तभी स्वस्थ और सशक्त बनेगा जब ईमानदारी दिखाने के लिए दिखावा नहीं, बल्कि आचरण में सच्चाई होगी—और व्यापारी हो या नेता या कर्मचारी, सभी यह संकल्प लें कि न तो रिश्वत देंगे और न ही लेंगे।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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