मंगलवार, 24 दिसंबर 2024

संस्कारों का महत्व

*संस्कारों का महत्व*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 संस्कारों का महत्व ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 पौष वदी ग्यारस, गुरुवार , 26 दिसंबर 2024 कलि काल के अष्टम तीर्थंकर श्री चन्द्रप्रभ भगवानजी जिनकी आराधना से चंद्र की महादशा  अनुकूल बन जाती है व सभी प्रकार के विघ्न बाधाओं को सहन करने की शक्ति प्राप्त कर उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री चन्द्रप्रभ भगवानजी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है। 🔔▶️आज ही के दिन 23वें तीर्थंकर उपसर्ग विजेता श्री पार्श्वनाथ भगवान केतु की महादशा को अनुकूल बनवा कर मोक्ष मार्ग में दृढ़ता प्रदान करने वाले श्री पार्श्वनाथजी का भी जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 दिसंबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  26,29 को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 दिसंबर माह में   चतुर्दशी तिथि  29 दिसम्बर को है।*

*🙆इस दिसंबर माह में ↔️ग्रह प्रवेश मुहूर्त 05,11,25,28 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*संस्कारों का महत्व* 

एक राजा के पास सुंदर घोड़ी थी। कई बार युद्ध में इस घोड़ी ने राजा के प्राण बचाए और घोड़ी राजा के लिए पूरी वफादार थी, कुछ दिनों के बाद इस घोड़ी ने एक बच्चे को जन्म दिया, बच्चा काना पैदा हुआ, पर शरीर हृष्ट पुष्ट व सुडौल था।

बच्चा बड़ा हुआ, बच्चे ने मां से पूछा- मां मैं बहुत बलवान हूं, पर काना हूं...। यह कैसे हो गया, इस पर घोड़ी बोली- बेटा जब मैं गर्भवती थी, तब राजा ने मेरे ऊपर सवारी करते समय मुझे एक कोड़ा मार दिया, जिसके कारण तू काना हो गया। यह बात सुनकर बच्चे को राजा पर गुस्सा आया और मां से बोला- मां मैं इसका बदला लूंगा।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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मां ने कहा, बेटा राजा ने हमारा पालन-पोषण किया है। तू जो स्वस्थ है, सुन्दर है, हृष्ट-पुष्ट है उसी के पोषण से तो है। यदि राजा को एक बार गुस्सा आ गया, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि हम उसे क्षति पहुचाएं। मगर, उस बच्चे के समझ में कुछ नहीं आया। उसने मन ही मन राजा से बदला लेने की ठान ली।

वह लगातार राजा से बदला लेने के बारे में सोचता रहता था और एक दिन यह मौका घोड़े को मिल गया। राजा उसे युद्ध  पर ले गया। युद्व लड़ते-लड़ते राजा एक जगह घायल हो गया। घोड़े के पास राजा को युद्ध के मैदान में छोड़कर भाग निकलने का पूरा मौका था।

यदि वह ऐसा करता, तो राजा या तो पकड़ा जाता या दुश्मनों के हाथों मार दिया जाता। मगर, उस वक्त घोड़े के मन में ऐसा कोई ख्याल ही नहीं आया और वह राजा को तुरंत उठाकर वापिस महल ले आया। इस पर घोड़े को स्वयं ताज्जूब हुआ और उसने मां से पूछा- मां आज तो राजा से बदला लेने का सबसे अच्छा मौका था, पर युद्व के मैदान में बदला लेने का ख्याल ही नहीं आया और न ही मैं राजा से बदला ले पाया।

मन ने गवाही नहीं दी, राजा से बदला लेने की। ऐसा क्यों हुआ मां। इस पर मां घोडी हंस कर बोली- बेटा तेरे खून में और तेरे संस्कार में धोखा है ही नहीं, तू जानबूझकर तो धोखा दे ही नहीं सकता है। तुझसे नमक हरामी हो ही नहीं सकती, क्योंकि तेरी नस्ल में तेरी मां का ही तो अंश है। मेरे संस्कार और सीख को तू कैसे झुठला सकता था।

*वाकई.. दोस्तों यह सत्य है कि जैसे हमारे संस्कार होते हैं, वैसा ही हमारे मन का व्यवहार होता है। हमारे पारिवारिक-संस्कार अवचेतन मस्तिष्क में गहरे बैठ जाते हैं, माता-पिता जिस संस्कार के होते हैं, उनके बच्चे भी उसी संस्कारों को लेकर पैदा होते हैं। हमारे कर्म ही 'संस्‍कार' बनते हैं और संस्कार ही प्रारब्धों का रूप लेते हैं । यदि हम कर्मों को सही व बेहतर दिशा दे दें, तो संस्कार अच्छे बनेंगे और संस्कार अच्छे बनेंगे, तो जो प्रारब्ध का फल बनेगा, वह अच्छा होगा*।

*🎪👨‍👨‍👦‍👦▶️विशेष:-भव्य आत्माओं, आज हम सभी आधुनिक युग का अनुसरण करने के कारण सच्चे देव शास्त्र गुरु का उपदेश व अपने षट् आवश्यक कार्यों को विस्मृत करते जा रहे है।इसी कारण से हम सभी का पतन हो रहा है। सभी स्वयं का आकलन कर स्वयं को धर्म में स्थित करें यही मंगल कामना ईश्वर से व आप सभी से करते है।🔔*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 16 दिसंबर 2024

असली धन

*असली धन*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 असली धन✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔🪔 पौष वदी द्वितीया, मंगलवार , 17 दिसंबर 2024 कलि काल के 19 वें तीर्थंकर मल्लिनाथ केतु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के विघ्न बाधाओं को सहन करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री मल्लिनाथ भगवानजी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 दिसंबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 10, 11, 14, 15, 17, 26,29 को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 दिसंबर माह में  अष्टमी तिथि  08 व 23 को है। चतुर्दशी तिथि 14 व 29 दिसम्बर को है।*

*🙆इस दिसंबर माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त अभी मलमास के कारण 14 जनवरी 2026 तक नहीं है।👨‍👨‍👦‍👦↔️ग्रह प्रवेश मुहूर्त 05,11,25,28 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*💐💐असली धन 💐💐*

एक बड़ी सी गाड़ी आकर बाजार में रूकी, कार में ही मोबाईल से बातें करते हुए महिला ने अपनी बच्ची से कहा, जा उस बुढिया से पूछ सब्जी कैंसे दी, बच्ची कार से उतरतें ही- अरें बुढिया ! यें सब्जी कैंसे दी?
40 रूपयें किलो, बेबी जी...
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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सब्जी लेते ही उस बच्ची ने सौ रूपयें का नोट उस सब्जी वाली को फेंक कर दिया और आकर कार पर बैठ गयी, कार जाने लगी तभी अचानक किसी ने कार के सीसे पर दस्तक दी, एक छोटी सी बच्ची जो हाथ में 60 रूपयें कार में बैठी उस औरत को देते हुए, बोलती हैं आंटी जी यें आपके सब्जी के बचें 60 रूपयें हैं, आपकी बेटी भूल आयी हैं। कार में बैठी औरत ने कहा तुम रख लों, उस बच्ची ने बड़ी ही मिठी और सभ्यता से कहा- नहीं आंटी जी हमारें जितने पैंसे बनते थें हमने ले लियें, हम इसे नहीं रख सकतें, मैं आपकी आभारी हूं, आप हमारी दुकान पर आए और आशा करती हूं कि सब्जी आपको अच्छी लगें, जिससे आप हमारें ही दुकान पर हमेशा आए। उस लड़की ने हाथ जोड़े और अपनी दुकान लौट गयी...

कार में बैठी महिला उस लड़की से बहुत प्रभावित हुई और कार से उतर कर फिर सब्जी की दुकान पर जाने लगी, जैसें ही वहाँ पास गयी, सब्जी वाली अपनी बच्ची को पूछते हुयें, तुमने तमीज से बात की ना, कोई शिकायत का मौका तो नहीं दिया ना..?

बच्ची ने कहा, हाँ माँ मुझे आपकी सिखाई हर बात याद है, कभी किसी बड़े का अपमान मत करो, उनसे सभ्यता से बात करो, उनकी कद्र करो, क्यूंकि बड़े-बुजर्ग बड़े ही होते हैं, मुझे आपकी सारी बात याद है और मैं सदैव इन बातों का स्मरण रखूंगी। बच्ची ने फिर कहा, अच्छा माँ अब मैं स्कूल चलती हूं, शाम में स्कूल से छुट्टी होते ही, दुकान पर आ जाऊंगी...

कार वाली महिला शर्म से पानी पानी थी, क्यूंकि एक सब्जी वाली अपनी बेटी को इंसानियत और बड़ों से बात करने के शिष्टाचार का पाठ सीखा रही थी और वह महिला अपनी बेटी को छोटा-बड़ा, ऊंच-नीच का मन में बीज बो रही थी..!!

सबसे अच्छा तो वो कहलाता है जो आसमान पर भी रहता है और जमींन से भी जुड़ा रहता है। बस इंसानियत, भाईचारें, सभ्यता, आचरण, वाणी में मिठास, सब की इज्जत करने की सीख दीजिए अपने बच्चों को, क्यूंकि अब बस यहीं पढ़ाई है जो आने वाले समय में बहुत ही ज्यादा मुश्किल होगी इसे पढ़ने, इसे याद रखने, इसे ग्रहण करने में और जीवन को उपयोगी बनानें में !!

*🔔👨‍👨‍👦‍👦🌞👉🙏विशेष:-भव्य आत्माओं, आज वर्तमान में हमारे स्वयं के अंदर से जो हमारे माता-पिता व अन्य रिश्तेदारों ने हमें मूलभूत संस्कार दिए थे वे नहीं के बराबर हो गए है। जिसके कारण हम अपने परिवार के लोगों को वह शिक्षा नहीं दे पा रहे है।आज सबसे बड़ा धन है तो वह है सुसंस्कार इसलिए इसे हम अपनी भूल मानकर स्वयं संस्कारवान बनकर जीवन सार्थक करें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 13 दिसंबर 2024

हीरे से अनमोल रत्न

*हीरे से अनमोल रत्न*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*

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*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्दशी, शनिवार , 14 दिसंबर 2024 कलि काल के 18 वें तीर्थंकर अरनाथ बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार से सद्बुद्धि  प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री अरनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 मार्गशीर्ष पूर्णिमा, रविवार , 15 दिसंबर 2024 कलि काल के तृतीय तीर्थंकर संभवनाथ गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार से सद्बुद्धि  प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री संभवनाथ का तप कल्याणक महोत्सव है।*

*🔔 दिसंबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 10, 11, 14, 15, 17, 26,29 को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 दिसंबर माह में  अष्टमी तिथि  08 व 23 को है। चतुर्दशी तिथि 14 व 29 दिसम्बर को है।*

*🙆इस दिसंबर माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 04, 05, 09, 10, 14, 15 को  है।▶️पंचक 7 से 11 दिसंबर तक है।👨‍👨‍👦‍👦↔️ग्रह प्रवेश मुहूर्त 05,11,25,28 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*🌳हीरे से अनमोल क्या है?🌳*

 *एक दिगंबर संत एक वृक्ष के नीचे ध्यान करते थे । वो रोज एक लकड़हारे को लकड़ी काट कर ले जाते देखते थे।*

 *एक दिन उन्होंने लकड़हारे से कहा कि सुन भाई, दिन-भर लकड़ी काटता है, दो जून रोटी भी नहीं जुट पाती । तू जरा आगे क्यों नहीं जाता, वहां आगे चंदन का जंगल है ।*
 *एक दिन काट लेगा, सात दिन के खाने के लिए काफी हो जाएगा ।*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*गरीब लकड़हारे को विश्वास नहीं हुआ, क्योंकि वह तो सोचता था कि जंगल को जितना वह जानता है और कौन जानता है ! जंगल में लकड़ियां काटते-काटते ही तो जिंदगी बीती । यह संत यहां बैठा रहता है वृक्ष के नीचे, इसको क्या खाक पता होगा ?*

 *मानने का मन तो न हुआ, लेकिन फिर सोचा कि हर्ज क्या है, कौन जाने ठीक ही कहता हो ! फिर झूठ कहेगा भी क्यों ? शांत आदमी मालूम पड़ता है, मस्त आदमी मालूम पड़ता है । कभी बोला भी नहीं इसके पहले । एक बार प्रयोग करके देख लेना जरूरी है ।*

*संत की बातों पर विश्वास कर वह आगे गया । लौटा तो संत के चरणों में सिर रखा और कहा कि मुझे क्षमा करना, मेरे मन में बड़ा संदेह आया था, क्योंकि मैं तो सोचता था कि मुझसे ज्यादा लकड़ियां के बारे में कौन जानता है ।*

 *मगर मुझे चंदन की पहचान ही न थी । मेरा बाप भी लकड़हारा था, उसका बाप भी लकड़हारा था । हम यही जलाऊ-लकड़ियां काटते-काटते जिंदगी बिताते रहे, हमें चंदन का पता भी क्या, चंदन की पहचान क्या ! हमें तो चंदन मिल भी जाता तो भी हम काटकर बेच आते उसे बाजार में ऐसे ही । तुमने पहचान बताई, तुमने गंध जतलाई, तुमने परख दी ।*

*मैं भी कैसा अभागा ! काश, पहले पता चल जाता ! संत ने कहा कोई फिक्र न करो, जब पता चला तभी जल्दी है । जब जागा तभी सबेरा है । दिन बड़े मजे में कटने लगे ।* 

*एक दिन काट लेता, सात— आठ दिन, दस दिन जंगल आने की जरूरत ही न रहती।* 

*एक दिन संत ने कहा ; मेरे भाई, मैं सोचता था कि तुम्हें कुछ अक्ल आएगी । जिंदगी— भर तुम लकड़ियां काटते रहे, आगे न गए ; तुम्हें कभी यह सवाल नहीं उठा कि इस चंदन के आगे भी कुछ हो सकता है ?*

 *उसने कहा; यह तो मुझे सवाल ही न आया। क्या चंदन के आगे भी कुछ है ?*

*उस संत ने कहा : चंदन के जरा आगे जाओ तो वहां चांदी की खदान है । लकड़ियाँ-वकडियाँ काटना छोड़ो ।*

 *एक दिन ले आओगे, दो-चार छ: महीने के लिए हो गया ।* 

*अब तो वह संत पर भरोसा करने लगा था । बिना संदेह किये भागा । चांदी पर हाथ लग गए, तो कहना ही क्या ! चांदी ही चांदी थी ! चार-छ: महीने नदारद हो जाता । एक दिन आ जाता, फिर नदारद हो जाता ।*

*लेकिन व्यक्ति का मन ऐसा मूढ़ है कि फिर भी उसे खयाल न आया कि और आगे कुछ हो सकता है ।* 

*संत ने एक दिन कहा कि तुम कभी जागोगे कि नहीं, कि मुझे ही तुम्हें जगाना पड़ेगा ।* 

*आगे सोने की खदान है मूर्ख ! तुझे खुद अपनी तरफ से सवाल, जिज्ञासा कुछ नहीं उठती कि जरा और आगे देख लूं ?* 

*अब छह महीने मस्त पड़ा रहता है, घर में कुछ काम भी नहीं है, फुरसत है । जरा जंगल में आगे देखकर देखूं यह खयाल नहीं आता ?*

*उसने कहा कि मैं भी मंदभागी, मुझे यह खयाल ही न आया, मैं तो समझा चांदी, बस बात बन गई, अब और क्या होगा ?* 

*गरीब ने सोना तो कभी देखा न था, सुना था। संत ने कहा, थोड़ा और आगे सोने की खदान है। और ऐसे कहानी चलती है।* 

*फिर और आगे हीरों की खदान है । और ऐसे कहानी चलती है। और एक दिन संत ने कहा कि नासमझ, अब तू हीरों पर ही रुक गया ?* 

*अब तो उस लकड़हारे को भी बडी अकड़ आ गई, बड़ा धनी भी हो गया था, महल खड़े कर लिए थे । उसने कहा अब छोड़ो, अब तुम मुझे परेशांन न करो। अब हीरों के आगे क्या हो सकता है ?*

*उस संत ने कहा, हीरों के आगे मैं हूं। तुझे यह कभी खयाल नहीं आया कि यह व्यक्ति मस्त यहां बैठा है, जिसे पता है हीरों की खदान का, वह हीरे नहीं ले रहा है, इसको जरूर कुछ और आगे मिल गया होगा ! हीरों से भी आगे इसके पास कुछ होगा, तुझे कभी यह सवाल नहीं उठा ?*

*वह व्यक्ति रोने लगा। संत के चरणों में सिर पटक दिया। कहा कि मैं कैसा मूढ़ हूं, मुझे यह सवाल ही नहीं आता।* 

*तुम जब बताते हो, तब मुझे याद आता है। यह ख्याल तो मेरे जन्मों-जन्मों में नहीं आ सकता था। कि तुम्हारे पास हीरों से भी बड़ा कोई धन है। संत ने कहा : उसी धन का नाम ,"रत्नत्रय" यानी सम्यक दर्शन सम्यक ज्ञान सम्यक चारित्र है।*

 *अब खूब तेरे पास धन है, अब धन की कोई जरूरत नहीं। अब जरा अपने "भीतर की खदान"  खोद, जिसमें रत्नत्रय नाम के तीनों रत्न है जिसे कोई भी चुरा नहीं सकता, कोई हरा नहीं सकता यह सबसे आगे है ।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 9 दिसंबर 2024

मेरी इच्छाएं

*मेरी इच्छाएं*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरी इच्छाएं ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी, मंगलवार , 10 दिसंबर 2024 कलिकाल के 18 वें तीर्थंकर अरनाथ बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार से सद्बुद्धि  प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री अरनाथ   का  तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 मार्गशीर्ष शुक्ल ग्यारस, बुधवार , 11 दिसंबर 2024 कलिकाल के 19 वें तीर्थंकर मल्ली नाथ केतु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार से सद्बुद्धि  प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री मल्ली नाथ  का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।▶️ आज ही के दिन 21 वें तीर्थंकर नमिनाथ जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा को अनुकूल बनाकर मोक्ष मार्ग में स्थित होते है।नमिनाथ भगवानजी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*

*🔔 दिसंबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 10, 11, 14, 15, 17, 26,29 को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 दिसंबर माह में  अष्टमी तिथि   23 को है। चतुर्दशी तिथि 14 व 29 दिसम्बर को है।*

*🙆इस दिसंबर माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 04, 05, 09, 10, 14, 15 को  है।▶️पंचक 7 से 11 दिसंबर तक है।👨‍👨‍👦‍👦↔️ग्रह प्रवेश मुहूर्त 05,11,25,28 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*🌳🦚आज की कहानी मेरी इच्छाएं 🦚🌳*


*💐💐साधु और खजूर💐💐*
एक दिन की बात है, एक साधु गाँव के बाहर वन में स्थित अपनी कुटिया की ओर जा रहा था। रास्ते में बाज़ार पड़ा. बाज़ार से गुजरते हुए साधु की दृष्टि एक दुकान में रखी ढेर सारी टोकरियों पर पड़ी। उसमें ख़जूर रखे हुए थे। ख़जूर देखकर साधु का मन ललचा गया। उसके मन में ख़जूर खाने की इच्छा जाग उठी, किंतु उस समय उसके पास पैसे नहीं थे. उसने अपनी इच्छा पर नियंत्रण रखा और कुटिया चला आया। कुटिया पहुँचने के बाद भी ख़जूर का विचार साधु के मन से नहीं निकल पाया। वह उसी के बारे में ही सोचता रहा।रात में वह ठीक से सो भी नहीं पाया।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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अगली सुबह जब वह जागा, तो ख़जूर खाने की अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए पैसे की व्यवस्था करने के बारे में सोचने लगा,सूखी लकड़ियाँ बेचकर ख़जूर खरीदने लायक पैसों की व्यवस्था अवश्य हो जायेगी, यह सोचकर वह जंगल में गया और सूखी लकड़ियाँ बीनने लगा,काफ़ी लकड़ियाँ एकत्रित कर लेने के बाद उसने उसका गठ्ठर बनाया और उसे अपने कंधे पर लादकर बाज़ार की ओर चल पड़ा। लड़कियों का गठ्ठर भारी था, जिसे उठाकर बाज़ार तक की दूरी तय करना आसान नहीं था, किंतु साधु चलता गया. थोड़ी देर में उसके कंधे में दर्द होने लगा। इसलिए विश्राम करने वह एक स्थान पर रुक गया।

थोड़ी देर विश्राम कर वह पुनः लकड़ियाँ उठाकर चलने लगा. इसी तरह रुक-रुक कर किसी तरह वह लकड़ियों के गठ्ठर के साथ बाज़ार पहुँचा। बाज़ार में उसने सारी लकड़ियाँ बेच दी। अब उसके पास इतने पैसे इकठ्ठे हो गए, जिससे वह ख़जूर खरीद सके वह बहुत प्रसन्न हुआ और खजूर की दुकान में पहुँचा। सारे पैसों से उसने खजूर खरीद लिए और वापस अपनी कुटिया की ओर चल पड़ा। कुटिया की ओर जाते-जाते उसके मन में विचार आया कि आज मुझे ख़जूर खाने की इच्छा हुई।हो सकता है कल किसी और वस्तु की इच्छा हो जाये. कभी नए वस्त्रों की इच्छा जाग जायेगी, तो कभी अच्छे घर की।

कभी स्त्री और बच्चों की, तो कभी धन की। मैं तो साधु व्यक्ति हूँ. इस तरह से तो मैं इच्छाओं का दास बन जाऊंगा। यह विचार आते ही साधु ने ख़जूर खाने का विचार त्याग दिया. उस समय उसके पास से एक गरीब व्यक्ति गुजर रहा था. साधु ने उसे बुलाया और सारे खजूर उसे दे दिए. इस तरह उसने स्वयं को इच्छाओं का दास बनने से बचा लिया।

*💐 विशेष 💐 भव्य आत्माओं :- यदि हम अपनी हर इच्छाओं के आगे हार जायेंगे, तो सदा के लिए अपनी इच्छाओं के दास बन जायेंगे। मन चंचल होता है. उसमें रह-रहकर इच्छायें उत्पन्न होती रहती हैं। एक इच्छा पूरी हो तो दूसरी इस प्रकार इच्छाएं समाप्त नहीं होती।जो उचित भी हो सकती हैं और अनुचित भी। ऐसे में इच्छाओं पर नियंत्रण रखना आवश्यक है. सोच-विचार कर इच्छाओं के आंकलन के उपरांत ही उनकी पूर्ति के लिए कदम बढ़ाना चाहिए।तभी जीवन में सफ़लता प्राप्त होगी। हमें इच्छाओं का दास नहीं बनाना है, बल्कि इच्छाओं को अपना दास बनाकर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करना है।*

*आप चाहे किसी भी समाज से हो, अगर आप अपने समाज के किसी उभरते हुए व्यक्तित्व से जलते हो या उसकी निंदा करते हो तो आप निश्चित रूप से इस पृथ्वी पर बोझ हो ।यही विचारधारा आपके पतन का भी मुख्य कारण है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 30 नवंबर 2024

इच्छापूर्ति का वृक्ष

*इच्छापूर्ति का वृक्ष*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*

*💪👩‍🚒इच्छापूर्ति का वृक्ष ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 मार्गशीर्ष शुक्ल एकम, सोमवार , 2 दिसंबर 2024 कलिकाल के नौवें तीर्थंकर सुविधिनाथजी शुक्र की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार से वैभव संपदा प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री सुविधिनाथजी   का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 दिसंबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 10, 11, 14, 15, 17, 26,29 को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 दिसंबर माह में  अष्टमी तिथि  08 व 23 को है। चतुर्दशी तिथि 14 व 29 दिसम्बर को है।*

*🙆इस दिसंबर माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 04, 05, 09, 10, 14, 15 को  है।▶️पंचक 7 से 11 दिसंबर तक है।👨‍👨‍👦‍👦↔️ग्रह प्रवेश मुहूर्त 05,11,25,28 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐इच्छापूर्ति का वृक्ष 💐*

एक घने जंगल में एक इच्छा पूर्ति वृक्ष था, उसके नीचे बैठ कर कोई भी इच्छा करने से वह तुरंत पूरी हो जाती थी। यह बात बहुत कम लोग जानते थे क्योंकि उस घने जंगल में जाने की कोई हिम्मत ही नहीं करता था।

एक बार संयोग से एक थका हुआ व्यापारी उस वृक्ष के नीचे आराम करने के लिए बैठ गया उसे पता ही नहीं चला कि कब उसकी नींद लग गयी।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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जागते ही उसे बहुत भूख लगी, उसने आस पास देखकर सोचा- 'काश कुछ खाने को मिल जाए!' तत्काल स्वादिष्ट पकवानों से भरी थाली हवा में तैरती हुई उसके सामने आ गई।

व्यापारी ने भरपेट खाना खाया और भूख शांत होने के बाद सोचने लगा..

काश कुछ पीने को मिल जाए.. तत्काल उसके सामने हवा में तैरते हुए अनेक शरबत आ गए। शरबत पीने के बाद वह आराम से बैठ कर सोचने लगा-  कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा हूं। हवा में से खाना पानी प्रकट होते पहले कभी नहीं देखा न ही सुना.. 

जरूर इस पेड़ पर कोई भूत रहता है जो मुझे खिला पिला कर बाद में मुझे खा लेगा ऐसा सोचते ही तत्काल उसके सामने एक भूत आया और उसे खा गया।

इस प्रसंग से आप यह सीख सकते है कि हमारा मस्तिष्क ही इच्छापूर्ति वृक्ष है आप जिस चीज की प्रबल कामना करेंगे  वह आपको अवश्य मिलेगी।

अधिकांश लोगों को जीवन में बुरी चीजें इसलिए मिलती हैं... क्योंकि वे बुरी चीजों की ही कामना करते हैं।

इंसान ज्यादातर समय सोचता है- कहीं बारिश में भीगने से मै बीमार न हों जांऊ.. और वह बीमार हो जाता हैं..!

इंसान सोचता है - मेरी किस्मत ही खराब है .. और उसकी किस्मत सचमुच खराब हो जाती हैं ..!

इस तरह आप देखेंगे कि आपका अवचेतन मन इच्छापूर्ति वृक्ष की तरह आपकी इच्छाओं को ईमानदारी से पूर्ण करता है..! इसलिए आपको अपने मस्तिष्क में विचारों को सावधानी से प्रवेश करने की अनुमति देनी चाहिए।

विचार जादूगर की तरह होते है, जिन्हें बदलकर आप अपना जीवन बदल सकते है..! इसलिये सदा सकारात्मक सोचिए.।

बाहर की दुनिया बिलकुल वैसी है, जैसा कि हम अंदर से सोचते हैं। हमारे विचार ही चीजों को सुंदर और बदसूरत बनाते हैं। पूरा संसार हमारे अंदर समाया हुआ है, बस जरूरत है चीजों को सही रोशनी में रखकर देखने की।

*आप चाहे किसी भी समाज से हो, अगर आप अपने समाज के किसी उभरते हुए व्यक्तित्व से जलते हो या उसकी निंदा करते हो तो आप निश्चित रूप से उस समाज के लिए कलंक हो ।*

*🔔👨‍👨‍👦‍👦⛳🌞🙏विशेष:- भव्य आत्माओं, आज हम अपने शरीर से स्पर्श के द्वारा,जीभ के द्वारा,नाक के द्वारा , आंख व कानों द्वारा अपने मन मस्तिष्क में अनेकों प्रकार के बाधक विचारों को जन्म देते है।वह विचार ही हमारे सफलता में पहाड़ बनते है। अतः सभी अपने अशुभ विचारों पर विराम लगायें ताकि स्वयं के साथ सम्पूर्ण विश्व सुखी रहें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 24 नवंबर 2024

मैं का भ्रम

*मैं का भ्रम*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मैं का भ्रम ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी, सोमवार , 25 नवम्बर 2024 कलिकाल के अंतिम तीर्थंकर शासन नायक वर्धमान स्वामी बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री  वर्धमान स्वामी जी का तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 नवंबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 15, 25 को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 नवंबर माह में  चतुर्दशी तिथि 30 नवम्बर को है।*

*🙆इस नवम्बर माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 12,13,16,17,18,22,23,25,26,28,29 को  है।👨‍👨‍👦‍👦↔️ग्रह प्रवेश मुहूर्त 8,13,16,18,25 नवम्बर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*🤔मैं का भ्रम🤔*

*एक बार कागज का एक टुकड़ा हवा के वेग से उड़ा और पर्वत के शिखर पर जा पहुँचा...पर्वत ने उसका आत्मीय स्वागत किया और कहा भाई...* 

     *यहाँ कैसे पधारे...? कागज ने कहा-अपने दम पर...जैसे ही कागज ने अकड़ कर कहा अपने दम पर और तभी हवा का एक दूसरा झोंका आया और कागज को उड़ा ले गया...*
🫢🫢🫢🫢🫢
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*अगले ही पल वह कागज नाली में गिरकर कुछ समय में गल-सड़ गया...जो दशा एक कागज की है वही दशा हमारी है...*
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             *हम सभी के पुण्यकर्म के उदय से अनुकूल वायु का वेग आता है तो हमें शिखर पर पहुँचा देता है और पाप का झोंका आता है तो रसातल पर पहुँचा देता है...*
🙏🙏
*किसका मान...? किसका गुमान...? सन्त कहते हैं कि जीवन की सच्चाई को समझो संसार के सारे संयोग हमारे अधीन नहीं हैं...*
🙏🙏🙏
                 *कर्म के अधीन हैं और कर्म कब कैसी करवट बदल ले...कोई भरोसा नहीं इसलिए कर्मों के अधीन परिस्थितियों का कैसा गुमान...?* 
*👨‍👨‍👦‍👦हमें वर्तमान समय में कर्म फल को नहीं भोगना है तो सच्चे देव शास्त्र गुरु की शरण प्राप्त कर अपने षट् आवश्यक कर्म को प्रतिदिन करते हुए अपने व्यवहार में समता, सहनशीलता के साथ सभी जीवों के आत्मकल्याण में सहायक बनकर जीवन सार्थक करना आवश्यक है।*

*बीज की यात्रा वृक्ष तक है...* 
             *नदी की यात्रा सागर तक है...* 
 *और...*

*मनुष्य की यात्रा परमात्मा तक...*

 *संसार में जो कुछ भी हो रहा है वह सब कुछ हमारे पूर्व कर्मों का ही विधान है...* 
 *🙏🙏🙏🙏🙏🙏हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं...*
 *इसीलिये कभी भी ये भ्रम न पालें कि...* 
*🙏 मैं न होता तो क्या होता...!!*
🙏✨🌹🇲🇰

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 14 नवंबर 2024

उपवास का चमत्कार

*उपवास का चमत्कार*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 उपवास का चमत्कार ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔🪔 कार्तिक पूर्णिमा , शुक्रवार , 15 नवम्बर 2024 कलिकाल के  तृतीय तीर्थंकर संभवनाथ भगवान गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री संभवनाथ भगवान जी का जन्म कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 नवंबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 15, 25 को  कल्याणक महोत्सव है।अष्टान्हिका शाश्वत पर्व,8 से15 नवम्बर तक*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 नवंबर माह में  अष्टमी तिथि  09 व 23 को है। चतुर्दशी तिथि 14 व 30 नवम्बर को है।*

*🙆इस नवम्बर माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 12,13,16,17,18,22,23,25,26,28,29 को  है।▶️पंचक 9 से 13 नवम्बर तक है।👨‍👨‍👦‍👦↔️ग्रह प्रवेश मुहूर्त 8,13,16,18,25 नवम्बर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

🔔 *उपवास का चमत्कार* 🔔
*अंत में पिता का सहयोग लिया तो परिवार की उन्नति हुई*
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*एक छोटे से शहर में एक गरीब परिवार रहा करता था, जो रोज़ सब्ज़ियाँ ख़रीद और बेचकर अपना और अपने परिवार का पेट भर रहा था।*
*मोहन उस परिवार का मुखिया था। उसके परिवार में उसकी पत्नी और उसका एकमात्र बेटा सोहन था।* *मोहन रोज़ 100 रुपये की सब्ज़ी ख़रीदकर लाता और उसे 200 रुपये में बेच देता। उन 200 रुपयों में से वह अगले दिन के लिए 100 रुपये सब्ज़ियाँ ख़रीदने के लिए पहले निकालकर रख लेता और फिर बचे हुए 100 रुपये से अपने घर का ख़र्च पूरा करता ।*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*ऐसे ही उसकी गुज़र बसर चल रही थी। उसे कभी कभी भविष्य की चिंता होती थी कि कभी किसी आकस्मिक खर्च की अगर जरूरत आई, या मंहगाई बढ़ गई तो उसकी व्यवस्था वह कैसे करेगा। वह जब भी कुछ अतिरिक्त पैसे इकट्ठा करता था, कोई न कोई आवश्यकता भी आ जाती थी। ईश्वर की कृपा से कोई विशेष समस्या नहीं आई और ऐसे ही समय गुजरता गया।*
*एक दिन उसके बेटे का विवाह हो गया। परिवार का खर्च बढ़ गया किंतु आय की व्यवस्था वैसी ही थी।  मोहन ने एक दिन अपने बेटे को बुला कर कहा- "बेटा, मैं अब बूढ़ा हो रहा हूँ। तुम चाहो तो जो काम मैं करता आ रहा था, उसे ही संभाल सकते हो या फिर कोई और धंधा करके जीवन चला सकते हो। मेरे धंधे को ही अगर चलाना चाहो तो उसका सबक ले लो कि -*
 *प्रतिदिन 100 रूपये की सब्ज़ियाँ ले आना और उनको 200 रूपये में बेचना। इतना अवश्य याद रखना कि पहले उन सौ रुपयों में से अगले दिन के धंधे के लिए 100 रूपए निकालने के बाद ही खर्च के लिए रुपए निकालना है। जो भी खर्च करना है वो मुनाफे के पैसे से ही करना है। कभी भी अगले दिन के व्यापार के लिए बचाए जाने वाले पैसे में से कोई खर्च मत करना।'*
     *इसी सबक को याद करके मैंने अपनी जिन्दगी काटी है और तुम्हें भी बता रहा हूं। अब मैं तीर्थाटन में जाऊंगा और लौटने पर अपने गुरु के पास रहूंगा। कभी कोई बहुत बड़ी मुसीबत आ जाए और कुछ समाधान ना मिले तब मेरे पास आना, वरना छोटी मोटी समस्या ख़ुद से ही सुलझा लेना।"*
*बेटे ने व्यापार का सूत्र समझकर पिता को आश्वस्त किया कि वह उनकी आज्ञा का पालन करता रहेगा। फिर मोहन निश्चिंत होकर अपनी धार्मिक यात्रा पर निकल पड़ा।* 
*अब उसका बेटा भी वैसा ही करता जैसे मोहन ने बताया था। उसकी ज़िंदगी शांति से गुज़रने लगी थी। एक दिन मोहन के बेटे की पत्नी ने रात्रि होने पर उससे मिठाई खाने की इच्छा बताकर ले आने को कहा। मोहन का बेटा सोचने लगा कि अगर मिठाई खरीदनी होगी तो खर्च के रूपये तो आज समाप्त हो चुके हैं। परंतु अब पत्नी ने कुछ खाने को आज कहा है तो उसे पूरा करना भी उसी का दायित्व है। उसने अगले दिन के व्यापार के लिए रखे 100 रुपए में से ही मिठाई ख़रीद लाने की योजना बनाई। उसने सोचा कि 10 रुपये में कुछ नहीं होगा और मिठाई ले आया। उसकी पत्नी बहुत प्रसन्न हुई।*
*किंतु उस दिन उसके 110 रुपये खर्च हो गए थे और अब 90 रुपये ही व्यापार के लिए बच पाए थे।  वह अगले दिन 90 रुपयों की ही सब्ज़ियाँ ले आया और 180 रुपये में बेच दिया। किंतु 100 रूपए का उसके घर का खर्चा नियमित था, तो अगले दिन के धंधे के लिए केवल 80 रुपये ही बच पाए।*
*अगले दिन सोहन 80 रुपये की सब्ज़ी लाया, जिसे 160 रुपये में बेचने पर 100 रूपए घर का खर्चा निकालने पर अब 60 रुपये ही बच रहे थे। 60 रुपये देख कर अब सोहन को चिंता होने लगी। वह सोचने लगा कि कल 60 रूपये की सब्ज़ियाँ ला कर 120 की बेचूँगा तो घर का खर्चा 100 रूपये निकालकर केवल 20 रूपये ही बचेंगे।*
*अब उसे पत्नी को मिठाई खिलाने के लिए अपनी धंधे की राशि खर्च करने का निर्णय लेना गलत लगने लगा। उसने पहले नहीं सोचा था कि केवल 10 रूपये की मिठाई इतनी महँगी पड़ जाएगी।*
*उसे अपने पिताजी का सबक याद आने लगा कि सबसे पहले सब्ज़ियों को खरीदने के लिए रुपए को अलग रखना, लेकिन उसने तो उसमें से 10 रूपये खर्च कर के गलती कर दी है।*
*अब आने वाले कल की सोच कर सोहन को नींद नहीं आ रही थी।  कोई और उपाय न देखकर उसे फिर अपने पिताजी की कही यह बात भी याद आयी कि जब बहुत बड़ी मुसीबत आए तो मेरे पास आना। रात को ही सोहन अपने पिता से मिलने निकल पड़ा। पिताजी को उसने सारी बात बता दी ।*
*बेटे की बात सुनकर मोहन पहले तो नाराज़ हुआ फिर बोला- "अब लौटकर घर जा और घर में सबको बोलना कि आज सब मिल कर लक्ष्मी माता का निराहार व्रत रखेंगे,  जिससे लक्ष्मी जी की कृपा होगी।"*
*मोहन के बेटे सोहन ने ऐसा ही किया, और घर जाकर सबको अगले दिन व्रत रखने के लिए कहा। फिर वह 60 रूपए की सब्ज़ियाँ लाया, जो 120 रूपए की बिकी। घर पर सबका व्रत होने से घर का खर्च कुछ नहीं हुआ। अगले दिन वह उन पूरे 120 रुपयों की सब्ज़ियाँ ले आया। अब उन्हें बेचने से 240 रू. की आमदनी हो गई और उसमें से 100 रुपये खर्च निकालने पर भी सोहन के पास 140 रुपये बचे थे। जब उसने इन 140 रुपयों की सब्ज़ियाँ लेकर उन्हें 280 की बेची तो घर का खर्च निकालकर सोहन के पास 180 रुपये बचे थे ! अब सोहन की आमदनी बढ़ती जा रही थी। अब वह मिठाई भी ला सकता था, धीरे धीरे वह बेहतर ज़िंदगी जीने लगा।*
*इस तरह पिता की सलाह ने सोहन की ज़िंदगी ही बदल दी। असल ज़िंदगी में हर कोई मोहन और सोहन है, अपनी इच्छाओं को मारना ही व्रत है। लोगों को ऐसे ही मिठाई खाने का मन करता है। जैसे जैसे हम पांच इंद्रियों की पूर्ति में अर्थात गाड़ी, घर, दैनिक आनंद की ज़िंदगी में ज़रूरत के पैसे बिना आमदनी को सोचे ही खर्च कर देते हैं और फिर ज़िंदगी वहीं ठहर जाती है।*
*अगर हम सभी सच्चे देव शास्त्र गुरु की जिनवाणी का अध्ययन करें तो कुछ समय के लिए अपनी इच्छाओं को नियंत्रण में कर  तो आगे की ज़िंदगी बेहतर हो सकती है। यही हम सभी का सच्चा मोक्ष मार्ग है।
आवश्यकताओं की पूर्ति संभव है
इच्छाओं की नहीं।
*🎪👨‍👨‍👦‍👦🔔🙏 विशेष :- भव्य आत्माओं, नित्य निगोद से निकलने के बाद हमारी आत्मा ने दो हजार सागर की कितने बार भोगी इसकी गिनती नहीं है।इसका मुख्य कारण चौरासी लाख योनियों में जहां भी जन्म हुआ हमनें वहां पर अपनी इंद्रियों की पूर्ति में ही समय व्यतीत कर दिया। असंख्यात भवों के पुण्य संचय से सच्चे देव शास्त्र गुरु का सानिध्य प्राप्त हुआ है। किंतु यहां भी पांचों इंद्रियों के विषयों में आसक्त होकर समय व्यतीत कर रहे है।अब सभी प्रकार के सुखों को प्राप्त करना है तो सच्चे शास्त्र से सम्यक दर्शन- सम्यक ज्ञान- सम्यक चारित्र को जानकर शक्ति अनुसार आचरण करना होगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 12 नवंबर 2024

बुध्दि का अनुपयोग

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*

*💪👩‍🚒  ✍️🐒*
*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔🪔 कार्तिक शुक्ल बारस,  बुधवार , 13 नवम्बर 2024 कलिकाल के  18 वें तीर्थंकर अरनाथ भगवान बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री अरनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 नवंबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 15, 25 को  कल्याणक महोत्सव है।अष्टान्हिका शाश्वत पर्व,8 से15 नवम्बर तक*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 नवंबर माह में  अष्टमी तिथि  09 व 23 को है। चतुर्दशी तिथि 14 व 30 नवम्बर को है।*

*🙆इस नवम्बर माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 12,13,16,17,18,22,23,25,26,28,29 को  है।▶️पंचक 9 से 13 नवम्बर तक है।👨‍👨‍👦‍👦↔️गृह प्रवेश मुहूर्त 8,13,16,18,25 नवम्बर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*'बुध्दि का अनुपयोग'*
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एक बार एक लड़का काम की तलाश में भटकते भटकते एक सेठ जी के पास पहुंचा और विनती की, 'क्या आप मुझे काम दे सकते हैं'? *सेठ जी बोले  मेरे पास बड़ा भारी लकड़ियों का स्टॉक है, लक्कड़ काटने का काम तुम्हें दे सकता हूं।* कल से काम पर आ जाना। अगले दिन लड़के ने काम पर पहुंचकर, दिन भर में पूरी मेहनत से 25 लक्कड़ काट डाले। *सेठ जी उसकी कार्यक्षमता देखकर प्रसन्न हुए और उसे काम पर रख लिया।* लड़का काम पर जाने लगा, सुबह से शाम तक पूरी मेहनत से काम करने लगा।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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एक सप्ताह पश्चात सेठ जी घूमते हुए वहां पहुंचे देखा लड़के ने दिन भर में सिर्फ 15 लक्कड़ काटे। *उन्होंने पूछा, 'तुमने तो पहले दिन 25 लक्कड़ काट लिए थे, अब केवल 15 ही काट पा रहे हो, ऐसा क्यों'?* लड़का बोला, मैं खुद समझ नहीं पा रहा। काम तो मैं पूरी मेहनत से करता हूं, बीच में आराम भी नहीं करता। एक सप्ताह और बीता, सेठ जी फिर पहुंचे और देखा, लड़के ने दिन भर में केवल 10 ही लक्कड़ काटे। पूछने पर *लड़के ने कहा, ना जाने मेरी कार्यक्षमता दिन प्रतिदिन कम क्यों होती जा रही है।* काम तो मैं पूरी मेहनत से कर रहा हूं। सेठ जी ने कहा पूछा, 'तुमने अपने कुल्हाड़ी की धार तेज करवाई'? लड़का बोला, 'मैं काम में इतना व्यस्त रहता हूं कि मुझे कुल्हाड़ी की धार तेज करवाने का समय नहीं मिलता'। क्या ऐसे कार्य करने वाले को कोई समझदार कहेंगे! *थोड़ा समय निकाल कर, कुल्हाड़ी की धार तेज करवाने पर, लड़का अपनी कार्यक्षमता काफी हद तक बढ़ा सकता था।* लेकिन यह बात उसकी बुद्धि में समाती ही नहीं थी।

*ठीक इसी प्रकार दुनिया के मनुष्य भी करते हैं।* सारा दिन व्यस्त रहते हुए भी, अनेकों उलझनों के कारण कार्यक्षमता धीरे-धीरे घटने लगती है। जब उनसे कहो कि अपनी बुद्धि की धार को तेज करने के लिए सच्चे देव शास्त्र गुरु की जिनवाणी का  अमृत का पान कर लिया करो, तो कहते हैं हमारे पास टाइम ही नहीं है। *टाइम तो सभी के पास वही 24 घंटे का है।* सच्चे देव शास्त्र गुरु की जिनवाणी का  अमृत का पान कर सच्चे ज्ञान के आधार पर बुद्धि की धार यदि तेज कर लें, तो मिथ्यात्व समाप्त होने से विवेक शक्ति बढ़ेगी, आंतरिक बल बढ़ेगा, कार्य कुशलता भी बढ़ेंगी और सर्व सुख कारक मोक्ष मार्ग भी प्रशस्त होता है। *लेकिन नहीं! आज हमारे मिथ्या बुध्दि से  मन:स्थिति कहती है टाइम ही नहीं मिलता।* टाइम तो सारी जिंदगी नहीं मिलेगा। प्रकृति 24 के 25 घंटे भी बना दे, तब भी कहेंगे, टाइम नहीं मिलता। *सच्चे ज्ञान के आधार पर बुद्धि तीक्ष्ण हो जाती है, कम मेहनत से अधिक फल को प्राप्ति कर सकते हैं।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 5 नवंबर 2024

संयमित जीवन

*संयमित*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 संयमित ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔🪔 कार्तिक शुक्ल षष्ठी,  गुरुवार , 07 नवम्बर 2024 कलिकाल के  22 वें तीर्थंकर अरिष्टनेमि भगवान राहू की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को सहन करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री अरिष्टनेमि भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 नवंबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव   07, 13,15, 25 को  कल्याणक महोत्सव है।अष्टान्हिका शाश्वत पर्व 8 से15 नवम्बर तक*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 नवंबर माह में  अष्टमी तिथि  09 व 23 को है। चतुर्दशी तिथि 14 व 30  नवम्बर को है।*
*🙆इस नवम्बर माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 12,13,16,17,18,22,23,25,26,28,29 को  है।▶️पंचक 9 से 13 नवम्बर तक है।👨‍👨‍👦‍👦↔️ग्रह प्रवेश मुहूर्त 8,13,16,18,25 नवम्बर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

!! *संयम एवं जिम्मेदारी* !!

मशहूर वाहन कम्पनी फोर्ड के मालिक हेनरी फोर्ड को अपनी कार के लिए एक ड्राइवर की आवश्यकता थी। तीन ड्राईवरों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। सबसे उनकी विशेषता पूछी गयी। पहले व्यक्ति ने बताया कि वह भीड़ में भी सौ मील की रफ्तार से गाड़ी चला सकता है। दूसरे ने बताया कि वह छह फुट के गड्ढ़ों को भी आसानी से पार कर सकता है। 

जबकि तीसरे व्यक्ति ने उत्तर दिया, “मैं चालीस से साठ मील की रफ्तार से ही गाड़ी चलाता हूँ। क्योंकि मैं स्वयं अपनी एवं अपने मालिक की जान को खतरे में नहीं डालता।” शायद यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि तीसरे व्यक्ति को ही चुना गया। क्योंकि संयम एवं जिम्मेदारी पूर्ण व्यवहार भी एक बड़ी विशेषता है।   *सीख*:-हर जगह हमें व्यवहार में संयम एवं जिम्मेदारी रखनी चाहिए।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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           *!! आलोचना !!* 

अमेरिका के सर्वाधिक लोकप्रिय राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के विषय में उनके विरोधी प्रायः कुछ न कुछ अखबारों में प्रकाशित करवाते रहते थे। किंतु लिंकन कभी उनका प्रतिउत्तर नहीं देते थे। एक दिन उनके एक मित्र ने कहा, “आपके विरोधी इतना कुछ आपके बारे में लिखते हैं। आप उनका जवाब क्यों नहीं देते ? आपको भी जवाब देना चाहिए।” लिंकन ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, “मित्र ! यदि मैं उनका जवाब देने लगूंगा तो मेरा सारा समय इसी में निकल जायेगा। 

फिर मैं कोई जनकल्याण का कार्य नहीं कर पाऊंगा। जीवन के अंत में यदि मैं अपने कार्यों के द्वारा बुरा साबित होता हूँ तो मेरे द्वारा दी गयी किसी सफाई का कोई मूल्य नहीं होगा। “यदि मैं एक अच्छा व्यक्ति साबित होता हूँ तो फिर इन आलोचनाओं का कोई मूल्य नहीं होगा। इसलिए मैं इनपर ध्यान दिए बिना चुपचाप अपना काम करता हूँ।”

*शिक्षा:-* हमें अपने कार्यों के द्वारा लोगों की आलोचनाओं का जवाब देना चाहिए।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 2 नवंबर 2024

अन्तर्मन का प्रेम

*अंतर्मन का प्रेम*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*

*💪👩‍🚒अंतर्मन का प्रेम   ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 कार्तिक शुक्ल द्वितीया भाई-दूज,  रविवार , 03 नवम्बर 2024 कलिकाल के  नौवें तीर्थंकर  सुविधिनाथ भगवान शुक्र की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के सुखकारी वैभव प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री सुविधिनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 नवंबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  03, 07, 13,15, 25 को  कल्याणक महोत्सव है।अष्टान्हिका शाश्वत पर्व,8 से15 नवम्बर तक*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 नवंबर माह में  अष्टमी तिथि  09 व 23 को है। चतुर्दशी तिथि 14 व 30  नवम्बर को है।*
*🙆इस नवम्बर माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 12,13,16,17,18,22,23,25,26,28,29 को  है।▶️पंचक 9 से 13 नवम्बर तक है।👨‍👨‍👦‍👦↔️ग्रह प्रवेश मुहूर्त 8,13,16,18,25 नवम्बर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
            *!! अंतर्मन का प्रेम !!*

शहर की तंग गलियों के बीच एक पुरानी ताले की दुकान थी। लोग वहां से ताला-चाबी खरीदते और कभी-कभी चाबी खोने पर डुप्लीकेट चाबी बनवाने भी आते। ताले वाले की दुकान में एक भारी-भरकम हथौड़ा भी था जो कभी-कभार ताले तोड़ने के काम आता था।

हथौड़ा अक्सर सोचा करता कि आखिर इन छोटी-छोटी चाबियों में कौन सी खूबी है जो इतने मजबूत तालों को भी चुटकियों में खोल देती हैं जबकि मुझे इसके लिए कितने प्रहार करने पड़ते हैं?

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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एक दिन उससे रहा नहीं गया, और दुकान बंद होने के बाद उसने एक नन्ही चाबी से पूछा- “बहन ये बताओ कि आखिर तुम्हारे अन्दर ऐसी कौन सी शक्ति है जो तुम इतने जिद्दी तालों को भी बड़ी आसानी से खोल देती हो, जबकि मैं इतना बलशाली होते हुए भी ऐसा नहीं कर पाता?”

चाबी मुस्कुराई और बोली- दरअसल, तुम तालों को खोलने के लिए बल का प्रयोग करते हो… उनके ऊपर प्रहार करते हो और ऐसा करने से ताला खुलता नहीं टूट जाता है… जबकि मैं ताले को बिलकुल भी चोट नहीं पहुंचाती… बल्कि मैं तो उसके मन में उतर कर उसके हृदय को स्पर्श करती हूँ और उसके दिल में अपनी जगह बनाती हूँ। इसके बाद जैसे ही मैं उससे खुलने का निवेदन करती हूँ, वह फ़ौरन खुल जाता है।

मनुष्य जीवन में भी ऐसा ही कुछ होता है। यदि हम किसी को सचमुच जीतना चाहते हैं, अपना बनाना चाहते हैं तो हमें उस व्यक्ति के हृदय में उतरना होगा। जोर-जबरदस्ती  से कोई काम कराना संभव तो है पर इस तरह से हम ताले को खोलते नहीं बल्कि उसे तोड़ देते हैं… यानि उस व्यक्ति की उपयोगिता को नष्ट कर देते हैं, जबकि प्रेम पूर्वक किसी का दिल जीत कर हम सदा के लिए उसे अपना मित्र बना लेते हैं और उसकी उपयोगिता को कई गुना बढ़ा देते हैं।

*👨‍👨‍👦‍👦⛳✅▶️भव्य आत्माओं:-  इस बात को हमेशा याद रखिये- हर एक चीज जो बल से प्राप्त की जा सकती है उसे प्रेम से भी पाया जा सकता है लेकिन हर एक जिसे प्रेम से पाया जा सकता है उसे बल से नहीं प्राप्त किया जा सकता..!!*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 28 अक्टूबर 2024

धन्य तेरस

*धन्य तेरस*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
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*💪👩‍🚒 धन्य तेरस ✍️🐒*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦⛳🎪जैन तीर्थंकर भगवान के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🙏*

*🔔🪔 कार्तिक कृष्ण तेरस बुधवार 30 अक्टूबर 2024  कलिकाल के  छठवें तीर्थंकर  पद्मप्रभ भगवान सूर्य की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के मिथ्यात्व व मोहांधकार को समाप्त कर सर्व सुखकारी मार्ग  प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री    पद्मप्रभ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 कार्तिक  अमावस्या,  शुक्रवार , 1 नवंबर 2024 कलिकाल के अंतिम तीर्थंकर वर्तमान के शासन नायक उपसर्ग विजेता वर्धमान स्वामी  बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त कर सर्व सुखकारी ज्ञान  प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री    वर्धमान स्वामी जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*▶️आज ही के दिन सूर्योस्त से पहले  वर्धमान स्वामी के प्रमुख गणधर इंद्रभूति गौतम को केवल ज्ञान की प्राप्ति होने पर अपने घर व मंदिर जी में दिपावली महोत्सव मनाया जाता है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦 चतुर्दशी तिथि 31 अक्टूबर गुरुवार को है।✅*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

कार्तिक कृष्ण तेरस के दिन भगवान महावीर ने बिहार के पावापुरी के पदम् सरोवर में योग निरोध धारण किया था जिस कारण यह कार्तिक कृष्ण माह की ' तेरस' धन्य हो गई थी !हमारे इस हुन्डावसर्पिणी काल के 24 वे, अंतिम तीर्थंकर चौदहवाँ गुणस्थान के अंतिम दो समयों में अपनी शेष 85 कर्म प्रकृतियों का क्षय कर 18000 शीलों का पालन कर मोक्ष प्राप्ति के लिए ध्यानस्थ हुए थे! इसीलिए हम श्रमण संस्कृति के अनुयायी, वर्तमान में जैन धर्मावलम्बी धन्य तेरस मनाते है !

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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जैन मान्यता मे इस पर्व का धन से कोई सम्बंध नहीं है, धन्य तेरस पर अन्य धर्मों में कोई स्वर्ण की वस्तु या कीमती वस्तुओं को खरीदने से जोर दिया है ।जो की जैन मान्यताओं के सर्वथा विपरीत है !लक्ष्मी पूजन भी भौतिक सुखों के लिए नहीं है, हम यदि पूजते है तो मोक्ष रुपी लक्ष्मी के रूप में पूजते है। मोक्ष को सर्वोत्तम और सर्वोत्कृष्ट सुख माना गया है।सामान्य से इस तिथि को धन्यतेरस कहते है। दीपावली के पूर्व कार्तिक त्रयोदशी के दिन भगवान महावीर ने बाह्य समवसरण लक्ष्मी का त्याग कर मन-वचन और काय को स्थिर कर परम ध्यान में लीन होकर निरोध धारण किया। वीर प्रभु के योगों के निरोध की भव्य घटना से तेरस धन्य हो उठी इसीलिए यह तिथि धन्य-तेरस के नाम से विख्यात हुई। अगले दिन चतुर्दशी को भगवान महावीर ने मोक्ष पाया और तभी सूर्यास्त के पहले गणधर गौतम स्वामी जी को केवल ज्ञान प्राप्त हुआ।

धन्य तेरस को ध्यान तेरस भी कहा जाता है। हमे 'धन्य तेरस' को भगवान महावीर स्वामी के द्वारा योग निरोध को धारण कर संसार सागर से तिरने की यात्रा का मनन करते हुए मनाना चाहिए जिससे निकट भविष्य में स्वात्म कल्याण की प्रेरणा प्राप्त कर,इस दिशा में पुरुषार्थ कर समुचित निमित्त एवं काललब्धि प्राप्त होने पर, हमे भी निकट भविष्य के किसी भव में मोक्ष लक्ष्मी प्राप्त हो सके तभी हमारा जन्म सफल होगा क्योंकि मनुष्य पर्याय में ही संयम,तप और ध्यान आदि किया जा सकता है।

*🎪👨‍👨‍👦‍👦↔️⛳🔑भव्य आत्माओं:-आप सभी धन्य तेरस के दिन जिस प्रकार भगवान महावीर स्वामी ने  सभी जीवों से सभी भी प्रकार का राग-द्वेष को समाप्त किया। उन्होंने अपने शरीर से भी किसी प्रकार का संबंध ना रखते हुए मात्र अपनी आत्मा की शक्ति को चिंतन किया।उसी प्रकार उनके गुणों की प्राप्ति के लिए हम सभी को अपनी योग्यता अनुसार(अष्ट मूलगुण,सप्त व्यसन, षट् आवश्यक, प्रतिमा ग्रहण आदि कर्तव्यों का पालन करते हुए) भगवान महावीर स्वामीजी के गुणों का ध्यान,जप, पूजन आदि करके अपना जीवन सार्थक करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 19 अक्टूबर 2024

कर्मों का संदेश

*कर्मों का संदेश*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 कर्मों का संदेश ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔🪔  कार्तिक कृष्ण 4,  रविवार , 20 अक्टूबर 2024 कलिकाल के तृतीय तीर्थंकर  संभवनाथ भगवान गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के असंभव को समाप्त कर सर्व सुखकारी मोक्ष में सहायक संभव सुख प्राप्ति के लिए उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री    संभवनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 अक्टूबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  11, 18, 20, 30 को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 अक्टूबर माह में  अष्टमी तिथि  11 व 24 अक्टूबर को है। चतुर्दशी तिथि 16 व 31 अक्टूबर को है।*
*🙆इस अक्टूबर माह  विवाह मुहूर्त नहीं  है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*कर्मों का संदेश*
 
रात दस बजे लगभग अचानक मुझे एलर्जी हो गई।घर पर दवाई नहीं, न ही इस समय मेरे अलावा घर में कोई और, श्रीमती जी बच्चों के पास गोवा और हम रह गए अकेले। ड्राईवर भी अपने घर जा चुका था बाहर हल्की बारिश की बूंदे सावन महीने के कारण बरस रही थी।

दवा की दुकान ज्यादा दूर नहीं थी पैदल भी जा सकता था लेकिन बारिश की वज़ह से मैंने रिक्शा लेना उचित समझा।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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मेरे घर से पचास कदम पर ही  राम मन्दिर बना  था। 
एक रिक्शा वाला भगवान की प्रार्थना कर रहा था।  मैंने उससे पूछा चलोगे, तो उसने सहमति में सर हिलाया और बैठ गए हम रिक्शा में!  रिक्शा वाला काफी़ बीमार लग रहा था और उसकी आँखों में आँसू भी थे।

मैंने पूछा,*रो क्यूँ रहे हो और तुम्हारी तबियत भी ठीक नहीं लग रही।*"
उसने बताया:- *बारिश की वजह से तीन दिन से सवारी नहीं मिली और वह भूखा है बदन दर्द भी कर रहा है,अभी भगवान से प्रार्थना कर रहा था क़ि आज मुझे भोजन दे दो, मेरे रिक्शे के लिए सवारी भेज दो।*

मैं बिना कुछ बोले रिक्शा रुकवाकर दवा की दुकान पर चला गया।वहां खड़े खड़े सोच रहा था 
*कहीं भगवान ने तो मुझे इसकी मदद के लिए नहीं भेजा क्योंकि यदि एलर्जी आधे घण्टे पहले उठती तो मैं ड्राइवर से दवा मंगाता,रात को निकलने की ज़रूरत भी नहीं थी,और पानी न बरसता तो रिक्शे में भी न बैठता*।

मन ही मन भगवान को याद किया और पूछ ही लिया भगवान से,!
*मुझे बताइये क्या आपने रिक्शे वाले की मदद के लिए भेजा है मन में जवाब मिला... "हाँ"*।

* मैंने अपनी दवाई के साथ रिक्शेवाले के लिए भी दवा ली।बगल के रेस्तरां से छोले भटूरे पैक करवाए और रिक्शे पर आकर बैठ गया।*
जिस मन्दिर के पास से रिक्शा लिया था मैंने अपने घर पर रिक्शा रोकने को कहा।उसके हाथ में रिक्शे के 30 रुपये दिए,गर्म छोले भटूरे का पैकेट और दवा देकर बोला:-
"खाना खा कर यह दवा खा लेना, एक एक गोली ये दोनों अभी और एक एक कल सुबह नाश्ते के बाद,उसके बाद मुझे आकर फिर दिखा जाना।

रोते हुए वह बोला:-
*"मैंने तो भगवान से दो रोटी मांगी थी मग़र भगवान ने तो मुझे छोले भटूरे दे दिए*।कई महीनों से इसे खाने की इच्छा थी। आज भगवान ने मेरी प्रार्थना सुन ली।और जो मन्दिर के पास उसका बन्दा रहता था उसको मेरी मदद के लिए भेज दिया।"

कई बातें वह बोलता रहा और मैं स्तब्ध हो सुनता रहा। *घर आकर सोचा क़ि उस रेस्तरां में बहुत सारी चीज़े थीं, मैं कुछ और भी ले सकता था,समोसा या खाने की थाली ..पर मैंने छोले भटूरे ही क्यों लिए।*
क्या सच् में भगवान ने मुझे रात को अपने भक्त की मदद के लिए ही भेजा था..?

*हम जब किसी की मदद करने सही वक्त पर पहुँचते हैं तो इसका मतलब उस व्यक्ति की प्रार्थना भगवान ने सुन ली और हमें अपना प्रतिनिधि बना, देवदूत बना उसकी मदद के लिए भेज दिया।*      
     
*इसलिए कहते हैं, अचानक आए परोपकार,  दान और मदद के मौके को ना गवाएं ....क्या पता....  ईश्वर ने आपको मौका दिया है उनके प्रतिनिधि के रूप में।*

*🔔👨‍👨‍👦‍👦⏰🙏▶️विशेष:- भव्य आत्माओं, हमें अपने जीवन में आसपास रहने वाले लोगों की आवश्यकता अनुसार मदत अवश्य ही करना चाहिए।हम उस व्यक्ति विशेष की मदत से अपने भविष्य के लिए एक सुंदर बीजारोपण करते है। हमनें जिस प्रकार की व्यक्ति विशेष की सहायता की थी हमारे पूर्व कर्मों से हमें वैसी ही परेशानी से छुटकारा मिल जाता है। क्योंकि हमनें उस कर्म को समाप्त करने का बीज उस कर्म के उदय आने के पहले ही बो दिया था। अतः हम दूसरों की सहायता से अपने भविष्य को सुरक्षित रखते है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 17 अक्टूबर 2024

शिक्षा और.......

*शिक्षा और सशक्तिकरण*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 शिक्षा और सशक्तिकरण ✍️🐒*

*🔔🪔  कार्तिक कृष्ण एकम,  शुक्रवार , 18 अक्टूबर 2024 कलिकाल के 14 वें तीर्थंकर  अनंतनाथ भगवान बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त कर सर्व सुखकारी अनंत सुख प्राप्ति के उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री अनंतनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*

*💐शिक्षा और सशक्तिकरण💐*

एक दिन, एक कंपनी में साक्षात्कार के दौरान, बॉस, जिसका नाम अनिल था, ने सामने बैठी महिला, सीमा से पूछा, "आप इस नौकरी के लिए कितनी तनख्वाह की उम्मीद करती हैं?"

सीमा ने बिना किसी झिझक के आत्मविश्वास से कहा, "कम से कम 30,000 रुपये। इतने पैसे में मैं अपने परिवार का पालन पोषण व धार्मिक क्षेत्र  में विकास करने में समर्थ हूं।"

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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अनिल ने उसकी ओर देखा और आगे पूछा, "आपको किसी खेल में दिलचस्पी है?"

सीमा ने जवाब दिया, "जी, मुझे शतरंज खेलना पसंद है।"

अनिल ने मुस्कुराते हुए कहा, "शतरंज बहुत ही दिलचस्प खेल है। चलिए, इस बारे में बात करते हैं। आपको शतरंज का कौन सा मोहरा सबसे ज्यादा पसंद है? या आप किस मोहरे से सबसे अधिक प्रभावित हैं?"

सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा, "वज़ीर।"

अनिल ने उत्सुकता से पूछा, "क्यों? जबकि मुझे लगता है कि घोड़े की चाल सबसे अनोखी होती है।"

सीमा ने गंभीरता से जवाब दिया, "वास्तव में घोड़े की चाल दिलचस्प होती है, लेकिन वज़ीर में वो सभी गुण होते हैं जो बाकी मोहरों में अलग-अलग रूप से पाए जाते हैं। वह कभी मोहरे की तरह एक कदम बढ़ाकर राजा को बचाता है, तो कभी तिरछा चलकर हैरान करता है, और कभी ढाल बनकर राजा की रक्षा करता है।"

अनिल ने उसकी समझ से प्रभावित होते हुए पूछा, "बहुत दिलचस्प! लेकिन राजा के बारे में आपकी क्या राय है?"

सीमा ने तुरंत जवाब दिया, "सर, मैं राजा को शतरंज के खेल में सबसे कमजोर मानती हूँ। वह खुद को बचाने के लिए केवल एक ही कदम उठा सकता है, जबकि वज़ीर उसकी हर दिशा से रक्षा कर सकता है।"

अनिल सीमा के जवाब से प्रभावित हुआ और बोला, "बहुत शानदार! बेहतरीन जवाब। अब ये बताइए कि आप खुद को इनमें से किस मोहरे की तरह मानती हैं?"

सीमा ने बिना किसी देर के जवाब दिया, "राजा।"

अनिल थोड़ी हैरानी में पड़ गया और बोला, "लेकिन आपने तो राजा को कमजोर और सीमित बताया है, जो हमेशा वज़ीर की मदद का इंतजार करता है। फिर आप क्यों खुद को राजा मानती हैं?"

सीमा ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "जी हाँ, मैं राजा हूँ और मेरा वज़ीर मेरा पति था। वह हमेशा मेरी रक्षा मुझसे बढ़कर करता था, हर मुश्किल में मेरा साथ देता था, लेकिन अब वह इस दुनिया में नहीं है।"

अनिल को यह सुनकर थोड़ा धक्का लगा, और उसने गंभीरता से पूछा, "तो आप यह नौकरी क्यों करना चाहती हैं?"

सीमा की आवाज भर्राई, उसकी आँखें नम हो गईं। उसने गहरी सांस लेते हुए कहा, "क्योंकि मेरा वज़ीर अब इस दुनिया में नहीं रहा। अब मुझे खुद वज़ीर बनकर अपने बच्चों और अपने जीवन की जिम्मेदारी उठानी है ताकि हम सभी जैन-धर्म के अनुसार जीवन सार्थक करें।"

यह सुनकर कमरे में एक गहरी खामोशी छा गई। अनिल ने तालियाँ बजाते हुए कहा, "बहुत बढ़िया, सीमा। आप एक सशक्त महिला हैं।"

शिक्षा और सशक्तिकरण का महत्व:

यह कहानी उन सभी बेटियों के लिए एक प्रेरणा है जो जिंदगी में किसी भी तरह की मुश्किलों का सामना कर सकती हैं। *बेटियों को अच्छी शिक्षा और परवरिश देना बेहद जरूरी है, ताकि अगर कभी उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़े, तो वे खुद वज़ीर बनकर अपने और अपने परिवार के लिए एक मजबूत ढाल बन सकें।*

किसी विद्वान ने कहा है, *"एक बेहतरीन पत्नी वह होती है जो अपने पति की मौजूदगी में एक आदर्श औरत हो, और पति की गैरमौजूदगी में वह मर्द की तरह परिवार का बोझ उठा सके।"*

*⏰🎪👨‍👨‍👦‍👦✍️विशेष:-भव्य आत्माओं,यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, अगर आत्मविश्वास और समझदारी हो, तो कोई भी मुश्किल हालात को पार किया जा सकता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 10 अक्टूबर 2024

बुध्दिमान कौन

*बुध्दिमान कौन*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  बुध्दिमान कौन✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 आश्विन शुक्ल अष्टमी,  शुक्रवार , 11 अक्टूबर 2024 कलिकाल के 10 वें तीर्थंकर  शीतलनाथ भगवान गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त कर सर्व सुखकारी शीतलता  प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री    शीतलनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*

*🔔 अक्टूबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  11, 18, 20, 30 को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 अक्टूबर माह में  अष्टमी तिथि  11 व 24 अक्टूबर को है। चतुर्दशी तिथि 16 व 31 अक्टूबर को है।*
*🙆इस अक्टूबर माह  विवाह मुहूर्त नहीं  है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*🌳 बुद्धिमान  की परीक्षा 🌳*

      बहुत पुरानी बात है, उन दिनों आज की तरह स्कूल नही होते थें. गुरुकुल शिक्षा प्रणाली थी और छात्र गुरुकुल में ही रहकर पढ़ते थे. उन्हीं दिनों की बात है. एक विद्वान पंडित थे, उनका नाम था- राधे गुप्त. उनका गुरुकुल बड़ा ही प्रसिद्ध था, जहाँ दूर दूर से बालक शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते थे।

           राधे गुप्त की पत्नी का देहांत हो चूका था, उनकी उम्रः भी ढलने लगी थी, घर में विवाह योग्य एक कन्या थी, जिनकीं चिंता उन्हें हर समय सताती थी. पंडित राधे गुप्त उसका विवाह ऐसे योग्य व्यक्ति से करना चाहते थे, जिसके पास सम्पति भले न हो पर बुद्धिमान हो।
  
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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            एक दिन उनकें मन में विचार आया, उनहोंने सोचा कि क्यों न वे अपने शिष्यों में ही योग्य वर की तलाश करें. ऐसा विचार कर उन्होंने बुद्धिमान शिष्य की परीक्षा लेने का निर्णय लिया, उन्होंने सभी शिष्यों को एकत्र किया और उनसें कहा-”मैं एक परीक्षा आयोजित करना चाहता हूँ, इसका उद्देश्य यह जानना है कि कौन सबसें बुद्धिमान है।

         मेरी पुत्री विवाह योग्य हो गईं है और मुझें उसके विवाह की चिंता है, लेकिन मेरे पास पर्याप्त धन नही है. इसलिए मैं चाहता हूँ कि सभी शिष्य विवाह में लगने वाली सामग्री एकत्र करे. भले ही इसके लिए चोरी का रास्ता क्यों न चुनना पड़े. लेकिन सभी को एक शर्त का पालन करना होगा, शर्त यह है कि किसी भी शिष्य को चोरी करते हुए कोई देख न सके।

        अगले दिन से सभी शिष्य अपने अपने काम में जुट गये. हर दिन कोई न कोई  शिष्य अलग अलग तरह की वस्तुएं चुरा कर ला रहा था और गुरूजी को दे रहा था. राधे गुप्त उन वस्तुओं को सुरक्षित स्थान पर रखते जा रहे थे. क्योंकि परीक्षा के बाद उन्हें सभी वस्तुएं उनकें मालिक को वापिस करनी थी।

           परीक्षा से वे यही जानना चाहते थे कि कौन सा शिष्य उनकी बेटी से विवाह करने योग्य है. सभी शिष्य अपने अपने दिमाग से कार्य कर रहे थे. लेकिन उनमें से एक छात्र रामास्वामी, जो गुरुकुल का सबसे होनहार छात्र था, चुपचाप एक वृक्ष के नीचे बैठा कुछ सोच रहा था।

           उसे सोच में बैठा देख राधे गुप्त ने कारण पूछा. रामास्वामी ने बताया, “आपने परीक्षा की शर्त के रूप में कहा था कि चोरी करते समय कोई देख न सके. लेकिन जब हम चोरी करते है, तब हमारी अंतरात्मा व परमात्मा तो सब देखते है, हम खुद से उसे छिपा नही सकते. इसका अर्थ यही हुआ न कि चोरी करना व्यर्थ है।”

         उसकी बात सुनकर राधे गुप्त का चेहरा प्रसन्नता से खिल उठा. उन्होंने उसी समय सभी शिष्यों को एकत्र किया और उनसें पूछा-”आप सबने चोरी की.. क्या किसी ने देखा? सभी ने इनकार में सिर हिलाया. तब राधे गुप्त बोले ”बच्चों ! क्या आप अपने अंतर्मन व परमात्मा से भी इस चोरी को छुपा सके?”

          इतना सुनते ही सभी बच्चों ने सिर झुका लिया. इस तरह गुरूजी ने अपनी पुत्री के लिए योग्य और बुद्धिमान वर मिल गया. उन्होंने रामास्वामी के साथ अपनी पुत्री का विवाह कर दिया. साथ ही शिष्यों द्वारा चुराई गई वस्तुएं उनके मालिकों को वापिस कर बड़ी विनम्रता से क्षमा मांगी।

*👨‍👨‍👦‍👦🔔⛳↔️ विशेष भव्य आत्माओं, :-इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि कोई भी कार्य अंतर्मन से छिपा नहीं रहता और अंतर्मन ही व्यक्ति को सही रास्ता दिखाता है. इसलिए मनुष्य को कोई भी कार्य करते समय अपने मन को जरुर टटोलना चाहिए, क्योंकि मन सत्य का ही साथ देता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 16 सितंबर 2024

अनंत चतुर्दशी

*पंच कल्याणक महोत्सव*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 पंच कल्याणक महोत्सव ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*अनंत चतुर्दशी व्रत है*
🥁🎺🌹🙏⛺️🕉️देवाधिदेव प्रथम बालयती बारहवे तीर्थंकर मंगल ग्रह की महादशा को अनुकूल बनाने वाले श्री 1008 वासुपूज्यजी के मोक्ष कल्याणक महोत्सव की तिथि:भाद्रपद शुक्ला चतुर्दशी, वी. सं.2550,मंगलवार, दिनांक 17  सितंबर, 2024- सभी धर्मप्रेमियों को हार्दिक बधाई और मंगल शुभकामनाए
⛺️🙏🌹🎺🥁⭐️☀️🎆💟⭐️☀️🎆💟⭐️☀️🎆

"सित भादव चौदस लीनो, निरवान सुथान प्रवीनी |
पुर चंपा थानक सेती, हम पूजत निज हित हेती | |
ॐ ह्रीं भाद्रपदशुक्लाचतुर्दश्यां मोक्षमंगलमंडिताय श्रीवासु 0 अर्घ्यं निर्व0 "

दोहा:- चंपापुर में पंच वर-कल्याणक तुम पाय |
सत्तर धनु तन शोभनो, जै जै जै जिनराय |1|
महासुखसागर आगर ज्ञान, अनंत सुखामृत मुक्त महान |
महाबलमंडित खंडितकाम, रमाशिवसंग सदा विसराम | |

🙏श्री वासुपूज्यजी तीर्थंकर के मोक्ष कल्याणक की जय🙏
                                      (उत्तर पुराण)

'
तीर्थंकर श्रीवासुपूज्यजी-

जन्मस्थान:चंपापुर (जिला:भागलपुर, राज्य:बिहार),
पिता:इक्ष्वाकुवंशी राजा:वसुपूज्य, माता:रानी जयावती,
महाशुक्र विमान से महाशुक्र इंद्र का चंपानगरमें गर्भावतरण, 

🌠गर्भ तिथि:आषाढ़ कृष्णा 6,गर्भनक्षत्र:शतभिषा, गर्भावास:अंतिम रात्रि ,

🌟जन्मतिथि;फाल्गुन कृष्ण 14,जन्मनक्षत्र:विशाखा, आयु:72 लाख वर्ष, शरीर की अवगाहना:70 धनुष,शरीर वर्ण:विद्रुम, चिन्ह:भैसा,

 🌳वैराग्यकारण:जातिस्मरण,दीक्षा नक्षत्र:विशाखा
दीक्षा तिथि:फाल्गुन कृष्ण 14,  दीक्षावन:मनोहर, दीक्षा उपवास: एक, दीक्षाकाल:अपरान्ह,दीक्षा स्थान:चंपापुर,  छद्मस्थकाल: 1 वर्ष,

🌲केवलज्ञान तिथि:माघ शुक्ल 2,केवलोत्पत्ति काल: अपराह्न,केवलस्थान:मनोहर उद्यान,केवल नक्षत्र:विशाखा,

🌄मोक्षतिथि:भाद्रपद शुक्ल 14, मोक्षकाल:अपराह्न,
मोक्ष नक्षत्र: अश्विनी,सहमुक्त:601, योगनिवृत्ति:1 मास पूर्व, मोक्षस्थान:चम्पापुर।

तीर्थंकर श्री वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव
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🌸भगवान श्री वासुपूज्य जी ने समवशरण रूपी लक्ष्मी का परित्याग किया। वे पद्मासन में आरूढ़ हुये।

🌼आयु का अन्तर्मुहूर्त अवशिष्ट रहनेपर श्री वासुपूज्य जी  तीसरे शुक्ल ध्यान में आरूढ़ हुये।

🏵️भगवान श्री वासुपूज्य जी के  शुक्ल ध्यान में योगनिरोध की सहज, निष्प्रयास प्रक्रिया हुई।

🌹श्री वासुपूज्य भगवान ने चतुर्थ शुक्ल ध्यान में चार अघातिया कर्मों का क्षय कर मोक्ष प्राप्त किया।

🌺भगवान श्री वासुपूज्य जी की निर्वाणोलब्धि जानकर समस्त देव-इन्द्र अपने परिवारसहित निर्वाण भूमि मंदार गिरी पर आये।उन्होंने तीर्थंकर के परम पवित्र शरीर को रत्नमयी पालकी पर विराजमान कर नमस्कार किया।

🌷अग्निकुमार जाति के भवनवासी देवों ने अपने मुकुट से उत्पन्न अग्नि के द्वारा तीर्थंकर श्री वासुपूज्य भगवान  के शरीरका अंतिम संस्कार किया।तीर्थंकर के शरीर के भस्म को अपने-अपने मस्तकपर सभी देवों ने  लगाया। इन्द्रों ने  आनंद नाटक किया। वहाँ मंदारगिरी पर देवों ने पूजा आदि कार्यक्रम संपन्न किये।

⛺️तीर्थंकर श्री वासुपूज्य भगवान लोक के अग्रभाग पर जाकर विराजमान हो गये। वे नित्य, निरंजन, कृतकृत्य सिद्ध हो गये । श्री  वासुपूज्य भगवान ने चतुर्गति के दुःखों से छूटकर मोक्ष पद पर  शाश्वत सुख को प्राप्त कर लिया।
🌟☀️🎆🌞🌝💥🌟☀️🎆🌞🌝💥🌟☀️

श्री वासुपूज्यजी तीर्थंकर के गर्भ,जन्म,दीक्षा,केवलज्ञान और मोक्ष पांचॉ कल्याणक चंपापुर में ही हुए।

🙏⛺️🕉️ ह्रीं श्रीवासुपूज्यजिनेन्द्राय नमः⛺️🙏

*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 सितम्बर माह में  अष्टमी तिथि  25 सितम्बर को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 सितम्बर माह में  अनंत चतुर्दशी तिथि   17 सितम्बर को है।*
*🎪इस सितंबर माह में  ▶️ 🎪20 अगस्त से 18 सितंबर तक षोडश कारण व्रत,⛳ ।*
🎪सितंबर माह के महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रम निम्न प्रकार है 
▶️8 से 17 में दश लक्षण व्रत 
▶️15 से 17 तक रत्नत्रय व्रत 
▶️ 17 को श्री वासुपूज्य जी का मोक्ष व अनंत चतुर्दशी व्रत 
▶️ 18 को क्षमावाणी पर्व 
▶️19 को श्री नमिनाथ जी का गर्भ कल्याणक 
*🔔नोट मंगल ग्रह के दुष्प्रभाव से होनी वाली बाधाएं (जैसे:- मकान, विवाह में देरी, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी और भी मंगल ग्रह से होने वाली सभी  परेशानियों के लिए वासूपूज्य भगवान की विशेष आराधना करनी चाहिए।)*
*👨‍👨‍👦‍👦इस सम्पूर्ण विश्व में अगर कोई जो जैन धर्म पर आस्था रखता है और उसे किसी भी प्रकार के किसी भी ग्रह संबंधित समस्या उत्पन्न हो रही है तो वह श्री शान्तिसागर समाधि साधना सेवा केन्द्र के व्हाट्सएप नंबर 9461956111 पर मैसेज भेजे उसका उसकी समस्या के अनुरूप समाधान किया जाएगा।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 10 सितंबर 2024

पंच कल्याणक महोत्सव

*पंच कल्याणक महोत्सव*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 पंच कल्याणक महोत्सव ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
🌠🌠🥁🎺🙏🎪⛺️🕉️ देवाधिदेव 9 वे तीर्थंकर श्री 1008 पुष्पदंतजी (सुविधिनाथजी) तीर्थंकर भगवान शुक्र की महादशा को अनुकूल बनाने वाले और मोक्ष मार्ग में अंतरंग व बहिरंग को प्राप्त करवाने वाले श्री 1008 पुष्पदंत भगवान जी 
 का मोक्ष कल्याणक पर्व- भाद्रपद शुक्ल अष्टमी,वी.सं.2550, बुधवार, दि.11 सितंबर ,2024- सभी धर्म प्रेमियों से निवेदन है कि आप इस महोत्सव पर श्री जी की शान्तिधारा व पूजन अवश्य ही अपनी शक्ति अनुसार करें।धर्मप्रेमियों को हार्दिक बधाई और ढेरो मंगल शुभकामनाये इस मंगल मय अवसर का लाभ अवश्य ही लें 🥁🎺🙏🌺🏵️🌹
                                           उत्तर पुराण के आधारसे)
भादव सित सारा आठँ धारा, गिरिसमेद निरवाना जी |
गुन अष्ट प्रकारा अनुपम धारा, जय जय कृपा निधाना जी ||
तित इन्द्र सु आयो, पूज रचायौ, चिह्न तहां करि दीना जी |
मैं पूजत हौं गुन ध्यान मणी सों, तुमरे रस में भीना जी ||
ॐ ह्री भाद्रपद शुक्लाऽष्टम्यां मोक्षमंगलप्राप्ताय श्रीपुष्प ० अर्घ्यं
नि0 | 5 |
पुष्पदंत जिनराज का, सुप्रभ कूट है जेह, 
मन वच तन कर पूजहूँ, शिखर सम्मेद यजेह। 

सुप्रभ कूट से 1 कोड़ा-कोडी 99 लाख 7 हजार 780 मुनि मोक्ष गये।
 
🌟 श्री्पुष्पदन्तजी तीर्थंकरके मोक्ष कल्याणककी जय🌟

🙏श्री पुष्पदन्तजी तीर्थंकरके चरणोंमें कोटी कोटी नमन🙏

⛺️🙏तीर्थंकर श्री पुष्पदन्त भगवान का परिचय🙏⛺️

🌠जन्मस्थान: जम्बूद्वीप के भरत क्षेत्र की काकन्दी नगरी (वर्तमान में देवरिया नि.-गोरखपुर) उ.प्र.पिता:इक्ष्वाकुवंशीय काश्यप गोत्रीय सुग्रीव नाम के क्षत्रिय राजा, माता:पट्टरानी जयरामा, प्राणत स्वर्ग से अवतरित हुए।गर्भ कल्याणक तिथि:फाल्गुन कृष्ण नवमी, गर्भनक्षत्र:मूल, गर्भावास:प्रभात

🌟जन्म कल्याणक तिथि:मार्गशीर्ष शुक्ला प्रतिपदा,
जन्म नक्षत्र:मूल, चिन्ह:मगर, आयु:2 लाख पूर्व,

🌳वैराग्यकारण:उल्कापात,दीक्षातिथि:मार्गशीर्ष शुक्ला 1,दीक्षा समय:अपराह्न, दीक्षा नक्षत्र:अनुराधा,दीक्षावन:पुष्प,
दीक्षावृक्ष:साल, सहदीक्षित मुनि: 1000,
दीक्षापालकी:सूर्यप्रभा, दीक्षास्थान:काकन्दी,
प्रथम आहार दाता:शैलपुर नगर के पुष्पमित्र राजा,छद्मस्थ काल:4 वर्ष.

🌲केवलज्ञान तिथि:कार्तिक शुक्ल द्वितीया,केवलोत्पत्ति काल:अपराह्न, केवलस्थान:पुष्पवन, केवल नक्षत्र:मूल,
समवसरण भूमि:8 योजन, केवल वृक्ष:बहेड़ा,यक्ष:ब्रह्म,
यक्षिणी:काली, केवलीकाल:1 लाख पूर्व-(28पूर्वांग4 मास)गणधर संख्या:88, मुख्य गणधर:नाग,ऋषि संख्या:2 लाख,आर्यिका:380000, मुख्य आर्यिका:घोष, श्रावक:2 लाख,श्राविका:4 लाख, मुख्य श्रोता:बुध्दि वीर्य, योग निवृत्ति काल:1 मास पूर्व।

🌄निर्वाण तिथि:भाद्रपद शुक्ला अष्टमी,
निर्वाण क्षेत्र:सम्मेद शिखर।

🌹"ध्यानामृत पीकर भये, मृत्युंजय प्रभु आप"।🌹
🌷"धन्य घड़ी प्रभु भक्ति की,जजत मिटे भव ताप"।।🌷

🥁⛺️🙏▶️ ओंम ह्रीं श्री पुष्पदन्त जिनेन्द्राय नमः🙏⛺️🥁

*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 सितम्बर माह में  अष्टमी तिथि 11व  25 सितम्बर को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 सितम्बर माह में  चतुर्दशी तिथि   17 सितम्बर को है।*
*🎪इस सितंबर माह में  ▶️ 🎪20 अगस्त से 18 सितंबर तक षोडश कारण व्रत,⛳ ।*
🎪सितंबर माह के महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रम निम्न प्रकार है 
▶️8 से 17 में दश लक्षण व्रत 
▶️8 से 12 में मेरु स्थापना व पुष्पांजलि व्रत 
▶️ 13  को धूप दशमी, सुगंध दशमी 
▶️15 से 17 तक रत्नत्रय व्रत 
▶️ 17 को श्री वासुपूज्य जी का मोक्ष व अनंत चतुर्दशी व्रत 
▶️ 18 को क्षमावाणी पर्व 
▶️19 को श्री नमिनाथ जी का गर्भ कल्याणक 
*🔔नोट शुक्र ग्रह के दुष्प्रभाव से होनी वाली बाधाएं (जैसे:- पति-पत्नी में अनबन, पुत्र प्राप्ति ना होना, विवाह संबंधी परेशानी और भी शुक्र ग्रह से होने वाली सभी  परेशानियों के लिए पुष्पदंत भगवान की विशेष आराधना करनी चाहिए।)*
*👨‍👨‍👦‍👦इस सम्पूर्ण विश्व में अगर कोई जो जैन धर्म पर आस्था रखता है और उसे किसी भी प्रकार के किसी भी ग्रह संबंधित समस्या उत्पन्न हो रही है तो वह श्री शान्तिसागर समाधि साधना सेवा केन्द्र के व्हाट्सएप नंबर 9461956111 पर मैसेज भेजे उसका उसकी समस्या के अनुरूप समाधान किया जाएगा।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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