गुरुवार, 31 मार्च 2022

प्रायश्चित ही सच्चा सुख

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒प्रायश्चित ही सच्चा सुख💐💐*

एक बार भक्त प्रहलाद से दानवों ने पूछा – हे प्रहलाद ! सच्चा सुख कैसे प्राप्त होता है?

यह सुनकर भक्त प्रहलाद हस पड़े । फिर उन्होंने बोला – सच्चा सुख पाना बहुत ही कठिन है। यह तुम्हारे लिए असंभव है। क्योंकि तुम सच्चा सुख पाने वाले मार्ग पर नहीं चल सकते ।

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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दानवों ने सच्चे सुख के मार्ग को बताने के लिए भक्त प्रहलाद से बार बार आग्रह किया तो प्रहलाद बोले – जन कल्याण के द्वारा ही सच्चा सुख प्राप्त किया जा सकता है। किन्तु तुम लोग यह नहीं कर सकते क्योंकि तुम लोगो अपना बचपन खेल कूद और शैतानियों में गुजारे हो। युवा होने पर भोग तृष्णा में पाप करते हो और वृद्धावस्था में तुम्हारे पास पछताने के अलावा कुछ नहीं बचता है।

 सच्चा सुख तो कल्याण कार्यों के द्वारा ही प्राप्त हो सकता है। इसी में आत्मानंद और परमानंद प्राप्त होता है।।

प्रहलाद ने फिर उन दानवों से कहा – मै भी तो एक दानव राज ही हूं परन्तु मै जनकल्याण में लगा हूं। ईश्वर पर भरोसा करता हूं। इसलिए सुखी हूं। तुम लोग भी ऐसा कर लो तुम्हारा भी कल्याण हो जाएगा।
याद रखो ! किसी भी आयु में वीतरागी प्रभु की भक्ति तथा दुष्कर्मों का त्याग कर के उनका प्रायश्चित कर लेने से सदमार्ग साफ दिखाई देता है। उस पर चलते रहने से गुरुकृपा  होने से सच्चा मार्ग पर चलने की आत्मशक्ति का निर्माण होता है ।तब जाके सच्चा सुख मिलता है।
प्रहलाद की इन बातो को सुनकर उन दानवों ने संकल्प लिया की जीवन का जो बचा हुआ भाग है उसे व्यर्थ ना कर के जनकल्याण में समर्पित कर सच्चा सुख प्राप्ति वाले मार्ग पर चलेंगे।
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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बुधवार, 30 मार्च 2022

परमात्मा के प्रति समर्पण

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*💪👩‍🚒परमात्मा के प्रति समर्पण💐💐*
एक राजा था उसका एक मंत्री था , जिसका नाम जय सिंह था। वह बहुत बुद्धिमान तथा समझदार था।
एक बार राजा के राज्य पर साथ वाले राज्य ने आक्रमण कर दिया। वह बहुत दुखी हुआ। 

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वह अपनी जान बचाने के लिए गुप्त मार्ग से अपने मंत्री के साथ जंगल में पहुंच गया । उसके मंत्री को चाहे कोई दुख हो या सुख हो वह हमेशा यही कहता कि परमात्मा जो करता है अच्छा ही करता है। परंतु राजा को यह बात अच्छी ना लगती । इसलिए जब भी वह मंत्री के मुख से यह बात सुनता तो जल भुन जाता ।

 अब जब मंत्री और राजा अपनी जान बचाकर जंगल में पहुंचे तो मंत्री मन ही मन परमात्मा को धन्यवाद दे रहा था।

 उसने राजा से कहा- राजन! घबराने की क्या जरूरत है ,ईश्वर पर भरोसा रखो वह जो भी करता है अच्छा ही करता है ।हमारी पराजय का कोई भेद होगा। जो हमें अभी तक पता नहीं चल रहा है। राजा इस आशापूर्ण उत्तर से जल भुन गया । 

उसने मंत्री से कहा- तुम्हारा परमात्मा कितना निर्दयी है उसने मेरा राजपाट ताज- तख्त सभी कुछ मुझसे छीन लिया।
बातें करते काफी समय बीत गया। अंधेरा छाने लगा और फिर वर्षा भी होने लगी। मौसम में एकदम ठंड छा गई। उन्हें सर्दी पीड़ा दे रही थी। उन्होंने आग जलाई परंतु बौछार के साथ ही वह भी बुझ गई । तभी राजा फिर भड़क कर मंत्री से कहा- तुम्हारा भगवान कितना निर्दयी है। उसे हम पर जरा भी तरस नहीं आता। 

इतने में उन्हें घोड़ों के टापू का स्वर सुनाई दिया। सिपाही घोड़ों पर बैठकर उनकी तरफ आ रहे थे। दुश्मनों के सिपाहियों को देखकर राजा का बुरा हाल हो रहा था । लेकिन अंधेरा होने के कारण राजा और मंत्री के घोड़े दिखाई ही नहीं दिए ।

 तभी उनमें से एक ने कहा – जल्दी ढूंढो वह यहीं कहीं छुपे होंगे। दूसरे ने कहा – जल्दी करो कल उन दोनों को फांसी दे दी जाएगी और हमें बहुत सारा इनाम मिलेगा। लेकिन वे सैनिक राजा और मंत्री को ना ढूंढ सके और अपना सा मुंह लेकर वापस चले गए।

इस तरह राजा और मंत्री की जान बच गई। तभी मंत्री ने राजा से कहा महाराज अब तो आपको ईश्वर पर भरोसा हो गया होगा कि परमात्मा जो भी करता है अच्छा ही करता है। यदि भगवान की कृपा से वर्षा न होती तो सिपाही आग की रोशनी में हमें ढूंढ लेते और कल हमें फांसी हो जाती। अब राजा अपने समझदार भक्त मंत्री की बातें सुनकर बहुत प्रभावित हुआ । अब उसे परमात्मा पर विश्वास हो गया उधर उसके राज्य में अचानक प्राकृतिक आपदाएं आई। राजमहल में बैठा दुश्मन राजा महल के मलबे में दबकर ही मर गया। चारों ओर हाहाकार मच गई। उधर मंत्री और राजा दोबारा अपने राज्य में चले गए बिना लड़े भिड़े ही उन्हें राज्य पुनः प्राप्त भी हो गया।
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मंगलवार, 29 मार्च 2022

मृत्यु का उत्साह

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कपिला नगरी के राजा देवराज अपने मंत्री के ज्ञान व उन्नत चेतना से अधिक खुश नहीं थे। एक बार मंत्री के जन्मदिवस समारोह के अवसर पर सब खुशी से झूम रहे थे कि तभी कुछ सैनिक राजा का संदेश लेकर पहुंचे और बोले- 'आज शाम को मंत्री को फांसी दी जाएगी।' यह सुनकर समारोह में उदासी छा गयी। मंत्री के मित्र, संबंधी आदि सभी रोने लगे। 

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मगर मंत्री आराम से संगीत व नृत्य का आनंद लेते रहे। ऐसा लगता था जैसे उन्होंने कुछ सुना ही नहीं। यह सोचकर सैनिकों ने फिर से राजा का संदेश सुनाया तो मंत्री ने सैनिकों से कहा 'राजा को मेरी ओर से धन्यवाद देना कि कम से कम मृत्यु से पहले आनंद मनाने के लिए अभी जब कई घंटे शेष हैं। उन्होंने मुझे पहले बताकर मुझ पर बड़ा उपकार किया है। अब मैं अपनी मौत से पहले पूरी खुशी मना सकता हूॅं।' यह कहकर मंत्री फिर से नाचने लगे। यह देखकर सैनिक वापस राजा देवराज के पास पहुंचे।

राजा ने पूछा- 'मौत का संदेश सुनकर मंत्री का क्या हाल था?' सैनिकों ने बताया कि वह तो खुशी से झूम उठे, आपको धन्यवाद देने को कहा है। देवराज ने कल्पना तक नहीं की थी कि मौत की खबर पर कोई खुश हो सकता है।

वह सच जानने के लिए मंत्री के घर पहुंचे तो देखा कि मंत्री खुशी से नाच-गा रहे थे। राजा ने मंत्री से पूछा, 'आज शाम तुम्हारी मौत है और तुम हंस रहे हो, गा रहे हो?' मंत्री ने राजा को धन्यवाद दिया और कहा- 'इतने आनंद से मैं कभी भी न भरा था। आपने मौत का समय बताकर बड़ी कृपा की। मृत्यु का उत्सव मनाना आसान हो गया। यह सुनकर महाराज देवराज अवाक रह गए और बोले- 'जब तुम मौत से व्यथित ही नहीं तो अब तुम्हें फांसी देना बेकार है।'
 
यह कहानी आज के परिपेक्ष में ही है कि हम सभी भय के वातावरण में जी रहे हैं। लेकिन यदि यह ज्ञात हो जाए कि हमारा आने वाला प्रत्येक क्षण वर्तमान क्षण से ही निकलेगा तो फिर मनःस्थिति पूरी तरह से भिन्न हो जाएगी। हमें सदैव स्मरण रहना चाहिए कि यदि हम वर्तमान में चिंतित हैं दुखी हैं तो अगले क्षण भी चिंतित और दुखी ही रहेंगे लेकिन यदि हम इस क्षण आनंदित हैं तो अगले क्षण भी आनंदित ही रहेंगे।
*अतः हमें वर्तमान में जो हमारा कर्तव्य है उसे ध्यान में रखकर अपना आचरण करना चाहिए।*
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सोमवार, 28 मार्च 2022

स्वंयवर

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
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एक राजा जो बहुत ही दयावान और प्रजाप्रिय था। उसकी एक बेटी थी। वह बहुत ही सुन्दर और बुद्धिमान थी। राजकुमारी जब बड़ी हुई तो राजा को उसके विवाह की चिंता सताने लगी। राजकुमारी के लिए वर ढूंढने से पहले राजा ने राजकुमारी की राय जाननी चाही।
राजकुमारी ने काफी सोच विचार कर अपने पिता से कहा– पिता जी ! जो व्यक्ति मेरी पसंद का दीपक ला देगा मै उसी से विवाह करूंगी।

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अगले दिन राजा ने राजकुमारी की शर्त के साथ स्वयंवर की घोषणा कर दी। स्वयंवर का दिन आ गया , हाथ में दीपक लिए हुए युवकों की कतार लग गई । वह भी बहुत ही लंबी कतार। कोई युवक राजकुमार था तो कोई नगर सेठ, कोई साहूकार था तो कोई साहसी बहादुर। सबके पास तरह तरह के दीपक थे । छोटे–बड़े , सोने–चांदी के हीरे–जवाहरात के जगमगाते सुन्दर नक्काशी वाले दीपक ।

राजकुमारी सबके दीपक देखती हुई कतार के अंत तक जा पहुंची मगर अबतक उसको  मनपसंद दीपक नहीं मिला । लेकिन कतार के अंत में खड़े युवक के हाथ में कोई दीपक नहीं था । राजकुमारी ने उस युवक से पूछा – आप अपने साथ दीपक नहीं लाए ?
युवक ने दाए बाए देखा , थोड़ी सी गीली मिट्टी उठाकर एक गोला बनाया और फिर उसे बाए हाथ में लेकर उसने अपने दाए कुहनी से दबा दिया । मिट्टी का दीपक तैयार हो गया ।राजकुमारी ने मुस्कुराकर वरमाला उस युवक के गले में डाल दी।
मित्रों" दीपक का काम प्रकाश देना है फिर चाहे वह सोने का हो या मिट्टी का। जिस समय प्रकाश की आवश्यकता हो तब क्या हम सोने या चांदी के दीपक को ढूंढने अथवा खरीदने निकलेंगे ?
राजकुमारी को दीपक की जरूरत नहीं थी । दरअसल वह तो सिर्फ प्रतिभा और दूरदर्शिता की परीक्षा ले रही थी।
*👩👨आज वर्तमान में लड़के व लड़की के विचार मिलते है तो शादी कर लेना चाहिये।दोनों को दोनों परिवार के साथ मिलकर धर्म का पालन करते हुए जीवन निर्वाह करना चाहिए।पति-पत्नी अकेले रहने से आने वाली पिढी मे संस्कार नहीं रहते है।यही वर्तमान मे परिवर्तन दिखाई देता है।*
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रविवार, 27 मार्च 2022

कपडों काआदर

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*💪👩‍🚒कपड़ों का आदर*💐💐

एक बार की बात है किसी गाँव में एक पंडित रहता था| वैसे तो पंडित जी को वेदों और शास्त्रों का बहुत ज्ञान था लेकिन वह बहुत ग़रीब थे| ना ही रहने के लिए अच्छा घर था और ना ही अच्छे भोजन के लिए पैसे|

एक छोटी सी झोपड़ी थी, उसी में रहते थे और भिक्षा माँगकर जो मिल जाता उसी से अपना जीवन यापन करते थे|
एक बार वह पास के किसी गाँव में भिक्षा माँगने गये, उस समय उनके कपड़े बहुत गंदे थे और काफ़ी जगह से फट भी गये थे|
जब उन्होने एक घर का दरवाजा खटखटाया तो सामने से एक व्यक्ति बाहर आया, उसने जब पंडित को फटे चिथड़े कपड़ों में देखा तो उसका मन घ्रणा से भर गया और उसने पंडित को धक्के मारकर घर से निकाल दिया, बोला- पता नहीं कहाँ से गंदा पागल चला आया है|
पंडित दुखी मन से वापस चला आया, जब अपने घर वापस लौट रहा था तो किसी अमीर आदमी की नज़र पंडित के फटे कपड़ों पर पड़ी तो उसने दया दिखाई और पंडित को पहनने के लिए नये कपड़े दे दिए|

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अगले दिन पंडित फिर से उसी गाँव में उसी व्यक्ति के पास भिक्षा माँगने गया| व्यक्ति ने नये कपड़ों में पंडित को देखा और हाथ जोड़कर पंडित को अंदर बुलाया और बड़े आदर के साथ थाली में बहुत सारे व्यंजन खाने को दिए| पंडित जी ने एक भी टुकड़ा अपने मुँह में नहीं डाला और सारा खाना धीरे धीरे अपने कपड़ों पर डालने लगे और बोले- ले खा और खा|
व्यक्ति ये सब बड़े आश्चर्य से देख रहा था, आख़िर उसने पूछ ही लिया कि- पंडित जी आप यह क्या कर रहे हैं सारा खाना अपने कपड़ों पर क्यूँ डाल रहे हैं|
पंडित जी ने बहुत शानदार उत्तर दिया- क्यूंकी तुमने ये खाना मुझे नहीं बल्कि इन कपड़ों को दिया है इसीलिए मैं ये खाना इन कपड़ों को ही खिला रहा हूँ, कल जब में गंदे कपड़ों में तुम्हारे घर आया तो तुमने धक्के मारकर घर से निकाल दिया और आज तुमने मुझे साफ और नये कपड़ों में देखकर अच्छा खाना पेश किया| असल में तुमने ये खाना मुझे नहीं, इन कपड़ों को ही दिया है, वह व्यक्ति यह सुनकर बहुत दुखी हुआ|
मित्रों, किसी व्यक्ति की महानता उसके चरित्र और ज्ञान पर निर्भर करती हैं पहनावे पर नहीं| अच्छे कपड़े और गहने पहनने से इंसान महान नहीं बनता उसके लिए अच्छे कर्मों की ज़रूरत होती है| यही इस कहानी की प्रेरणा है।

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शनिवार, 26 मार्च 2022

कान्हा ओर यशोदा

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*💪👩‍🚒यशोदा और कान्हा💐💐*

 नंद बाबा चुपचाप रथ पर कान्हा के वस्त्राभूषणों की गठरी रख रहे थे। दूर ओसारे में मूर्ति की तरह शीश झुका कर खड़ी यशोदा को देख कर कहा- दुखी क्यों हो यशोदा, दूसरे की बस्तु पर अपना क्या अधिकार?

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-महानुभावों आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कुछ संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से फल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक फल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

यशोदा ने शीश उठा कर देखा नंद बाबा की ओर, उनकी आंखों में जल भर आया था। नंद निकट चले आये। यशोदा ने भारी स्वर से कहा- तो क्या कान्हा पर हमारा कोई अधिकार नहीं? ग्यारह वर्षों तक हम असत्य से ही लिपट कर जीते रहे?

नंद ने कहा- अधिकार क्यों नहीं, कन्हैया कहीं भी रहे, पर रहेगा तो हमारा ही लल्ला न! पर उसपर हमसे ज्यादा देवकी वसुदेव का अधिकार है, और उन्हें अभी कन्हैया की आवश्यकता भी है।

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यशोदा ने फिर कहा- तो क्या मेरे ममत्व का कोई मोल नहीं?

नंद बाबा ने थके हुए स्वर में कहा- ममत्व का तो सचमुच कोई मोल नहीं होता यशोदा। पर देखो तो, कान्हा ने इन ग्यारह वर्षों में हमें क्या नहीं दिया है।

 उम्र के उत्तरार्ध में जब हमने संतान की आशा छोड़ दी थी, तब वह हमारे आंगन में आया। तुम्हें नहीं लगता कि इन ग्यारह वर्षों में हमने जैसा सुखी जीवन जिया है, वैसा कभी नहीं जी सके थे।

 दूसरे की वस्तु से और कितनी आशा करती हो यशोदा, एक न एक दिन तो वह अपनी बस्तु मांगेगा ही न! कान्हा को जाने दो यशोदा।

यशोदा से अब खड़ा नहीं हुआ जा रहा था, वे वहीं धरती पर बैठ गयी, कहा- आप मुझसे क्या त्यागने के लिए कह रहे हैं, यह आप नहीं समझ रहे।

नंद बाबा की आंखे भी भीग गयी थीं। उन्होंने हारे हुए स्वर में कहा- तुम देवकी को क्या दे रही हो यह मुझसे अधिक कौन समझ सकता है यशोदा! आने वाले असंख्य युगों में किसी के पास तुम्हारे जैसा दूसरा उदाहरण नहीं होगा। यह जगत सदैव तुम्हारे त्याग के आगे नतमस्तक रहेगा।

यशोदा आँचल से मुह ढांप कर घर मे जानें लगीं तो नंद बाबा ने कहा- अब कन्हैया तो भेज दो यशोदा, देर हो रही है।

यशोदा ने आँचल को मुह पर और तेजी से दबा लिया, और अस्पस्ट स्वर में कहा- एक बार उसे खिला तो लेने दीजिये, अब तो जा रहा है। कौन जाने फिर...

नंद चुप हो गए।

यशोदा माखन की पूरी मटकी ले कर ही बैठी थीं, और भावावेश में कन्हैया की ओर एकटक देखते हुए उसी से निकाल निकाल कर खिला रही थी। कन्हैया ने कहा- एक बात पूछूं मइया?

यशोदा ने जैसे आवेश में ही कहा- पूछो लल्ला।

तुम तो रोज मुझे माखन खाने पर डांटती थी मइया, फिर आज अपने ही हाथों क्यों खिला रही हो?

यशोदा ने उत्तर देना चाहा पर मुह से स्वर न फुट सके। वह चुपचाप खिलाती रही। कान्हा ने पूछा- क्या सोच रही हो मइया?

यशोदा ने अपने अश्रुओं को रोक कर कहा- सोच रही हूँ कि तुम चले जाओगे तो मेरी गैया कौन चरायेगा।

कान्हा ने कहा- तनिक मेरी सोचो मइया, वहां मुझे इस तरह माखन कौन खिलायेगा? मुझसे तो माखन छिन ही जाएगा मइया।

यशोदा ने कान्हा को चूम कर कहा- नहीं लल्ला, वहां तुम्हे देवकी रोज माखन खिलाएगी।

कन्हैया ने फिर कहा- पर तुम्हारी तरह प्रेम कौन करेगा मइया?

अबकी यशोदा कृष्ण को स्वयं से लिपटा कर फफक पड़ी। मन ही मन कहा- यशोदा की तरह प्रेम तो सचमुच कोई नहीं कर सकेगा लल्ला, पर शायद इस प्रेम की आयु इतनी ही थी।

कृष्ण को रथ पर बैठा कर अक्रूर के संग नंद बाबा चले तो यशोदा ने कहा- तनिक सुनिए न, आपसे देवकी तो मिलेगी न? उससे कह दीजियेगा, लल्ला तनिक नटखट है पर कभी मारेगी नहीं।

*नंद बाबा ने मुह घुमा लिया। यशोदा ने फिर कहा- कहियेगा कि मैंने लल्ला को कभी दूभ से भी नहीं छुआ, हमेशा हृदय से ही लगा कर रखा है।*

*नंद बाबा ने रथ को हांक दिया। यशोदा ने पीछे से कहा- कह दीजियेगा कि लल्ला को माखन प्रिय है, उसको ताजा माखन खिलाती रहेगी। बासी माखन में कीड़े पड़ जाते हैं।*

*नंद बाबा की आंखे फिर भर रही थीं, उन्होंने घोड़े को तेज किया। यशोदा ने तनिक तेज स्वर में फिर कहा- कहियेगा कि बड़े कौर उसके गले मे अटक जाते हैं, उसे छोटे छोटे कौर ही खिलाएगी।*

*नंद बाबा ने घोड़े को जोर से हांक लगाई, रथ धूल उड़ाते हुए बढ़ चला।*
*यशोदा वहीं जमीन पर बैठ गयी और फफक कर कहा- कृष्ण से भी कहियेगा कि मुझे स्मरण रखेगा।*

*उधर रथ में बैठे कृष्ण ने मन ही मन कहा- तुम्हें यह जगत सदैव स्मरण रखेगा मइया। तुम्हारे बाद मेरे जीवन मे जीवन बचता कहाँ है ?*


 *लीलायें तो ब्रज में ही छूट जायेंगी..*
*हाथी घोड़ा पालकी - जय कन्हैया लाल की*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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शुक्रवार, 25 मार्च 2022

किसान और चट्टान

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒किसान और चट्टान💐💐*

एक किसान था,वह एक बड़े से खेत में खेती किया करता था।उस खेत के बीचो-बीच पत्थर का एक हिस्सा ज़मीन से ऊपर निकला हुआ था जिससे ठोकर खाकर वह कई बार गिर चुका था और ना जाने कितनी ही बार उससे टकराकर खेती के औजार भी टूट चुके थे।

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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रोजाना की तरह आज भी वह सुबह-सुबह खेती करने पहुंचा पर जो सालों से होता आ रहा था एक वही हुआ , एक बार फिर किसान का हल पत्थर से टकराकर टूट गया।

किसान बिल्कुल क्रोधित हो उठा , और उसने मन ही मन सोचा की आज जो भी हो जाए वह इस चट्टान को ज़मीन से निकाल कर इस खेत के बाहर फ़ेंक देगा।

वह तुरंत भागा और गाँव से ४-५ लोगों को बुला लाया और सभी को लेकर वह उस पत्त्थर के पास पहुंचा .
” मित्रों “, किसान बोला , ” ये देखो ज़मीन से निकले चट्टान के इस हिस्से ने मेरा बहुत नुक्सान किया है, और आज हम सभी को मिलकर इसे जड़ से निकालना है और खेत के बाहर फ़ेंक देना है।”

और ऐसा कहते ही वह फावड़े से पत्थर के किनार वार करने लगा, पर ये क्या ! अभी उसने एक-दो बार ही मारा था की पूरा-का पूरा पत्थर ज़मीन से बाहर निकल आया. साथ खड़े लोग भी अचरज में पड़ गए और उन्ही में से एक ने हँसते हुए पूछा ,” क्यों भाई , तुम तो कहते थे कि तुम्हारे खेत के बीच में एक बड़ी सी चट्टान दबी हुई है , पर ये तो एक मामूली सा पत्थर निकला ??”

किसान भी आश्चर्य में पड़ गया सालों से जिसे वह एक भारी-भरकम चट्टान समझ रहा था दरअसल वह बस एक छोटा सा पत्थर था !! उसे पछतावा हुआ कि काश उसने पहले ही इसे निकालने का प्रयास किया होता तो ना उसे इतना नुक्सान उठाना पड़ता और ना ही दोस्तों के सामने उसका मज़ाक बनता ।

 मित्रों, इस किसान की तरह ही हम भी कई बार ज़िन्दगी में आने वाली छोटी-छोटी बाधाओं को बहुत बड़ा समझ लेते हैं और उनसे निपटने की बजाये तकलीफ उठाते रहते हैं।
ज़रुरत इस बात की है कि हम बिना समय गंवाएं उन मुसीबतों से लडें , और जब हम ऐसा करेंगे तो कुछ ही समय में चट्टान सी दिखने वाली समस्या एक छोटे से पत्थर के समान दिखने लगेगी जिसे हम आसानी से ठोकर मार कर आगे बढ़ सकते हैं।
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गुरुवार, 24 मार्च 2022

परिवर्तन

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒परिवर्तन💐💐*

*👑एक राजा था। वह दयालु और धर्म की राह पर चलने वाला, जनता के कष्टों को दूर करने का सदैव प्रयत्न करता रहता। लेकिन राजकुमार का स्वभाव राजा से बिलकुल विपरीत था। उसे निरपराध नागरिकों को यातना देने में आनंद आता था। स्वभाव से दुष्ट और निर्दयी और बोलने में भी कर्कश। राजकुमार को बार-बार क्रोध आ जाता था।* 

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राजा, राजकुमार की इन हरकतों से काफी खिन्न था। राजा ने अपने पुत्र को सुधारने के लिए जितने प्रयत्न संभव थे, किए लेकिन राजकुमार अपने कुमार्ग से नहीं हटा। उसकी हरकतों से राज्य की जनता में विरोध बढ़ता जा रहा था। जैसे जैसे राजकुमार की उम्र बढ़ती जा रही थी वैसे-वैसे उत्पात भी बढ रहे थे। 

सभी परिजन उससे किसी न किसी तरह मुक्त होना चाहते थे। धीरे-धीरे इसकी जानकारी पड़ोस के नगर में रहने वाले एक संत को पड़ी। संत ने सोचा यह तो एक दिन तानाशाह बनकर नगरवासियों को काफी परेशान करेगा। संत ने उस राजकुमार को भले मार्ग पर लाने का निश्चय किया। संत ने राजकुमार को अपने पास नहीं बुलाया बल्कि स्वयं उसके पास गए।

संत उसे एक छोटे नीम के वृक्ष के पास ले गए और उससे कहा, “राजकुमार! जरा इस वृक्ष का पत्ता तो तोड़कर देखो, इसका स्वाद कैसा है?” 

राजकुमार ने झट से पत्ते तोड़े और एक पत्ते को मुंह में चबा डाला तो राजकुमार का मुंह कड़वाहट से भर गया। इतनी सी बात से राजकुमार आपे से बाहर हो गया। इसके लिए उसने संत से तो कुछ नहीं कहा परंतु उस पेड़ को अपने नौकरों को आदेश देकर उखड़वा दिया। 

संत राजकुमार से बोला, “अरे राजकुमार यह आपने क्या किया।” राजकुमार बोला, “इस पौधे के लिए तो यही किया जाना चाहिए था क्योंकि जब अभी से ही इतना कड़वा है तो और बढ़ने पर तो विष ही बन जाएगा। संत जी, जो कुछ मैंने किया है वह ठीक ही किया है।” संत राजकुमार से ऐसा ही कहलवाना चाहते थे। 

संत जी, बड़े ही गंभीर स्वर में बोले, “राजकुमार! तुम्हारे दुर्व्यवहार और अत्याचारों से परेशान होकर यदि जनता तुम्हारे से वही व्यवहार करने को तैयार हो जाए जो तुमने नीम के पौधे के साथ किया, तो इसका तुम्हारे पास क्या उपाय है?” 

इससे राजकुमार को काफी झटका लगा और संत जी द्वारा दिखाई राह पर चलने का निश्चय किया और फिर कभी बुराई की राह पर नही गया।
*👨‍👩‍👧‍👦🔔🙏▶️विशेष:- आज वर्तमान में पूरा विश्व कई कारणों से परेशान है।उसका मुख्य कारण यह है कि हम आवश्यक परिवर्तन नहीं कर रहे।*
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बुधवार, 23 मार्च 2022

सगठन की शक्ति

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒संगठन की शक्ति💐💐*

स्वामी विवेकानंद धर्म प्रचार करते हुए एक रियासत में पहुँचे। उस रियासत का जागीरदार धर्म के नियमों को धता बताकर लोगों का उत्पीड़न करता था ।

प्रवचन समाप्त होने के बाद अपना यही दुःख कहने कुछ व्यक्ति स्वामीजी के पास पहुँचे। 

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उन्होंने स्वामीजी से कहा, ‘हम धर्म के अनुसार सादा जीवन जीने का प्रयास करते हैं, लेकिन जागीरदार के लठैत हमें चैन से भगवान् की भक्ति और परिवार का पालन नहीं करने देते। हमें क्या करना चाहिए?’

स्वामीजी ने पूछा, ‘क्या जागीरदार पड़ोस के शासक से भी झगड़ा करता है?’

 उन्हें बताया गया कि पड़ोस का जागीरदार उससे ज्यादा शक्तिशाली है। वह उससे डरता है।

स्वामीजी ने कहा, ‘यही तो प्रकृति का नियम है। 

शिकारी हिरन और अन्य कमजोर प्राणियों का ही शिकार करता है । मछुआरा निरीह मछली को ही जाल में फांसता है ।

कुछ अंधविश्वासी देवता के सामने निरीह बकरे की ही बलि देते हैं। क्या कभी किसी को शेर की बलि देते देखा है?’

 कुछ क्षण रुककर स्वामीजी ने कहा, ‘आप सब भगवान् की भक्ति के साथ-साथ संगठित होकर शक्ति का संचय करें।

शरीर से बलिष्ठ बनने पर अत्याचार का विरोध करने का साहस पैदा होगा। जब कारिंदा धमकी देने आए, तो सब इकट्ठा होकर उसका मुकाबला करो । ‘

स्वामीजी की प्रेरणा से ग्रामीणों ने संगठित होकर जागीरदार का विरोध किया। 

विरोध की आवाज उठते ही जागीरदार के होश ठिकाने आ गए, उसने उन्हें सताना छोड़ दिया।
*👨‍👩‍👧‍👦विशेष:- आज हमारे घर में, समाज में, राज्य में व देश में संगठन की कमी है।इसके कारण मँहगाई व अनेक समस्याओं की जड़ें मजबूत हो रही है।अतः आप सभी वर्तमान समय से ही जागृत होकर इस समस्या को समाप्त करने में पहले व्यक्ति बन सकते है।*

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मंगलवार, 22 मार्च 2022

मिनी की माला

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒मिनी की माला💐💐*

उत्तरप्रदेश में एक पिता अपनी चार वर्षीय बेटी मिनी से बहुत प्रेम करता था। ऑफिस से लौटते वक़्त वह रोज़ उसके लिए तरह-तरह के खिलौने और खाने-पीने की चीजें लाता था। बेटी भी अपने पिता से बहुत लगाव रखती थी और हमेशा अपनी तोतली आवाज़ में पापा-पापा कह कर पुकारा करती थी।

दिन अच्छे बीत रहे थे की अचानक एक दिन मिनी को बहुत तेज बुखार हुआ, सभी घबरा गए , वे दौड़े भागे सरकारी अस्पताल डॉक्टर के पास गए , पर वहां ले जाने के दो दिन बाद  मिनी की मृत्यु हो गयी।

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परिवार पे तो मानो पहाड़ ही टूट पड़ा और पिता की हालत तो मृत व्यक्ति के समान हो गयी। मिनी के जाने के हफ़्तों बाद भी वे ना किसी से बोलते ना बात करते…बस रोते ही रहते।वे हमेशा उदास रहने के कारण, यहाँ तक की उन्होंने ऑफिस जाना भी छोड़ दिया और घर से निकलना भी बंद कर दिया।

आस-पड़ोस के लोगों और नाते-रिश्तेदारों ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की पर वे किसी की ना सुनते , उनके मुख से बस एक ही शब्द निकलता … मिनी !

एक दिन ऐसे ही मिनी के बारे में सोचते-सोचते उनकी आँख लग गयी और उन्हें एक स्वप्न आया।

उन्होंने देखा कि स्वर्ग में सैकड़ों बच्चियां परी बन कर घूम रही हैं, सभी सफ़ेद पोशाकें पहने हुए हैं और गले में रत्नों की माला से उनका शरीर चमक रहा हैं। तभी उन्हें मिनी भी दिखाई दी।

उसे देखते ही पिता बोले , ” मिनी , मेरी प्यारी बच्ची , सभी परियों के गले में रत्नों की माला से उनका शरीर चमक रहा हैं , पर तुम्हारे शरीर पर चमक क्यों नहीं है ?”

मिनी बोली, ” पापा, यह चमक आपके कारण है, क्योकि आप प्रतिसमय उदास रहते  हो कि आपके उदासी के कारण मेरी रत्नों की माला प्रकाशित नहीं है….”

ये सुनते ही पिता की नींद टूट गयी। उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया , वे समझ गए की उनके इस तरह दुखी रहने से उनकी बेटी भी खुश नहीं रह सकती , और वह पुनः सामान्य जीवन की तरफ बढ़ने लगे।

महानुभावों, किसी करीबी के जाने का ग़म शब्दों से बयान नहीं किया जा सकता। पर कहीं ना कहीं हमें अपने आप को मजबूत करना होता है और अपनी जिम्मेदारियों को निभाना होता है। और शायद ऐसा करना ही मरने वाले की आत्मा को शांति देता है।सभी जीव को एक दिन जाना है।कोई कब जायेगा यह निश्चित नहीं है। इसमें कोई संदेह नहीं कि जो हमसे प्रेम करते हैं वे हमे खुश ही देखना चाहते हैं , अपने जाने के बाद भी…!
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सोमवार, 21 मार्च 2022

सभी समस्याओं का हल

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
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*💪👩‍🚒सभी समस्या का समाधान💐💐*

*👨‍👩‍👧‍👦🤝🔔हे भव्य आत्माओं आज आपके जीवन में आने वाली सभी समस्याओं के निराकरण के लिए इस कहानी के माध्यम से आप कुछ समझकर अपना वर्तमान व भविष्य सुखमय बनायें।*

किसी शहर में एक व्यक्ति था, वह हमेशा दु:खी रहा करता था, क्योंकि उसकी समस्याएँ कभी खत्म नहीं नहीं होती थी। इसीलिए धीरे-धीरे उसे ऐसा लगने लगा कि उससे दु:खी व्यक्ति संसार में कोई और नहीं है।

उसकी बातें तक कोई सुनना नहीं चाहता था क्योंकि हमेशा वो नकारात्मक बातें ही किया करता था। इस बात से तो वह और परेशान हो जाता कि उसकी बात कोई सुनने वाला नहीं है।        

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एक दिन उसे पता चला कि शहर में कोई महात्मा आने वाले है। जिनके पास सभी समस्याओं का समाधान है। यह जानकार वह महात्मा के पास पहुंचा। उस महात्मा के साथ हमेशा एक काफिला चला करता था जिसमें कई ऊंट भी थे ।

महात्मा के पास पहुँच कर उस व्यक्ति ने कहा – गुरुजी, सुना है कि आप सभी समस्याओं का समाधान करते है। मैं बहुत दु:खी व्यक्ति हूँ। मेरे इर्द-गिर्द हमेशा बहुत सारी समस्याएँ रहती है। एक को सुलझाता हूँ तो दूसरी पैदा हो जाती है । मैं अपनी आपबीती किसी को सुनता हूं तो कोई सुनता ही नहीं है। दुनिया बड़ी मतलबी हो गयी है। अब आप ही बताइये क्या करूँ ?        

महात्मा ने उसकी बातें ध्यान से सुनी और कहा – भाई, मैं अभी तो बहुत थक गया हूँ परंतु कल सुबह मैं तुम्हारी समस्या का समाधान अवश्य करूंगा। इस बीच तुम मेरा एक काम कर दो, मेरे ऊंटों की देखभाल करने वाला आदमी बीमार है। आज रात तुम इनकी देखभाल कर दो ।

जब सभी ऊंट बैठ जाये तब तुम सो जाना। मैं तुमसे कल सुबह बात करूंगा । अगले दिन महात्मा ने उस आदमी को बुलाया। उसकी आंखे लाल थी। महात्मा ने पूछा – तो बताओ कल रात कैसी नींद आयी ?

व्यक्ति बोला – गुरुजी, मैं तो रात भर सोया ही नहीं। आपने कहा था जब सभी ऊंट बैठ जाये तब सो जाना। पर ऐसा नहीं हुआ जब भी कोशिश करके एक ऊंट को बिठाता दूसरा खड़ा हो जाता। सारे ऊंट बैठा ही नहीं इसीलिए मैं भर रात सो नहीं सका।   

महात्मा जी ने मुस्कुराते हुए कहा – मैं जानता था कि इतने ऊंट एक साथ कभी नहीं बैठ सकता, फिर भी मैंने तुम्हें ऐसा करने को कहा।

यह सुनकर व्यक्ति क्रोधित होकर बोला – महात्मा जी, मैं आपसे हल मांगने आया था पर आपने भी मुझे परेशान कर दिया।

महात्मा बोले – नहीं भाई, दरअसल यह तुम्हारे समस्या का समाधान है। संसार के किसी भी व्यक्ति की समस्या इन ऊंटों की तरह ही है। एक खत्म होगी तो दूसरी खड़ी हो जाएगी । अतः सभी समस्याओं के खत्म होने का इंतज़ार करोगे तो कभी भी चैन से नहीं जी पाओगे।

समस्याएँ तो जीवन का ही अंग है। इसे महसूस करते हुए आप अपने कर्तव्य का पालन करें और अहिंसामयी धर्म के साथ जीवन का आनंद लो। जीवन में सहज रहने का यही एक उपाय है। दुनिया के किसी भी व्यक्ति को तुम्हारी समस्याएँ सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है क्यूंकी उनकी भी अपनी समस्याएँ है।

महात्मा जी की बात सुनकर व्यक्ति के चेहरे पर संतोष और सहजता के भाव उमड़ पड़े। मानो उसे अपनी सभी समस्याओं से निपटने का अचूक मंत्र प्राप्त हो गया हो।
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रविवार, 20 मार्च 2022

मिलन

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*स्कूल के चार करीबी दोस्तों की आंखें नम करने वाली कहानी है..जिन्होंने एक ही स्कूल में एसएससी तक पढ़ाई की है..उस समय शहर में इकलौता लग्जरी होटल था.।*

एसएससी की परीक्षा के बाद उन्होंने तय किया कि हमें उस होटल में जा कर चाय-नाश्ता करना चाहिए..उन चारों ने मुश्किल से चालीस रुपये जमा किए, रविवार का दिन था, साढ़े दस बजे वे चारों साइकिल से होटल पहुंचे।..

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*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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दिनेश, संतोष, मनीष और प्रवीण चाय-नाश्ता करते हुए बातें करने लगे..*उन चारों ने सर्वसम्मति से फैसला किया कि  तीस साल बाद हम भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल एकम* को इस होटल में फिर मिलेंगे..तब तक हम सब को बहुत मेहनत करनी चाहिए, यह देखना दिलचस्प होगा कि इसमें किसकी कितनी प्रगति हुई है..
*जो दोस्त उस दिन बाद में होटल आएगा उसे उस समय का होटल का बिल देना होगा..।*
  
उनको चाय नाश्ता परोसने वाला वेटर कालू यह सब सुन रहा था, उसने कहा कि अगर मैं यहां रहा तो मैं इस होटल में आप सब का इंतजार करूंगा.।
आगे की शिक्षा के लिए चारों अलग अलग हो गए..
 दिनेश के पिता के बदली होने पर वह शहर छोड़ चुका था, संतोष आगे की पढ़ाई के लिए अपने चाचा के पास चला गया, मनीष और प्रवीण को शहर के अलग-अलग कॉलेजों में दाखिला मिला. आखिरकार मनीष भी शहर छोड़कर चला गया..।
  
*दिन, महीने, साल बीत गए..*तीस  वर्षों में उस शहर में आमूल-चूल परिवर्तन आया, शहर की आबादी बढ़ी, सड़कों, फ्लाईओवर, महानगरों ने शहर की सूरत बदल दी। अब वह होटल भी फाइव स्टार होटल बन गया था, वेटर कालू अब कालू सेठ बन गया और इस होटल का मालिक बन गया..। 
  
 तीस  साल बाद, निर्धारित तिथि चैत्र शुक्ल एकम नववर्ष को दोपहर में, एक लग्जरी कार होटल के दरवाजे पर आई..दिनेश कार से उतरा और पोर्च की ओर चलने लगा, दिनेश के पास अब तीन ज्वैलरी शो रूम हैं.।

दिनेश होटल के मालिक कालू सेठ के पास पहुँचा, दोनों एक दूसरे को देखते रहे..।

कालू सेठ ने कहा कि प्रवीण सर ने आपके लिए एक महीने पहले एक टेबल बुक किया है.।
दिनेश मन ही मन खुश था कि वह चारों में से पहला था, इसलिए उसे आज का बिल नहीं देना पड़ेगा, और वह इसके लिए अपने दोस्तों का मजाक उड़ाएगा.।

एक घंटे में संतोष आ गया, संतोष शहर का बड़ा बिल्डर बन गया.।
अपनी उम्र के हिसाब से वह अब एक सीनियर सिटिजन की तरह लग रहे था..अब दोनों बातें कर रहे थे और दूसरे मित्रों का इंतजार कर रहे थे।

तीसरा मित्र मनीष आधे घंटे में आ गया..उससे बात करने पर दोनों को पता चला कि मनीष बिजनेसमैन बन गया है।

तीनों मित्रों की आँखें बार बार दरवाजे पर जा रही थीं, प्रवीण कब आएगा..?
इतनी देर में कालू सेठ ने कहा कि प्रवीण सर की ओर से एक मैसेज आया है, तुम चाय नाश्ता शुरू करो, मैं आ रहा हूँ.।

तीनों तीस साल बाद एक-दूसरे से मिलकर खुश थे..घंटों तक मजाक चलता रहा, लेकिन प्रवीण नहीं आया..।
कालू सेठ ने कहा कि फिर से प्रवीण सर का मैसेज आया है, आप तीनों अपना मनपसंद मेन्यू चुनकर खाना शुरू करें..।

खाना खा लिया तब भी प्रवीण नहीं दिखा, बिल माँगने पर तीनों को जवाब मिला कि ऑनलाइन बिल का भुगतान हो गया है..। 
   
शाम के आठ बजे एक युवक कार से उतरा और भारी मन से निकलने की तैयारी कर रहे तीनों मित्रों के पास पहुँचा, तीनों उस आदमी को देखते ही रह गए.।

युवक कहने लगा, मैं आपके दोस्त का बेटा रवि हूँ, मेरे पिता का नाम प्रवीण भाई है..।
पिताजी ने मुझे आज आपके आने के बारे में बताया, उन्हें इस दिन का इंतजार था, लेकिन पिछले महीने एक गंभीर बीमारी के कारण उनका निधन हो गया..।
उन्होंने मुझे यहाँ देर से पहुँचने का आदेश दिया था। पिताजी ने कहा था कि अगर मैं जल्दी निकल गया और जब मेरे साथियों को पता चलेगा कि मैं इस दुनिया में नहीं हूँ तो वे दुखी होंगे, मेरे दोस्त तब नहीं हँसेंगे और वे एक-दूसरे से मिलने की खुशी खो देंगे..
इसलिए उन्होंने मुझे देर से आने का आदेश दिया..
उन्होंने मुझे उनकी ओर से आपको गले लगाने के लिए भी कहा था। रवि ने अपने दोनों हाथ फैला दिए..।

आसपास के लोग उत्सुकता से इस दृश्य को देख रहे थे, उन्हें लगा कि उन्होंने इस युवक को कहीं देखा है..।
रवि ने कहा कि मेरे पिता शिक्षक बने, मुझे पढ़ाकर कलेक्टर बनाया, आज मैं इस शहर का कलेक्टर हूँ..।  
सब चकित थे, कालू सेठ ने कहा कि अब तीस  साल बाद नहीं बल्कि हर तीस दिन में हम अपने होटल में बार-बार मिलेंगे, और हर बार मेरी तरफ से एक भव्य पार्टी होगी..।

अपने सगे-सम्बन्धियों से मिलते रहो, दोस्तों मिलने के लिए बरसों का इंतजार मत करो, जाने किस की बिछड़ने की बारी आ जाए और पता ही नही चले..।
परिवार के साथ रहें, जिंदा होने की खुशी महसूस करें।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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शुक्रवार, 18 मार्च 2022

भगवान की कृपा

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒भगवान की कृपा🙏👋*

*👩एक महिला किराने की दुकान पर ख़रीदी करने के लिए गई । साथ छोटा बच्चा भी था*

जब महिला ख़रीदी कर रही थी तब *उसका बालक व्यापारी के सामने देखकर हंस रहा था।*
 व्यापारी को बालक निर्दोष हंसमुख और ख़ूब ख़ूब प्यारा लग रहा था। *उसे ऐसा लग रहा था कि इस बालक की हँसी उसके पूरे दिन की थकान उतार रही है*

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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व्यापारी ने उस नन्हें से बालक को अपने पास बुलाया बालक जैसे ही व्यापारी के पास आया *उसने नौकर से चोकलेट का डिब्बा मँगवाया उसने डिब्बा खोल कर उसे बालक की ओर आगे किया ओर बोला- “बेटा तुझे जितनी चोकलेट चाहिए तू उतनी इस डिब्बे में से लेले।”*

 बालक ने उसमें से चोकलेट लेने से मना कर दिया। व्यापारी बालक को बार-बार चोकलेट लेने को बोलता रहा और बालक ना करता रहा।

*बालक की माता दूर खड़ी यह पूरा घटनाक्रम देख रही थी।*

 *थोड़ी देर के बाद व्यापारी ने ख़ुद डिब्बे में हाथ डालकर मूठी भरकर चोकलेट बालक को दी बालक ने दोनो हाथ का खोबा बनाकर व्यापारी द्वारा दी गई चोकलेटों को ले लिया ओर व्यापारी का आभार मानते हुए वह उछलते कूदते माँ के पास  गया।*

दुकान में से ख़रीदारी करने के बाद माँ ने बालक से पूछा- “बेटा तुझे वह अंकल चोकलेट लेने का बोल रहे थे तो भी तू  *चोकलेट क्यों नहीं ले रहा था?”*

 *लड़के ने ख़ुद के हाथ को आगे बढ़ाते हुए कहा-” देखो माँ!*

 अगर मैंने मेरे हाथ से चोकलेट ली होती तो मेरा हाथ बहुत छोटा है, तो *मेरे हाथ में बहुत कम चोकलेट आती* परंतु अंकल का हाथ बड़ा था *वो देते तो ढेर सारी चोकलेट आयी और मेरा पूरा खोबा भर गया।”*

हमारे हाथ से ऊपर वाले के हाथ बहुत बड़े हैं और उनका दिल भी बहुत बड़ा है। *इसलिए उनसे माँगने के बजाय वो क्या देने वाले हैं वह उन पर छोड़ दीजिए।*

 *शिक्षा:- हम अगर स्वयं कुछ भी लेने जाएँगे तो छोटी सी मुट्ठी भराएगी। परंतु जब ईश्वर के ऊपर छोड़ेंगे तो वह कितना देगा इसका हम आकलन नहीं कर सकते।  आवश्यकता  जितना मिलेगा।।*
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गुरुवार, 17 मार्च 2022

प्रारब्ध

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒     प्रारब्ध*

    एक व्यक्ति हमेशा ईश्वर के नाम का जाप किया करता था । धीरे धीरे वह काफी बुजुर्ग हो चला था इसीलिए एक कमरे मे ही पड़ा रहता था ।
                  💥
     जब भी उसे शौच; स्नान आदि के लिये जाना होता था; वह अपने बेटो को आवाज लगाता था और बेटे ले जाते थे ।
                    💥
    धीरे धीरे कुछ दिन बाद बेटे कई बार आवाज लगाने के बाद भी कभी कभी आते और देर रात तो नहीं भी आते थे।इस दौरान वे कभी-कभी गंदे बिस्तर पर ही रात बिता दिया करते थे।।

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    अब और ज्यादा बुढ़ापा होने के कारण उन्हें कम दिखाई देने लगा था एक दिन रात को निवृत्त होने के लिये जैसे ही उन्होंने आवाज लगायी, तुरन्त एक लड़का आता है और बडे ही कोमल स्पर्श के साथ उनको निवृत्त करवा कर बिस्तर पर लेटा जाता है । अब ये रोज का नियम हो गया ।
                    💥
    एक रात उनको शक हो जाता है कि, पहले तो बेटों को रात में कई बार आवाज लगाने पर भी नही आते थे। लेकिन ये  तो आवाज लगाते ही दूसरे क्षण आ जाता है और बडे कोमल स्पर्श से सब निवृत्त करवा देता है ।

    एक रात वह व्यक्ति उसका हाथ पकड लेता है और पूछता है कि सच बता तू कौन है ? मेरे बेटे तो ऐसे नही हैं ।
                  💥
    अभी अंधेरे कमरे में एक अलौकिक उजाला हुआऔर उस लड़के रूपी ईश्वर ने अपना वास्तविक रूप दिखाया।
                    💥
     वह व्यक्ति रोते हुये कहता है : हे प्रभु आप स्वयं मेरे निवृत्ती के कार्य कर रहे है । यदि मुझसे इतने प्रसन्न हो तो मुक्ति ही दे दो ना ।
              🌹🌹🌹🌹
     प्रभु कहते है कि जो आप भुगत रहे है वो आपके प्रारब्ध है । आप मेरे सच्चे साधक है; हर समय मेरा नाम जप करते है इसलिये मै आपके प्रारब्ध भी आपकी सच्ची साधना के कारण स्वयं कटवा रहा हूँ ।💥

     व्यक्ति कहता है कि क्या मेरे प्रारब्ध आपकी कृपा से भी बडे है; क्या आपकी कृपा, मेरे प्रारब्ध नही काट सकती है ।💥

     प्रभु कहते है कि, मेरी कृपा सर्वोपरि है; ये अवश्य आपके प्रारब्ध काट सकती है; लेकिन फिर अगले जन्म मे आपको ये प्रारब्ध भुगतने फिर से आना होगा । यही कर्म नियम है । इसलिए आपके प्रारब्ध मैं स्वयं अपने हाथो से कटवा कर इस जन्म-मरण से आपको मुक्ति देना चाहता हूँ ।💥

ईश्वर कहते है: *प्रारब्ध तीन तरह* के होते है :
💥💥💥💥
*मन्द*, 
                    *तीव्र*, तथा 
                                            *तीव्रतम*
💦.             💥.             💦
*मन्द प्रारब्ध* मेरा नाम जपने से कट जाते है । *तीव्र प्रारब्ध* किसी सच्चे संत का संग करके श्रद्धा और विश्वास से मेरा नाम जपने पर कट जाते है । पर *तीव्रतम प्रारब्ध* भुगतने ही पडते है।💥

लेकिन जो हर समय श्रद्धा और विश्वास से मुझे जपते हैं; उनके प्रारब्ध मैं स्वयं साथ रहकर कटवाता हूँ और तीव्रता का अहसास नहीं होने देता हूँ ।
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बुधवार, 16 मार्च 2022

सुखी जीवन के लिए

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒सुखी जीवन का रहस्य💐💐*
एक महान संत हुआ करते थे जो अपना स्वयं का आश्रम बनाना चाहते थे जिसके लिए वो कई लोगो से मुलाकात करते थे | एक जगह से दूसरी जगह यात्रा के लिए जाना पड़ता था | इसी यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक साधारण सी कन्या विदुषी से हुई | विदुषी ने उनका स्वागत किया और संत से कुछ समय कुटिया में रुक कर आराम करने की याचना की | संत उसके मीठे व्यवहार से प्रसन्न हुए और उन्होंने उसका आग्रह स्वीकार किया |

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*
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विदुषी ने संत को अपने हाथो का स्वादिष्ट भोज कराया | और उनके विश्राम के लिए खटिया पर एक दरी बिछा दी | और खुद फर्श टाट बिछा कर सो गई | विदुषी को सोते ही नींद आ गई | उसके चेहरे के भाव से पता चल रहा था कि विदुषी चैन की सुखद नींद ले रही हैं | उधर संत को खाट पर नींद नहीं आ रही थी | उन्हें मोटे नरम गद्दे की आदत थी जो उन्हें दान में मिला था | वो रात भर विदुषी का सोच रहे थे कि वो कैसे इस कठोर जमीन पर इतने चैन से सो सकती हैं |

दुसरे दिन सवेरा होते ही संत ने विदुषी से पूछा कि – तुम कैसे इस कठोर धरा पर इतने चैन से सो रही थी |तब उसने बड़ी सरलता से उत्तर दिया – हे गुरु देव ! मेरे लिए मेरी ये छोटी सी कुटिया एक महल के समान ही भव्य हैं | इसमें मेरे श्रम की महक हैं | अगर मुझे एक समय भी भोजन मिलता हैं तो मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूँ | जब दिन भर के कार्यों के बाद मैं इस धरा पर सोती हूँ तो मुझे माँ की गोद का आत्मीय अहसास होता हैं | मैं दिन भर के अपने सत्कर्मो का विचार करते हुए चैन की नींद सो जाती हूँ | मुझे अहसास भी नहीं होता कि मैं इस कठोर धरा पर हूँ |

यह सब सुनकर संत जाने लगे | तब विदुषी ने पूछा – हे गुरुवर ! क्या मैं भी आपके साथ आश्रम के लिए धन एकत्र करने चल सकती हूँ ? तब संत ने विनम्रता से उत्तर दिया – बालिका ! तुमने जो मुझे आज ज्ञान दिया हैं उससे मुझे पता चला कि चित्त का सुख कहाँ हैं | अब मुझे किसी आश्रम की इच्छा नहीं रह गई |

यह कहकर संत वापस अपने देश लौट गये और एकत्र किया धन उन्होंने गरीबो में बाँट दिया और स्वयं एक कुटिया बनाकर रहने लगे |

*शिक्षा :*
आत्म शांति एवम संतोष ही सुखी जीवन का रहस्य हैं | जब तक इंसान को संतोष नहीं मिलता वो जीवन की मोह माया में फसा ही रहता हैं और जो इस मोह माया में फसता हैं | उसे कभी चैन नहीं मिलता |

जीवन का सुख संतोष में हैं | अगर मनुष्य जो हैं उसे स्वीकार कर ले और उसी में खुशियाँ तलाशे तो वो उसी क्षण सारे सुख का अनुभव कर लेता हैं | जिस तरह विदुषी एक वक्त के भोजन को ही अपना सौभाग्य मानती हैं | और कठोर धरा पर भी चैन से सोती हैं | उसी कारण उसे जीव में सभी सुखों का अनुभव हुआ हैं | वही एक संत बैरागी होते हुए भी, खाट पर चैन से नहीं सो पा रहा था क्यूंकि उसे अपने पास जो हैं उससे संतोष नहीं था | जिस दिन उसने यह सत्य स्वीकार लिया, उसे एक कुटिया में भी अपार  शांति का अनुभव होने लगा |  

यह कथा सुखी जीवन का रहस्य कहती हैं | आज घर में अपार धन दौलत ऐशो आराम होते हुए थी लोग सुख शांति से नही रहते क्यूंकि उन्हें जो हैं उसमे संतोष नहीं मिलता | कहते हैं ना जिन्हें दुसरो की थाली में घी ज्यादा दिखता हैं वो कभी खुद चैन से नहीं रहते | व्यक्ति को हमेशा वो चाहिये जो उसके पास नहीं हैं |और वो मिल जाए तो नयीं महत्वकांक्षा उसकी जगह ले लेती हैं | इस तरह पूरा जीवन असंतोष में ही बीत जाता हैं और अंत समय में भी चैन नहीं मिलता |

अतः संतुष्टि ही जीवन का मूल मंत्र हैं अगर इंसान में संतोष हैं तो कोई दुःख उसे तोड़ नहीं सकता |यही हैं जीवन का रहस्य |
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
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मंगलवार, 15 मार्च 2022

परिग्रह त्यागों, सुखी बनो

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
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*💪👩‍🚒 परिग्रह त्यागो, सुखी बनो💐💐*

एक बार देवर्षि नारद ज्ञान का प्रचार करते हुए किसी सघन वन में जा पहुँचे।

वहाँ उन्होंने एक बहुत बड़ी घनी छाया वाला सेमल का वृक्ष देखा। उसकी छाया में विश्राम करने का विचार कर नारद उसके नीचे बैठ गए।

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नारद जी को उसकी शीतल छाया में बड़ा आनन्द मिला।

वे उसके वैभव की भूरि-भूरि प्रशंसा करने लगे। उन्होंने सेमल के वृक्ष से पूछा-'वृक्षराज! तुम्हारा इतना बड़ा वैभव किस प्रकार सुस्थिर रहता है।

पवन तुम्हें गिराता क्यों नहीं?'

सेमल के वृक्ष ने हॅंसते हुए कहा- देवर्षि! पवन का क्या सामर्थ्य कि वह मेरा बाल भी बांका कर सके। वह किसी प्रकार भी मुझे नहीं गिरा सकता।'

नारद जी को लगा कि सेमल अभिमान के नशे में ऎसे बचन बोल रहा है।

उन्हें उसका यह उत्तर उचित प्रतीत न हुआ। झुंझलाते हुए वे सुरलोक चले गए। सुरपुर में जाकर नारद ने पवन देव से कहा-'अमुक वृक्ष अभिमान पूर्वक दर्प-वचन बोलता हुआ आपकी निंदा करता है, इसलिए उसका अभिमान दूर करना चाहिए।'

पवन देव को अपनी निंदा करने वाले सेमल के उस वृक्ष पर बहुत क्रोध आया।

वह उस वृक्ष को उखाड़ फेंकने के लिए बड़े प्रबल प्रवाह के साथ आंधी तूफान की तरह चल दिए।

सेमल का वृक्ष बड़ा तपस्वी, परोपकारी और ज्ञानी था। उसे आने वाले संकट का बोध हो गया।

उसने तुरंत स्वयं को बचाने का उपाय कर लिया।

उसने अपने सारे पत्ते झाड़ डाले और ठूंठ की तरह खड़ा हो गया। पवन ने पूरी शक्ति से उसे उखाड़ने की चेष्टा की पर वह ठूंठ का कुछ न बिगाड़ सका।

अंत में निराश होकर पवन देव वापस लौट गए।

कुछ दिन बाद नारद जी उस वृक्ष की दशा देखने के लिए फिर उसी वन में पहुँचे।

उन्होंने देखा कि वृक्ष हरा-भरा ज्यों का त्यों खड़ा है।

नारद जी को बड़ा आश्चर्य हुआ।

उन्होंने वृक्ष से पूछा-'पवन देव ने तुम्हें उखाड़ फेंकने की पूरी शक्ति से कोशिश की, पर तुम तो ज्यों के त्यों खड़े हो। इसका क्या रहस्य है?'

वृक्ष ने देवर्षि को प्रणाम किया और नम्रतापूर्वक निवेदन किया-'देवर्षि! मेरे पास इतना वैभव है फिर भी मैं इसके मोह में बंधा नहीं हूँ।समय के साथ मैंने अपना परिग्रह छोड़ दिया यही मेरे सुख का कारण है।

लोक सेवा के लिए मैंने इतने पत्ते धारण किए हुए हैं, परन्तु जब-जब जरूरी समझता हूँ, अपने वैभव को बिना हिचकिचाहट के त्याग देता हूँ और ठूंठ बन जाता हूँ।

मुझे अपने वैभव पर गर्व नहीं है, वरन ठूंठ होने का अभिमान है। इसीलिए मैंने पवन देव की उपेक्षा की।

वे कर्म को श्रेष्ठ बता रहे थे। आप देख रहे हैं कि उसी निर्लिप्त कर्म योग के कारण मैं प्रचण्ड टक्कर सहता हुआ भी पहले की भाँति खड़ा हूँ।

नारद जी समझ गए कि संसार में वैभव रखना, धनवान होना बुरी बात नहीं है।

इससे तो बहुत-से शुभ कार्य हो सकते हैं। बुराई तो धन के अभिमान में डूब जाने और उससे मोह करने में है।

यदि कोई व्यक्ति धनी होते हुए भी मन से पवित्र रहे, तो एक प्रकार से साधु ही है। जल में कमल की तरह निर्लिप्त रहने वाले ऎसे कर्मयोगी साधु के लिए घर ही तपोभूमि है..!!

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सोमवार, 14 मार्च 2022

मोर की शिकायत

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒*मोर की शिकायत💐💐* 

एक सुंदर मोर था जो बहुत ही सुन्दर था, उसके पंख बेहद खूबसूरत थे। एक दिन खूब झम–झम बारिश हुई और मोर नाचने लगा। नाचते हुए वह अपनी खूबसूरती को निहार रहा था, पर अचानक उसका ध्यान उसकी आवाज पर गया, जो कि बेहद बेसुरा और कठोर था। इस बात का एहसास होते ही वह बेहद उदास हो गया और उसके आंखों में आंसू आ गएं। तभी अचानक, उसे एक कोयल गाती हुए सुनाई दी।

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*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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कोयल की मधुर आवाज को सुनकर, मोर को उसकी कमी एक बार फिर एहसास हुआ। वह सोचने लगा कि मेरे पूर्वभव के कर्मों  ने मुझे सुंदरता तो दी पर बेसुरा क्यों बनाया। तभी एक देवी प्रकट हुई और उन्होंने मोर से पूछा “मोर, तुम क्यों उदास हो?”

मोर ने देवी से अपनी कठोर आवाज के बारे में शिकायत की और उनसे पूछा, “कोयल की आवाज इतनी मीठी है पर मेरी क्यों नहीं? इसलिए मैं दुखी हूँ।

अब मोर की बात सुनकर, देवी ने समझाया, “हमसभी जीवों के  पूर्वभव के कर्मों  के द्वारा सभी का हिस्सा निर्धारित है, हर जीव अपने तरीके से खास होता है। हमारे  पूर्वभव के कर्मों ने हमें अलग–अलग बनाया है और वे एक निश्चित काम के लिए हैं। उन्होंने मोर को सुंदरता दी, शेर को ताकत और कोयल को मीठी आवाज! हमें पूर्वभव के कर्मों के दिए इन उपहारों का सम्मान करना चाहिए और जितना है उतने में ही खुश रहना चाहिए।”

देवी की बातों को सुनकर मोर समझ गया कि दूसरों से तुलना नहीं करनी चाहिए बल्कि खुद के हुनर की सराहना करनी चाहिए और उसे और निखारना चाहिए। मोर उस दिन समझा कि हर व्यक्ति किसी न किसी तरह से यूनिक होता है।

*💐शिक्षा💐*

*👨‍👩‍👧‍👦👩‍🦰खुद को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है। जो कुछ भी आपके पास नहीं है, उसके लिए दुखी होने के बजाय, आपके पास जो है, उसे स्वीकार करें ओर वह कर्म करें जिससे हमारा वर्तमान सुधरेगा तो भविष्य भी सुखमय होगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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रविवार, 13 मार्च 2022

कैंची और सुई

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒कैंची और सुई💐💐* 

*एक दिन स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने के कारण, एक दर्जी का बेटा, अपने पापा की दुकान पर चला गया ।वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा । उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं और कैंची को पैर के पास टांग से दबा कर रख देते हैं । फिर सुई से उसको सीते हैं और सीने के बाद सु ई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं ।*

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जब उसने इसी क्रिया को चार-पाँच बार देखा तो उससे रहा नहीं गया, तो नवनीत उसने अपने पापा से कहा कि वह एक बात उनसे पूछना चाहता है ? पापा ने कहा- बेटा बोलो क्या पूछना चाहते हो ? बेटा बोला- पापा मैं बड़ी देर से आपको देख रहा हूं , आप जब भी कपड़ा काटते हैं, उसके बाद कैंची को पैर के नीचे दबा देते हैं, और सुई से कपड़ा सीने के बाद, उसे टोपी पर लगा लेते हैं, ऐसा क्यों ? इसका जो उत्तर पापा ने दिया- उन दो पंक्तियाँ में मानों उसने ज़िन्दगी का सार समझा दिया ।

उत्तर था- ” बेटा, कैंची काटने का काम करती है, और सुई जोड़ने का काम करती है, और काटने वाले की जगह हमेशा नीची होती है परन्तु जोड़ने वाले की जगह हमेशा ऊपर होती है । सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी दोनों का स्थान मेरे कार्य के अनुसार सही है।यही कारण है कि मैं सुई को टोपी पर लगाता हूं और कैंची को पैर के नीचे रखता हूं ।”

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शनिवार, 12 मार्च 2022

श्रद्धा के भगवान

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒श्रद्धा के भगवान*

 एक अमीर आदमी था। उसने समुद्र मे अकेले घूमने के लिए एक नाव बनवाई।

छुट्टी के दिन वह नाव लेकर समुद्र की सेर करने निकला। आधे समुद्र तक पहुंचा ही था, कि अचानक एक जोरदार तुफान आया। उसकी नाव पुरी तरह से तहस-नहस हो गई लेकिन वह लाईफ जैकेट की मदद से समुद्र मे कूद गया। जब तूफान शांत हुआ तब वह तैरता तैरता एक टापू पर पहुंचा लेकिन वहाँ भी कोई नही था। टापू के चारो और समुद्र के अलावा कुछ भी नजर नही आ रहा था। उस आदमी ने सोचा कि जब मैंने पूरी जिदंगी मे किसी का कभी भी बुरा नही किया तो मेरे साथ ऐसा क्यूँ हुआ..?

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-महानुभावों आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कुछ संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से फल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक फल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

उस आदमी को लगा कि भगवान ने मौत से बचाया तो आगे का रास्ता भी भगवान ही बताएगा। धीरे धीरे वह वहाँ पर उगे झाड-पत्ते खाकर दिन बिताने लगा।

अब धीरे-धीरे उसकी श्रध्दा टूटने लगी, भगवान पर से उसका विश्वास उठ गया। उसको लगा कि इस दुनिया मे भगवान है ही नही। फिर उसने सोचा कि अब पूरी जिंदगी यही इस टापू पर ही बितानी है तो क्यूँ ना एक झोपडी बना लूँ ......?

फिर उसने झाड की डालियो और पत्तो से एक छोटी सी झोपडी बनाई। उसने मन ही मन कहा कि आज से झोपडी मे सोने को मिलेगा आज से बाहर नही सोना पडेगा। रात हुई ही थी कि अचानक मौसम बदला बिजलियाँ जोर जोर से कड़कने लगी.! तभी अचानक एक बिजली उस झोपडी पर आ गिरी और झोपडी धधकते हुए जलने लगी।

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यह देखकर वह आदमी टूट गया आसमान की तरफ देखकर बोला तू भगवान नही, राक्षस है। तुझमे दया जैसा कुछ है ही नही तू बहुत क्रूर है। वह व्यक्ति हताश होकर सर पर हाथ रखकर रो रहा था। कि अचानक एक नाव टापू के पास आई। नाव से उतरकर दो आदमी बाहर आये और बोले कि हम तुमे बचाने आये हैं। दूर से इस वीरान टापू मे जलता हुआ झोपडा देखा तो लगा कि कोई उस टापू पर मुसीबत मे है।

अगर तुम अपनी झोपडी नही जलाते तो हमे पता नही चलता कि टापू पर कोई है। उस आदमी की आँखो से आँसू गिरने लगे।

*उसने ईश्वर से माफी माँगी और बोला कि मुझे क्या पता कि आपने मुझे बचाने के लिए मेरी झोपड़ी जलाई थी.*

सीख- *दिन चाहे सुख के हों या दुख के, भगवान अपने भक्तों के साथ हमेशा रहते है !!*
         
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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शुक्रवार, 11 मार्च 2022

बुजुर्गों का सानिध्य

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒बुजुर्गों का सानिध्य*

*एक बार एक कौआ, मांस के एक टुकड़े को पकड़े हुए शांत जगह की तलाश मे उड़ रहा था।*

*तभी पास में उड़ रहे बाजों के झुंड ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया। कौआ डर कर घबरा गया। वह ऊंची, और ऊंची उड़ान भरने लगा, फिर भी बेचारे कौआ उन ताकतवर बाजों से पीछा नहीं छुड़ा पाया।*
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*तभी वहाँ से गुजर रहे गरुड़ ने कौए की आँखों की दुर्दशा और पीड़ा देखी। कौए के करीब आकर उसने पूछा, "क्या हुआ, मित्र? तुम बहुत परेशान और अत्यधिक तनाव में लग रहे हो?"*

*कौआ रोते हुए बोला, "इन बाजों को देखो! वे मुझे मारने के लिए मेरे पीछे पड़े हैं"।*

*जीवन का अनुभवी पक्षी होने के नाते गरुड़ बोला, "मेरे दोस्त! वे तुम्हें मारने के लिए तुम्हारे पीछे नहीं हैं! वास्तव में, वे मांस के उस टुकड़े के पीछे हैं जिसे तुम अपनी चोंच में कसकर पकड़े हुए हो। बस इसे छोड़ दो और देखो क्या होता है।"*

*कौए ने गरुड़ की सलाह मानकर मांस का टुकड़ा गिरा दिया  और चमत्कारी तरीके से बाज का पूरा झुंड, गिरते हुए मांस की ओर उड़ गया।*

*गरुड़ मुस्कुराया और बोला, "दर्द केवल तब तक रहता है जब तक तुम इसे पकड़े रहते हो। बस इसे छोड़ दो और दर्द से मुक्ति।"*

*कौआ नतमस्तक हो बोला, "आपकी बुद्धिमानी भरी सलाह से मुझे जीवनदान मिला यह बात मैं अपने जीवन में याद रखूंगा । मैंने मांस का यह टुकड़ा गिरा दिया और अब मैं बिना तनाव के और भी ऊंची उड़ान भर सकता हूँ।"*

*इस कहानी में हम सभी के लिए ये संदेश हैं:-*

*_हम 'अहंकार' नाम का एक बहुत बड़ा बोझ ढोते हैं, जो अपने बारे में एक झूठी पहचान बनाता है, जैसे - "मैं ऐसा हूं और इसलिए, मुझे प्यार किया जाना चाहिए, मुझे सम्मान मिलना चाहिए, और तवज्जो मिलनी चाहिए, आदि।"_*

*👨‍👩‍👧‍👦_आइये मुक्त हो जाएं_इस मूर्खतापूर्ण 'अहंकार' और ' स्वयं के प्रति मिथ्या धारणाओं' से', फिर देखें कि क्या होता है! हमारे पूर्वाचार्यों ने जो शास्त्रों में लिखा है और हमारे बुजुर्गों ने हमें जो समझाया है।वहीं हमें करना चाहिए।अपने मन की करने से हमें विषमताओं का सामना करना पडता हैं।*

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गुरुवार, 10 मार्च 2022

हमारी सच्चाई

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒हमारी सच्चाई💐💐* 

*एक राजा वन विहार के लिए गया। शिकार का पीछा करते-करते राह भटक गया। घने जंगल में जा पहुँचा।* 
रास्ता साफ नहीं दीख पड़ता था। साथी कोई रहा नहीं। रात हो गई। जंगल के हिंसक पशु दहाड़ने लगे। राजा डरा और रात्रि बिताने के लिए किसी आश्रय की तलाश करने लगा।

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*ऊँचे पेड़ पर चढ़कर देखा तो उत्तर दिशा में किसी झोंपड़ी में दीपक जलता दिखाई दिया। राजा उसी दिशा में चल पड़ा और किसी वनवासी की झोपड़ी में जा पहुँचा।*

अपने को एक राह भूला पथिक बताते हुए राजा ने उस व्यक्ति से एक रात निवास कर लेने देने की प्रार्थना की। *वनवासी उदार मन वाला था। उसने प्रसन्नता पूर्वक ठहराया और घर में जो कुछ खाने को था, देकर उसकी भूख बुझाई।* स्वयं जमीन पर सोया और अतिथि को आराम से नींद लेने के लिए अपनी चारपाई दे दी।

राजा ने भूख बुझाई। थकान मिटाई और गहरी नींद सोया। वनवासी की उदारता पर उसका मन बहुत प्रसन्न था। *सवेरा होने पर उस वनवासी ने सही रास्ते पर छोड़ आने के लिए साथ चलने की भी सहायता की।*

दोनों एक दूसरे से विलग होने लगे। तो राजा को उस एक दिन के गान और आतिथ्य का बदला चुकाने का मन आया। परन्तु क्या दे? *कुछ दे भी तो उस एकान्तवासी पर चोर रहने क्यों देंगे? इसलिए ऐसी भेंट देनी चाहिए जिसके चोरी होने का डर भी नहीं और आवश्यकतानुसार उसमें से आवश्यक राशि उपलब्ध होती रहे।*

उसी जंगल में राजा का एक विशाल चंदन उद्यान था। उसमें बढ़िया चंदन के सैकड़ों पेड़ थे। राजा ने अपना पूरा परिचय वनवासी को दिया और अपने हाथ से लिखकर उसे चंदन उद्यान का स्वामी बना दिया। दोनों संतोष पूर्वक अपने-अपने घर चले गये।

*वनवासी लकड़ी बेचकर गुजारा करता था। इसने लकड़ी का कोयला बना कर बेचने में कम श्रम पड़ने तथा अधिक पैसा मिलने की जानकारी प्राप्त कर ली थी।* वही रीति-नीति अपनायी। पेड़ अच्छे और बड़े थे। आसानी से कोयला बनने लगा। उसने एक के बजाय दो फेरी निकट के नगर में लगानी आरंभ कर दी ताकि दूनी आमदनी होने लगे। वनवासी बहुत प्रसन्न था। *अधिक पैसा मिल जाने पर उसने अधिक सुविधा सामग्री खरीदनी आरम्भ कर दी और अधिक शौक मौज से रहने लगा।*

दो वर्ष में चन्दन का प्रायः पूरा उद्यान कोयला बन गया। एक ही पेड़ बचा। एक दिन वर्षा होने से कोयला तो न बन सका। कुछ प्राप्त करने के लिए पेड़ से एक डाली काटी और उसे ही लेकर नगर गया। लकड़ी में से भारी सुगंध आ रही थी। खरीददारों ने समझ लिया चह चंदन है। कोयले की तुलना में दस गुना अधिक पैसा मिला। सभी उस लकड़ी की माँग करने लगे। कहा कि- “भीगी लकड़ी के कुछ कम दाम मिले हैं। सूखी होने पर उसकी और भी अधिक कीमत देंगे।

*वन वासी पैसे लेकर लौटा और मन ही मन विचार करने लगा। यह लकड़ी तो बहुत कीमती है। मैंने इसके कोयले बनाकर बेचने की भारी भूल की, यदि लकड़ी काटता बेचता रहता तो कितना धनाढ्य बन जाता और इतनी सम्पदा इकट्ठी कर लेता जो पीढ़ियों तक काम देती।*

राजा के पास जाने व पुनः याचना कर अपनी मूर्खता दर्शाने में कोई सार न था। शरीर भी बुड्ढा हो गया था। कुछ अधिक पुरुषार्थ करने का उत्साह नहीं था। झाड़ियाँ काटकर कोयले बनाने और पेट पालने की वही पुरानी प्रक्रिया अपना ली और जैसे-तैसे गुजारा करने लगा।

*मनुष्य जीवन चंदन उद्यान की तरह है इसकी एक-एक टहनी असाधारण मूल्यवान है। जो इसका सदुपयोग कर सकें, वे धन्य होंगे, जो मनुष्य पांच इंद्रियों के भोगों मे फँसा रहेगा वह पछतायेगा।जो संयम रुपी नाँव मे बैठकर रत्नत्रय को धारण करेगा।वह मनुष्य ही का जीवन सार्थक होगा। जो लापरवाही बरतेंगे वे वनवासी की तरह पछतायेंगे।*
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बुधवार, 9 मार्च 2022

बुध्दिमान बैल

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*💪👩‍🚒बुध्दिमान बैल 💐💐*

एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया। 
वह बैल  ज़ोर -ज़ोर से गर्दन हिला कर अपने गले में बंधीहुई  घंटी बजा रहा था और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं।
अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चूका था अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ।।  

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किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी।

जैसे ही बैल कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है वह  चिंतन करनेलगा और फिर ,अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया।   
सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया..
अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था।  

जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे -वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एक सीढी ऊपर चढ़ आता जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह बैल कुएँ के किनारे पर पहुंच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया ।   

ध्यान रखे आपके जीवन में भी बहुत तरह से मिट्टी फेंकी जायेगी बहुत तरह की गंदगी आप पर गिरेगी जैसे कि ,  आपको आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही आपकी आलोचना करेगा । कोई आपकी सफलता से ईर्ष्या के कारण आपको बेकार में ही भला बुरा कहेगा   
कोई आपसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो आपके आदर्शों के विरुद्ध होंगे... 

ऐसे में आपको हतोत्साहित हो कर कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हर तरह की गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख ले कर उसे सीढ़ी बनाकर बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है। 

सकारात्मक रहे.. सकारात्मक जिए!
इस संसार में....
      सबसे बड़ी सम्पत्ति *"बुद्धि "*
      सबसे अच्छा हथियार *"धैर्य"*
      सबसे अच्छी सुरक्षा *"विश्वास"*
      सबसे बढ़िया दवा *"हँसी"* है
और आश्चर्य की बात कि *"ये सब निशुल्क हैं "*
सोच बदलो जिंदगी बदल जायेगी.......

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