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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩🚒प्रायश्चित ही सच्चा सुख💐💐*
एक बार भक्त प्रहलाद से दानवों ने पूछा – हे प्रहलाद ! सच्चा सुख कैसे प्राप्त होता है?
यह सुनकर भक्त प्रहलाद हस पड़े । फिर उन्होंने बोला – सच्चा सुख पाना बहुत ही कठिन है। यह तुम्हारे लिए असंभव है। क्योंकि तुम सच्चा सुख पाने वाले मार्ग पर नहीं चल सकते ।
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दानवों ने सच्चे सुख के मार्ग को बताने के लिए भक्त प्रहलाद से बार बार आग्रह किया तो प्रहलाद बोले – जन कल्याण के द्वारा ही सच्चा सुख प्राप्त किया जा सकता है। किन्तु तुम लोग यह नहीं कर सकते क्योंकि तुम लोगो अपना बचपन खेल कूद और शैतानियों में गुजारे हो। युवा होने पर भोग तृष्णा में पाप करते हो और वृद्धावस्था में तुम्हारे पास पछताने के अलावा कुछ नहीं बचता है।
सच्चा सुख तो कल्याण कार्यों के द्वारा ही प्राप्त हो सकता है। इसी में आत्मानंद और परमानंद प्राप्त होता है।।
प्रहलाद ने फिर उन दानवों से कहा – मै भी तो एक दानव राज ही हूं परन्तु मै जनकल्याण में लगा हूं। ईश्वर पर भरोसा करता हूं। इसलिए सुखी हूं। तुम लोग भी ऐसा कर लो तुम्हारा भी कल्याण हो जाएगा।
याद रखो ! किसी भी आयु में वीतरागी प्रभु की भक्ति तथा दुष्कर्मों का त्याग कर के उनका प्रायश्चित कर लेने से सदमार्ग साफ दिखाई देता है। उस पर चलते रहने से गुरुकृपा होने से सच्चा मार्ग पर चलने की आत्मशक्ति का निर्माण होता है ।तब जाके सच्चा सुख मिलता है।
प्रहलाद की इन बातो को सुनकर उन दानवों ने संकल्प लिया की जीवन का जो बचा हुआ भाग है उसे व्यर्थ ना कर के जनकल्याण में समर्पित कर सच्चा सुख प्राप्ति वाले मार्ग पर चलेंगे।
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*