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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩🚒लाल साड़ी का रहस्य*
*👩🦰ड्राइंग रूम का सारा सामान बाहर निकल दिया गया था। बैठने के लिए दरियों पर सफ़ेद चादर करीने से लगा दी गई थीं। कृति अपने परिवार के साथ रात को ही पहुंच गई थी आते ही पापा से लिपट बहुत रोई "आखिर माँ हमें छोड़ गई।" भाई, भाभी भी आ चुके थे सभी बहुत उदास थे। दो दिन पहले ही कामिनी जी को दिल का दौरा पड़ा था। कोई नहीं जानता था यूँ साथ छोड़ देंगी।*
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कभी किसी ने उन्हें बिस्तर पर पड़े देखा ही नहीं था। हमेशा भाग भाग सारे काम निबटा लेती थीं बच्चों के परिवार भी उन्होनें ही जैसे संभाल रखे थे। जब जिसे जरूरत पड़ी वहीं जा खड़ी होती थीं।
आज सब एक मूक भाषा में जैसे एक दूसरे से माँ के पार्थिव शरीर को छू कर उनकी कमी को महसूस कर रहे थे। पापा तो एक कोने में अधमरे से जमीन पर ही लेटे थे।
किसी में साहस नहीं था कि उन्हें सांत्वना दे सके। ऐसा मातम माँ के रहते कभी इस घर में नहीं छाया था।
भाभी शिल्पा और कृति माँ की अल्मारी से साड़ी तलाश रही थीं किस साड़ी में उन्हें विदा करें।
'माँ को तो लाल रंग बहुत पसंद था।" शिल्पा बोली।
"हाँ पर उन्होंने कभी बताया तो नहीं।" कृति ने जबाव दिया।
"मुझे भी कहाँ पता था दीदी वो तो मुझे काव्य ने बताया था दादी पोती में बहुत प्यार था ना।" शिल्पा बोली।
तभी उनके हाथ एक पकेट लगा जिस पर कुछ लिखा था। "मेरी चिता इसी साड़ी में सजाना।" दोनों फूट फूट कर रोने लगी। माँ ने कभी किसी को कोई कष्ट नहीं दिया याद नहीं कि किसी ने उन्हें खाना परोसा हो भगवान ने उनकी इच्छा भी पूर्ण कर दी "चलते हाथ पैर ले जाना प्रभु।"
पापा भी वहां आ गए सारी बात समझ कर बोले, "अरे ये साड़ी तो मैंनें तुम्हारी माँ को अपनी पहली कमाई से ला कर दी थी हाँ उसने कभी पहनी नहीं और मैं समझता रहा कि उसे पसंद नहीं आई और उसके बाद कोई तोहफा नहीं दिया मैंनें।
माँ की अल्मारी से चार पैकेट और मिले जिन पर उन्होंने सबके नाम लिख दिए थे। एक पत्र भी मिला जिसमें लिखा था "आप की दी हुई पहली साड़ी सदा संभाल कर रखी थी अंतिम यात्रा में साथ ले जाऊँगी।"
सारी जिंदगी अपने कर्तव्य पूरे किए थे कामिनी जी ने अब रोने की बारी पापा की थी जिन्हें चुप कराने में कोई सफल न हो पाया। उन्होंने भी तो अपनी पत्नी का सदा तिरस्कार ही किया था जिसके बाबजूद कामिनी जी स्नेह की मूर्ति बनी कदम से कदम मिला साथ चलती रहीं और गृहस्थी के सारे कर्तव्य निभाती रहीं।
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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