मंगलवार, 26 दिसंबर 2023

अभिमान ही सर्वांगीण विकास में बाधक है

*अभिमान ही सर्वांगीण विकास में बाधक*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 अभिमान ही सर्वांगीण विकास में बाधक ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 पौष कृष्ण दूज, 28 दिसंबर गुरुवार कलिकाल के  केतू की महादशा को अनुकूल बनाने वाले मल्लीनाथ  तीर्थंकर सभी प्रकार से सुख के मार्ग प्रदर्शक 19 वें तीर्थंकर 1008 श्री  मल्लीनाथ स्वामी का ज्ञान  कल्याणक महोत्सव है। 🛕*

*🔔🪔 जनवरी माह में   07,10,20, 21, 24,25 तारीख को भी तीर्थंकर भगवन्तों कल्याणक महोत्सव है। यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

👪एक घर के मुखिया को यह अभिमान हो गया कि उसके बिना उसके परिवार का काम नहीं चल सकता।
उसकी छोटी सी दुकान थी। उससे जो आय होती थी, उसी से उसके परिवार का गुजारा चलता था।
चूंकि कमाने वाला वह अकेला ही था इसलिए उसे लगता था कि उसके बगैर कुछ नहीं हो सकता।वह लोगों के सामने डींग हांका करता था।
एक दिन वह एक संत के सत्संग में पहुंचा। संत कह रहे थे, “दुनिया में किसी के बिना किसी का काम नहीं रुकता।यह अभिमान व्यर्थ है कि मेरे बिना परिवार या समाज ठहर जाएगा।सभी को अपने भाग्य के अनुसार प्राप्त होता है।”
सत्संग समाप्त होने के बाद मुखिया ने संत से कहा, “मैं दिन भर कमाकर जो पैसे लाता हूं उसी से मेरे घर का खर्च चलता है। मेरे बिना तो मेरे परिवार के लोग भूखे मर जाएंगे।”
संत बोले, “यह तुम्हारा भ्रम है।
हर कोई अपने भाग्य का खाता है।”
इस पर मुखिया ने कहा, “आप इसे प्रमाणित करके दिखाइए।”
संत ने कहा, “ठीक है। तुम
बिना किसी को बताए घर से एक महीने के लिए गायब हो जाओ।
”उसने ऐसा ही किया।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 संत ने यह बात फैला दी कि उसे बाघ ने अपना भोजन बना लिया है। मुखिया के परिवार वाले कई दिनों तकशोक संतप्त रहे।
गांव वाले आखिरकार उनकी मदद के लिए सामने आए। एक सेठ ने उसके बड़े लड़के को अपने यहां नौकरी दे दी। गांव वालों ने मिलकर लड़की की शादी कर दी।
एक व्यक्ति छोटे बेटे की पढ़ाई का खर्च देने को तैयार हो गया।
एक महीने बाद मुखिया छिपता-छिपाता रात के वक्त अपने घर आया। घर वालों ने भूत समझ कर दरवाजा नहीं खोला। जब वह बहुत गिड़गिड़ाया और उसने सारी बातें बताईं तो उसकी पत्नी ने दरवाजे के
भीतर से ही उत्तर दिया,
‘हमें तुम्हारी जरूरत नहीं है। अब हम पहले से ज्यादा सुखी हैं।’ उस व्यक्ति का सारा अभिमान चूर-चूर हो गया। संसार किसी के लिए भी नही रुकता!!
यहाँ सभी के बिना काम चल सकता है संसार सदा से चला आ रहा है और चलता रहेगा। जगत को चलाने की हाम भरने वाले बडे बडे सम्राट, मिट्टी हो गए, जगत उनके बिना भी चला है।
इसलिए अपने बल का, अपने धन का, अपने कार्यों का, अपने ज्ञान का गर्व व्यर्थ है।
सेवा सर्वोपरी है।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 23 दिसंबर 2023

आज के मनुष्य की विचारधारा

*आजके मनुष्य की विचारधारा*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 आजके मनुष्य की विचारधारा ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 मार्गशीर्ष शुक्ल शाश्वत पर्व चतुर्दशी, 25 दिसंबर सोमवार कलिकाल के बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले अरनाथ तीर्थंकर सभी प्रकार से सुख के मार्ग प्रदर्शक 18 वें तीर्थंकर 1008 श्री अरनाथ स्वामी का जन्म  कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔🪔 मार्गशीर्ष पूर्णिमा, 26 दिसंबर मंगलवार कलिकाल के गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले संभवनाथ तीर्थंकर सभी प्रकार से असंभव कार्य को संभव बनाने के पथ-प्रदर्शक तीसरे तीर्थंकर 1008 श्री संभवनाथ स्वामी का तप कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔🪔 इस दिसंबर माह में   28 तारीख को भी तीर्थंकर भगवन्तों कल्याणक महोत्सव है। यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

👪↔️एक बार एक पिता और उसका पुत्र जलमार्ग से कहीं यात्रा कर रहे थे और तभी अचानक दोनों रास्ता भटक गये। फिर उनकी नौका भी उन्हें ऐसी जगह ले गई, जहाँ दो टापू आस-पास थे और फिर वहाँ पहुंच कर उनकी नौका टूट गई।
          
पिता ने पुत्र नवनीत से कहा, "अब लगता है, हम दोनों का अंतिम समय आ गया है, दूर-दूर तक कोई सहारा नहीं दिख रहा है।"

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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    अचानक पिता को एक उपाय सूझा, अपने पुत्र से कहा कि "वैसे भी हमारा अंतिम समय नज़दीक है, तो क्यों न हम ईश्वर की प्रार्थना करें।"
          
उन्होने दोनों टापू आपस में बाँट लिए।

एक पर पिता और एक पर पुत्र, और दोनों अलग-अलग टापू पर ईश्वर की प्रार्थना करने लगे।
          
पुत्र ने ईश्वर से कहा, 'हे भगवन, इस टापू पर पेड़-पौधे उग जाए जिसके फल-फूल से हम अपनी भूख मिटा सकें।'

ईश्वर ने प्रार्थना सुनी गयी, तत्काल पेड़-पौधे उग गये और उसमें फल-फूल भी आ गये। उसने कहा ये तो चमत्कार हो गया।
          
फिर उसने प्रार्थना की, एक सुंदर स्त्री आ जाए जिससे हम यहाँ उसके साथ रहकर अपना परिवार बसाएँ।

तत्काल एक सुंदर स्त्री प्रकट हो गयी।

अब उसने सोचा कि मेरी हर प्रार्थना सुनी जा रही है, तो क्यों न मैं ईश्वर से यहाँ से बाहर निकलने का रास्ता माँगे लूँ ?
          
उसने ऐसा ही किया।

 उसने प्रार्थना की, एक नई नाव आ जाए जिसमें सवार होकर मैं यहाँ से बाहर निकल सकूँ।

तत्काल नाव प्रकट हुई और पुत्र उसमें सवार होकर बाहर निकलने लगा।

तभी एक आकाशवाणी हुई, बेटा तुम अकेले जा रहे हो? अपने पिता को साथ नहीं लोगे ?
          
पुत्र ने कहा, उनको छोड़ो, प्रार्थना तो उन्होंने भी की, लेकिन आपने उनकी एक भी नहीं सुनी।  शायद उनका मन पवित्र नहीं है, तो उन्हें इसका फल भोगने दो ना ?
    

आकाशवाणी ने कहा, 'क्या तुम्हें पता है कि तुम्हारे पिता ने क्या प्रार्थना की ?
          
पुत्र बोला, नहीं।
          
आकाशवाणी बोली तो सुनो, 'तुम्हारे पिता ने एक ही प्रार्थना की..." हे भगवन! मेरा पुत्र आपसे जो भी माँगे, उसे दे देना क्योंकि मैं उसे दुःख में हरगिज़ नहीं देख सकता औऱ अगर मरने की बारी आए तो मेरी मौत पहले हो " और जो कुछ तुम्हें मिल रहा है उन्हीं की प्रार्थना का परिणाम है।'
          
*पुत्र बहुत शर्मिंदा हो गया।*

*,,,👪💯👪⏰भव्य आत्माओं,  हमें जो भी सुख, प्रसिद्धि, मान, यश, धन, संपत्ति और सुविधाएं मिल रही है उसके पीछे किसी अपने की प्रार्थना और शक्ति जरूर होती है लेकिन हम नादान रहकर अपने अभिमान वश इस सबको अपनी उपलब्धि मानने की भूल करते रहते हैं और जब ज्ञान होता है तो असलियत का पता लगने पर सिर्फ़ पछताना पड़ता है।हम चाह कर भी अपने माता पिता का ऋण नहीं चुका सकते हैं। एक पिता ही ऐसा होता है जो अपने पुत्र को उच्चाईयो पर पहुँचाना चाहता है। पर पुत्र मां बाप को भार समझते है। इसलिए आप हमेशा जरुरतमंदों की सहायता करते रहो जिससे प्रभु भी आप का ख्याल रखेंगे ।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 18 दिसंबर 2023

गुरु शिष्य का सच्चा रिश्ता

*गुरु-शिष्य का सच्चा रिश्ता*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 गुरु-शिष्य का सच्चा रिश्ता ✍️🐒*
                                                                                                                                          
 *🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 मार्गशीर्ष शुक्ल  10 मी, ▶️21 दिसंबर गुरुवार कलिकाल के बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले अरनाथ तीर्थंकर सभी प्रकार से सुख के मार्ग प्रदर्शक 18 वें तीर्थंकर 1008 श्री अरनाथ स्वामी का तप  कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔🪔 मार्गशीर्ष शुक्ल ग्यारस, 22 दिसंबर शुक्रवार कलिकाल के केतू की महादशा को अनुकूल बनाने वाले मल्लीनाथ तीर्थंकर सभी प्रकार से असंभव कार्य को संभव बनाने के पथ-प्रदर्शक 19 वें तीर्थंकर 1008 श्री मल्लीनाथ स्वामी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है। 🛕↔️⛳ आज ही के दिन कलिकाल के बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले 21वें तीर्थंकर नमिनाथ भगवान का ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 इस दिसंबर माह में   25, 26, 28 तारीख को भी तीर्थंकर भगवन्तों कल्याणक महोत्सव है। यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*गुरु-शिष्य का सच्चा रिश्ता*
बात कुछ इस तरह है, कि जब श्री रामकृष्ण परमहंस जी को कैंसर हुआ था, तब बीमारी के कारण वे खाना नहीं खा पाते थे, और स्वामी विवेकानंद जी अपने गुरु की इस हालात से बहुत ही चिंतित थे।

एक दिन परमहंस जी ने पूछा- नरेंद्र (स्वामी विवेकानंद जी)! क्या तुझे वो दिन याद हैं, जब तू अपने घर से मेरे पास मंदिर में आता था, और तूने दो-दो दिनों से कुछ नहीं खाया होता था, परंतु तू अपनी मां से झूठ कह देता था कि तूने अपने मित्र के घर खाना खा लिया है, ताकि तेरी गरीब मां थोड़े-बहुत भोजन को तेरे छोटे भाई को परोस दे ....है ना?

स्वामी विवेकानंद जी ने रोते-रोते हां में सर हिला दिया।
परमहंस जी आगे बोले- और जब तू यहां मेरे पास मंदिर आता था, तो अपने चेहरे पर खुशी का मुखौटा पहन लेता था। लेकिन मैं भी तो कम नहीं था, झट जान जाता था कि तेरे पेट में चूहों का पूरा कबीला धमा-चौकड़ी मचा रहा है और तेरा शरीर भूख से चूर हो रहा है, और फिर तुझे अपने हाथों से लड्डू, पेड़े, मक्खन और मिश्री खिलाता था। है ना?
स्वामी विवेकानंद जी ने सुबकते हुए हां में गर्दन हिलाई।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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अब रामकृष्ण परमहंस जी फिर से मुस्कुराए और पूछा- कैसे जान लेता था मैं यह बात? कभी सोचा है तूने?
स्वामी विवेकानंद जी सिर उठाकर परमहंस जी को‌ देखने लगे, और परमहंस जी ने फिर पूछा- बता न, मैं कैसे तेरी आंतरिक स्थिति को जान लेता था?

स्वामी विवेकानंद जी- क्योंकि आप अंतर्यामी हैं, आप ही सच्चे मित्र हो।

परमहंस जी- अंतर्यामी, अंतर्यामी किसे कहते हैं?

स्वामी विवेकानंद जी- जो सबके अंदर की जान ले।

परमहंस जी- कोई अंदर की भावना कब जान सकता है?

स्वामी विवेकानंद जी- जब वो स्वयं अंदर में ही विराजमान हो।

परमहंस जी- यानि मैं तेरे अंदर भी बैठा हूं, है ना?

स्वामी विवेकानंद जी- जी बिल्कुल! आप मेरे हृदय में समाए हुए हैं।

परमहंस जी- तेरे भीतर में समाकर मैं हर बात जान लेता हूं, हर दुख-दर्द पहचान लेता हूं, तेरी भूख का अहसास कर लेता हूं, तो क्या तेरी भूख मुझ तक नहीं पहुंचती होगी?

स्वामी विवेकानंद जी- मेरी भूख आप तक?

रामकृष्ण परमहंस जी- हां तेरी भूख! जब तू भोजन खाता है और तुझे तृप्ति होती है, क्या वो मुझे तृप्त नहीं करती होगी? अरे पगले! गुरु अंतर्यामी है, अंतर-जगत का स्वामी है। वो अपने शिष्य के भीतर बैठा सब कुछ भोगता है। एक नहीं, हजारों मुखों से खाता हूं। तेरे, लाटू के, काली के, गिरीश के, सबके। याद रखना, गुरु कोई बाहर स्थित एक देह भर नहीं है। वो तुम्हारे रोम-रोम का वासी है। तुम्हें पूरी तरह आत्मसात कर चुका है। अलगाव कहीं है ही नहीं। अगर कल को मेरी यह देह नहीं रही, मैं तब भी जिऊंगा, तेरे जरिए जिऊंगा। मैं तुझमें रहूंगा और तू मुझमें।ऐसा कहते हुए रामकृष्ण जी ने अपना जीवन त्याग दिया।।।।

*ऐसा होता है गुरु-शिष्य का सच्चा रिश्ता*
    *👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 11 दिसंबर 2023

बार-बार लक्ष्य बदलने पर

*बार बार लक्ष्य बदलने पर*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  बार बार लक्ष्य बदलने पर ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 मार्गशीर्ष शुक्ल एकम , 13 दिसंबर बुधवार कलिकाल के शुक्र की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सुविधिनाथ तीर्थंकर सभी प्रकार से सुख के मार्ग प्रदर्शक 1008 श्री सुविधिनाथ स्वामी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔🪔 इस दिसंबर माह में   21, 22, 25, 26, 28, तारीख को भी तीर्थंकर भगवन्तों कल्याणक महोत्सव है। यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

✍️🤷एक लड़के ने एक बार एक बहुत ही धनवान व्यक्ति को देखकर धनवान बनने का निश्चय किया। वह धन कमाने के लिए कई दिनों तक मेहनत कर धन कमाने के पीछे पड़ा रहा और बहुत कुछ  पैसा कमा लिया। इसी बीच उसकी मुलाकात एक विद्वान से हो गई। विद्वान के ऐश्वर्य को देखकर वह आश्चर्यचकित हो गया और अब उसने विद्वान बंनने का निश्चय कर लिया और अगले ही दिन से धन कमाने को छोड़कर पढने-लिखने में लग गया।

वह अभी अक्षर ज्ञान ही सिख पाया था, की इसी बीच उसकी मुलाकात एक संगीतज्ञ से हो गई। उसको संगीत में अधिक आकर्षण दिखाई दिया, इसीलिए उसी दिन से उसने पढाई बंद कर दी और संगीत सिखने में लग गया। इसी तरह काफी उम्र बित गई, न वह धनी हो सका ना विद्वान और ना ही एक अच्छा संगीतज्ञ बन पाया। तब उसे बड़ा दुख हुआ।

एक दिन वह हताश निराश होकर भटक रहा था। तभी उसे एक राम भक्त एक बहुत बड़े महात्मा से हुई। उसने महात्मन को अपने दुःख का कारण बताया।

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*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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महात्मा ने उसकी परेशानी सुनी और मुस्कुराकर बोले, “बेटा, दुनिया बड़ी ही चिकनी है, जहाँ भी जाओगे कोई ना कोई आकर्षण ज़रूर दिखाई देगा। एक निश्चय कर लो और फिर जीते जी उसी पर अमल करते रहो तो तुम्हें सफलता की प्राप्ति अवश्य हो जाएगी, नहीं तो दुनियां के झमेलों में यूँ ही चक्कर खाते रहोगे। बार-बार रूचि बदलते रहने से कोई भी उन्नत्ति नहीं कर पाओगे।” युवक महात्मा की बात को समझ गया ओर वह  अपनी वृद्धावस्था में राम नाम के अनुयाई बनकर परम लक्ष्य निश्चित कर उसी का अभ्यास महात्मा जी के साथ रहकर करने लगा।

*👪⏰💯✍️भव्य आत्माओं,:-हमें भी शुरुआत से ही अपनी योग्यता अनुसार एक लक्ष्य बनाकर उसी के अनुरूप मेहनत करना चाहिए। इधर-उधर भटकने की बजाय एक ही जगह, एक ही लक्ष्य पर डटे रहने से ही सफलता व उन्नति प्राप्त की जा सकती हैं..!! जिस प्रकार एक स्थान पर गड्ढा खोदने पर पानी प्राप्त होता ही है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 6 दिसंबर 2023

हमारे विचारों का गधा व शैतान

*हमारे विचारों का गधा व शैतान*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 हमारे विचारों का गधा व शैतान ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 मार्गशीर्ष कृष्ण 10, दिसंबर गुरुवार कलिकाल के शासन नायक अंतिम तीर्थंकर सभी प्रकार से सुख कारक मार्ग प्रदर्शक 1008 श्री वर्धमान स्वामी का  तप कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔🪔 इस दिसंबर माह में  13, 21, 22, 25, 26, 28, तारीख को भी तीर्थंकर भगवन्तों कल्याणक महोत्सव है। यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
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*गधा पेड़ से बंधा था।*
*शैतान आया और उसे खोल गया।*

*गधा मस्त होकर खेतों की ओर भाग निकला और खड़ी फसल को खराब करने लगा !*

*किसान की पत्नी ने यह देखा तो गुस्से में गधे को मार डाला।*

*गधे की लाश देखकर गधे के मालिक को बहुत गुस्सा आया और उसने किसान की पत्नी को गोली मार दी।*
*किसान पत्नी की मौत से इतना गुस्से में आ गया कि उसने गधे के मालिक को गोली मार दी।*

*गधे के मालिक की पत्नी ने जब पति की मौत की खबर सुनी तो गुस्से में बेटों को किसान का घर जलाने का आदेश दिया।*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*बेटे शाम में गए और मां का आदेश खुशी-खुशी पूरा कर आए। उन्होंने मान लिया कि किसान भी घर के साथ जल गया होगा।*

*लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसान वापस आया और उसने गधे के मालिक की पत्नी और बेटों, तीनों की हत्या कर दी।*

*इसके बाद उसे पछतावा हुआ और उसने शैतान से पूछा कि यह सब नहीं होना चाहिए था। ऐसा क्यों हुआ ?*

*शैतान ने कहा, 'मैंने कुछ नहीं किया। मैंने सिर्फ गधा खोला लेकिन तुम सबने रिऐक्ट किया, ओवर रिऐक्ट किया और अपने अंदर के शैतान को बाहर आने दिया।* *इसलिए अगली बार किसी का जवाब देने, प्रतिक्रिया देने, किसी से बदला लेने से पहले एक लम्हे के लिए रुकना और सोचना ज़रूर।'*

*ध्यान रखें। कई बार शैतान हमारे बीच सिर्फ गधा छोड़ता है और बाकी विनाश हम खुद कर देते हैं !!*

*और  हाँ, आपको ये भी समझना है कि _गधा_ कौन हैं?*

*हर रोज सोशल मीडिया पर हमारे द्वारा चुनी गई सरकार के निमित्त से, न्यूज पेपर से, फेसबुक, व्हाट्सएप आदि जिसे जो भी साधन मिल रहा है वह अपने विचारों के गधे छोड़ जाते हैं,*

*कोई ग्रुप में गधा छोड़ देता है।*

*दोस्तों के ग्रुप में और पार्टी बाजी या विचारधारा के चक्कर में आप और हम लड़ते रहते हैं।*

*मिल जुल कर मुस्कुरा कर खुशी से रहिये !*
*याद रखें-*
*तोड़ना आसान है जुड़े रहना बहुत मुश्किल है,लड़ाना आसान है मिलाना बहुत मुश्किल  है*

*👪↔️💯✍️विशेष :- भव्य आत्माओं, आज हम सभी घर में परिवार में समाज में ओर इस सम्पूर्ण विश्व में अपनें विचारों के निमित्त से गधा व शैतान बने हुए है। कृपया इस बात का एकांत में स्वयं ही विचार कर स्वयं ही सुधार करें तो इस धरती पर ही स्वर्ग सुख प्राप्त कर सकते है।बस यही निवेदन है कि आप अपने आप से ही शुरुआत करें कि हम अपने विचारों के माध्यम से गधा व शैतान पैदा नहीं होने देंगे।*


*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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