बुधवार, 31 जनवरी 2024

मांगने पर या बांटने पर

*👨‍👨‍👦‍👦मांगने पर या बांटने पर🔑*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒मांगने पर या बांटने पर✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 माघ कृष्ण 6 , गुरुवार कलिकाल के छठवें तीर्थंकर सूर्य की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुख कारक रत्नत्रय की प्राप्ति करवाने वाले 1008 श्री पद्मप्रभ भगवान का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*फरवरी माह में दिनांक 7, ▶️9 को चतुर्दशी व अमावस्या, 11, 13, 15, 18, 21, 22, 28 को भी तीर्थंकर भगवान के पंचकल्याणक महोत्सव है*
 *🔔🪔  यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*💐 आइए समझें मांगने पर या देने पर आत्मसंतुष्टी होती है।💐*
✅पुराने समय की बात है, एक गाँव में दो किसान रहते थे। 
दोनों ही बहुत गरीब थे, 
दोनों के पास थोड़ी थोड़ी ज़मीन थी, 
दोनों उसमें ही मेहनत करके अपना और अपने परिवार का गुजारा चलाते थे।

अकस्मात कुछ समय पश्चात दोनों की एक ही दिन एक ही समय पे मृत्यु हो गयी। 
यमराज दोनों को एक साथ भगवान के पास ले गए। 
उन दोनों को भगवान के पास लाया गया। 
भगवान ने उन्हें देख के उनसे पूछा, 
अब तुम्हे क्या चाहिये, 
तुम्हारे इस जीवन में क्या कमी थी, 
और 
अब तुम्हें क्या बना के मैं पुनः संसार में भेजूं।”

भगवान की बात सुनकर उनमे से एक किसान बड़े गुस्से से बोला, ” हे भगवान! 
आपने इस जन्म में मुझे बहुत कष्टमय ज़िन्दगी दी थी। 
आपने कुछ भी नहीं दिया था मुझे। 
पूरी ज़िन्दगी मैंने बैल की तरह खेतो में काम किया है, जो कुछ भी कमाया वह बस पेट भरने में लगा दिया, ना ही मैं कभी अच्छे कपड़े पहन पाया और ना ही कभी अपने परिवार को अच्छा खाना खिला पाया। 
जो भी पैसे कमाता था, कोई आकर के मुझसे लेकर चला जाता था और मेरे हाथ में कुछ भी नहीं आया। 
देखो कैसी जानवरों जैसी ज़िन्दगी जी है मैंने।”

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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उसकी बात सुनकर भगवान कुछ समय मौन रहे और पुनः उस किसान से पूछा, 
तो अब क्या चाहते हो 
तुम, इस जन्म में 
मैं तुम्हे क्या बनाऊँ।”

भगवान का प्रश्न सुनकर वह किसान पुनः बोला, 
भगवन आप कुछ ऐसा कर दीजिये, कि मुझे कभी किसी को कुछ भी देना ना पड़े। 
मुझे तो केवल चारो तरफ से पैसा ही पैसा मिले।

अपनी बात कहकर वह किसान चुप हो गया। भगवान से उसकी बात सुनी और कहा, 
तथास्तु
तुम अब जा सकते हो मैं तुम्हे ऐसा ही जीवन दूँगा जैसा तुमने मुझसे माँगा है।

उसके जाने पर भगवान ने पुनः दूसरे किसान से पूछा, 
तुम बताओ तुम्हे क्या बनना है, 
तुम्हारे जीवन में क्या कमी थी, तुम_क्या_चाहते_हो?

उस किसान ने भगवान के सामने हाथ जोड़ते हुए कहा, 
हे भगवन आपने मुझे सबकुछ दिया है

मैं आपसे क्या मांगू। 
आपने मुझे एक अच्छा परिवार दिया, मुझे कुछ जमीन दी जिसपर मेहनत से काम करके मैंने अपना परिवार को एक अच्छा जीवन दिया। खाने के लिए आपने मुझे और मेरे परिवार को भरपेट खाना दिया। मैं और मेरा परिवार कभी भूखे पेट नहीं सोया। बस एक ही कमी थी मेरे जीवन में, जिसका मुझे अपनी पूरी ज़िन्दगी अफ़सोस रहा और आज भी हैं। मेरे दरवाजे पे कभी कुछ भूखे और प्यासे लोग आते थे। भोजन माँगने के लिए, परन्तु कभी कभी मैं भोजन न होने के कारण उन्हें खाना नहीं दे पाता था, और वो मेरे द्वार से भूखे ही लौट जाते थे। 
ऐसा कहकर वह चुप हो गया।”
प्रभुजी_इतना_दीजिये
जा_में_कुटुम्ब_समाय !
मैं_भी_भूखा_न_रहूँ
साधू भी भूखा न जाये !!

भगवान ने उसकी बात सुनकर उससे पूछा, 
तो अब क्या चाहते हो तुम, इस जन्म में 
मैं तुम्हें क्या बनाऊँ।” 
किसान भगवान से हाथ जोड़ते हुए विनती की, ” हे प्रभु! 
आप कुछ ऐसा कर दो कि मेरे द्वार से कभी कोई भूखा प्यासा ना जाये।
”#भगवान_ने_कहा, 
“#तथास्तु, 
तुम जाओ तुम्हारे द्वार से कभी कोई भूखा प्यासा नहीं जायेगा।”

अब दोनों का पुनः उसी गाँव में एक साथ जन्म हुआ। 
दोनों बड़े हुए।
पहला व्यक्ति जिसने भगवान से कहा था, कि उसे चारो तरफ से केवल धन मिले और मुझे कभी किसी को कुछ देना ना पड़े, वह व्यक्ति उस गाँव का सबसे बड़ा भिखारी बना। 
अब उसे किसी को कुछ देना नहीं पड़ता था, 
और जो कोई भी आता उसकी झोली में पैसे डालके ही जाता था।

और दूसरा व्यक्ति जिसने भगवान से कहा था कि उसे कुछ नहीं चाहिए, केवल इतना हो जाये की उसके द्वार से कभी कोई भूखा प्यासा ना जाये, वह उस गाँव का सबसे अमीर आदमी बना।

*👨‍👨‍👦‍👦🪔🔔विशेष :- भव्य आत्माओं, आज हम सभी को हमारे कर्मो ने  जो भी दिया है उसी में संतुष्ट होना बहुत जरुरी है। अक्सर देखा जाता है कि सभी लोगों को हमेशा दूसरों की चीज़ें ज्यादा पसंद आती हैं और इसके चक्कर में वो अपना जीवन भी अच्छे से नहीं जी पाते। मित्रों हर बात के दो पहलू होते हैं – सकारात्मक _और_नकारात्मक, अब ये आपकी सोच पर निर्भर करता है कि आप चीज़ों को नकारत्मक रूप से देखते हैं या सकारात्मक रूप से।* *▶️अच्छा जीवन जीना है तो अपनी सोच को अच्छा बनाइये, चीज़ों में कमियाँ मत निकालिये बल्कि जो हमें हमारे कर्मों ने दिया है उसका आनंद लीजिये और हमेशा दूसरों के प्रति सेवा भाव रखिये ! मित्रो सब कुछ इकट्ठा भी उन्हीं के पास होता है जो बाँटनां जानते हैं वह चाहे भोजन हो धन हो अन्य किमती वैभव हो या मान सम्मान हो ! हम जिस मात्रा में जिस प्रकार बांटेंगे हमें उससे अधिक ही प्राप्त होगा। यही प्रकृति का प्रथम व अंतिम नियम है।*

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, वहीं पर्याप्त है।।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

मंगलवार, 23 जनवरी 2024

दान का महत्व

*दान का महत्त्व*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 दान का महत्त्व ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 पौष शुक्ल शाश्वत पर्व चतुर्दशी , 24 जनवरी बुधवार कलिकाल के चतुर्थ तीर्थंकर गुरु  की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक अभिनंदन की प्राप्ति करवाने वाले 1008 श्री अभिनंदन  भगवान का केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
  *🔔👪🪔 पौष शुक्ल पूर्णिमा, 25 जनवरी गुरुवार कलिकाल के 15 वें तीर्थंकर बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले निर्ग्रन्थ गुरु का सानिध्य प्राप्त करवाने वाले 1008 श्री धर्मनाथ भगवान केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
 *🔔🪔  यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*💐💐दान का महत्त्व💐💐*
🔔▶️महाभारत की समाप्ति के उपरान्त पांडवों ने एक महान यज्ञ किया। कहते हैं कि वैसा यज्ञ उस जमाने में और किसी ने नहीं किया था। गरीब लोगों को उदारतापूर्वक इतना दान उस यज्ञ में दिया गया था कि उनके घर सोने से भर गये।वैसी दान वीरता को देख कर सबने दांतों तले उंगली दबाई।

इस यज्ञ की चर्चा देश-देशान्तरों में फैली हुई थी। यहां तक कि पशु-पक्षी भी उसे सुने बिना न रहे। एक नेवले ने जब इस प्रकार के यज्ञ का समाचार सुना तो वह बहुत प्रसन्न हुआ। क्योंकि एक छोटे से यज्ञ के उच्छिष्ट अन्न से छू जाने के कारण उसका आधा शरीर सोने का हो गया था।इस छोटे यज्ञ में जूठन के जरा से कण ही मिले थे जिनसे वह आधा ही शरीर स्पर्श कर सका था। तब से उसकी बड़ी अभिलाषा थी कि किसी प्रकार उसका शेष आधा शरीर भी सोने का हो जावे। वह जहां यज्ञ की खबर सुनता वहीं दौड़ा जाता और यज्ञ की जो वस्तुएं इधर-उधर पड़ी मिलतीं उनमें लोटता, किन्तु उसका कुछ भी प्रभाव न होता। इस बार इतने बड़े यज्ञ की चर्चा सुनकर नेवले को बड़ी प्रसन्नता हुई और वह अविलम्ब उसकी जूठन में लोटने के लिये उत्साहपूर्वक चल दिया।

कई दिन की कठिन यात्रा तय करके नेवला यज्ञ स्थल पर पहुंचा और वहां की कीच, जूठन, यज्ञस्थली आदि में बड़ी व्याकुलता के साथ लोटता फिरा।एक बार नहीं कई-कई बार वह उन स्थानों पर लोटा और बार-बार आंखें फाड़ कर शरीर की परीक्षा की कि देखें मैं सोने का हुआ या नहीं। परन्तु बहुत करने पर भी कुछ फल न हुआ। तब वह एक स्थान पर बैठ कर सिर धुन-धुन कर पछताने लगा।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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नेवले के इस आचरण को देखकर लोग उसके पास इकट्ठे हो गये और इसका कारण पूछने लगे। उसने बड़े दुःख के साथ उत्तर दिया कि इस यज्ञ की प्रशंसा सुनकर मैं दूर देश से बड़ा कष्ट उठा कर यहां तक आया था, पर मालूम होता है कि यहां यज्ञ हुआ ही नहीं। यदि यज्ञ हुआ होता तो मेरा आधा अंग भी सोने का क्यों न हो जाता? लोगों की उत्सुकता बढ़ी, उन्होंने नेवले से कहा आपका शरीर सोने का होने और यज्ञ से उसका संबंध होने का क्या रहस्य है कृपया विस्तारपूर्वक बताइये।

नेवले ने कहा—सुनिए! यह आपके हीके एक  ग्राम, नगर शहर की प्राचीन घटना है। आपके यहां पर  एक गरीब जाट अपने परिवार सहित रहता था। परिवार में कुल चार व्यक्ति थे। (1) जाट (2) उसकी स्त्री (3) बेटा (4) बेटे की स्त्री। जाट अध्यापन कार्य करता था। बालकों को पढ़ाने से उसे जो कुछ थोड़ी-बहुत आमदनी हो जाती थी, उसी से परिवार का पेट पालन करता था। एक बार लगातार तीन वर्ष तक मेह न बरसा जिससे बड़ा भारी अकाल पड़ गया। लोग भूख के मारे प्राण त्यागने लगे।ऐसी दशा में वह जाट परिवार भी बड़ा कष्ट सहन करने लगा। कई दिन बाद आधे पेट भोजन की व्यवस्था बड़ी कठिनाई से हो पाती। वे बेचारे सब के सब सूखकर कांटा होने लगे। एक बार कई दिन उपवास करने के बाद कहीं से थोड़ा-सा बाजरे का आटा मिला। उसकी चार रोटी बनीं। चारों प्राणी एक-एक रोटी बांट कर अपनी थालियों में रख कर खाने को बैठने ही जाते थे कि इतने में दरवाजे पर एक अतिथि आकर खड़ा हो गया।

गृहस्थ का धर्म हैं कि अतिथि का उचित सत्कार करे। जाट ने अतिथि से कहा—पधारिए भगवन्! भोजन कीजिये।ऐसा कहते हुए उसने अपनी थाली अतिथि के आगे रख दी। अतिथि ने उसे दो-चार ग्रास में खा लिया और कहा—भले आदमी, मैं दस दिन का भूखा हूं, इस एक रोटी से तो कुछ नहीं हुआ उलटी भूख और अधिक बढ़ गई। अतिथि के वचन सुनकर जाट पत्नी ने अपनी थाली उसके आगे रखदी और भोजन करने का निवेदन किया।अतिथि ने वह भोजन भी खा लिया, पर उसकी भूख न बुझी। तब जाट पुत्र ने अपना भाग उसे दिया। इस पर भी उसे संतोष न हुआ तो पुत्र वधू ने अपनी रोटी उसे दे दी। चारों की रोटी खाकर अतिथि की भूख बुझी और वह प्रसन्न होता हुआ चलता बना।

उसी रात को भूख की पीड़ा से व्यथित होकर वह परिवार मर गया। मैं उसी परिवार की झोंपड़ी के निकट रहता था। नित्य की भांति बिल से बाहर निकला तो उस अतिथि सत्कार से बची हुई कुछ जूठन के कण उधर पड़े हुए थे। वे मेरे जितने शरीर से छुए उतना ही सोने का हो गया। मेरी माता ने बताया कि किसी महान् यज्ञ के कण लग जाने से शरीर सोने का हो जाता है। इसी आशा से मैं यहां आया था कि पाण्डवों का यह यज्ञ उस जाट के यज्ञ के समान तो हुआ होगा, पर यहां के यज्ञ का वैसा प्रभाव देखा तो अपने परिश्रम के व्यर्थ जाने का मुझे दुख हो रहा है।

कथा बतलाती है कि दान, धर्म या यज्ञ का महत्व उसके बड़े परिमाण पर नहीं, वरन् करने वाले की भावना पर निर्भर है। एक धनी का अहंकार पूर्वक लाखों रुपया दान करना एक गरीब के त्यागपूर्वक एक मुट्ठी भर अन्न देने की समता नहीं कर सकता। प्रभु के दरबार में चांदी सोने के टुकड़ों का नहीं, वरन् पवित्र भावनाओं का मूल्य है।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 18 जनवरी 2024

हमारे पतन का कारण

*हमारे पतन का कारण*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 हमारे पतन का कारण ✍️🐒*
*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 पौष शुक्ल दशमी, 20 जनवरी शनिवार कलिकाल के सोलहवें तीर्थंकर बुध  की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर सर्वसुखकारक  शांति की प्राप्ति करवाने वाले 1008 श्री शांतिनाथ भगवान का केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
 *🔔👪🪔 पौष शुक्ल ग्यारस, 21 जनवरी रविवार कलिकाल के द्वितीय तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले निर्ग्रन्थ गुरु का सानिध्य प्राप्त करवाने वाले 1008 श्री अजितनाथ भगवान केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 जनवरी माह में    24,25 तारीख को भी तीर्थंकर भगवन्तों कल्याणक महोत्सव है। यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

* आप ऊँचाई से नीचे गिर रहे हो -

👪▶️एक बार किसी हवाईजहाज में यात्रा करने वाले यात्री को पता चलता है कि उसके विमान में खराबी आने से वह विमान अत्यन्त ऊँचाई से नीचे गिर रहा है।
फिर इस गिरते हुए विमान में आग भी लग जाती है।
अब आप समझ ही सकते हैं कि इतनी उंचाई से गिरते हुए इस विमान के यात्री के मन में किस तरह के विचार आ रहे होंगे। 
क्या ऐसी विकट परिस्थिति में वह उस समय दूसरों को हीन और कमजोर मानने का अभिमान में चूर होगा?
अरे ऐसी विकट परिस्थिति में तो उसे किसी भी तरह के आमोद-प्रमोद का, खाने-पीने का विकल्प भी नहीं आयेगा।
वह तो गिरते ही तत्क्षण समझ जायेगा कि अब मौत अत्यन्त निकट है।
फिर वह बचाओ-बचाओ चिल्लायेगा, किन्तु उसका क्रंदन कोई भी नहीं सुनता है। 
तब वह व्यक्ति नीचे गिरते हुए अत्यन्त आकुलित होता हुआ मरण को प्राप्त होता है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*✍️हे भव्यात्मा, आप भी इस घनघोर कर्म के वायुमंडल में पूर्वजन्म के पुण्य से चतुर्गति के सर्वोत्कृष्ट मनुष्य भव की इस ऊँचाई पर पहुँच चुके हो। अब इस भव में और ऊपर जाने का यानी कि निज आत्म दर्शन करने का या सम्यकदर्शन को पाने का कोई भी कार्य या पुरुषार्थ आपने नहीं किया है।* 
अतः अब आप इस सर्वोत्कृष्ट पुण्य की उंचाई से नीचे गिर रहे हो। 
लेकिन आपने इतनी मोह रूपी मदिरा पी ली है कि आप बेहोश हो गये हो और बचाओ-बचाओ भी नहीं चिल्ला रहे हो। 
हे , फिर भी परमोपकारी श्री सद्‌गुरू अत्यन्त करूणा से ज्ञानजल के छींटे मारकर आपको जगा कर समझा रहे हैं कि अब भी वक्त है, मेरे पास आ जाओ. 
मैं आपको आपके ही अनन्त गुण रूपी घोड़ों से जुते इस अति वैभवशाली विशालकाय अलौकिक चैतन्यरथ में चढ़ा देता हूँ, 
जिससे फिर आप को कभी भी गिरने का भय नहीं रहेगा और आप इस चैतन्यरथ पर विराजमान सदाकाल इस अद्‌भुत वैभव को भोगकर शाश्वत सुख को पा लोगे।
अतः हे भव्यात्मा , अब शीघ्र ही “चेत रे भाई चेत” और अपने आपको समझदार और श्रेष्ठ मानकर दूसरों को कमजोर मानना छोड़कर अपनी इस स्वप्न-अवस्था को जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी त्यागकर अब तो जाग भी जाओ।
फिर शीघ्र ही आपका शाश्वत कल्याण अवश्य ही होगा।
हे वत्स, अब भी चेत जाओ, क्योकि समय बहुत कम है, आयु बहुत सूक्ष्म है; लेकिन अब भी तुम्हारे लिए एक अंतिम मौका बचा है।
मेरी इस देशना को ह्रदयंगम कर संसार के समस्त मिथ्याज्ञान को पूर्णतः त्याग, अपनी सहज निर्विचार, निर्विकार चैतन्य दशा का आश्रय लेकर,
स्वयं के त्रिकालदर्शी, त्रिलोकवर्ती परम शुद्ध चैतन्य स्वरुप में विचरण कर लोक के शिखर मोक्ष महल में विराजमान होने के लिए रत्नत्रय को दृढ़ता पूर्वक धारण करों ,
ताकि तुम आगे आने वाले अनंत काल तक परम सुख में लीन हो सको।
अन्यथा बहुत जल्दी तुम्हारे तीव्र मिथ्यात्व के उदय से वर्तमान की इस त्रस पर्याय का अभाव होगा और फिर तुम पुनः एकेंद्रिय और निगोद के त्रिलोकी अन्धकार के महा विनाशक गर्द में पुनः अनंतकाल के लिए समां कर नष्टप्रायः हो जाओगे।

*विशेष:- भव्य आत्माओं, दुःख में सुख खोज लेना, हानि में लाभ खोज लेना, प्रतिकूलताओं में भी अवसर खोज लेना, इस सबको सकारात्मक दृष्टिकोण कहा जाता है, जीवन का ऐसा कोई बड़े से बड़ा दुःख नहीं जिससे सुख की परछाईयों को ना देखा जा सके, जिन्दगी की ऐसी कोई बाधा नहीं, जिससे कुछ प्रेरणा ना ली जा सके, रास्ते में पड़े हुए पत्थर को आप मार्ग की बाधा भी मान सकते हैं, और चाहें तो उस पत्थर को सीढ़ी बनाकर ऊपर भी चढ़ सकते हैं, जीवन का आनन्द वही लोग उठा पाते हैं, जिनका सोचने का ढंग सकारात्मक होता है!*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

हमारे पतन का कारण

*हमारे पतन का कारण*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 हमारे पतन का कारण ✍️🐒*

* आप ऊँचाई से नीचे गिर रहे हो -

👪▶️एक बार किसी हवाईजहाज में यात्रा करने वाले यात्री को पता चलता है कि उसके विमान में खराबी आने से वह विमान अत्यन्त ऊँचाई से नीचे गिर रहा है।
फिर इस गिरते हुए विमान में आग भी लग जाती है।
अब आप समझ ही सकते हैं कि इतनी उंचाई से गिरते हुए इस विमान के यात्री के मन में किस तरह के विचार आ रहे होंगे। 
क्या ऐसी विकट परिस्थिति में वह उस समय दूसरों को हीन और कमजोर मानने का अभिमान में चूर होगा?
अरे ऐसी विकट परिस्थिति में तो उसे किसी भी तरह के आमोद-प्रमोद का, खाने-पीने का विकल्प भी नहीं आयेगा।
वह तो गिरते ही तत्क्षण समझ जायेगा कि अब मौत अत्यन्त निकट है।
फिर वह बचाओ-बचाओ चिल्लायेगा, किन्तु उसका क्रंदन कोई भी नहीं सुनता है। 
तब वह व्यक्ति नीचे गिरते हुए अत्यन्त आकुलित होता हुआ मरण को प्राप्त होता है।

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*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*✍️हे भव्यात्मा, आप भी इस घनघोर कर्म के वायुमंडल में पूर्वजन्म के पुण्य से चतुर्गति के सर्वोत्कृष्ट मनुष्य भव की इस ऊँचाई पर पहुँच चुके हो। अब इस भव में और ऊपर जाने का यानी कि निज आत्म दर्शन करने का या सम्यकदर्शन को पाने का कोई भी कार्य या पुरुषार्थ आपने नहीं किया है।* 
अतः अब आप इस सर्वोत्कृष्ट पुण्य की उंचाई से नीचे गिर रहे हो। 
लेकिन आपने इतनी मोह रूपी मदिरा पी ली है कि आप बेहोश हो गये हो और बचाओ-बचाओ भी नहीं चिल्ला रहे हो। 
हे , फिर भी परमोपकारी श्री सद्‌गुरू अत्यन्त करूणा से ज्ञानजल के छींटे मारकर आपको जगा कर समझा रहे हैं कि अब भी वक्त है, मेरे पास आ जाओ. 
मैं आपको आपके ही अनन्त गुण रूपी घोड़ों से जुते इस अति वैभवशाली विशालकाय अलौकिक चैतन्यरथ में चढ़ा देता हूँ, 
जिससे फिर आप को कभी भी गिरने का भय नहीं रहेगा और आप इस चैतन्यरथ पर विराजमान सदाकाल इस अद्‌भुत वैभव को भोगकर शाश्वत सुख को पा लोगे।
अतः हे भव्यात्मा , अब शीघ्र ही “चेत रे भाई चेत” और अपने आपको समझदार और श्रेष्ठ मानकर दूसरों को कमजोर मानना छोड़कर अपनी इस स्वप्न-अवस्था को जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी त्यागकर अब तो जाग भी जाओ।
फिर शीघ्र ही आपका शाश्वत कल्याण अवश्य ही होगा।
हे वत्स, अब भी चेत जाओ, क्योकि समय बहुत कम है, आयु बहुत सूक्ष्म है; लेकिन अब भी तुम्हारे लिए एक अंतिम मौका बचा है।
मेरी इस देशना को ह्रदयंगम कर संसार के समस्त मिथ्याज्ञान को पूर्णतः त्याग, अपनी सहज निर्विचार, निर्विकार चैतन्य दशा का आश्रय लेकर,
स्वयं के त्रिकालदर्शी, त्रिलोकवर्ती परम शुद्ध चैतन्य स्वरुप में विचरण कर लोक के शिखर मोक्ष महल में विराजमान होने के लिए रत्नत्रय को दृढ़ता पूर्वक धारण करों ,
ताकि तुम आगे आने वाले अनंत काल तक परम सुख में लीन हो सको।
अन्यथा बहुत जल्दी तुम्हारे तीव्र मिथ्यात्व के उदय से वर्तमान की इस त्रस पर्याय का अभाव होगा और फिर तुम पुनः एकेंद्रिय और निगोद के त्रिलोकी अन्धकार के महा विनाशक गर्द में पुनः अनंतकाल के लिए समां कर नष्टप्रायः हो जाओगे।

*विशेष:- भव्य आत्माओं, दुःख में सुख खोज लेना, हानि में लाभ खोज लेना, प्रतिकूलताओं में भी अवसर खोज लेना, इस सबको सकारात्मक दृष्टिकोण कहा जाता है, जीवन का ऐसा कोई बड़े से बड़ा दुःख नहीं जिससे सुख की परछाईयों को ना देखा जा सके, जिन्दगी की ऐसी कोई बाधा नहीं, जिससे कुछ प्रेरणा ना ली जा सके, रास्ते में पड़े हुए पत्थर को आप मार्ग की बाधा भी मान सकते हैं, और चाहें तो उस पत्थर को सीढ़ी बनाकर ऊपर भी चढ़ सकते हैं, जीवन का आनन्द वही लोग उठा पाते हैं, जिनका सोचने का ढंग सकारात्मक होता है!*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 9 जनवरी 2024

आचरण व ज्ञान में वृद्धि का उपाय

*आचरण व ज्ञान में वृद्धि का उपाय*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒आचरण व ज्ञान में वृद्धि का उपाय   ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 पौष कृष्ण शाश्वत पर्व चतुर्दशी, 10 जनवरी बुधवार कलिकाल के 10 वें तीर्थंकर गुरु  की महादशा को अनुकूल बनाने वाले रत्नत्रय को दृढ़ता प्रदान करने वाले  1008 श्री शीतलनाथ भगवान का केवलज्ञान  कल्याणक महोत्सव है। 👪🛕*

*🔔🪔 जनवरी माह में   20, 21, 24,25 तारीख को भी तीर्थंकर भगवन्तों कल्याणक महोत्सव है। यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

👪↔️आइए हम सभी इस कहानी से अपने आचरण व ज्ञान को वृद्धि करते हुए अपने कर्तव्यों का पालन कर जीवन सार्थक करें।

 *किसी जंगल में एक संत महात्मा रहते थे। सन्यासियों वाली वेश भूषा थी और बातों में सदाचार का भाव, चेहरे पर इतना तेज था कि कोई भी इंसान उनसे प्रभावित हुए नहीं रह सकता था।*
 
*एक बार जंगल में शहर का एक व्यक्ति आया और वो जब महात्मा जी की झोपड़ी से होकर गुजरा तो देखा बहुत से लोग महात्मा जी के दर्शन करने आये हुए थे। वो महात्मा जी के पास गया और बोला कि आप अमीर भी नहीं है, आपने महंगे कपडे भी नहीं पहने हैं,*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 *आपको देखकर मैं बिल्कुल प्रभावित नहीं हुआ फिर ये इतने सारे लोग आपके दर्शन करने क्यों आते हैं ?*

*महात्मा जी ने उस व्यक्ति को अपनी एक अंगूठी उतार के दी और कहा कि आप इसे बाजार में बेच कर आएं और इसके बदले एक सोने की माला लेकर आना।*

*अब वो व्यक्ति बाजार गया और सब की दुकान पर जाके उस अंगूठी के बदले सोने की माला मांगने लगा। लेकिन सोने की माला तो क्या उस अंगूठी के बदले कोई पीतल का एक टुकड़ा भी देने को तैयार नहीं था*

*थकहार के व्यक्ति वापस महात्मा जी के पास पहुंचा और बोला कि इस अंगूठी की तो कोई कीमत ही नहीं है।*

 *महात्मा जी मुस्कुराये और बोले कि अब इस अंगूठी को सुनार गली में जौहरी की दुकान पर ले जाओ। वह व्यक्ति जब सुनार की दुकान पर गया तो सुनार ने एक माला नहीं बल्कि अंगूठी के बदले पांच माला देने को कहा।*

 *वह व्यक्ति बड़ा हैरान हुआ कि इस मामूली से अंगूठी के बदले कोई पीतल की माला देने को तैयार नहीं हुआ लेकिन ये सुनार कैसे 5 सोने की माला दे रहा है।*

 *व्यक्ति वापस महात्मा जी के पास गया और उनको सारी बातें बतायीं।*

*अब महात्मा जी बोले कि चीजें जैसी ऊपर से दिखती हैं, अंदर से वैसी नहीं होती। ये कोई मामूली अंगूठी नहीं है बल्कि ये एक हीरे की अंगूठी है जिसकी पहचान केवल सुनार ही कर सकता था।*

*इसलिए वह 5 माला देने को तैयार हो गया। ठीक वैसे ही मेरी वेशभूषा को देखकर तुम मुझसे प्रभावित नहीं हुए।*

 *लेकिन ज्ञान का प्रकाश लोगों को मेरी ओर खींच लाता है।*

 *व्यक्ति महात्मा जी की बातें सुनकर बड़ा शर्मिंदा हुआ।* 

*कपड़ों से व्यक्ति की पहचान नहीं होती बल्कि आचरण और ज्ञान से व्यक्ति की पहचान होती है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 6 जनवरी 2024

एक-दूसरे के सहयोग से

*👪एक दूसरे के सहयोग से💯*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 एक दूसरे के सहयोग से✍️🐒*
*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 पौष कृष्ण ग्यारस, 07 जनवरी रविवार कलिकाल के अष्टम तीर्थंकर चंद्र  की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर अष्टम निधि की प्राप्ति करवाने वाले 1008 श्री चंद्रप्रभ भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है। ↔️👪आज ही के दिन केतू की महादशा को अनुकूल बनाने वाले व सभी प्रकार के उपसर्गों को सहन करने की शक्ति प्रदान करने वाले उपसर्ग विजेता पार्श्वनाथ भगवान जी  23 वें तीर्थंकर 1008 श्री  पार्श्वनाथ स्वामी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है। 🛕*

*🔔🪔 जनवरी माह में   10,20, 21, 24,25 तारीख को भी तीर्थंकर भगवन्तों कल्याणक महोत्सव है। यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
 एक दिन शिक्षक ने कक्षा में विद्यार्थियों से कहा,
 "मैं आप सभी को एक कार्य सौंपता हूं। मैं आप सभी को एक गुब्बारा देता हूं। आपको गुब्बारों को फुलाना है और उन पर अपना नाम लिखना है और सभी गुब्बारों को उनके बगल के खाली कमरे में रखना है। शिक्षक ने प्रत्येक छात्र को एक गुब्बारा दिया और फिर छात्रों ने शिक्षक के निर्देशानुसार गुब्बारे फुलाए और अपना नाम लिखकर दूसरे कमरे में रख दिया।

 फिर शिक्षक कमरे में गए और सभी गुब्बारों को एक साथ मिला दिया।  और छात्रों से कहा,
 "इन सभी गुब्बारों में से आपको अपना गुब्बारा पांच मिनट के भीतर ढूंढना होगा।"
 विद्यार्थियों में अपने नाम लिखे गुब्बारे ढूंढने की होड़ मच गई।  कमरे में हलचल मच गई.  अंततः आवंटित समय समाप्त हो गया लेकिन अधिकांश छात्रों को उनके गुब्बारे नहीं मिल सके।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 उसके बाद शिक्षक ने छात्रों से कहा, "अब मैं आप सभी को एक और काम सौंप रहा हूं। अब आपको जो भी गुब्बारा मिले उसे ले लो और उस व्यक्ति को दे दो जिसका नाम उस पर लिखा है।"
 छात्रों ने शिक्षक के निर्देशों का पालन किया और पाँच मिनट के भीतर उन सभी के पास अपने-अपने गुब्बारे थे।
 
 शिक्षक ने छात्रों से कहा: "क्या आप सभी ने देखा है कि दोनों कार्यों के परिणाम कितने अलग-अलग थे? आज आपके कार्य में जीवन का एक सुंदर सबक छिपा है।"
  यदि हम कोई भी कार्य करते समय केवल अपना ही नहीं बल्कि दूसरों का भी हित सोचें तो सब अच्छा होगा, कल्याणकरी होगा। कर दूसरों का भला तो हो अपना ही भला।

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*कहानी न.दो 👪आज के मनुष्य का लालच✅*

मुंबई स्टेशन पर रेलगाड़ी खड़ी थी । एक अनजान आदमी आया, उसने ट्रेन में एक बक्सा रखा और एक यात्री को कहा: “इसे जरा देखना, मैं आता हूँ ।” समय हुआ, गाड़ी चल पड़ी; कई स्टेशन निकल गये पर वे महाशय आये नहीं ।
आखिर मुंबई से निकली गाड़ी चेन्नई पहुँची यात्री उतर गये पर बक्सा पड़ा रहा । इस यात्री ने सोचा कि ‘वह तो आया नहीं । चलो, अपन ही बक्सा उठवा लो ।” यात्री ने कुली को कहा: “यह सामान भी ले चलो ।”
सामान के साथ थोड़ा बाहर आया तो लगेजवालों ने पकड़ा कि “एक टिकट पर इतना सारा वजन है ! किसका माल है ?”
इसने कहा : “हमारा है ।” 
और लगेज वालों ने 7 रुपये 6 आने की एक पर्ची फाड़ दी अतिरिक्त वजन के लिए ।
फिर बाहर निकला तो कस्टम वालों ने पूछा : “इतना माल किसका है ?”
यात्री ने कहा: “मेरा है ।”
“बक्से में क्या है ?”
“चाबी गुम हो गयी है । “
“चाबी गुम हो गयी तो क्या है ? खोलो इसे “
ताला तोड़ा तो अंदर से लाश निकली । अब वह कितना ही कहे कि ‘मेरा नहीं है, मेरा नहीं है…’ तो भी दफा 302 का मुकद्दमा बन गया । क्योंकि पहले उसने ‘मेरा’ कह दिया न ? 
ऐसे ही हम लोग दिन में न जाने कितनी बार ‘मेरा, मेरा, मेरा’ कहते हैं और हम लोगों के ऊपर भी 302 के न जाने कितने मुकदमे दर्ज हो जाते हैं ! उस यात्री पर 302 का केस बनता है तो उसको एक बार उम्रकैद की सजा मिलेगी लेकिन हमको तो 84-84 लाख जन्मों की सजा मिलती रहती है । उसने तो एक बक्से को ‘मेरा’ कहा किंतु हमने तो न जाने कितनों को ‘मेरा’ कहा होगा । यह मकान मेरा है… यह घर मेरा है… रुपये मेरे हैं… गहने मेरे हैं… गाड़ी मेरी है… ।
जितना अधिक ‘मेरा-मेरा’ कहते हैं उतने ज्यादा फँसते जाते हैं । मन में जितना जितना मेरेपन का भाव अधिक होता है, उतना-उतना यह जीव जन्मों की परम्परा में जाता है और समय की धारा में सब ‘मेरा-तेरा…’ करते प्रवाहित हो जाता है ।जिसका सब कुछ है वह परमात्मा तेरा है, बाकी सब धोखा है ।
देह तो बनी है माया की मिट्टी से, मन बना है माया के सूक्ष्म तत्वों से, उस अनन्त की हवाएँ लेकर तू अपने फेफड़े चला रहा है, उस परमात्मा की सत्ता से सूर्य की किरणें तुझे जला रही हैं । तेरा अपना क्या है? सच पूछो तो यह सब देनेवाले परमात्मा की अद्भुत करुणा से प्राप्त है ।
मेरा मुझमें कुछ नहीं, जो कुछ है सो तेरा ।
जिसकी सत्ता से यह सब लीला हो रही है वह परमात्मा तेरा है । तू उसकी ठीक से स्मृति बना ले तो तेरी ज्ञानमयी दृष्टि जिनपर पड़ जायेगी उनका भी कल्याण होने लगेगा ।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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