*👪एक दूसरे के सहयोग से💯*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 एक दूसरे के सहयोग से✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 पौष कृष्ण ग्यारस, 07 जनवरी रविवार कलिकाल के अष्टम तीर्थंकर चंद्र की महादशा को अनुकूल बनाने वाले मन के सभी विकल्पों को शांत कर अष्टम निधि की प्राप्ति करवाने वाले 1008 श्री चंद्रप्रभ भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है। ↔️👪आज ही के दिन केतू की महादशा को अनुकूल बनाने वाले व सभी प्रकार के उपसर्गों को सहन करने की शक्ति प्रदान करने वाले उपसर्ग विजेता पार्श्वनाथ भगवान जी 23 वें तीर्थंकर 1008 श्री पार्श्वनाथ स्वामी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔🪔 जनवरी माह में 10,20, 21, 24,25 तारीख को भी तीर्थंकर भगवन्तों कल्याणक महोत्सव है। यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
एक दिन शिक्षक ने कक्षा में विद्यार्थियों से कहा,
"मैं आप सभी को एक कार्य सौंपता हूं। मैं आप सभी को एक गुब्बारा देता हूं। आपको गुब्बारों को फुलाना है और उन पर अपना नाम लिखना है और सभी गुब्बारों को उनके बगल के खाली कमरे में रखना है। शिक्षक ने प्रत्येक छात्र को एक गुब्बारा दिया और फिर छात्रों ने शिक्षक के निर्देशानुसार गुब्बारे फुलाए और अपना नाम लिखकर दूसरे कमरे में रख दिया।
फिर शिक्षक कमरे में गए और सभी गुब्बारों को एक साथ मिला दिया। और छात्रों से कहा,
"इन सभी गुब्बारों में से आपको अपना गुब्बारा पांच मिनट के भीतर ढूंढना होगा।"
विद्यार्थियों में अपने नाम लिखे गुब्बारे ढूंढने की होड़ मच गई। कमरे में हलचल मच गई. अंततः आवंटित समय समाप्त हो गया लेकिन अधिकांश छात्रों को उनके गुब्बारे नहीं मिल सके।
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उसके बाद शिक्षक ने छात्रों से कहा, "अब मैं आप सभी को एक और काम सौंप रहा हूं। अब आपको जो भी गुब्बारा मिले उसे ले लो और उस व्यक्ति को दे दो जिसका नाम उस पर लिखा है।"
छात्रों ने शिक्षक के निर्देशों का पालन किया और पाँच मिनट के भीतर उन सभी के पास अपने-अपने गुब्बारे थे।
शिक्षक ने छात्रों से कहा: "क्या आप सभी ने देखा है कि दोनों कार्यों के परिणाम कितने अलग-अलग थे? आज आपके कार्य में जीवन का एक सुंदर सबक छिपा है।"
यदि हम कोई भी कार्य करते समय केवल अपना ही नहीं बल्कि दूसरों का भी हित सोचें तो सब अच्छा होगा, कल्याणकरी होगा। कर दूसरों का भला तो हो अपना ही भला।
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*कहानी न.दो 👪आज के मनुष्य का लालच✅*
मुंबई स्टेशन पर रेलगाड़ी खड़ी थी । एक अनजान आदमी आया, उसने ट्रेन में एक बक्सा रखा और एक यात्री को कहा: “इसे जरा देखना, मैं आता हूँ ।” समय हुआ, गाड़ी चल पड़ी; कई स्टेशन निकल गये पर वे महाशय आये नहीं ।
आखिर मुंबई से निकली गाड़ी चेन्नई पहुँची यात्री उतर गये पर बक्सा पड़ा रहा । इस यात्री ने सोचा कि ‘वह तो आया नहीं । चलो, अपन ही बक्सा उठवा लो ।” यात्री ने कुली को कहा: “यह सामान भी ले चलो ।”
सामान के साथ थोड़ा बाहर आया तो लगेजवालों ने पकड़ा कि “एक टिकट पर इतना सारा वजन है ! किसका माल है ?”
इसने कहा : “हमारा है ।”
और लगेज वालों ने 7 रुपये 6 आने की एक पर्ची फाड़ दी अतिरिक्त वजन के लिए ।
फिर बाहर निकला तो कस्टम वालों ने पूछा : “इतना माल किसका है ?”
यात्री ने कहा: “मेरा है ।”
“बक्से में क्या है ?”
“चाबी गुम हो गयी है । “
“चाबी गुम हो गयी तो क्या है ? खोलो इसे “
ताला तोड़ा तो अंदर से लाश निकली । अब वह कितना ही कहे कि ‘मेरा नहीं है, मेरा नहीं है…’ तो भी दफा 302 का मुकद्दमा बन गया । क्योंकि पहले उसने ‘मेरा’ कह दिया न ?
ऐसे ही हम लोग दिन में न जाने कितनी बार ‘मेरा, मेरा, मेरा’ कहते हैं और हम लोगों के ऊपर भी 302 के न जाने कितने मुकदमे दर्ज हो जाते हैं ! उस यात्री पर 302 का केस बनता है तो उसको एक बार उम्रकैद की सजा मिलेगी लेकिन हमको तो 84-84 लाख जन्मों की सजा मिलती रहती है । उसने तो एक बक्से को ‘मेरा’ कहा किंतु हमने तो न जाने कितनों को ‘मेरा’ कहा होगा । यह मकान मेरा है… यह घर मेरा है… रुपये मेरे हैं… गहने मेरे हैं… गाड़ी मेरी है… ।
जितना अधिक ‘मेरा-मेरा’ कहते हैं उतने ज्यादा फँसते जाते हैं । मन में जितना जितना मेरेपन का भाव अधिक होता है, उतना-उतना यह जीव जन्मों की परम्परा में जाता है और समय की धारा में सब ‘मेरा-तेरा…’ करते प्रवाहित हो जाता है ।जिसका सब कुछ है वह परमात्मा तेरा है, बाकी सब धोखा है ।
देह तो बनी है माया की मिट्टी से, मन बना है माया के सूक्ष्म तत्वों से, उस अनन्त की हवाएँ लेकर तू अपने फेफड़े चला रहा है, उस परमात्मा की सत्ता से सूर्य की किरणें तुझे जला रही हैं । तेरा अपना क्या है? सच पूछो तो यह सब देनेवाले परमात्मा की अद्भुत करुणा से प्राप्त है ।
मेरा मुझमें कुछ नहीं, जो कुछ है सो तेरा ।
जिसकी सत्ता से यह सब लीला हो रही है वह परमात्मा तेरा है । तू उसकी ठीक से स्मृति बना ले तो तेरी ज्ञानमयी दृष्टि जिनपर पड़ जायेगी उनका भी कल्याण होने लगेगा ।
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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