रविवार, 28 दिसंबर 2025

दादी का अंत

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  दादी का अंत ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष शुक्ल  10 , 29 दिसंबर    सोमवार 2025 कलि काल के  16 वें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री शांतिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री शांतिनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष शुक्ल  ग्यारस , 30 दिसंबर  मंगलवार 2025 कलि काल के  2 रें तीर्थंकर  श्री अजितनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अजितनाथ  भगवान जी का  केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 , 29 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  दिसंबर माह में  04,05,06 व 11 दिसंबर को है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20,26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  24 से 29 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*🪔दादी का अंत 🪔* 

*✅यह कहानी एक सच्चाई है इसे कहानी समझकर ना पढ़े। दादी की जगह स्वयं को रखकर विचार करें तो आपका वर्तमान के साथ भविष्य सुरक्षित होगा। सभी को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है किंतु जैनदर्शन में उन कर्मों को समाप्त करने का उपाय बताया है।यह आप पर निर्भर करता है कि आप किसी के सहायक बनोगे तो आपका भी कोई सहायक बनकर अंतिम समय सार्थक करेगा।*

समय के साथ घर बड़े होते चले गए, पर दिल छोटे होते गए। तकनीक ने हाथों को व्यस्त कर दिया और रिश्तों को मौन। इसी मौन में सबसे पहले जो आवाज़ दबती है, *वह बुज़ुर्गों की होती है* —जो कभी पूरे घर की धड़कन हुआ करते थे।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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शहर की पुरानी गलियों के बीचों-बीच एक दोमंज़िला घर था। कभी यह घर हँसी, बातों और रिश्तों की गर्माहट से भरा रहता था। पर आज उसी घर की पहली मंज़िल के आख़िरी कमरे में 91 वर्ष की एक दादी रहती थीं। उनका दरवाज़ा हमेशा आधा खुला रहता—जैसे वे अब भी किसी के आने की आस लगाए बैठी हों। कमरे में पसरा सन्नाटा उम्र से नहीं, उपेक्षा से उपजा हुआ था।

कभी यही दादी इस घर की आत्मा थीं। सुबह चार बजे पूजा की घंटी, रसोई से उठती मसालों की खुशबू, बच्चों की हँसी और बहुओं की चुहल—हर जगह उनकी मौजूदगी थी। उनकी कहानियों में पूरा मोहल्ला साँस लेता था और उनकी रसोई में सिर्फ़ खाना नहीं, अपनापन पकता था।
लेकिन समय बदला। बदलाव ऐसे चुपचाप आए कि किसी को पता ही नहीं चला कि दादी कब अकेली हो गईं।

धीरे-धीरे सब व्यस्त हो गए। बेटे नौकरी में उलझे, बहुएँ मीटिंग्स और मोबाइल में, पोते-पोतियाँ दादी की कहानियों से ज़्यादा स्क्रीन की रोशनी में खोने लगे। दादी वही थीं, घर वही था—बस रिश्तों का अर्थ बदल गया था।

अब उनकी दुनिया एक कमरे तक सिमट चुकी थी—एक चारपाई, पुरानी अलमारी, तस्वीरों से भरा एलबम और एक खिड़की, जिससे बाहर की दुनिया तो दिखती थी, पर भीतर कोई झाँकता नहीं था। उनके पास अनुभव का सागर था, पर उसे सुनने वाला कोई किनारा नहीं।

बहू रोज़ थाली रख जाती—
“दादी, खा लीजिए, मुझे जल्दी है।”
दादी चुपचाप थाली देखती रह जातीं, जैसे शब्दों से ज़्यादा मौन ही उनका उत्तर बन गया हो।

कभी पोता झाँकता—
“दादी, अभी नहीं… मेरा गेम चल रहा है।”
और पूरा दिन यूँ ही बीत जाता, बिना यह पूछे कि दादी कैसी हैं।

दादी समझ गई थीं— *मौत अचानक नहीं आती। वह पहले रिश्तों से दूर करती है, फिर आवाज़ों से, फिर सवालों से। और एक दिन इंसान अपने ही घर में पराया हो जाता है।* कमरे में घड़ी की टिक-टिक उन्हें याद दिलाती कि समय ही नहीं, लोग भी उनसे आगे निकल चुके हैं।

एक शाम वे चारपाई पर बैठी ढलते सूरज को देख रही थीं। बाहर रोशनी कम हो रही थी, और भीतर उम्मीद भी। उन्होंने धीरे से पुकारा,
“कोई है?”
पर जवाब में टीवी की आवाज़ आई—इंसानों की नहीं।

अगले दिन पोती आई, हाथ में मोबाइल था।
“दादी, आपने सुबह फोन किया था?”
दादी मुस्कराईं, “बस तुमसे थोड़ी बात करनी थी।”
“अभी क्लास है दादी, बाद में,” कहकर वह चली गई।
दादी ने कुछ नहीं कहा, पर भीतर कुछ हमेशा के लिए टूट गया।

दिन सरकते गए... सहेलियाँ एक-एक कर विदा हो गईं... रिश्तेदार कम होते गए.. रात को दादी एलबम खोलकर तस्वीरों से बातें करतीं—क्योंकि तस्वीरें कभी यह नहीं कहती थीं, ‘अभी समय नहीं है।’

एक सर्द रात उनकी तबियत बिगड़ गई। हड्डियाँ दर्द से कराह रही थीं। उन्होंने पानी के लिए आवाज़ लगाई—
“कोई पानी दे दो…”
पर घर जाग रहा था, दादी के लिए नहीं—टीवी, मोबाइल, काम… सब चल रहा था। उनका कमरा पहले से भी ज़्यादा खाली हो गया।

उन्हें समझ आ गया कि अकेलापन शरीर को नहीं, आत्मा को मारता है। और जब आत्मा हार जाती है, तो शरीर का टिके रहना मुश्किल हो जाता है।

सुबह बहू ने दरवाज़ा खोला। दादी तकिये के सहारे शांत लेटी थीं। चेहरे पर अजीब-सी शांति थी और आँखों में हल्की नमी—जैसे किसी का इंतज़ार करते-करते नींद आ गई हो।

घर में रोना-धोना मच गया। सब कह रहे थे—“दादी चली गईं।”
पर सच यह था कि दादी उस दिन नहीं गई थीं…
वे तो बहुत पहले चली गई थीं—उस दिन, जब उनसे बात करना बंद कर दिया गया था।

91 साल की दादी का सबसे बड़ा दर्द उम्र नहीं थी, बीमारी नहीं थी—दर्द था रिश्तों की चुप्पी। उनके पास जीवन था, पर अपनापन नहीं। साँसें थीं, पर सुनने वाला कोई नहीं।
*🔔नोट:-इस कहानी को रिश्तेदार मित्रों व अन्य लोगों तक शेयर अवश्य करे शायद इससे किसी दादा-दादी ,नाना-नानी का भला हो।* 

*✅🌞🔔🎪 विशेष :-भव्य आत्माओं,आज हमारे घरों में जो बुज़ुर्ग हैं, वही हमारे अतीत की जड़ और भविष्य का आईना हैं। उन्हें समय, सम्मान और संवाद दीजिए। क्योंकि जो आज किसी की आवाज़ अनसुनी करता है, कल उसकी आवाज़ भी इसी सन्नाटे में खो जाती है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 17 दिसंबर 2025

आत्मविश्वास की शक्ति

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 आत्मविश्वास की शक्ति ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष कृष्ण  चतुर्दशी , 18 दिसंबर गुरुवार 2025 कलि काल के  10 वें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री शीतलनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री शीतलनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28  दिसंबरको है। चतुर्दशी तिथि 03 व 18 दिसंबर  को है।*
*🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20, 26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  24 से 25 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*आत्मविश्वास की शक्ति* 

कभी-कभी हालात ऐसे होते हैं कि बाहर की गर्मी से ज़्यादा, हमारे भीतर कुछ उबल रहा होता है— झुंझलाहट, असंतोष और शिकायतें। और तभी जीवन हमें आईना दिखाने के लिए किसी छोटे से कंधे पर बड़ा बोझ रखकर हमारे सामने खड़ा कर देता है ।यह सबकुछ जब हमारा आत्मविश्वास हम गंवा चुके होते है तब ही महसूस होता है।
राजस्थान के उस तपते कस्बे में जून की दोपहर मानो साँस ले रही थी— लू के साथ। कल रात से बिजली बंद थी, और आज गर्मी अपने चरम पर।
मैं घर पहुँचा। जैसे ही फ्रिज खोला, उसमें से उठी गर्म भभक ने मेरे सब्र को जला दिया।
“इसे भी अभी खराब होना था…” मैं बड़बड़ाया।
पानी की बोतलें, जूस के पैकेट— सब उबलते हुए से लग रहे थे। प्यास से हलक सूख रहा था।
किचन से नॉर्मल पानी का गिलास उठाया, होठों से लगाया—
“छि…!” कोई इतना गर्म पानी कैसे पी सकता है!
मुंह में भरा पानी बाहर उगल दिया। गुस्से में गिलास समेत सिंक में पटक दिया और तेज़ कदमों से बाहर निकल पड़ा।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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“अंकल… एक चिल्ड पानी और एक चिल्ड कोल्ड ड्रिंक।” मैंने सौ का नोट बढ़ाया।
दुकानदार की आँखों में मजबूरी थी। “बेटा, ठंडी नहीं है… कल से लाइट नहीं है यहाँ। ऐसी ही चलेगी?”
मेरे अंदर कुछ और टूट गया। नोट जेब में डाला और बिना कुछ कहे आगे बढ़ गया।
शायद आज मुझे प्यास से ज़्यादा ठंडे पानी की ज़िद लगी हुई थी।
दूसरे इलाके तक पहुँचने के लिए एक खुला मैदान पार करना पड़ता था। चारों तरफ़ से आती लू ऐसे लग रही थी जैसे कोई अदृश्य हाथ मुझे धधकती भट्टी में धकेल रहा हो।
तभी… मेरी नज़र पड़ी—
नन्हे हाथ, काँपते कदम, और उन हाथों में दो खाली बर्तन।
एक छोटी-सी बच्ची मेरे पास से गुज़री।

मेरे तो पूरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई।

“बेटा इतनी भयानक गर्मी में नंगे पैर कहाँ जा रही हो?” मैने तुनककर पूछा।
वह रुकी नहीं, बस सहज-सी बोली— “पानी भरने… सड़क के उस पार।”
“घर में कोई बड़ा नहीं है?”
“माँ है… बीमार है।”
मैं अनायास ही उसके साथ चल पड़ा।
“तो स्कूल नहीं जाती?”
“जाती हूँ…”
“रोज पानी लाती हो?”
उसने मेरी ओर देखा, मुस्कराई और बोली— “पानी तो रोज चाहिए होता है ना, भैया…”
मेरे दिमाग में सिंक में बहता हुआ पानी कौंध गया।
“गुस्सा नहीं आता?” अब हवा कुछ ठंडी लगने लगी थी।
“किस पर?”
“किस्मत पर… इतनी गर्मी, इतनी दूर…”
वह बोली— “आधा दिन स्कूल में निकल जाता है। फिर माँ का काम, पानी भरना, पढ़ाई, छोटे भाई को देखना…”
मैंने धीमे से पूछा, “फिर?”
उसकी आँखों में चमक थी। वह हँस पड़ी—
“फिर वक्त ही नहीं मिलता…”
“किसके लिए?”
“गुस्सा करने के लिए।”
उसकी हँसी ने मेरे भीतर जमी सारी झुंझलाहट पिघला दी। जो लू मुझे जलाती लग रही थी, वही अब किसी ठंडे हाथ की तरह मुझे सहला रही थी।....... भव्य आत्माओं इस कहानी को साझा करने का उद्देश्य।।।
 यह कहानी ठंडे पानी की नहीं है, यह  बताने की कोशिश भर है कि अगर इंसान थोड़ा-सा संतोष सीख ले, तो हालात कितने भी कठिन हों, जीवन हल्का हो जाता है।
 प्रकृति ने हमें जो दिया है, वह भी बहुतों का सपना है। घर में बुजुर्ग कहा करते थे—“अगर हमेशा अपने से आगे वालों को देखोगे, तो ईर्ष्या मिलेगी। लेकिन अगर अपने से कमजोर को देखोगे, तो कृतज्ञता मिलेगी— और वहीं से सुकून शुरू होता है।”।
 उस दिन मुझे ठंडा पानी नहीं मिला, पर उस बच्ची ने बिना कुछ कहे मुझे यह बात फिर से याद दिला दी कि स्वयं का आत्मविश्वास सही है तो विषम परिस्थिति भी कुछ नहीं बिगाड़ सकती।
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 14 दिसंबर 2025

मन की वक्रता का उपाय

पंचकल्याणक महोत्सव व कहानी 
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  मन की वक्रता का उपाय ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष कृष्ण  ग्यारस , 15 दिसंबर    सोमवार 2025 कलि काल के  अष्टम  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री चद्रप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से चंद्र की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री चंद्रप्रभ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष कृष्ण  ग्यारस , 15 दिसंबर  सोमवार 2025 कलि काल के  23 वें तीर्थंकर  उपसर्ग विजेता श्री पार्श्वनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से केतु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री पार्श्वनाथ  भगवान जी का जन्म व तप  कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28  दिसंबरको है। चतुर्दशी तिथि 03 व 18 दिसंबर  को है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  दिसंबर माह में  04,05,06 व 11 दिसंबर को है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20,26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  24 से 25 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*मन की वक्रता का उपाय*
आज हम स्वयं के मन की वक्रता को सिधा सरल बनाने कि प्रक्रिया को सरल शब्दों में समझते है।इस प्रक्रिया का हम जैसे जैसे निरंतर अभ्यास करते है वैसी हमारे मन की वक्रता समाप्त होना चालू हो जाती है।अब हमारा चौरासी लाख योनियों का भ्रमण कम होना निश्चित है।

*_भक्ति की राह — मन को गूँधने की साधना_* 

आज के सत्संग में गुरुवर ने अत्यन्त सरल शब्दों में बताया कि सच्चे देव शास्त्र गुरु की भक्ति में भजन-सुमिरन की राह कठिन नहीं होती, बस निरन्तरता और सावधानी आवश्यक है। 
उन्होंने कहा— *“जैसे बारिश के बाद रास्ता फिसलन भरा हो तो हम टिके-टिके कदम रखते हैं, वैसे ही आध्यात्मिक मार्ग पर भी मन को संभालकर चलाना पड़ता है। जो संभलकर चलता है, वह गिरता नहीं।”*
इसके बाद उन्होंने एक सुंदर उदाहरण दिया— 
*“जब आटा गूँधना शुरू करते हैं तो वह हाथों और बर्तन में चिपकता है। लेकिन थोड़ी देर में जब वह अच्छी तरह गूँध जाता है, तो न हाथों को चिपकता है और न बर्तन को।”*
मन भी ऐसा ही है— शुरू में इच्छाओं, आदतों और संसारिक बातों में चिपकता है; पर निरंतर सुमिरन से धीरे-धीरे इतना परिपक्व हो जाता है कि संसार की चिपचिपाहट स्वयं ही छूटने लगती है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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एक आश्रम में एक छोटा-सा बाग़ था। वहाँ एक बेल थी जो जैसे-जैसे बढ़ती, पेड़ के तने, बाड़ और पास की झोपड़ी—जिसे भी पाती—उसी से लिपट जाती। हर सुबह माली आता और उसे सीधा करने की कोशिश करता, पर बेल फिर तिरछी होकर किसी न किसी चीज़ से चिपक जाती।

एक दिन एक युवा शिष्य ने माली से पूछा— “तुम इसे बार-बार सीधा क्यों करते हो? यह तो रोज़ फिर उलझ जाती है।”

माली मुस्कुराया और बोला— “बेल को एक ही बार नहीं, रोज़ थोड़ा-थोड़ा सीधा करना पड़ता है। अगर कई दिनों तक छोड़ दूँ, तो यह पूरी झोपड़ी को जकड़ लेगी। लेकिन यदि प्रतिदिन इसे थोड़ा-सा भी दिशा दे दूँ, तो कुछ महीनों में यह बिल्कुल सीधी खड़ी हो जाएगी। शुरू में यह विरोध करेगी, इधर-उधर चिपकेगी, पर धीरे-धीरे अपना स्वभाव सुधार लेगी।”

शिष्य ने आश्चर्य से पूछा— “और यह कब रुकेगी?”

माली ने हँसते हुए कहा— “जब इसकी कोमल डाली कड़ी हो जाएगी—यानी जब यह परिपक्व हो जाएगी। तब इसे किसी सहारे की जरूरत नहीं रहेगी, न यह किसी चीज़ से चिपकेगी। अपने आप सीधी खड़ी रहेगी।”

यह सुनकर शिष्य समझ गया कि मन भी उसी बेल जैसा है— शुरू में कहीं भी चिपक जाता है—लालसा में, क्रोध में, आदतों में, लोगों में। लेकिन यदि रोज़ थोड़ा-सा सुमिरन और साधना से उसे सीधी राह दिखाते रहें, तो एक दिन मन भी परिपक्व हो जाता है— 
न किसी इच्छाओं से चिपकता है, न संसार के सहारों पर टिकता है।

*🌞✅✍️🔔 विशेष:- देव-शास्त्र-गुरु की भक्ति एक दिन की साधना नहीं— यह मन को रोज़-रोज़ गूँधने, सीधा करने और स्थिर करने की प्रक्रिया है। जब मन परिपक्व हो जाता है— मोह हल्का हो जाता है, इच्छाएँ शांत हो जाती हैं, और भीतर एक अद्भुत स्थिरता उतर आती है। संतों ने ठीक ही कहा है— “संसार में रहो, पर संसार को अपने मन में  मत बसने दो।”🪔*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 5 दिसंबर 2025

सत्य आचरण का फल

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सत्य आचरण का अप्रत्याशित फल ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष कृष्ण  दूज , 06 दिसंबर शनिवार 2025 कलि काल के  19 वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री मल्लिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से केतु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मल्लिनाथ  भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28  दिसंबरको है। चतुर्दशी तिथि 03 व 18 दिसंबर  को है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  दिसंबर माह में  04,05,06 व 11 दिसंबर को है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20,26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  24 से 25 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*भव्य आत्माओं आज प्राचीन प्रथमानुयोग शास्त्र  की बातें इस कहानी के माध्यम से आप के सामने प्रस्तुत है।मनुष्य के जीवन में सच्चे दिगंबर संतों और गुरुओं के उपदेश दीपक की तरह होते हैं—जो अंधकार मिटाकर रास्ता दिखाते हैं। परंतु अक्सर हम यह सोचकर उनकी बातों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं कि “यह सब हमारे काम का नहीं।” लेकिन सत्य यह है कि सच्चे साधु-संतों की वाणी इतनी प्रभावशाली होती है कि यदि उसका थोड़ा-सा अंश भी जीवन में उतर जाए, तो भाग्य तक बदल सकता है ।*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 *सत्य आचरण का अप्रत्याशित फल* 

किसी नगर में एक बूढ़ा चोर रहता था। उसका एक सोलह वर्षीय बेटा था। जब चोर बूढ़ा होने लगा, तो उसने बेटे को चोरी की विद्या सिखानी शुरू कर दी। कुछ ही दिनों में लड़के ने चोरी की सब गुर विद्या सीख ली और दोनों आराम से जीवन बिताने लगे।

एक दिन बूढ़े चोर ने बेटे से कहा— “बेटा, हम चोरी के धंधे में है इसलिए साधु-संतों की बात कभी मत सुनना। अगर कहीं कोई महात्मा उपदेश दे रहे हों, तो कान में उंगली देकर तुरंत भाग जाना।” 
लड़के ने भी सिर हिलाकर कहा, “हाँ बापू, समझ गया।”
कुछ दिन बाद लड़के के मन में आया कि क्यों न आज राजा के महल में ही हाथ साफ किया जाए। वह महल की ओर निकल पड़ा। रास्ते में देखा—कुछ लोग एकत्र हैं। उसने पूछा, “इतनी भीड़ क्यों?” उत्तर मिला—“वहाँ एक महात्मा उपदेश दे रहे हैं।”
यह सुनकर लड़के को बाप की बात याद आई। उसने तुरंत अपने कान बंद कर लिए और इधर से निकलने लगा। लेकिन ठोकर लगने से वह गिर पड़ा। उसी पल महात्मा की दो बातें उसके कानों में पड़ गईं—
1. *“कभी झूठ मत बोलो।”* 
2 *. “जिसका नमक खाओ, उसका बुरा मत सोचो।”* 
वह फौरन उठकर कान और कसकर ढकते हुए महल की ओर बढ़ गया।
महल के द्वार पर पहरेदार ने रोककर पूछा— “कौन हो? कहाँ जा रहे हो?” 
उसे महात्मा की पहली बात याद आई। सोचा—आज सच बोलकर देखते हैं। 
वह बोला— “मैं चोर हूँ… चोरी करने आया हूँ।” पहरेदार ने हँसते हुए कहा—“अच्छा जाओ।” सोचा लड़का मजाक कर रहा होगा ।
लड़का अंदर चला गया। कमरे में सोना-चाँदी देखकर उसकी आंखें चमक उठीं। उसने एक थैला भर लिया। फिर वह रसोई में गया—वहाँ तरह-तरह के पकवान देखकर खाने बैठ गया। खाने के बाद जैसे ही वह चोरी का थैला उठाने लगा, दूसरी बात याद आई— *“जिसका नमक खाओ, उसका बुरा मत सोचो।”* 
उसने सोचा—“राजा का खाना खाया, उसमें नमक भी था… अब उसका बुरा कैसे करूँ?” उसने थैला वहीं छोड़ दिया और बाहर चला आया।
पहरेदार ने चकित होकर पूछा— “लो, चोरी क्यों नहीं की?” लड़के ने सादगी से उत्तर दिया— “राजा का नमक खाया है… उनका बुरा नहीं कर सकता। थैला रसोई में ही छोड़ आया हूँ।”
उधर रसोइया शोर मचाता दौड़ता हुआ आया—“अरे पकड़ो! चोर भाग रहा है!” पहरेदार ने लड़के को पकड़कर दरबार में पेश कर दिया।
राजा ने पूछा— “सारी बात सच-सच बताओ।”
लड़के ने पूरी घटना सादगी से बता दी। सत्य सुनकर राजा अत्यंत प्रसन्न हुआ और बोला— “तुम जैसा सच्चा व्यक्ति चोर नहीं, मेरा विश्वासपात्र हो सकता है।” राजा ने उसे तुरंत नौकरी दे दी।
चार दिन तक घर न लौटने पर बाप को चिंता हुई। जब लड़का अच्छे कपड़ों में घर लौटा, तो बाप हैरान रह गया। लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा—
“बापू, आप कहते थे संतों की बात मत सुनना… पर मैंने एक महात्मा की दो बातें सुन लीं और उसी पर चल पड़ा—देखिए, आज सच्चाई ने मुझे चोर से राजमहल का कर्मचारी बना दिया।”
तभी बूढ़े चोर को भी एहसास हुआ कि जिस ज्ञान को वह व्यर्थ समझता था, वही उसके बेटे की किस्मत बदलने वाला सिद्ध हुआ।
लड़के ने सिर झुकाकर कहा— “सोचिए बापू… अगर सिर्फ दो वचन ने मेरी राह बदल दी, तो यदि हम संतों और गुरुवरों की सारी शिक्षाएँ मान लें—तो जीवन कितना उज्ज्वल और सफल हो सकता है!”
यह सुनकर बूढ़ा चोर मौन हो गया। उसे जीवन में पहली बार लगा कि सच्चा धन चोरी नहीं, बल्कि सच्चे दिगंबर संतों की वाणी  हैं—जो मनुष्य के भाग्य को पलटने की शक्ति रखते हैं।
अतः उस बूढ़े चोर ने अंतर्मन से पश्चाताप किया और  राजमहल जाकर राजा के सामने अपनी सभी गलतियां स्वीकार कर ली।राजा ने अपने कर्मचारियों के निरीक्षण में उसे गौशाला में उसके योग्य कार्य पर उसे रख दिया।वह गौशाला में पशुओं की सेवा करते हुए जीवन धन्य करने लगा।

 *👨‍👨‍👦‍👦⏰🌞🔔✍️विशेष :- भव्य आत्माओं, सच्चे दिगंबर संतों की वाणी में वह शक्ति होती है, जो पत्थर दिल को भी मोम बना दे। यदि उनके उपदेशों का थोड़ा-सा भी पालन कर लिया जाए, तो जीवन की दिशा बदल सकती है, और सफलता स्वयं कदम चूम लेती है। अतः आप सभी सच्चे देव शास्त्र गुरु के बताए षट् आवश्यक कर्म प्रतिदिन करोगे तो एक समय ऐसा आयेगा कि स्वयं सिद्ध हो जाओगे।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 2 दिसंबर 2025

आज की हमारी विचारधारा

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 आज की हमारी विचारधारा ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 मार्गशीर्ष शुक्ल 14 , 03 दिसंबर बुधवार 2025 कलि काल के  18 वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री अरनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अरनाथ  भगवान जी का जन्म  कल्याणक महोत्सव है।*
*🔑 मार्गशीर्ष पूर्णिमा , 04 दिसंबर गुरुवार 2025 कलि काल के  तृतीय तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री संभवनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री संभवनाथ भगवान जी का  तप कल्याणक महोत्सव है।*

  < *🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28  दिसंबरको है। चतुर्दशी तिथि 03 व 18 दिसंबर  को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  दिसंबर माह में  04,05,06   दिसंबर को है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20,26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक 1व 24 से 25 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

👨‍👨‍👦‍👦आज की हमारी विचारधारा 🔔 

आइए आज हम इस कहानी के माध्यम से समझते हैं कि होता कुछ है और दिखाई कुछ और ही देता है। क्या यह विचारधारा हमारे लिए ठीक है?

*“धक्का” —* 
 *एक अनदेखा आईना* 

किसी व्यक्ति का असली स्वरूप तब सामने आता है, जब वह कठिन परिस्थितियों से गुजरता है। वह अपनी गलती को स्वीकार करता है या दूसरों को दोष देता है — यही उसके चरित्र का आईना होता है।
आप कितनी महंगी कार में चलते हैं, किस ब्रांड के कपड़े पहनते हैं या आपके पास कितनी आलीशान नौकरी और घर है — ये सब बाहरी दिखावे हैं। असली पहचान तो यह है कि आप दूसरों से कैसा व्यवहार करते हैं। सफलता, संबंध, सम्मान — सबकुछ इसी एक गुण से जुड़ा है: *व्यवहार* ।
कल्पना कीजिए, आप एक सुंदर, मजबूत और चमकदार थैला लिए सड़क पर चल रहे हैं। थैला बाहर से शानदार दिखता है, पर भीतर क्या है, यह कोई नहीं जानता।
तभी अचानक पीछे से कोई आपको धक्का देता है। आप लड़खड़ाते हैं, और थैला ज़मीन पर गिरकर खुल जाता है। उसके भीतर की हर चीज़ बाहर आ जाती है।
अब राह चलते लोग क्या देखेंगे?
- अगर थैले में किताबें थीं, तो उनके पन्ने उड़ने लगेंगे।
- अगर काँच था, तो वह टूटकर चुभेगा।
- अगर फूल थे, तो सुगंध फैल जाएगी।
- और अगर गंदगी थी, तो बदबू दूर तक जाएगी।
ध्यान दीजिए — लोगों को यह याद नहीं रहेगा कि धक्का किसने दिया, क्यों दिया। वे सिर्फ यही याद रखेंगे कि 
 *थैले से क्या निकला।* 
अब सोचिए — वो थैला *आप* हैं।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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जब जीवन आपको अचानक धक्का देता है — 
कोई धोखा, कोई असफलता, अपमान, दुख, या कोई मुश्किल घड़ी —
तब आपके भीतर जो है, वही बाहर आता है।
आप बाहर से चाहे जितने भी सभ्य, शिक्षित, या आकर्षक दिखें — धक्के के बाद आप क्या प्रतिक्रिया देते हैं, यही असली आप हैं।
• कोई क्रोध में फट पड़ता है।
• कोई चुपचाप रोता है।
• कोई दूसरों को दोष देता है।
• और कोई मुस्कुराकर सब सह लेता है।
जैसे संतरे को निचोड़ने पर सिर्फ संतरे का रस ही निकलेगा — सेब का नहीं। क्योंकि जो भीतर है, वही बाहर आता है।

एक वृद्ध संत के पास एक व्यक्ति आया और बोला, "गुरुजी, जब लोग मुझे अपमानित करते हैं, मैं आपा खो देता हूँ। मैं क्रोधित हो जाता हूँ।"
संत मुस्कराए और पास रखे एक प्याले से गरम चाय उठाकर उस पर छलक दी।
व्यक्ति चौंका, "यह क्या किया आपने? मेरे कपड़े गीले हो गए!"
संत बोले, "देखा? इस प्याले में चाय थी, तो वही बाहर आई। अगर इसमें पानी होता, तो वह निकलता।"
"जब तुम्हें धक्का लगता है और तुम क्रोधित होते हो, तो वह क्रोध तुम्हारे भीतर का ही हिस्सा है — बस जीवन ने उसे बाहर ला दिया।"
इसलिए, अपना परीक्षण कीजिये और अपने भीतर को रोज़ भरिए —
• अच्छे विचारों से
• करुणा से
• क्षमा और सहनशीलता से
• आत्मबल और सकारात्मकता से।
क्योंकि धक्के तो जीवन का हिस्सा हैं, पर उनसे निपटने की तैयारी — वो तो हमारे हाथ में है।
*🌞👨‍👨‍👦‍👦⏰🐎✍️विशेष:-भव्य आत्माओं,अंततः याद रखिए: जब जीवन आपको झकझोरता है, तब वही बिखरेगा जो आपके भीतर है। और वही बनती है आपकी असली पहचान। इसलिए अपने भीतर सज्जनता, विनम्रता, प्रेम और सच्चाई संजोइए — यही धक्का लगने पर बाहर आएगा, और यही लोग हमेशा याद रखेंगे।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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