मंगलवार, 25 फ़रवरी 2025
रविवार, 23 फ़रवरी 2025
ईमानदारी का फल
*🐎पंचकल्याणक महोत्सव सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 ईमानदारी का फल ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण ग्यारस , सोमवार , 24 फरवरी 2025 कलि काल के प्रथम तीर्थंकर सर्व सुखकारी संस्कार प्रदाता श्री आदिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री आदिनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण ग्यारस , सोमवार , 24 फरवरी 2025 कलि काल के 11 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी मार्ग प्रदाता श्री श्रेयांसनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री श्रेयांसनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण बारस , मंगलवार , 25 फरवरी 2025 कलि काल के 20 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी मार्ग प्रदाता श्री मुनिसुव्रत भगवान जी जिनकी आराधना से शनि की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से अनावश्यक अंतरंग व बहिरंग परिग्रह को समाप्त कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मुनिसुव्रत भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 24,25 व 26 तारीख को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨👨👦👦🔔👉 फरवरी माह में चतुर्दशी तिथि 27 फरवरी को है।🔔▶️ फरवरी माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 23 व 25 फरवरी को है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
👨👨👦👦अब हम ईमानदारी का फल कहानी के माध्यम से स्वयं का आकलन कर जीवन सार्थक कर सकते है।
▶️पुराने समय की बात है।एक गरीब आदमी अपने राज्य में राह चलते हुए एक कपड़े की पोटली पाता है। पोटली खोलने पर उसमें 50 सोने के सिक्के और एक चिट्ठी मिलती है। चिट्ठी में लिखा होता है:
"अगर यह पोटली किसी कारणवश खो जाती है और जिस भी व्यक्ति को मिले, वह इसे लौटा दे, तो उसे इनाम स्वरूप 10 सोने के सिक्के दिए जाएंगे।" चिट्ठी पर उस व्यापारी का नाम और पता भी लिखा था, जिसकी यह पोटली थी।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 9783831296 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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गरीब आदमी ईमानदार था। उसने तुरंत व्यापारी का पता लगाया और उसके घर पहुंच गया। व्यापारी, जो पहले ही अपने सिक्के खोने से परेशान था, पोटली पाकर बहुत खुश हुआ। लेकिन जैसे ही उसकी लालच जागी, वह चालाकी पर उतर आया।
पोटली गिनने के बाद व्यापारी बोला, "पोटली में 60 सिक्के थे। तुमने पहले ही 10 सिक्के निकाल लिए। खैर, मैं तो तुम्हें देने ही वाला था। अब तुम जा सकते हो।"
गरीब आदमी यह सुनकर हैरान रह गया। उसने व्यापारी को समझाने की कोशिश की कि उसने एक भी सिक्का नहीं लिया, लेकिन व्यापारी अपनी बात पर अड़ा रहा। चूंकि बात उसकी ईमानदारी पर भी आ गयी थी। मामला बढ़ते-बढ़ते राजा तक पहुंच गया।
राजा ने दोनों की बात सुनी। गरीब आदमी ने ईमानदारी से सब कुछ बताया। व्यापारी ने कहा, "महाराज! पोटली में 60 सिक्के थे, और इस आदमी ने पहले ही 10 निकाल लिए।"
राजा समझदार और न्यायप्रिय था। उसने तुरंत व्यापारी की लालच को भांप लिया और फैसला सुनाया:
"चूंकि व्यापारी कहता है कि उसकी पोटली में 60 सिक्के थे, तो यह पोटली उसकी नहीं हो सकती। यह पोटली किसी और की होगी, जिसमें 50 सिक्के थे। इसलिए यह पोटली उस गरीब आदमी के पास ही रहेगी, जब तक सही मालिक नहीं मिल जाता।"
यह सुनकर व्यापारी हक्का-बक्का रह गया। उसने राजा से कहा, "तो मेरे सिक्कों का क्या होगा?"
राजा ने मुस्कुराते हुए कहा, "जब कोई ईमानदार व्यक्ति तुम्हारी 60 सिक्कों वाली पोटली पा जाएगा, तो वह तुम्हें लौटा देगा।"
*👨👨👦👦🐎🔔⛳🪔विशेष: - भव्य आत्माओं, हमें हमेशा अपने संकल्प और वचन का पालन करना चाहिए। ईमानदारी और वचनबद्धता हमारे चरित्र की पहचान होती है। जो लोग अपने वादों से मुकरते हैं, वे समाज में अपना सम्मान खो देते हैं। दूसरी ओर, ईमानदारी हमें न केवल आत्मसंतोष देती है, बल्कि हमें दूसरों की नजरों में भी ऊंचा उठाती है। इन्हीं कारणों से हमारे मोक्ष मार्ग की शुरुआत होती है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2025
सच्चा अमीर कौन
*पंचकल्याणक महोत्सव व उपयोगी कहानी*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒सच्चा अमीर कौन? ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना🔔*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण 9 , शनिवार , 22 फरवरी 2025 कलि काल के 9 वें तीर्थंकर श्री सुविधिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से शुक्र की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से अंतरंग व बहिरंग संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री सुविधिनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 24,25 व 26 तारीख को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨👨👦👦🔔👉 फरवरी माह में चतुर्दशी तिथि 27 फरवरी को है।🔔▶️ फरवरी माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 23 व 25 फरवरी को है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*सच्चा अमीर कौन?*
एक गरीब आदमी की छोटी-सी झोपड़ी पर रात को मूसलाधार बारिश हो रही थी। वह और उसकी पत्नी भीतर सो रहे थे। आधी रात किसी ने द्वार पर दस्तक दी।
पति ने पत्नी से कहा, "उठो, दरवाजा खोलो।"
पत्नी बोली, "इस छोटी-सी झोपड़ी में जगह कहाँ है? अगर कोई शरण माँगेगा, तो तुम मना नहीं कर पाओगे!"
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 9783831296 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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पति मुस्कुराए, "हम दो लोग सो सकते हैं, तो तीन बैठ भी सकते हैं। बारिश में कोई मजबूर ही आया होगा, दरवाजा खोलो।"
पत्नी ने दरवाजा खोला। बाहर एक यात्री भीगता खड़ा था। वह अंदर आ गया, तीनों बैठकर बातें करने लगे।
थोड़ी देर बाद फिर दस्तक हुई।
पत्नी चिंतित हुई, "अब क्या करोगे? जगह कहाँ है?"
पति बोले, "बैठने की जगह नहीं तो खड़े हो जाएंगे, लेकिन दरवाजा बंद नहीं रहेगा।"
एक और अजनबी भीतर आ गया। अब चारों खड़े होकर बातें करने लगे। झोपड़ी छोटी थी, लेकिन दिल बड़ा!
तभी बाहर से एक कुत्ते की आवाज आई। वह दरवाजे से टकरा रहा था।
पत्नी बोली, "अब तुम पागल हो गए हो! यह तो कुत्ता है!"
पति हँसकर बोले, "हमने पहले भी इंसानों के लिए दरवाजा नहीं खोला था, अपने दिल के लिए खोला था। हमारे लिए इंसान और जानवर में क्या फर्क?"
पत्नी बोली, "अब खड़े होने की भी जगह नहीं बची!"
पति ने कहा, "हम अभी आराम से खड़े हैं, थोड़ा और सिमट जाएंगे। याद रखना, यह कोई अमीर का महल नहीं, गरीब की झोपड़ी है—यहाँ दिल में हमेशा जगह होती है!"
गरीब कभी कंजूस नहीं होता। उसके पास बचाने को कुछ नहीं, लेकिन देने को बहुत कुछ होता है। अमीरी से मोह और लोभ बढ़ता है, मगर इंसानियत दिल की अमीरी से बनती है।
जरूरतमंद को अपनी क्षमता अनुसार जरूर दें। दिल बड़ा रखें, क्योंकि असली जगह दिलों में होती है।
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
रविवार, 16 फ़रवरी 2025
बेटा हो तो ऐसा
*🤷पंचकल्याणक महोत्सव की सूचना व सभी के लिए उपयोगी कहानी 🐎*
*🎪 सिध्दम नमः 🎪*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 बेटा हो तो ऐसा ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण 6 , मंगलवार , 18 फरवरी 2025 कलिकाल के सप्तम तीर्थंकर उपसर्ग विजेता श्री सुपार्श्वनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री सुपार्श्वनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण सप्तमी , बुधवार , 19 फरवरी 2025 कलि काल के सप्तम तीर्थंकर उपसर्ग विजेता श्री सुपार्श्वनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री सुपार्श्वनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण सप्तमी , बुधवार , 19 फरवरी 2025 कलि काल के अषु तीर्थंकर विजेता श्री चन्द्रप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से चंद्र की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री चन्द्रप्रभ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 15 , 16,19,22,24,25 व 26 तारीख को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨👨👦👦🔔👉 फरवरी माह में अष्टमी तिथि 21 को है। चतुर्दशी तिथि 27 फरवरी को है।🔔▶️ फरवरी माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 15, 18 23 व 25 फरवरी को है।*
*🔔 🌞गृह प्रवेश मुहूर्त 07, 08,14,15 व 17 फरवरी तक है*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*🤷बेटा हो तो ऐसा🐎*
कहा जाता है कि नाराजगी और लड़ाई-झगड़ों की वजह से रिश्तों में प्यार बरकरार रहता है. लेकिन कई बार ये लड़ाई-झगड़े काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं और नौबत तलाक तक पहुंच जाती है. बीते कुछ सालों में हमारे देश में तलाक के मामले काफी ज्यादा बढ़ने लगे हैं. हर किसी की तलाक की अपनी वजहें हो सकती हैं और उनमें से मुख्य कारण इंसान का अहं है.... लेकिन कुछ प्रयासों से समस्या हल
*🔔बिखरते रिश्तों का पुनर्मिलन संभव है। आइए इस कहानी के दर्पण में स्वयं के आचरण की तस्वीर देखें।*
विभा और वैभव के विवाह को मुश्किल से पाँच वर्ष ही हुए थे कि उनके बीच वैचारिक मतभेद इतना बढ़ गया कि नौबत तलाक तक आ पहुँची। उन्होंने इस समस्या का समाधान विवाह-विच्छेद में ढूँढा।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 9783831296 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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उनका चार वर्षीय बेटा अनिरुद्ध, इन घटनाओं से पूरी तरह अनभिज्ञ नहीं था। तलाक के बाद वह कभी माँ के साथ रहता, तो कभी पिता के साथ।
समय बीतने के साथ, अनिरुद्ध का बालमन माता-पिता दोनों का साथ पाने के लिए तरसने लगा। कभी वह विभा से पूछता,
“हम पापा के साथ क्यों नहीं रहते? जैसे सबके मम्मी-पापा साथ रहते हैं, वैसे ही मेरे पापा हमारे साथ क्यों नहीं रहते?”
तो कभी वह वैभव से सवाल करता,
“पापा, आप खाना क्यों बनाते हो? सबके घर पर मम्मी खाना बनाती हैं, हमारे घर पर क्यों नहीं?”
अनिरुद्ध के इन सवालों पर दोनों निःशब्द रह जाते। उनके बीच की खाई इतनी गहरी थी कि उसे पाटना नामुमकिन लगता।
अनिरुद्ध का जन्मदिन निकट था। तलाक के बाद वह कभी माँ तो कभी पिता के साथ अपना जन्मदिन मनाता। इस बार विभा उसे मॉल लेकर गई और बोली
“अपने जन्मदिन के लिए कोई तोहफा पसंद कर लो।”
लेकिन महँगे उपहार देखकर भी अनिरुद्ध के चेहरे पर मुस्कान न आई। विभा खीझकर बोली,
“आखिर तुम्हें क्या चाहिए?”
अनिरुद्ध ने धीरे से कहा, “पापा।”
यह सुनकर विभा रात भर सो न सकी। वह जानती थी कि अनिरुद्ध की यह चाह पूरी करना आसान नहीं, क्योंकि उसके अहंकार ने ही उसे इस स्थिति में ला खड़ा किया था।
तलाक के लिए विभा की ज़िद ही जिम्मेदार थी। वैभव अपने माता-पिता के साथ रहना चाहता था, लेकिन विभा को उनके साथ रहना मंजूर नहीं था। उसे अपने सपनों को उड़ान देने का जुनून था। हॉस्टल में पली-बढ़ी विभा छोटे शहर और सीमित जीवन में घुटन महसूस करती थी। उसने वैभव को स्पष्ट कह दिया,
“या तो माता-पिता के साथ रहो, या मेरे साथ।”
परिणामस्वरूप उनका तलाक हो गया।
अब, अकेलेपन में विभा को अपने फैसले पर पछतावा होने लगा था। वह महसूस कर रही थी कि यदि उसने अपने अहम को दरकिनार कर दिया होता, तो आज उसका एक सुंदर परिवार होता।
अगले दिन, विभा ने साहस जुटाकर एक बड़ा निर्णय लिया। वह अनिरुद्ध को लेकर ससुराल पहुँची। उसने वैभव की माँ के चरण स्पर्श किए और पिताजी को नमन करते हुए कहा,
“माँ, मुझे माफ कर दो। मैं आप सबके साथ रहना चाहती हूँ। मैंने जो किया, उसकी भरपाई तो नहीं हो सकती, लेकिन अनिरुद्ध के लिए हम सबका साथ बहुत ज़रूरी है।”
अनिरुद्ध खुशी से दादा-दादी से लिपट गया। वैभव जब ऑफिस से लौटा, तो विभा को देखकर हैरान रह गया। वह चुपचाप अपने कमरे की ओर बढ़ा, लेकिन तभी विभा ने उसका हाथ थाम लिया और कहा,
“वैभव, क्या तुम मेरे साथ फिर से जीवन के रास्तों पर चलना स्वीकार करोगे? मैं माँ-बाबूजी के साथ इसी घर में रहूँगी। मुझसे और अकेले नहीं जिया जाता। तुमसे बिछड़कर ही समझा कि तुम्हारी अहमियत क्या है।”
वैभव ने भी सब भूलाकर विभा को सीने से लगा लिया। उनके आँसुओं ने सभी गिले-शिकवे मिटा दिए।
अनिरुद्ध के जन्मदिन की तैयारियाँ शुरू हो गईं। इस बार वह सबसे ज्यादा खुश था। उसे उसका सबसे पसंदीदा उपहार मिल गया था—माँ, पापा और दादा-दादी का साथ। उसके जीवन में खुशियों की नई बहार आ गई थी।
*🔔⏰🎪✍️विशेष:- भव्य आत्माओं,जीवन में रिश्तों की अहमियत को समय रहते समझना चाहिए। अहंकार और जिद से रिश्ते टूट सकते हैं, लेकिन सच्चे प्रेम और समर्पण से उन्हें फिर से जोड़ा जा सकता है। जोड़ने या जुड़ने के लिए सच्चे संस्कारों का आचरण में होना आवश्यक है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2025
सफलता का रहस्य
*पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व जन उपयोगी कहानी*
*👨👨👦👦सफलता का रहस्य🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण 4 , रविवार , 16 फरवरी 2025 कलिकाल के षष्ठम तीर्थंकर श्री पद्मप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से सूर्य की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री पद्मप्रभ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 15 , 16,19,22,24,25 व 26 तारीख को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨👨👦👦🔔👉 फरवरी माह में अष्टमी तिथि 21 को है। चतुर्दशी तिथि 27 फरवरी को है।🔔▶️ फरवरी माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 15, 18 23 व 25 फरवरी को है।*
*🔔 🌞गृह प्रवेश मुहूर्त 15 व 17 फरवरी तक है*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*👨👨👦👦सफलता का रहस्य🌞*
*धैर्य और सकारात्मकता की सीख*
एक लड़का घर-परिवार, धन और पढ़ाई संबंधी समस्याओं से बहुत परेशान था। घर में रोज विवाद होता ।उम्र ज्यादा नहीं थी, लेकिन रोज़-रोज़ के विवादों ने उसे अंदर से तोड़ दिया था। निराशा में डूबा हुआ, उसे लगने लगा कि उसकी ज़िंदगी में कोई रास्ता नहीं बचा है।
समाधान की तलाश में परेशानी में वह एक घने जंगल में पहुंच गया। जंगल में दूर दूर तक भटकने के बावजूद उसके मन को शांति नहीं मिली। चारों ओर अंधेरा था, और जंगली जानवरों का खतरा भी था। तभी उसकी नजर एक छोटी-सी झोपड़ी पर पड़ी।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 9783831296 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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उसके मन में सवाल उठा—"इस सुनसान जंगल में भी ऐसे कौन रह सकता है?" जिज्ञासा से भरा, वह झोपड़ी की ओर बढ़ने लगा।
झोपड़ी के पास पहुँचते ही उसने एक संत को ध्यान की मुद्रा में बैठे हुए देखा। संत के चेहरे पर शांति और प्रसन्नता झलक रही थी। लड़का उनके पास जाकर बैठ गया।
संत ने स्नेहपूर्वक उसका परिचय पूछा। लड़के ने भारी मन से उत्तर दिया, "मैं जीवन में बहुत परेशान हूं और समझ नहीं आ रहा कि क्या करूं। इसीलिए समाधान में
यहाँ आया हूँ।"
संत तो संत थे ज्ञानी पुरुष, लड़के की पीड़ा तुरंत समझ गए। उन्होंने सहानुभूति से कहा, " बेटा, समस्याएं तो जीवन का हिस्सा हैं। समय एक जैसा नहीं रहता, निराश नहीं होना चाहिए।"
इसके बाद वे लड़के से बोले तुम्हें में एक कहानी सुनाता हूं ध्यान से सुनो और बताओं कि कहानी का सार क्या है? लड़के ने हाँ मै सिर हिलाया!
संत नें कहानी सुनायी ।
"एक छोटे बच्चे ने अपने घर में बांस और कैक्टस के दो पौधे लगाए।"
बच्चा हर दिन दोनों पौधों को एक समान पानी देता और उनकी देखभाल करता। कुछ समय बाद कैक्टस का पौधा तो तेजी से बढ़ने लगा, लेकिन बांस का पौधा जरा भी नहीं बढ़ा।
समय बीतता गया, पर बांस के पौधे में कोई बदलाव नजर नहीं आया। लोलन फिर भी बच्चा निराश नहीं हुआ, उसने लगातार मेहनत जारी रखी।
फिर एक दिन अचानक बांस का पौधा तेजी से बढ़ने लगा और कुछ ही समय में कैक्टस से भी ऊंचा हो गया।
संत ने लड़के से कहा, बेटा जानते हो इसका राज.....
"बांस का पौधा पहले तो अपनी जड़ें मजबूत कर रहा था, इसलिए उसे बढ़ने में समय लगा। लेकिन कभी भी निराश नहीं हुआ, उसने प्रयास जारी रखे।"
"हमारे जीवन में भी दो बातें जरूरी हैं—
1. *धैर्य और सकारात्मकता* बनाए रखना। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, आशा नहीं छोड़नी चाहिए।
2 सबसे. पहले अपनी *जड़ें मजबूत* करें। जब हमारी नींव मजबूत होगी, तो जीवन में सफलता और संतोष भी तेजी से मिलेगा।"
संत की बातें सुनकर लड़के के चेहरे पर संतोष के भाव आ गये उसे बहुत बड़ा समाधान मिल चुका था। उसे अब एहसास हो गया था कि मुश्किलें स्थायी नहीं होतीं और धैर्य से काम लें तो जीवन बदल सकता है।
उसने नई सोच के साथ जीवन में आगे बढ़ने का निश्चय किया और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अपने घर लौट गया।
*👨👨👦👦🔔🌞✍️विशेष :- भव्य आत्माओं, आज बच्चे से लेकर हर उम्र के लोग सभी सफलता चाहते है।उस कार्य के लिए हमें क्या क्या तैयारी करनी है बस इतना भूल जाते है। उनकी उस कार्य की नींव मजबूत नहीं होती इसलिए लोगों का समय और पैसा दोनों ही चला जाता है। अतः सभी योग्य मार्गदर्शक के निर्देशन में कार्य प्रारंभ करें। जीवन में सफलता प्राप्त होगी।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
शनिवार, 8 फ़रवरी 2025
मेरी आसक्ति व उसका परिणाम
*🔔पंचकल्याणक सूचना व कहानी ⏬*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 मेरी आसक्ति व उसका परिणाम ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 माघ शुक्ल 12 , रविवार , 09 फरवरी 2025 कलिकाल के चतुर्थ तीर्थंकर श्री अभिनंदन भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अभिनंदन भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 माघ शुक्ल 13 , सोमवार , 10 फरवरी 2025 कलिकाल के 15 वें तीर्थंकर श्री धर्मनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की यह महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री धर्मनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 09,10 , 16,18,19,22,24 ,25 व 27 तारीख को कल्याणक महोत्सव है। 🔔षोडश कारण व्रत,14 जनवरी से 13 फरवरी तक*
*▶️दश लक्षण व्रत 2 से 11 फरवरी तक, रत्नत्रय व्रत 10 से 12 फरवरी*
*👨👨👦👦🔔👉 फरवरी माह में अष्टमी तिथि 05 व 21 को है। चतुर्दशी तिथि 11 व 27 फरवरी को है।🔔▶️ फरवरी माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 02,03,12,14,15, 18 23 व 25 फरवरी को है।*
*🔔 🌞गृह प्रवेश मुहूर्त 07, 08,14,15 व 17 फरवरी तक है*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*मेरी आसक्ति और उसका परिणाम*
जिसे हम सर्वाधिक प्रेम कर है। जिससे अथाह लगाव और मोह होता है। जिससे स्नेह के तार जुड़े होते है, उसे खोने पर ही हमें सबसे अधिक दुःख होता है। हम टूट कर बिखर जाते है। ऐसा लगता है जीवन मे सिर्फ निराशा और अंधकार ही व्याप्त हों गया
गीता में कृष्ण जी ने कहा है - "कर्म करते रहो, लेकिन आसक्त मत होओ, बंधन में मत पड़ो। कितनी भी प्यारी वस्तु हों या रिश्ता, चाहे उसके प्रति कितना भी मोह क्यों न हों, उसे खोने पर चाहे कितना भी दुःख क्यों न हों?,उसे त्यागने की शक्ति मन मे विकसित करों।"
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 9783831296 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*मेरी आसक्ति और उसका परिणाम*
पुराणों में एक कथा है, जिसमें एक बहुत ही पहुॅचे हुये संन्यासी का उल्लेख है। वह जंगल में एकांत में रहकर ईश्वर प्राप्ति हेतु तपस्या करता था। एक दिन, कोई एक भक्त व्यापारी उनकी कुटिया में ठहरा और उनके सेवा-भाव से प्रसन्न होकर जाते समय उन्हें एक काफी महंगा, सुंदर और कोमल कम्बल भेंट में दे गया।
संन्यासी को वह कम्बल अत्यंत प्रिय हो गया। वह उसे बार-बार निहारता और छूता रहता। धीरे-धीरे उनका मन उस कम्बल में इतना रम गया कि उसकी चिंता उन्हें सताने लगी। कहीं यह खराब न हो जाए, गंदा न हो जाए, या कोई इसे चुरा न ले—यह विचार हर समय उनके मन में बना रहता।
समय बीतने के साथ, उस कम्बल के प्रति उनका लगाव इतना बढ़ गया कि उनका ध्यान ईश्वर से हटकर केवल कम्बल पर केंद्रित हो गया। जिस प्रेम और समर्पण से वह पहले परमात्मा का स्मरण करते थे, अब वह स्थान कम्बल ने ले लिया।
कथा में आगे का वर्णन आता है आखिरकार, जब संन्यासी के जीवन का अंत आया, तो उनके मन में आखिरी विचार भी उसी कम्बल का था। परिणामस्वरूप, अगले जन्म में वह पतंगा (कपड़े का कीड़ा) बनकर जन्मे। जब तक कीड़ों द्वारा खाकर वह कम्बल पूर्णतः नष्ट नहीं हुआ, तब तक वह पतंगे के रूप में सौ जन्मों तक पुनः जन्म लेते रहे।
*👨👨👦👦⏰🐎🙏🌞विशेष:-भव्य आत्माओं* *संसारिक वस्तुओं में आसक्ति मनुष्य को उसके लक्ष्य से भटका सकती है। ईश्वर ने संसार की वस्तुओं का निर्माण हमारी सुविधा और आनंद के लिए किया है, परंतु उनका अत्यधिक लगाव और आसक्ति हमें आत्मिक विकास के मार्ग से दूर कर देती है।इसलिए, हमें अपने जीवन में स्थायी सुख और शांति के लिए अपनी प्राथमिकताओं को समझना चाहिए और परमात्मा को सर्वोच्च स्थान देना चाहिए। बिना षट् आवश्यक कार्यों के हम सभी का जीवन निरस बना हुआ है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
गुरुवार, 6 फ़रवरी 2025
पिता का कर्तव्य
*पंच कल्याणक महोत्सव की पूर्व सूचना व आपके लिए उपयोगी कहानी*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 पिता का कर्तव्य ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 माघ शुक्ल 10 , शुक्रवार , 07 फरवरी 2025 कलिकाल के द्वितीय तीर्थंकर श्री अजितनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अजितनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 09,10 , 16,18,19,22,24 ,25 व 27 तारीख को कल्याणक महोत्सव है। 🔔षोडश कारण व्रत,14 जनवरी से 13 फरवरी तक*
*▶️दश लक्षण व्रत 2 से 11 फरवरी तक, रत्नत्रय व्रत 10 से 12 फरवरी*
*👨👨👦👦🔔👉 फरवरी माह में अष्टमी तिथि 21 को है। चतुर्दशी तिथि 11 व 27 फरवरी को है।🔔▶️ फरवरी माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 02,03,12,14,15, 18 23 व 25 फरवरी को है।*
*🔔 🌞गृह प्रवेश मुहूर्त 07, 08,14,15 व 17 फरवरी तक है*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*पिता का कर्तव्य*
गांव में एक लड़का था, जो दिनभर आवारा घूमता रहता था। कोई काम नहीं करता था, तो एक दिन पिता का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कठोर स्वर में कहा, "निकल जा मेरे घर से, और तब तक वापस मत आना जब तक कामयाब न हो जाओ।"
जवानी का जोश था, पिता की बात का बहुत बुरा लगा। बिना कुछ सोचे-समझे वह घर छोड़कर निकल गया। घर से जाने के बाद कुछ दिनों तक तो उसे समझ ही नही आया क्या करे, पेट कैसे भरे । लेकिन फिर उसने दिन-रात मेहनत की, संघर्ष किया, सपने देखे, और उन्हें पूरा करने में जुट गया। आखिरकार, दो साल बाद वह अपनी मेहनत से कामयाब होकर घर लौटा।
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घर में कदम रखते ही मां उसे देखकर दौड़ी आईं और गले लगाकर रोने लगीं। बेटे ने मां से कुछ नहीं कहा, बस पिता को अपनी कामयाबी दिखाने के लिए उत्साहित होकर उनके कमरे की ओर भागा। लेकिन जैसे ही उसने पिता के कमरे में कदम रखा, उसकी सारी खुशी पलभर में टूट गई। दीवार पर पिता की तस्वीर टंगी थी, और तस्वीर पर फूलों की माला।
पिता अब इस दुनिया में नहीं थे।
मां ने एक चिट्ठी बेटे के हाथ में दी और कहा, "तेरे पापा ये चिट्ठी देकर गए थे। बोले थे कि जब तू घर लौटे तो इसे दे देना।"
चिट्ठी खोलते ही बेटे के हाथ कांपने लगे। उसमें लिखा था:
*"बेटा, जब तक तू यह चिट्ठी पढ़ेगा, मैं शायद इस दुनिया में न रहूं। मुझे कैंसर था, और मैं जानता था कि मेरी जिंदगी के दिन गिने-चुने हैं। मैंने तुझे कठोर शब्दों में घर से जाने को कहा क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि मेरी मौत के बाद तू कमजोर पड़े। मैं चाहता था कि तू खुद पर विश्वास करे, मेहनत करे, और अपने पैरों पर खड़ा हो।
तुझे घर से दूर भेजना मेरे लिए आसान नहीं था, लेकिन कहीं न कहीं मैं यह जानता था कि मेरी कठोरता तुझे एक मजबूत इंसान जरूर बनाएगी। बेटा, हमेशा अपनी मां का ख्याल रखना।*"
चिट्ठी पढ़कर बेटा फूट-फूटकर रो पड़ा। उसे अब एहसास हुआ कि पिता की कठोरता के पीछे उनका असली कर्तव्य छिपा था।
भव्य आत्माओं, पिता सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक पूरा संसार हैं। मां जहां अपनी ममता से बेटे को सहारा देती है, वहीं पिता भविष्य के लिए नींव तैयार करते हैं। उनकी कठोरता में भी उनके अपार प्यार और चिंताओं का वास होता है। हमें उनके शब्दों पर गुस्सा करने से पहले उनके इरादों को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
पिता वह छत हैं, जो बाहर से कठोर दिखती है, लेकिन उसी कठोरता के कारण घर के भीतर सब सुरक्षित रहते हैं। उनका हर फैसला हमारे भविष्य को संवारने के लिए होता है। उनकी बातों को हमेशा सम्मान और प्रेम से अपनाएं।
*🔔👨👨👦👦🐎⛳⏰यह कहानी के माध्यम से बताया गया है कि आज वर्तमान में माता पिता अपने बच्चों को उनके कर्तव्यों की शिक्षा नहीं दे रहे है।इस कारण से संतान के आचरण में संस्कार नहीं होने से वह धर्म विरुद्ध आचरण कर रहे है। अतः आप सभी अपनी संतानों को कुछ दो या ना दो बस अपने कुल परम्परा के अनुसार संस्कारों से भर दो।बस इतना करने मात्र से ही इस कलयुग में भी सभी को सतयुग का सुख प्राप्त हो जाएगा।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
शनिवार, 1 फ़रवरी 2025
संगति का प्रभाव
*🔔पंच कल्याणक महोत्सव सूचना व कहानी🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 संगति का प्रभाव ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 माघ शुक्ल 6 , सोमवार , 03 फरवरी 2025 कलिकाल के 13 वें तीर्थंकर श्री विमलनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री विमलनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,06,07, 15, 16,19,22,24,25 व 26 तारीख को कल्याणक महोत्सव है। 🔔षोडश कारण व्रत,14 जनवरी से 13 फरवरी तक*
*▶️दश लक्षण व्रत 2 से 11 फरवरी तक, रत्नत्रय व्रत 10 से 12 फरवरी 🔔बंसत पंचमी 2 फरवरी को है।*
*👨👨👦👦🔔👉 फरवरी माह में अष्टमी तिथि 05 व 21 को है। चतुर्दशी तिथि 11 व 27 फरवरी को है।🔔▶️ फरवरी माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 02,03,12,14,15, 18 23 व 25 फरवरी को है।*
*🔔 🌞गृह प्रवेश मुहूर्त 07, 08,14,15 व 17 फरवरी तक है*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*संगति का प्रभाव*
किसी ने सच ही कहा है, *"अवसर और सूर्योदय में एक ही समानता है—देर करने वाले हमेशा इन्हें खो देते हैं।"*
यह कहानी मनीष की है, जो एक मिडल क्लास परिवार का होनहार लड़का था। वह बारहवीं तक हर कक्षा में टॉप करता आ रहा था। उसके माता-पिता को उस पर गर्व था। उन्होंने सपने देखे थे कि मनीष बड़ा होकर उनकी जिंदगी बदल देगा और परिवार का नाम रोशन करेगा।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
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लेकिन जैसे ही मनीष ने कॉलेज में कदम रखा, सब कुछ बदल गया।
कॉलेज में उसकी संगति गलत दोस्तों से हो गई, जिन्होंने उसे बुरी आदतों की ओर धकेल दिया। देर रात तक पार्टियां, झूठ बोलकर माता-पिता से पैसे लेना, और पढ़ाई से दूरी बनाना उसकी दिनचर्या बन गई। जो लड़का एक समय पढ़ाई में डूबा रहता था, अब वह गैर-जिम्मेदार और बेपरवाह हो गया। जब घरवालों ने उसे समझाने की कोशिश की, तो उसने गुस्से में कहा, "मुझे ज्ञान मत दीजिए, मुझे सब पता है।"
समय बीता और रिजल्ट का दिन आया। मनीष, जिसने हमेशा टॉप किया था, इस बार एक विषय में फेल हो गया। यह नतीजा उसके लिए किसी झटके से कम नहीं था। उसकी ईगो बुरी तरह चोटिल हो गई। हार बर्दाश्त न कर पाने के कारण उसने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। दोस्तों से बात करना बंद कर दिया। परिवार से दूरी बना ली। बाहर निकलना और किसी से मिलना-जुलना उसने लगभग छोड़ दिया। धीरे-धीरे वह डिप्रेशन का शिकार हो गया।
मनीष के स्कूल के प्रिंसिपल, जिन्हें वह बेहद मानता था, को यह खबर मिली। उन्होंने मनीष को अपने घर डिनर पर बुलाया। मनीष उनके इनविटेशन को ठुकरा नहीं सका और उनके घर पहुंच गया।
शाम का वक्त था। ठंड का मौसम था। प्रिंसिपल साहब गार्डन में अंगीठी ताप रहे थे। मनीष भी उनके पास जाकर बैठ गया। कुछ देर तक दोनों चुपचाप रहे। फिर, प्रिंसिपल ने बिना कुछ कहे अंगीठी से जलता हुआ कोयले का एक टुकड़ा निकाला और उसे मिट्टी पर फेंक दिया। वह टुकड़ा थोड़ी देर तक धधकता रहा और फिर धीरे-धीरे बुझ गया।
मनीष ने हैरानी से पूछा, "सर, आपने जलते हुए कोयले को क्यों बर्बाद कर दिया?"
प्रिंसिपल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "कोयले का टुकड़ा बर्बाद नहीं हुआ है। देखो, मैं इसे वापस अंगीठी में डालता हूं।" उन्होंने कोयले को उठाया, उसकी मिट्टी साफ की, और उसे फिर से अंगीठी में डाल दिया। कुछ ही देर में वह कोयला फिर से जलने लगा।
इसके बाद प्रिंसिपल ने मनीष की ओर देखा और पूछा, "समझे बेटा?"
मनीष ने सिर हिलाकर कहा, "नहीं, सर।"
तब प्रिंसिपल ने बड़े प्यार से समझाया, "यह कोयले का टुकड़ा तुम्हारी तरह है। जब तक तुम सही संगति और माहौल में थे, तुम जलते रहे, दूसरों को रोशनी और गर्मी देते रहे। लेकिन जब तुम गलत संगति में गए, तो मिट्टी में दबकर बुझ गए। अगर तुम वापस सही राह और संगति में लौट आओ, तो फिर से जल सकते हो और रोशनी फैला सकते हो। तुम्हें बस अपनी संगति और आदतें बदलनी होंगी।"
यह सुनकर मनीष को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने उसी पल तय कर लिया कि वह अपनी पुरानी आदतें छोड़ेगा। उसने अपने बुरे दोस्तों से दूरी बनाई, अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू किया, और धीरे-धीरे अपनी जिंदगी को एक नई दिशा दी।
*सीख:* डिप्रेशन और असफलता किसी की भी जिंदगी में आ सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि सब कुछ खत्म हो गया। सही मार्गदर्शन, मेहनत, और अपनों का प्यार किसी भी इंसान को अंधेरे से बाहर निकाल सकता है। *असफलता तो बस एक पड़ाव है, पर कोशिशें हमें मंजिल तक जरूर पहुंचाती हैं।*
*⏰👨👨👦👦🎪🌞✍️विशेष:-भव्य आत्माओं,अपनी मेहनत और अपनों के साथ कर दिखाओ कुछ ऐसा, कि दुनिया करना चाहे आपके जैसा।"*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
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