*पंच कल्याणक महोत्सव की पूर्व सूचना व आपके लिए उपयोगी कहानी*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 पिता का कर्तव्य ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 माघ शुक्ल 10 , शुक्रवार , 07 फरवरी 2025 कलिकाल के द्वितीय तीर्थंकर श्री अजितनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अजितनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 09,10 , 16,18,19,22,24 ,25 व 27 तारीख को कल्याणक महोत्सव है। 🔔षोडश कारण व्रत,14 जनवरी से 13 फरवरी तक*
*▶️दश लक्षण व्रत 2 से 11 फरवरी तक, रत्नत्रय व्रत 10 से 12 फरवरी*
*👨👨👦👦🔔👉 फरवरी माह में अष्टमी तिथि 21 को है। चतुर्दशी तिथि 11 व 27 फरवरी को है।🔔▶️ फरवरी माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 02,03,12,14,15, 18 23 व 25 फरवरी को है।*
*🔔 🌞गृह प्रवेश मुहूर्त 07, 08,14,15 व 17 फरवरी तक है*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*पिता का कर्तव्य*
गांव में एक लड़का था, जो दिनभर आवारा घूमता रहता था। कोई काम नहीं करता था, तो एक दिन पिता का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कठोर स्वर में कहा, "निकल जा मेरे घर से, और तब तक वापस मत आना जब तक कामयाब न हो जाओ।"
जवानी का जोश था, पिता की बात का बहुत बुरा लगा। बिना कुछ सोचे-समझे वह घर छोड़कर निकल गया। घर से जाने के बाद कुछ दिनों तक तो उसे समझ ही नही आया क्या करे, पेट कैसे भरे । लेकिन फिर उसने दिन-रात मेहनत की, संघर्ष किया, सपने देखे, और उन्हें पूरा करने में जुट गया। आखिरकार, दो साल बाद वह अपनी मेहनत से कामयाब होकर घर लौटा।
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घर में कदम रखते ही मां उसे देखकर दौड़ी आईं और गले लगाकर रोने लगीं। बेटे ने मां से कुछ नहीं कहा, बस पिता को अपनी कामयाबी दिखाने के लिए उत्साहित होकर उनके कमरे की ओर भागा। लेकिन जैसे ही उसने पिता के कमरे में कदम रखा, उसकी सारी खुशी पलभर में टूट गई। दीवार पर पिता की तस्वीर टंगी थी, और तस्वीर पर फूलों की माला।
पिता अब इस दुनिया में नहीं थे।
मां ने एक चिट्ठी बेटे के हाथ में दी और कहा, "तेरे पापा ये चिट्ठी देकर गए थे। बोले थे कि जब तू घर लौटे तो इसे दे देना।"
चिट्ठी खोलते ही बेटे के हाथ कांपने लगे। उसमें लिखा था:
*"बेटा, जब तक तू यह चिट्ठी पढ़ेगा, मैं शायद इस दुनिया में न रहूं। मुझे कैंसर था, और मैं जानता था कि मेरी जिंदगी के दिन गिने-चुने हैं। मैंने तुझे कठोर शब्दों में घर से जाने को कहा क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि मेरी मौत के बाद तू कमजोर पड़े। मैं चाहता था कि तू खुद पर विश्वास करे, मेहनत करे, और अपने पैरों पर खड़ा हो।
तुझे घर से दूर भेजना मेरे लिए आसान नहीं था, लेकिन कहीं न कहीं मैं यह जानता था कि मेरी कठोरता तुझे एक मजबूत इंसान जरूर बनाएगी। बेटा, हमेशा अपनी मां का ख्याल रखना।*"
चिट्ठी पढ़कर बेटा फूट-फूटकर रो पड़ा। उसे अब एहसास हुआ कि पिता की कठोरता के पीछे उनका असली कर्तव्य छिपा था।
भव्य आत्माओं, पिता सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक पूरा संसार हैं। मां जहां अपनी ममता से बेटे को सहारा देती है, वहीं पिता भविष्य के लिए नींव तैयार करते हैं। उनकी कठोरता में भी उनके अपार प्यार और चिंताओं का वास होता है। हमें उनके शब्दों पर गुस्सा करने से पहले उनके इरादों को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
पिता वह छत हैं, जो बाहर से कठोर दिखती है, लेकिन उसी कठोरता के कारण घर के भीतर सब सुरक्षित रहते हैं। उनका हर फैसला हमारे भविष्य को संवारने के लिए होता है। उनकी बातों को हमेशा सम्मान और प्रेम से अपनाएं।
*🔔👨👨👦👦🐎⛳⏰यह कहानी के माध्यम से बताया गया है कि आज वर्तमान में माता पिता अपने बच्चों को उनके कर्तव्यों की शिक्षा नहीं दे रहे है।इस कारण से संतान के आचरण में संस्कार नहीं होने से वह धर्म विरुद्ध आचरण कर रहे है। अतः आप सभी अपनी संतानों को कुछ दो या ना दो बस अपने कुल परम्परा के अनुसार संस्कारों से भर दो।बस इतना करने मात्र से ही इस कलयुग में भी सभी को सतयुग का सुख प्राप्त हो जाएगा।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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