*🤷पंचकल्याणक महोत्सव की सूचना व सभी के लिए उपयोगी कहानी 🐎*
*🎪 सिध्दम नमः 🎪*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 बेटा हो तो ऐसा ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण 6 , मंगलवार , 18 फरवरी 2025 कलिकाल के सप्तम तीर्थंकर उपसर्ग विजेता श्री सुपार्श्वनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री सुपार्श्वनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण सप्तमी , बुधवार , 19 फरवरी 2025 कलि काल के सप्तम तीर्थंकर उपसर्ग विजेता श्री सुपार्श्वनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री सुपार्श्वनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण सप्तमी , बुधवार , 19 फरवरी 2025 कलि काल के अषु तीर्थंकर विजेता श्री चन्द्रप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से चंद्र की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री चन्द्रप्रभ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 15 , 16,19,22,24,25 व 26 तारीख को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨👨👦👦🔔👉 फरवरी माह में अष्टमी तिथि 21 को है। चतुर्दशी तिथि 27 फरवरी को है।🔔▶️ फरवरी माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 15, 18 23 व 25 फरवरी को है।*
*🔔 🌞गृह प्रवेश मुहूर्त 07, 08,14,15 व 17 फरवरी तक है*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*🤷बेटा हो तो ऐसा🐎*
कहा जाता है कि नाराजगी और लड़ाई-झगड़ों की वजह से रिश्तों में प्यार बरकरार रहता है. लेकिन कई बार ये लड़ाई-झगड़े काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं और नौबत तलाक तक पहुंच जाती है. बीते कुछ सालों में हमारे देश में तलाक के मामले काफी ज्यादा बढ़ने लगे हैं. हर किसी की तलाक की अपनी वजहें हो सकती हैं और उनमें से मुख्य कारण इंसान का अहं है.... लेकिन कुछ प्रयासों से समस्या हल
*🔔बिखरते रिश्तों का पुनर्मिलन संभव है। आइए इस कहानी के दर्पण में स्वयं के आचरण की तस्वीर देखें।*
विभा और वैभव के विवाह को मुश्किल से पाँच वर्ष ही हुए थे कि उनके बीच वैचारिक मतभेद इतना बढ़ गया कि नौबत तलाक तक आ पहुँची। उन्होंने इस समस्या का समाधान विवाह-विच्छेद में ढूँढा।
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उनका चार वर्षीय बेटा अनिरुद्ध, इन घटनाओं से पूरी तरह अनभिज्ञ नहीं था। तलाक के बाद वह कभी माँ के साथ रहता, तो कभी पिता के साथ।
समय बीतने के साथ, अनिरुद्ध का बालमन माता-पिता दोनों का साथ पाने के लिए तरसने लगा। कभी वह विभा से पूछता,
“हम पापा के साथ क्यों नहीं रहते? जैसे सबके मम्मी-पापा साथ रहते हैं, वैसे ही मेरे पापा हमारे साथ क्यों नहीं रहते?”
तो कभी वह वैभव से सवाल करता,
“पापा, आप खाना क्यों बनाते हो? सबके घर पर मम्मी खाना बनाती हैं, हमारे घर पर क्यों नहीं?”
अनिरुद्ध के इन सवालों पर दोनों निःशब्द रह जाते। उनके बीच की खाई इतनी गहरी थी कि उसे पाटना नामुमकिन लगता।
अनिरुद्ध का जन्मदिन निकट था। तलाक के बाद वह कभी माँ तो कभी पिता के साथ अपना जन्मदिन मनाता। इस बार विभा उसे मॉल लेकर गई और बोली
“अपने जन्मदिन के लिए कोई तोहफा पसंद कर लो।”
लेकिन महँगे उपहार देखकर भी अनिरुद्ध के चेहरे पर मुस्कान न आई। विभा खीझकर बोली,
“आखिर तुम्हें क्या चाहिए?”
अनिरुद्ध ने धीरे से कहा, “पापा।”
यह सुनकर विभा रात भर सो न सकी। वह जानती थी कि अनिरुद्ध की यह चाह पूरी करना आसान नहीं, क्योंकि उसके अहंकार ने ही उसे इस स्थिति में ला खड़ा किया था।
तलाक के लिए विभा की ज़िद ही जिम्मेदार थी। वैभव अपने माता-पिता के साथ रहना चाहता था, लेकिन विभा को उनके साथ रहना मंजूर नहीं था। उसे अपने सपनों को उड़ान देने का जुनून था। हॉस्टल में पली-बढ़ी विभा छोटे शहर और सीमित जीवन में घुटन महसूस करती थी। उसने वैभव को स्पष्ट कह दिया,
“या तो माता-पिता के साथ रहो, या मेरे साथ।”
परिणामस्वरूप उनका तलाक हो गया।
अब, अकेलेपन में विभा को अपने फैसले पर पछतावा होने लगा था। वह महसूस कर रही थी कि यदि उसने अपने अहम को दरकिनार कर दिया होता, तो आज उसका एक सुंदर परिवार होता।
अगले दिन, विभा ने साहस जुटाकर एक बड़ा निर्णय लिया। वह अनिरुद्ध को लेकर ससुराल पहुँची। उसने वैभव की माँ के चरण स्पर्श किए और पिताजी को नमन करते हुए कहा,
“माँ, मुझे माफ कर दो। मैं आप सबके साथ रहना चाहती हूँ। मैंने जो किया, उसकी भरपाई तो नहीं हो सकती, लेकिन अनिरुद्ध के लिए हम सबका साथ बहुत ज़रूरी है।”
अनिरुद्ध खुशी से दादा-दादी से लिपट गया। वैभव जब ऑफिस से लौटा, तो विभा को देखकर हैरान रह गया। वह चुपचाप अपने कमरे की ओर बढ़ा, लेकिन तभी विभा ने उसका हाथ थाम लिया और कहा,
“वैभव, क्या तुम मेरे साथ फिर से जीवन के रास्तों पर चलना स्वीकार करोगे? मैं माँ-बाबूजी के साथ इसी घर में रहूँगी। मुझसे और अकेले नहीं जिया जाता। तुमसे बिछड़कर ही समझा कि तुम्हारी अहमियत क्या है।”
वैभव ने भी सब भूलाकर विभा को सीने से लगा लिया। उनके आँसुओं ने सभी गिले-शिकवे मिटा दिए।
अनिरुद्ध के जन्मदिन की तैयारियाँ शुरू हो गईं। इस बार वह सबसे ज्यादा खुश था। उसे उसका सबसे पसंदीदा उपहार मिल गया था—माँ, पापा और दादा-दादी का साथ। उसके जीवन में खुशियों की नई बहार आ गई थी।
*🔔⏰🎪✍️विशेष:- भव्य आत्माओं,जीवन में रिश्तों की अहमियत को समय रहते समझना चाहिए। अहंकार और जिद से रिश्ते टूट सकते हैं, लेकिन सच्चे प्रेम और समर्पण से उन्हें फिर से जोड़ा जा सकता है। जोड़ने या जुड़ने के लिए सच्चे संस्कारों का आचरण में होना आवश्यक है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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