शनिवार, 1 फ़रवरी 2025

संगति का प्रभाव

*🔔पंच कल्याणक महोत्सव सूचना व कहानी🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 संगति का प्रभाव ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 माघ शुक्ल 6 , सोमवार , 03 फरवरी 2025 कलिकाल के 13 वें तीर्थंकर श्री विमलनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री विमलनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,06,07, 15, 16,19,22,24,25 व 26 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है। 🔔षोडश कारण व्रत,14 जनवरी से 13 फरवरी तक*
*▶️दश लक्षण व्रत 2 से 11 फरवरी तक, रत्नत्रय व्रत 10 से 12 फरवरी 🔔बंसत पंचमी 2 फरवरी को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 फरवरी माह में  अष्टमी तिथि 05 व   21 को है। चतुर्दशी तिथि 11 व 27 फरवरी को है।🔔▶️ फरवरी माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 02,03,12,14,15, 18 23 व 25 फरवरी को है।*
*🔔 🌞गृह प्रवेश मुहूर्त 07, 08,14,15 व 17 फरवरी तक है*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*संगति का प्रभाव* 

किसी ने सच ही कहा है, *"अवसर और सूर्योदय में एक ही समानता है—देर करने वाले हमेशा इन्हें खो देते हैं।"* 

यह कहानी मनीष की है, जो एक मिडल क्लास परिवार का होनहार लड़का था। वह बारहवीं तक हर कक्षा में टॉप करता आ रहा था। उसके माता-पिता को उस पर गर्व था। उन्होंने सपने देखे थे कि मनीष बड़ा होकर उनकी जिंदगी बदल देगा और परिवार का नाम रोशन करेगा।
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लेकिन जैसे ही मनीष ने कॉलेज में कदम रखा, सब कुछ बदल गया।

कॉलेज में उसकी संगति गलत दोस्तों से हो गई, जिन्होंने उसे बुरी आदतों की ओर धकेल दिया। देर रात तक पार्टियां, झूठ बोलकर माता-पिता से पैसे लेना, और पढ़ाई से दूरी बनाना उसकी दिनचर्या बन गई। जो लड़का एक समय पढ़ाई में डूबा रहता था, अब वह गैर-जिम्मेदार और बेपरवाह हो गया। जब घरवालों ने उसे समझाने की कोशिश की, तो उसने गुस्से में कहा, "मुझे ज्ञान मत दीजिए, मुझे सब पता है।"

समय बीता और रिजल्ट का दिन आया। मनीष, जिसने हमेशा टॉप किया था, इस बार एक विषय में फेल हो गया। यह नतीजा उसके लिए किसी झटके से कम नहीं था। उसकी ईगो बुरी तरह चोटिल हो गई। हार बर्दाश्त न कर पाने के कारण उसने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। दोस्तों से बात करना बंद कर दिया। परिवार से दूरी बना ली। बाहर निकलना और किसी से मिलना-जुलना उसने लगभग छोड़ दिया। धीरे-धीरे वह डिप्रेशन का शिकार हो गया।

मनीष के स्कूल के प्रिंसिपल, जिन्हें वह बेहद मानता था, को यह खबर मिली। उन्होंने मनीष को अपने घर डिनर पर बुलाया। मनीष उनके इनविटेशन को ठुकरा नहीं सका और उनके घर पहुंच गया।

शाम का वक्त था। ठंड का मौसम था। प्रिंसिपल साहब गार्डन में अंगीठी ताप रहे थे। मनीष भी उनके पास जाकर बैठ गया। कुछ देर तक दोनों चुपचाप रहे। फिर, प्रिंसिपल ने बिना कुछ कहे अंगीठी से जलता हुआ कोयले का एक टुकड़ा निकाला और उसे मिट्टी पर फेंक दिया। वह टुकड़ा थोड़ी देर तक धधकता रहा और फिर धीरे-धीरे बुझ गया।

मनीष ने हैरानी से पूछा, "सर, आपने जलते हुए कोयले को क्यों बर्बाद कर दिया?"

प्रिंसिपल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "कोयले का टुकड़ा बर्बाद नहीं हुआ है। देखो, मैं इसे वापस अंगीठी में डालता हूं।" उन्होंने कोयले को उठाया, उसकी मिट्टी साफ की, और उसे फिर से अंगीठी में डाल दिया। कुछ ही देर में वह कोयला फिर से जलने लगा।

इसके बाद प्रिंसिपल ने मनीष की ओर देखा और पूछा, "समझे बेटा?"

मनीष ने सिर हिलाकर कहा, "नहीं, सर।"

तब प्रिंसिपल ने बड़े प्यार से समझाया, "यह कोयले का टुकड़ा तुम्हारी तरह है। जब तक तुम सही संगति और माहौल में थे, तुम जलते रहे, दूसरों को रोशनी और गर्मी देते रहे। लेकिन जब तुम गलत संगति में गए, तो मिट्टी में दबकर बुझ गए। अगर तुम वापस सही राह और संगति में लौट आओ, तो फिर से जल सकते हो और रोशनी फैला सकते हो। तुम्हें बस अपनी संगति और आदतें बदलनी होंगी।"

यह सुनकर मनीष को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने उसी पल तय कर लिया कि वह अपनी पुरानी आदतें छोड़ेगा। उसने अपने बुरे दोस्तों से दूरी बनाई, अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू किया, और धीरे-धीरे अपनी जिंदगी को एक नई दिशा दी। 
 *सीख:* डिप्रेशन और असफलता किसी की भी जिंदगी में आ सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि सब कुछ खत्म हो गया। सही मार्गदर्शन, मेहनत, और अपनों का प्यार किसी भी इंसान को अंधेरे से बाहर निकाल सकता है। *असफलता तो बस एक पड़ाव है, पर कोशिशें हमें मंजिल तक जरूर पहुंचाती हैं।* 

*⏰👨‍👨‍👦‍👦🎪🌞✍️विशेष:-भव्य आत्माओं,अपनी मेहनत और अपनों के साथ कर दिखाओ कुछ ऐसा, कि दुनिया करना चाहे आपके जैसा।"*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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