शनिवार, 8 फ़रवरी 2025

मेरी आसक्ति व उसका परिणाम

*🔔पंचकल्याणक सूचना व कहानी ⏬*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरी आसक्ति व उसका परिणाम ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 माघ शुक्ल 12 , रविवार , 09 फरवरी 2025 कलिकाल के चतुर्थ तीर्थंकर श्री अभिनंदन  भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अभिनंदन भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 माघ शुक्ल 13 , सोमवार , 10 फरवरी 2025 कलिकाल के 15 वें तीर्थंकर श्री धर्मनाथ  भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की यह महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  धर्मनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 09,10 , 16,18,19,22,24 ,25 व 27 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है। 🔔षोडश कारण व्रत,14 जनवरी से 13 फरवरी तक*
*▶️दश लक्षण व्रत 2 से 11 फरवरी तक, रत्नत्रय व्रत 10 से 12 फरवरी*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 फरवरी माह में  अष्टमी तिथि 05 व   21 को है। चतुर्दशी तिथि 11 व 27 फरवरी को है।🔔▶️ फरवरी माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 02,03,12,14,15, 18 23 व 25 फरवरी को है।*
*🔔 🌞गृह प्रवेश मुहूर्त 07, 08,14,15 व 17 फरवरी तक है*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*मेरी आसक्ति और उसका परिणाम*

जिसे हम सर्वाधिक प्रेम कर है। जिससे अथाह लगाव और मोह होता है। जिससे स्नेह के तार जुड़े होते है, उसे खोने पर ही हमें सबसे अधिक दुःख होता है। हम टूट कर बिखर जाते है। ऐसा लगता है जीवन मे सिर्फ निराशा और अंधकार ही व्याप्त हों गया 
गीता में कृष्ण जी ने कहा है - "कर्म करते रहो, लेकिन आसक्त मत होओ, बंधन में मत पड़ो। कितनी भी प्यारी वस्तु हों या रिश्ता, चाहे उसके प्रति कितना भी मोह क्यों न हों, उसे खोने पर चाहे कितना भी दुःख क्यों न हों?,उसे त्यागने की शक्ति मन मे विकसित करों।" 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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*मेरी आसक्ति और उसका परिणाम*

पुराणों में एक कथा है, जिसमें एक बहुत ही पहुॅचे हुये संन्यासी का उल्लेख है। वह जंगल में एकांत में रहकर ईश्वर प्राप्ति हेतु तपस्या करता था। एक दिन, कोई एक भक्त व्यापारी उनकी कुटिया में ठहरा और उनके सेवा-भाव से प्रसन्न होकर जाते समय उन्हें एक काफी महंगा, सुंदर और कोमल कम्बल भेंट में दे गया।

संन्यासी को वह कम्बल अत्यंत प्रिय हो गया। वह उसे बार-बार निहारता और छूता रहता। धीरे-धीरे उनका मन उस कम्बल में इतना रम गया कि उसकी चिंता उन्हें सताने लगी। कहीं यह खराब न हो जाए, गंदा न हो जाए, या कोई इसे चुरा न ले—यह विचार हर समय उनके मन में बना रहता।

समय बीतने के साथ, उस कम्बल के प्रति उनका लगाव इतना बढ़ गया कि उनका ध्यान ईश्वर से हटकर केवल कम्बल पर केंद्रित हो गया। जिस प्रेम और समर्पण से वह पहले परमात्मा का स्मरण करते थे, अब वह स्थान कम्बल ने ले लिया।

कथा में आगे का वर्णन आता है आखिरकार, जब संन्यासी के जीवन का अंत आया, तो उनके मन में आखिरी विचार भी उसी कम्बल का था। परिणामस्वरूप, अगले जन्म में वह पतंगा (कपड़े का कीड़ा) बनकर जन्मे। जब तक कीड़ों द्वारा खाकर वह कम्बल पूर्णतः नष्ट नहीं हुआ, तब तक वह पतंगे के रूप में सौ जन्मों तक पुनः जन्म लेते रहे।

 *👨‍👨‍👦‍👦⏰🐎🙏🌞विशेष:-भव्य आत्माओं* *संसारिक वस्तुओं में आसक्ति मनुष्य को उसके लक्ष्य से भटका सकती है। ईश्वर ने संसार की वस्तुओं का निर्माण हमारी सुविधा और आनंद के लिए किया है, परंतु उनका अत्यधिक लगाव और आसक्ति हमें आत्मिक विकास के मार्ग से दूर कर देती है।इसलिए, हमें अपने जीवन में स्थायी सुख और शांति के लिए अपनी प्राथमिकताओं को समझना चाहिए और परमात्मा को सर्वोच्च स्थान देना चाहिए। बिना षट् आवश्यक कार्यों के हम सभी का जीवन निरस बना हुआ है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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