रविवार, 27 अप्रैल 2025

असली स्वर्ग

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 असली स्वर्ग ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल एकम  , 28 अप्रैल सोमवार 2025 कलि काल के 17 वें  तीर्थंकर सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री कुंथुनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी बौद्धिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री कुंथुनाथ भगवान जी का जन्म तप व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 मई  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 02, 04, 05,07,18, 22, 24, 26 ,27 ,30 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎  मई माह में अष्टमी तिथि 4 व 20 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 11 व 26 मई को है।*
*🔔🐎 श्रुत पंचमी पर्व याने मां जिनवाणी पूजा व्रत 31 मई को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 मई माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 05,06,08,09,14, 16,17, 18, 22, 23, 28 मई को है।🔔*
*🐎✍️ पंचक 20 से 24 मई तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🚙🚗 वाहन खरीदने का मुहूर्त 2,4,9,11,18 व 23 मई को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

   *🔔असली स्वर्ग🐎* 

प्रकृति का नियम है कि श्रम और विश्राम में अपने कर्तव्यों के अनुसार संतुलन होना चाहिए। यदि मनुष्य केवल विश्राम चाहता है और श्रम से दूर भागता है, तो अंततः वही विश्राम भी उसके लिए बोझ बन जाता है। 

गोपाल बहुत आलसी व्यक्ति था। उसके घरवाले भी उसकी इस आदत से अत्यंत परेशान रहते थे। गोपाल हमेशा यही चाहता कि उसे ऐसा जीवन मिले जिसमें वह दिन भर सोए और जो भी वस्तु चाहे, उसे बिना श्रम के प्राप्त हो जाए। परंतु उसकी यह इच्छा धरती पर पूरी न हो सकी।
एक दिन गोपाल की मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद वह स्वर्ग पहुंचा, जो उसकी कल्पनाओं से भी अधिक सुंदर था। वह सोचने लगा — "काश! मैं पहले ही यहाँ आ गया होता, बेवजह धरती पर परिश्रम करना पड़ा। अब तो मैं विश्राम का आनंद लूंगा।"
तभी एक देवदूत उसके पास आया और हीरे-जवाहरात जड़ी एक सुंदर शय्या की ओर इशारा करते हुए बोला — "आप इस पर विश्राम करें। आपको जो कुछ भी चाहिए होगा, वहीँ मिल जाएगा।" यह सुनकर गोपाल अत्यंत प्रसन्न हो गया।
कुछ दिन गोपाल ने विश्राम का भरपूर आनंद लिया। जो इच्छा होती, वह शय्या पर ही पूरी हो जाती। किंतु धीरे-धीरे उसे इस जीवन से उकताहट होने लगी। अब न उसे चैन था, न नींद। जब भी वह उठने की कोशिश करता, दास-दासियाँ उसे रोक देतीं। कई महीने ऐसे ही बीत गए।
थक हारकर एक दिन गोपाल देवदूत के पास पहुंचा और बोला — "अब मैं विश्राम से ऊब चुका हूँ। कुछ काम करना चाहता हूँ। क्या कोई काम मिल सकता है?"
देवदूत मुस्कुराते हुए बोला — "आपको यहाँ विश्राम के लिए लाया गया है। यही तो आपके जीवन की आकांक्षा थी क्षमा करें मैं आपको कोई काम नहीं दे सकता ।
चिढ़ते हुए गोपाल ने कहा — "यह जीवन अब नर्क बन गया है। इससे तो अच्छा था कि आप मुझे नर्क ही भेज देते।"
देवदूत ने शांत स्वर में उत्तर दिया — "आप सोचते हैं कि आप स्वर्ग में हैं, लेकिन वास्तव में यह वही नर्क है, जिसकी कल्पना आपने स्वयं की थी। आपका बता दें स्वर्ग तो वहाँ होता है जहाँ मनुष्य परिश्रम करता है, अपने परिवार के साथ आनंद से जीवन बिताता है और जो सुख-सुविधाएँ मिलती हैं, उनमें प्रसन्न रहता है। 
लेकिन आपने तो हमेशा विश्राम की कल्पना की थी। अब जब विश्राम मिला है तो जीवन नीरस और बोझिल लगने लगा है।"
गोपाल को अब सच्चाई का बोध हो गया। वह गम्भीर होकर बोला — "अब समझ आया कि मनुष्य को समय पर श्रम करना और समय पर विश्राम करना चाहिए। यदि किसी एक में भी अति हो जाए, तो जीवन नीरस और दुखद बन जाता है।"

सच है — जो लोग आलस्य के पीछे भागते हैं, उनके लिए एक दिन स्वर्ग भी नर्क बन जाता है। श्रम ही जीवन का वास्तविक सौंदर्य है। सही समय पर परिश्रम और सही समय पर विश्राम से ही जीवन में सच्चा सुख पाया जा सकता है। जबतक जीव अपने कर्तव्यों के साथ तालमेल नहीं बैठा सकता तब तक वह दुखी ही रहता है।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 6 अप्रैल 2025

निंदा करने का फल

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 निंदा करने का फल ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल ग्यारस , 8 अप्रैल मंगलवार 2025 कलि काल के पांचवें सुमतिनाथ तीर्थंकर सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री सुमतिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी संस्कार प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री सुमतिनाथ भगवान जी का जन्म, केवल ज्ञान व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*

*🎪इस अप्रैल  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 2, 3, 8,10,12,14, 22, 23, 26 तारीख को है।↔️ इस माह शाश्वत पर्व दश लक्षण 2 से 11 अप्रैल तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎 इस अप्रैल माह में अष्टमी तिथि 5 व 21 तारीख को है।चतुर्दशी तिथि 11 व 26 मार्च को है।*
*🔔🐎 सोलह कारण शाश्वत पर्व व व्रत 15 मार्च से 14 अप्रेल तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 अप्रैल माह में शुध्द विवाह मुहूर्त 16,18, 19, 20, 21, 29, 30 अप्रैल को है।🔔*
*🐎✍️ अप्रैल माह में पंचक 22 तारीख की रात्रि 12:31से ,23, 24, 25, 26,  27 को प्रातः 3:39 तक है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*👨‍👨‍👦‍👦निंदा करने का फल 🐎* 

 *निंदा के दुष्प्रभाव: एक पौराणिक कथा यह कथा आज भी वैष्णव धर्म में प्रचलित है।* 

निंदा मतलब दूसरों के कामों में दोष ढूंढ़ना। दूसरों की बुराई करना । हिन्दू धर्म  ग्रंथो में कहा गया है अगर हम किसी की बुराई करेगे, निदा करेंगे तो वह हमें नाश की ओर ले जाएगा। निंदा का प्रभाव अत्यंत घातक होता है। यह कथा इसी सत्य को प्रतिपादित करती है। 

जब भगवान श्रीराम अपने धाम को लौटने लगे, तब अयोध्या के समस्त प्राणी—मनुष्य, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, यहाँ तक कि पर्वत भी उनके साथ चल पड़े। उन मनुष्यों में एक वह धोबी भी था, जिसने माता सीता की निंदा की थी।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 9057473389 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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भगवान श्रीराम ने उसके हाथ को अपने हाथ में पकड़ा हुआ था और उसे अपने साथ लिए जा रहे थे। जो भी यह दृश्य देखता, वह भी उनके साथ चलने लगता। जब सभी ने साकेत धाम में प्रवेश करना चाहा, तो साकेत का द्वार खुल गया।

किन्तु जैसे ही वह निंदनीय धोबी द्वार के समीप पहुँचा, द्वार बंद हो गया। साकेत द्वार ने भगवान से कहा, "महाराज! यद्यपि आपने इसे अपने हाथों में पकड़ा है, किन्तु इसने जगत जननी माता सीता की निंदा की है। यह इतना बड़ा पापी है कि मेरे द्वार से साकेत में प्रवेश नहीं कर सकता।"

इस घटना को आकाश से सभी देवी-देवता देख रहे थे। ब्रह्मा जी ने सोचा, "यदि भगवान इसे मेरे ब्रह्मलोक में भेज दें, तो मेरा लोक अपवित्र हो जाएगा।" उन्होंने हाथ हिलाते हुए कहा, "महाराज! मेरे ब्रह्मलोक में इस पापी के लिए कोई स्थान नहीं है।"

इंद्र ने भी चिंतित होकर कहा, "महाराज! यह इतना बड़ा अपराधी है कि इसे मेरे इंद्रलोक में भी स्थान नहीं मिल सकता।"

ध्रुव जी ने विचार किया, "यदि यह पापी मेरे ध्रुव लोक में आ गया, तो इसके पाप के भार से मेरा लोक नीचे गिर जाएगा।" अतः उन्होंने भी निवेदन किया, "महाराज! इसे मेरे पास भी मत भेजिए।"

समस्त देवताओं ने एक स्वर में इस धोबी को अपने-अपने लोक में स्थान देने से इनकार कर दिया। 
भगवान श्रीराम मुस्कुराते हुए सबका चेहरा देख रहे थे, किंतु उन्होंने कुछ नहीं कहा।

यमराज भी उपस्थित थे। उन्होंने विचार किया, "यह इतना बड़ा अपराधी है कि इसे मेरी यमपुरी में भी स्थान नहीं मिलना चाहिए।" वे घबराकर बोले, "महाराज! मेरी यमपुरी में भी इस पापी के लिए कोई जगह नहीं है।"

अब उस धोबी को घबराहट होने लगी। उसने सोचा, "मेरी दुर्बुद्धि ने इतना बड़ा पाप करवा दिया कि अब कोई भी मुझे स्वीकारने को तैयार नहीं है।"

भगवान श्रीराम ने उसकी चिंता देखी और उसे सांत्वना देते हुए कहा, "घबराओ मत! मैं अभी तुम्हारे लिए एक नया साकेत धाम बनाता हूँ।"

तब भगवान ने उसके लिए एक अलग साकेत धाम की रचना की। यहाँ तुलसीदास जी की एक चौपाई स्मरण होती है—

 *सिय निंदक अघ ओघ नसाए ।* 
 *लोक बिसोक बनाइ बसाए ॥* 

ऐसा प्रतीत होता है कि आज भी वह धोबी अकेला उसी साकेत में पड़ा हुआ है, जहाँ न कोई देवी-देवता हैं, न भगवान। न वह किसी को देख सकता है, न कोई उसे।

 *🔔⛳🐎🔑विशेष:-भव्य आत्माओं, इस कथा से स्पष्ट होता है कि भगवान अथवा किसी भी पुण्यात्मा की निंदा करने वालों के लिए कहीं कोई स्थान नहीं होता। निंदा व्यक्ति को समाज और सृष्टि से बहिष्कृत कर सकती है, और अंततः उसे एकाकी और निराशाजनक स्थिति में पहुँचा सकती है। अतः सदैव सत्कर्म करें और निंदा से बचें।इस कहानी से अपने अंदर झांक कर देखिए क्या हमारा आचरण भी हमें एक नई साकेत नगरी तो नहीं पहुंचा रहा है। स्वयं विचार करें व स्वयं ही आकलन कर अपने आचरण को व्यवस्थित करें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 1 अप्रैल 2025

सक्रिय सम्यक दर्शन

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सक्रिय सम्यक दर्शन ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल पंचमी , बुधवार 2 अप्रैल 2025 कलि काल के दूसरे तीर्थंकर सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री अजितनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी संस्कार प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अजितनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल षष्ठी , 3 अप्रैल गुरुवार 2025 कलि काल के तीसरे तीर्थंकर सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री संभवनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी संस्कार प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री संभवनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪इस अप्रैल  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 2, 3, 8,10,12,14, 22, 23, 26 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎 इस अप्रैल माह में अष्टमी तिथि 5 व 21 तारीख को है।चतुर्दशी तिथि 11 व 26 मार्च को है।*
*🔔🐎 सोलह कारण शाश्वत पर्व व व्रत 15 मार्च से 14 अप्रेल तक है।↔️ इस माह शाश्वत पर्व दश लक्षण 2 से 11 अप्रैल तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 अप्रैल माह में शुध्द विवाह मुहूर्त 16,18, 19, 20, 21, 29, 30 अप्रैल को है।🔔*
*🐎✍️ पंचक👉 22 तारीख की रात्रि 12:31से ,23, 24, 25, 26,  27 को प्रातः 3:39 तक है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी* 

 *🔔इस कलयुग में हम सभी अपने सम्यक दर्शन को सक्रिय करते हुए मोक्ष जाने वाली ट्रेन में अपना स्थान सुरक्षित कर सकते है। मात्र इस कहानी से सरल शब्दों में समझें।* 

👉डॉक्टर साहब अपने अस्पताल में मरीज देख रहे थे। उनकी फीस कम होने के कारण हमेशा मरीजों की भीड़ लगी रहती थी। आज भी 50 से अधिक मरीज अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, जिनमें कई करोड़पति भी थे।

एक विशेष बात यह थी कि हर महीने की सात तारीख को डॉक्टर साहब बिना फीस के मरीजों को देखते थे, लेकिन आज वह दिन नहीं था।

तभी एक गरीब मरीज पर्चा लिखवाकर डॉक्टर से बोला, "मेरे पास फीस के पैसे नहीं हैं।"

डॉक्टर ने बिना कोई प्रतिक्रिया दिए पर्चा फाड़ दिया और कहा, "बिना फीस मैं मरीज नहीं देखता।"

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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मरीज निराश होकर बाहर चला गया। उसका उतरा चेहरा देखकर अन्य मरीजों ने कारण पूछा, तो उसने पूरी कहानी बता दी। यह सुनकर वहाँ मौजूद लोग—जिनमें बड़े-बड़े धनाढ्य भी थे—डॉक्टर को कोसने लगे।

"कैसा निर्दयी डॉक्टर है!"
"इंसानियत तो बची ही नहीं!"
"सिर्फ पैसों के लिए जीते हैं ये लोग!"

डॉक्टर अपने केबिन में लगे सीसीटीवी से यह सब देख व सुन रहे थे। कुछ देर बाद वे बाहर आए। अचानक सब शांत हो गए।

डॉक्टर बोले, "आप लोग मेरी ही तारीफ कर रहे थे, न?"

कोई कुछ नहीं बोला।

डॉक्टर आगे बोले, "जिस गरीब मरीज को मैंने बाहर भेजा था, वह मेरा ही कर्मचारी था। यह एक परीक्षा थी—यह देखने के लिए कि आपमें से कितने लोग उसकी मदद को आगे आते हैं। लेकिन अफसोस, कोई भी आगे नहीं आया! आपमें से कई संपन्न लोग हैं, करोड़पति भी है, मानवतावश किसी एक ने भी यह नहीं कहा कि 'मैं इसकी फीस भर देता हूँ।' पर हाँ, मुझे दोष देने में आप सब सबसे आगे थे!"

सभी के चेहरे शर्म से झुक गए।

डॉक्टर की बात 100% सच थी। 
हम हमेशा चाहते हैं कि 
कोई और दान करे, 
कोई और मदद करे, लेकिन स्वयं आगे नहीं बढ़ते। 
हम दूसरों की आलोचना में तो सबसे आगे रहते हैं, लेकिन जरूरतमंद की सहायता के समय चुप्पी साध लेते हैं।
श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है
"परहित सरिस धर्म नहिं भाई, पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।"
अर्थात, दूसरों की भलाई से बड़ा कोई धर्म नहीं और दूसरों को कष्ट देने से बड़ा कोई पाप नहीं।
दान—चाहे अन्नदान हो, वस्त्रदान हो, विद्यादान हो या धनदान—सभी हमें पुण्य का भागी बनाते हैं। यह हमें मोह-माया से भी मुक्त करता है।

*🎪🔔🐎🌞👨‍👨‍👦‍👦विशेष :- भव्य आत्माओं,इस कहानी का संदेश यही है कि हमें सिर्फ दूसरों से अपेक्षा करने के बजाय, अपनी क्षमता और भावना के अनुसार दूसरों की मदद के लिए भी आगे आना चाहिए। इंसानियत सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में दिखनी चाहिए। यही सच्चा सक्रिय सम्यक दर्शन है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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