*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 सक्रिय सम्यक दर्शन ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल पंचमी , बुधवार 2 अप्रैल 2025 कलि काल के दूसरे तीर्थंकर सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री अजितनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी संस्कार प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अजितनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल षष्ठी , 3 अप्रैल गुरुवार 2025 कलि काल के तीसरे तीर्थंकर सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री संभवनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी संस्कार प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री संभवनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪इस अप्रैल 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 2, 3, 8,10,12,14, 22, 23, 26 तारीख को है।*
*👨👨👦👦🔔🐎 इस अप्रैल माह में अष्टमी तिथि 5 व 21 तारीख को है।चतुर्दशी तिथि 11 व 26 मार्च को है।*
*🔔🐎 सोलह कारण शाश्वत पर्व व व्रत 15 मार्च से 14 अप्रेल तक है।↔️ इस माह शाश्वत पर्व दश लक्षण 2 से 11 अप्रैल तक है।*
*👨👨👦👦🔔👉 अप्रैल माह में शुध्द विवाह मुहूर्त 16,18, 19, 20, 21, 29, 30 अप्रैल को है।🔔*
*🐎✍️ पंचक👉 22 तारीख की रात्रि 12:31से ,23, 24, 25, 26, 27 को प्रातः 3:39 तक है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी*
*🔔इस कलयुग में हम सभी अपने सम्यक दर्शन को सक्रिय करते हुए मोक्ष जाने वाली ट्रेन में अपना स्थान सुरक्षित कर सकते है। मात्र इस कहानी से सरल शब्दों में समझें।*
👉डॉक्टर साहब अपने अस्पताल में मरीज देख रहे थे। उनकी फीस कम होने के कारण हमेशा मरीजों की भीड़ लगी रहती थी। आज भी 50 से अधिक मरीज अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, जिनमें कई करोड़पति भी थे।
एक विशेष बात यह थी कि हर महीने की सात तारीख को डॉक्टर साहब बिना फीस के मरीजों को देखते थे, लेकिन आज वह दिन नहीं था।
तभी एक गरीब मरीज पर्चा लिखवाकर डॉक्टर से बोला, "मेरे पास फीस के पैसे नहीं हैं।"
डॉक्टर ने बिना कोई प्रतिक्रिया दिए पर्चा फाड़ दिया और कहा, "बिना फीस मैं मरीज नहीं देखता।"
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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मरीज निराश होकर बाहर चला गया। उसका उतरा चेहरा देखकर अन्य मरीजों ने कारण पूछा, तो उसने पूरी कहानी बता दी। यह सुनकर वहाँ मौजूद लोग—जिनमें बड़े-बड़े धनाढ्य भी थे—डॉक्टर को कोसने लगे।
"कैसा निर्दयी डॉक्टर है!"
"इंसानियत तो बची ही नहीं!"
"सिर्फ पैसों के लिए जीते हैं ये लोग!"
डॉक्टर अपने केबिन में लगे सीसीटीवी से यह सब देख व सुन रहे थे। कुछ देर बाद वे बाहर आए। अचानक सब शांत हो गए।
डॉक्टर बोले, "आप लोग मेरी ही तारीफ कर रहे थे, न?"
कोई कुछ नहीं बोला।
डॉक्टर आगे बोले, "जिस गरीब मरीज को मैंने बाहर भेजा था, वह मेरा ही कर्मचारी था। यह एक परीक्षा थी—यह देखने के लिए कि आपमें से कितने लोग उसकी मदद को आगे आते हैं। लेकिन अफसोस, कोई भी आगे नहीं आया! आपमें से कई संपन्न लोग हैं, करोड़पति भी है, मानवतावश किसी एक ने भी यह नहीं कहा कि 'मैं इसकी फीस भर देता हूँ।' पर हाँ, मुझे दोष देने में आप सब सबसे आगे थे!"
सभी के चेहरे शर्म से झुक गए।
डॉक्टर की बात 100% सच थी।
हम हमेशा चाहते हैं कि
कोई और दान करे,
कोई और मदद करे, लेकिन स्वयं आगे नहीं बढ़ते।
हम दूसरों की आलोचना में तो सबसे आगे रहते हैं, लेकिन जरूरतमंद की सहायता के समय चुप्पी साध लेते हैं।
श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है
"परहित सरिस धर्म नहिं भाई, पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।"
अर्थात, दूसरों की भलाई से बड़ा कोई धर्म नहीं और दूसरों को कष्ट देने से बड़ा कोई पाप नहीं।
दान—चाहे अन्नदान हो, वस्त्रदान हो, विद्यादान हो या धनदान—सभी हमें पुण्य का भागी बनाते हैं। यह हमें मोह-माया से भी मुक्त करता है।
*🎪🔔🐎🌞👨👨👦👦विशेष :- भव्य आत्माओं,इस कहानी का संदेश यही है कि हमें सिर्फ दूसरों से अपेक्षा करने के बजाय, अपनी क्षमता और भावना के अनुसार दूसरों की मदद के लिए भी आगे आना चाहिए। इंसानियत सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में दिखनी चाहिए। यही सच्चा सक्रिय सम्यक दर्शन है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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