*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 असली स्वर्ग ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल एकम , 28 अप्रैल सोमवार 2025 कलि काल के 17 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री कुंथुनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी बौद्धिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री कुंथुनाथ भगवान जी का जन्म तप व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 मई 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 02, 04, 05,07,18, 22, 24, 26 ,27 ,30 तारीख को है।*
*👨👨👦👦🔔🐎 मई माह में अष्टमी तिथि 4 व 20 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 11 व 26 मई को है।*
*🔔🐎 श्रुत पंचमी पर्व याने मां जिनवाणी पूजा व्रत 31 मई को है।*
*👨👨👦👦🔔👉 मई माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 05,06,08,09,14, 16,17, 18, 22, 23, 28 मई को है।🔔*
*🐎✍️ पंचक 20 से 24 मई तक है।*
*👨👨👦👦🚙🚗 वाहन खरीदने का मुहूर्त 2,4,9,11,18 व 23 मई को है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*🔔असली स्वर्ग🐎*
प्रकृति का नियम है कि श्रम और विश्राम में अपने कर्तव्यों के अनुसार संतुलन होना चाहिए। यदि मनुष्य केवल विश्राम चाहता है और श्रम से दूर भागता है, तो अंततः वही विश्राम भी उसके लिए बोझ बन जाता है।
गोपाल बहुत आलसी व्यक्ति था। उसके घरवाले भी उसकी इस आदत से अत्यंत परेशान रहते थे। गोपाल हमेशा यही चाहता कि उसे ऐसा जीवन मिले जिसमें वह दिन भर सोए और जो भी वस्तु चाहे, उसे बिना श्रम के प्राप्त हो जाए। परंतु उसकी यह इच्छा धरती पर पूरी न हो सकी।
एक दिन गोपाल की मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद वह स्वर्ग पहुंचा, जो उसकी कल्पनाओं से भी अधिक सुंदर था। वह सोचने लगा — "काश! मैं पहले ही यहाँ आ गया होता, बेवजह धरती पर परिश्रम करना पड़ा। अब तो मैं विश्राम का आनंद लूंगा।"
तभी एक देवदूत उसके पास आया और हीरे-जवाहरात जड़ी एक सुंदर शय्या की ओर इशारा करते हुए बोला — "आप इस पर विश्राम करें। आपको जो कुछ भी चाहिए होगा, वहीँ मिल जाएगा।" यह सुनकर गोपाल अत्यंत प्रसन्न हो गया।
कुछ दिन गोपाल ने विश्राम का भरपूर आनंद लिया। जो इच्छा होती, वह शय्या पर ही पूरी हो जाती। किंतु धीरे-धीरे उसे इस जीवन से उकताहट होने लगी। अब न उसे चैन था, न नींद। जब भी वह उठने की कोशिश करता, दास-दासियाँ उसे रोक देतीं। कई महीने ऐसे ही बीत गए।
थक हारकर एक दिन गोपाल देवदूत के पास पहुंचा और बोला — "अब मैं विश्राम से ऊब चुका हूँ। कुछ काम करना चाहता हूँ। क्या कोई काम मिल सकता है?"
देवदूत मुस्कुराते हुए बोला — "आपको यहाँ विश्राम के लिए लाया गया है। यही तो आपके जीवन की आकांक्षा थी क्षमा करें मैं आपको कोई काम नहीं दे सकता ।
चिढ़ते हुए गोपाल ने कहा — "यह जीवन अब नर्क बन गया है। इससे तो अच्छा था कि आप मुझे नर्क ही भेज देते।"
देवदूत ने शांत स्वर में उत्तर दिया — "आप सोचते हैं कि आप स्वर्ग में हैं, लेकिन वास्तव में यह वही नर्क है, जिसकी कल्पना आपने स्वयं की थी। आपका बता दें स्वर्ग तो वहाँ होता है जहाँ मनुष्य परिश्रम करता है, अपने परिवार के साथ आनंद से जीवन बिताता है और जो सुख-सुविधाएँ मिलती हैं, उनमें प्रसन्न रहता है।
लेकिन आपने तो हमेशा विश्राम की कल्पना की थी। अब जब विश्राम मिला है तो जीवन नीरस और बोझिल लगने लगा है।"
गोपाल को अब सच्चाई का बोध हो गया। वह गम्भीर होकर बोला — "अब समझ आया कि मनुष्य को समय पर श्रम करना और समय पर विश्राम करना चाहिए। यदि किसी एक में भी अति हो जाए, तो जीवन नीरस और दुखद बन जाता है।"
सच है — जो लोग आलस्य के पीछे भागते हैं, उनके लिए एक दिन स्वर्ग भी नर्क बन जाता है। श्रम ही जीवन का वास्तविक सौंदर्य है। सही समय पर परिश्रम और सही समय पर विश्राम से ही जीवन में सच्चा सुख पाया जा सकता है। जबतक जीव अपने कर्तव्यों के साथ तालमेल नहीं बैठा सकता तब तक वह दुखी ही रहता है।
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें