शनिवार, 4 जुलाई 2020

18 वा वर्षाकाल

🙏 *श्री चन्द्रप्रभ जिनेद्राय नमः*🙏

  *🕉️श्री वसुनन्दी गुरवे नमः🌞*  
  *🌲18 वे मंगल वर्षायोग  की कलश स्थापना*
      दिनांक 03/07/2020

धर्मानुरागियों
जय जिनेंद्र, 
परम पूज्य 108 श्री श्वेतपिच्छाचार्य विध्यानंद से आचार्य पद से  अलंकृत श्री वसुनन्दी मुनि महाराज के आत्मसाधक शिष्य क्षुल्लक 105 नित्यानंद सागर जी महाराज का  जयपुर महानगरी मे   उनका 18 वाँ मंगल  वर्षायोग *श्री शांतिसागर समाधि साधना केवा सेवा केंद्र जयपुर कार्यालय* पर हो रहा है । 
 वर्षायोग हेतु मंगल कलश स्थापना दिनांक *03/ 07/ 2020 को  सांयकालीन 5.30 बजे* होने जा रही है । आप सभी से अनुरोध है कि वर्षायोग  की अनुमोदन करते हुए  धर्मलाभ  ले *वर्षायोग के स्थापना के कार्यक्रम*
     
सांयकालीन  5:30 -  झंडारोहण
   सांयकालीन   6:00  - मंगलाचरण, अखंडदीप प्रज्वलन, पादप्रक्षालन, गुरुपूजन, शास्त्र भेंट
 वर्षायोग कलश स्थापना विधि
               *क्षुल्लक महाराज का उद्बोधन* 
      गुरुदेव का कहना है कि इस करोंना काल में सादगी पूर्वक कलश स्थापना करते हुए *देश विदेश के पुण्यार्जक श्रावक के 108 घरों में यह वर्षायोग का मंगल कलश पहुँचे ताकि सभी का आयु ,आरोग्य, धन  सम्पदा बनी रहे ओर साथ ही एक अति आवश्यक *श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र के विकास के  में आपका सहयोग हो इस बात को ध्यान में रखते हुए कलश की राशि मात्र 11000/- रुपए रखी है* इस सर्वश्रेष्ठ कार्य हेतु मंगल कलश  हमसे निम्न नम्बर पर आप सम्पर्क कर जल्द से जल्द अपने नाम दे। 
     आपके मंगल कलश की स्थापना क्षुल्लकजी के हाथो से कार्यालय➡️ *श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र जयपुर* पर होगी  के दरम्यान गुरुदेव कलश पर रोज़ाना जाप व विशिष्ट अनुष्ठान होगे एवं वर्षायोग के बाद आपको यह   मंगल कलश आपके पते पर कोरीयर द्वारा भिजवाएगे।
*⏰✍पुण्यार्जक श्रावक अपनी राशि बैंक में  जमा करवाकर निम्न नंबरो पर सम्पर्क करें🌞* 
*Sevavrti* 
*Punjab National Bank*
*A/C No.5871000100010922*
*IFC Code PUNB 0587100* 
*Durgapura JAIPUR* (Rajasthan)
सम्पर्क सूत्र:-
💐 1. 08209993400
*2.9982411713*
धन्यवाद....
     अधिक जानकारी हेतु सम्पर्क करे।
सम्पर्क सूत्र
1.8209993400
2.9982411713
    
       🙏निवेदक🙏
*🌞श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र जयपुर*

 *🌞ट्रस्ट मंडल एवं प्रबंध कार्यकारिणी*
*🕉️कार्यालय पता⬇️*
*🕉️श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र जयपुर प्लॉट नंबर 861 सेकंड फ्लोर शांतिनगर रेलवे स्टेशन दुर्गापुरा के पास दुर्गापुरा जयपुर पिन 302018*

 *व्हाट्सएप नंबर 9982411713*
       🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

मंगलवार, 26 मई 2020

श्रुतपंचमी

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=673522426763816&id=291422034973859

*🌲सुनहरा मौका श्रुतपंचमी के महापर्व पर🌲**.... 

*🌞श्री शान्तीसागराय नम:⏰*

*👪"सच्चा मित्र"👪*

*जैनम् जयतु शासनम*

*🕉️☸️➡️🌞नोट :-  जो व्यक्ति विशेष अपनी आत्मा को परमात्मा बनाने के इच्छुक हैं वहीं व्यक्ति इस संस्था को दान करें।साधुओं की निंदा व 84 लाख योनियों का सुख भोगने वाले व्यक्ति विशेष से निवेदन है कि वे किसी के साधना में सहयोगी नहीं बन सकते तो बाधक भी मत बनों। कृपया वे इस पोस्ट को ना पढ़ें।*

#https://youtu.be/nId0o9U_sTc
*जानिये उपरोक्त लिंक से निर्यापक श्रीसुधासागरजी मुनिराज ने आपको  क्यों सावधान किया।*

*🌲सुनहरा मौका🌲*

*ओम ह्रीं नम:*
       *महानुभावों,*
      *🌲भारत सरकार के द्वारा देवस्थान विभाग जयपुर(राजस्थान) से रजिस्टर्ड संस्था सन् 2013 से सतत् सभी साधु(त्यागीव्रृतियो) व धर्म प्रेमियों के लिए "श्री शांतिसागर समाधि साधना सेवा केंद्र ट्रस्ट "  की संस्था की स्थापना की गई है । इस संस्था का मुख्य उद्देश्य धर्म की नींव मजबूत करना है। यह संस्था सत्य धर्म के पालन करने वाले जीव को, जीव की आत्मा को परमात्मा बनाने में सहयोगी है ।जो भी जीव किसी जीव के समाधि मरण में सहयोगी बनता है , उस जीव का नियम से समाधि मरण होता है । जिस जीव का समाधिमरण होता है वह जीव 1⃣2⃣ भव के अंदर 8⃣4⃣ लाख योनियो से छुटकारा पाकर सिद्यालय में अपना स्थान निर्धारित कर लेता है ।*जो इस संस्था से जुड़े हुए है, तथा जो व्यक्ति जुड़ना चाहते है।उनके लिए यह विशेष अवसर प्राप्त हो रहा है।अतः आप शक्ति के अनुसार सहयोग करते हुए अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग करें।*  
 
*🕉️☸️➡️🌞नोट :-  जो व्यक्ति विशेष अपनी आत्मा को परमात्मा बनाने के इच्छुक हैं वहीं व्यक्ति इस संस्था को दान करें।साधुओं की निंदा व 84 लाख योनियों का सुख भोगने वाले व्यक्ति विशेष से निवेदन है कि वे किसी के साधना में सहयोगी नहीं बन सकते तो बाधक भी मत बनों। कृपया वे इस पोस्ट को ना पढ़ें।*

       *🌞आप सभी के लिए यह एक सुनहरा अवसर प्राप्त हो रहा है आप यथाशक्ति इस संस्था में दान कर पुण्यके सहभागी बने ।आप सभी से निवेदन है आप अपनी चंचला लक्ष्मी का स्वंय की आत्मा को परमात्मा बनाना चाहते हैं, तो आप इस संस्था में आज ही दान देकर अपना मोक्ष  की ट्रेन में अपना स्थान सुरक्षित करें ।*

*🕉व्यवहार में दान ही त्याग है। दान त्याग धर्म का व्यवहारिक रूप है। धानत राय ने पूजा में कहा भी है 'उत्तम त्याग कहो जग सारा, 'औषधि शास्त्र अभय आहारा,। निश्चय राग-द्वेष निरवारे, ज्ञाता दोनों दान संभारे'। निश्चय से राग-द्वेष निवारण ही त्याग है। व्यवहार में दान ही त्याग है।*

*👨‍👩‍👧‍👦प्रत्येक प्राणी को अपनी शक्ति के अनुसार दान अवश्य करना चाहिये। दान चार प्रकार के हैं- औषधि, ज्ञान, अभय व आहार। वृक्षादि एकेन्द्रिय प्राणी, गाय, भैंस आदि तिर्यंच प्राणी भी फल-फूल, दूध प्रदान करते हैं। हम तो पंचेन्द्रिय प्राणी हैं, मनुष्य भव में हैं। दान गृहस्थों का पुनीत कर्तव्य है। वर्तमान वातावरण में बढती हुई असमानता को सद् गृहस्थ दान के माध्यम से दूर कर सकते हैं।*

*🔯कभी हमारे देश में घी और दूध की नदियां बहती थी, परंतु आज कुछ भी नहीं है। क्या कारण है? अवश्य ही कोई मूल में गलती है। हमने त्याग, दान भूला दिया है। भारत कभी अतिथि सत्कार के लिए प्रसिद्ध था, आज हम इन बातों को भूलते जा रहे हैं।*
*🌲सम्यक्त्व चिंतामणि नामक ग्रंथ में लिखा है कि त्याग के बिना मुक्ति नहीं होती, त्याग के बिना हित का मार्ग नहीं है और त्याग ही लोकोत्तर अत्यंत श्रेष्ठ धर्म है। कर्म भूमि के मनुष्य का जीवन पारस्परिक सहयोग से ही चलता है। भूखे को भोजन देना, रोगी को औषध देना, अज्ञानी को ज्ञान देना और प्राण नाश की आशंका से भयभीत मनुष्य को अभय देना मनुष्य मात्र का कर्तव्य है। त्याग के द्वारा ही संसार के बङे-बङे काम चलते हैं।*

*➡"उत्तम त्याग करे जो कोई, भोग भूमि सुर शिवसुख होई"- उत्तम त्याग करने वाले व्यक्ति को मुक्ति सुंदरी स्वयंमेव वरण करती है तथा देवता भी उसे नमस्कार करते हैं।*

🤝 *किस्मत आपके हाथ में नहीं होती*
                 *परन्तु*
*निर्णय आपके हाथ में होता है*
*किस्मत आपका निर्णय नहीं बदल सकती*
                *परन्तु*
*आपका निर्णय आपकी किस्मत बदल सकता है*🤝
      🙏 🙏   🙏 🙏
*🙏बहुत से काम मनुष्य अकेला नही कर सकता। समाज की सेवा किसी स्वार्थ से नही की जाती । समाज की सेवा मनुष्य के जीवन का विनियोग हैं। समाज के लिए दान या सेवा मनुष्य का कर्तव्य है और कर्तव्य के लिए कोई मूल्य नही होता है।   इस पृथ्वी पर आपने मनुष्य भव प्राप्त किया है तो थोड़ा सा अपने आमदनी में से साधु (त्यागीव्रृतियो) सेवा में अवश्य खर्च करें ताकि आप भी  दिगंबर मुनि बन कर अपनी आत्मा का कल्याण कर सके।* 
*धन्यवाद ....धन्यवाद.... धन्यवाद*....
              .... *आप सभी का शुभचिंतक*....
                     *सेवाव्रतीस्वामीजी*
01.💐 Sevavrti Punjab National Bank*
*A/C No.5871000100010922*
*IFC Code PUNB 0587100* 
Durgapura JAIPUR (Rajasthan)
*सम्पर्क सूत्र:-*
*💐 1. 08209993400*  
*🕉 2. 09982411713*
          
*☸उपरोक्त नंबर पर आप पैसे भेजकर वाट्सएप द्वारा सूचना दे।*
🕉↔↔💐💐💐💐↔🔔🕘

*🙆‍♀अनंत काल से इस शरीर संरचना मे सहयोगी सभी जीवो का है हम सब पर कर्ज है।* 
*🌲इसीलिए तो प्रतिपल जयणा पूर्वक अहिंसामय जीवन जीना है हम सभीका फर्ज।*

*☸(प्रत्येक जीव के शरीर का एक एक कण किसी न किसी के सहयोग से पोषण प्राप्त करके बना है। हर एक जीव दुसरे जीव का सहयोगी है इस जगत मे। माता के गर्भ मे रहकर अपने शरीर को हम सभी ने पाया ये हमारी जननी का सहयोग है जिसने अपने शरीर से हमे सींचा है।*

*👨‍👩‍👧‍👦इस सम्पूर्ण जीवन मे कोई स्वेच्छा से सहयोग देते है तो कोई बिना स्वेच्छा के। कोई खुशी से तो कोई दुखी होकर। और इसी प्रकार कर्मबंधन करते है। पर सहयोग तो प्रतिपल प्राप्त होते ही आ रहा है। निगोद मे हो जीव या त्रसकाय, तिर्यच या मनुष्यकाय, स्वर्ग हो या नरक सभी ही जीव एकदूसरे का सहयोग पाते है। और साथ ही साथ इस प्रकृति के प्रत्येक कण और सम्पूर्ण आकाश और तारामंडल भी हमारे सहयोगी है अप्रत्यक्ष रूपमे।*

*🕉अब जब सहयोग प्राप्त किया है तो सहयोगी बनना भी तो हमारा फर्ज है। बस इसी लिए प्रत्येक क्षण प्रत्येक जीवो की जयणा रखना हमारा फर्ज बनता है। हमारे कारण कोई भी जीव की किसी भी प्रकार हिंसा न हो यह जानते और पालते हुए जीना ही धर्म है। जैन शास्त्र कहते है धर्म का अर्थ कोई प्रथा या पौराणिक आस्था के अनुसार चलना नही पर अपने आत्मा के स्वभाव मे रहना धर्म है। और हम सभी का स्वभाव एक दूसरे का सहयोगी बनना है और इस कारण किसीको भी हमारे कारण कोई पीड़ा न पहुचे यह ध्यान रखना धर्म है।*

*🤝इसीलिए कहा गया है परस्पराग्रहो जीवनाम जिसका अर्थ है हर एक जीव दूसरे जीवका उपकारी है। यानी हर एक जीव एकदूसरे का सहयोगी बनकर अपना जीवन व्यतीत करता है।इस प्रकार से समझे तो निश्चित रूप से जान लेंगे की किस प्रकार हम हिंसा करते जा रहे है प्रत्येक पल। अपने घर परिवार मे, अपने आसपास मे रहते लोगोके सहयोगी न बनना संघी पंचेन्द्रीय जीव की हिंसा, पशुपक्षी और अन्य तिर्यच जीवो की जयणा न पालकर अपने कार्य करना उन सभी जीवोकी हिंसा, देवी देवता या नारकी के जीवो प्रति दुर्भावना रखना उनके प्रति हिंसा, और जो मिला है उसमे संतुष्ट होकर इस प्रकृति के आभारी न होकर इस प्रकृति मे प्रतिपल अपने मन के कसायो को और दुर्भावो को प्रसारित करना समस्त लोक की हिंसा।*

*👨‍👩‍👧‍👦आओ आप और हम सभी मिलकर प्रतिदिन इस समस्त जगत के और सभी जीवोके उपकार के लिए प्रतिपल सदभावना भावे और प्रतिपल प्रत्येक जीवोकी जयणा करते हुए अपना कार्य करे।)*

*******************

🐢🚩🕉👪 *आपसभी मंगलमय🍏☎🍭🔆आचरण को प्राप्त करकें यह जीवन सफल बनायें* ⚽🌲🌞🌍
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🍁🌼🍁☺ ☺🍁🌼🍁

शनिवार, 9 मई 2020

सुनहरा मौका

#https://www.facebook.com/291422034973859/posts/662630094519716/

*🌲सुनहरा मौका🌲**.... 

*🌞श्री शान्तीसागराय नम:⏰*

*👪"सच्चा मित्र"👪*

*जैनम् जयतु शासनम*

*🕉️☸️➡️🌞नोट :-  जो व्यक्ति विशेष अपनी आत्मा को परमात्मा बनाने के इच्छुक हैं वहीं व्यक्ति इस संस्था को दान करें।साधुओं की निंदा व 84 लाख योनियों का सुख भोगने वाले व्यक्ति विशेष से निवेदन है कि वे किसी के साधना में सहयोगी नहीं बन सकते तो बाधक भी मत बनों। कृपया वे इस पोस्ट को ना पढ़ें।*

*🌲सुनहरा मौका🌲*

*ओम ह्रीं नम:*
       *महानुभावों,*
      *🌲भारत सरकार के द्वारा देवस्थान विभाग जयपुर(राजस्थान) से रजिस्टर्ड संस्था सन् 2013 से सतत् सभी साधु(त्यागीव्रृतियो) व धर्म प्रेमियों के लिए "श्री शांतिसागर समाधि साधना सेवा केंद्र ट्रस्ट "  की संस्था की स्थापना की गई है । इस संस्था का मुख्य उद्देश्य धर्म की नींव मजबूत करना है। यह संस्था सत्य धर्म के पालन करने वाले जीव को, जीव की आत्मा को परमात्मा बनाने में सहयोगी है ।जो भी जीव किसी जीव के समाधि मरण में सहयोगी बनता है , उस जीव का नियम से समाधि मरण होता है । जिस जीव का समाधिमरण होता है वह जीव 1⃣2⃣ भव के अंदर 8⃣4⃣ लाख योनियो से छुटकारा पाकर सिद्यालय में अपना स्थान निर्धारित कर लेता है ।*जो इस संस्था से जुड़े हुए है, तथा जो व्यक्ति जुड़ना चाहते है।उनके लिए यह विशेष अवसर प्राप्त हो रहा है।अतः आप शक्ति के अनुसार सहयोग करते हुए अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग करें।*  
 
*🕉️☸️➡️🌞नोट :-  जो व्यक्ति विशेष अपनी आत्मा को परमात्मा बनाने के इच्छुक हैं वहीं व्यक्ति इस संस्था को दान करें।साधुओं की निंदा व 84 लाख योनियों का सुख भोगने वाले व्यक्ति विशेष से निवेदन है कि वे किसी के साधना में सहयोगी नहीं बन सकते तो बाधक भी मत बनों। कृपया वे इस पोस्ट को ना पढ़ें।*

       *🌞आप सभी के लिए यह एक सुनहरा अवसर प्राप्त हो रहा है आप यथाशक्ति इस संस्था में दान कर पुण्यके सहभागी बने ।आप सभी से निवेदन है आप अपनी चंचला लक्ष्मी का स्वंय की आत्मा को परमात्मा बनाना चाहते हैं, तो आप इस संस्था में आज ही दान देकर अपना मोक्ष  की ट्रेन में अपना स्थान सुरक्षित करें ।*

*🕉व्यवहार में दान ही त्याग है। दान त्याग धर्म का व्यवहारिक रूप है। धानत राय ने पूजा में कहा भी है 'उत्तम त्याग कहो जग सारा, 'औषधि शास्त्र अभय आहारा,। निश्चय राग-द्वेष निरवारे, ज्ञाता दोनों दान संभारे'। निश्चय से राग-द्वेष निवारण ही त्याग है। व्यवहार में दान ही त्याग है।*

*👨‍👩‍👧‍👦प्रत्येक प्राणी को अपनी शक्ति के अनुसार दान अवश्य करना चाहिये। दान चार प्रकार के हैं- औषधि, ज्ञान, अभय व आहार। वृक्षादि एकेन्द्रिय प्राणी, गाय, भैंस आदि तिर्यंच प्राणी भी फल-फूल, दूध प्रदान करते हैं। हम तो पंचेन्द्रिय प्राणी हैं, मनुष्य भव में हैं। दान गृहस्थों का पुनीत कर्तव्य है। वर्तमान वातावरण में बढती हुई असमानता को सद् गृहस्थ दान के माध्यम से दूर कर सकते हैं।*

*🔯कभी हमारे देश में घी और दूध की नदियां बहती थी, परंतु आज कुछ भी नहीं है। क्या कारण है? अवश्य ही कोई मूल में गलती है। हमने त्याग, दान भूला दिया है। भारत कभी अतिथि सत्कार के लिए प्रसिद्ध था, आज हम इन बातों को भूलते जा रहे हैं।*
*🌲सम्यक्त्व चिंतामणि नामक ग्रंथ में लिखा है कि त्याग के बिना मुक्ति नहीं होती, त्याग के बिना हित का मार्ग नहीं है और त्याग ही लोकोत्तर अत्यंत श्रेष्ठ धर्म है। कर्म भूमि के मनुष्य का जीवन पारस्परिक सहयोग से ही चलता है। भूखे को भोजन देना, रोगी को औषध देना, अज्ञानी को ज्ञान देना और प्राण नाश की आशंका से भयभीत मनुष्य को अभय देना मनुष्य मात्र का कर्तव्य है। त्याग के द्वारा ही संसार के बङे-बङे काम चलते हैं।*

*➡"उत्तम त्याग करे जो कोई, भोग भूमि सुर शिवसुख होई"- उत्तम त्याग करने वाले व्यक्ति को मुक्ति सुंदरी स्वयंमेव वरण करती है तथा देवता भी उसे नमस्कार करते हैं।*

🤝 *किस्मत आपके हाथ में नहीं होती*
                 *परन्तु*
*निर्णय आपके हाथ में होता है*
*किस्मत आपका निर्णय नहीं बदल सकती*
                *परन्तु*
*आपका निर्णय आपकी किस्मत बदल सकता है*🤝
      🙏 🙏   🙏 🙏
*🙏बहुत से काम मनुष्य अकेला नही कर सकता। समाज की सेवा किसी स्वार्थ से नही की जाती । समाज की सेवा मनुष्य के जीवन का विनियोग हैं। समाज के लिए दान या सेवा मनुष्य का कर्तव्य है और कर्तव्य के लिए कोई मूल्य नही होता है।   इस पृथ्वी पर आपने मनुष्य भव प्राप्त किया है तो थोड़ा सा अपने आमदनी में से साधु (त्यागीव्रृतियो) सेवा में अवश्य खर्च करें ताकि आप भी  दिगंबर मुनि बन कर अपनी आत्मा का कल्याण कर सके।* 
*धन्यवाद ....धन्यवाद.... धन्यवाद*....
              .... *आप सभी का शुभचिंतक*....
                     *सेवाव्रतीस्वामीजी*
01.💐 Sevavrti Punjab National Bank*
*A/C No.5871000100010922*
*IFC Code PUNB 0587100* 
Durgapura JAIPUR (Rajasthan)
*सम्पर्क सूत्र:-*
*💐 1. 08209993400*  
*🕉 2. 09982411713*
          
*☸उपरोक्त नंबर पर आप पैसे भेजकर वाट्सएप द्वारा सूचना दे।*
🕉↔↔💐💐💐💐↔🔔🕘

*🙆‍♀अनंत काल से इस शरीर संरचना मे सहयोगी सभी जीवो का है हम सब पर कर्ज है।* 
*🌲इसीलिए तो प्रतिपल जयणा पूर्वक अहिंसामय जीवन जीना है हम सभीका फर्ज।*

*☸(प्रत्येक जीव के शरीर का एक एक कण किसी न किसी के सहयोग से पोषण प्राप्त करके बना है। हर एक जीव दुसरे जीव का सहयोगी है इस जगत मे। माता के गर्भ मे रहकर अपने शरीर को हम सभी ने पाया ये हमारी जननी का सहयोग है जिसने अपने शरीर से हमे सींचा है।*

*👨‍👩‍👧‍👦इस सम्पूर्ण जीवन मे कोई स्वेच्छा से सहयोग देते है तो कोई बिना स्वेच्छा के। कोई खुशी से तो कोई दुखी होकर। और इसी प्रकार कर्मबंधन करते है। पर सहयोग तो प्रतिपल प्राप्त होते ही आ रहा है। निगोद मे हो जीव या त्रसकाय, तिर्यच या मनुष्यकाय, स्वर्ग हो या नरक सभी ही जीव एकदूसरे का सहयोग पाते है। और साथ ही साथ इस प्रकृति के प्रत्येक कण और सम्पूर्ण आकाश और तारामंडल भी हमारे सहयोगी है अप्रत्यक्ष रूपमे।*

*🕉अब जब सहयोग प्राप्त किया है तो सहयोगी बनना भी तो हमारा फर्ज है। बस इसी लिए प्रत्येक क्षण प्रत्येक जीवो की जयणा रखना हमारा फर्ज बनता है। हमारे कारण कोई भी जीव की किसी भी प्रकार हिंसा न हो यह जानते और पालते हुए जीना ही धर्म है। जैन शास्त्र कहते है धर्म का अर्थ कोई प्रथा या पौराणिक आस्था के अनुसार चलना नही पर अपने आत्मा के स्वभाव मे रहना धर्म है। और हम सभी का स्वभाव एक दूसरे का सहयोगी बनना है और इस कारण किसीको भी हमारे कारण कोई पीड़ा न पहुचे यह ध्यान रखना धर्म है।*

*🤝इसीलिए कहा गया है परस्पराग्रहो जीवनाम जिसका अर्थ है हर एक जीव दूसरे जीवका उपकारी है। यानी हर एक जीव एकदूसरे का सहयोगी बनकर अपना जीवन व्यतीत करता है।इस प्रकार से समझे तो निश्चित रूप से जान लेंगे की किस प्रकार हम हिंसा करते जा रहे है प्रत्येक पल। अपने घर परिवार मे, अपने आसपास मे रहते लोगोके सहयोगी न बनना संघी पंचेन्द्रीय जीव की हिंसा, पशुपक्षी और अन्य तिर्यच जीवो की जयणा न पालकर अपने कार्य करना उन सभी जीवोकी हिंसा, देवी देवता या नारकी के जीवो प्रति दुर्भावना रखना उनके प्रति हिंसा, और जो मिला है उसमे संतुष्ट होकर इस प्रकृति के आभारी न होकर इस प्रकृति मे प्रतिपल अपने मन के कसायो को और दुर्भावो को प्रसारित करना समस्त लोक की हिंसा।*

*👨‍👩‍👧‍👦आओ आप और हम सभी मिलकर प्रतिदिन इस समस्त जगत के और सभी जीवोके उपकार के लिए प्रतिपल सदभावना भावे और प्रतिपल प्रत्येक जीवोकी जयणा करते हुए अपना कार्य करे।)*

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🐢🚩🕉👪 *आपसभी मंगलमय🍏☎🍭🔆आचरण को प्राप्त करकें यह जीवन सफल बनायें* ⚽🌲🌞🌍
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🍁🌼🍁☺ ☺🍁🌼🍁

शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

दान सुनहरा मौका

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=652918652157527&id=291422034973859

*🌲सुनहरा मौका🌲**.... 

*🌞श्री शान्तीसागराय नम:⏰*

*👪"सच्चा मित्र"👪*

*जैनम् जयतु शासनम*

*🌲दान दिवस अक्षय तृतीया पर सुनहरा मौका🌲*

*ओम ह्रीं नम:*
       *महानुभावों,*
      *🌲भारत सरकार के द्वारा देवस्थान विभाग जयपुर(राजस्थान) से रजिस्टर्ड संस्था सन् 2013 से सतत् सभी साधु(त्यागीव्रृतियो) व धर्म प्रेमियों के लिए "श्री शांतिसागर समाधि साधना सेवा केंद्र ट्रस्ट "  की संस्था की स्थापना की गई है । इस संस्था का मुख्य उद्देश्य धर्म की नींव मजबूत करना है। यह संस्था सत्य धर्म के पालन करने वाले जीव को, जीव की आत्मा को परमात्मा बनाने में सहयोगी है ।जो भी जीव किसी जीव के समाधि मरण में सहयोगी बनता है , उस जीव का नियम से समाधि मरण होता है । जिस जीव का समाधिमरण होता है वह जीव 1⃣2⃣ भव के अंदर 8⃣4⃣ लाख योनियो से छुटकारा पाकर सिद्यालय में अपना स्थान निर्धारित कर लेता है ।*जो इस संस्था से जुड़े हुए है, तथा जो व्यक्ति जुड़ना चाहते है।उनके लिए यह विशेष अवसर प्राप्त हो रहा है।अतः आप शक्ति के अनुसार सहयोग करते हुए अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग करें।*  

#https://youtu.be/jM9Qq3mEcMk
 
*➡️जानिए दान दिवस पर आपको क्या करना है । यह जानने के लिए उपरोक्त लिंक को क्लिक कीजिए और जानिए आचार्य 108 श्री विद्यासागरजी मुनिराज के धर्मप्रभावक शिष्य निर्यापक मुनिश्री सुधासागरजी के मुख से दान दिवस का महत्व*
  
       *🌞आप सभी के लिए यह एक सुनहरा अवसर प्राप्त हो रहा है आप यथाशक्ति इस संस्था में दान कर पुण्यके सहभागी बने ।आप सभी से निवेदन है आप अपनी चंचला लक्ष्मी का स्वंय की आत्मा को परमात्मा बनाना चाहते हैं, तो आप इस संस्था में आज ही दान देकर अपना मोक्ष  की ट्रेन में अपना स्थान सुरक्षित करें ।*

*🕉व्यवहार में दान ही त्याग है। दान त्याग धर्म का व्यवहारिक रूप है। धानत राय ने पूजा में कहा भी है 'उत्तम त्याग कहो जग सारा, 'औषधि शास्त्र अभय आहारा,। निश्चय राग-द्वेष निरवारे, ज्ञाता दोनों दान संभारे'। निश्चय से राग-द्वेष निवारण ही त्याग है। व्यवहार में दान ही त्याग है।*

*👨‍👩‍👧‍👦प्रत्येक प्राणी को अपनी शक्ति के अनुसार दान अवश्य करना चाहिये। दान चार प्रकार के हैं- औषधि, ज्ञान, अभय व आहार। वृक्षादि एकेन्द्रिय प्राणी, गाय, भैंस आदि तिर्यंच प्राणी भी फल-फूल, दूध प्रदान करते हैं। हम तो पंचेन्द्रिय प्राणी हैं, मनुष्य भव में हैं। दान गृहस्थों का पुनीत कर्तव्य है। वर्तमान वातावरण में बढती हुई असमानता को सद् गृहस्थ दान के माध्यम से दूर कर सकते हैं।*

*🔯कभी हमारे देश में घी और दूध की नदियां बहती थी, परंतु आज कुछ भी नहीं है। क्या कारण है? अवश्य ही कोई मूल में गलती है। हमने त्याग, दान भूला दिया है। भारत कभी अतिथि सत्कार के लिए प्रसिद्ध था, आज हम इन बातों को भूलते जा रहे हैं।*
*🌲सम्यक्त्व चिंतामणि नामक ग्रंथ में लिखा है कि त्याग के बिना मुक्ति नहीं होती, त्याग के बिना हित का मार्ग नहीं है और त्याग ही लोकोत्तर अत्यंत श्रेष्ठ धर्म है। कर्म भूमि के मनुष्य का जीवन पारस्परिक सहयोग से ही चलता है। भूखे को भोजन देना, रोगी को औषध देना, अज्ञानी को ज्ञान देना और प्राण नाश की आशंका से भयभीत मनुष्य को अभय देना मनुष्य मात्र का कर्तव्य है। त्याग के द्वारा ही संसार के बङे-बङे काम चलते हैं।*

*➡"उत्तम त्याग करे जो कोई, भोग भूमि सुर शिवसुख होई"- उत्तम त्याग करने वाले व्यक्ति को मुक्ति सुंदरी स्वयंमेव वरण करती है तथा देवता भी उसे नमस्कार करते हैं।*

🤝 *किस्मत आपके हाथ में नहीं होती*
                 *परन्तु*
*निर्णय आपके हाथ में होता है*
*किस्मत आपका निर्णय नहीं बदल सकती*
                *परन्तु*
*आपका निर्णय आपकी किस्मत बदल सकता है*🤝
      🙏 🙏   🙏 🙏
*🙏बहुत से काम मनुष्य अकेला नही कर सकता। समाज की सेवा किसी स्वार्थ से नही की जाती । समाज की सेवा मनुष्य के जीवन का विनियोग हैं। समाज के लिए दान या सेवा मनुष्य का कर्तव्य है और कर्तव्य के लिए कोई मूल्य नही होता है।   इस पृथ्वी पर आपने मनुष्य भव प्राप्त किया है तो थोड़ा सा अपने आमदनी में से साधु (त्यागीव्रृतियो) सेवा में अवश्य खर्च करें ताकि आप भी  दिगंबर मुनि बन कर अपनी आत्मा का कल्याण कर सके।* 
*धन्यवाद ....धन्यवाद.... धन्यवाद*....
              .... *आप सभी का शुभचिंतक*....
                     *सेवाव्रतीस्वामीजी*
01.💐 Sevavrti Punjab National Bank*
*A/C No.5871000100010922*
*IFC Code PUNB 0587100* 
Durgapura JAIPUR (Rajasthan)
*सम्पर्क सूत्र:-*
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*☸उपरोक्त नंबर पर आप पैसे भेजकर वाट्सएप द्वारा सूचना दे।*
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*🙆‍♀अनंत काल से इस शरीर संरचना मे सहयोगी सभी जीवो का है हम सब पर कर्ज है।* 
*🌲इसीलिए तो प्रतिपल जयणा पूर्वक अहिंसामय जीवन जीना है हम सभीका फर्ज।*

*☸(प्रत्येक जीव के शरीर का एक एक कण किसी न किसी के सहयोग से पोषण प्राप्त करके बना है। हर एक जीव दुसरे जीव का सहयोगी है इस जगत मे। माता के गर्भ मे रहकर अपने शरीर को हम सभी ने पाया ये हमारी जननी का सहयोग है जिसने अपने शरीर से हमे सींचा है।*

*👨‍👩‍👧‍👦इस सम्पूर्ण जीवन मे कोई स्वेच्छा से सहयोग देते है तो कोई बिना स्वेच्छा के। कोई खुशी से तो कोई दुखी होकर। और इसी प्रकार कर्मबंधन करते है। पर सहयोग तो प्रतिपल प्राप्त होते ही आ रहा है। निगोद मे हो जीव या त्रसकाय, तिर्यच या मनुष्यकाय, स्वर्ग हो या नरक सभी ही जीव एकदूसरे का सहयोग पाते है। और साथ ही साथ इस प्रकृति के प्रत्येक कण और सम्पूर्ण आकाश और तारामंडल भी हमारे सहयोगी है अप्रत्यक्ष रूपमे।*

*🕉अब जब सहयोग प्राप्त किया है तो सहयोगी बनना भी तो हमारा फर्ज है। बस इसी लिए प्रत्येक क्षण प्रत्येक जीवो की जयणा रखना हमारा फर्ज बनता है। हमारे कारण कोई भी जीव की किसी भी प्रकार हिंसा न हो यह जानते और पालते हुए जीना ही धर्म है। जैन शास्त्र कहते है धर्म का अर्थ कोई प्रथा या पौराणिक आस्था के अनुसार चलना नही पर अपने आत्मा के स्वभाव मे रहना धर्म है। और हम सभी का स्वभाव एक दूसरे का सहयोगी बनना है और इस कारण किसीको भी हमारे कारण कोई पीड़ा न पहुचे यह ध्यान रखना धर्म है।*

*🤝इसीलिए कहा गया है परस्पराग्रहो जीवनाम जिसका अर्थ है हर एक जीव दूसरे जीवका उपकारी है। यानी हर एक जीव एकदूसरे का सहयोगी बनकर अपना जीवन व्यतीत करता है।इस प्रकार से समझे तो निश्चित रूप से जान लेंगे की किस प्रकार हम हिंसा करते जा रहे है प्रत्येक पल। अपने घर परिवार मे, अपने आसपास मे रहते लोगोके सहयोगी न बनना संघी पंचेन्द्रीय जीव की हिंसा, पशुपक्षी और अन्य तिर्यच जीवो की जयणा न पालकर अपने कार्य करना उन सभी जीवोकी हिंसा, देवी देवता या नारकी के जीवो प्रति दुर्भावना रखना उनके प्रति हिंसा, और जो मिला है उसमे संतुष्ट होकर इस प्रकृति के आभारी न होकर इस प्रकृति मे प्रतिपल अपने मन के कसायो को और दुर्भावो को प्रसारित करना समस्त लोक की हिंसा।*

*👨‍👩‍👧‍👦आओ आप और हम सभी मिलकर प्रतिदिन इस समस्त जगत के और सभी जीवोके उपकार के लिए प्रतिपल सदभावना भावे और प्रतिपल प्रत्येक जीवोकी जयणा करते हुए अपना कार्य करे।)*

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🐢🚩🕉👪 *आपसभी मंगलमय🍏☎🍭🔆आचरण को प्राप्त करकें यह जीवन सफल बनायें* ⚽🌲🌞🌍
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मंगलवार, 7 अप्रैल 2020

सुनहरा मौका

#https://www.facebook.com/291422034973859/posts/641652703284122/

*🌲सुनहरा मौका🌲**.... 

*🌞श्री शान्तीसागराय नम:⏰*


*👪"सच्चा मित्र"👪*

*जैनम् जयतु शासनम*

*🌲सुनहरा मौका🌲*

*ओम ह्रीं नम:*
       *महानुभावों,*
      *🌲भारत सरकार के द्वारा देवस्थान विभाग जयपुर(राजस्थान) से रजिस्टर्ड संस्था सन् 2013 से सतत् सभी साधु(त्यागीव्रृतियो) व धर्म प्रेमियों के लिए "श्री शांतिसागर समाधि साधना सेवा केंद्र ट्रस्ट "  की संस्था की स्थापना की गई है । इस संस्था का मुख्य उद्देश्य धर्म की नींव मजबूत करना है। यह संस्था सत्य धर्म के पालन करने वाले जीव को, जीव की आत्मा को परमात्मा बनाने में सहयोगी है ।जो भी जीव किसी जीव के समाधि मरण में सहयोगी बनता है , उस जीव का नियम से समाधि मरण होता है । जिस जीव का समाधिमरण होता है वह जीव 1⃣2⃣ भव के अंदर 8⃣4⃣ लाख योनियो से छुटकारा पाकर सिद्यालय में अपना स्थान निर्धारित कर लेता है ।*जो इस संस्था से जुड़े हुए है, तथा जो व्यक्ति जुड़ना चाहते है।उनके लिए यह विशेष अवसर प्राप्त हो रहा है।अतः आप शक्ति के अनुसार सहयोग करते हुए अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग करें।*    
       *🌞आप सभी के लिए यह एक सुनहरा अवसर प्राप्त हो रहा है आप यथाशक्ति इस संस्था में दान कर पुण्यके सहभागी बने ।आप सभी से निवेदन है आप अपनी चंचला लक्ष्मी का स्वंय की आत्मा को परमात्मा बनाना चाहते हैं, तो आप इस संस्था में आज ही दान देकर अपना मोक्ष  की ट्रेन में अपना स्थान सुरक्षित करें ।*

*🕉व्यवहार में दान ही त्याग है। दान त्याग धर्म का व्यवहारिक रूप है। धानत राय ने पूजा में कहा भी है 'उत्तम त्याग कहो जग सारा, 'औषधि शास्त्र अभय आहारा,। निश्चय राग-द्वेष निरवारे, ज्ञाता दोनों दान संभारे'। निश्चय से राग-द्वेष निवारण ही त्याग है। व्यवहार में दान ही त्याग है।*

*👨‍👩‍👧‍👦प्रत्येक प्राणी को अपनी शक्ति के अनुसार दान अवश्य करना चाहिये। दान चार प्रकार के हैं- औषधि, ज्ञान, अभय व आहार। वृक्षादि एकेन्द्रिय प्राणी, गाय, भैंस आदि तिर्यंच प्राणी भी फल-फूल, दूध प्रदान करते हैं। हम तो पंचेन्द्रिय प्राणी हैं, मनुष्य भव में हैं। दान गृहस्थों का पुनीत कर्तव्य है। वर्तमान वातावरण में बढती हुई असमानता को सद् गृहस्थ दान के माध्यम से दूर कर सकते हैं।*

*🔯कभी हमारे देश में घी और दूध की नदियां बहती थी, परंतु आज कुछ भी नहीं है। क्या कारण है? अवश्य ही कोई मूल में गलती है। हमने त्याग, दान भूला दिया है। भारत कभी अतिथि सत्कार के लिए प्रसिद्ध था, आज हम इन बातों को भूलते जा रहे हैं।*
*🌲सम्यक्त्व चिंतामणि नामक ग्रंथ में लिखा है कि त्याग के बिना मुक्ति नहीं होती, त्याग के बिना हित का मार्ग नहीं है और त्याग ही लोकोत्तर अत्यंत श्रेष्ठ धर्म है। कर्म भूमि के मनुष्य का जीवन पारस्परिक सहयोग से ही चलता है। भूखे को भोजन देना, रोगी को औषध देना, अज्ञानी को ज्ञान देना और प्राण नाश की आशंका से भयभीत मनुष्य को अभय देना मनुष्य मात्र का कर्तव्य है। त्याग के द्वारा ही संसार के बङे-बङे काम चलते हैं।*

*➡"उत्तम त्याग करे जो कोई, भोग भूमि सुर शिवसुख होई"- उत्तम त्याग करने वाले व्यक्ति को मुक्ति सुंदरी स्वयंमेव वरण करती है तथा देवता भी उसे नमस्कार करते हैं।*

🤝 *किस्मत आपके हाथ में नहीं होती*
                 *परन्तु*
*निर्णय आपके हाथ में होता है*
*किस्मत आपका निर्णय नहीं बदल सकती*
                *परन्तु*
*आपका निर्णय आपकी किस्मत बदल सकता है*🤝
      🙏 🙏   🙏 🙏
*🙏बहुत से काम मनुष्य अकेला नही कर सकता। समाज की सेवा किसी स्वार्थ से नही की जाती । समाज की सेवा मनुष्य के जीवन का विनियोग हैं। समाज के लिए दान या सेवा मनुष्य का कर्तव्य है और कर्तव्य के लिए कोई मूल्य नही होता है।   इस पृथ्वी पर आपने मनुष्य भव प्राप्त किया है तो थोड़ा सा अपने आमदनी में से साधु (त्यागीव्रृतियो) सेवा में अवश्य खर्च करें ताकि आप भी  दिगंबर मुनि बन कर अपनी आत्मा का कल्याण कर सके।* 
*धन्यवाद ....धन्यवाद.... धन्यवाद*....
              .... *आप सभी का शुभचिंतक*....
                     *सेवाव्रतीस्वामीजी*
01.💐 Sevavrti Punjab National Bank*
*A/C No.5871000100010922*
*IFC Code PUNB 0587100* 
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*☸(प्रत्येक जीव के शरीर का एक एक कण किसी न किसी के सहयोग से पोषण प्राप्त करके बना है। हर एक जीव दुसरे जीव का सहयोगी है इस जगत मे। माता के गर्भ मे रहकर अपने शरीर को हम सभी ने पाया ये हमारी जननी का सहयोग है जिसने अपने शरीर से हमे सींचा है।*

*👨‍👩‍👧‍👦इस सम्पूर्ण जीवन मे कोई स्वेच्छा से सहयोग देते है तो कोई बिना स्वेच्छा के। कोई खुशी से तो कोई दुखी होकर। और इसी प्रकार कर्मबंधन करते है। पर सहयोग तो प्रतिपल प्राप्त होते ही आ रहा है। निगोद मे हो जीव या त्रसकाय, तिर्यच या मनुष्यकाय, स्वर्ग हो या नरक सभी ही जीव एकदूसरे का सहयोग पाते है। और साथ ही साथ इस प्रकृति के प्रत्येक कण और सम्पूर्ण आकाश और तारामंडल भी हमारे सहयोगी है अप्रत्यक्ष रूपमे।*

*🕉अब जब सहयोग प्राप्त किया है तो सहयोगी बनना भी तो हमारा फर्ज है। बस इसी लिए प्रत्येक क्षण प्रत्येक जीवो की जयणा रखना हमारा फर्ज बनता है। हमारे कारण कोई भी जीव की किसी भी प्रकार हिंसा न हो यह जानते और पालते हुए जीना ही धर्म है। जैन शास्त्र कहते है धर्म का अर्थ कोई प्रथा या पौराणिक आस्था के अनुसार चलना नही पर अपने आत्मा के स्वभाव मे रहना धर्म है। और हम सभी का स्वभाव एक दूसरे का सहयोगी बनना है और इस कारण किसीको भी हमारे कारण कोई पीड़ा न पहुचे यह ध्यान रखना धर्म है।*

*🤝इसीलिए कहा गया है परस्पराग्रहो जीवनाम जिसका अर्थ है हर एक जीव दूसरे जीवका उपकारी है। यानी हर एक जीव एकदूसरे का सहयोगी बनकर अपना जीवन व्यतीत करता है।इस प्रकार से समझे तो निश्चित रूप से जान लेंगे की किस प्रकार हम हिंसा करते जा रहे है प्रत्येक पल। अपने घर परिवार मे, अपने आसपास मे रहते लोगोके सहयोगी न बनना संघी पंचेन्द्रीय जीव की हिंसा, पशुपक्षी और अन्य तिर्यच जीवो की जयणा न पालकर अपने कार्य करना उन सभी जीवोकी हिंसा, देवी देवता या नारकी के जीवो प्रति दुर्भावना रखना उनके प्रति हिंसा, और जो मिला है उसमे संतुष्ट होकर इस प्रकृति के आभारी न होकर इस प्रकृति मे प्रतिपल अपने मन के कसायो को और दुर्भावो को प्रसारित करना समस्त लोक की हिंसा।*

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सोमवार, 6 अप्रैल 2020

टीकाकरण

https://youtu.be/4m1zDzn_X-8
असाध्य रोगों का कैसे टीका बनाया जाता था।भारत की प्राचीन पध्दति जानिये इस लिंक से

मंगलवार, 3 मार्च 2020

होलाष्टक का वैदिक मत के अनुसार महत्व

*⏰  ⏰*
*👨‍👩‍👧होलाष्टक का वैज्ञानिक महत्व ✍️*

🌐✍️🔯🔯✍️🌐

🕉  *ह्रीं नम:श्री ज्योतिष ऋषि सेवाव्रतीनित्यानंदस्वामीजी*
👪"सच्चा मित्र"👪
   *श्री सिध्दांत ज्योतिष , वास्तु व रेकी  शोध केन्द्र जयपुर*
(राजस्थान)

🌞श्री शान्तिसागराय नम:🌞

✍️होलाष्टक शुरू, आज से आठ दिन भूल से भी ना करें ये काम

🌞होलाष्टक दो शब्दों से मिलकर बना है। होली और अष्टक, अर्थात होली से पहले के आठ दिन।

✈️सबसे पहले समझिये क्या है होलाष्टक…. देश भर में होली की तैयारी की शुरुआत हो चुकी है। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक के समय को होलाष्टक कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार होली के पहले आठ दिनों में कोई भी शुभ काम करने की मनाही होती है। इस बार होलाष्टक 3 मार्च से शुरू हो कर 9 मार्च तक रहेगा। 

🕉️जीवन में किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए  आप हमारे 9982411713 व्हाट्सएप नंबर पर अपनी समस्या भेज कर प्रश्नो का उचित समाधान प्राप्त कर सकते हो।  

✍️होलाष्टक की शुरुआत में क्या करें?
👉होलाष्टक के दिनों में ही होलिका दहन की लकड़ी और बाकी ज़रूरी सामान जुटाने शुरू कर देने की परंपरा है। इस दौरान भगवान कृष्ण और भगवान शिव की पूजा की जाती है। होलाष्टक के दौरान अलग-अलग दिनों में अलग-अलग चीज़ों से होली खेले जाने की भी परंपरा है। कहा जाता है कि इस दौरान प्रेम और ख़ुशियों के लिए अगर हम कुछ भी प्रयास करें तो वो सफल अवश्य होता है।

☸️होलाष्टक से जुड़ी पौराणिक मान्यता
होलाष्टक से जुड़ी मान्यता के अनुसार बताया जाता है कि होली के पहले के इन आठ दिनों में प्रह्लाद को काफी यातनाएं दी गई थी। जानकारी के लिए बता दें कि जब हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को बंदी बनाया था वो दिन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी का ही दिन था। उसी दिन से प्रह्लाद को यातनाएं देनी शुरू कर दी गयी थीं। 

☸️हालाँकि प्रह्लाद विष्णु भक्त थे जिसके चलते उन्होंने हर तरह के कष्ट और परेशानियाँ झेले और अंत में भगवान की कृपा से बच भी गए। तब अपने भाई हिरणकश्यप की परेशानी देखकर उसकी बहन होलिका मदद करने के लिए आई। होलिका को आग में ना जलने का वरदान प्राप्त था। 

🤔ऐसे में वो प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गयी। तब भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद तो आग से बच गए लेकिन होलिका इस अग्नि में जल गयी। इन आठ दिनों में प्रह्लाद के साथ जो यातनाएं हुईं उसी के चलते होलाष्टक के समय को अशुभ माना जाने लग गया।

✍️होलाष्टक के आठ दिनों में भूल से भी ना करें ये काम 
होलाष्टक के दौरान किसी भी तरह के शुभ काम को करने की मनाही होती है। इस बात के पीछे की मान्यता के अनुसार होलाष्टक की शुरुआत वाले दिन ही भगवान शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था। होलाष्टक के इन आठ दिनों में हर एक दिन ग्रह उग्र रूप में होते हैं इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ काम टाल दिया जाता है। 

✍️हाँ लेकिन जहाँ इस दौरान मांगलिक काम वर्जित माने गए हैं वहीं इस दौरान जन्म-और-मृत्यु के बाद किये जाने वाले काम करने की कोई मनाही नहीं होती है। अब विस्तार से समझिये इन आठ दिनों में आपको क्या काम नहीं करने हैं :

☸️सबसे पहले तो इस दौरान किसी भी तरह का कोई भी मांगलिक काम, जैसे शादी, भूमि पूजन, गृह प्रवेश, या कोई नया व्यवसाय शुरू करना वर्जित माना गया है।
होलाष्टक काल में नामकरण संस्कार, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश, विवाह संस्कार, इत्यादि शुभ संस्कार भी नहीं किये जाने चाहिए।
✡️इस दौरान किसी भी तरह का यज्ञ, हवन इत्यादि भी नहीं करना चाहिए।
🌞होलाष्टक के दौरान नवविवाहित लड़कियों को अपने मायके में ही रहने की सलाह दी जाती है।
✍️होलाष्टक के दौरान ज़रूर करें ये काम
👉होलाष्टक में जहाँ मांगलिक कार्य वर्जित बताये गए हैं वहीं इस दौरान किये जाने वाले कुछ ऐसे भी काम बताये गए हैं जिन्हें करने से आपको शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है। जानिए क्या हैं वो काम,

☸️मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान किये गए व्रत और दान से इंसान को भगवान का आशीर्वाद मिलता है और उनके सभी कष्ट भी दूर हो जाते हैं।
🌞इस दौरान दान-पुण्य का विशेष लाभ बताया गया है। इन दिनों में आप अपनी इच्छानुसार किसी ज़रूरतमंद को कुछ भी दान दे सकते हैं।
होलाष्टक का महत्व 
✍️ये आठ दिनों का समय जिसे होलाष्टक कहते हैं वो भक्ति की शक्ति का प्रतीक माना गया है। कहते हैं कि इस समय के दौरान यदि तप किया जाये तो बहुत शुभ होता है। होलाष्टक पर पेड़ की एक शाखा काटकर उसे जमीन में लगाने का रिवाज़ हैं। उसके बाद इस शाखा पर रंग-बिरंगे कपड़े बांधे जाते हैं। बता दें कि इसी शाखा को प्रह्लाद का रूप माना जाता है।

🤗होलाष्टक का वैज्ञानिक महत्व 
✍️होलाष्टक के पीछे एक वैज्ञानिक महत्व भी बताया जाता है जिसके अनुसार ये वो समय होता है जब मौसम में परिवर्तन हो रहा होता है। मौसम परिवर्तन के चलते हमारा मन कभी अशांत, कभी उदास तो कभी चंचल होता है। ऐसे में इस समय में किये हुए किसी भी काम का परिणाम शुभ नहीं हो सकता है , इसलिए अगर इस दौरान शुभ काम ना ही किये जाये तो बेहतर होगा। इस समय में अगर वो काम किये जाएं जो इंसान के मन को ख़ुशी देते हैं तो ज़्यादा बेहतर होगा, इसलिए होलाष्टक के ख़त्म होते ही रंग खेलकर खुशियाँ मनाने का रिवाज़ है।  
होलाष्टक के पीछे एक और वैज्ञानिक महत्व यह भी बताया जाता है जिसके अनुसार होलाष्टक के पहले दिन यानि कि फाल्गुन शुक्लपक्ष की अष्टमी को चंद्रमा अपने उग्र रूप में रहता है। इसके बाद नवमी को सूर्य उग्र रूप में रहता है, इसी तरह दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु का उग्र रूप रहता है। 

✍️बताया जाता है कि इसी वजह से इन आठ दिनों में इंसान के दिमाग में अजीबोगरीब विकार, शंका, इत्यादि उत्पन्न होते रहते हैं। ऐसे में मुमकिन है कि इस दौरान शुरू किये गए काम बनने से पहले ही बिगड़ जाएं इसलिए बेहतर होता है यदि हम इस दौरान कोई नया या शुभ काम शुरू ही ना करें। 

🤔होलाष्टक के समाप्त होने पर लोग रंग-अबीर उड़ा कर इस बुरे समय बीत जाने का जश्न मनाते हैं और खुशियों में डूब जाते हैं।

*☺️विशेष उपरोक्त जानकारी वैदिक मत के अनुसार दी गई है ।जैन धर्म के अनुसार नहीं है ।☺️*

*🙏🙏 शुभम् भवतु 🙏🙏*

🌍🌞🌝🍏 *नोट:- सभी जटिल समस्याओ के लिए आप अपनी समस्या व विवरण वाँटस्एप द्वारा 09982411713 नंबर पर  करके, इमरजेंसी काँल केलिए मध्यान्ह 4 से 5 में सम्पर्क कर सकते है*।🍭🔆⚽

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सोमवार, 24 फ़रवरी 2020

धर्म ध्यान।

*🕉️⏰✍आपकी सोच कैसी हो✍⏰🌞*

*निवेदन🙏 है कि हमें सुबह और सायंकाल आरती के वक्त मंदिर पास हो वहाँ पहुंचना चाहिए. कुछ मंदिर हैं देश में जहाँ लोग घण्टों दर्शन के लिए खड़े रहते हैं, पर हमारे पास मंदिरों के लिए समय ही नहीं है। वहाँ आरती के वक्त झालर, शंख, नगाड़ा बजाने को हमलोग नहीं होते। *

*😓आओ प्रयत्न करें। अपने व्यस्त समय में से कुछ समय धर्म की रक्षा राष्ट्र की एकता, अखंडता अपने संस्कारों हेतु निकालें*

*दो मिनट मंदिरों के लिए.स्वयं की आत्म शांति केलिए*🙏 🤔🌞🤗✍️

*💐सोच मित्रता की*💐

*⏰एक बार एक केकड़ा समुद्र किनारे अपनी मस्ती में चला जा रहा था और बीच बीच में रुक कर अपने पैरों के निशान देख कर खुश होता....*

*🐱आगे बढ़ता पैरों के निशान देखता और खुश होता इतने में एक लहर आई और उसके पैरों के सभी निशान मिट गये*....

*😛इस पर केकड़े को बड़ा गुस्सा आया उसने लहर से कहा ऐ लहर मैं तो तुझे अपना मित्र मानता था पर ये तूने क्या किया मेरे बनाये सुंदर पैरों के निशानों को ही मिटा दिया कैसी दोस्त हो तुम...*

*⏰तब लहर बोली वो देखो पीछे से मछुआरे पैरों के निशान देख कर केकड़ों को पकड़ने आ रहे हैं हे मित्र, तुमको वो पकड़ न लें, बस इसीलिए मैंने निशान मिटा दिए ये सुनकर केकड़े की आँखों में आँसू आ गये...*

*🥰सच यही है कई बार हम सामने वाले की बातों को समझ नहीं पाते और अपनी सोच के अनुसार उसे गलत समझ लेते हैं। जबकि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं अतः मन में बैर लाने से बेहतर है कि हम सोच समझ कर निष्कर्ष निकालें...*

*😇सदैव प्रसन्न रहिये!!!*

*✍जो प्राप्त है- वहीं पर्याप्त है!!!*

*😇इस पोस्ट को अपने अच्छे दोस्तो को व्हाट्सएप, फेसबुक पर भी शेयर करे। आपको भी पुण्य लाभ मिलेगा। * 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

कृष्ण लीला

*🕉️🌹🌞कृष्ण लीला🌞🌹🕉️*

*🌻#भक्तताजखाँ_ की _भक्तिका फल🌻*

*➡️ताज खां नामक एक मुस्लिम राजस्थान के करौली नगर की कचहरी में चपरासी के रूप में नियुक्त थे। *

*🌞एक बार वे कचहरी के काम से मदनमोहन मंदिर के पुजारी गोस्वामी जी के पास आए और मंदिर के बाहर खड़े होकर पुजारी जी को आवाज लगाने लगे। अचानक उनकी नजर मंदिर में स्थित भगवान श्री राधा मदनमोहन (श्रीकृष्ण) जी पर चली गई। 🎋*

*✍भगवान श्रीकृष्ण के रूप सौंदर्य की एक झलक पाते ही उनका दिल उनका दीवाना बन बैठा। वे उनके मुख मंडल की और टकटकी लगाकर निहारते ही रह गए। जब पुजारी जी मंदिर से बाहर आए तो उनका ध्यान भंग हुआ और कचहरी का संदेश उन्हें देकर वे चले गए। 🎋*

*😛ताज खां वहाँ से चले तो गए, लेकिन उनका दिल फिर से भगवान श्रीकृष्ण की उसी साँवली सलोनी छवि को देखने के लिए रह-रहकर मचलने लगा। न उन्हें दिन को चैन था और न रात को। उनके दिमाग में मदनमोहन जी की छवि बार-बार नाचने लगी। 🎋*

*✍अब ताज खां इस ताक में रहने लगे कि किसी न किसी तरह हर रोज इस सुंदर छबि के दर्शन किए जाएं, *

*👨‍👨‍👦‍👦मुस्लिम होने के कारण वे मंदिर में प्रवेश तो नहीं कर सकते थे, अतः वे मंदिर के बाहर टहलते रहते और जब कोई निकट न होता तो मदनमोहनजी को निहारने लगते, लेकिन प्रेम लाख छिपाने पर भी भला छिपता कहाँ है🎋*
*🚴पुजारी जी को आखिर पता चल ही गया कि यह मुस्लिम छिप-छिपकर हमारे मदनमोहन जी का दर्शन करता है, *

*😓उन्होंने ताज खां को मंदिर आने से मना कर दिया। मना करने के बावजूद ताज खां का दिल न माना और वे भगवान के रूप की एक झाँकी देखने के लिए मंदिर पहुंच गए। किंतु मंदिर के एक कार्यकर्ता ने उन्हें वहाँ से धक्का मार कर भगा दिया। 🎋*

*🐱ताज खां अगले दिन मंदिर नहीं गए, तो उनका दिल मदनमोहन जी को देखने के लिए तड़पने लगा। वे उन्हें याद कर-कर के फूट-फूटकर रोने लगे। अपने दिल का हाल बताएं भी तो किसे बताएं? अन्न-जल त्यागकर मदन मोहन जी से ही दर्शन की प्रार्थना करने लगे। भक्त की करूण पुकार सुनकर भगवान का हृदय पसीज उठा🎋*

*😇इधर मदनमोहन मंदिर में रात की आरती के बाद भगवान के सामने प्रसाद का थाल रखकर दरवाजा बाहर से बंद कर दिया गया। भगवान मदनमोहनजी ने मंदिर के कार्यकर्ता का रूप धारण किया और प्रसाद का थाल लेकर अपने भक्त ताज खां के घर जा पहुंचे। 🎋*

*⏰भगवान ने जब ताज खां के घर का दरवाजा खटखटाया, उस समय भी वे भगवन के दर्शन के लिए तड़प रहे थे। भगवान ने ताज खां के हाथ में थाल देकर कहा, "पुजारी जी ने आपके लिए प्रसाद भेजा है। आप प्रसाद ग्रहण कर लें और सुबह थाल लेकर मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए पधारें। 🎋*

*➡️ताज खां को तो विश्वास ही नहीं हो पाया कि जिन पुजारी जी ने उन्हें मंदिर में बाहर से ही भगवान को निहारने से मना कर दिया था, उन्हीं ने उनके लिए इतनी आधी रात में प्रसाद का थाल भेजा है। 🎋*

*🕉️किंतु जब मंदिर के कार्यकर्ता का रूप धारण किये हुए भगवान ने आग्रह किया तो उनकी बात मानकर ताज खां ने भावुक मन से प्रसाद ग्रहण कर लिया। इसके बाद भगवान वहाँ से चले गये। 🎋*

*🤗अब भगवान ने मंदिर के पुजारी जी को सपने में दर्शन देकर कहा, "प्रसाद का थाल मैं ताज खां को दे आया हूँ। सुबह जब वे प्रसाद का थाल लेकर मंदिर में आएं तो उन्हें मेरे दर्शन से वंचित न करना। पुजारी जी ने सुबह उठकर देखा तो मंदिर में प्रसाद का थाल नहीं था। वे चकित हो उठे और दौड़े हुए करोली बाले महाराज के पास गये और उन्होंने सारी घटना कह सुनाई। 🎋*

*🙌महाराज भी एक मुस्लिम पर भगवान की कृपा को देखकर भाव विभोर हो उठे। दोनों मंदिर में ताज खां की प्रतीक्षा करने लगे। जब ताज खां पूजा के समय हाथ में प्रसाद का थाल लिए मंदिर में घुसे तो सभी उपस्थित भक्तजन आश्चर्यचकित रह गए। महाराज दौड़कर आगे बढ़े और भगवान मदनमोहन जी के सच्चे भक्त ताज खां को गले से लगा लिया। 🎋*
*😊जब सभी श्रद्धालुओं को इस घटना का पता चला तो वे भक्त ताज खां की जय-जयकार करने लगे। आज भी करौली के मदनमोहन मंदिर में जब शाम की आरती होती है, तो इस दोहे को गाकर भक्त ताज खां को याद किया जाता है। 🎋*
*🌻ताज भक्त मुसलिम पै प्रभु तुम दया करी। 🌻*
*🌻भोजन लै घर पहुंचे दीनदयाल हरी॥🌻*
*🌹#बोलिये_मदन_मोहन_सरकार_की_जै...🌹🙏🙏*

रविवार, 23 फ़रवरी 2020

संबंध में अपनत्व की खुशबू।

*🕉️संबंध में अपनत्व की खुशबू✍️*

*दुल्हन ने विदाई के वक़्त शादी को किया नामंजूर*❗
❗ (कहानी आपको सोचने पर विवश करेगी, अगर आप एक बेटी के माता-पिता है तो आंखें भीग जाएगी। ) शादी के बाद विदाई का समय था, नेहा अपनी माँ से मिलने के बाद अपने पिता से लिपट कर रो रही थीं। वहाँ मौजूद सब लोगों की आंखें नम थीं। नेहा ने घूँघट निकाला हुआ था, वह अपनी छोटी बहन के साथ सजाई गयी गाड़ी के नज़दीक आ गयी थी। दूल्हा अविनाश अपने खास मित्र विकास के साथ बातें कर रहा था। विकास -'यार अविनाश... सबसे पहले घर पहुंचते ही होटल अमृतबाग चलकर बढ़िया खाना खाएंगे... यहाँ तेरी ससुराल में खाने का मज़ा नहीं आया। ' तभी पास में खड़ा अविनाश का छोटा भाई राकेश बोला -'हा यार..पनीर कुछ ठीक नहीं था...और रस मलाई में रस ही नहीं था। ' और वह ही ही ही कर जोर जोर से हंसने लगा। अविनाश भी पीछे नहीं रहा -'अरे हम लोग अमृतबाग चलेंगे, जो खाना है खा लेना... मुझे भी यहाँ खाने में मज़ा नहीं आया..रोटियां भी गर्म नहीं थी...। ' अपने पति के मुँह से यह शब्द सुनते ही नेहा जो घूँघट में गाड़ी में बैठने ही जा रही थी, वापस मुड़ी, गाड़ी की फाटक को जोर से बन्द किया... घूँघट हटा कर अपने पापा के पास पहुंची...। अपने पापा का हाथ अपने हाथ में लिया..'मैं *ससुराल नहीं जा रही पिताजी... मुझें यह शादी मंजूर नहीं। * यह शब्द उसने इतनी जोर से कहे कि सब लोग हक्के बक्के रह गए...सब नज़दीक आ गए। नेहा के ससुराल वालों पर तो जैसे पहाड़ टूट पड़ा... मामला क्या था यह किसी की समझ में नहीं आ रहा था। तभी नेहा के ससुर राधेश्यामजी ने आगे बढ़कर नेहा से पूछा -- 'लेकिन बात क्या है बहू? शादी हो गयी है...विदाई का समय है अचानक क्या हुआ कि तुम शादी को नामंजूर कर रही हो?' अविनाश की तो मानो दुनिया लूटने जा रही थी...वह भी नेहा के पास आ गया, अविनाश के दोस्त भी। सब लोग जानना चाहते थे कि आखिर एन वक़्त पर क्या हुआ कि दुल्हन ससुराल जाने से मना कर रही है। नेहा ने अपने पिता दयाशंकरजी का हाथ पकड़ रखा था... नेहा ने अपने ससुर से कहा -'बाबूजी मेरे माता पिता ने अपने सपनों को मारकर हम बहनों को पढ़ाया लिखाया व काबिल बनाया है। आप जानते है एक बाप के लिए बेटी क्या मायने रखती है?? आप व आपका बेटा नहीं जान सकते क्योंकि आपके कोई बेटी नहीं है। ' नेहा रोती हुई बोले जा रही थी- 'आप जानते है मेरी शादी केलिए व शादी में बारातियों की आवाभगत में कोई कमी न रह जाये इसलिए मेरे पिताजी पिछले एक साल से रात को 2-3 बजे तक जागकर मेरी माँ के साथ योजना बनाते थे... खाने में क्या बनेगा...रसोइया कौन होगा...पिछले एक साल में मेरी माँ ने नई साड़ी नहीं खरीदी क्योकि मेरी शादी में कमी न रह जाये... दुनिया को दिखाने केलिए अपनी बहन की साड़ी पहन कर मेरी माँ खड़ी है... मेरे पिता की इस डेढ़ सौ रुपये की नई शर्ट के पीछे बनियान में सौ छेद है.... मेरे माता पिता ने कितने सपनों को मारा होगा...न अच्छा खाया न अच्छा पीया... बस एक ही ख्वाहिश थी कि मेरी शादी में कोई कमी न रह जाये...आपके पुत्र को रोटी ठंडी लगी!!! उनके दोस्तों को पनीर में गड़बड़ लगी व मेरे देवर को रस मलाई में रस नहीं मिला...इनका खिलखिलाकर हँसना मेरे पिता के अभिमान को ठेस पहुंचाने के समान है...। नेहा हांफ रही थी...। ' नेहा के पिता ने रोते हुए कहा -'लेकिन बेटी इतनी छोटी सी बात..। ' नेहा ने उनकी बात बीच मे काटी -'यह छोटी सी बात नहीं है, *पिताजी...मेरे पति को मेरे पिता की इज्जत नहीं...*

रोटी क्या आपने बनाई! रस मलाई ... पनीर यह सब केटर्स का काम है... आपने दिल खोलकर व हैसियत से बढ़कर खर्च किया है, कुछ कमी रही तो वह केटर्स की तरफ से... आप तो अपने दिल का टुकड़ा अपनी गुड़िया रानी को विदा कर रहे है??? *आप कितनी रात रोयेंगे क्या मुझे पता नहीं... माँ कभी मेरे बिना घर से बाहर नहीं निकली... कल से वह बाज़ार अकेली जाएगी... जा पाएगी?* जो लोग पत्नी या बहू लेने आये है वह खाने में कमियां निकाल रहे... कोई कमी आपने नहीं रखी, यह बात इनकी समझ में नहीं आई??' दयाशंकर जी ने नेहा के सर पर हाथ फिराया - 'अरे पगली... बात का बतंगड़ क्यों बना रही हो.... *मुझे तुझ पर गर्व है कि तू मेरी बेटी है लेकिन बेटा इन्हें माफ कर दे.... तुझे मेरी कसम, शांत हो जा। '* तभी अविनाश ने आकर दयाशंकर जी के हाथ पकड़ लिए -मुझें माफ़ कर दीजिए बाबूजी...मुझसे गलती हो गयी...मैं ...मैं, उसका गला बैठ गया था..रो पड़ा था वह। तभी राधेश्यामजी ने आगे बढ़कर नेहा के सर पर हाथ रखा - *मैं तो बहू लेने आया था* *लेकिन ईश्वर बहुत* *कृपालु है उसने मुझे बेटी दे दी... व बेटी की अहमियत भी समझा दी...* मुझे ईश्वर ने बेटी नहीं दी शायद इसलिए कि तेरे जैसी बेटी मेरी नसीब में थी...अब बेटी इन नालायकों को माफ कर दें... *मैं हाथ जोड़ता हूँ तेरे सामने... मेरी बेटी नेहा मुझे लौटा दे। '* और दयाशंकर जी ने सचमुच हाथ जोड़ दिए थे व नेहा के सामने सर झुका दिया। नेहा ने अपने ससुर के हाथ पकड़ लिए...'बाबूजी। ' राधेश्यामजी ने कहा - *'बाबूजी नहीं..पिताजी। ' नेहा भी भावुक होकर राधेश्याम जी से लिपट गयी थी। दयाशंकर जी ऐसी बेटी पाकर गौरव की अनुभूति कर रहे थे। * नेहा अब राजी खुशी अपने ससुराल रवाना हो गयी थीं... पीछे छोड़ गयी थी आंसुओं से भीगी अपने माँ पिताजी की आंखें, अपने पिता का वह आँगन जिस पर कल तक वह चहकती थी.. *आज से इस आँगन की चिड़िया उड़ गई थी किसी दूर प्रदेश में.. और किसी पेड़ पर अपना घरौंदा बनाएगी। * यह कहानी लिखते वक्त मैं उस मूर्ख व्यक्ति के बारे में सोच रहा था जिसने बेटी को सर्वप्रथम 'पराया धन' की संज्ञा दी होगी। बेटी *माँ बाप का अभिमान व अनमोल धन होता है, पराया धन नहीं। * कभी हम शादी में जाये तो ध्यान रखें कि पनीर की सब्ज़ी बनाने में एक पिता ने कितना कुछ खोया होगा व कितना खोएगा... *अपना आँगन उजाड़ कर दूसरे के आंगन को महकाना कोई छोटी बात नहीं। * खाने में कमियां न निकाले...। बेटी की शादी में बनने वाले पनीर, रोटी या रसमलाई पकने में उतना समय लगता है जितनी लड़की की उम्र होती है। यह भोजन सिर्फ भोजन नहीं, पिता के अरमान व जीवन का सपना होता है। बेटी की शादी में बनने वाले पकवानों में स्वाद कहीं सपनों के कुचलने के बाद आता है व उन्हें पकने में सालों लगते है, बेटी की शादी में खाने की कद्र करें। *

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*जरुर करना। * 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

कुष्ठ रोग का देसी उपाय।

*😊कुष्ठ रोग का घरेलू उपाय✍️*

*_🚩कुष्ठ रोग के आयुर्वेदिक उपचार🚩_*
*सात्विक आहार*
*स्वस्थ जीवन का आधार*

*☺️बरगद का दूध कुष्ठ रोगों की रामबाण औषधि है। यह गम्भीर से गम्भीर और पुराने से पुराना कुष्ठ रोग ठीक कर देता है। इसके लिए कुष्ठ प्रभावित भाग को साफ करके उस पर बरगद के दूध का लेप करना चाहिए और इस पर बरगद की छाल की लुगदी (कल्क) बनाकर बाँधना चाहिए। यह उपचार एक सप्ताह से दो सप्ताह तक किया जाना चाहिए। *पुराने से पुराने कुष्ट रोग सोराइसिस, एलर्जी, दाद, त्वचा पर दाने, खुजली, त्वचा काली पड़ना आदि त्वचा रोगों से पीड़ित रोगी शुद्ध आयुर्वेदिक उपचार के लिए सम्पर्क करें*

*_श्री जी आयुर्वेद_* *_पत्थर मन्ड़ी बडौत_* *_इंडिया नहीं भारत बोलो🇮🇳_* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️

शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2020

दालचीनी के फायदे और नुकसान।

*🙏🏼शुभम भवतु, जय जिनेन्द्र 🙏🏼*

*🌹🕉️स्वास्थ्यवर्धक दालचीनी✍🌹*

*😇दालचीनी स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है। आर्थराइटिस यानि गठिया का दर्द हो या बालों के टूटने, झड़ने की समस्या दालचीनी से हमें बहुत फायदे होते हैं। भारत में सदियों से दालचीनी का इस्तेमाल होता चला आ रहा है। आयुर्वेद में तो इसे लाख दवाओं की एक दवा बताते हैं। *

*🌹दालचीनी के औषधीय उपयोग और घरेलू नुस्खे🌹*

*😛#दालचीनी के पत्तों अथवा उसकी छाल को चूर्ण के रूप में अथवा काढ़ा बनाकर प्रयोग में लिया जाता हैं। *

*👨‍👨‍👦‍👦😛दालचीनी प्रयोग से 👉🏽अफारा दूर होता है और मूत्र खुलकर आता है। दालचीनी के उचित और निरन्तर प्रयोग से शारीरिक तनाव में कमी आती है तथा व्यक्ति के रंग, रूप और स्मरण शक्ति में भी विकास होता है। हड्डियों की मजबूती के लिए सदियों से दालचीनी वाले दूध का प्रयोग होता आ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो इस दूध के नियमित सेवन से गठिया की समस्या नहीं होती है। *

*👁😓सरदर्द:- दालचीनी को पानी में खूब बारीक पीसकर लेप बनाकर सर पर लगाने से सरदर्द में काफी फायदा होता है। *

*🤗कफ खांसी:- बलगम वाली खांसी या कफ होने पर दालचीनी, अदरक, लौंग, इलायची को गर्म पानी में चाय की तरह उबालकर और छानकर पियें*

*👨‍👨‍👦‍👦एक चौथाई चम्मच दालचीनी पाउडर इतनी ही मात्रा में मुलेठी और चाशनी के साथ पानी में मिला लीजिए। अब रोज सोने से पहले एक चम्मच इस मिश्रण का सेवन करने से खांसी में बेहतरीन फायदा होता है। *

*➡️😓पुरानी खांसी के लिए रामबाण औषधि – दाल चीनी एक भाग, छोटी इलायची दो भाग, छोटी पीपली चार भाग और वंशलोचन-आठ भाग इन सब सामग्रियों को लेकर सबका खूब बारीक चूर्ण बनाएँ, मिश्री सोलह भाग लेकर बारीक चूर्ण बनाकर सभी औषधियों के साथ अच्छी तरह मिलाकर काँच की बोतल में सुरक्षित रख लें। इस चूर्ण को सुबह तथा रात को सोते समय खाली पेट 1 चम्मच की मात्रा में चाशनी के साथ चाटें। इस प्रयोग से दो-तीन दिन में ही खाँसी ठीक कर देता है। *

*🚴👨‍👨‍👦‍👦✍यह हर्ब प्राकृतिक रूप से मिठास लिए होता है। यह थकान में बहुत फायदेमंद होती है। इसमें फाइबर आहार खूब होता है; जो हमारी सेहत के लिए अत्यंत लाभदायक होता है। इस कारण दालचीनी विभिन्न रोगों के लिए प्राकृतिक दवा के रूप में प्रयोग में लाई जाती है। इसके अलावा इसे और भी स्वास्थ्य संबंधी उपचार में प्रयोग किया जाता है, जैसे कोलेस्ट्रॉल को कम करने, जुकाम को नियंत्रित करने, पाचन क्रिया के सुधार के लिए, मोटापे को कम करने के लिए आदि। *

*✍👩‍🦰मधुमेह:- दालचीनी मधुमेह रोगियों के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है। इस में एंटी-इंफ्लेमेटरी पाए जाते हैं, जिसके कारण यह हृदय संबंधी रोगों में सुधार करती है और खून में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करती है। *

*🐱गर्भ निरोधक:- कुछ चिकित्सकों को मानना है कि बच्चा पैदा होने के बाद यदि स्त्रियां दालचीनी के चूर्ण का नियमित रूप से उपयोग करती रहेंगी, तो गर्भ निरोध में सहायता मिलती है। इसका कारण यह है कि इसके चूर्ण को लेने से गर्भ के पश्चात् मासिक धर्म की शुरूआत देर से होती है और मासिक धर्म के बाद ही गर्भधारण किया जा सकता है। *

*🕉️पाचनशक्ति:- दालचीनी वाला दूध पीने से पाचन शक्ति मजबूत होती है। एक चम्मच दालचीनी के चूर्ण को पानी में उबालकर ठंडा करके खाने के आधा घंटा बाद लेने से अफारा और अपच दूर होता है। *

*✊मोटापा:- मोटे लोगों की दाल-चीनी का प्रयोग करना चाहिए। अगर आप चाय पीते हैं तो चाय में और भोजन में इसका पाउडर मिला लें। यह शरीर में जमी चर्बी को कम करता है। *

*😓मलेरिया:- अगर किसी व्यक्ति को मलेरिया का बुखार होता है तो इसमें यह फायदेमंद होती है और इससे राहत मिलती है। *

*😇त्वचा रोग:- दालचीनी वाला दूध पीने से बालो और त्वचा से जुड़ी लगभग सभी समस्या दूर होती हैं। इसका एंटी-बैक्टीरियल गुण और बालों को इंफेक्शन से सुरक्षित रखता है, जिससे त्वचा और बाल स्वस्थ रहते हैं। कील-मुंहासे की समस्या से छुटकारा पाने के लिए दालचीनी के चूर्ण में थोड़ा नींबू का रस मिलाकर कील-मुंहासे पर लगाने से कुछ दिनों में ही चेहरा साफ हो जाता है। *

*👩‍🦰अन्य लाभ:- दालचीनी के प्रयोग से दमा, मासिक धर्म अधिक आना और गर्भाशय सम्बंधी रोगों के उपचार में भी होता है। *

*⏰#दालचीनी के पाउडर से प्रतिदिन मसूडो की मालिश करें इससे इनकी मजबूती बनी रहेगी। *

*➡️इसके साथ ही यह गैस की परेशानी से भी राहत देने का काम करता है। *

*🌞दालचीनी से मुंह की बदबू से भी छुटकारा मिलता है। बदहजमी अथवा बुखार के कारण गला सूख गया हो तो इसका एक टुकड़ा मुंह में रखने से प्यास बुझती है तथा मीठा उत्तम स्वाद उत्पन्न होता है। इससे मसूढ़े भी मजबूत होते हैं और दुर्गन्ध भी चली जाती है। *

*➡️दालचीनी, सोंठ, जीरा और इलायची को बराबर मात्रा में लेकर इसका चूर्ण बनाएं। इसे नियमित रूप से आधा चम्मच की मात्रा में पानी के साथ लेते रहने से कब्ज दूर रहता है। दालचीनी और कत्था समान मात्रा में लेकर पानी के साथ लेने से दस्त बंद हो जाते हैं। पित्त की अधिकता के कारण उल्टियां होने पर दालचीनी को चाशनी में मिलाकर लेने से उल्टियां बंद हो जाती हैं। *

*🌹दालचीनी से हानि और सावधानी🌹*

*☸️🤔दाल चीनी की तासीर गर्म होती है तथा रक्त में पित्त की मात्रा बढ़ाने वाली होती है। इसके अधिक सेवन से शरीर में गरमी पैदा होती है। अत: गरमी के दिनों में इसका लगातार सेवन न करें। और सर्दियों में भी इसकी उचित मात्रा का ही सेवन करें। *

*👨‍👩‍👧‍👦दालचीनी का सेवन करने में स्तनपान करा रही माताओं और गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए*

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2020

वासनत्मक प्यार की सच्चाई।

*🕉️वासनात्मक प्यार की सच्चाई😛*

*🚃"बेबी(मेरी प्राणप्रिय)......🚃*

*⏰रात के 11 बज रहे थे उसका फोन आया "हेल्लो" किसी ने फुसफुसा-हट भरे लफ्जों में कहा...*

*📞"हाँ... बोलो...उसने भी होले से कहा..*

*😊"सब तैयारी हो गई क्या...*

*🥰सुबह 4 बजे की बस है "मैंने अपने कपड़ों का बैग तो पैक कर लिया है बस पैसे और गहने लेने है..*

*👁"अपने सब डॉक्यूमेंट भी ले लेना, हो सकता है दोनों को नौकरी करनी पड़े, नया घर संसार जो बसाना है...*

*🌝"ओके, मैं सबकुछ लेकर तुम्हे कॉल करती हूँ...*

*😇उसने सबसे पहले माँ की अलमारी खोली, और उसमें से गहनों का डिब्बा निकाला, अपने लिए बनवाया गया मंगलसूत्र बैग में डाला, अंगूठी और झुमके पहन लिए, चूड़ियों का डिब्बा उठाकर बैग में डाल रही थी कि माँ की तस्वीर नीचे गिर पड़ी ...*

*👩‍🦰उसे याद आया माँ की बरसों की इच्छा थी सोने का चूड़ा पहनने की, मगर जब पापा का एरियर मिला था तो जो चूड़ा बनवाया गया वो माँ ने ये कहकर उसके लिए सम्भाल कर रख दिया था कि जब बिट्टू इंजीनियरिंग करके नोकरी लग जायेगा खूब सारे बनवा लुंगी, अभी तो तेरी शादी के लिए रख लेती हूँ मेरी लाडो कितनी सुंदर लगेगी....*

*🥰उसने तस्वीर वापस अलमारी में रखी और चूड़ा बैग में रख लिया। *

*🐱➡️अब बारी थी नकदी की, घर मे 75000 पड़े थे पापा कल ही बैंक से एज्युकेशन लोन लेकर आये थे, बिट्टू का आई आई टी का दूसरा साल चल रहा था, घर के रुपये पैसे का हिसाब और चाबी उसी के पास रहती थी....*

*👨‍👨‍👦‍👦पापा हमेशा कहते हैं, जब ये पैदा हुई उससे पहले मैं स्टेशन पर कुली का काम करता था, जैसे ही ये पैदा हुई मेरी सरकारी नौकरी लग गई, यही मेरे भाग्य की देवी है, मेरी लाडो बेटी....*

*💪⏰उसने अपने सभी डॉक्यूमेंट बैग में रख लिए, अब उसे चैक करना था की घर मे जाग तो नहीं है सब सो तो रहे हैं ना, सबसे पहले उसने बिट्टू के कमरे के दरवाजे से अंदर झांका, बिट्टू अभी तक पढ़ रहा था, उसकी खाने की थाली वैसे ही ढकी पड़ी थी जैसी वो रखकर आई थी। अगले कमरे में झांका माँ गहरी नींद सोई थी दवा लेकर ....*

*⏰मां हमेशा कहती है इस दवा में कोई गड़बड़ है जो नींद बहुत आती है ये मुई शुगर भी बुरी बीमारी है लगकर खत्म ही नहीं होती, दरवाज़े की झिर्री में से पापा दिखाई दे रहे थे, वो अपनी वर्किंग टेबल पर बैठे व्यापारियों का बही खाता तैयार कर रहे थे, अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने ये नया काम ढूंढा था....*

*🧛‍♂पापा कहते है कॉमर्स पढ़ा हूँ बही खाते भूलने लगा था ....*

*✊चलो इससे भूलूंगा भी नहीं और एक्स्ट्रा इनकम भी हो जाएगी। *

*🤗सब अपने काम मे व्यस्त थे वो अपने कमरे में आई और उसे फोन लगाया "सब रास्ते साफ हैं, सब अपने काम में लगे है मैं चुपचाप घर से बाहर निलकुंगी उससे पहले फोन करके बता दूंगी....*

*😛"अच्छा तुमने गहने और पैसे ले लिए ना....*

*👩‍🦰"हाँ ले लिए तुम बारबार गहनों और पैसों का क्यूँ पूछ रहे हो, मैंने कहा ना ले लिए....*

*😓"अरे (मेरी प्राणप्रिय)बेबी वो इसलिये की नया घर संसार बसाना है, नई जगह जाते ही काम थोड़े मिल जाएगा, तो हमें घर के रूटीन कामों के लिए पैसा तो चाहिए ही मेरा मोबाईल भी बहुत पुराना है मुझे नया मोबाइल भी लेना है और फिर मैं कोई न कोई नौकरी पकड़ लूंगा, जिससे हम आराम से जिंदगी गुजारेंगे....*

*🌝"सुनो एक बात पूछुं क्या तुम में इतनी हिम्मत नहीं कि मुझे कमा कर अपने पैसे से रख सको, खाना खिला सको....*

*🌞"ऐसी बात नहीं (मेरी प्राणप्रिय)बेबी तुम बिन रहा नहीं जाता, और हम जाते ही मंदिर में शादी कर लेंगे ओर काम मिलेगा तो आराम से जिएंगे ना....*

*😇"सुनो तुम एक काम करो, अभी भागने का प्लान कैंसल करते हैं, पहले तुम काम करो और इतना पैसा कमा कर इकट्ठे कर लो कि 12 महीने तक काम ना भी मिले तो हमें भूखों मरने की नौबत न आये, जैसे ही तुम पैसा इकट्ठा कर लोगे हम भाग चलेंगे, तब तक इंतजार करो, दो-चार महीने तक न कर पाए तो मुझे भूल जाना। ....*

*➡️"अरे बेबी, बात तो सुनो, मेरी बात….*

*⏰👩‍🦰लड़की ने फोन काट दिया वो अपने पिता के कमरे में झांक आई, वो अभी भी बहीखाता कर रहे थे। उसने दरवाजा खटखटाया, "क्या बात है लाडो, सोई नहीं तुम... "पापा एक बात कहनी है...*

*"कहो लाडो। " "पापा जब तक बिट्टू की पढ़ाई पूरी न हो मैं नौकरी करना चाहती हूँ, मेरी पढ़ाई पूरी हो चुकी है घर में बेकार बैठने से क्या फायदा, घर में दो रुपये जुड़ेंगे ही। " उसकी बात सुनकर पापा ने लाडो के सर पर स्नेह से हाथ फिरा दिया पापा बेटी दोनों की आँखें नम थी....*

*🤗मित्रों इसके आगे की कहानी आप लोगों के साथ जो भी घटित हुआ है। वह आप जान सकते हो यहां कमेंट में अपनी आपबीती या अनुभव लिखना चाहो तो अवश्य लिखकर अपने मन का बोझ हल्का कर सकते हो। ✍*

*🙌इस कथानक से आप यह शिक्षा ले सकते हो कि हमने अपना वर्तमान बर्बाद नहीं किया है। अब हम किसी का भी वर्तमान खराब नहीं होने देंगे, ताकि हमारा भविष्य अच्छा बना रहे, यही कामना आपसे व आप सभी केलिए भगवान से हम प्रार्थना करते हैं। *

*🌝➡️अगर आप किसी प्रकार की उलझन में फंसे हुए हैं। जिसका हल नहीं निकल पा रहा है तो आप हमारे व्हाट्सएप नंबर 09982411713 पर अपनी समस्या लिख भेजें ताकि जब भी हमें समय मिलेगा तो हम आपकी समस्या को सुलझाने का प्रयास करेंगे। *
धन्यवाद.......

*✍आपसभी का शुभचिंतक✍*

*🕉️सेवाव्रर्ती स्वामीजी🌞*

*✍✍😛एक वर्तमान की सुंदर रचना😓....✍🏻✍🏻....*

बुधवार, 19 फ़रवरी 2020

सच्चे कर्म ही सच्चे भगवान हैं।

*🤗सच्चेकर्म ही सच्चेभगवान है🌞*

*🕉️एक बार भगवान नारायण लक्ष्मी जी से बोले, “लोगो में कितनी भक्ति बढ़ गयी है …. सब “नारायण नारायण” करते हैं !”* ..

*👩‍🦰तो लक्ष्मी जी बोली, “आप को पाने के लिए नहीं!, मुझे पाने के लिए भक्ति बढ़ गयी है!”* ..

*⏰तो भगवान बोले, “लोग “लक्ष्मी लक्ष्मी” ऐसा जाप थोड़े ही ना करते हैं !”* ..

*🐱तो माता लक्ष्मी बोली कि, “विश्वास ना हो तो परीक्षा हो जाए!”* ..

*➡️भगवान नारायण एक गाँव में ब्राह्मण का रूप लेकर गए…एक घर का दरवाजा खटखटाया…घर के यजमान ने दरवाजा खोल कर पूछा, “क्या काम है भाई ?”*

*✊तो …भगवान बोले, “हम तुम्हारे नगर में भगवान की कथा-कीर्तन करना चाहते है…”* ..

*😃यजमान बोला, “ठीक है महाराज, जब तक कथा होगी आप मेरे घर में रहना…”*

… *➡️गाँव के कुछ लोग इकट्ठा हो गये और सब तैयारी कर दी….पहले दिन कुछ लोग आये…अब भगवान स्वयं कथा कर रहे थे तो संगत बढ़ी ! दूसरे और तीसरे दिन और भी भीड़ हो गयी….भगवान खुश हो गए..कि कितनी भक्ति है लोगो में….!*

*⏰लक्ष्मी माता ने सोचा अब देखा जाये कि क्या चल रहा है। * ..

*😃लक्ष्मी माता ने बुढ्ढी माता का रूप लिया….और उस नगर में पहुंची…. एक महिला ताला बंद कर के कथा में जा रही थी कि माता उसके द्वार पर पहुंची ! बोली, “बेटी ज़रा पानी पिला दे!”*

*👩‍🦰तो वो महिला बोली, ”माताजी, साढ़े 3 बजे है…मेरे को प्रवचन में जाना है!”* ..

*👩‍🦰लक्ष्मी माता बोली..”पिला दे बेटी थोडा पानी…बहुत प्यास लगी है..”* *😓तो वो महिला लौटा भर के पानी लायी….माता ने पानी पिया और लौटा वापिस लौटाया तो सोने का हो गया था!!* ..

*😛यह देख कर महिला अचंभित हो गयी कि लौटा दिया था तो स्टील का और वापस लिया तो सोने का ! कैसी चमत्कारिक माता जी हैं !..अब तो वो महिला हाथ-जोड़ कर कहने लगी कि, “माताजी आप को भूख भी लगी होगी ..खाना खा लीजिये..!” ये सोचा कि खाना खाएगी तो थाली, कटोरी, चम्मच, गिलास आदि भी सोने के हो जायेंगे। *

*➡️माता लक्ष्मी बोली, “तुम जाओ बेटी, तुम्हारा प्रवचन का टाइम हो गया!”* ..

*🕉️वह महिला प्रवचन में आई तो सही …*

*😛लेकिन आस-पास की महिलाओं को सारी बात बतायी….* .

. *⏰अब महिलायें यह बात सुनकर चालू सत्संग में से उठ कर चली गयी !!*

*🤗अगले दिन से कथा में लोगों की संख्या कम हो गयी….तो भगवान ने पूछा कि, “लोगो की संख्या कैसे कम हो गयी ?”* ….

*😇किसी ने कहा, ‘एक चमत्कारिक माताजी आई हैं नगर में… जिस के घर दूध पीती हैं तो गिलास सोने का हो जाता है, …. थाली में रोटी सब्जी खाती हैं तो थाली सोने की हो जाती है !… उस के कारण लोग प्रवचन में नहीं आते..”* ..

*😓भगवान नारायण समझ गए कि लक्ष्मी जी का आगमन हो चुका है!*

*⏰इतनी बात सुनते ही देखा कि जो यजमान सेठ जी थे, वो भी उठ खड़े हो गए….. खिसक गए!* ..

*🌞पहुंचे माता लक्ष्मी जी के पास ! बोले, “ माता, मैं तो भगवान की कथा का आयोजन कर रहा था और आप ने मेरे घर को ही छोड़ दिया !”*

*👩‍🦰माता लक्ष्मी बोली, “तुम्हारे घर तो मैं सब से पहले आनेवाली थी, लेकिन तुमने अपने घर में जिस कथा कार को ठहराया है ना, वो चला जाए तभी तो मैं आऊं !”*

*✊सेठ जी बोले, “बस इतनी सी बात !…*

*😛अभी उनको धर्मशाला में कमरा दिलवा देता हूँ !”* ..

*🥰जैसे ही महाराज (भगवान्) कथा कर के घर आये तो सेठ जी बोले, “* "

*➡️😓महाराज आप अपना बिस्तर बांधो ! आपकी व्यवस्था अबसे धर्मशाला में कर दी है !!”*

*☸महाराज बोले, “ अभी तो 2/3 दिन बचे है कथा के…..यहीं रहने दो”*

*🐱सेठ बोले, “नहीं नहीं, जल्दी जाओ ! मैं कुछ नहीं सुनने वाला ! किसी और मेहमान को ठहराना है। ”* ..

*🌲इतने में लक्ष्मी जी आई, कहा कि, “सेठ जी, आप थोड़ा बाहर जाओ… मैं इन से निबट लूँ!”*

*⏰माता लक्ष्मी जी भगवान् से बोली, “*

*✊"प्रभु, अब तो मान गए?”*

*🙌भगवान नारायण बोले, “हां लक्ष्मी तुम्हारा प्रभाव तो है, लेकिन एक बात तुम को भी मेरी माननी पड़ेगी कि तुम तब आई, जब संत के रूप में मैं यहाँ आया!!*

*➡️संत जहाँ कथा करेंगे वहाँ लक्ष्मी तुम्हारा निवास जरुर होगा…!!”*

*✍यह कह कर नारायण भगवान् ने वहां से बैकुंठ के लिए विदाई ली। अब प्रभु के जाने के बाद अगले दिन सेठ के घर सभी गाँव वालों की भीड़ हो गयी। सभी चाहते थे कि यह माता सभी के घरों में बारी बारी आये। पर यह क्या ? लक्ष्मी माता ने सेठ और बाकी सभी गाँव वालों को कहा कि, अब मैं भी जा रही हूँ। सभी कहने लगे कि, माता, ऐसा क्यों, क्या हमसे कोई भूल हुई है ? माता ने कहा, मैं वही रहती हूँ जहाँ नारायण का वास होता है। आपने नारायण को तो निकाल दिया, फिर मैं कैसे रह सकती हूँ ?’ और वे चली गयी। *

*🌝🕉️🌞शिक्षा : जो लोग केवल माता लक्ष्मी को पूजते हैं, वे भगवान् नारायण से दूर हो जाते हैं। अगर हम नारायण की पूजा करें तो लक्ष्मी तो वैसे ही पीछे पीछे आ जाएँगी, क्योंकि वो उनके बिना रह ही नहीं सकती। जो व्यक्ति विशेष अनैतिक कार्यों से धन कमाते हैं उनके पास धन नहीं रहता। उनका धन अस्पताल और कोर्ट कचहरी या अन्य जगह खर्च होता है। जिससे उनके जीवन में अनेक प्रकार के दुखों का समावेश ही रहता है। अतः सभी विश्व के लोगों से हमारा निवेदन है कि आप नैतिक कार्य ही करके धन कमाए। ✅*
*😓🅾जहाँ परमात्मा की याद है। वहाँ लक्ष्मी का वास होता है। केवल लक्ष्मी के पीछे भागने वालों को न माया मिलती ना ही राम। 🅾*

*👩‍🦰सम्पूर्ण पढ़ने के लिए धन्यबाद .*

*😛इसे सबके साथ बाँटकर आत्मसात् करें। ज्ञान बांटने से बढ़ता है और केवल अपने पास रखने से खत्म हो जाता है। *

*🤗सच्चेकर्म ही सच्चेभगवान है🌞*

सोमवार, 17 फ़रवरी 2020

सच्चे गुरु का महत्व।

*🤗🕉️सच्चे गुरु का महत्व☸️✍️*


*✈️चींटी कितनी छोटी ! उसको यदि मुंबई से पूना यात्रा करनी हो, तो लगभग 3-4 जन्म लेना पडेगा। लेकिन यही चींटी पूना जाने वाले व्यक्ति के कपड़े पर चढ़ जाये, तो सहज ही 3-4 घंटे में पूना पहुंच जाएगी कि नहीं !*

*✍️🕉️➡️ठीक इसी प्रकार अपने प्रयास से भवसागर पार करना कितना कठिन ! पता नहीं कई जन्म लग सकते हैं। इसकी अपेक्षा यदि हम सच्चेगुरू का साथ पकड लें और उनके बताये सन्मार्ग पर श्रद्धापूर्वक चलें, तो सोचिये कितनी सरलता से वे आपको सुख, समाधान व अखंड आनंदपूर्वक भव सागर पार करा सकते हैं !!*

आपके सच्चेगुरु आपको योग्यता अनुसार मार्गदर्शन कर धीरे धीरे आप में उन्नति के रास्ते पर बढ़ाते जाएंगे। जैसे जैसे आपकी श्रद्धा विश्वास अपने सच्चेगुरु के प्रति समर्पित होगा उसी प्रकार आप ऊंचाइयों को प्राप्त करते जाएंगे। *


*✍️✡️यही सच्चेगुरु का महत्व सभी धर्मों में शास्त्रों में लिखा हुआ है और यह हमारी आजमाई हुई बात भी है। इसे अन्यथा न लेकर अगर आपने अपने जीवन में किसी सच्चे गुरु को सानिध्य प्राप्त नहीं किया है तो आपका जीवन अभी अंधकार में ही रहेगा। इसलिए आप समय रहते हुए अपने सच्चे गुरु को तलाश कर उनके मार्गदर्शन में अपना जीवन सफल करें। *
*🌞➡️यही मंगल कामना हम आप सभी से व आप सभी के लिए भगवान से करते हैं। ताकि आपके जीवन में आपके द्वारा किसी भी प्रकार का ऐसा गलत कार्य ना हो जिससे कि आपका भविष्य अंधकार में हो। *
🕉️➡️ धन्यवाद .......

*✍️🕉️आप सभी का शुभचिंतक🕉️✍️*

*🕉️सेवाव्रती स्वामीजी🌞*

😇🙏😇🙏😇🙏😇🙏😇
*वे लोग कितने सौभाग्यशाली हैं, जिनके जीवन में सच्चेगुरु है। *

रविवार, 16 फ़रवरी 2020

चोर की चतुराई और राजा के द्वारा न्याय।


*"🕉️चोर की चतुराई और राजा का न्याय🌞"*

🙏🏻🚩🌹 👁❗👁 🌹🚩🙏🏻

*➡️🙌किसी जमाने में एक चोर था। वह बडा ही चतुर था। लोगों का कहना था कि वह आदमी की आंखों का काजल तक उडा सकता था। एक दिन उस चोर ने सोचा कि जबतक वह राजधानी में नहीं जायगा और अपना करतब नहीं दिखायगी, तबतक चोरों के बीच उसकी धाक नहीं जमेगी। यह सोचकर वह राजधानी की ओर रवाना हुआ और वहां पहुंचकर उसने यह देखने के लिए नगर का चक्कर लगाया कि कहां क्या कर सकता है। *

*😇उसने तय कि कि राजा के महल से अपना काम शुरू करेगा। राजा ने रातदिन महल की रखवाली के लिए बहुतसे सिपाही तैनात कर रखे थे। बिना पकडे गये परिन्दा भी महल में नहीं घुस सकता था। महल में एक बहुत बडी घडीं लगी थी, जो दिन रात का समय बताने के लिए घंटे बजाती रहती थी। *

*🐱चोर ने लोहे की कुछ कीलें इकठटी कीं ओर जब रात को घडी ने बारह बजाये तो घंटे की हर आवाज के साथ वह महल की दीवार में एकएक कील ठोकता गया। इसतरह बिना शोर किये उसने दीवार में बारह कीलें लगा दीं, फिर उन्हें पकड पकडकर वह ऊपर चढ गया और महल में दाखिल हो गया। इसके बाद वह खजाने में गया और वहां से बहुत से हीरे चुरा लाया। *

*🌝अगले दिन जब चोरी का पता लगा तो मंत्रियों ने राजा को इसकी खबर दी। राजा बडा हैरान और नाराज हुआ। उसने मंत्रियों को आज्ञा दी कि शहर की सडकों पर गश्त करने के लिए सिपाहियों की संख्या दूनी कर दी जाय और अगर रात के समय किसी को भी घूमते हुए पाया जाय तो उसे चोर समझकर गिरफतार कर लिया जाय। *

*⏰जिस समय दरबार में यह ऐलान हो रहा था, एक नागरिक के भेष में चोर मौजूद था। उसे सारी योजना की एक एक बात का पता चल गया। उसे फौरन यह भी मालूम हो यगा कि कौन से छब्बीस सिपाही शहर में गश्त के लिए चुने गये हैं। वह सफाई से घर गया और साधु का वेश धारण करके उन छब्बीसों सिपाहियों की बीवियों से जाकर मिला। उनमें से हरेक इस बात के लिए उत्सुक थी कि उसकी पति ही चोर को पकडे ओर राजा से इनाम ले। *

*🤗एक एक करके चोर उन सबके पास गया ओर उनके हाथ देख देखकर बताया कि वह रात उसके लिए बडी शुभ है। उसक पति की पोशाक में चोर उसके घर आयेगा; लेकिन, देखो, चोर की अपने घर के अंदर मत आने देना, नहीं तो वह तुम्हें दबा लेगा। घर के सारे दरवाजे बंद कर लेना और भले ही वह पति की आवाज में बोलता सुनाई दे, उसके ऊपर जलता कोयला फेंकना। इसका नतीजा यह होगा कि चोर पकड में आ जायगा। *

*☸सारी स्त्रियां रात को चोर के आगमन के लिए तैयार हो गईं। अपने पतियों को उन्होंने इसकी जानकारी नहीं दी। इस बीच पति अपनी गश्त पर चले गये और सवेरे चार बजे तक पहरा देते रहे। हालांकि अभी अंधेरा था, लेकिन उन्हें उस समय तक इधर उधर कोई भी दिखाई नहीं दिया तो उन्होंने सोचा कि उस रात को चोर नहीं आयगा, यह सोचकर उन्होंने अपने घर चले जाने का फैसला किया। ज्योंही वे घर पहुंचे, स्त्रियों को संदेह हुआ और उन्होंने चोर की बताई कार्रवाई शुरू कर दी। *

*✍फल वह हुआ कि सिपाही जल गये ओर बडी मुश्किल से अपनी स्त्रियों को विश्वास दिला पाये कि वे ही उनके असली पति हैं और उनके लिए दरवाजा खोल दिया जाय। सारे पतियों के जल जाने के कारण उन्हें अस्पताल ले जाया गया। दूसरे दिन राजा दरबार में आया तो उसे सारा हाल सुनाया गया। सुनकर राजा बहुत चिंतित हुआ और उसने कोतवाल को आदेश दिया कि वह स्वयं जाकर चोर पकड़े। * *➡️उस रात कोतवाल ने तेयार होकर शहर का पहरा देना शुरू किया। जब वह एक गली में जा रहा रहा था, चोर ने जवाब दिया, ″मैं चोर हूँ। ″ कोतवाल समझा कि लड़की उसके साथ मजाक कर रही है। उसने कहा, ″मजाक छाड़ो ओर अगर तुम चोर हो तो मेरे साथ आओ। मैं तुम्हें काठ में डाल दूंगा। ″ चोर बाला, ″ठीक है। इससे मेरा क्या बिगड़ेगा!″ और वह कोतवाल के साथ काठ डालने की जगह पर पहुंचा। *

*😇वहां जाकर चोर ने कहा, ″कोतवाल साहब, इस काठ को आप इस्तेमाल कैसे किया करते हैं, मेहरबानी करके मुझे समझा दीजिए। ″ कोतवाल ने कहा, तुम्हारा क्या भरोसा! मैं तुम्हें बताऊं और तुम भाग जाओं तो ?″ चोर बाला, ″आपके बिना कहे मैंने अपने को आपके हवाले कर दिया है। मैं भाग क्यों जाऊंगा?″ कोतवाल उसे यह दिखाने के लिए राजी हो गया कि काठ कैसे डाला जाता है। ज्यों ही उसने अपने हाथ-पैर उसमें डाले कि चोर ने झट चाबी घुमाकर काठ का ताला बंद कर दिया और कोतवाल को राम-राम करके चल दिया। *

*🌞जाड़े की रात थी। दिन निकलते-निकलते कोतवाल मारे सर्दी के अधमरा हो गया। सवेरे जब सिपाही बाहर आने लगे तो उन्होंने देखा कि कोतवाल काठ में फंसे पड़े हैं। उन्होंने उनको उसमें से निकाला और अस्पताल ले गये। *

*😃अगले दिन जब दरबार लगा तो राजा को रात का सारा किस्सा सुनाया गया। राजा इतना हैरान हुआ कि उसने उस रात चोर की निगरानी स्वयं करने का निश्चय किया। चोर उस समय दरबार में मौजूद था और सारी बातों को सुन रहा था। रात होने पर उसने साधु का भेष बनाया और नगर के सिरे पर एक पेड़ के नीचे धूनी जलाकर बैठ गया। * *🤔राजा ने गश्त शुरू की और दो बार साधु के सामने से गुजरा। तीसरी बार जब वह उधर आया तो उसने साधु से पूछा कि, ″क्या इधर से किसी अजनबी आदमी को जाते उसने देखा है?″ साधु ने जवाब दिया कि “वह तो अपने ध्यान में लगा था, अगर उसके पास से कोई निकला भी होगा तो उसे पता नहीं। यदि आप चाहें तो मेरे पास बैठ जाइए और देखते रहिए कि कोई आता-जाता है या नहीं। ″ यह सुनकर राजा के दिमाग में एक बात आई और उसने फौरन तय किया कि साधु उसकी पोशाक पहनकर शहर का चक्कर लगाये और वह साधु के कपड़े पहनकर वहां चोर की तलाश में बैठे। *

*👨‍👩‍👧‍👦आपस में काफी बहस-मुबाहिसे और दो-तीन बार इंकार करने के बाद आखिर चोर राजा की बात मानने को राजी हो गया ओर उन्होंने आपस में कपड़े बदल लिये। चोर तत्काल राजा के घोड़े पर सवार होकर महल में पहुंचा ओर राजा के सोने के कमरे में जाकर आराम से सो गया, बेचारा राजा साधु बना चोर को पकड़ने के लिए इंतजार करता रहा। सवेरे के कोई चार बजने आये। राजा ने देखा कि न तो साधु लौटा और कोई आदमी या चोर उस रास्ते से गुजरा, तो उसने महल में लौट जाने का निश्चय किया; लेकिन जब वह महल के फाटक पर पहुंचा तो संतरियों ने सोचा, राजा तो पहले ही आ चुका है, हो न हो यह चोर है, जो राजा बनकर महल में घुसना चाहता है। उन्होंने राजा को पकड़ लिया और काल कोठरी में डाल दिया। राजा ने शोर मचाया, पर किसी ने भी उसकी बात न सुनी। *

*☺️दिन का उजाला होने पर काल कोठरी का पहरा देने वाले संतरी ने राजा का चेहरा पहचान लिया ओर मारे डर के थरथर कांपने लगा। वह राजा के पैरों पर गिर पड़ा। राजा ने सारे सिपाहियों को बुलाया और महल में गया। उधर चोर, जो रात भर राजा के रुप में महल में सोया था, सूरज की पहली किरण फूटते ही, राजा की पोशाक में और उसी के घोड़े पर रफूचक्कर हो गया। *

*✍🌝अगले दिन जब राजा अपने दरबार में पहुंचा तो बहुत ही हतरश था। उसने ऐलान किया कि अगर चोर उसके सामने उपस्थितित हा जायगा तो उसे माफ कर दिया जायगा और उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जायगी, बल्कि उसकी चतुराई के लिए उसे इनाम भी मिलेगा। चोर वहां मौजूद था ही, फौरन राजा के सामने आ गया ओर बोला, “महाराज, मैं ही वह अपराधी हूँ। ″ इसके सबूत में उसने राजा के महल से जो कुछ चुराया था, वह सब सामने रख दिया, साथ ही राजा की पोशाक और उसका घोड़ा भी। राजा ने उसे इनाम में अपने मंत्री मंडल मै शामिल किया और चोर से वादा कराया कि वह आगे चोरी करेगा। यह चोर ने भारत माता की मिट्टी को हाथ में लेकर सभी के सामने यह शपथ ग्रहण की। उसे दरबार मे मुख्य कोतवाल का पद प्राप्त हुआ। इसके बाद से चोर खूब आनन्द से रहने लगा। नगर में ओर भी छोटे चोरो ने कोतवाल की प्रेरणा से चोरी का त्याग करके योग्य कार्य करने लगें। *

*➡️🤗मित्रों कहानी अच्छी लगे तो मित्रों व रिश्तेदारों को भेजकर शेयर करें। ✍️*

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घमंड से पतन की और?

😏 *घमंड से पतन की और* 😌

*👉कितना घमंड है आज के इंसान को। क्या समझता है खुद को ?आखिर किस बात का घमंड है इंसान को.?*

*👧सुंदरता पर घमंड👩* *➡️एक मामूली दुर्घटना में दो मिनट में ही इंसान की सुंदरता गायब हो जाती है। वो रोगी बन जाता है। चमड़ी देखने लायक नहीं होती। *

*👨‍👩‍👧‍👦बदन पर घमंड👨‍👩‍👧‍👦*

*🔜जब इंसान को लकवा हो जाता है तब वो खुद उठ नहीं सकता हिल नहीं सकता बार बार उसे सहारे की जरूरत पड़ती है। तब कहाँ जाता है उसका ये बदन। *

*🤗पैसे का घमंड🤗*
*➡️दो मिनट में इंसान का व्यापार ठप हो जाता है, पाई पाई का मोहताज बन जाता है। *

*😓औलाद का घमंड😓*

*➡️बेटा हो या बेटी कब कोई ऐसा कदम उठा ले कि सारा अहंकार धरा का धरा रह जाए। कब घर छोड़कर चला जाए*

*😇सत्ता का घमंड😇*

*➡️सत्ता कभी भी पलट सकती है। आप किसी भी समय हीरो से जीरो हो सकते हो। आपके साथ चलने वाले आपकी हाँ में हाँ मिलाने वाले दो ही पल में पलटी खायेगें। फिर सत्ता नहीं तो क्या करोगे। फिर भी इंसान को इतना घमण्ड क्यों?*

*😃इंसान क्या लेकर आया था क्या लेकर जाएगा कुछ भी नहीं खाली हाथ ही जाएगा। *

*🌝कोई साथ नहीं जाएगा*
*😛एक सुई तक भी साथ नहीं जाएगी। बस जाता है नाम, आपका नाम, आपका काम, आपके गुण, आपका प्यार, आपका अच्छा व्यवहार, और आपके अच्छे प्यारे बोल। *
*🥰छोड दें - दूसरों को नीचा दिखाना। *
*🐱छोड दें - दुसरो की सफलता से जलना। *
*✍छोड दें - दूसरों के धन से जलना। *
*👩‍🦰छोड दें - दूसरों की चुगली करना। *
*😃छोड दें - दूसरों की सफलता पर इर्ष्या करना। *

*✍ये सब मिथ्या है। ✍*

*🙏🏻✊जयभारत माता की 🌞✊*

भारतीय स्टेट बैंक केवाईसी।

*➡️SBI भारतीय स्टेट बैंक से महत्वपूर्ण जानकारी⏰*

*➡️SBI के ग्राहकों का बंद हो सकता है खाता, आपके पास केवल दो हफ्ते का समय, कर लें यह जरूरी काम....*

*😊अगर आपका स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की किसी ब्रांच में खाता है और आपने अब तक अपना केवाईसी पूरा नहीं कराया है तो जल्द करा लें। आपके पास अब चंद दिन ही बचे हैं वर्ना आपका अकाउंट बंद हो सकता है। SBI ने केवाईसी पूरी करने के लिए लास्ट डेट (28 फरवरी 2020 ) तय कर दी है। *

*☸️स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपने ग्राहकों को एसएमएस भेजकर कहा है कि 28 फरवरी 2020 तक अपना केवाईसी (KYC) पूरी करा लें, अन्यथा आप अपने खाते से कोई ट्रांजैक्शन नहीं कर पाएंगे। बता दें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सभी बैंक खातों के लिए केवाईसी को जरूरी बना दिया है। बैंक ने कहा है कि कृपया नवीनतम केवाईसी दस्तावेजों के साथ अपने एसबीआई ब्रांच में जाकर संपर्क करें। KYC पूरी नहीं करने पर आपके खाते को फ्रीज किया जा सकता है। केवाईसी के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट: SBI की वेबसाइट के मुताबिक, केवाईसी के लिए ग्राहक को अपना पहचान पत्र देना होगा। *

*➡️इनमें से कोई भी हो सकता है पहचान पत्र...*
*➡️वोटर आईडी*
*➡️पासपोर्ट*
*➡️आधार पत्र/कार्ड*
*ड्राइविंग लाइसेंस*
*➡️नरेगा कार्ड*
*➡️पेंशन भुगतान आदेश*
*➡️डाकघरों द्वारा जारी पहचान पत्र*

*➡️ऐसे जन प्राधिकरण संस्थाओं द्वारा जारी पहचान पत्र जो अपने द्वारा जारी पहचान पत्रों का रिकॉर्ड रखती हैं। *
*✡️छात्रों के मामले में यदि वे अपने नजदीकी संबंधी के साथ रह रहे हों तो उस संबंधी की घोषणा के साथ उनका पहचान पत्र और पता प्रमाण पत्र। *
*⬇️पते के लिए प्रमाण पत्र⬇️*
*➡️टेलीफोन बिल (जो 3 महीने से अधिक पुराना न हो)*
*➡️बिजली का बिल (जो 6 महीने से अधिक पुराना न हो)*

*➡️मान्यता प्राप्त सरकारी प्राधिकारी द्वारा जारी पत्र*
*➡️बैंक खाता विवरण (जो 3 महीने से अधिक पुराना न हो)*

*➡️राशन कार्ड, विश्वसनीय नियोक्ताओं द्वारा जारी पहचान पत्र, आयकर/सम्पदा कर मूल्यांकन आदेश*
*➡️क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट (जो 3 महीने से अधिक पुराना न हो)*

*➡️पंजीकृत लीव & लाइसेंस करार /सेल डीड/लीज एग्रीमेंट की प्रतियां*
*➡️विश्वविद्यालय/संस्था के हास्टल वार्डेन द्वारा छात्र को जारी पत्र, जिसे रजिस्ट्रार, प्रिंसपल/ डीन –छात्र कल्याण द्वारा प्रति हस्ताक्षरित किया गया हो*

*⬇️क्या है केवाईसी?⬇️*
*➡️केवाईसी यानि "नो योर कस्‍टमर" यानि अपने ग्राहक को जानिये। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा संचालित पहचान प्रक्रिया है केवाईसी, जिसकी मदद से बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाएं अपने ग्राहक के बारे में अच्छे से जान पाती हैं। बैंक तथा वित्तीय कम्पनियां इसके लिए फॉर्म को भरवा कर इसके साथ कुछ पहचान के प्रमाण भी लेती हैं। *

*⬇️घर बैठे करा सकते हैं केवाईसी⬇️*
*➡️☸️अगर आप ब्रांच नहीं जाना चाहते हैं तो भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने आपके लिए घर बैठे केवाईसी कराने की सुविधा दी है। आरबीआई द्वारा हाल ही में केवाईसी नियमों में किए गए बदलाव के मुताबिक आधार बेस्ड वीडियो कस्टमर आइडेंटिफिकेशन प्रॉसेस (V-CIP) को मंजूरी दी गई है। अब बैंक, एनबीएफसी और दूसरे लोन देने वाले संस्थान वीडियो बेस्ड आइडेंटिफिकेशन प्रोसेस का इस्तेमाल केवाईसी के लिए कर सकेंगे। *

*⬇️ऐसे होगी वीडियो केवाईसी⬇️*

*➡️इस नई व्यवस्था के तहत दूरदराज के इलाकों में मौजूद फाइनैंशल इंस्टीट्यूशन के अधिकारी पैन या आधार कार्ड और कुछ सवालों के जरिए ग्राहक की पहचान कर सकेंगे। वीडियो कॉल का विकल्प संबंधित बैंक या संस्था के डोमेन पर ही मिलेगा। *