शुक्रवार, 26 अप्रैल 2024

स्वयं के विचारों से पतन

*स्वयं के विचारों से पतन*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 स्वयं के विचारों से पतन✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 वैशाख कृष्ण 9, गुरुवार , 2 मई  2024 कलिकाल के शासन नायक बीसवें तीर्थंकर मुनिसुब्रतनाथ भगवान शनि की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम तप को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री मुनिसुब्रतनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 वैशाख कृष्ण 10, शुक्रवार , 3 मई  2024 कलिकाल के शासन नायक बीसवें तीर्थंकर मुनिसुब्रतनाथ भगवान शनि की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम तप को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री मुनिसुब्रतनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔मई माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव   2, 3, 6,7, 8, 10, 13,15, 16,18, 29 इन दिनांकों में है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉मई माह में कृष्ण पक्ष में पंचमी व शुक्ल पक्ष में एकम तिथि का क्षय है। अष्टमी तिथि एक व पंद्रह मई को है। चतुर्दशी तिथि सात व बाईस मई को है।*
*⛳10 मई को प्रथम दान दिवस याने प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव का प्रथम पारणा, अक्षय तृतीया व रोहिणी व्रत*।
*🙆इस माह कोई भी विवाह मुहूर्त नहीं है। विवाह मुहूर्त 9 जुलाई से प्रारंभ होकर 15 जुलाई तक ही है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*


एक व्यक्ति को रास्ते में यमराज मिल गये वह व्यक्ति उन्हें पहचान नहीं सका। यमराज ने पीने के लिए व्यक्ति से पानी माँगा, बिना एक क्षण गवाए उसने पानी पिला दिया। पानी पीने के बाद यमराज ने बताया कि वो उसके प्राण लेने आये हैं। लेकिन चूँकि तुमने मेरी प्यास बुझाई है। इसलिए मैं तुम्हें अपनी किस्मत बदलने का एक मौका देता हूँ | 

यह कहकर यमराज ने एक डायरी देकर उस आदमी से कहा कि तुम्हारे पास 5 मिनट का समय है | इसमें तुम जो भी लिखोगे वही हो जाएगा लेकिन ध्यान रहे केवल 5 मिनट |

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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उस व्यक्ति ने डायरी खोलकर देखा तो उसने देखा कि पहले पेज पर लिखा था कि उसके पड़ोसी की लॉटरी निकलने वाली है और वह करोड़पति बनने वाला है | उसने वहां लिख दिया कि उसके पड़ोसी की लॉटरी न निकले |

अगले पेज पर लिखा था कि उसका एक दोस्त चुनाव जीतकर मंत्री बनने वाला है, तो उसने लिख दिया कि उसका दोस्त चुनाव हार जाए | 

इस तरह, वह पेज पलटता रहा और, अंत में उसे अपना पेज दिखाई दिया | जैसे ही उसने कुछ लिखने के लिए अपना पेन उठाया यमराज ने उस व्यक्ति के हाथ से डायरी ले ली और कहा वत्स तुम्हारा पांच मिनट का समय पूरा हुआ , अब कुछ नहीं हो सकता |

तुमने अपना पूरा समय दूसरों का बुरा करने में व्यतीत दिया और अपना जीवन खतरे में डाल दिया | अंतत: तुम्हारा अंत निश्चित है |

यह सुनकर वह व्यक्ति बहुत पछताया लेकिन सुनहरा मौका उसके हाथ से निकल चुका था |

  यदि हमारे पूर्व कर्मो ने हम सभी को कोई शक्ति प्रदान की है तो कभी किसी का बुरा न सोचे, और न ही बुरा करें | दूसरों का भला करने वाला सदा सुखा रहता है और भगवान की कृपा सदा उस पर बनी रहती है |

*🎪👨‍👨‍👦‍👦⏰🔔🙏विशेष :- भव्य आत्माओं, हम सभी ने अनेकों जन्म तक पुण्य कार्य किए जिसके कारण वर्तमान समय में हमें मनुष्य भव की प्राप्ति हुई है।यह मनुष्य भव हम सभी को शुभ कार्य करने के लिए मिला है किंतु हम यहां पर भी राग-द्वेष के चक्कर में पड़कर अपना जीवन समाप्त कर रहे है। जिस प्रकार कहानी में वह व्यक्ति विशेष पांच मिनट तक दुसरो के लिए बुरा सोचते हुए अपना ही बुरा करता है।उसी प्रकार आज हम भी अपने कर्तव्यों को भूलकर अपना ही बिगाड़ कर रहे है। अतः जब जागो तबही सबेरा यह कथन सिद्ध करें।जब सूर्योदय होता है तो विश्व में उजाला होता है किंतु जब तक हम जागेगें नहीं तब तक हमारा सबेरा नहीं हो सकता। यही प्रकृति का अटूट नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 22 अप्रैल 2024

बंद मुट्ठी का रहस्य

*बन्द मुठ्ठी का रहस्य*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 बन्द मुठ्ठी का रहस्य ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल पूर्णिमा , मंगल वार , 23 अप्रैल  2024 कलिकाल के षष्ठम तीर्थंकर  सूर्य की महादशा को अनुकूल बनाने वाले मिथ्यात्व व मोह अंधकार को समाप्त कर रत्नत्रय में ओज तेज की शक्ति प्रदाता  1008 श्री पद्मप्रभ भगवान का केवल कल्याणक  महोत्सव है।*

*🔔🪔 वैशाख कृष्ण 2,  गुरुवार , 25 अप्रैल  2024 कलिकाल के 23 वें तीर्थंकर उपसर्ग विजेता , केतु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी विघ्न बाधाओं को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्कृष्ट रत्नत्रय को धारण कराने वाले 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का गर्भ कल्याणक  महोत्सव है।*

 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*


एक समय एक राज्य में  राजा ने घोषणा की कि वह राज्य के अमुख मंदिर में पूजा अर्चना करने के लिए आने वाली पूर्णिमा के दिन जाएगा।

 इतना सुनते ही  मंदिर के पुजारी ने मंदिर की रंग रोगन और सजावट करना शुरू कर दिया, क्योंकि राजा आने वाले थे। इस खर्चे के लिए उसने  ₹6000/- का कर्ज लिया ।

 नियत तिथि पर राजा मंदिर में दर्शन, पूजा, अर्चना के लिए पहुंचे और पूजा अर्चना करने के बाद आरती की थाली में चार आने दक्षिणा स्वरूप रखे और राजा अपने महल में प्रस्थान कर गया ! पुजारी ने  ढिंढोरा पिटवाया की राजा की दी हुई वस्तु को वह नीलाम कर मंदिरजी में आने वाले भक्तों के लिए धर्मशाला बनाईं जाएगी । 

नीलामी पर उसने अपनी मुट्ठी में चार आने रखे पर मुट्ठी बंद रखी और किसी को दिखाई नहीं। सभी से कहां कि यह राजा के द्वारा दी गई अनमोल धरोहर है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 लोग समझे की राजा की दी हुई वस्तु बहुत अमूल्य होगी इसलिए बोली रु10,000/- से शुरू हुई।

रु 10,000/- की बोली बढ़ते बढ़ते 
रु दो हजार तक पहुंची और पुजारी ने वो वस्तु फिर भी देने से इनकार कर दिया। यह बात राजा के कानों तक पहुंची ।

राजा ने अपने सैनिकों से पुजारी को बुलवाया और पुजारी से निवेदन किया कि वह मेरी वस्तु को नीलाम ना करें । उसे मंदिर जी के गुल्लक में लाल कपड़े में बांध कर रखा जाए। मंदिर जी में आने वाले भक्तों के लिए राज्य कोष से धर्मशाला का निर्माण किया जाएगा। इस प्रकार राजा ने अपनी रक्षा व धर्म की प्रभावना की।

तब से यह कहावत बनी है बंद मुट्ठी  लाख की खुल गई तो खाक की !!

यह मुहावरा आज भी प्रचलन में है।   

प्रकृति ने सृष्टि की रचना करते समय तीन विशेष रचना की

1. अनाज में कीड़े पैदा कर दिए, वरना लोग इसका सोने और चाँदी की  तरह संग्रह करते।

2. मृत्यु के बाद देह (शरीर) में दुर्गन्ध व जीवों को उत्पन्न कर दिया, वरना कोई अपने प्यारों को कभी भी  जलाता या दफ़न नहीं करता।

3. जीवन में किसी भी प्रकार के संकट या अनहोनी के साथ रोना और समय के साथ भुलाना, वरना जीवन में निराशा और अंधकार ही रह जाता, कभी भी आशा, प्रसन्नता या जीने की इच्छा नहीं होती।


*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 20 अप्रैल 2024

समर्पण से सफलता

*समर्पण से सफलता*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒समर्पण से सफलता ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल 13 , रविवार , 21 अप्रैल  2024 कलिकाल के शासन नायक अंतिम तीर्थंकर उपसर्ग विजेता बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक  ज्ञान आचरण प्रदाता 1008 श्री महावीर भगवान का जन्म कल्याणक  महोत्सव है।*

*🔔अप्रैल माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव   21, 23, 25 इन दिनांकों में है।*
*⛳षोडषकारण व्रत 26 मार्च से 24 अप्रैल तक*।
 *🔔🎪 13 अप्रैल से 22 अप्रैल तक दश लक्षण महापर्व*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

पुराने समय की बात है। एक ब्रह्मचारी ने कई विद्याओं का अध्ययन पूर्ण कर लिया था। अब वह आत्म विद्या का ज्ञान प्राप्त करना चाहता था। 

अपनी इस इच्छा की पूर्ति के लिए वह एक प्रसिद्ध ऋषि के आश्रम में पहुंचा। ऋषि ने उसे आश्रम में रहने की आज्ञा दे दी। उसे वहां कई तरह के सेवा कार्य करने को दिए गए। ब्रह्मचारी को वहां सेवा करते-करते कई दिन बीत गए। किन्तु उसका अध्ययन आरंभ नहीं हुआ। इससे उसके मन में कई तरह की शंकाएं पैदा होने लगीं। 

कहां तो वह सर्वोच्च कही जाने वाली आत्म विद्या प्राप्त करने आया था और यहां, सांसारिक कार्यों के झमेले में पड़ गया था। एक दिन जब वह घड़ा लेकर पानी भरने नदी पर पहुंचा, तो गुस्से और संताप में जल रहा था। 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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उसने जोर से घड़ा रेत पर पटका और वहीं बैठ गया। तभी घड़े से आवाज आई, 'तुम इतना क्रोध और उतावलापन क्यों दिखाते हो? गुरु ने यदि तुम्हें शरण दी है तो निश्चित ही देर-सवेर है तुम्हारी मनोकामना भी पूर्ण होगी। यह सुनकर ब्रह्मचारी बोला, 'मैं यहां दुनियादारी के काम करने नहीं, आत्म विद्या प्राप्त करने आया हूं। 
मगर यहां तो मेरा समय दूसरों की सेवा में ही गुजर जाता है।

 इस पर घड़े ने कहा, "सुनो मित्र, मैं पहले सिर्फ एक मिट्टी का डला था। पहले कुम्हार ने मुझे ने लेकर कूटा, गलाया और कुछ दिनों तक अपने पैरों तले भी रौदा। इसके बाद उसने मुझे आकार दिया, भट्टी में तपाया। 

इस सबकी बदौलत आज में तुम्हारे सामने इस रूप में मौजूद हूं। यदि तुम भी आगे बढ़ना चाहते हो, तो परेशानियों से घबराना नहीं। बस अपने कर्म में लगे रहना।' यह सुनकर ब्रह्मचारी का गुस्सा व संताप दूर हो गया। उसने संकल्प लिया कि वह गुरु के आदेश पर पूरे समर्पण भाव से चलेगा। उसके आचरण में आए इस बदलाव को ऋषि ने भी पहचान लिया। 

चूंकि आत्म विद्या बुद्धि का विषय न होकर अनुभूति का विषय है। लिहाजा शिष्य द्वारा सच्चा समर्पण का पाठ सीखने के बाद ही उसकी शिक्षा आरंभ हुई और आगे चलकर वह एक प्रसिद्ध आत्म तत्त्ववेत्ता ऋषि बना।

विपत्तियों से न घबराएं। पूर्ण समर्पण से कार्य करें। सफलता अवश्य मिलेगी।

*विशेष:- भव्य आत्माओं, आज सबसे बड़ी हमारी असफलता का मुख्य कारण यह है कि हम सभी सच्चे देव शास्त्र गुरु को तो मानते हैं किंतु उनके द्वारा बताए गए मार्ग को अपनी शक्ति अनुसार अपने आचरण में नहीं उतारते।जब तक उनके द्वारा बताए गए आचरण को नहीं अपनाएंगे तबतक हमें उनकी शरण प्राप्त नहीं होगी। यही प्रकृति का नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 17 अप्रैल 2024

समय का साथ

*समय का साथ*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒समय का साथ ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल ग्यारस , शुक्रवार , 19 अप्रैल  2024 कलिकाल के पांचवें वें  तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक सुमति ज्ञान प्रदाता 1008 श्री सुमतिनाथ भगवान का जन्म,केवल ज्ञान व मोक्ष कल्याणक  महोत्सव है।*

*🔔अप्रैल माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव   21, 23, 25 इन दिनांकों में है।*
*⛳षोडषकारण व्रत 26 मार्च से 24 अप्रैल तक*।
 *🔔🎪 13 अप्रैल से 22 अप्रैल तक दश लक्षण महापर्व*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

एक बुजुर्ग नदी के किनारे पर जा रहे थे। एक जगह देखा कि नदी की सतह से एक कछुआ निकला और पानी के किनारे पर आ गया। 

उसी किनारे से एक बड़े ही जहरीले बिच्छु ने नदी के अन्दर छलांग लगाई और कछुए की पीठ पर सवार हो गया। कछुए ने तैरना शुरू कर दिया। वह बुजुर्ग बड़े हैरान हुए।

उन्होंने उस कछुए का पीछा करने की ठान ली। इसलिए नदी में तैर कर उस कछुए का पीछा किया। 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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वह कछुआ नदी के दूसरे किनारे पर जाकर रुक गया और बिच्छू उसकी पीठ से छलांग लगाकर दूसरे किनारे पर पहुंच गया और आगे चलना शुरू कर दिया। 

वह बुजुर्ग भी उसके पीछे चलते रहे। आगे जाकर देखा कि जिस तरफ बिच्छू जा रहा था उसके रास्ते में एक देव शास्त्र गुरु का भक्त ध्यान साधना में आँखे बन्द कर भगवान् की भक्ति कर रहा था।

उस बुजुर्ग ने सोचा कि अगर यह बिच्छू उस भक्त को काटना चाहेगा तो मैं करीब पहुँचने से पहले ही उसे अपनी लाठी से मार डालूँगा। 

लेकिन वह कुछ कदम आगे बढे ही थे कि उन्होंने देखा दूसरी तरफ से एक काला जहरीला साँप तेजी से उस भक्त को डसने के लिए आगे बढ़ रहा था। इतने में बिच्छू भी वहाँ पहुँच गया।

उस बिच्छू ने उसी समय सांप  के ऊपर डंक मार दिया, जिसकी वजह से बिच्छू का जहर सांप के जिस्म में दाखिल हो गया और वह सांप वहीं अचेत हो कर गिर पड़ा था। इसके बाद वह बिच्छू अपने रास्ते पर वापस चला गया।

थोड़ी देर बाद जब वह भक्त भगवान की भक्ति कर उठा, तब उस बुजुर्ग ने उसे बताया कि आपकी श्रृद्धा भक्ति ने उसकी रक्षा के लिए कैसे उस कछुवे को नदी के किनारे लाया, फिर कैसे उस बिच्छु को कछुए की पीठ पर बैठा कर साँप से आपकी रक्षा के लिए भेजा।

 वह भक्त उस अचेत पड़े सांप को देखकर हैरान रह गया। उसकी आँखों से आँसू निकल आए, और वह आँखें बन्द कर देव शास्त्र गुरु को याद कर उनको त्रिकाल नमोस्तु  करने लगा।

 तभी ""प्रभु"" ने अपने उस भक्त से कहा, जब वो बुजुर्ग जो तुम्हे जानता तक नही, वो तुम्हारी जान बचाने के लिए लाठी उठा सकता है। और फिर तू तो मेरी भक्ति में लगा हुआ था तो फिर तुझे बचाने के लिये मेरी लाठी तो हमेशा से ही तैयार रहती है...!

*🎪🙏👨‍👨‍👦‍👦✍️👉विशेष:- भव्य आत्माओं, जब हम अपने सभी कार्य सच्चे देव शास्त्र गुरु के बताए अनुसार करते है तो हमारा शुभ कर्म हमेशा हमारे साथ रहता है।इस कारण से हमारे सभी कार्य समय-सीमा में ही पूर्ण हो जाते है। यही सच्ची भक्ति की विशेषता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 12 अप्रैल 2024

भगवान के नाम से

*भगवान के नाम से*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 भगवान के नाम से ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल पंचमी, शनिवार , 13 अप्रैल 2024 कलिकाल के द्वितीय तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक अनंतबल प्रदाता 1008 श्री अजितनाथ भगवान का   मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।* 
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल पंचमी, रविवार , 14 अप्रैल 2024 कलिकाल के तृतीय तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मोक्ष मार्ग में सभी कार्यों को संभव  कर जगत में  सर्व सुखकारक अनंतसुख प्रदाता 1008 श्री संभवनाथ भगवान का   मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।* 
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*🔔अप्रैल माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  11, 13, 14, 19, 21, 23, 25 इन दिनांकों में है।*
*⛳षोडषकारण व्रत 26 मार्च से 24 अप्रैल तक*।
 *🔔🎪 13 अप्रैल से 22 अप्रैल तक दश लक्षण महापर्व*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

एक भयानक गर्म रेतीला रण प्रदेश और उसमें दर्द से तड़पता एक पंछी। तेज गर्मी के कारण इस पंछी के पर जल चुके थे! ना वह उड़ पा रहा था ना अपने लिए शिकार कर कर पा रहा था। दर्द में कुछ भी बड़बड़ा रहा था चाह रहा था कि जल्द से जल्द अवस्था से मुक्ति मिल जाए।

उसी दौरान आसमान में ऊंचाई पर उसने देखा कि गरुड़ कहीं पर तेजी से उड़ कर जा रहा था। उसे पता था कि जरूर भगवान विष्णु का वाहन है और वह उसके सवालों का जवाब पाने में मदद कर सकते हैं।

उसने उड़ते हुए गरूड़ को तेज आवाज लगाइ और अपने पास बुलाया। चमत्कारी गरुड़ इतनी ऊंचाई पर होते हुए भी धरती की हर एक छोटी से छोटी आवाज को साफ-साफ सुन सकता था इस दर्द में कराह रहे पंछी की आवाज भी उसने सुन ली।

जरूर उस पंछी के पास गया और पूछा कि उसने क्यों पुकारा? पंछी ने पहले से पूछा कि वह कहां जा रहे हैं? गरुड़ ने बताया कि वह स्वर्ग लोक जा रहा है। किसी काम के लिए धरती पर आया था  वह पूरा करके वापस लौट रहा हैं।

पंछी ने अपने दर्दनाक परिस्थिति बयां करते हुए कहा मैं गलती से दिशा भूल होने की वजह से इस गर्म रेतीले प्रदेश में आ पहुंचा और मेरी यह हालत हो चुकी है! अगर दया करके आप स्वर्ग लोक से यह पता कर पाए कि मेरी हालत कैसे सुधरेगी तो बहुत मेहरबानी होगी। उस पंछी की विनती सुन कर जरूर वहां से स्वर्ग लोक जाने के लिए निकल पड़ा।

जरूर स्वर्ग लोक जैसे कि पहुंचा तो स्वर्गलोक के दरवाजे पर उसने देवदूतो को खड़ा पाया। देवदूतों को देखकर गरुड़ को उस पंछी के सवाल याद आए तो गरुड़ ने सोचा कि देवदूत भी इन सवालों का जवाब दे सकते हैं इसलिए वह उनके पास गया।
गरुड़ ने देवदूत को हाथ जोड़कर उस घायल पंछी पंछी के बारे में बताया और पूछा कि उसकी मुक्ति कब हो पाएगी? देवदूत ने गरुड़ से कहा यह उसके पिछले जन्म के बुरे कर्मों की सजा भोग रहा है वह बड़ा ही क्रूर व्यक्ति था और उसने कई पाप किए थे और उन्हीं पापों की सजा वह इस जन्म में पा रहा है। और यह सजा तकरीबन सात  साल तक भोगना पड़ेगा !

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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देवदूत की बात सुनकर गरुड़ को उस पंछी पर और ज्यादा दया आने लगी। क्योंकि गरुड़ ने उसकी हालत देखी थी तो गरुड़ ने देवदूत से कहा कि  कोई तो रास्ता होगा कि उसको थोड़ी राहत मिल सके?

गरुड़ के विनती करने पर देवदूत ने उसे कहा कि हां एक मंत्र है जिसको बार-बार दोहराने से उसकी हालत में सुधार हो जाएगा! वह मंत्र है "भगवान आपके अलावा कोई शरण नहीं" यह वह अद्भुत मंत्र है जिस से बड़ी से बड़ी सजा, बड़ा से बड़ा दर्द कम हो जाता है या कभी कभी खत्म भी।

गरुड़ इस मंत्र को लेकर उसी पंछी के पास लौटा और उसे देवदूत से हुई सारी बात बताई और वह मंत्र भी दिया और वहां से चला गया।

7 दिनों बाद फिर से गरुड़ को किसी काम से धरती पर आना हुआ और उसी रास्ते से वह गुजर रहा था। तो गरुड़ ये देखकर अचंभित था कि पहले जो पंछी मरने की हालत में था उसके अब नए पंख निकल आए थे! वह जहां रह रहा था वहां पर नई झाड़ियां उग निकली थी और उसके नजदीक ही एक छोटा सा तालाब बन चुका था।

अपना काम खत्म करके गरुड़ जब देव लोक वापस लौटा तो उसे वही देवदूत मिले। गरुड़ ने देव दूतो से पूछा कि आप तो कह रहे थे उस पंछी को 7 वर्षों तक पीड़ा सहनी पड़ेगी और अब मैं जो देख कर आया हूं वह तो कुछ और ही है!

देवदूत ने गरुड़ से कहा कि यह उसी मंत्र का परिणाम है जो आपने उस  पंछी को दिया था। तुम्हारे मंत्र देने के बाद वह दिन-रात उसी मंत्र को बोलता रहता। जब उसे तकलीफ होती तब भी वह मंत्र बोलता। जब उड़ने की कोशिश करता और गिर जाता तब भी वही मंत्र बोलता। जब उसे भूख लगती तब भी वह यही मंत्र बोलता। 

और तुम तो जानते हो भगवान की सच्ची भक्ति से ही वह अपनी  सभी प्रकार की परेशानियों को समाप्त कर देता है।उस पक्षी ने भगवान की सच्ची अंतर्मन से भक्ति की ओर भगवान ने जैसा आचरण बताया वैसा करने  7 सालों की सजा 7 दिनों में ही समाप्त  कर दी!

आपको क्या लगता है क्या हम भगवान को धन्यवाद देते हैं? नहीं हम उन्हे हर उस चीज के लिए कोसते हैं जो हमें नहीं मिली, लेकिन उसने जो हमें अनगिनत मूल्यवान मार्ग बताया कि आप इस मार्ग पर चलकर सभी प्रकार के सुखों को प्राप्त कर सकते हो।


जीवन में पॉजिटिव रहना सीखो अगर तुम्हें सिर दर्द हो रहा है तो भगवान का शुक्रिया करो कि कम से कम तुम्हें बुखार नहीं आया। तुम्हारे पास छोटा घर है तो भगवान को शुक्रिया अदा करो कि कम से कम तुम्हें सड़क पर नहीं रहना पड़ रहा। तुम्हें साधारण खाना मिलता है तो भगवान को शुक्रिया अदा करो कि कम से कम तुम्हें दो वक्त भरपेट खाना मिल रहा है।

*🔔👨‍👨‍👦‍👦⏰⛳✅विशेष:-भव्य आत्माओं, आज प्रत्येक व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए अनेकों प्रकार से भगवान के नाम के साथ अनेकों प्रकार से पूजा विधान  कर रहा है। वह व्यक्ति विशेष भगवान को तो मान रहा है किंतु वह भगवान के द्वारा बताए गए मार्ग के अनुसार आचरण नहीं कर रहा है।इस कारण से वह दुखी हो रहा है। अतः हम सभी को सच्चे देव शास्त्र गुरु की भक्ति करते हुए उनके बताए गए मार्ग पर अपनी शक्ति अनुसार चलकर यह मनुष्य भव सार्थक करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 7 अप्रैल 2024

मेरे मन का भूत

*मेरे मन का भूत*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरे मन का भूत ✍️🐒*



*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र कृष्ण अमावस्या, सोमवार , 8  अप्रैल 2024 कलिकाल के 14 वें  तीर्थंकर बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक अनंत ज्ञान प्रदाता 1008 श्री अनंत नाथ भगवान का केवल ज्ञान व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 चैत्र कृष्ण अमावस्या, सोमवार , 8  अप्रैल 2024 कलिकाल के 18 वें  तीर्थंकर बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक अनंतसुख प्रदाता 1008 श्री अरनाथ भगवान का केवल  मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।* 
*🔔🎪 चैत्र शुक्ल एकम , बुधवार , 9 अप्रैल  2024 कलिकाल के अंतिम तीर्थंकर के सर्वोत्कृष्ट गणधर गुरु श्री गौतम स्वामी का जन्म दिवस है।*
 *🔔⛳आज़ ही के तिथि में कलिकाल के 19 वें  तीर्थंकर केतु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक सुख प्रदाता 1008 श्री मल्लीनाथ भगवान का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*  
*🔔अप्रैल माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  11, 13, 14, 19, 21, 23, 25 इन दिनांकों में है।*
*⛳षोडषकारण व्रत 26 मार्च से 24 अप्रैल तक* 
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

एक आदमी ने एक भूत पकड़ लिया और उसे बेचने शहर गया , संयोगवश उसकी मुलाकात एक सेठ से हुई, सेठ ने उससे पूछा - भाई यह क्या है,
उसने जवाब दिया कि यह एक भूत है। इसमें अपार बल है कितना भी कठिन कार्य क्यों न हो यह एक पल में निपटा देता है। यह कई वर्षों का काम मिनटों में कर सकता है।

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सेठ भूत की प्रशंसा सुन कर ललचा गया और उसकी कीमत पूछी......., 
उस आदमी ने कहा कीमत बस पाँच सौ रुपए है ,
कीमत सुन कर सेठ ने हैरानी से पूछा- बस पाँच सौ रुपए.......
उस आदमी ने कहा - सेठ जी जहाँ इसके असंख्य गुण हैं वहाँ एक दोष भी है।अगर इसे काम न मिले तो मालिक को खाने दौड़ता है।
सेठ ने विचार किया कि मेरे तो सैकड़ों व्यवसाय हैं, विलायत तक कारोबार है यह भूत मर जायेगा पर काम खत्म न होगा , 
यह सोच कर उसने भूत खरीद लिया 
मगर भूत तो भूत ही था ,  उसने अपना मुँह फैलाया और बोला - काम  काम  काम  काम...
सेठ भी तैयार ही था,  उसने भूत को तुरन्त दस काम बता दिये ,
पर भूत उसकी सोच से कहीं अधिक तेज था इधर मुँह से काम निकलता उधर पूरा होता , अब सेठ घबरा गया ,
संयोग से एक सन्त वहाँ आये,
सेठ ने विनयपूर्वक उन्हें भूत की पूरी कहानी बताई..
सन्त ने हँस कर कहा अब जरा भी चिन्ता मत करो एक काम करो उस भूत से कहो कि एक लम्बा बाँस ला कर आपके आँगन में गाड़ दे बस जब काम हो तो काम करवा लो और कोई काम न हो तो उसे कहें कि वह बाँस पर चढ़ा और उतरा करे तब आपके काम भी हो जायेंगे और आपको कोई परेशानी भी न रहेगी सेठ ने ऐसा ही किया और सुख से रहने लगा.....

*🎪🙏⏰👨‍👨‍👦‍👦विशेष :- भव्य आत्माओं,यह मन ही वह भूत है। यह सदा कुछ न कुछ करता रहता है एक पल भी खाली बिठाना चाहो तो खाने को दौड़ता है।श्वास ही बाँस है। हमारी प्रत्येक श्वास पर पंच परमेष्ठि का स्मरण का अभ्यास ही बाँस पर चढ़ना उतरना है।आप भी ऐसा ही करें। जब आवश्यकता हो मन से काम ले लें जब काम न रहे तो श्वास में पंच परमेष्ठि के गूणगान में लगो तब आप भी सुख से रहने लगोगे...!!*

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*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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