शुक्रवार, 12 अप्रैल 2024

भगवान के नाम से

*भगवान के नाम से*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 भगवान के नाम से ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल पंचमी, शनिवार , 13 अप्रैल 2024 कलिकाल के द्वितीय तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक अनंतबल प्रदाता 1008 श्री अजितनाथ भगवान का   मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।* 
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल पंचमी, रविवार , 14 अप्रैल 2024 कलिकाल के तृतीय तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मोक्ष मार्ग में सभी कार्यों को संभव  कर जगत में  सर्व सुखकारक अनंतसुख प्रदाता 1008 श्री संभवनाथ भगवान का   मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।* 
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*🔔अप्रैल माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  11, 13, 14, 19, 21, 23, 25 इन दिनांकों में है।*
*⛳षोडषकारण व्रत 26 मार्च से 24 अप्रैल तक*।
 *🔔🎪 13 अप्रैल से 22 अप्रैल तक दश लक्षण महापर्व*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

एक भयानक गर्म रेतीला रण प्रदेश और उसमें दर्द से तड़पता एक पंछी। तेज गर्मी के कारण इस पंछी के पर जल चुके थे! ना वह उड़ पा रहा था ना अपने लिए शिकार कर कर पा रहा था। दर्द में कुछ भी बड़बड़ा रहा था चाह रहा था कि जल्द से जल्द अवस्था से मुक्ति मिल जाए।

उसी दौरान आसमान में ऊंचाई पर उसने देखा कि गरुड़ कहीं पर तेजी से उड़ कर जा रहा था। उसे पता था कि जरूर भगवान विष्णु का वाहन है और वह उसके सवालों का जवाब पाने में मदद कर सकते हैं।

उसने उड़ते हुए गरूड़ को तेज आवाज लगाइ और अपने पास बुलाया। चमत्कारी गरुड़ इतनी ऊंचाई पर होते हुए भी धरती की हर एक छोटी से छोटी आवाज को साफ-साफ सुन सकता था इस दर्द में कराह रहे पंछी की आवाज भी उसने सुन ली।

जरूर उस पंछी के पास गया और पूछा कि उसने क्यों पुकारा? पंछी ने पहले से पूछा कि वह कहां जा रहे हैं? गरुड़ ने बताया कि वह स्वर्ग लोक जा रहा है। किसी काम के लिए धरती पर आया था  वह पूरा करके वापस लौट रहा हैं।

पंछी ने अपने दर्दनाक परिस्थिति बयां करते हुए कहा मैं गलती से दिशा भूल होने की वजह से इस गर्म रेतीले प्रदेश में आ पहुंचा और मेरी यह हालत हो चुकी है! अगर दया करके आप स्वर्ग लोक से यह पता कर पाए कि मेरी हालत कैसे सुधरेगी तो बहुत मेहरबानी होगी। उस पंछी की विनती सुन कर जरूर वहां से स्वर्ग लोक जाने के लिए निकल पड़ा।

जरूर स्वर्ग लोक जैसे कि पहुंचा तो स्वर्गलोक के दरवाजे पर उसने देवदूतो को खड़ा पाया। देवदूतों को देखकर गरुड़ को उस पंछी के सवाल याद आए तो गरुड़ ने सोचा कि देवदूत भी इन सवालों का जवाब दे सकते हैं इसलिए वह उनके पास गया।
गरुड़ ने देवदूत को हाथ जोड़कर उस घायल पंछी पंछी के बारे में बताया और पूछा कि उसकी मुक्ति कब हो पाएगी? देवदूत ने गरुड़ से कहा यह उसके पिछले जन्म के बुरे कर्मों की सजा भोग रहा है वह बड़ा ही क्रूर व्यक्ति था और उसने कई पाप किए थे और उन्हीं पापों की सजा वह इस जन्म में पा रहा है। और यह सजा तकरीबन सात  साल तक भोगना पड़ेगा !

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देवदूत की बात सुनकर गरुड़ को उस पंछी पर और ज्यादा दया आने लगी। क्योंकि गरुड़ ने उसकी हालत देखी थी तो गरुड़ ने देवदूत से कहा कि  कोई तो रास्ता होगा कि उसको थोड़ी राहत मिल सके?

गरुड़ के विनती करने पर देवदूत ने उसे कहा कि हां एक मंत्र है जिसको बार-बार दोहराने से उसकी हालत में सुधार हो जाएगा! वह मंत्र है "भगवान आपके अलावा कोई शरण नहीं" यह वह अद्भुत मंत्र है जिस से बड़ी से बड़ी सजा, बड़ा से बड़ा दर्द कम हो जाता है या कभी कभी खत्म भी।

गरुड़ इस मंत्र को लेकर उसी पंछी के पास लौटा और उसे देवदूत से हुई सारी बात बताई और वह मंत्र भी दिया और वहां से चला गया।

7 दिनों बाद फिर से गरुड़ को किसी काम से धरती पर आना हुआ और उसी रास्ते से वह गुजर रहा था। तो गरुड़ ये देखकर अचंभित था कि पहले जो पंछी मरने की हालत में था उसके अब नए पंख निकल आए थे! वह जहां रह रहा था वहां पर नई झाड़ियां उग निकली थी और उसके नजदीक ही एक छोटा सा तालाब बन चुका था।

अपना काम खत्म करके गरुड़ जब देव लोक वापस लौटा तो उसे वही देवदूत मिले। गरुड़ ने देव दूतो से पूछा कि आप तो कह रहे थे उस पंछी को 7 वर्षों तक पीड़ा सहनी पड़ेगी और अब मैं जो देख कर आया हूं वह तो कुछ और ही है!

देवदूत ने गरुड़ से कहा कि यह उसी मंत्र का परिणाम है जो आपने उस  पंछी को दिया था। तुम्हारे मंत्र देने के बाद वह दिन-रात उसी मंत्र को बोलता रहता। जब उसे तकलीफ होती तब भी वह मंत्र बोलता। जब उड़ने की कोशिश करता और गिर जाता तब भी वही मंत्र बोलता। जब उसे भूख लगती तब भी वह यही मंत्र बोलता। 

और तुम तो जानते हो भगवान की सच्ची भक्ति से ही वह अपनी  सभी प्रकार की परेशानियों को समाप्त कर देता है।उस पक्षी ने भगवान की सच्ची अंतर्मन से भक्ति की ओर भगवान ने जैसा आचरण बताया वैसा करने  7 सालों की सजा 7 दिनों में ही समाप्त  कर दी!

आपको क्या लगता है क्या हम भगवान को धन्यवाद देते हैं? नहीं हम उन्हे हर उस चीज के लिए कोसते हैं जो हमें नहीं मिली, लेकिन उसने जो हमें अनगिनत मूल्यवान मार्ग बताया कि आप इस मार्ग पर चलकर सभी प्रकार के सुखों को प्राप्त कर सकते हो।


जीवन में पॉजिटिव रहना सीखो अगर तुम्हें सिर दर्द हो रहा है तो भगवान का शुक्रिया करो कि कम से कम तुम्हें बुखार नहीं आया। तुम्हारे पास छोटा घर है तो भगवान को शुक्रिया अदा करो कि कम से कम तुम्हें सड़क पर नहीं रहना पड़ रहा। तुम्हें साधारण खाना मिलता है तो भगवान को शुक्रिया अदा करो कि कम से कम तुम्हें दो वक्त भरपेट खाना मिल रहा है।

*🔔👨‍👨‍👦‍👦⏰⛳✅विशेष:-भव्य आत्माओं, आज प्रत्येक व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए अनेकों प्रकार से भगवान के नाम के साथ अनेकों प्रकार से पूजा विधान  कर रहा है। वह व्यक्ति विशेष भगवान को तो मान रहा है किंतु वह भगवान के द्वारा बताए गए मार्ग के अनुसार आचरण नहीं कर रहा है।इस कारण से वह दुखी हो रहा है। अतः हम सभी को सच्चे देव शास्त्र गुरु की भक्ति करते हुए उनके बताए गए मार्ग पर अपनी शक्ति अनुसार चलकर यह मनुष्य भव सार्थक करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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