सोमवार, 22 अप्रैल 2024

बंद मुट्ठी का रहस्य

*बन्द मुठ्ठी का रहस्य*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 बन्द मुठ्ठी का रहस्य ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल पूर्णिमा , मंगल वार , 23 अप्रैल  2024 कलिकाल के षष्ठम तीर्थंकर  सूर्य की महादशा को अनुकूल बनाने वाले मिथ्यात्व व मोह अंधकार को समाप्त कर रत्नत्रय में ओज तेज की शक्ति प्रदाता  1008 श्री पद्मप्रभ भगवान का केवल कल्याणक  महोत्सव है।*

*🔔🪔 वैशाख कृष्ण 2,  गुरुवार , 25 अप्रैल  2024 कलिकाल के 23 वें तीर्थंकर उपसर्ग विजेता , केतु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी विघ्न बाधाओं को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्कृष्ट रत्नत्रय को धारण कराने वाले 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का गर्भ कल्याणक  महोत्सव है।*

 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*


एक समय एक राज्य में  राजा ने घोषणा की कि वह राज्य के अमुख मंदिर में पूजा अर्चना करने के लिए आने वाली पूर्णिमा के दिन जाएगा।

 इतना सुनते ही  मंदिर के पुजारी ने मंदिर की रंग रोगन और सजावट करना शुरू कर दिया, क्योंकि राजा आने वाले थे। इस खर्चे के लिए उसने  ₹6000/- का कर्ज लिया ।

 नियत तिथि पर राजा मंदिर में दर्शन, पूजा, अर्चना के लिए पहुंचे और पूजा अर्चना करने के बाद आरती की थाली में चार आने दक्षिणा स्वरूप रखे और राजा अपने महल में प्रस्थान कर गया ! पुजारी ने  ढिंढोरा पिटवाया की राजा की दी हुई वस्तु को वह नीलाम कर मंदिरजी में आने वाले भक्तों के लिए धर्मशाला बनाईं जाएगी । 

नीलामी पर उसने अपनी मुट्ठी में चार आने रखे पर मुट्ठी बंद रखी और किसी को दिखाई नहीं। सभी से कहां कि यह राजा के द्वारा दी गई अनमोल धरोहर है।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

 लोग समझे की राजा की दी हुई वस्तु बहुत अमूल्य होगी इसलिए बोली रु10,000/- से शुरू हुई।

रु 10,000/- की बोली बढ़ते बढ़ते 
रु दो हजार तक पहुंची और पुजारी ने वो वस्तु फिर भी देने से इनकार कर दिया। यह बात राजा के कानों तक पहुंची ।

राजा ने अपने सैनिकों से पुजारी को बुलवाया और पुजारी से निवेदन किया कि वह मेरी वस्तु को नीलाम ना करें । उसे मंदिर जी के गुल्लक में लाल कपड़े में बांध कर रखा जाए। मंदिर जी में आने वाले भक्तों के लिए राज्य कोष से धर्मशाला का निर्माण किया जाएगा। इस प्रकार राजा ने अपनी रक्षा व धर्म की प्रभावना की।

तब से यह कहावत बनी है बंद मुट्ठी  लाख की खुल गई तो खाक की !!

यह मुहावरा आज भी प्रचलन में है।   

प्रकृति ने सृष्टि की रचना करते समय तीन विशेष रचना की

1. अनाज में कीड़े पैदा कर दिए, वरना लोग इसका सोने और चाँदी की  तरह संग्रह करते।

2. मृत्यु के बाद देह (शरीर) में दुर्गन्ध व जीवों को उत्पन्न कर दिया, वरना कोई अपने प्यारों को कभी भी  जलाता या दफ़न नहीं करता।

3. जीवन में किसी भी प्रकार के संकट या अनहोनी के साथ रोना और समय के साथ भुलाना, वरना जीवन में निराशा और अंधकार ही रह जाता, कभी भी आशा, प्रसन्नता या जीने की इच्छा नहीं होती।


*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें