शनिवार, 20 अप्रैल 2024

समर्पण से सफलता

*समर्पण से सफलता*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒समर्पण से सफलता ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल 13 , रविवार , 21 अप्रैल  2024 कलिकाल के शासन नायक अंतिम तीर्थंकर उपसर्ग विजेता बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक  ज्ञान आचरण प्रदाता 1008 श्री महावीर भगवान का जन्म कल्याणक  महोत्सव है।*

*🔔अप्रैल माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव   21, 23, 25 इन दिनांकों में है।*
*⛳षोडषकारण व्रत 26 मार्च से 24 अप्रैल तक*।
 *🔔🎪 13 अप्रैल से 22 अप्रैल तक दश लक्षण महापर्व*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

पुराने समय की बात है। एक ब्रह्मचारी ने कई विद्याओं का अध्ययन पूर्ण कर लिया था। अब वह आत्म विद्या का ज्ञान प्राप्त करना चाहता था। 

अपनी इस इच्छा की पूर्ति के लिए वह एक प्रसिद्ध ऋषि के आश्रम में पहुंचा। ऋषि ने उसे आश्रम में रहने की आज्ञा दे दी। उसे वहां कई तरह के सेवा कार्य करने को दिए गए। ब्रह्मचारी को वहां सेवा करते-करते कई दिन बीत गए। किन्तु उसका अध्ययन आरंभ नहीं हुआ। इससे उसके मन में कई तरह की शंकाएं पैदा होने लगीं। 

कहां तो वह सर्वोच्च कही जाने वाली आत्म विद्या प्राप्त करने आया था और यहां, सांसारिक कार्यों के झमेले में पड़ गया था। एक दिन जब वह घड़ा लेकर पानी भरने नदी पर पहुंचा, तो गुस्से और संताप में जल रहा था। 

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उसने जोर से घड़ा रेत पर पटका और वहीं बैठ गया। तभी घड़े से आवाज आई, 'तुम इतना क्रोध और उतावलापन क्यों दिखाते हो? गुरु ने यदि तुम्हें शरण दी है तो निश्चित ही देर-सवेर है तुम्हारी मनोकामना भी पूर्ण होगी। यह सुनकर ब्रह्मचारी बोला, 'मैं यहां दुनियादारी के काम करने नहीं, आत्म विद्या प्राप्त करने आया हूं। 
मगर यहां तो मेरा समय दूसरों की सेवा में ही गुजर जाता है।

 इस पर घड़े ने कहा, "सुनो मित्र, मैं पहले सिर्फ एक मिट्टी का डला था। पहले कुम्हार ने मुझे ने लेकर कूटा, गलाया और कुछ दिनों तक अपने पैरों तले भी रौदा। इसके बाद उसने मुझे आकार दिया, भट्टी में तपाया। 

इस सबकी बदौलत आज में तुम्हारे सामने इस रूप में मौजूद हूं। यदि तुम भी आगे बढ़ना चाहते हो, तो परेशानियों से घबराना नहीं। बस अपने कर्म में लगे रहना।' यह सुनकर ब्रह्मचारी का गुस्सा व संताप दूर हो गया। उसने संकल्प लिया कि वह गुरु के आदेश पर पूरे समर्पण भाव से चलेगा। उसके आचरण में आए इस बदलाव को ऋषि ने भी पहचान लिया। 

चूंकि आत्म विद्या बुद्धि का विषय न होकर अनुभूति का विषय है। लिहाजा शिष्य द्वारा सच्चा समर्पण का पाठ सीखने के बाद ही उसकी शिक्षा आरंभ हुई और आगे चलकर वह एक प्रसिद्ध आत्म तत्त्ववेत्ता ऋषि बना।

विपत्तियों से न घबराएं। पूर्ण समर्पण से कार्य करें। सफलता अवश्य मिलेगी।

*विशेष:- भव्य आत्माओं, आज सबसे बड़ी हमारी असफलता का मुख्य कारण यह है कि हम सभी सच्चे देव शास्त्र गुरु को तो मानते हैं किंतु उनके द्वारा बताए गए मार्ग को अपनी शक्ति अनुसार अपने आचरण में नहीं उतारते।जब तक उनके द्वारा बताए गए आचरण को नहीं अपनाएंगे तबतक हमें उनकी शरण प्राप्त नहीं होगी। यही प्रकृति का नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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