शनिवार, 26 अगस्त 2023

दान करने से

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 दान करने से ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔🪔 दिनांक 30 अगस्त  गुरुवार आज श्रावण शुक्ल चतुर्दशी व पौर्णिमा दोनों तिथियां सम्मिलित होने से आज एक साथ शाश्वत पर्व चतुर्दशी, पौर्णिमा होने से रक्षाबंधन पर्व भी आज ही मनाया जाएगा। 👉श्रावण शुक्ल पौर्णिमा , दिनांक 30 अगस्त  गुरुवार कलिकाल के ग्यारहवें  तीर्थंकर सभी प्रकार के सुखों की शक्ति प्रदाता श्रेयांसनाथ    भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

आज हम इस कहानी से श्रम दान व धन दौलत दान का महत्व समझ सकते है ‌।यह कहानी उन भारतवासियों की सच्चाई भी है उसमें आप भी शामिल हो सकते हो।

किसी नगर में एक वैद्य रहते थे। उनका व्यवहार बेहद कुशल और विनम्र था, इसीलिए वे उस पूरे इलाके में बहुत ही प्रसिद्ध वैद्य के नाम से जाने जाते थे । वे अपने चिकित्सा आश्रम में ही रोगियों का इलाज़ करते थे।

एक बार एक सेठ अपने बच्चे को दिखाने उस वैद्य के पास पहुंचा। बच्चे को देखने के बाद वैद्य ने कुछ पुड़िया दवा दी और पर्चे पर विवरण लिखा और समझा भी दिया कैसे कब किस प्रकार सेवन करना है ‌।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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सेठ ने वैद्य से पूछा, क्या फीस देनी होगी? वैद्य ने कहा, आप मुझे 100 सोने की अशर्फी दे दिजीये। यह बात पास बैठा दूसरा मरीज सुन रहा था, जो बेहद गरीब था। उसने सोचा कि इतनी फीस मैं  कैसे दे पाऊंगा? यह सोच कर वह चुपचाप उठ कर जाने लगा। वैद्य ने उससे पूछा तो उसने सारी बात बता दी। वैद्य ने कहा, तुम यही बैठो, तुम्हारा इलाज़ मुफ्त में होगा, जब तुम ठीक हो जाओ तब आश्रम आकार दूसरों की सेवा कर देना।
यह बात सुन कर सेठ मन ही मन क्रोधित हो गया और वैद्य को बोला, वैद्य जी, आप तो बहुत घटिया इंसान हैं, मेरा पैसा देख कर आपको लालच आ गया और मुझसे इतनी बड़ी रकम मांग बैठे, जबकि इसका इलाज़ आपने मुफ्त में ही कर दिया, मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। 

वैद्य मुस्कुराते हुए बोले, नहीं सेठ जी, ऐसी बात नहीं है, दरअसल, मेरे आश्रम को चलाने के लिए मुझे दो चीजों की आवश्यकता होती है – धन और सेवा, जिस व्यक्ति के पास जो चीज़ होती है, मैं वही मांगता हूं।
आपके पास धन है तो मैं आपसे धन लूंगा और इस व्यक्ति के पास धन नहीं है, इसीलिए ठीक होकर यह मेरे आश्रम में अपनी सेवा प्रदान करेगा, सेठ जी वैद्य जी की बात सुन कर सन्न रह गए।

उन्होने वैद्य से कहा, मुझे माफ कर दीजिए वैद्य जी, मैं बगैर आपका भावार्थ समझे हुए ही किसी गलत निष्कर्ष पर पहुंच गया था। मैं यह भूल गया था कि आप जैसा व्यक्त यदि कुछ कर रह है, तो निश्चित ही उसका कोई विशेष कारण होगा।

यह कहते हुए सेठ ने वैद्य जी की हथेली पर 100 स्वर्ण अशर्फी रखी और मुस्कुराते हुए अपने घर की ओर चल दिए।

*🎪👪✍️✅⏰विशेष : - भव्य आत्माओं, आज हम सभी एक दूसरे के सहयोगी बनकर जीवन सफल कर सकते है। हां हमारे पास जो भी अच्छाई है उसे बांटना चालू कर दो वह अच्छाई जीवन पर्यन्त समाप्त नहीं होगी वह दिन प्रतिदिन जैसे जैसे हम उसका वितरण करेंगे वह बढ़ती रहेगी। जिसने भी अपनी अच्छाइयों को किसी को वितरित नहीं किया उसके पास वह अच्छाइयां कुछ समय बाद नहीं ठहरती यह प्रकृति का नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 20 अगस्त 2023

मेरा समझदार बेटा

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*मेरा समझदार बेटा*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरा समझदार बेटा ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अगस्त माह में आने वाली दिनांक   22 , 23, 30,   तारीख को है।* 
*🔔🪔 श्रावण शुक्ल षष्ठी , दिनांक 22 अगस्त   मंगलवार कलिकाल के बाईसवें वें तीर्थंकर अरिष्ट निवारक  नेमीनाथ  भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔🪔 श्रावण शुक्ल सप्तमी , दिनांक 23 अगस्त  बुधवार कलिकाल के तेईसवें वें तीर्थंकर सभी प्रकार के उपसर्गो को सहन करने की शक्ति प्रदाता पार्श्वनाथ     भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔🪔 आज दिनांक 23 अगस्त  बुधवार को श्रावण शुक्ल चतुर्दशी व पौर्णिमा दोनों तिथियां सम्मिलित होने से आज एक साथ शाश्वत पर्व चतुर्दशी, पौर्णिमा होने से रक्षाबंधन पर्व भी आज ही मनाया जाएगा। 👉श्रावण शुक्ल पौर्णिमा , दिनांक 30 अगस्त  गुरुवार कलिकाल के ग्यारहवें  तीर्थंकर सभी प्रकार के सुखों की शक्ति प्रदाता श्रेयांसनाथ    भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

"मम्मा ये बताओ, दादा दादी आपको बहुत परेशान करते हैं ना.."
"हाँ बेटा पर क्या कर सकते हैं.. अब हैं यहाँ तो झेलना ही पड़ेगा |"
"पर क्यूँ मम्मा... क्यूँ झेलना पड़ेगा"

"तुम नही समझोगे रहने दो"

"एक काम करते हैं मम्मा, इन दोनो को चाचा चाची के घर भेज देते हैं"
"वो वहाँ दो दिन भी नही रह पायेंगे बेटा.. चाची तो दादी को देखते ही तुनक जाती है और चाचा तो तुम्हारे चाची के पल्ले से ऐसे बँधे हैं कि वो उतना ही सुनते हैं जितना चाची कहती है | वहाँ इनका कोई गुज़ारा नही होने वाला | "

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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"तो बुआ को बोल दो ना ये उनके भी तो माँ पापा हैं ना , वो ही ले जायें कुछ दिनों के लिए इन दोनो को| "
"तुम भी ना बड़े भोले हो बेटा.. वहाँ नही जायेंगे दादा दादी.. ढकोसला करेंगे कि हम तो बेटी के घर का पानी भी नही पी सकते तो वहाँ जा कर रहेंगे कैसे और अगर रहने को तैयार हो भी गये तो तुम्हारी बुआ के पचासों बहाने निकल आयेंगे | वो कम थोड़े ना है, वो भी तो अपनी माँ पर ही गयी है | "

"क्या मम्मा मतलब कोई इन्हे अपने साथ नही रखना चाहता | एक काम करो मम्मा इन्हे वहाँ पहुँचा दो... वो मैने टीवी पर देखा था कुछ ओल्ड ऐज होम टाइप से है.. अरे वो जो उस दिन मूवी में आ रहा था | "

"वृद्धाआश्रम कहते हैं उसे ... मैं भी थक जाती हूँ काम कर के.. सुबह उठने से सोने तक इनके नखरे झेलना... तौबा तौबा... कब तक आखिर .. मैं भी कुछ दिन और देख रही हूँ..नहीं तो तुम्हारे पापा से बात करूँगी कि वो इन दोनो को वहीं छोड़ आये |"

"हाँ यही ठीक रहेगा.. दादी दिन भर टोकती रहती है.. टीवी मत देखो, मोबाइल मत खेलो..... मैं बच्चा थोड़े ना हूँ.. बड़ा हो रहा हूँ मैं... समझदार हो रहा हूँ.. ये भी कोई बात हुयी भला. .. हुँ...ह |"

"अरे मेरा राजा बेटा...इतना गुस्सा.... दस साल के ही हो अभी.. मेरी आँखो के तारे हो तुम.... इतनी जल्दी बड़े हो जाओगे कभी सोचा ही नही था | अब देखो तुम बड़े होते जाओगे और हम बूढ़े होते जाएँगे | फिर तुम्हारी शादी करेंगे.. प्यारी सी दुल्हनियाँ लायेंगे | "

"नहीं मम्मा प्लीज़.... मैं तो बड़ा हो रहा हूँ पर आप लोग प्लीज़ बूढ़े मत होना |"
"हा हा हा क्यूँ बेटा.. बूढ़ा तो सबको ही होना है एक दिन "

"पर मम्मा आप लोग बूढ़े हो जाओगे और मेरी वाइफ आयेगी तो उसे भी ऐसे ही परेशान होना पड़ेगा ना.. वो भी तरह तरह के आईडिया सोचेगी कि कैसे आप लोगों को यहाँ से हटाया जाये..  नो मम्मा प्लीज़ नो..आप भी दादी की तरह हो जाओगी और मेरी वाइफ को परेशान करोगी .... . मैं ऐसा नही होने दूँगा... एक काम करूँगा.. मैं मेरी शादी होते ही आप दोनों के लिए ओल्ड ऐज होम बुक करवा दूँगा जहाँ आप लोग रह सकोगे और मैं और मेरी वाइफ भी चैन से रह लेंगे |"

"हुँ...ह.. हमारा घर है हमारे पास... तुम रहना अपने घर में अपनी वाइफ को लेकर | यही करोगे तुम... पाल पोस कर बड़ा कर रहे हैं और तुम हमें वृद्धा आश्रम भेजने की तैयारी कर रहे हो | वाह बेटा वाह... | "

"मम्मा.. मैं कहाँ कुछ गलत कह रहा हूँ | दादा दादी ने भी तो पापा बुआ को पाला पोसा ही होगा ना...सभी माँ बाप पालते हैं अपने बच्चों को, उसमें क्या नया है... . पर अब जब सब बड़े हो गये हैं तो कोई बूढ़े लोगों को अपने पास नही रखना चाहता तो भला मैं क्यूँ रखूँगा, परेशानी बढ़ाते हैं ये बूढ़े लोग | मैं भी नही रखूँगा और साइंटिस्ट बन कर कोई ऐसी दवा बनाऊँगा जिससे कि मैं कभी बूढ़ा ही ना हो पाऊँ और मेरे बच्चों को कोई ओल्ड ऐज होम ना ढूँढना पड़े |"

अपने बेटे की बातें सुन माँ के शरीर में सिहरन सी दौड़ गयी और जिन आँखो में कुछ देर पहले परेशानी, व्यथा, गुस्सा दिख रहा था उन्ही आँखो में अब शर्म पानी का रूप ले चुका थी ।


*🕉️🌞👪✍️🔔विशेष :-  भव्य आत्माओं, आज हम अपने बच्चों पर कैसे गलत संस्कार डाल रहे है।इस कारण हम सभी का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। कृपया एक बात का विचार अवश्य करें कि जैसा संस्कारों का बीजारोपण हम स्वयं के साथ परिवार व समाज पर कर रहे है बस वैसा ही हमें भविष्य में प्राप्त होगा।यह किसी धर्म का नहीं प्रकृति का नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 17 अगस्त 2023

स्व शक्ति जागृत करें

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*स्व शक्ति जागृत करें*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 स्व शक्ति जागृत करें ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 श्रावण शुक्ल दूज , दिनांक 18अगस्त   शुक्रवार कलिकाल के पांचवें वें तीर्थंकर अरिष्ट निवारक सुमतिनाथ  भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक   22 , 23, 30,   तारीख को है। जुलाई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक चिड़िया का एक दाना पेड़ के कंदरे में कहीं फंस गया था। चिड़िया ने पेड़ से बहुत अनुरोध किया उस दाने को दे देने के लिए लेकिन पेड़ उस छोटी सी चिड़िया की बात भला कहां सुनने वाला था...।

हार कर चिड़िया बढ़ई के पास गई और उसने उससे अनुरोध किया कि तुम उस पेड़ को काट दो, क्योंकि वो उसका दाना नहीं दे रहा...।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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भला एक दाने के लिए बढ़ई पेड़ कहां काटने वाला था..फिर चिड़िया राजा के पास गई और उसने राजा से कहा कि तुम बढ़ई को सजा दो क्योंकि बढ़ई पेड़ नहीं काट रहा और पेड़ दाना नहीं दे रहा...

राजा ने उस नन्हीं चिड़िया को डांट कर भगा दिया कि कहां एक दाने के लिए वो उस तक पहुंच गई है। चिड़िया हार नहीं मानने वाली थी...

वो महावत के पास गई कि अगली बार राजा जब हाथी की पीठ पर बैठेगा तो तुम उसे गिरा देना,क्योंकि राजा बढ़ई को सजा नहीं देता..बढ़ई पेड़ नहीं काटता...पेड़ उसका दाना नहीं देता..महावत ने भी चिड़िया को डपट कर भगा दिया...

चिड़िया फिर हाथी के पास गई और उसने अपने अनुरोध को दुहराया कि अगली बार जब महावत तुम्हारी पीठ पर बैठे तो तुम उसे गिरा देना क्योंकि वो राजा को गिराने को तैयार नहीं...

राजा बढ़ई को सजा देने को तैयार नहीं...बढ़ई पेड़ काटने को तैयार नहीं...पेड़ दाना देने को राजी नहीं...हाथी बिगड़ गया...उसने कहा, ऐ छोटी चिड़िया..तू इतनी सी बात के लिए मुझे महावत और राजा को गिराने की बात सोच भी कैसे रही है?

चिड़िया आखिर में चींटी के पास गई और वही अनुरोध दोहराकर कहा कि तुम हाथी की सूंढ़ में घुस जाओ चींटी ने चिड़िया से कहा,"चल भाग यहां से...बड़ी आई हाथी की सूंढ़ में घुसने को बोलने वाली अब तक अनुरोध की मुद्रा में रही चिड़िया ने रौद्र रूप धारण कर लिया...उसने कहा कि "मैं चाहे पेड़, बढ़ई, राजा, महावत, और हाथी का कुछ न बिगाड़ पाऊं...पर तुझे तो अपनी चोंच में डाल कर खा ही सकती हूँ...

चींटी डर गई...भाग कर वो हाथी के पास गई...हाथी भागता हुआ महावत के पास पहुंचा...महावत राजा के पास कि महाराज चिड़िया का काम कर दीजिए नहीं तो मैं आपको गिरा दूंगा....राजा ने फौरन बढ़ई को बुलाया उससे कहा कि पेड़ काट दो नहीं तो सजा दूंगा...बढ़ई पेड़ के पास पहुंचा...बढ़ई को देखते ही पेड़ बिलबिला उठा कि मुझे मत काटो.मैं चिड़िया को दाना लौटा दूंगा...!!अंत मे चिड़िया ने अपना दाना पेड़ से प्राप्त कर लिया और वो खुशी खुशी अपने घोंसले में चली गयी।
            
आपको अपनी ताकत को पहचानना होगा...आपको पहचानना होगा कि भले आप छोटी सी चिड़िया की तरह होंगे, लेकिन ताकत की कड़ियां कहीं न कहीं आपसे होकर गुजरती होंगी...हर शेर को सवा शेर मिल सकता है, बशर्ते आप अपनी लड़ाई से घबराएं नहीं...।

आप अगर किसी काम के पीछे पड़ जाएंगे तो वो काम होकर रहेगा विश्वास कीजिए। हर ताकत के आगे एक और ताकत होती है और अंत में सबसे ताकतवर आप होते हैं। हिम्मत, लगन और पक्का इरादा ही हमारी ताकत की बुनियाद है..!!

*🔔⏰🕉️🧘⏰विशेष :- भव्य आत्माओं,हम सभी को अपनी स्व शक्ति जागृत कर बुध्दि विवेक के द्वारा आप अपने जीवन को सुखमय बनाना है। जबतक यह विचार हमारे मन में जागृत नहीं होगा तब तक हमारा लक्ष्य उतना ही दूर रहेगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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रविवार, 13 अगस्त 2023

क्षमा का महत्व

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*क्षमा का महत्व*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
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*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अगस्त माह में आने वाली दिनांक  18 , 22 , 23, 30,   तारीख को है। अगस्त माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक सेठ जी ने अपने छोटे भाई को तीन लाख रूपये व्यापार के लिये दिये। उसका व्यापार बहुत अच्छा जम गया, लेकिन उसने रूपये बड़े भाई को वापस नहीं लौटाये।

आखिर दोनों में झगड़ा हो गया, झगड़ा भी इस सीमा तक बढ़ गया कि दोनों का एक दूसरे के यहाँ आना जाना व बोलचाल बिल्कुल बंद हो गया। घृणा व द्वेष का आंतरिक संबंध अत्यंत गहरा हो गया। सेठ जी, हर समय हर संबंधी के सामने अपने छोटे भाई की निंदा-निरादर व आलोचना करने लगे।

सेठ जी अच्छे साधक भी थे, लेकिन इस कारण उनकी साधना लड़खड़ाने लगी। भजन- पूजन के समय भी उन्हें छोटे भाई का चिंतन होने लगा।

 मानसिक व्यथा का प्रभाव तन पर भी पड़ने लगा। बेचैनी बढ़ गयी। समाधान नहीं मिल रहा था। आखिर वे एक संत के पास गये और अपनी व्यथा सुनायी।

संतश्री ने कहाः- 'बेटा ! तू चिंता मत कर। स्वयं के विश्वास व भगवान की भक्ति के साथ गुरु के मार्गदर्शन से सब ठीक हो जायेगा। तुम कुछ फल व मिठाइयां लेकर अपने छोटे भाई के यहाँ शुभ मुहूर्त में जाना और मिलते ही उससे केवल इतना कहना, 'अनुज ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे "क्षमा" कर दो।'

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*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 सेठ जी ने कहाः- "महाराज ! मैंने ही उनकी मदद की है और "क्षमा" भी मैं ही माँगू !"

संतश्री ने उत्तर दियाः- "परिवार में ऐसा कोई भी संघर्ष नहीं हो सकता, जिसमें दोनों पक्षों की गलती न हो। चाहे एक पक्ष की भूल एक प्रतिशत हो दूसरे पक्ष की निन्यानवे प्रतिशत, पर भूल दोनों तरफ से होगी।"
सेठ जी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था। उसने कहाः- "महाराज ! मुझसे क्या भूल हुई ?"

बेटा ! तुमने मन ही मन अपने छोटे भाई को बुरा समझा– यही है तुम्हारी पहली भूल।

तुमने उसकी निंदा, आलोचना व तिरस्कार किया– यह है तुम्हारी दूसरी भूल।
क्रोध पूर्ण आँखों से उसके दोषों को देखा– यह है तुम्हारी तीसरी भूल।
अपने कानों से उसकी निंदा सुनी– यह है तुम्हारी चौथी भूल।
तुम्हारे हृदय में छोटे भाई के प्रति क्रोध व घृणा है– यह है तुम्हारी आखिरी भूल।
अपनी इन भूलों से तुमने अपने छोटे भाई को दुःख दिया है। तुम्हारा दिया दुःख ही कई गुना होकर तुम्हारे पास लौटा है। जाओ, अपनी भूलों के लिए "क्षमा" माँगों। नहीं तो तुम न चैन से जी सकोगे, न चैन से मर सकोगे। क्षमा माँगना बहुत बड़ी साधना है। ओर तुम तो एक बहुत अच्छे साधक हो।"
सेठ जी की आँखें खुल गयीं। संतश्री को प्रणाम करके वे छोटे भाई के घर पहुँचे। सब लोग भोजन की तैयारी में थे। उन्होंने दरवाजा खटखटाया। दरवाजा उनके भतीजे ने खोला। सामने ताऊ जी को देखकर वह अवाक् सा रह गया और खुशी से झूमकर जोर-जोर से चिल्लाने लगाः "मम्मी ! पापा !! देखो कौन आये हैं ! ताऊ जी आये हैं, ताऊ जी आये हैं....।"

माता-पिता ने दरवाजे की तरफ देखा। सोचा, 'कहीं हम सपना तो नहीं देख रहे !' छोटा भाई हर्ष से पुलकित हो उठा, 'अहा ! सात वर्ष के बाद आज बड़े भैया घर पर आये हैं।' प्रेम से गला रूँध गया, कुछ बोल न सका। सेठ जी ने फल व मिठाइयाँ टेबल पर रखीं और दोनों हाथ जोड़कर छोटे भाई को कहाः- "भाई ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे क्षमा करो ।"

 “क्षमा" शब्द निकलते ही उनके हृदय का प्रेम अश्रु बनकर बहने लगा। छोटा भाई उनके चरणों में गिर गया और अपनी भूल के लिए रो-रोकर क्षमा याचना करने लगा। बड़े भाई के प्रेमाश्रु छोटे भाई की पीठ पर और छोटी भाई के पश्चाताप व प्रेममिश्रित अश्रु बड़े भाई के चरणों में गिरने लगे।

क्षमा व प्रेम का अथाह सागर फूट पड़ा। सब शांत, चुप, सबकी आँखों से अविरल अश्रुधारा बहने लगी। छोटा भाई उठ कर गया और उसने सात लाख रुपये लाकर बड़े भाई के सामने रख दिये। बडे भाई ने कहा "भाई! आज मैं इन कौड़ियों को लेने के लिए नहीं आया हूँ। मैं अपनी भूल मिटाने, अपनी साधना को सजीव बनाने और द्वेष का नाश करके प्रेम की गंगा बहाने आया हूँ ।

मेरा आना सफल हो गया, मेरा दुःख मिट गया। अब मुझे आनंद का एहसास हो रहा है।"

छोटे भाई ने कहाः- "भैया ! जब तक आप ये रुपये नहीं लेंगे तब तक मेरे हृदय की तपन नहीं मिटेगी। कृपा करके आप ये रूपये ले लें।

सेठ जी ने छोटे भाई से रूपये लिये और अपने क्षेत्र की संस्था जहां पर वह बच्चे जो अनाथ या ग़रीबों को शिक्षा के साथ संस्कार भी सिखाएं जाते थे।उस संस्था को दोनों भाईयों ने सपरिवार जाकर भेंट कर दिया। सब कार में बैठे, घर पहुँचे।

सात वर्ष बाद उस अर्धरात्रि में जब पूरे परिवार का मिलन हुआ तो ऐसा लग रहा था कि मानो साक्षात् प्रेम ही शरीर धारण किये वहाँ पहुँच गया हो।

सारा परिवार प्रेम के अथाह सागर में मस्त हो रहा था। "क्षमा" माँगने के बाद उस सेठ जी के दुःख, चिंता, तनाव, भय, निराशा रूपी मानसिक रोग जड़ से ही मिट गये और साधना सजीव हो उठी।

हमें भी अपने दिल में "क्षमा" रखनी चाहिए अपने सामने छोटा हो या बड़ा, अपनी गलती हो या ना हो, क्षमा मांग लेने से सब झगड़े समाप्त हो जाते हैैं...!! 

*👪✅🔔⏰🙏विशेष:-भव्य आत्माओं, आज हमें जीवन में सफल होना है तो अपने अंदर क्षमा भाव को धारण करना अनिवार्य है। हमें अपने परिवार व समाज के लोगों की अपनी शक्ति अनुसार शिक्षा व संस्कारों में सहयोग प्रदान कर मनुष्य भव सार्थक करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 8 अगस्त 2023

लालची की हार ईमानदारी की खुशी

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*लालची की हार ईमानदारी की खुशी*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 लालची की हार ईमानदारी की खुशी ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक  18 , 22 , 23, 30,   तारीख को है। जुलाई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

*💐💐ईमानदारी का नाटक करना और ईमानदार होना इसमें जमीन- आसमान का अंतर है आप भी इस कहानी को समझकर अपना सुधार कर सकते है। दुसरों को सुधारेंगे उसके कर्म।💐💐*


एक व्यक्ति कुछ पैसे निकलवाने के लिए बैंक गया। कैशियर ने पेमेंट किया... कस्टमर ने चुपचाप उसे अपने बैग में रखा और चल दिया। एक लाख चालीस हज़ार रुपए उसनें निकलवाए थे।

कैशियर ने ग़लती से एक लाख चालीस हज़ार रुपए के बजाय एक लाख साठ हज़ार रुपए उसे दे दिए हैं... यह उसने देख लिया था... लेकिन उसने यह आभास कराते हुए कि उसने पैसे नहीं गिने है और कैशियर की ईमानदारी पर उसे पूरा भरोसा है। चुपचाप पैसे बेग मे रख लिए।

पैसे बैग में रखते ही अतिरिक्त बीस हजार रुपयों को लेकर उसके मन में उधेड़ -बुन शुरू हो गई। एक बार उसके मन में आया कि ज्यादा रकम वापस लौटा दे... 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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लेकिन दूसरे ही पल उसने सोचा कि जब मैं ग़लती से किसी को अधिक पेमेंट कर देता हूँ, तो मुझे कौन लौटाने आता है.??

मन में बार-बार विचार आया कि, पैसे लौटा दे... लेकिन हर बार दिमाग पैसे ना लौटाने की कोई न कोई वजह या बहाना बता देता ।
इंसान के अन्दर सिर्फ दिल और दिमाग ही नहीं होता..!परमात्मा का प्रतिनिधित्व करती अंतरात्मा भी होती है.!!
उस आदमी की अंतरात्मा रह-रह कर उसे कचोटने लगी... 

अंदर से आवाज़ आ रही थी कि, तुम किसी की ग़लती से फ़ायदा उठाने से नहीं चूक रहे हो और ऊपर से बेईमान न होने का ढोंग भी कर रहे हो। क्या यही है तुम्हारी ईमानदारी.???
उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। अचानक ही उसने बैग में से बीस हज़ार रुपए निकाले और जेब में डालकर बैंक की ओर चल पड़ा। उसकी बेचैनी और तनाव घटने लगा... वह स्वयं को हल्का और स्वस्थ अनुभव करने लगा । यद्यपि वह कोई बीमार नहीं था, तथापि उसे लग रहा था जैसे उसे किसी बीमारी से मुक्ति मिल गई हो। उसके चेहरे पर किसी युद्ध को जीतने जैसी प्रसन्नता व्याप्त थी।

अपने रुपए पाकर कैशियर ने चैन की सांस ली। उसने कस्टमर को अपनी जेब से हज़ार रुपए का एक नोट निकालकर उसे देते हुए कहा - ‘‘भाई साहब ! आपका बहुत-बहुत आभार । आज मेरी तरफ से बच्चों के लिए मिठाई ले जाना। प्लीज़ मना मत करना।”

‘‘भाई ! आभारी तो मैं हूँ आपका और आज मिठाई भी मैं ही आप सबको खिलाऊँगा ।’’ - कस्टमर बोला।
कैशियर ने पूछा - ‘‘ भाई साहब ! आप किस बात का आभार प्रकट कर रहे हो और किस ख़ुशी में मिठाई खिला रहे हो ?’’
कस्टमर ने जवाब दिया - "बीस हज़ार के चक्कर ने मुझे आत्म-मूल्यांकन का अवसर प्रदान किया। अगर आपसे ये ग़लती न होती तो, न तो मैं द्वंद्व में फँसता और न ही उससे निकल कर अपनी लोभवृत्ति पर क़ाबू पाता। यह बहुत मुश्किल काम था। घंटों के द्वंद्व के बाद ही मैं जीत पाया। इस दुर्लभ अवसर के लिए आपका आभार।”

ईमानदारी का नाटक करना और ईमानदार होना इसमें जमीन- आसमान का अंतर है।

इतिहास गवाह है, लालच ने हमेशा इंसान को परेशानी और दुःख के सिवा कुछ नहीं दिया..!!

*🔔🪔✍️⏰👪विशेष:- भव्य आत्माओं, आज हर कोई व्यक्ति लालच के वश में होकर अपने आपको कर्जदार बना रहा है। अगर हमें किसी का कर्जदार ना बनते हुए सेठ साहूकार बनना है तो ईमानदारी से मानवता धर्म का पालन करना होगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 1 अगस्त 2023

मेरी श्रद्धा मेरे भगवान के प्रति

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*मेरी श्रद्धा मेरे भगवान के प्रति*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरी श्रद्धा मेरे भगवान के प्रति ✍️🐒*

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*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक  18 , 22 , 23, 30,   तारीख को है। जुलाई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक पंडित जी  रामायण कथा सुना रहे थे।  लोग आते और आनंद विभोर होकर जाते। पंडित जी का नियम था रोज कथा शुरू  करने से पहले "आइए हनुमंत जी  बिराजिए" कहकर हनुमान जी का आह्वान करते थे, फिर एक घण्टा प्रवचन करते थे।वकील साहब हर रोज कथा सुनने आते। वकील साहब के भक्तिभाव पर एक दिन तर्कशीलता हावी हो गई।
 उन्हें लगा कि महाराज रोज "आइए हनुमंत जी बिराजिए" कहते हैं तो क्या हनुमान जी सचमुच आते होंगे!

अत: वकील साहब ने पंडित जी से पूछ ही डाला- महाराज जी, आप रामायण की कथा बहुत अच्छी कहते हैं।
 हमें बड़ा रस आता है परंतु आप जो गद्दी प्रतिदिन हनुमान जी को देते हैं उसपर क्या हनुमान जी सचमुच बिराजते हैं?

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पंडित जी  ने कहा… हाँ यह मेरा व्यक्तिगत विश्वास है कि रामकथा हो रही हो तो हनुमान जी अवश्य पधारते हैं। 

वकील ने कहा… महाराज ऐसे बात नहीं बनेगी। 
हनुमान जी यहां आते हैं इसका कोई सबूत दीजिए । 
आपको साबित करके दिखाना चाहिए कि हनुमान जी आपकी कथा सुनने आते हैं।

महाराज जी ने बहुत समझाया कि भैया आस्था को किसी सबूत की कसौटी पर नहीं कसना चाहिए यह तो भक्त और भगवान के बीच का प्रेमरस है, व्यक्तिगत श्रद्घा का विषय है । आप कहो तो मैं प्रवचन करना बंद कर दूँ या आप कथा में आना छोड़ दो।

लेकिन वकील नहीं माना, वो कहता ही रहा कि आप कई दिनों से दावा करते आ रहे हैं। यह बात और स्थानों पर भी कहते होंगे,इसलिए महाराज आपको तो साबित करना होगा कि हनुमान जी कथा सुनने आते हैं।

इस तरह दोनों के बीच वाद-विवाद होता रहा।
 मौखिक संघर्ष बढ़ता चला गया। हारकर पंडित जी महाराज ने कहा… हनुमान जी हैं या नहीं उसका सबूत कल दिलाऊंगा।
कल कथा शुरू हो तब प्रयोग करूंगा।

जिस गद्दी पर मैं हनुमानजी को विराजित होने को कहता हूं आप उस गद्दी को आज अपने घर ले जाना। 
कल अपने साथ उस गद्दी को लेकर आना और फिर मैं कल गद्दी यहाँ रखूंगा।
मैं कथा से पहले हनुमानजी को बुलाऊंगा, फिर आप गद्दी ऊँची उठाना। 
यदि आपने गद्दी ऊँची कर दी तो समझना कि हनुमान जी नहीं हैं। वकील इस कसौटी के लिए तैयार हो गया।

पंडित जी  ने कहा… हम दोनों में से जो पराजित होगा वह क्या करेगा, इसका निर्णय भी कर लें ?.... यह तो सत्य की परीक्षा है।

 वकील ने कहा- मैं गद्दी ऊँची न कर सका तो वकालत छोड़कर आपसे दीक्षा ले लूंगा।
 आप पराजित हो गए तो क्या करोगे? 
पंडित जी  ने कहा… मैं कथावाचन छोड़कर आपके ऑफिस का चपरासी बन जाऊंगा।

अगले दिन कथा पंडाल में भारी भीड़ हुई जो लोग रोजाना कथा सुनने नहीं आते थे,वे भी भक्ति, प्रेम और विश्वास की परीक्षा देखने आए। 
काफी भीड़ हो गई। 
पंडाल भर गया। 
श्रद्घा और विश्वास का प्रश्न जो था।

पंडित जी  महाराज और वकील साहब कथा पंडाल में पधारे... गद्दी रखी गई।
पंडित  जी ने सजल नेत्रों से मंगलाचरण किया और फिर बोले "आइए हनुमंत जी बिराजिए" ऐसा बोलते ही पंडित जी  के नेत्र सजल हो उठे ।
 मन ही मन पंडित जी  बोले… प्रभु ! आज मेरा प्रश्न नहीं बल्कि रघुकुल रीति की पंरपरा का सवाल है।
 मैं तो एक साधारण जन हूँ।
 मेरी भक्ति और आस्था की लाज रखना।

फिर वकील साहब को निमंत्रण दिया गया आइए गद्दी ऊँची कीजिए। 
लोगों की आँखे जम गईं । 
वकील साहब खड़े हुए।
उन्होंने गद्दी उठाने के लिए हाथ बढ़ाया पर गद्दी को स्पर्श भी न कर सके ! 

जो भी कारण रहा, उन्होंने तीन बार हाथ बढ़ाया, किन्तु तीनों बार असफल रहे।

पंडित  जी देख रहे थे, गद्दी को पकड़ना तो दूर वकील साहब गद्दी को छू भी न सके।
 तीनों बार वकील साहब पसीने से तर-बतर हो गए।

 वकील साहब पंडित जी महाराज के चरणों में गिर पड़े और बोले महाराज गद्दी उठाना तो दूर, मुझे नहीं मालूम कि क्यों मेरा हाथ भी गद्दी तक नहीं पहुंच पा रहा है।

अत: मैं अपनी हार स्वीकार करता हूँ।          
कहते है कि श्रद्घा और भक्ति के साथ की गई आराधना में बहुत शक्ति होती है। मानो तो देव नहीं तो पत्थर।

प्रभु की मूर्ति तो पाषाण की ही होती है लेकिन भक्त के भाव से उसमें प्राण प्रतिष्ठा होती है तो प्रभु बिराजते है।

*⏰🎪👪⏰🔔विशेष:-भव्य आत्माओं, आज प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में भगवान के प्रति श्रद्धा रखता है। जिस व्यक्ति की जितनी गहरी आस्था होगी वह व्यक्ति को अपने आराध्य से उतना ही आशीर्वाद प्राप्त होता है। अतः हम विश्व में कहीं पर भी रहे चौबीस घंटे अपने आराध्य को श्रद्धा पूर्वक याद करते हुए उनके बताए गए मार्ग पर आगे बढ़ते जाओ जीवन में कभी भी निराशा का प्रवेश नहीं होगा।जिस समय हमारी श्रद्धा डावांडोल होगी उस समय ही निराशा प्रवेश करेंगी।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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