**
*लालची की हार ईमानदारी की खुशी*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 लालची की हार ईमानदारी की खुशी ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक 18 , 22 , 23, 30, तारीख को है। जुलाई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*💐💐ईमानदारी का नाटक करना और ईमानदार होना इसमें जमीन- आसमान का अंतर है आप भी इस कहानी को समझकर अपना सुधार कर सकते है। दुसरों को सुधारेंगे उसके कर्म।💐💐*
एक व्यक्ति कुछ पैसे निकलवाने के लिए बैंक गया। कैशियर ने पेमेंट किया... कस्टमर ने चुपचाप उसे अपने बैग में रखा और चल दिया। एक लाख चालीस हज़ार रुपए उसनें निकलवाए थे।
कैशियर ने ग़लती से एक लाख चालीस हज़ार रुपए के बजाय एक लाख साठ हज़ार रुपए उसे दे दिए हैं... यह उसने देख लिया था... लेकिन उसने यह आभास कराते हुए कि उसने पैसे नहीं गिने है और कैशियर की ईमानदारी पर उसे पूरा भरोसा है। चुपचाप पैसे बेग मे रख लिए।
पैसे बैग में रखते ही अतिरिक्त बीस हजार रुपयों को लेकर उसके मन में उधेड़ -बुन शुरू हो गई। एक बार उसके मन में आया कि ज्यादा रकम वापस लौटा दे...
⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️
लेकिन दूसरे ही पल उसने सोचा कि जब मैं ग़लती से किसी को अधिक पेमेंट कर देता हूँ, तो मुझे कौन लौटाने आता है.??
मन में बार-बार विचार आया कि, पैसे लौटा दे... लेकिन हर बार दिमाग पैसे ना लौटाने की कोई न कोई वजह या बहाना बता देता ।
इंसान के अन्दर सिर्फ दिल और दिमाग ही नहीं होता..!परमात्मा का प्रतिनिधित्व करती अंतरात्मा भी होती है.!!
उस आदमी की अंतरात्मा रह-रह कर उसे कचोटने लगी...
अंदर से आवाज़ आ रही थी कि, तुम किसी की ग़लती से फ़ायदा उठाने से नहीं चूक रहे हो और ऊपर से बेईमान न होने का ढोंग भी कर रहे हो। क्या यही है तुम्हारी ईमानदारी.???
उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। अचानक ही उसने बैग में से बीस हज़ार रुपए निकाले और जेब में डालकर बैंक की ओर चल पड़ा। उसकी बेचैनी और तनाव घटने लगा... वह स्वयं को हल्का और स्वस्थ अनुभव करने लगा । यद्यपि वह कोई बीमार नहीं था, तथापि उसे लग रहा था जैसे उसे किसी बीमारी से मुक्ति मिल गई हो। उसके चेहरे पर किसी युद्ध को जीतने जैसी प्रसन्नता व्याप्त थी।
अपने रुपए पाकर कैशियर ने चैन की सांस ली। उसने कस्टमर को अपनी जेब से हज़ार रुपए का एक नोट निकालकर उसे देते हुए कहा - ‘‘भाई साहब ! आपका बहुत-बहुत आभार । आज मेरी तरफ से बच्चों के लिए मिठाई ले जाना। प्लीज़ मना मत करना।”
‘‘भाई ! आभारी तो मैं हूँ आपका और आज मिठाई भी मैं ही आप सबको खिलाऊँगा ।’’ - कस्टमर बोला।
कैशियर ने पूछा - ‘‘ भाई साहब ! आप किस बात का आभार प्रकट कर रहे हो और किस ख़ुशी में मिठाई खिला रहे हो ?’’
कस्टमर ने जवाब दिया - "बीस हज़ार के चक्कर ने मुझे आत्म-मूल्यांकन का अवसर प्रदान किया। अगर आपसे ये ग़लती न होती तो, न तो मैं द्वंद्व में फँसता और न ही उससे निकल कर अपनी लोभवृत्ति पर क़ाबू पाता। यह बहुत मुश्किल काम था। घंटों के द्वंद्व के बाद ही मैं जीत पाया। इस दुर्लभ अवसर के लिए आपका आभार।”
ईमानदारी का नाटक करना और ईमानदार होना इसमें जमीन- आसमान का अंतर है।
इतिहास गवाह है, लालच ने हमेशा इंसान को परेशानी और दुःख के सिवा कुछ नहीं दिया..!!
*🔔🪔✍️⏰👪विशेष:- भव्य आत्माओं, आज हर कोई व्यक्ति लालच के वश में होकर अपने आपको कर्जदार बना रहा है। अगर हमें किसी का कर्जदार ना बनते हुए सेठ साहूकार बनना है तो ईमानदारी से मानवता धर्म का पालन करना होगा।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें