मंगलवार, 30 मई 2023

स्वयं की शक्ति

  
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*स्वयं की शक्ति*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 स्वयं की शक्ति ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 ज्येष्ठ शुक्ल शुक्ल बारस दिनांक 1  जून  गुरुवार , कलि काल के सप्तम तीर्थंकर  सुपार्श्वनाथ स्वामीजी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक  05 , 09 , 13 , 24, 25,   तारीख को है। जून माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

*✍️दो छोटे लड़के घर से कुछ दूर खेल रहे थे। खेलने में वे इतने मस्त थे कि उन्हें पता ही नहीं चला कि वे भागते-भागते कब एक सुनसान जगह पहुंच गए। उस जगह पर एक पुराना कुआं था और उनमें से एक लड़का गलती से उस कुएं में जा गिरा। “बचाओ-बचाओ” वो चीखने लगा। दूसरा लड़का एकदम से डर गया और मदद के लिए चिल्लाने लगा, पर उस सुनसान जगह कहां कोई मदद को आने वाला था! फिर लड़के ने देखा कि कुएं के करीब ही एक बाल्टी और रस्सी पड़ी हुई है, उसने तेजी दिखाते हुए तुरंत रस्सी का एक सिरा वहां एक पेड़ से बांधा और दूसरा सिरा नीचे कुएं में फेंक दिया।*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*कुएं में गिरे लड़के ने रस्सी पकड़ ली, अब वह अपनी पूरी ताकत से उसे बाहर खींचने लगा, अथक प्रयास के बाद वे उसे ऊपर तक खींच लाया और उसकी जान बचा ली। जब गांव में जाकर उन्होंने यह बात बताई तो किसी ने भी उन पर यकीन नहीं किया। एक आदमी बोला- तुम एक बाल्टी पानी तो निकाल नहीं सकते, इस बच्चे को किस प्रकार बाहर खींच सकते हो; तुम झूठ बोल रहे हो। तभी एक बुजुर्ग बोला- यह सही कह रहा है क्योंकि वहां पर इसके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था और वहां इसे कोई यह कहने वाला नहीं था कि ‘तुम ऐसा नहीं कर सकते हो’।*

*जिंदगी में अगर सफलता चाहते हो तो उन लोगों की बात मानना छोड़ दो जो यह कहते हैं कि तुम इसे नहीं कर सकते।*

*🔔⏰✍️👪⛳विशेष :- भव्य आत्माओं, आज वर्तमान में हम सभी के पास वह शक्ति विद्यमान है जिसके बल पर हम जीवन में आने वाली सभी समस्याओं को समाप्त कर निर्विकल्प जीवन व्यतीत कर यह मनुष्य भव सफल कर सकते है। किंतु आज हमारी नकारात्मक सोच व आलस्य के कारण हम कुछ नहीं कर पा रहे। यही सबसे बड़ी हमारी कमजोरी है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 29 मई 2023

दान का फल

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*दान का फल*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 दान का फल ✍️🐒*

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*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक 01 , 05 , 09 , 13 , 24, 25,   तारीख को है। जून माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक लालची भिखारी सुबह-सुबह भीख मांगने निकला।

 चलते समय उसने अपनी झोली में जौ के मुट्ठी भर दाने डाल दिए, इस अंधविश्वास के कारण कि भिक्षाटन के लिए निकलते समय भिखारी अपनी झोली खाली नहीं रखते। 

भरी थैली देखकर दूसरों को भी लगता है कि इसे पहले से ही किसी ने कुछ दे रखा है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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पूर्णिमा का दिन था। भिखारी सोच रहा था कि आज अगर ईश्वर की कृपा होगी तो मेरी यह झोली शाम से पहले ही भर जाएगी। अचानक सामने से राजपथ पर उसी देश के राजा की सवारी आती हुई दिखाई दी।

भिखारी खुश हो गया। उसने सोचा कि राजा के दर्शन और उनसे मिलने वाले दान से आज तो उसकी सारी दरिद्रता दूर हो जाएंगी और उसका जीवन संवर जाएगा। जैसे-जैसे राजा की सवारी निकट आती गई, भिखारी की कल्पना और उत्तेजना भी बढ़ती गई। जैसे ही राजा का रथ भिखारी के निकट आया, राजा ने अपना रथ रूकवाया और उतर कर उसके निकट पहुंचे।

भिखारी की तो मानो सांसें ही रूकने लगीं, लेकिन राजा ने उसे कुछ देने के बदले उल्टे अपनी बहुमूल्य चादर उसके सामने फैला दी और उससे भीख की याचना करने लगा। 

भिखारी को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें। अभी वह सोच ही रहा था कि राजा ने पुनः याचना की। भिखारी ने अपनी झोली में हाथ डाला मगर हमेशा दूसरों से लेने वाला मन देने को राजी नहीं हो रहा था।

जैसे-तैसे करके उसने दो दाने जौ के निकाले और राजा की चादर में डाल दिए। उस दिन हालांकि भिखारी को अधिक भीख मिली, लेकिन अपनी झोली में से दो दाने जौ के देने का मलाल उसे सारा दिन रहा। शाम को जब उसने अपनी झोली पलटी तो उसके आश्चर्य की सीमा न रही।

जो जौ वह अपने साथ झोली में ले गया था, उसके दो दाने सोने के हो गए थे। अब उसे समझ में आया कि यह दान की महिमा के कारण ही हुआ। वह पछताया कि – काश! उस समय उसने राजा को और अधिक जौ दिए होते लेकिन दे नहीं सका, क्योंकि उसकी देने की आदत जो नहीं थी।

चिंतन के बिंदु-
1. देने से कोई चीज कभी घटती नहीं बल्कि बढ़ती है।
2. लेने वाले से देने वाला बड़ा होता है।
3. अंधेरे में छाया बुढ़ापे में काया और अन्त समय में माया किसी का साथ नहीं देती।

*👪⏰🎪🔔✅विशेष :- भव्य आत्माओं, इस मनुष्य भव में हम अपने धर्म के अनुसार मनसे, वचनों से, शरीर से व धन से जिस प्रकार का सुख स्वयं के लिए चाहते है, उसी प्रकार का सहयोग धर्म पर चलने वाले साधर्मी का करना चाहिए।इस मनुष्य पर्याय में हम वर्तमान में स्वयं के कर्मो के द्वारा जिस प्रकार का बीजारोपण करेंगे वैसी ही हमें फल की प्राप्ति होगी।*
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*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 28 मई 2023

मेरी सोच

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*मेरी सोच*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
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एक बार एक गांव में एक स्वभाव से भला आदमी  दुखी था| उसे देख एक चोर को उस पर दया आ गई| वह उस बेरोजगार आदमी के पास गया और बोला, “मेरे साथ चलो, चोरी में बहुत सारा धन मिलेगा” आदमी बेकार बैठे-बैठे परेशान हो गया था| इसलिए वह उस चोर के साथ चोरी करने को तैयार हो गया| 

लेकिन अब समस्या यह थी की उसे चोरी करना आती नहीं थी| उसने साथी से कहा, “मुझे चोरी करना आती तो नहीं है, फिर कैसे करूंगा|”

 चोर ने कहा” तुम उसकी चिंता मत करो, मैं तुम्हें सब सिखा दूंगा”

अगले दिन दोनों रात के अंधेरे में गांव से दूर एक किसान का पका हुआ खेत काटने पहुंच गए| वह खेत गांव से दूर जंगल में था, इसीलिए वहां रात में कोई रखवाली के लिए आता जाता न था| लेकिन फिर भी सुरक्षा के लिहाज से उसने अपने नए साथी को खेत की मुंडेर पर रखवाली के लिए खड़ा कर दिया और किसी के आने पर आवाज लगाने को कहकर खुद खेत में फसल चोरी करने पहुंच गया| 

नए साथी ने थोड़ी ही देर में अपने साथी को आवाज लगे, “भाई जल्दी उठो, यहाँ से भाग चलो…खेत का मालिक पास ही खड़ा देख रहा है” चोर ने जैसे ही अपने साथी की बात सुनी वह फसल काटना छोड़ उठकर भागने लगा|

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कुछ दूर जाकर दोनों खड़े हुए तो चोर ने साथी से पुछा, “मालिक कहाँ खड़ा था? कैसे देख रहा था? नए चोर ने सहजता पूर्वः जवाब दिया, “मित्र! ईश्वर हर जगह मौजूद है| इस संसार में जो कुछ भी है उसी का है और वह सब कुछ देख रहा है| मेरी आत्मा ने कहा, ईश्वर यहां भी मौजूद है और हमें चोरी करते हुए देख रहा है…इस स्थिति में हमारा भागना ही उचित था| पहले चोर पर बेरोजगार आदमी की बातों का इतना प्रभाव पड़ा की उसने चोरी करना ही छोड़ दिया..!!

*⏰👪🎪🔔✍️विशेष :- भव्य आत्माओं, आज  वर्तमान में हम जो कुछ भी कार्य कर रहे है वह कार्य सही या ग़लत इसका फैसला हमें स्वयं करना चाहिए।उस कार्य के लाभ हानी का विचार कर हमें तत्काल फैसला करना चाहिए।*

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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 27 मई 2023

कड़वे शब्द

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*कड़वे शब्द*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
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*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक 01 , 05 , 09 , 13 , 24, 25,   तारीख को है। जून माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

सुंदर नगर में एक सेठ रहते थे। उनमें हर गुण था- नहीं था तो बस खुद को संयत में रख पाने का गुण। जरा-सी बात पर वे बिगड़ जाते थे। आसपास तक के लोग उनसे परेशान थे। खुद उनके घर वाले तक उनसे परेशान होकर बोलना छोड़ देते।

किंतु, यह सब कब तक चलता। वे पुन: उनसे बोलने लगते। इस प्रकार काफी समय बीत गया, लेकिन सेठ की आदत नहीं बदली। उनके स्वभाव में तनिक भी फर्क नहीं आया।

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अंततः एक दिन उसके घरवाले एक साधु के पास गये और अपनी समस्या बताकर बोले- “महाराज ! हम उनसे अत्यधिक परेशान हो गये हैं, कृपया कोई उपाय बताइये।” तब, साधु ने कुछ सोचकर कहा- “सेठ जी ! को मेरे पास भेज देना।”

“ठीक है, महाराज” कहकर सेठ जी के घरवाले वापस लौट गये। घर जाकर उन्होंने सेठ जी को अलग-अलग उपायों के साथ उन्हें साधु महाराज के पास ले जाना चाहा। किंतु, सेठ जी साधु-महात्माओं पर विश्वास नहीं करते थे। अतः वे साधु के पास नहीं आये। तब एक दिन साधु महाराज स्वयं ही उनके घर पहुंच गये। वे अपने साथ एक गिलास में कोई द्रव्य लेकर गये थे।

साधु को देखकर सेठ जी की प्योरिया चढ़ गयी। परंतु घरवालों के कारण वे चुप रहे।

साधु महाराज सेठ जी से बोले- “सेठ जी ! मैं हिमालय पर्वत से आपके लिए यह पदार्थ लाया हूं, जरा पीकर देखिये।” पहले तो सेठ जी ने आनाकानी की, परंतु फिर घरवालों के आग्रह पर भी मान गये। उन्होंने द्रव्य का गिलास लेकर मुंह से लगाया और उसमें मौजूद द्रव्य को जीभ से चाटा।

ऐसा करते ही उन्होंने सड़ा-सा मुंह बनाकर गिलास होठों से दूर कर लिया और साधु से बोले- “यह तो अत्यधिक कड़वा है, क्या है यह ?”

“अरे आपकी जबान जानती है कि कड़वा क्या होता है” साधु महाराज ने कहा। “यह तो हर कोई जानता है” कहते समय सेठ ने रहस्यमई दृष्टि से साधु की ओर देखा।

“नहीं ऐसा नहीं है, अगर हर कोई जानता होता तो इस कड़वे पदार्थ से कहीं अधिक कड़वे शब्द अपने मुंह से नहीं निकालता। सेठ जी वह एक पल को रुके फिर बोले। सेठ जी याद रखिये जो आदमी कटु वचन बोलता है वह दूसरों को दुख पहुंचाने से पहले, अपनी जबान को गंदा करता है।”

सेठ समझ गये थे कि साधु ने जो कुछ कहा है उन्हें ही लक्षित करके कहा है। वह फौरन साधु के पैरों में गिर पड़े- “बोले साधु महाराज ! आपने मेरी आंखें खोल दी, अब मैं आगे से कभी कटु वचनों का प्रयोग नहीं करूंगा।”

सेठ के मुंह से ऐसे वाक्य सुनकर उनके घरवाले प्रसन्नता से भर उठे। तभी सेठ जी ने साधु से पूछा- “किंतु, महाराज ! यह पदार्थ जो आप हिमालय से लाये हो वास्तव में यह क्या है ?”

साधु मुस्कुराकर बोले- “ नीम के पत्तों का अर्क।” “क्या” सेठ जी के मुंह से निकला और फिर वे धीरे-से मुस्कुरा दिये।

*🙏✍️🎪👪⏰विशेष :- भव्य आत्माओं,कड़वा वचन बोलने से बढ़कर इस संसार में और कड़वा कुछ नहीं। किसी द्रव्य के कड़वे होने से जीभ का स्वाद कुछ ही देर के लिए कड़वा होता है। परंतु कड़वे वचन से तो मन और आत्मा को चोट लगती है..!! कड़वे शब्दों से किसी अन्य का नुकसान हो या ना हो किंतु स्वयं का नियम से नुकसान होता ही है। अतः जो शब्द स्वयं को अहितकारी हो उन्हें उपयोग में ना लावे।*

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*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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गुरुवार, 25 मई 2023

मेरा मन

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*मेरा मन*
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हम सभी के जीवन में कभी सुख, कभी दुख, कभी परेशानियाँ तो कभी सुकून, यह सब हमारे स्वयं के कर्मो के आधार पर चलता ही रहता है, लेकिन हर परिस्थिति में हम किसे चुनते हैं यह हमारे पुरुषार्थ पर निर्भर करता है।
         
एक दिन सुनहरी सुबह में एक  दादाजी और उनका पोता झील के पास बैठे थे। दोनों दादा पोता बड़े प्यार से बातें कर रहे थे। दादाजी अपने पोते को बातों के साथ-साथ जीवन का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। पोते ने बड़े प्यार से दादाजी से कहा, "दादाजी, मुझे कहानी सुनाइये ना।"  दादाजी मुस्कुराए और फिर उन्होंने कहा कि, "आज तो एक छोटी कहानी मेरे भीतर चल रही है।"

पोते ने बड़ी उत्सुकता से पूछा, "वह क्या है?" 
तब दादाजी ने कहा, "मेरे अंदर एक लड़ाई चल रही है। दो भेड़ियों के बीच, एक भयानक लड़ाई।"

पोते ने पूछा कि, "दादाजी यह कैसी लड़ाई है?"       

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दादाजी ने आगे बताते हुए कहा, "एक भेड़िया बुराई, क्रोध, दुःख, लोभ, और अहंकार से भरा हुआ है। दूसरा भेड़िया अच्छाई, आनंद, शांति, प्रेम, दया और विश्वास से भरा है। इन दोनों के बीच लड़ाई हो रही है।"

दादाजी ने आगे बताते हुए कहा, "बेटा, तुम्हारे और इस धरती के हर व्यक्ति के अंदर यह बड़ी लड़ाई चल रही है।" दादाजी पल भर के लिए शांत हो गए।
 
अचानक पोते ने बड़ी ही मासूमियत से और उत्सुकता से पूछा, "दादाजी फिर यह लड़ाई किसने जीती?"

दादाजी मुस्कुराये और बोले, *" जिस भेड़िये को तुम पोषित करोगे वही जीतेगा"*

बुराई और अच्छाई रूपी इन दो भेड़ियों में से हम जिस भेड़िए को पोषित करते हैं, वही जीतता है। हम सभी जिंदगी में कई ऐसी परिस्थितियों से गुजरते हैं, जिसमें हमें सही और गलत के बीच चयन करना होता है। आखिर में यह हम पर ही निर्भर करता है कि हम किस परिस्थिति को पोषित करते हैं और अपने जीवन के लिए चुनते हैं ।
          
*“जब हम दिल की सुनते है, तो हम चुनाव करने की एक विस्तृत मानसिक प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होती है; हम हमेशा जानते है की क्या सही है।”*

*विशेष :- भव्य आत्माओं, आज हम चाहे तो सही पुरुषार्थ कर वर्तमान में सबकुछ प्राप्त कर सकते है। किंतु राग द्वेष,लोभ के कारण हम जिस प्रकार मकड़ी जाल बनाकर उसी में उलझकर अपना जीवन बर्बाद करती है, वहीं हाल आज हमारा हो रहा है। अतः हमें वर्तमान में अपने आचरण को अच्छा बनाना आवश्यक है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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बुधवार, 24 मई 2023

मेरी पहचान क्या है

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*मेरी पहचान क्या है*
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*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरी पहचान क्या है ✍️🐒*

*बड़ा रोचक क़िस्सा है । कृपया स्थिरता पूर्वक पढ़कर कुछ ग्रहण करें।*

✍️राजा के दरबार मे...
एक आदमी नौकरी मांगने के लिए आया,,,,,
उससे उसकी योग्यता पूछी गई, 
तो वो बोला,
"मैं आदमी हो चाहे जानवर, उसकी शक्ल व क्रिया कलाप देख कर उसके बारे में बता सकता हूं,😇
राजा ने उसे अपने खास "घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज" बना दिया,,,,,😎
कुछ ही दिन बाद राजा ने उससे अपने सब से महंगे और मनपसन्द घोड़े के बारे में पूछा,
तो उसने कहा....
नस्ली नही है....😏
राजा को हैरानी हुई, 😳
उसने जंगल से घोड़े वाले को बुला कर पूछा,,,,,
उसने बताया घोड़ा नस्ली तो हैं,
पर इसके पैदा होते ही इसकी मां मर गई थी, 
इसलिए ये एक गाय का दूध पी कर उसके साथ पलकर बड़ा हुआ है,,,,,
राजा ने अपने नौकर को बुलाया और पूछा तुम को कैसे पता चला के घोड़ा नस्ली नहीं हैं??🧐
"उसने कहा 
"जब ये घास खाता है तो गायों की तरह सर नीचे करके, 
जबकि नस्ली घोड़ा घास मुह में लेकर सर उठा लेता है,,😎
राजा उसकी काबलियत से बहुत खुश हुआ,😊
उसने नौकर के घर अनाज ,घी, मुर्गे, और ढेर सारी बकरियां बतौर इनाम भिजवा दिए ,🥰

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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और अब उसे रानी के महल में तैनात कर दिया,,,😎
कुछ दिनो बाद राजा ने उससे रानी के बारे में राय मांगी,🧐
उसने कहा, 
"तौर तरीके तो रानी जैसे हैं,
लेकिन पैदाइशी नहीं हैं,😏
राजा के पैरों तले जमीन निकल गई, 😨
उसने अपनी सास को बुलाया,🤨 
सास ने कहा 
"सच्चाई यह है कि आपके पिताजी ने मेरे पति से हमारी बेटी की पैदाइश पर ही रिश्ता मांग लिया था,
लेकिन हमारी बेटी 6 महीने में ही मर गई थी,
लिहाज़ा हम ने आपके रजवाड़े से करीबी रखने के लिए किसी और की बच्ची को अपनी बेटी बना लिया,,🥰
राजा ने फिर अपने नौकर से पूछा, 
"तुम को कैसे पता चला??🧐
""उसने कहा, 
" रानी साहिबा का नौकरो के साथ सुलूक गंवारों से भी बुरा है,
एक खानदानी इंसान का दूसरों से व्यवहार करने का एक तरीका होता है,
जो रानी साहिबा में बिल्कुल नही,😏
राजा फिर उसकी पारखी नज़रों से खुश हुआ,😇
और फिर से बहुत सारा अनाज भेड़ बकरियां बतौर इनाम दी,🥰
साथ ही उसे अपने दरबार मे तैनात कर लिया,,😎
कुछ वक्त गुज़रा, 
राजा ने फिर नौकर को बुलाया,
और अपने बारे में पूछा,😇
नौकर ने कहा 
"जान की सलामती हो तो कहूं”🙏🏻
राजा ने वादा किया तो उसने कहा,
 "न तो आप राजा के बेटे हो,
और न ही आपका चलन राजाओं वाला है"😐
राजा को बहुत गुस्सा आया, 😡
मगर जान की सलामती का वचन दे चुका था,😏
राजा सीधा अपनी मां के महल पहुंचा...
मां ने कहा,
ये सच है,
तुम एक चरवाहे के बेटे हो,
हमारी औलाद नहीं थी,
तो तुम्हे गोद लेकर हम ने पाला,,,,,😊
राजा ने नौकर को बुलाया और पूछा , 
बता, "भाई वाले तुझे कैसे पता चला????🧐🤨
उसने कहा 
" जब राजा किसी को "इनाम दिया करते हैं, 
तो हीरे मोती और जवाहरात की शक्ल में देते हैं,
लेकिन आप भेड़, बकरियां, खाने पीने की चीजें दिया करते हैं...😏
ये रवैया किसी राजा का नही, 
किसी चरवाहे के बेटे का ही हो सकता है,,🤨
किसी इंसान के पास कितनी धन दौलत, सुख समृद्धि, रुतबा, इल्म, बाहुबल हैं ये सब बाहरी दिखावा हैं । 😏
इंसान की असलियत की पहचान,
उसके व्यवहार और उसकी नियत से होती है।

*👨‍👩‍👦‍👦🐒👩‍🦰👦✍️विशेष :- भव्य आत्माओं,  आप अपने कुल की मर्यादाएं सुरक्षित रखना चाहते है तो आपको अपने कुलाचार का पालन करना आवश्यक है। अन्यथा आपके वर्तमान आचरण के कारण आप अपना मूल अस्तित्व खो सकते है। अतः चौबीस घंटे सतर्क रहकर अपना जीवन सार्थक करें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

मंगलवार, 23 मई 2023

आप क्या बांटते हो

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*आप क्या बांटते हो*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒आप क्या बांटते हो ✍️🐒*


🔔एक व्यक्ति ऑटो से रेलवे स्टेशन जा रहा था। ऑटो वाला बड़े आराम से ऑटो चला रहा था। एक कार अचानक ही पार्किंग से निकलकर रोड पर आ गई।

 ऑटो ड्राइवर ने तेजी से ब्रेक लगाया और कार, ऑटो से टकराते-टकराते बची।
कार चला रहा आदमी गुस्से में ऑटोवाले को ही भला-बुरा कहने लगा जबकि गलती उसकी थी।

ऑटो चालक एक सत्संगी (सकारात्मक विचार सुनने-सुनाने वाला) था। उसने कार वाले की बातों पर गुस्सा नहीं किया और क्षमा माँगते हुए आगे बढ़ गया।

ऑटो में बैठे व्यक्ति को कार वाले की हरकत पर गुस्सा आ रहा था और उसने ऑटो वाले से पूछा तुमने उस कार वाले को बिना कुछ कहे ऐसे ही क्यों जाने दिया। उसने तुम्हें भला-बुरा कहा जबकि गलती तो उसकी थी। हमारी किस्मत अच्छी है, नहीं तो उसकी वजह से हम अभी अस्पताल में होते।

ऑटो वाले ने कहा साहब बहुत से लोग गार्बेज ट्रक (कूड़े का ट्रक) की तरह होते हैं। वे बहुत सारा कूड़ा अपने दिमाग में भरे हुए चलते हैं।

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 जिन चीजों की जीवन में कोई ज़रूरत नहीं होती उनको मेहनत करके जोड़ते रहते हैं जैसे क्रोध, घृणा, चिंता, निराशा आदि।

 जब उनके दिमाग में इनका कूड़ा बहुत अधिक हो जाता है तो वे अपना बोझ हल्का करने के लिए इसे दूसरों पर फेंकने का मौका ढूँढ़ने लगते हैं।

इसलिए मैं ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखता हूँ और उन्हें दूर से ही मुस्कराकर अलविदा कह देता हूँ। क्योंकि अगर उन जैसे लोगों द्वारा गिराया हुआ कूड़ा मैंने स्वीकार कर लिया तो मैं भी कूड़े का ट्रक बन जाऊँगा और अपने साथ-साथ आसपास के लोगों पर भी वह कूड़ा गिराता रहूँगा।

मैं सोचता हूँ जिंदगी बहुत ख़ूबसूरत है इसलिए जो हमसे अच्छा व्यवहार करते हैं उन्हें धन्यवाद कहो और जो हमसे अच्छा व्यवहार नहीं करते उन्हें मुस्कुराकर माफ़ कर दो। हमें यह याद रखना चाहिए कि सभी मानसिक रोगी केवल अस्पताल में ही नहीं रहते हैं। कुछ हमारे आसपास खुले में भी घूमते रहते हैं।
प्रकृति के नियम: यदि खेत में बीज न डाले जाएँ तो कुदरत उसे घास-फूस से भर देती है। उसी तरह से यदि दिमाग में सकारात्मक विचार न भरें जाएँ तो नकारात्मक विचार अपनी जगह बना ही लेते हैं। दूसरा नियम है कि जिसके पास जो होता है वह वही बाँटता है। “सुखी” सुख बाँटता है, “दुखी” दुख बाँटता है, “ज्ञानी” ज्ञान बाँटता है, भ्रमित भ्रम बाँटता है और “भयभीत” भय बाँटता है। जो खुद डरा हुआ है वह औरों को डराता है, दबा हुआ दबाता है, चमका हुआ चमकाता है।

*विशेष :- भव्य आत्माओं, आज से ही आप अपनी नकारात्मकता को पहचान कर उसे सकारात्मक बनाए।जब आप अपने आप से संतुष्ट हो तो अपनी सकारात्मकता को योग्य समय व व्यक्ति को बांटकर अपना मनुष्य भव सार्थक करें।आप जिस प्रकार से वितरण करेंगे भविष्य में आपके पास वैसा ही लौटकर आयेगा। यही प्रकृति का नियम है।*

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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 22 मई 2023

सबकी समस्या

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*सबकी समस्या*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सबकी समस्या ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 ज्येष्ठ  शुक्ल 4 ,दिनांक 23 मई मंगलवार को 15 वें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है। मोक्ष कल्याणक महोत्सव शाश्वत क्षेत्र शिखरजी में सुदत्तवर कूट पर हुआ था | आज के ही दिन पुष्य नक्षत्र में 800 मुनिराजों के साथ मोक्ष पद को प्राप्त किया था | इस कूट से 29 कोड़ा कोड़ी 19 करोड़ 9 लाख 9 हजार 785 मुनि सिद्ध भये | साक्षात दर्शन कर पुण्य संचय कर जीवन सार्थक करें।🛕*
*🔔⏰🎪 यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

🔔✍️एक 15 साल  के भाई ने अपने पापा से कहा "पापा पापा दीदी के होने वाले ससुर और सास कल आ रहे है" अभी जीजाजी ने फोन पर बताया।

दीदी मतलब उसकी बड़ी बहन की सगाई कुछ दिन पहले एक अच्छे घर में तय हुई थी।

दीनदयाल जी पहले से ही उदास बैठे थे धीरे से बोले...

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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हां बेटा.. उनका कल ही फोन आया था कि वो एक दो दिन में दहेज की  बात करने आ रहे हैं.. बोले... दहेज के बारे में आप से ज़रूरी बात करनी है.. 

बड़ी मुश्किल से यह अच्छा लड़का मिला था.. कल को उनकी दहेज की मांग इतनी ज़्यादा हो कि मैं पूरी नही कर पाया तो ?" 

कहते कहते उनकी आंखें भर आयीं..

घर के प्रत्येक सदस्य के मन व चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थी...लड़की भी उदास हो गयी... 

खैर.. 

अगले दिन समधी समधिन आए.. उनकी खूब आवभगत की गयी.. 

कुछ देर बैठने के बाद लड़के के पिता ने लड़की के पिता से कहा" दीनदयाल जी अब काम की बात हो जाए.. 

दीनदयाल जी की धड़कन बढ़ गयी.. बोले.. हां हां.. समधी जी.. जो आप हुकुम करें.. 

लड़के के पिताजी ने धीरे से अपनी कुर्सी दीनदयाल जी और खिसकाई ओर धीरे से उनके कान में बोले. दीनदयाल जी मुझे *दहेज* के बारे बात करनी है!...

दीनदयाल जी हाथ जोड़ते हुए आंखों में पानी लिए हुए बोले बताईए समधी जी....जो आप को उचित लगे.. मैं पूरी कोशिश करूंगा..

समधी जी ने धीरे से दीनदयाल जी का हाथ अपने हाथों से दबाते हुए बस इतना ही कहा.....

आप कन्यादान में कुछ भी देगें या ना भी देंगे... थोड़ा देंगे या ज़्यादा देंगे.. मुझे सब स्वीकार है... पर कर्ज लेकर आप एक रुपया भी दहेज मत देना.. वो मुझे स्वीकार नहीं.. 

क्योकि जो बेटी अपने बाप को कर्ज में डुबो दे वैसी "कर्ज वाली लक्ष्मी" मुझे स्वीकार नही...

मुझे बिना कर्ज वाली बहू ही चाहिए.. जो मेरे यहां आकर मेरी सम्पत्ति को दो गुना कर देगी.. 

दीनदयाल जी हैरान हो गए.. उनसे गले मिलकर बोले.. समधी जी बिल्कुल ऐसा ही होगा..

शिक्षा-  कर्ज वाली लक्ष्मी ना कोई विदा करें न ही कोई स्वीकार करे.. 

*⏰👪✍️🔑🙏विशेष :- भव्य आत्माओं,यह कहानी मेरी नही है,  यह सच्चाई भारत के 90% लोगों की है। आज  लगभग सभी घरों में, समाज में इस विषय पर चर्चा होती है। किंतु आज तक इस समस्या का हल नहीं निकला।इस समस्या का हल यह है कि हमारा लड़का हो या लड़की हो हम उसका विवाह अपनी बिरादरी में ही करेंगे। जितनी हमारी हैसियत है उससे अधिक कर्ज लेकर नहीं करेंगे। आज विवाह के आयोजन में अत्यधिक राशि खर्च की जा रही है।जो मात्र दिखावा है।उन आयोजनों में की जाने वाली राशि का अगर सही उपयोग किया जाए तो भारत का कोई भी परिवार बेरोजगार व कर्जदार नहीं होगा।यह सुझाव सभी भारतवासियों के लिए है।जो भी परिवार सुखी रहना चाहते है वे इसे अपने उपर लागू कर सकते है।*

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रविवार, 21 मई 2023

सच्चे सुख की प्राप्ति के लिए

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*सच्चे सुख की प्राप्ति के लिए*
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▶️पुराने समय में संत गांव के लोगों को प्रवचन देते थे, भिक्षा मांगकर अपना जीवन यापन करते थे। एक दिन गांव की महिला ने एक संत के लिए खाना बनाया। जब संत उस महिला के घर खाना खाने गए, तो उस महिला ने पूछा की महाराज हमें जीवन में सच्चा सुख और आनंद कैसे मिल सकता है? इस पर संत ने कहा की इसका जवाब हम आपको कल देंगे। 

अगले दिन उस महिला ने संत के लिए खीर बनाई, क्योकि वह महिला उन संत से सुख और आनंद के बारे में प्रवचन सुनना चाहती थी। 

उसके बाद संत आये और उन्होंने भिक्षा के लिए उस महिला को आवाज दी। महिला संत के लिए खीर लेकर बाहर आई। संत ने खीर लेने के लिए अपना पात्र आगे किया। महिला खीर डालने ही वाली थी की उसकी नजर पात्र  के अन्दर पड़ी। तो उसने संत से कहा की महाराज आपका पात्र तो गंदा है, इसमें कचरा पड़ा है। इस पर संत ने कहा- हां पात्र गंदा है, लेकिन आप खीर इसमें ही डाल दो। महिला ने कहा- नहीं महाराज, ऐसे तो खीर ख़राब हो जाएगी।

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आप ऐसा कीजिये ये पात्र मुझे दीजिये, मैं इसे धोकर साफ कर देती हूं। इस पर संत ने पूछा की मतलब जब तक पात्र  साफ नहीं होगा तो आप इसमें खीर नहीं देगी। उसके बाद महिला ने कहा- जी महाराज, मैं इसे साफ़ करने के बाद इसमें खीर दे दूंगी। तब संत ने कहा की ठीक इसी तरह जब तक हमारे मन में लोभ, क्रोध, मोह, और काम जैसे बुरे विचारो की गंदगी है, तो हम उसमें अच्छे उपदेश कैसे डाल सकते हैं? अगर ऐसे मन में उपदेश डालेंगे तो अपना असर नहीं दिखा पाएंगे। 

इसलिए अच्छे उपदेश सुनने के लिए मन को शांत और पवित्र करना चाहिए। तभी हम ज्ञान की बातें सीख सकते है। शांत और पवित्र मन वाले ही सच्चे सुख और आनंद की प्राप्ति कर पाते हैं।

जब हम अपने मन को शांत और पवित्र बना लेंगे तब हमें जीवन का सच्चा सुख और आनंद की प्राप्ति होगी।

*⏰👪✅🙏विशेष :- भव्य आत्माओं,हमारा सबसे महत्वपूर्ण पात्र है हमारा शरीर।आज हम अपने कुल की मर्यादाएं भूल गए है। जब जो भी वस्तु दिखाई देती है उसे बिना बुध्दि विवेक के शरीर में (खा) ग्रहण कर लेते है। दिन रात, अभक्ष्य, खाने योग्य आदि बातें ध्यान में नहीं होने से हमारे विचार,मन व शरीर दुषित हो जाने से हमारे अंदर क्रोध मान माया लोभ इनका अधिकार हो जाने से हम रास्ता भटक जाते है। अतः हम सभी को कुलाचार के अनुसार भक्ष्य वस्तुओं का समय के अनुसार ग्रहण करना चाहिए।*

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शनिवार, 20 मई 2023

जैसा कर्म वैसा फल

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*जैसा कर्म वैसा फल*
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*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 ज्येष्ठ  शुक्ल 4 ,दिनांक 23 मई मंगलवार को 15 वें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔⏰🎪 यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

✍️ब्रिटेन के स्कॉटलैंड में फ्लेमिंग नाम का एक गरीब किसान था। एक दिन वह अपने खेत पर काम कर रहा था। अचानक पास में से किसी के चीखने की आवाज सुनाई पड़ी । किसान ने अपना साजो सामान व औजार फेंका और तेजी से आवाज की तरफ लपका।

आवाज की दिशा में जाने पर उसने देखा कि एक बच्चा दलदल में डूब रहा था । वह बालक कमर तक कीचड़ में फंसा हुआ बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहा था। वह डर के मारे बुरी तरह कांप पर रहा था और चिल्ला रहा था।

किसान ने आनन-फानन में लंबी टहनी ढूंढी। अपनी जान पर खेलकर उस टहनी के सहारे बच्चे को बाहर निकाला।अगले दिन उस किसान की छोटी सी झोपड़ी के सामने एक शानदार गाड़ी आकर खड़ी हुई।उसमें से कीमती वस्त्र पहने हुए एक सज्जन उतरे।

उन्होंने किसान को अपना परिचय देते हुए कहा- " मैं उस बालक का पिता हूं और मेरा नाम राँडॉल्फ चर्चिल है।"

फिर उस अमीर राँडाल्फ चर्चिल ने कहा कि वह इस एहसान का बदला चुकाने आए हैं ।

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फ्लेमिंग नामक उस किसान ने उन सज्जन के ऑफर को ठुकरा दिया ।
उसने कहा, "मैंने जो कुछ किया उसके बदले में कोई पैसा नहीं लूंगा।
किसी को बचाना मेरा कर्तव्य है, मानवता है , इंसानियत है और उस मानवता इंसानियत का कोई मोल नहीं होता ।"

इसी बीच फ्लेमिंग का बेटा झोपड़ी के दरवाजे पर आया।
उस अमीर सज्जन की नजर अचानक उस पर गई तो उसे एक विचार सूझा ।
उसने पूछा - "क्या यह आपका बेटा है ?"

किसान ने गर्व से कहा- "हां यह मेरा बेटा है !"

उस व्यक्ति ने अब नए सिरे से बात शुरू करते हुए किसान से कहा- "ठीक है अगर आपको मेरी कीमत मंजूर नहीं है तो ऐसा करते हैं कि आपके बेटे की शिक्षा का भार मैं अपने ऊपर लेता हूं । मैं उसे उसी स्तर की शिक्षा दिलवाने की व्यवस्था करूंगा जो अपने बेटे को दिलवा रहा हूं।फिर आपका बेटा आगे चलकर एक ऐसा इंसान बनेगा , जिस पर हम दोनों गर्व महसूस करेंगे।"

किसान ने सोचा "मैं तो अपने पुत्र को उच्च शिक्षा दिला पाऊंगा नहीं और ना ही सारी सुविधाएं जुटा पाऊंगा, जिससे कि यह बड़ा आदमी बन सके ।अतः इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता हूं।"

बच्चे के भविष्य की खातिर फ्लेमिंग तैयार हो गया ।अब फ्लेमिंग के बेटे को सर्वश्रेष्ठ स्कूल में पढ़ने का मौका मिला।
आगे बढ़ते हुए उसने लंदन के प्रतिष्ठित सेंट मेरीज मेडिकल स्कूल से स्नातक डिग्री हासिल की।
फिर किसान का यही बेटा पूरी दुनिया में "पेनिसिलिन" का आविष्कारक महान वैज्ञानिक सर अलेक्जेंडर फ्लेमिंग के नाम से विख्यात हुआ।
लेकिन
यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती! कुछ वर्षों बाद, उस अमीर के बेटे को निमोनिया हो गया ।
और उसकी जान  सर अलेक्जेंडर फ्लेमिंग द्वारा बनाए गए पेनिसिलीन के इंजेक्शन से ही बची।
उस अमीर  चर्चिल के बेटे का नाम था- विंस्टन चर्चिल , जो दो बार ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे !

हैं न आश्चर्यजनक संजोग।
इसलिए ही कहते हैं कि व्यक्ति को हमेशा अच्छे काम करते रहना चाहिए।  क्योंकि आपका किया हुआ काम आखिरकार लौटकर आपके ही पास आता है ! यानी अच्छाई पलट - पलट कर आती रहती है!यकीन मानिए मानवता की दिशा में उठाया गया प्रत्येक कदम आपकी  स्वयं की चिंताओं को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा।

कुएं में उतरने के बाद
बाल्टी झुकती है,
लेकिन झुकने के बाद,
भर कर ही बाहर निकलती है।

यहीं जिन्दगी जीने का सार हैं।

जीवन भी कुछ ऐसा ही है,
जो झुकता है वो अवश्य,
कुछ न कुछ लेकर ही उठता है।

*🔔✅👪⏰✍️विशेष :- भव्य आत्माओं, आज वर्तमान में हम दुसरों की सहायता करके यह समझते है कि हमनें दुसरों के उपर उपकार किया है।यह हमारी सोच गलत है, हमने दुसरे की सहायता करके अपने भविष्य को सुरक्षित कर लिया है। अतः हम भविष्य में जिस प्रकार का सुख चाहते है उसी प्रकार की हमें दुसरों की सहायता करनी चाहिए। यही प्रकृति का नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 19 मई 2023

मोह के कारण

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*मोह के कारण....*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒मोह के कारण....  ✍️🐒*
*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*✍️ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष यह सोलह दिन का पखवाड़ा है*
*🔔🪔 ज्येष्ठ  शुक्ल 4 ,दिनांक 23 मई मंगलवार को 15 वें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔💡यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

✍️एक बार..गुरू ने अपने शिष्य को समझाते हुए, आम के पेंड की कहानी सुनाई – एक आम का वृक्ष था। जिसमे ढेर सारे आम पके हुए थे, एक दिन उस पेंड का मालिक आया और पेंड पर चढ़कर सारे आम तोड़ने लगा।

परन्तु एक आम का फल वृक्ष से दूर होने का मोह छोड़ नहीं पाया और वही कहीं पत्तों की आड़ में छिप गया। उस पेंड के मालिक को जब लगा कि उसने सारे आम तोड़ लिया है तब वह नीचे उतर गया और वहां से चला गया, यह सब वह छिपा हुआ आम देख रहा था।

फिर दूसरे दिन जब उस आम ने देखा के उसके साथ के सारे आम तो जा चुके हैं केवल उसी का मोह उसे पेंड से अलग होने नहीं दे रहा है। उसे अपने भाई आमों की याद सताने लगी। 

वह बार-बार सोचता कि नीचे कूद जाऊ और अपने भाईयों से जा मिलूं परन्तु उसे अपनी मां  का मोह अपनी ओर खींचने लगता, आम रोजाना इसी सोंच में डूबा रहता।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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चिंता का यह कीड़ा उसे लगातार काटे जा रहा था जल्द ही वह सूखने लगा और एक दिन वह गुठली और छिलका के रूप में ही बस रह गया, उसके अंदर का सारा रस समाप्त हो गया था। 

अब अपना आकर्षण खो देने के कारण उसके तरफ कोई देखता भी नहीं था वह बहुत पछताने लगा की संसार की कोई सेवा नहीं कर सका,  वह लोगों के काम भी नहीं आ सका, आखिरकार एक दिन तेज हवा का झोंका आया और वह डाली टूटकर नीचे गिर गया 

 “आम का मोह” कहानी का तात्पर्य या प्रेरणा, सन्देश यह है कि जरुरत से ज्यादा मोह आपको व्यर्थ बना सकता है, वो कहते हैं ना कि कही पहुंचे के लिए कही से निकलना बहुत जरुरी होता है।

ठीक उसी तरह सफल होने के लिए मोह का त्याग करना आवश्यक होता है चाहे वह मोह आपके घर परिवार दोस्त यार आदि का हो चाहे आपके कम्फर्ट जोन का..!!

*👪⏰▶️✅🕉️विशेष :- भव्य आत्माओं, आज वर्तमान में हमें मनुष्य भव की प्राप्ति हमारे द्वारा पुण्य के संचय से प्राप्त हुआ है।इस मनुष्य भव में हमें इंसानियत अपने आचरण में उतार कर अपने राग द्वेष को कम करना है।यह राग द्वेष जितना कम होगा उतना ही हम उपर उठकर जिस सुख की हमनें आज तक कल्पना नहीं की वह वास्तविक सुख हमें प्राप्त होगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 18 मई 2023

मांगने की आदत

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*मांगने की आदत*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मांगने की आदत ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*✍️ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष यह सोलह दिन का पखवाड़ा है*
*🔔🪔 ज्येष्ठ  कृष्ण अमावस्या , दिनांक 19 मई शुक्रवार को द्वितीय तीर्थंकर अजितनाथ भगवानजी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।  गर्भ कल्याणक महोत्सव शाश्वत नगरी अयोध्याजी में हुआ था | आज के ही दिन रात्रि के पिछले प्रहर व रोहिणी नक्षत्र में मातारानी विजयसेना के गर्भ में अवतीर्ण हुए थे | साक्षात दर्शन करें इस कल्याणक क्षेत्र के ---🛕*
*2.🔔🪔 ज्येष्ठ  शुक्ल 4 ,दिनांक 23 मई मंगलवार को 15 वें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवानजी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मई माह में आने वाली दिनांक  23  तारीख को है। मई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

*✍️जिस परिवार में, समाज में आप रहते हैं, जिनके साथ आप रहते हैं, आप यह जो सोचते हैं कि उनसे हमें कुछ मिलेगा‒हमें पुत्र से कुछ मिलेगा, हमें पत्नी से यह मिलेगा और हमें पड़ौसी से यह मिलेगा‒तो यह सोचना ही विश्राम से विमुख होना है।*

 *तो फिर क्या सोचें ? यह सोचें कि जो कुछ हमें मिला है,उसमें से किस-किसको क्या-क्या और कितना-कितना देना है। यह सोचना है कि मिले हुए का वितरण करना है, वापिस करना है। लेने की बात अब नहीं सोचना है, क्योंकि मिले हुए से आपने अपने जीवन में पूर्ति का अनुभव नहीं किया, तृप्तिका अनुभव नहीं किया। यदि किया होता, तो भी मांगना बन्द हो जाता और नहीं हुआ, तब भी तो मांगना बन्द करना चाहिए। बस हमसे यह भूल होती है।*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 *बच्चे पैदा किए, उनसे सन्तोष नहीं मिला, फिर भी बच्चोंकी आशा नहीं छोड़ते। शादी की, स्त्री से संतोष नहीं मिला, फिर भी स्त्री की मांग नहीं छोड़ते। समाज में घुसे, सेवाएं की और सेवाएं करने से समाज से जो मिला उससे सन्तोष नहीं हुआ, फिर भी समाज से माँगना बन्द नहीं करते। यह हमारी अपनी एक असावधानी है, यह हमारा एक अपना प्रमाद है कि जो मिला उससे सन्तोष नहीं हुआ, फिर भी माँगना बन्द नहीं करते।*

*🙏🎪🛕🏖️🌲विशेष :- भव्य आत्माओं, हमारी आत्मा अनादि काल से चौरासी लाख योनियों में भ्रमण करने का मुख्य कारण यह है कि हमने जहां भी जन्म लिया वहीं पर पांचों इंद्रियों के विषयों की पूर्ति में ही समय बिता दिया।उस भव की आयु पूर्ण होने पर दूसरा शरीर प्राप्त हुआ।यह क्रम आज तक चल रहा है क्योंकि हमने अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया। अतः हमें अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए पांच इंद्रियों के विषयों को शक्ति अनुसार कम करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 17 मई 2023

अमेरिका की सच्चाई

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*अमेरिका की सच्चाई*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 अमेरिका की सच्चाई ✍️🐒*
*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 ज्येष्ठ  कृष्ण चौदस ,दिनांक 18 मई गुरुवार को सोलवें तीर्थंकर सभी भक्तों के अष्ट कर्मो को शांत कर शांति प्रदान करने वाले शांतिनाथ भगवानजी का जन्म , तप व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।  16 वे तीर्थंकर, 5 वे चक्रवर्ती और 12 वे कामदेव ऐसे  तीन पद के धारी देवाधिदेव श्री शांतिनाथजी  का गुरुवार, ज्येष्ठ कृष्णा चतुर्दशी को जन्म व तप  कल्याणक  महोत्सव हस्तिनापुर धर्म नगरी
में सम्पन्न हुआ था।जन्म ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन प्रातः काल  शुभ भरणी नक्षत्रों के योग में हुआ था। उनके पिता का नाम विश्वसेन था, जो हस्तिनापुर के राजा थे। उनकी माता का नाम महारानी ऐरादेवी  था।*
*⭐️बचपन में ही शिशु शांतिनाथ कामदेव के समान सुंदर थे। कहा जाता है उनका मनोहारी रूप देखने के लिए देवराज इन्द्र-इन्द्राणी सहित उपस्थित हुए थे। शांतिनाथ के शरीरकी आभा स्वर्ण के समान दिखाई देती थी। उनके शरीर पर सूर्य, चन्द्र, ध्वजा, शंख, चक्र और तोरण के शुभ मंगल चिह्न अंकित थे। जन्म से ही उनकी जिह्वा पर मां सरस्वती देवी विराजमान थीं।राजा विश्वसेन ने उनका विवाह कराया एवं  राजा विश्वसेन ने मुनि-दीक्षा ले ली। राजा बने शांतिनाथ के शरीर पर जन्म से ही शुभ चिह्न थे।उनके प्रताप से वे शीघ्र ही चक्रवर्ती राजा बन गए।उनकी 96 हजार रानियां थीं।* 
*उन्होंने अपने पुत्र नारायण का राज्याभिषेक किया और ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी को भरणी नक्षत्र में बेला का नियम लेकर स्वयं दीक्षा लेकर दिगंबर मुनि का वेष धारण कर लिया। मुनि बनने के बाद लगातार सोलह वर्षों तक विभिन्न वनों में रहकर घोर तप करने के पश्चात अंतत: पौष शुक्ल दशमी को उन्हें केवल्यज्ञान की प्राप्ति हुई और वे तीर्थंकर कहलाएं।*
*सम्मेदशिखरजी पर भगवान शांतिनाथ को निर्वाण प्राप्त हुआ। जैन धर्म के पुराणों के अनुसार उनकी आयु एक लाख वर्ष कही गई हैं।*
*2. 🔔🪔 ज्येष्ठ  कृष्ण अमावस्या , दिनांक 19 मई शुक्रवार को द्वितीय तीर्थंकर अजितनाथ भगवानजी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मई माह में आने वाली दिनांक  19,  23,  तारीख को है। मई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

*रसोई में भोजन बनाना छोड़ने का दुष्परिणाम*

✍️अमेरिका में क्या हुआ जब घर में खाना बनाना बंद हो गया ? 
1980 के दशक के प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने अमेरिकी लोगों को चेतावनी कि यदि वे परिवार में आर्डर देकर बाहर से भोजन मंगवाऐंगे तो देश मे परिवार व्यवस्था धीरे धीरे समाप्त हो जाएगी। 
साथ ही दूसरी चेतावनी दी कि यदि उन्होंने बच्चों का पालन पोषण घर के सदस्यो के स्थान पर बाहर से पालन पोषण की व्यवस्था की तो यह भी बच्चो के मानसिक विकास व परिवार के लिए घातक होगा।
 लेकिन बहुत कम लोगों ने उनकी सलाह मानी। घर में खाना बनाना लगभग बंद हो गया है, और बाहर से खाना मंगवाने की आदत (यह अब नॉर्मल है), अमेरिकी परिवारों के विलुप्त होने का कारण बनी है जैसा कि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी।
घर मे खाना बनाना मतलब परिवार के सदस्यों के साथ प्यार से जुड़ना।
*पाक कला मात्र अकेले खाना बनाना नहीं है। बल्कि केंद्र बिंदु है, पारिवारिक संस्कृति का।*
घर मे अगर कोई किचन नहीं है , बस एक बेडरूम है, तो यह घर नहीं है, यह एक हॉस्टल है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*अब उन अमेरिकी परिवारों के बारे में जाने जिन्होंने अपनी रसोई बंद कर दी और सोचा कि अकेले बेडरूम ही काफी है?*
1-1971 में, लगभग 72% अमेरिकी परिवारों में एक पति और पत्नी थे, जो अपने बच्चों के साथ रह रहे थे।
2020 तक, यह आंकडा 22% पर आ गया है।
2-पहले साथ रहने वाले परिवार अब नर्सिंग होम (वृद्धाश्रम) में रहने लगे हैं।
3-अमेरिका में, 15% महिलाएं एकल महिला परिवार के रुप में रहती हैं।
4-12% पुरुष भी एकल परिवार के रूप में रहते हैं।
5-अमेरिका में 19% घर या तो अकेले रहने वाले पिता या माता के स्वामित्व में हैं।
6-अमेरिका में आज पैदा होने वाले सभी बच्चों में से 38% अविवाहित महिलाओं से पैदा होते हैं।उनमें से आधी लड़कियां हैं,  जो बिना परिवारिक संरक्षण के अबोध उम्र मे ही शारीरिक शोषण का शिकार हो जाती है ।
7-संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 52% पहली शादियां  तलाक में परिवर्तित होती हैं।
8- 67% दूसरी शादियां भी  समस्याग्रस्त हैं।

 अगर किचन नहीं है और सिर्फ बेडरूम है तो वह पूरा घर नहीं है।
संयुक्त राज्य अमेरिका विवाह की संस्था के टूटने का एक उदाहरण है।
*हमारे आधुनिकतावादी भी अमेरिका की तरह दुकानों से या आनलाईन भोजन ख़रीदने की वकालत कर रहे हैं और खुश हो रहे हैं कि भोजन बनाने की समस्या से हम मुक्त हो गए हैं। इस कारण भारत में भी परिवार धीरे-धीरे अमेरिकी परिवारों की तरह नष्ट हो रहे हैं।*
जब परिवार नष्ट होते हैं तो मानसिक और शारीरिक दोनों ही स्वास्थ्य बिगड़ते हैं। बाहर का खाना खाने से अनावश्यक खर्च के अलावा शरीर मोटा और संक्रमण के प्रति संवेदनशील और बिमारियों का घर  हो जाता है।
शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है।

*इसलिए हमारे घर के बड़े-बूढ़े लोग, हमें बाहर के खाने से बचने की सलाह देते थे*
लेकिन आज हम अपने परिवार के साथ रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं...",
स्विगी और ज़ोमैटो के माध्यम से अजनबियों द्वारा पकाए गए( विभिन्न कैमिकल युक्त) भोजन को ऑनलाइन ऑर्डर करना और खाना, उच्च शिक्षित, मध्यवर्गीय लोगों के बीच भी फैशन बनता जा रहा है।
दीर्घकालिक आपदा होगी ये आदत...
*आज हमारा खाना हम तय नही कर रहे उलटे ऑनलाइन कंपनियां विज्ञापन के माध्यम से मनोवैज्ञानिक रूप से तय करती हैं कि हमें क्या खाना चाहिए...*
हमारे पूर्वज निरोगी और दिर्घायु इस लिए थे कि वो घर क्या ...यात्रा पर जाने से पहले भी घर का बना ताजा खाना बनाकर ही ले जाते थे ।
*इसलिए घर में ही बनाएं और मिल-जुलकर खाएं । पौष्टिक भोजन के अलावा, इसमें प्रेम और स्नेह निहित है।*

*इस संदेश को कम से कम पांच ग्रुप मैं जरूर भेजे*

*विशेष :- भव्य आत्माओं,अगर आप सभी इस सच्चाई को जानकर स्वयं का सुधार नहीं कर सकते तो आप मनुष्य होकर भी पशु से गये गुजरे माने जाओगे। अतः यथाशक्ति सुधार कर अपना मनुष्य भव सार्थक करें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 16 मई 2023

बुराई को छोड़ने का उपाय

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*बुराई को छोड़ने का उपाय*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 बुराई को छोड़ने का उपाय ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 ज्येष्ठ  कृष्ण चौदस , दिनांक 18 मई गुरुवार को सोलवें तीर्थंकर सभी भक्तों के अष्ट कर्मो को शांत कर शांति प्रदान करने वाले शांतिनाथ भगवानजी का जन्म , तप व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔🪔 ज्येष्ठ  कृष्ण अमावस्या , दिनांक 19 मई शुक्रवार को द्वितीय तीर्थंकर अजितनाथ भगवानजी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मई माह में आने वाली दिनांक  19,  23,  तारीख को है। मई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

✍️एक राजा था। वह दयालु और धर्म की राह पर चलने वाला, जनता के कष्टों को दूर करने का सदैव प्रयत्न करता रहता। लेकिन राजकुमार का स्वभाव राजा से बिलकुल विपरीत था। उसे निरपराध नागरिकों को यातना देने में आनंद आता था। स्वभाव से दुष्ट और निर्दयी और बोलने में भी कर्कश। राजकुमार को बार-बार क्रोध आ जाता था। 

राजा, राजकुमार की इन हरकतों से काफी खिन्न था। राजा ने अपने पुत्र को सुधारने के लिए जितने प्रयत्न संभव थे, किए लेकिन राजकुमार अपने कुमार्ग से नहीं हटा।

 उसकी हरकतों से राज्य की जनता में विरोध बढ़ता जा रहा था। जैसे जैसे राजकुमार की उम्र बढ़ती जा रही थी वैसे-वैसे उत्पात भी बढ रहे थे। 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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सभी परिजन उससे किसी न किसी तरह मुक्त होना चाहते थे। धीरे-धीरे इसकी जानकारी पड़ोस के नगर में रहने वाले एक संत को पड़ी। संत ने सोचा यह तो एक दिन तानाशाह बनकर नगरवासियों को काफी परेशान करेगा। संत ने उस राजकुमार को भले मार्ग पर लाने का निश्चय किया। संत ने राजकुमार को अपने पास नहीं बुलाया बल्कि स्वयं उसके पास गए।

संत उसे एक छोटे नीम के वृक्ष के पास ले गए और उससे कहा, “राजकुमार! जरा इस वृक्ष का पत्ता तो तोड़कर देखो, इसका स्वाद कैसा है?” 

राजकुमार ने झट से पत्ते तोड़े और कुछ पत्तो को मुंह में चबा डाला तो राजकुमार का मुंह कड़वाहट से भर गया। इतनी सी बात से राजकुमार आपे से बाहर हो गया। इसके लिए उसने संत से तो कुछ नहीं कहा परंतु उस पेड़ को अपने नौकरों को आदेश देकर उखड़वा दिया। 

संत राजकुमार से बोला, “अरे राजकुमार यह आपने क्या किया।” राजकुमार बोला, “इस पौधे के लिए तो यही किया जाना चाहिए था क्योंकि जब अभी से ही इतना कड़वा है तो और बढ़ने पर तो विष ही बन जाएगा।

 संत जी, जो कुछ मैंने किया है वह ठीक ही किया है।” संत राजकुमार से ऐसा ही कहलवाना चाहते थे। 

संत जी, बड़े ही गंभीर स्वर में बोले, “राजकुमार! तुम्हारे दुर्व्यवहार और अत्याचारों से परेशान होकर यदि जनता तुम्हारे से वही व्यवहार करने को तैयार हो जाए जो तुमने नीम के पौधे के साथ किया, तो इसका तुम्हारे पास क्या उपाय है?” 

इससे राजकुमार को काफी झटका लगा और संत जी द्वारा दिखाई राह पर चलने का निश्चय किया और फिर कभी बुराई की राह पर नही गया।

*विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, वर्तमान में हम सभी के कर्मोदय से हमें कुछ खराब फल भी प्राप्त होते है। ऐसे समय में स्वविवेक बुध्दि पूर्वक उसके लाभ हानि का विचार कर विषम परिस्थिति से बचा जा सकता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रतिसमय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 14 मई 2023

अपनापन

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*अपनापन*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 अपनापन ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 ज्येष्ठ  कृष्ण 12 ,दिनांक 16 मई मंगलवार को चौदवें तीर्थंकर अनंतनाथ भगवानजी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मई माह में आने वाली दिनांक  18, 19,  23,  तारीख को है। मई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

राधिका और नवीन को आज तलाक के कागज मिल गए थे। दोनो साथ ही कोर्ट से बाहर निकले। दोनो के परिजन साथ थे और उनके चेहरे पर विजय और सुकून के निशान साफ झलक रहे थे। चार साल की लंबी लड़ाई के बाद आज फैसला हो गया था।
दस साल हो गए थे शादी को मग़र साथ मे छः साल ही रह पाए थे। 
चार साल तो तलाक की कार्यवाही में लग गए।
राधिका के हाथ मे दहेज के समान की लिस्ट थी जो अभी नवीन के घर से लेना था और नवीन के हाथ मे गहनों की लिस्ट थी जो राधिका से लेने थे।

साथ मे कोर्ट का यह आदेश भी था कि नवीन  दस लाख रुपये की राशि एकमुश्त राधिका को चुकाएगा।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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राधिका और नवीन दोनो एक ही टेम्पो में बैठकर नवीन के घर पहुंचे।  दहेज में दिए समान की निशानदेही राधिका को करनी थी।
इसलिए चार वर्ष बाद ससुराल जा रही थी। आखरी बार बस उसके बाद कभी नही आना था उधर।

सभी परिजन अपने अपने घर जा चुके थे। बस तीन प्राणी बचे थे।नवीन, राधिका और राधिका की माता जी।

नवीन घर मे अकेला ही रहता था।  मां-बाप और भाई आज भी गांव में ही रहते हैं। 

राधिका और नवीन का इकलौता बेटा जो अभी सात वर्ष का है कोर्ट के फैसले के अनुसार बालिग होने तक वह राधिका के पास ही रहेगा। नवीन महीने में एक बार उससे मिल सकता है।
घर मे परिवेश करते ही पुरानी यादें ताज़ी हो गई। कितनी मेहनत से सजाया था इसको राधिका ने। एक एक चीज में उसकी जान बसी थी। सब कुछ उसकी आँखों के सामने बना था।एक एक ईंट से  धीरे धीरे बनते घरोंदे को पूरा होते देखा था उसने।
सपनो का घर था उसका। कितनी शिद्दत से नवीन ने उसके सपने को पूरा किया था।
नवीन थकाहारा सा सोफे पर पसर गया। बोला "ले लो जो कुछ भी चाहिए मैं तुझे नही रोकूंगा"
राधिका ने अब गौर से नवीन को देखा। चार साल में कितना बदल गया है। बालों में सफेदी झांकने लगी है। शरीर पहले से आधा रह गया है। चार साल में चेहरे की रौनक गायब हो गई।

वह स्टोर रूम की तरफ बढ़ी जहाँ उसके दहेज का अधिकतर  समान पड़ा था। सामान ओल्ड फैशन का था इसलिए कबाड़ की तरह स्टोर रूम में डाल दिया था। मिला भी कितना था उसको दहेज। प्रेम विवाह था दोनो का। घर वाले तो मजबूरी में साथ हुए थे। 
प्रेम विवाह था तभी तो नजर लग गई किसी की। क्योंकि प्रेमी जोड़ी को हर कोई टूटता हुआ देखना चाहता है। 
बस एक बार पीकर बहक गया था नवीन। हाथ उठा बैठा था उसपर। बस वो गुस्से में मायके चली गई थी। 
फिर चला था लगाने सिखाने का दौर । इधर नवीन के भाई भाभी और उधर राधिका की माँ। नोबत कोर्ट तक जा पहुंची और तलाक हो गया।

न राधिका लोटी और न नवीन लाने गया। 

राधिका की माँ बोली" कहाँ है तेरा सामान? इधर तो नही दिखता। बेच दिया होगा इस शराबी ने ?"

"चुप रहो माँ" 
राधिका को न जाने क्यों नवीन को उसके मुँह पर शराबी कहना अच्छा नही लगा।

फिर स्टोर रूम में पड़े सामान को एक एक कर लिस्ट में मिलाया गया। 
बाकी कमरों से भी लिस्ट का सामान उठा लिया गया।
राधिका ने सिर्फ अपना सामान लिया नवीन के समान को छुवा भी नही।  फिर राधिका ने नवीन को गहनों से भरा बैग पकड़ा दिया। 
नवीन ने बैग वापस राधिका को दे दिया " रखलो, मुझे नही चाहिए काम आएगें तेरे मुसीबत में ।"

गहनों की किम्मत 15 लाख से कम नही थी। 
"क्यूँ, कोर्ट में तो तुम्हरा वकील कितनी दफा गहने-गहने चिल्ला रहा था" 
"कोर्ट की बात कोर्ट में खत्म हो गई, राधिका। वहाँ तो मुझे भी दुनिया का सबसे बुरा जानवर और शराबी साबित किया गया है।"
सुनकर राधिका की माँ ने नाक भों चढ़ाई।

"नही चाहिए। 
वो दस लाख भी नही चाहिए"

 "क्यूँ?" कहकर नवीन सोफे से खड़ा हो गया।

"बस यूँ ही" राधिका ने मुँह फेर लिया।

"इतनी बड़ी जिंदगी पड़ी है कैसे काटोगी? ले जाओ,,, काम आएगें।"

इतना कह कर नवीन ने भी मुंह फेर लिया और दूसरे कमरे में चला गया। शायद आंखों में कुछ उमड़ा होगा जिसे छुपाना भी जरूरी था।

राधिका की माता जी गाड़ी वाले को फोन करने में व्यस्त थी।

राधिका को मौका मिल गया। वो नवीन के पीछे उस कमरे में चली गई।

वो रो रहा था। अजीब सा मुँह बना कर।  जैसे भीतर के सैलाब को दबाने दबाने की जद्दोजहद कर रहा हो। राधिका ने उसे कभी रोते हुए नही देखा था। आज पहली बार देखा न जाने क्यों दिल को कुछ सुकून सा मिला।

मग़र ज्यादा भावुक नही हुई।

सधे अंदाज में बोली "इतनी फिक्र थी तो क्यों दिया तलाक?"

"मैंने नही तलाक तुमने दिया" 

"दस्तखत तो तुमने भी किए"

"माफी नही माँग सकते थे?"

"मौका कब दिया तुम्हारे घर वालों ने। जब भी फोन किया काट दिया।"

"घर भी आ सकते थे"?

"हिम्मत नही थी?"

राधिका की माँ आ गई। वो उसका हाथ पकड़ कर बाहर ले गई। "अब क्यों मुँह लग रही है इसके? अब तो रिश्ता भी खत्म हो गया"

मां-बेटी बाहर बरामदे में सोफे पर बैठकर गाड़ी का इंतजार करने लगी। 
राधिका के भीतर भी कुछ टूट रहा था। दिल बैठा जा रहा था। वो सुन्न सी पड़ती जा रही थी। जिस सोफे पर बैठी थी उसे गौर से देखने लगी। कैसे कैसे बचत कर के उसने और नवीन ने वो सोफा खरीदा था। पूरे शहर में घूमी तब यह पसन्द आया था।"
 
फिर उसकी नजर सामने तुलसी के सूखे पौधे पर गई। कितनी शिद्दत से देखभाल किया करती थी। उसके साथ तुलसी भी घर छोड़ गई।

घबराहट और बढ़ी तो वह फिर से उठ कर भीतर चली गई। माँ ने पीछे से पुकारा मग़र उसने अनसुना कर दिया। नवीन बेड पर उल्टे मुंह पड़ा था। एक बार तो उसे दया आई उस पर। मग़र  वह जानती थी कि अब तो सब कुछ खत्म हो चुका है इसलिए उसे भावुक नही होना है। 

उसने सरसरी नजर से कमरे को देखा। अस्त व्यस्त हो गया है पूरा कमरा। कहीं कंही तो मकड़ी के जाले झूल रहे हैं।

कितनी नफरत थी उसे मकड़ी के जालों से?

फिर उसकी नजर चारों और लगी उन फोटो पर गई जिनमे वो नवीन से लिपट कर मुस्करा रही थी।
कितने सुनहरे दिन थे वो।

इतने में माँ फिर आ गई। हाथ पकड़ कर फिर उसे बाहर ले गई।

बाहर गाड़ी आ गई थी। सामान गाड़ी में डाला जा रहा था। राधिका सुन सी बैठी थी। नवीन गाड़ी की आवाज सुनकर बाहर आ गया। 
अचानक नवीन कान पकड़ कर घुटनो के बल बैठ गया।
बोला--" मत जाओ,,, माफ कर दो"
शायद यही वो शब्द थे जिन्हें सुनने के लिए चार साल से तड़प रही थी। सब्र के सारे बांध एक साथ टूट गए। राधिका ने कोर्ट के फैसले का कागज निकाला और फाड़ दिया । 
और मां कुछ कहती उससे पहले ही लिपट गई नवीन से। साथ मे दोनो बुरी तरह रोते जा रहे थे।
दूर खड़ी राधिका की माँ समझ गई कि 
कोर्ट का आदेश दिलों के सामने कागज से ज्यादा कुछ नही।
काश उनको पहले मिलने दिया होता?
*नोट :- यह एक सत्य घटनाओं के आधार पर लिखी गई है।*

*👪🔔⛳🎪🙏विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, आपके जीवन में भी आपके परिवार, मित्र मंडली व अन्य किसी रिश्तेदार से कभी कोई भी बात के कारण से मनमुटाव हुआ हो तो स्वयं को छोटा समझकर उस समस्या को हल कर लें। अगर वह समस्या हल नहीं हो रही है तो व्यक्ति विशेष के प्रति माध्यस्थ भाव रखते हुए सावधान रहें व सबकुछ भगवान पर छोड़ दें। यह उपाय सभी शास्त्रों के आधार पर बताएं गए हैं।इसका लाभ लें ओर जरुरत मंदों तक पहुंचाकर स्वयं के पुण्य के साथ अन्य लोगों के पुण्य में वृद्धि करने में सहयोगी बनें।*

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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 13 मई 2023

चारित्रवान

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*चरित्रवान*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
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*🔔🪔 ज्येष्ठ  कृष्ण 10 ,दिनांक 14 मई रविवार को तेरवें तीर्थंकर विमलनाथ भगवानजी का गर्भ   कल्याणक महोत्सव है। गर्भ कल्याणक महोत्सव कम्पिलजी उत्तर प्रदेश में हुआ था | आज के ही दिन रात्रि के पिछले प्रहर व उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में मातारानी जयश्यामा के गर्भ में अवतीर्ण हुए थे | 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मई माह में आने वाली दिनांक 16, 18, 19,  23,  तारीख को है। मई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक बार एक जिज्ञासु व्यक्ति ने एक संत से प्रश्न किया, “महाराज, रंग रूप, बनावट प्रकृति में एक जैसे होते हुए भी कुछ लोग अत्यधिक उन्नति करते हैं। जबकि कुछ लोग पतन के गर्त में डूब जाते हैं।

संत ने उत्तर दिया, “तुम कल सुबह मुझे तालाब के किनारे मिलना। 

तब मैं तुम्हे इस प्रश्न का उत्तर दूंगा। अगले दिन वह व्यक्ति सुबह तालाब के किनारे पहुंचा। 

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उसने देखा कि संत दोनों हाथ में एक एक कमंडल लिए खड़े हैं।

जब उसने ध्यान से देखा तो पाया कि एक कमंडल तो सही है। 

लेकिन दूसरे की पेंदी में एक छेद है। उसके सामने ही संत ने दोनों कमंडल तालाब के जल में फेंक दिए। 

सही वाला कमंडल तो तालाब में तैरता रहा।



लेकिन छेद वाला कमंडल थोड़ी देर तैरा, लेकिन जैसे जैसे उसके छेद से पानी अंदर आता गया। 

वह डूबने लगा और अंत में पूरी तरह डूब गया।

संत ने जिज्ञासु व्यक्ति से कहा- “जिस प्रकार दोनों कमंडल रंग-रूप और प्रकृति में एक समान थे।

 किंतु दूसरे कमंडल में एक छेद था। जिसके कारण वह डूब गया। उसी प्रकार मनुष्य का चरित्र ही इस संसार सागर में उसे तैराता है। 

जिसके चरित्र में छेद (दोष) होता है। वह पतन के गर्त में चला जाता है। लेकिन एक सच्चरित्र व्यक्ति इस संसार में उन्नति करता है। जिज्ञासु को अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया।

जीवन में चरित्र का महत्व सर्वाधिक है। इसलिए हमें चरित्रवान बनना चाहिए।

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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 12 मई 2023

हमेशा सोच समझ कर कार्य करें



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*हमेशा सोच समझ कर कार्य करें*
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दक्षिण प्रदेश के एक प्रसिद्ध नगर पाटलीपुत्र में मणिभद्र नाम का एक धनिक महाजन रहता था । लोक-सेवा और धर्मकार्यों में रत रहने से उसके धन-संचय में कुछ़ कमी आ गई, समाज में मान घट गया । इससे मणिभद्र को बहुत दुःख हुआ । दिन-रात चिन्तातुर रहने लगा । यह चिन्ता निष्कारण नहीं थी । धनहीन मनुष्य के गुणों का भी समाज में आदर नहीं होता।

उसके शील-कुल-स्वभाव की श्रेष्ठता भी दरिद्रता में दब जाती है । बुद्धि, ज्ञान और प्रतिभा के सब गुण निर्धनता के तुषार में कुम्हला जाते हैं । जैसे पतझड़ के झंझावात में मौलसरी के फूल झड़ जाते हैं, उसी तरह घर-परिवार के पोषण की चिन्ता में उसकी बुद्धि कुन्द हो जाती है। घर के घी- तेल - नमक - चावल की निरन्तर चिन्ता प्रखर प्रतिभा-संपन्न व्यक्ति की प्रतिभा को भी खा जाती है । धनहीन घर शमसान का रुप धारण कर लेता है । प्रियदर्शना पत्‍नी का सौन्दर्य भी रुखा और निर्जीव प्रतीत होने लगता है । जलाशय में उठते बुलबुलों की तरह उनकी मानमर्यादा समाज में नष्ट हो जाती है ।

निर्धनता की इन भयानक कल्पनाओं से मणिभद्र का दिल कांप उठा । उसने सोचा, इस अपमानपूर्ण जीवन से मृत्यु अच्छी़ है । इन्हीं विचारों में डूबा हुआ था कि उसे नींद आ गई । 

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नींद में उसने एक स्वप्न देखा । स्वप्न में पद्मनिधि ने एक भिक्षु की वेषभूषा में उसे दर्शन दिये, और कहा "कि वैराग्य छो़ड़ दे । तेरे पूर्वजों ने मेरा भरपूर आदर किया था । इसीलिये तेरे घर आया हूँ । कल सुबह फिर इसी वेष में तेरे पास आऊँगा । उस समय तू मुझे लाठी की चोट से मार डालना । तब मैं मरकर स्वर्णमय हो जाउँगा । वह स्वर्ण तेरी ग़रीबी को हमेशा के लिए मिटा देगा ।"

सुबह उठने पर मणिभद्र इस स्वप्न की सार्थकता के संबन्ध में ही सोचता रहा । उसके मन में विचित्र शंकाएं उठने लगीं । न जाने यह स्वप्न सत्य था या असत्य, यह संभव है या असंभव, इन्हीं विचारों में उसका मन डांवाडोल हो रहा था । हर समय धन की चिन्ता के कारण ही शायद उसे धन संचय का स्वप्न आया था । उसे किसी के मुख से सुनी हुई यह बात याद आ गई कि रोगग्रस्त, शोकातुर, चिन्ताशील और कामुक्त मनुष्य के स्वप्न निरर्थक होते हैं । उनकी सार्थकता के लिए आशावादी होना अपने को धोखा देना है ।

मणिभद्र यह सोच ही रहा था कि स्वप्न में देखे हुए भिक्षु के समान ही एक भिक्षु अचानक वहां आ गया । उसे देखकर मणिभद्र का चेहरा खिल गया, सपने की बात याद आ गई । उसने पास में पड़ी लाठी उठाई और भिक्षु के सिर पर मार दी । भिक्षु उसी क्षण मर गया । भूमि पर गिरने के साथ ही उसका सारा शरीर स्वर्णमय हो गया । मणिभद्र ने उसका स्वर्णमय मृतदेह छिपा लिया ।

किन्तु, उसी समय एक नाई वहां आ गया था । उसने यह सब देख लिया था । मणिभद्र ने उसे पर्याप्त धन-वस्त्र आदि का लोभ देकर इस घटना को गुप्त रखने का आग्रह किया । नाई ने वह बात किसी और से तो नहीं कही, किन्तु धन कमाने की इस सरल रीति का स्वयं प्रयोग करने का निश्‍चय कर लिया । उसने सोचा यदि एक भिक्षु लाठी से चोट खाकर स्वर्णमय हो सकता है तो दूसरा क्यों नहीं हो सकता । मन ही मन ठान ली कि वह भी कल सुबह कई भिक्षुओं को स्वर्ण मय बनाकर एक ही दिन में मणिभद्र की तरह धन संपन्न हो जाऊंगा । इसी आशा से वह रात भर सुबह होने की प्रतीक्षा करता रहा, एक पल भी नींद नहीं ली ।

सुबह उठकर वह भिक्षुओं की खोज में निकला । पास ही एक भिक्षुओं का मन्दिर था । मन्दिर की तीन परिक्रमा  करने और अपनी मनोरथ सिद्धि के लिये भगवान  से वरदान मांगने के बाद वह मन्दिर के प्रधान जटाधारी भिक्षु के पास गया, उसके चरणों का स्पर्श किया और उचित वन्दना के बाद यह विनम्र निवेदन किया कि- "आज की भिक्षा के लिये आप समस्त भिक्षुओं समेत मेरे द्वार पर पधारें ।"

प्रधान भिक्षु ने नाई से कहा- "तुम शायद हमारी भिक्षा के नियमों से परिचित नहीं हो । हम उन ब्राह्मणों के समान नहीं हैं जो भोजन का निमन्त्रण पाकर गृहस्थों के घर जाते हैं । हम भिक्षु हैं, जो यथेच्छा़ से घूमते-घूमते किसी भी भक्त श्रावक के घर चले जाते हैं और वहां उतना ही भोजन करते हैं जितना प्राण धारण करने मात्र के लिये पर्याप्त हो । अतः, हमें निमन्त्रण न दो । अपने घर जाओ, हम किसी भी दिन तुम्हारे द्वार पर अचानक आ जायेंगे ।"

नाई को प्रधान भिक्षु की बात से कुछ़ निराशा हुई, किन्तु उसने नई युक्ति से काम लिया । वह बोला- "मैं आपके नियमों से परिचित हूं, किन्तु मैं आपको भिक्षा के लिये नहीं बुला रहा । मेरा उद्देश्य तो आपको पुस्तक-लेखन की सामग्री देना है । इस महान् कार्य की सिद्धि आपके आये बिना नहीं होगी ।" प्रधान भिक्षु नाई की बात मान गया । नाई ने जल्दी से घर की राह ली । वहां जाकर उसने लाठियां तैयार कर लीं, और उन्हें दरवाजे के पास रख दिया । तैयारी पूरी हो जाने पर वह फिर भिक्षुओं के पास गया और उन्हें अपने घर की ओर ले चला । भिक्षु-वर्ग भी धन-वस्त्र के लालच से उसके पीछे-पीछे चलने लगा । भिक्षुओं के मन में भी तृष्णा का निवास रहता ही है । जगत् के सब प्रलोभन छोड़ने के बाद भी तृष्णा संपूर्ण रुप से नष्ट नहीं होती । उनके देह के अंगों में जीर्णता आ जाती है, बाल रुखे हो जाते हैं, दांत टूट कर गिर जाते हैं, आंख-कान बूढे़ हो जाते हैं, केवल मन की तृष्णा ही है जो अन्तिम श्‍वास तक जवान रहती है ।

उनकी तृष्णा ने ही उन्हें ठग लिया । नाई ने उन्हें घर के अन्दर लेजाकर लाठियों से मारना शुरु कर दिया । उनमें से कुछ तो वहीं धराशायी हो गये, और कुछ़ का सिर फूट गया । उनका कोलाहल सुनकर लोग एकत्र हो गये । नगर के द्वारपाल भी वहाँ आ पहुँचे । वहाँ आकर उन्होंने देखा कि अनेक भिक्षुओं का मृतदेह पड़ा है, और अनेक भिक्षु आहत होकर प्राण-रक्षा के लिये इधर-उधर दौड़ रहे हैं

नाई से जब इस रक्तपात का कारण पूछा़ गया तो उसने मणिभद्र के घर में आहत भिक्षु के स्वर्णमय हो जाने की बात बतलाते हुए कहा कि वह भी शीघ्र स्वर्ण संचय करना चाहता था । नाई के मुख से यह बात सुनने के बाद राज्य के अधिकारियों ने मणिभद्र को बुलाया और पूछा कि- "क्या तुमने किसी भिक्षु की हत्या की है ?"

मणिभद्र ने अपने स्वप्न की कहानी आरंभ से लेकर अन्त तक सुना दी । राज्य के धर्माधिकारियों ने उस नाई को मृत्युदण्ड की आज्ञा दी । और कहा---ऐसे 'कुपरीक्षितकारी'- बिना सोचे काम करने वाले के लिये यही दण्ड उचित था । मनुष्य को उचित है कि वह अच्छी़ तरह देखे, जाने, सुने और उचित परीक्षा किये बिना कोई भी कार्य न करे । अन्यथा उसका वही परिणाम होता है जो इस कहानी के नाई का हुआ ।

*👪⛳🙏⏰🔔विशेष :-भव्य‌‌‌ आत्माओं: अच्छी़ तरह देखे, जाने, सुने और उचित परीक्षा किये बिना कोई भी कार्य न करें ।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रतिसमय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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