गुरुवार, 18 मई 2023

मांगने की आदत

**
*मांगने की आदत*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मांगने की आदत ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*✍️ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष यह सोलह दिन का पखवाड़ा है*
*🔔🪔 ज्येष्ठ  कृष्ण अमावस्या , दिनांक 19 मई शुक्रवार को द्वितीय तीर्थंकर अजितनाथ भगवानजी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।  गर्भ कल्याणक महोत्सव शाश्वत नगरी अयोध्याजी में हुआ था | आज के ही दिन रात्रि के पिछले प्रहर व रोहिणी नक्षत्र में मातारानी विजयसेना के गर्भ में अवतीर्ण हुए थे | साक्षात दर्शन करें इस कल्याणक क्षेत्र के ---🛕*
*2.🔔🪔 ज्येष्ठ  शुक्ल 4 ,दिनांक 23 मई मंगलवार को 15 वें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवानजी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मई माह में आने वाली दिनांक  23  तारीख को है। मई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

*✍️जिस परिवार में, समाज में आप रहते हैं, जिनके साथ आप रहते हैं, आप यह जो सोचते हैं कि उनसे हमें कुछ मिलेगा‒हमें पुत्र से कुछ मिलेगा, हमें पत्नी से यह मिलेगा और हमें पड़ौसी से यह मिलेगा‒तो यह सोचना ही विश्राम से विमुख होना है।*

 *तो फिर क्या सोचें ? यह सोचें कि जो कुछ हमें मिला है,उसमें से किस-किसको क्या-क्या और कितना-कितना देना है। यह सोचना है कि मिले हुए का वितरण करना है, वापिस करना है। लेने की बात अब नहीं सोचना है, क्योंकि मिले हुए से आपने अपने जीवन में पूर्ति का अनुभव नहीं किया, तृप्तिका अनुभव नहीं किया। यदि किया होता, तो भी मांगना बन्द हो जाता और नहीं हुआ, तब भी तो मांगना बन्द करना चाहिए। बस हमसे यह भूल होती है।*

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

 *बच्चे पैदा किए, उनसे सन्तोष नहीं मिला, फिर भी बच्चोंकी आशा नहीं छोड़ते। शादी की, स्त्री से संतोष नहीं मिला, फिर भी स्त्री की मांग नहीं छोड़ते। समाज में घुसे, सेवाएं की और सेवाएं करने से समाज से जो मिला उससे सन्तोष नहीं हुआ, फिर भी समाज से माँगना बन्द नहीं करते। यह हमारी अपनी एक असावधानी है, यह हमारा एक अपना प्रमाद है कि जो मिला उससे सन्तोष नहीं हुआ, फिर भी माँगना बन्द नहीं करते।*

*🙏🎪🛕🏖️🌲विशेष :- भव्य आत्माओं, हमारी आत्मा अनादि काल से चौरासी लाख योनियों में भ्रमण करने का मुख्य कारण यह है कि हमने जहां भी जन्म लिया वहीं पर पांचों इंद्रियों के विषयों की पूर्ति में ही समय बिता दिया।उस भव की आयु पूर्ण होने पर दूसरा शरीर प्राप्त हुआ।यह क्रम आज तक चल रहा है क्योंकि हमने अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया। अतः हमें अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए पांच इंद्रियों के विषयों को शक्ति अनुसार कम करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें