सोमवार, 1 मई 2023

यथासंभव सहयोग

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*यथासम्भव सहयोग*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 यथासम्भव सहयोग  ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मई माह में आने वाली दिनांक 11, 14, 16, 18, 19,  23,  तारीख को है। मई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक वृद्ध व्यक्ति प्रातः काल से ही घास काटने में लग  गया । दिन ढलने तक वह इतनी घास काट चुका था कि कटी घास को गधे पर लाद कर बाजार में बेंच सके।

एक सुशिक्षित व्यक्ति कुछ समय से उस वृद्ध के प्रयास को निहार रहा था। उसने वृद्ध से प्रश्न किया-आप दिन भर परिश्रम से जो भी कमा सकोगे ,उससे कैसे आपका खर्च चलेगा? क्या आप घर में अकेले ही रहते हो?

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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वृद्ध ने हंसते हुए कहा--मेरे परिवार में कई लोग हैं। जितने की घास बिकती है,उतने से ही हम लोग व्यवस्था बनाते व काम चला लेते है।

उस पढे लिखे युवक को आश्चर्यचकित देख वृद्ध ने पूछा-- लगता है कि तुमने अपनी कमाई से बढ़चढ़ कर महत्वाकांक्षाए संजोए रखी है।इसी से तुम्हारे गरीबी में गुजारे पर आश्चर्य होता है।

युवक से और तो कुछ कहते न बन पड़ा पर अपनी झेंप मिटाने के लिए कहने लगा- गुजारा कर लेना ही सब कुछ नहीं हैं दान-पुण्य के लिए भी तो पैसा चाहिए।

बुड्ढा हंसा और बोला---
मेरी घास से तो बच्चों का पेट ही भर पाता है,पर मैंने पड़ोसियों से मांग मांगकर एक कुंआ बनवा दिया है,जिससे सारा गाँव पानी भरता व पीता है। क्या दानपुण्य
 के लिए अपने पास कुछ न होने
 पर दूसरे समर्थ लोगों से सहयोग लेकर 
कुछ भलाई का काम कर सकना
बुरा है?

युवक  चल  दिया। वह रात  भर  सोचता रहा की महत्वाकांक्षाएं संजोने व उन्हीं की पूर्ति में जीवन लगा देना ही क्या एकमात्र जीवन जीने का तरीका है। धन (अर्थ) न भी हो तो भी सेवाभाव से यथासम्भव दान किया जा सकता है।

*🔔⏰👪🛕🙏विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं,हम सभी को अपनी शक्ति अनुसार समाज के उत्थान में सहयोगी बनकर अपने पुण्य को गाढ़ा करना चाहिए।यह हमारा संचित पुण्य ही हमारी विषम परिस्थितियों में हमारा सहयोगी बनेगा। इस पुण्य के कारण हमें किसी अन्य के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा। अतः प्रतिदिन हमें पुण्य कार्य कर पुण्य संचय करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रतिसमय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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