शुक्रवार, 5 मई 2023

उपहार

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*उपहार*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 उपहार ✍️🐒*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मई माह में आने वाली दिनांक 11, 14, 16, 18, 19,  23,  तारीख को है। मई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

*🔔यह कहानी किसी व्यक्ति विशेष के जीवन पर आधारित है।आप भी कुछ सीख प्राप्त कर सकते है ‌।*

एक पोस्टमैन ने एक घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा,”चिट्ठी ले लिजिये।” अंदर से एक लड़की की आवाज आई,”आ रही हूं।” लेकिन तीन-चार मिनट तक कोई न आया तो पोस्टमैन ने फिर कहा,”अरे भाई!मकान में कोई है क्या,अपनी चिट्ठी ले लो।

लड़की की फिर आवाज आई,”पोस्टमैन  साहब, दरवाजे के नीचे से चिट्ठी अंदर डाल दीजिए। मैं आ रही हूं।पोस्टमैन ने कहा,”नहीं, मैं खड़ा हूं, रजिस्टर्ड चिट्ठी है, पावती पर तुम्हारे साइन चाहिये।” करीबन छह-सात मिनट बाद दरवाजा खुला।

पोस्टमैन इस देरी के लिए झल्लाया हुआ तो था ही और उस पर चिल्लाने वाला था ही, लेकिन दरवाजा खुलते ही वह चौंक गया, सामने एक अपाहिज कन्या जिसके पांव नहीं थे, सामने खड़ी थी।

 पोस्टमैन चुपचाप पत्र देकर और उसके साइन लेकर चला गया। हफ़्ते, दो हफ़्ते में जब कभी उस लड़की के लिए डाक आती, एक आवाज देता और जब तक वह लड़की न आती तब तक खड़ा रहता। एक दिन उसने  पोस्टमैन को नंगे पांव देखा। दीपावली नजदीक आ रही थी।

उसने सोचा  पोस्टमैन को क्या ईनाम दूं। एक दिन जब  पोस्टमैन डाक देकर चला गया,तब उस लड़की ने,जहां मिट्टी में पोस्टमैन के पांव के निशान बने थे, उन पर काग़ज़ रख कर उन पांवों का चित्र उतार लिया।

अगले दिन उसने अपने यहां काम करने वाली बाई से उस नाप के जूते मंगवा लिये। दीपावली आई और उसके अगले दिन  पोस्टमैन ने गली के सब लोगों से तो ईनाम मांगा और सोचा कि अब इस बिटिया से क्या इनाम लेना? पर गली में आया हूं तो उससे मिल ही लूं। उसने दरवाजा खटखटाया।

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अंदर से आवाज आई,”कौन? ”पोस्टमैन, उत्तर मिला। लड़की हाथ में एक गिफ्ट पैक लेकर आई और कहा,”अंकल, मेरी तरफ से दीपावली पर आपको यह भेंट है।”

 पोस्टमैन ने कहा “तुम तो मेरे लिए बेटी के समान हो, तुमसे मैं गिफ्ट कैसे लूं?”

लड़की ने आग्रह किया कि मेरी इस गिफ्ट के लिए मना नहीं करें।”ठीक है कहते हुए पोस्टमैन ने पैकेट ले लिया। लड़की ने कहा “अंकल इस पैकेट को घर ले जाकर खोलना।”

घर जाकर जब उसने पैकेट खोला तो विस्मित रह गया, क्योंकि उसमें एक जोड़ी जूते थे, उसकी आंखें भर आई। अगले दिन वह ऑफिस पहुंचा और पोस्टमास्टर से फरियाद की कि उसका तबादला फ़ौरन कर दिया जाए।

पोस्टमास्टर ने कारण पूछा,तो  पोस्टमैन ने वे जूते टेबल पर रखते हुए सारी कहानी सुनाई और भीगी आंखों और रुंधे कंठ से कहा “आज के बाद मैं उस गली में नहीं जा सकूंगा।”

उस अपाहिज बच्ची ने तो मेरे नंगे पांवों को तो जूते दे दिये पर मैं उसे पांव कैसे दे पाऊंगा?” संवेदनशीलता यानि दूसरों के दुःख-दर्द को समझना, अनुभव करना और उसके दुःख-दर्द में भागीदारी करना,उसमें शरीक होना। यह ऐसा मानवीय गुण है जिसके बिना इंसान अधूरा है।

ईश्वर से प्रार्थना है कि वह हमें संवेदनशीलता रूपी आभूषण प्रदान करें ताकि हम दूसरों के दुःख-दर्द को कम करने में योगदान कर सकें। संकट की घड़ी में कोई यह नहीं समझे कि वह अकेला है, अपितु उसे महसूस हो कि सारी मानवता उसके साथ है।”

*⏰🔔✅🙏👪विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज अधिक व्यक्तियों में अज्ञानता के कारण अनेक प्रकार की परेशानी आ रही है।उन परिस्थितियों के हम स्वयं जन्म दाता है। अगर आपको सच्चा मार्गदर्शन मिलें तो आपकी परेशानी ही आपकी सभी परेशानियों का हल हो सकती है। सबसे उत्तम आपके मार्गदर्शक है आपके माता-पिता, दुसरे नंबर पर है मोक्ष मार्ग के राही, तीसरे नंबर पर आपके द्वारा किया गया धर्म का आचरण।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रतिसमय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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