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*अविद्या याने मिथ्यात्व*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 अविद्या याने मिथ्यात्व ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 ज्येष्ठ कृष्ण 6 ,दिनांक 11मई गुरुवार को ग्यारवें तीर्थंकर श्रेयांसनाथ भगवानजी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मई माह में आने वाली दिनांक 11, 14, 16, 18, 19, 23, तारीख को है। मई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*🔔👉🏾एक बार अकबर ने बीरबल से पूछा की बीरबल यह अविद्या याने मिथ्यात्व क्या है ?*
बीरबल ने बोला कि आप मुझे सात दिनकी छुट्टी दे दो फिर मैं आपको बताऊंगा !
अकबर राजी हो गये और उसने सात दिनों की छुट्टी दे दी !
बीरबल मोची के पास गया और बोला कि भाई जूती बना दो,मोची ने नाप पूछी तो बीरबल ने बोला भैया ये नाप वाप कुछ नहीं। डेढ़ फुट लंबी और एक बित्ता चौड़ी बना दो,और इसमें हीरे जवाहरात जड़ देना । सोने और चांदी के तारों से सिलाई कर देना और हां पैसे वैसे चिंता मत करना जितना मांगोगे उतना मिलेगा।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
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तो मोची ने भी कहा ठीक है भैया तीसरे दिन ले लेना !
तीसरे दिन जूती मिली तब पारितोषिक देने के पहले बीरबल ने उस मोची से एक ठोस आश्वासन ले लिया कि वह किसी भी हालात में इस जूती का कभी भी जिक्र नहीं करेगा यानि हर हालात में अनजान बना रहेगा ।
*अब बीरबल ने एक जूती अपने पास रख ली और दूसरी मस्जिद में फेंक दी । जब सुबह मौलवी जी नमाज पढ़ने (अजान देने ) के लिए मस्जिद गए तो मौलवी को वो जूती वहां पर मिली।*
*मौलवी जी ने सोचा यह जूती किसी इंसान की तो हो ही नहीं सकती जरूर अल्लाह मियां नमाज पढ़ने आये होंगे और उनकी छूट गई होगी।*
*तो उसने वह जूती अपने सर पर रखी, सिर मत्थे में लगाई और खूब जूती को चाटा ।*
*क्यों ?*
*क्योंकि वह जूती अल्लाह की थी ना ।*
*वहां मौजूद सभी लोगों को दिखाया सब लोग बोलने लगे कि हां भाई यह जूती तो अल्लाह की रह गई उन्होंने भी उसको सर पर रखा और खूब चाटा।*
*यह बात अकबर तक गई।*
*अकबर ने बोला, मुझे भी दिखाओ ।*
*अकबर ने देखा और बोला यह तो अल्लाह की ही जूती है।*
*उसने भी उसे खूब चाटा, सर पर रखा और बोला इसे मस्जिद में ही अच्छी तरह अच्छे स्थान पर रख दो !*
*बीरबल की छुट्टी समाप्त हुई, वह आया बादशाह को सलाम ठोका और उतरा हुआ मुंह लेकर खड़े हो गये।*
*अब अकबर ने बीरबल से पूछा कि क्या हो गया मुंह क्यों दस कोने का बना रखा है।*
*तो बीरबल ने कहा राजा साहब हमारे यहां चोरी हो गई ।*
*अकबर बोला - क्या चोरी हो गया ?*
*बीरबल ने उत्तर दिया - हमारे सातवीं पीढ़ी के परदादा की जूती थी चोर एक जूती उठा ले गये । एक बची है।*
*अकबर ने पूछा कि क्या एक जूती तुम्हारे पास ही है ?*
*बीरबल ने कहा - जी मेरे पास ही है ।उसने वह जूती अकबर को दिखाई । अकबर का माथा ठनका और उसने मस्जिद से दूसरी जूती मंगाई और बोला *या अल्लाह मैंने तो सोचा कि यह जूती अल्लाह की है मैंने तो इसे चाट चाट के चिकनी बना डाली*
बीरबल ने कहा राजा साहब यही है *अविद्या याने मिथ्यात्व* ।
पता कुछ भी नहीं और भेड़ चाल में चले जा रहे है।
*🔔⏰🌞👪⚖️विशेष :- भव्य आत्माओं, आज वर्तमान में शोशल मिडिया का नशा सभी मनुष्यों पर चढ़ा हुआ है। जिसके (यू ट्यूब, व्हाट्सएप व गूगल बाबा) कारण हमें अनेक प्रकार की प्रति समय अनेक प्रकार की मनगढ़ंत कहानियां व किस्से दिखाएं जा रहें है।जिनकी गिरफ्त में पढ़ें लिखे अनुभवी व्यक्ति प्रति समय आ रहे है। वर्तमान में यह नशा भारत में गतिमान है।यह हम सभी के लिए एक विचारणीय समस्या है। इसका समाधान भी हमारे ही पास है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रतिसमय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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