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*मेरा मन*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒मेरा मन ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक 01 , 05 , 09 , 13 , 24, 25, तारीख को है। जून माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
हम सभी के जीवन में कभी सुख, कभी दुख, कभी परेशानियाँ तो कभी सुकून, यह सब हमारे स्वयं के कर्मो के आधार पर चलता ही रहता है, लेकिन हर परिस्थिति में हम किसे चुनते हैं यह हमारे पुरुषार्थ पर निर्भर करता है।
एक दिन सुनहरी सुबह में एक दादाजी और उनका पोता झील के पास बैठे थे। दोनों दादा पोता बड़े प्यार से बातें कर रहे थे। दादाजी अपने पोते को बातों के साथ-साथ जीवन का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। पोते ने बड़े प्यार से दादाजी से कहा, "दादाजी, मुझे कहानी सुनाइये ना।" दादाजी मुस्कुराए और फिर उन्होंने कहा कि, "आज तो एक छोटी कहानी मेरे भीतर चल रही है।"
पोते ने बड़ी उत्सुकता से पूछा, "वह क्या है?"
तब दादाजी ने कहा, "मेरे अंदर एक लड़ाई चल रही है। दो भेड़ियों के बीच, एक भयानक लड़ाई।"
पोते ने पूछा कि, "दादाजी यह कैसी लड़ाई है?"
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दादाजी ने आगे बताते हुए कहा, "एक भेड़िया बुराई, क्रोध, दुःख, लोभ, और अहंकार से भरा हुआ है। दूसरा भेड़िया अच्छाई, आनंद, शांति, प्रेम, दया और विश्वास से भरा है। इन दोनों के बीच लड़ाई हो रही है।"
दादाजी ने आगे बताते हुए कहा, "बेटा, तुम्हारे और इस धरती के हर व्यक्ति के अंदर यह बड़ी लड़ाई चल रही है।" दादाजी पल भर के लिए शांत हो गए।
अचानक पोते ने बड़ी ही मासूमियत से और उत्सुकता से पूछा, "दादाजी फिर यह लड़ाई किसने जीती?"
दादाजी मुस्कुराये और बोले, *" जिस भेड़िये को तुम पोषित करोगे वही जीतेगा"*
बुराई और अच्छाई रूपी इन दो भेड़ियों में से हम जिस भेड़िए को पोषित करते हैं, वही जीतता है। हम सभी जिंदगी में कई ऐसी परिस्थितियों से गुजरते हैं, जिसमें हमें सही और गलत के बीच चयन करना होता है। आखिर में यह हम पर ही निर्भर करता है कि हम किस परिस्थिति को पोषित करते हैं और अपने जीवन के लिए चुनते हैं ।
*“जब हम दिल की सुनते है, तो हम चुनाव करने की एक विस्तृत मानसिक प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होती है; हम हमेशा जानते है की क्या सही है।”*
*विशेष :- भव्य आत्माओं, आज हम चाहे तो सही पुरुषार्थ कर वर्तमान में सबकुछ प्राप्त कर सकते है। किंतु राग द्वेष,लोभ के कारण हम जिस प्रकार मकड़ी जाल बनाकर उसी में उलझकर अपना जीवन बर्बाद करती है, वहीं हाल आज हमारा हो रहा है। अतः हमें वर्तमान में अपने आचरण को अच्छा बनाना आवश्यक है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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