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*मेरा घर*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 मेरा घर ✍️🐒*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मई माह में आने वाली दिनांक 11, 14, 16, 18, 19, 23, तारीख को है। मई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*🔔आपके घर की दीवारें सब सुनती हैं और सब सोखती हैं*
कभी आपने किसी घर में जाते ही वहां एक अजीब सी नकारात्मकता और घुटन महसूस की है ?
या किसी के घर में जाते ही एकदम से सुकून और सकारात्मकता महसूस की है ?
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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हम कुछ ऐसे घरों में जाते हैं जहां जाते ही तुरंत वापस आने का मन होने लगता है। एक अलग तरह का खोखलापन और नेगेटिविटी उन घरों में महसूस होती है। हम साफ समझ पाते हैं कि उन घरों में रोज-रोज की कलह और लड़ाई - झगड़े और चुगली, निंदा आदि की जाती है। परिवार में सामंजस्य और प्रेम की कमी है। वहां कुछ पलों में ही मुझे अजीब सी बेचैनी होने लगती है और हम जल्दी ही वहां से वापस आ जाती हैं।
वहीं कुछ घर इतने खिलखिलाते और प्रफुल्लित महसूस होते हैं कि वहां घंटों बैठकर भी हमें वक़्त का पता नहीं चलता ।
*ध्यान रखिये....*
" आपके घर की दीवारें सब सुनती हैं और सब सोखती हैं। घर की दीवारें युगों तक समेट कर रखती हैं सारी सकारात्मकता और नकारात्मकता भी "
*" कोपभवन "* का नाम अक्सर हमारी पुरानी कथा-कहानियों में सुनाई देता है। दरअसल कोपभवन पौराणिक कथाओं में बताया गया घर का वो हिस्सा होता था जहां बैठकर लड़ाई - झगड़े और कलह-विवाद आदि सुलझाए जाते थे। उस समय भी हमारे पुरखे सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को अलग-अलग रखने का प्रयास करते थे इसलिए " कोपभवन " जैसी व्यवस्था की जाती थी ताकि सारे घर को नकारात्मक होने से बचाया जाए।
इसलिए आप भी कोशिश कीजिए कि आपका घर "कलह-गृह" या "कोपभवन" बनने से बचा रहे।
घर पर सुंदर तस्वीरें (जैसे:- ओम, स्वस्तिक ,पाखुड़ी युक्त भरा हुआ मंगल कलश , उगता हुआ सूरज आदि), फूल-पौधे, बगीचे, सुंदर कलात्मक वस्तुएँ आदि आपके घर का श्रृंगार बेशक़ होती हैं पर आपका घर सांस लेता है। आपकी हंसी-ठिठोली से, मस्ती-मज़े से, खिलखिलाहट से और बच्चों की शरारतों से, बुजुर्गों की संतुष्टि से, घर की स्त्रियों के सम्मान से और पुरुषों के सामर्थ्य से, तो इन्हें भी सहेजकर-सजाकर अपने घर की दीवारों को स्वस्थ रखिये।
*👪हां एक बात का ध्यान रखें भगवान हो या गुरु हो या कोई खिलौना या हाथी घोड़ा कुछ भी हो इनकी ठोस मूर्ति नहीं होना चाहिए। अगर घर में विराजमान हैं तो उसे किसी भी स्थान पर या बहते हुए पानी में विसर्जित कर दें। अन्यथा कई प्रकार के घर में दोष उत्पन्न होते है।*
*" आपका घर सब सुनता है और सब कहता भी है। "*
इसलिए यदि आप अपने घर को सदा दीवाली सा रोशन बनाये रखना चाहते हैं तो ग्रह कलह और निंदा, विवादों आदि को टालिये।
*" यदि आपके घर का वातावरण स्वस्थ्य और प्रफुल्लित होगा तो उसमें रहने वाले लोग भी स्वस्थ और प्रफुल्लित रहेंगे। "*
*🔔🌞🙏👪✅विशेष:-भव्य आत्माओं, आप स्वयं का व अपने घर का निरीक्षण कर स्वयं सुधार करें।आप सभी को शुभकामनाएं कि आपका घर सदा मुस्कुराता रहे !! आपसभी दिन दोगुनी व रात्रि चौगुनी तरक्की कर यह मनुष्य भव सफल करें।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रतिसमय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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