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*संबंधों का महत्व*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 संबंधों का महत्व✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 ज्येष्ठ कृष्ण 6 ,दिनांक 11मई गुरुवार को ग्यारवें तीर्थंकर श्रेयांसनाथ भगवानजी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है। गर्भ कल्याणक महोत्सव सिंहपुरी ( सारनाथ ) में हुआ था | आज के ही दिन रात्रि के अंतिम प्रहर व श्रवण नक्षत्र में मातारानी सुनन्दा के गर्भ में अवतीर्ण हुए थे | 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मई माह में आने वाली दिनांक 11, 14, 16, 18, 19, 23, तारीख को है। मई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
🔔कहने को तो संयम बहुत ही छोटा सा शब्द है पर समझने को बहुत ही बड़ा है आज में आपको एक छोटी की घटना का उल्लेख कर रहा हूँ जो समझ गया समझो जीवन का गूढ़ रहस्य समझ गया और जो न समझा सका उसे ईश्वर ही सदबुद्धि दे।
एक देवरानी और जेठानी में किसी बात पर जोरदार बहस हुई और दोनो में बात इतनी बढ़ गई कि दोनों ने एक दूसरे का मुँह तक न देखने की कसम खा ली और अपने-अपने कमरे में जा कर दरवाजा बंद कर लिया।परंतु थोड़ी देर बाद जेठानी के कमरे के दरवाजे पर खट-खट हुई। जेठानी तनिक ऊँची आवाज में बोली कौन है, बाहर से आवाज आई दीदी मैं ! जेठानी ने जोर से दरवाजा खोला और बोली अभी तो बड़ी कसमें खा कर गई थी। अब यहाँ क्यों आई हो ?
देवरानी ने कहा दीदी सोच कर तो वही गई थी, परंतु माँ की कही एक बात याद आ गई कि जब कभी किसी से कुछ कहा सुनी हो जाए तो उसकी अच्छाइयों को याद करो और मैंने भी वही किया और मुझे आपका दिया हुआ प्यार ही प्यार याद आया और मैं आपके लिए चाय ले कर आ गई।बस फिर क्या था दोनों रोते रोते, एक दूसरे के गले लग गईं और साथ बैठ कर चाय पीने लगीं। जीवन मे क्रोध को क्रोध से नहीं जीता जा सकता, बोध से जीता जा सकता है। अग्नि अग्नि से नहीं बुझती जल से बुझती है।समझदार व्यक्ति बड़ी से बड़ी बिगड़ती स्थितियों को दो शब्द प्रेम के बोलकर संभाल लेते हैं। हर स्थिति में संयम और बड़ा दिल रखना ही श्रेष्ठ है।
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अगर बात कुछ समझ आ गयी हो तो उठ जाओ और पानी की बाल्टी से जो आग आपके ओर उसके बीच में लगी है। बुझा लो।
ओर समझदार बन जाओ।
एक समय था जब मेरे ओर कुछ पुराने साथियो के बीच में खाई बन आयी थी (जहां उनके साथ सुबह शाम की महफ़िल सजा करती थी)। तो हमने अपनी तरफ से जो भी मित्र का याद आता गया, उसे मिल कर या फ़ोन पर माफी मांगी (चाहे दूरियां बनते समय पूरी गलती उसकी दिखाई दे रही थी, पर हमेशा याद रखना ताली दो हाथ से बजती है कहीं न कहीं उस लड़ाई में आपका भी हिस्सा था) और अब देखो। मैं जीवन में आगे बढ़ रहा हूँ।
मेरा परिवार (हमारा परिवार 40k को cross कर चुका है व्हाट्सएप्प ओर टेलीग्राम पर) कितना बड़ा हो चुका है। आप सभी का आभार, ओर हाँ फ़ोन उठाओ, कॉल करो, ऑडियो मेसज भेजो। कुछ भी करो।
पर अपने अजीज को (जो नाराज़ है या गुस्सा है) फ़ोन करो और माफी मांग लो।
क्योंकि माफी एक मांगता फायदा दो लोगों का होता है।
करके तो देखो, आज से पहले ऐसी फीलिंग फिर कभी नही आई ।
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रतिसमय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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