सोमवार, 29 जुलाई 2024

कर्म का फल

*कर्म का फल*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒कर्म का फल  ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 श्रावण कृष्ण दशमी 10,  मंगलवार , 30 जुलाई  2024 कलिकाल के 17 वें तीर्थंकर कुंथुनाथ भगवान बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त कर सर्व सुखकारी संस्कार  प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री    कुंथुनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*👨‍👨‍👦‍👦आइए जानते है इस कहानी के माध्यम से स्वयं की सच्चाई👨‍👨‍👦‍👦*

                 एक रोज रास्ते में एक महात्मा अपने शिष्य के साथ भ्रमण पर निकले. गुरुजी को ज्यादा इधर - उधर की बातें करना पसंद नहीं था, कम बोलना और शांतिपूर्वक अपना कर्म करना ही गुरू को प्रिय था. परन्तु शिष्य बहुत चपल था, उसे हमेशा इधर-उधर की बातें ही सूझती, उसे दूसरों की बातों में बड़ा ही आनंद आता था.

                  चलते हुए जब वो तालाब से होकर गुजर रहे थे, तो उन्होंने देखा कि एक  मछुआरा नदी में जाल डाले हुए है. *शिष्य यह सब देख खड़ा हो गया और मछुआरे को ‘अहिंसा परमोधर्म’ का उपदेश देने लगा.* 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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                    लेकिन मछुआरा कहाँ समझने वाला था, *पहले उसने टालमटोल करनी चाही और बात जब बहुत बढ़ गयी तो शिष्य और मछुआरा के बीच झगड़ा शुरू हो गया. यह झगड़ा देख गुरूजी जो उनसे बहुत आगे बढ़ गए थे, लौटे और शिष्य को अपने साथ चलने को कहा एवं शिष्य को पकड़कर ले चले.* 

                   गुरूजी ने अपने शिष्य से कहा- *“बेटा हम जैसे साधुओं का काम सिर्फ समझाना है, लेकिन ईश्वर ने हमें दंड देने के लिए धरती पर नहीं भेजा है!” शिष्य ने पुछा- “महाराज को न तो बहुत से दण्डों के बारे में पता है और न ही हमारे राज्य के राजा बहुतों को दण्ड देते हैं. तो आखिर इसको दण्ड कौन देगा?”* 
                     शिष्य की इस बात का जवाब देते हुए गुरूजी ने कहा- *“बेटा! तुम निश्चिंत रहो इसे भी दण्ड देने वाली एक अलौकिक शक्ति इस दुनिया में मौजूद है जिसकी पहुँच सभी जगह है… ईश्वर की दृष्टि सब तरफ है और वो सब जगह पहुँच जाते हैं.* 

                 इसलिए अभी तुम चलो, इस झगड़े में पड़ना गलत होगा, इसलिए इस झगड़े से दूर रहो..! शिष्य गुरुजी की बात सुनकर संतुष्ट हो गया और उनके साथ चल दिया.
                   इस बात को *ठीक दो वर्ष ही बीते थे कि एक दिन गुरूजी और शिष्य दोनों उसी तालाब से होकर गुजरे, शिष्य भी अब दो साल पहले की वह मछुआरे वाली घटना भूल चूका था.. उन्होंने उसी तालाब के पास देखा कि एक चुटीयल साँप बहुत कष्ट में था उसे हजारों चीटियाँ नोच-नोच कर खा रही थीं. शिष्य ने यह दृश्य देखा और उससे रहा नहीं गया, दया से उसका ह्रदय पिघल गया था. वह सर्प को चींटियों से बचाने के लिए जाने ही वाला था कि गुरूजी ने उसके हाथ पकड़ लिए और उसे जाने से मना करते हुए कहा- “ बेटा! इसे अपने कर्मों का फल भोगने दो.. यदि अभी तुमने इसे रोकना चाहा तो इस बेचारे को फिर से दुसरे जन्म में यह दुःख भोगने होंगे क्योंकि कर्म का फल अवश्य ही भोगना पड़ता है..* 

               शिष्य ने गुरूजी से पुछा- *“गुरूजी इसने कौन-सा कर्म किया है जो इस दुर्दशा में यह फँसा है?”* 

                     गुरू महाराज बोले- *“यह वही मछुआरा है जिसे तुम पिछले वर्ष इसी स्थान पर मछली न मारने का उपदेश दे रहे थे और वह तुम्हारे साथ लड़ने के लिए आग - बबूला हुआ जा रहा था. वे मछलियाँ ही चींटी है जो इसे नोच-नोचकर खा रही है..”* 

            यह सुनते ही बड़े आश्चर्य से शिष्य ने कहा- *गुरूजी, यह तो बड़ा ही विचित्र न्याय है.*                           गुरुजी ने कहा- *“बेटा! इसी लोक में स्वर्ग-नरक के सारे दृश्य मौजूद हैं, हर क्षण तुम्हें ईश्वर के न्याय के नमूने देखने को मिल सकते हैं. चाहे तुम्हारे कर्म शुभ हो या अशुभ उसका फल तुम्हें भोगना ही पड़ता है. इसलिए ही वेद में भगवान ने उपदेश देते हुए कहा है- अपने किये कर्म को हमेशा याद रखो, यह विचारते रहो कि तुमने क्या किया है, क्योंकि ये सच है कि तुमको वहाँ भोगना पड़ेगा.. जीवन का हर क्षण कीमती है इसलिए इसे बुरे कर्म के साथ व्यर्थ जाने मत दो. अपने खाते में हमेशा अच्छे कर्मों की बढ़ोत्तरी करो क्योंकि तुम्हारे अच्छे कर्मों का परिणाम बहुत सुखद रूप से मिलेगा इसका उल्टा भी उतना ही सही है, तुम्हारे बुरे कर्मों का फल भी एक दिन बुरे तरीके से भुगतना पड़ेगा. इसलिए कर्मों पर ध्यान दो क्योंकि वो ईश्वर हमेशा न्याय ही करता है..”* 
                     शिष्य गुरुजी की बात स्पष्ट रूप से समझ चूका था…
   *🔔👨‍👨‍👦‍👦🎪✅🙏विशेष :भव्य आत्माओं , हम चाहे इस बात पर विश्वास करें या नहीं लेकिन यह शत्-प्रतिशत सच है कि हमारे द्वारा किए गए कर्म ही हमेशा सही न्याय करते हैं. और उनके न्याय करने का सीधा सम्बन्ध हमारे अपने ही कर्मों से है. यदि हमने अपने जीवन में बहुत अच्छे कर्म किये हैं या अच्छे कर्म कर रहे हैं तो उसी के अनुरूप ही हमारे साथ न्याय होगा . यह जीवन हमें इसलिए मिला है ताकि हम कुछ ऐसे कार्य करें जिसको देखकर किसी भी जीव की आँखों में भी हमारे प्रति प्रेम छलक उठे!!! इसलिए हमें कोई भी कार्य करने से पहले विचार अवश्य करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 21 जुलाई 2024

सहज वर्षायोग 2024

*🕉️ सिध्दम नम:*
🕉️सहज वर्षायोग सूचना🌞
.       🙏 *श्री पार्श्वनाथ जिनेद्राय नमः*🙏
 .     *🕉️🌞श्री वसुनन्दी गुरुवे नमः 🌞🕉️*  
  *🌲22 वे मंगल वर्षायोग  कलश की स्थापना*
   *सोमवार   दिनांक 22/07/2024*

👨‍👩‍👧‍👦धर्मानुरागियों
               🕉️जय जिनेंद्र, 
        ➡️✍️⌚👨‍👩‍👧‍👦*परम पूज्य 108 श्री श्वेतपिच्छाचार्य विद्यानंदजी मुनिराज से आचार्य पद से  अलंकृत श्री वसुनन्दी जी महामुनि राज के आत्मसाधक शिष्य क्षुल्लक 105 नित्यानंद सागर  महाराज का  जयपुर महानगरी मे   उनका 22 वाँ मंगल  वर्षायोग *श्री शांतिसागर समाधि साधना केवा सेवा केंद्र जयपुर कार्यालय* पर हो रहा है । 
 वर्षायोग हेतु मंगल कलश स्थापना दिनांक *22/ 07/ 2024 को दिन रविवार दोपहर 3.00 बजे* सम्पन्न होगी । आप सभी से अनुरोध है कि वर्षायोग  की अनुमोदन करते हुए  धर्मलाभ  ले। 

      गुरुदेव का कहना है कि इस वर्ष  *देश विदेश के पुण्यार्जक श्रावक के  घरों में यह वर्षायोग का मंगल कलश पहुंचे ताकि आप सभी की चंचला लक्ष्मी से, सभी का आयु ,आरोग्य, धन  सम्पदा बनी रहे ओर साथ ही एक अति आवश्यक *श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र के अंतर्गत त्यागी व्रतियों के समाधि में सहयोगी बनकर स्वयं के आत्मविकास  में आपका सराहनीय योगदान हो इस बात को ध्यान में रखते हुए* 

*🕉️1.गणधर कलश की राशि मात्र 1,11,111/- रुपए रखी है* 
*🌞2.रत्नत्रय कलशकी राशि मात्र 51,111/- रुपए रखी है* 

*🔔3.शक्तिकलश की राशि मात्र 21,111/- रुपए रखी है* 

*🎪4 अखंड ज्योति शुद्ध घी की(सम्पूर्ण वर्षायोग)   राशि मात्र 25,111/- रुपए रखी है*

इस सर्वश्रेष्ठ कार्य हेतु मंगल कलश  हमसे निम्न नम्बर पर आप सम्पर्क कर जल्द से जल्द अपने नाम दे। 
*🔔नोट:-कलशों की संख्या सिमीत होने से पहले जिसकी राशि जमा होगी उसे ही मंगल कलश दिया जायेगा।*

     आपके मंगल कलश की स्थापना क्षुल्लकजी के द्वारा शास्त्रोक्त विधि से स्थापित किये जाएंगे।...
*🔔 कार्यालय➡️*
 *🕉️श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र जयपुर* पर सम्पन्न होगी । वर्षायोग के दरम्यान गुरुदेव कलश पर रोज़ाना जाप व विशिष्ट अनुष्ठान होगे एवं वर्षायोग के बाद आपको यह   सहज मंगल कलश आपके पते पर कोरीयर द्वारा भिजवाएगे।

*⏰✍पुण्यार्जक श्रावक अपनी राशि बैंक में  जमा करवाकर निम्न नंबरो पर सम्पर्क करें🌞* 
*Sevavrti* 
*Punjab National Bank*
*A/C No.5871000100010922*
*IFC Code PUNB 0587100* 
*Durgapura JAIPUR*
 (Rajasthan)
*पेटीएम UPI ID 9982411713@paytm*

सम्पर्क सूत्र:-
*🌞1. 9461956111*
*2.9982411713*
धन्यवाद....
     अधिक जानकारी हेतु सम्पर्क करे।
सम्पर्क सूत्र:-

*🌞1.9982411713*
*🌞2.9461956111*
    
       🙏निवेदक🙏
*🌞श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र जयपुर*

 *🌞ट्रस्ट मंडल एवं प्रबंध कार्यकारिणी*
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*🕉️श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र  जयपुर*

 *व्हाट्सएप नंबर 9982411713*
       🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

गुरुवार, 11 जुलाई 2024

सिकंदर को दिंगबर संत का उपदेश

*सिकंदर को दिंगबर संत का उपदेश*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सिकंदर को दिंगबर संत का उपदेश  ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 आषाढ़ शुक्ल षष्ठी,  शुक्रवार  , 12 जुलाई  2024 कलिकाल के अंतिम तीर्थंकर शासन नायक उपसर्ग विजेता सिंह वृत्ति के धनी 24 वें तीर्थंकर वर्धमान स्वामी  बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अज्ञान को समाप्त कर सर्व सुखकारी रत्नत्रय प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री    वर्धमान स्वामीजी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 आषाढ़ शुक्ल सप्तमी,  शनिवार  , 13 जुलाई  2024 कलिकाल के 22 वें तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान राहू की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त कर सर्व सुखकारी संस्कार  प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री   नमिनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जुलाई माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव   23, 30 को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 जुलाई माह में  अष्टमी तिथि  8 व 29 जून को है। चतुर्दशी तिथि  20 जुलाई को है।*
*🙆इस जुलाई माह  विवाह मुहूर्त 9 , 11,12,13,14,15  जुलाई तक ही है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*🔔सिकंदर को दिंगबर संत का उपदेश*

सिकंदर महान ने अपने रण कौशल से ग्रीस, इजिप्ट समेत उत्तर भारत तक अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था। सालों से युद्ध करती सिकंदर की सेना बहुत थक चुकी थी और अब वो अपने परिवारों के पास वापस लौटना चाहती थी। सिकंदर को भी अपने सैनिकों की इच्छा का सम्मान करना पड़ा और उसने भी भारत से लौटने का मन बना लिया।

पर जाने से पहले वह किसी ज्ञानी व्यक्ति को अपने साथ ले जाना चाहता था। स्थानीय लोगों से पूछने पर उसे एक पहुंचे हुए बाबा के बारे में पता चला जो कुछ दूरी पर स्थित एक नगर के पास जंगल में रहते थे।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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सिकंदर दल-बल के साथ वहां पहुंचा।  बाबा निःवस्त्र एक पेड़ के नीचे ध्यान लगा कर बैठे थे।  सिकंदर उनके ध्यान से बाहर आने का इंतज़ार करने लगा।  कुछ देर बाद बाबा ध्यान से बाहर निकले और उनके आँखें खोलते ही सैनिक ” सिकंदर महान – सिकंदर महान ” के नारे लगाने लगे।

बाबा अपने स्थान पर बैठे उन्हें ऐसा करते देख मुस्कुरा रहे थे।

सिकंदर उनके सामने आया और बोला , "मैं आपको अपने देश ले जाना चाहता हूँ।  चलिए हमारे साथ चलने के लिए तैयार हो जाइये।"

बाबा बोले,"मैं तो यहीं ठीक हूँ , मैं यहाँ से कहीं नहीं जाना चाहता , मैं जो चाहता हूँ सब यहीं उपलब्ध है , तुम्हे जहाँ जाना है जाओ।"

एक मामूली से संत का यह जवाब सुनकर सिकंदर के सैनिक भड़क उठे।  भला इतने बड़े राजा को कोई मना कैसे कर सकता था।

सिकंदर ने सैनिकों को शांत करते हुए बाबा से कहा ,"मैं ‘ना’ सुनने का आदि नहीं हूँ , आपको मेरे साथ चलना ही होगा।"

बाबा बिना घबराये बोले ,  *"यह मेरा जीवन है और मैं ही इसका फैसला कर सकता हूँ कि मुझे कहाँ जाना है और कहाँ नहीं !”*

यह सुन सिकंदर गुस्से से लाल हो गया उसने फ़ौरन अपनी तलवार निकाली और बाबा के गले से सटा दी , *"अब क्या बोलते हो , मेरे साथ चलोगे या मौत को गले लगाना चाहोगे ??”*

बाबा अब भी शांत थे बोले *"मैं तो कहीं नहीं जा रहा , अगर तुम मुझे मारना चाहते हो तो मार दो, पर आज के बाद से कभी अपने नाम के साथ “महान” शब्द का प्रयोग मत करना , क्योंकि तुम्हारे अंदर महान होने जैसी कोई बात नहीं है … तुम तो मेरे गुलाम के  भी गुलाम हो !!”*

सिकंदर अब और भी क्रोधित हो उठा, भला दुनिया जीतने वाले इतने बड़े योद्धा को एक निर्बल – निःवस्त्र , व्यक्ति अपने गुलाम का भी गुलाम कैसे कह सकता था।

*” तुम्हारा मतलब क्या है ?”* सिकंदर क्रोधित होते हुए बोला।

बाबा बोले: *” क्रोध मेरा गुलाम है , मैं जब तक नहीं चाहता मुझे क्रोध नहीं आता , लेकिन तुम अपने क्रोध के गुलाम हो , तुमने बहुत से योद्धाओं को पराजित किया  पर अपने क्रोध से नहीं जीत पाये , वो जब चाहता है तुम्हारे ऊपर सवार हो जाता है, तो बताओ…हुए ना तुम मेरे गुलाम के गुलाम। “*

सिकंदर बाबा की बातें सुनकर स्तब्ध रह गया।  वह उनके सामने नतमस्तक हो गया और अपने सैनिकों के साथ वापस लौट गया।

*कहा भी जाता है कि जहाँ क्रोध होता है वहाँ विश्व की कोई भी शुभ शक्ति निवास नहीं करती है!*

इसलिए शान्त रहिये क्योंकि शान्त मन से ही प्रभु के गुणों की प्राप्ति हो सकती है।

*👨‍👨‍👦‍👦💯🙏🔑🔔विशेष: -भव्य आत्माओं, आज हम सभी क्षेत्रों में असफल हो रहें है इसका मुख्य कारण यह है कि हमनें  क्रोध मान माया व लोभ को महत्व दिया है। यही हमारी सबसे बड़ी भूल है जिसके कारण हम अपने कर्तव्यों से दूर होते जा रहे है। अतः हमें स्वयं को अपनी गलती को स्वीकार कर अपने ही स्तर पर सुधार करना आवश्यक है।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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