*सिकंदर को दिंगबर संत का उपदेश*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 सिकंदर को दिंगबर संत का उपदेश ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 आषाढ़ शुक्ल षष्ठी, शुक्रवार , 12 जुलाई 2024 कलिकाल के अंतिम तीर्थंकर शासन नायक उपसर्ग विजेता सिंह वृत्ति के धनी 24 वें तीर्थंकर वर्धमान स्वामी बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अज्ञान को समाप्त कर सर्व सुखकारी रत्नत्रय प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री वर्धमान स्वामीजी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 आषाढ़ शुक्ल सप्तमी, शनिवार , 13 जुलाई 2024 कलिकाल के 22 वें तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान राहू की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त कर सर्व सुखकारी संस्कार प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री नमिनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जुलाई माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 23, 30 को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨👨👦👦🔔👉 जुलाई माह में अष्टमी तिथि 8 व 29 जून को है। चतुर्दशी तिथि 20 जुलाई को है।*
*🙆इस जुलाई माह विवाह मुहूर्त 9 , 11,12,13,14,15 जुलाई तक ही है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*🔔सिकंदर को दिंगबर संत का उपदेश*
सिकंदर महान ने अपने रण कौशल से ग्रीस, इजिप्ट समेत उत्तर भारत तक अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था। सालों से युद्ध करती सिकंदर की सेना बहुत थक चुकी थी और अब वो अपने परिवारों के पास वापस लौटना चाहती थी। सिकंदर को भी अपने सैनिकों की इच्छा का सम्मान करना पड़ा और उसने भी भारत से लौटने का मन बना लिया।
पर जाने से पहले वह किसी ज्ञानी व्यक्ति को अपने साथ ले जाना चाहता था। स्थानीय लोगों से पूछने पर उसे एक पहुंचे हुए बाबा के बारे में पता चला जो कुछ दूरी पर स्थित एक नगर के पास जंगल में रहते थे।
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सिकंदर दल-बल के साथ वहां पहुंचा। बाबा निःवस्त्र एक पेड़ के नीचे ध्यान लगा कर बैठे थे। सिकंदर उनके ध्यान से बाहर आने का इंतज़ार करने लगा। कुछ देर बाद बाबा ध्यान से बाहर निकले और उनके आँखें खोलते ही सैनिक ” सिकंदर महान – सिकंदर महान ” के नारे लगाने लगे।
बाबा अपने स्थान पर बैठे उन्हें ऐसा करते देख मुस्कुरा रहे थे।
सिकंदर उनके सामने आया और बोला , "मैं आपको अपने देश ले जाना चाहता हूँ। चलिए हमारे साथ चलने के लिए तैयार हो जाइये।"
बाबा बोले,"मैं तो यहीं ठीक हूँ , मैं यहाँ से कहीं नहीं जाना चाहता , मैं जो चाहता हूँ सब यहीं उपलब्ध है , तुम्हे जहाँ जाना है जाओ।"
एक मामूली से संत का यह जवाब सुनकर सिकंदर के सैनिक भड़क उठे। भला इतने बड़े राजा को कोई मना कैसे कर सकता था।
सिकंदर ने सैनिकों को शांत करते हुए बाबा से कहा ,"मैं ‘ना’ सुनने का आदि नहीं हूँ , आपको मेरे साथ चलना ही होगा।"
बाबा बिना घबराये बोले , *"यह मेरा जीवन है और मैं ही इसका फैसला कर सकता हूँ कि मुझे कहाँ जाना है और कहाँ नहीं !”*
यह सुन सिकंदर गुस्से से लाल हो गया उसने फ़ौरन अपनी तलवार निकाली और बाबा के गले से सटा दी , *"अब क्या बोलते हो , मेरे साथ चलोगे या मौत को गले लगाना चाहोगे ??”*
बाबा अब भी शांत थे बोले *"मैं तो कहीं नहीं जा रहा , अगर तुम मुझे मारना चाहते हो तो मार दो, पर आज के बाद से कभी अपने नाम के साथ “महान” शब्द का प्रयोग मत करना , क्योंकि तुम्हारे अंदर महान होने जैसी कोई बात नहीं है … तुम तो मेरे गुलाम के भी गुलाम हो !!”*
सिकंदर अब और भी क्रोधित हो उठा, भला दुनिया जीतने वाले इतने बड़े योद्धा को एक निर्बल – निःवस्त्र , व्यक्ति अपने गुलाम का भी गुलाम कैसे कह सकता था।
*” तुम्हारा मतलब क्या है ?”* सिकंदर क्रोधित होते हुए बोला।
बाबा बोले: *” क्रोध मेरा गुलाम है , मैं जब तक नहीं चाहता मुझे क्रोध नहीं आता , लेकिन तुम अपने क्रोध के गुलाम हो , तुमने बहुत से योद्धाओं को पराजित किया पर अपने क्रोध से नहीं जीत पाये , वो जब चाहता है तुम्हारे ऊपर सवार हो जाता है, तो बताओ…हुए ना तुम मेरे गुलाम के गुलाम। “*
सिकंदर बाबा की बातें सुनकर स्तब्ध रह गया। वह उनके सामने नतमस्तक हो गया और अपने सैनिकों के साथ वापस लौट गया।
*कहा भी जाता है कि जहाँ क्रोध होता है वहाँ विश्व की कोई भी शुभ शक्ति निवास नहीं करती है!*
इसलिए शान्त रहिये क्योंकि शान्त मन से ही प्रभु के गुणों की प्राप्ति हो सकती है।
*👨👨👦👦💯🙏🔑🔔विशेष: -भव्य आत्माओं, आज हम सभी क्षेत्रों में असफल हो रहें है इसका मुख्य कारण यह है कि हमनें क्रोध मान माया व लोभ को महत्व दिया है। यही हमारी सबसे बड़ी भूल है जिसके कारण हम अपने कर्तव्यों से दूर होते जा रहे है। अतः हमें स्वयं को अपनी गलती को स्वीकार कर अपने ही स्तर पर सुधार करना आवश्यक है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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