रविवार, 6 अप्रैल 2025

निंदा करने का फल

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 निंदा करने का फल ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल ग्यारस , 8 अप्रैल मंगलवार 2025 कलि काल के पांचवें सुमतिनाथ तीर्थंकर सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री सुमतिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी संस्कार प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री सुमतिनाथ भगवान जी का जन्म, केवल ज्ञान व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*

*🎪इस अप्रैल  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 2, 3, 8,10,12,14, 22, 23, 26 तारीख को है।↔️ इस माह शाश्वत पर्व दश लक्षण 2 से 11 अप्रैल तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎 इस अप्रैल माह में अष्टमी तिथि 5 व 21 तारीख को है।चतुर्दशी तिथि 11 व 26 मार्च को है।*
*🔔🐎 सोलह कारण शाश्वत पर्व व व्रत 15 मार्च से 14 अप्रेल तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 अप्रैल माह में शुध्द विवाह मुहूर्त 16,18, 19, 20, 21, 29, 30 अप्रैल को है।🔔*
*🐎✍️ अप्रैल माह में पंचक 22 तारीख की रात्रि 12:31से ,23, 24, 25, 26,  27 को प्रातः 3:39 तक है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*👨‍👨‍👦‍👦निंदा करने का फल 🐎* 

 *निंदा के दुष्प्रभाव: एक पौराणिक कथा यह कथा आज भी वैष्णव धर्म में प्रचलित है।* 

निंदा मतलब दूसरों के कामों में दोष ढूंढ़ना। दूसरों की बुराई करना । हिन्दू धर्म  ग्रंथो में कहा गया है अगर हम किसी की बुराई करेगे, निदा करेंगे तो वह हमें नाश की ओर ले जाएगा। निंदा का प्रभाव अत्यंत घातक होता है। यह कथा इसी सत्य को प्रतिपादित करती है। 

जब भगवान श्रीराम अपने धाम को लौटने लगे, तब अयोध्या के समस्त प्राणी—मनुष्य, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, यहाँ तक कि पर्वत भी उनके साथ चल पड़े। उन मनुष्यों में एक वह धोबी भी था, जिसने माता सीता की निंदा की थी।
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भगवान श्रीराम ने उसके हाथ को अपने हाथ में पकड़ा हुआ था और उसे अपने साथ लिए जा रहे थे। जो भी यह दृश्य देखता, वह भी उनके साथ चलने लगता। जब सभी ने साकेत धाम में प्रवेश करना चाहा, तो साकेत का द्वार खुल गया।

किन्तु जैसे ही वह निंदनीय धोबी द्वार के समीप पहुँचा, द्वार बंद हो गया। साकेत द्वार ने भगवान से कहा, "महाराज! यद्यपि आपने इसे अपने हाथों में पकड़ा है, किन्तु इसने जगत जननी माता सीता की निंदा की है। यह इतना बड़ा पापी है कि मेरे द्वार से साकेत में प्रवेश नहीं कर सकता।"

इस घटना को आकाश से सभी देवी-देवता देख रहे थे। ब्रह्मा जी ने सोचा, "यदि भगवान इसे मेरे ब्रह्मलोक में भेज दें, तो मेरा लोक अपवित्र हो जाएगा।" उन्होंने हाथ हिलाते हुए कहा, "महाराज! मेरे ब्रह्मलोक में इस पापी के लिए कोई स्थान नहीं है।"

इंद्र ने भी चिंतित होकर कहा, "महाराज! यह इतना बड़ा अपराधी है कि इसे मेरे इंद्रलोक में भी स्थान नहीं मिल सकता।"

ध्रुव जी ने विचार किया, "यदि यह पापी मेरे ध्रुव लोक में आ गया, तो इसके पाप के भार से मेरा लोक नीचे गिर जाएगा।" अतः उन्होंने भी निवेदन किया, "महाराज! इसे मेरे पास भी मत भेजिए।"

समस्त देवताओं ने एक स्वर में इस धोबी को अपने-अपने लोक में स्थान देने से इनकार कर दिया। 
भगवान श्रीराम मुस्कुराते हुए सबका चेहरा देख रहे थे, किंतु उन्होंने कुछ नहीं कहा।

यमराज भी उपस्थित थे। उन्होंने विचार किया, "यह इतना बड़ा अपराधी है कि इसे मेरी यमपुरी में भी स्थान नहीं मिलना चाहिए।" वे घबराकर बोले, "महाराज! मेरी यमपुरी में भी इस पापी के लिए कोई जगह नहीं है।"

अब उस धोबी को घबराहट होने लगी। उसने सोचा, "मेरी दुर्बुद्धि ने इतना बड़ा पाप करवा दिया कि अब कोई भी मुझे स्वीकारने को तैयार नहीं है।"

भगवान श्रीराम ने उसकी चिंता देखी और उसे सांत्वना देते हुए कहा, "घबराओ मत! मैं अभी तुम्हारे लिए एक नया साकेत धाम बनाता हूँ।"

तब भगवान ने उसके लिए एक अलग साकेत धाम की रचना की। यहाँ तुलसीदास जी की एक चौपाई स्मरण होती है—

 *सिय निंदक अघ ओघ नसाए ।* 
 *लोक बिसोक बनाइ बसाए ॥* 

ऐसा प्रतीत होता है कि आज भी वह धोबी अकेला उसी साकेत में पड़ा हुआ है, जहाँ न कोई देवी-देवता हैं, न भगवान। न वह किसी को देख सकता है, न कोई उसे।

 *🔔⛳🐎🔑विशेष:-भव्य आत्माओं, इस कथा से स्पष्ट होता है कि भगवान अथवा किसी भी पुण्यात्मा की निंदा करने वालों के लिए कहीं कोई स्थान नहीं होता। निंदा व्यक्ति को समाज और सृष्टि से बहिष्कृत कर सकती है, और अंततः उसे एकाकी और निराशाजनक स्थिति में पहुँचा सकती है। अतः सदैव सत्कर्म करें और निंदा से बचें।इस कहानी से अपने अंदर झांक कर देखिए क्या हमारा आचरण भी हमें एक नई साकेत नगरी तो नहीं पहुंचा रहा है। स्वयं विचार करें व स्वयं ही आकलन कर अपने आचरण को व्यवस्थित करें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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