रविवार, 14 दिसंबर 2025

मन की वक्रता का उपाय

पंचकल्याणक महोत्सव व कहानी 
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  मन की वक्रता का उपाय ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष कृष्ण  ग्यारस , 15 दिसंबर    सोमवार 2025 कलि काल के  अष्टम  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री चद्रप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से चंद्र की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री चंद्रप्रभ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष कृष्ण  ग्यारस , 15 दिसंबर  सोमवार 2025 कलि काल के  23 वें तीर्थंकर  उपसर्ग विजेता श्री पार्श्वनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से केतु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री पार्श्वनाथ  भगवान जी का जन्म व तप  कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28  दिसंबरको है। चतुर्दशी तिथि 03 व 18 दिसंबर  को है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  दिसंबर माह में  04,05,06 व 11 दिसंबर को है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20,26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  24 से 25 दिसंबर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*मन की वक्रता का उपाय*
आज हम स्वयं के मन की वक्रता को सिधा सरल बनाने कि प्रक्रिया को सरल शब्दों में समझते है।इस प्रक्रिया का हम जैसे जैसे निरंतर अभ्यास करते है वैसी हमारे मन की वक्रता समाप्त होना चालू हो जाती है।अब हमारा चौरासी लाख योनियों का भ्रमण कम होना निश्चित है।

*_भक्ति की राह — मन को गूँधने की साधना_* 

आज के सत्संग में गुरुवर ने अत्यन्त सरल शब्दों में बताया कि सच्चे देव शास्त्र गुरु की भक्ति में भजन-सुमिरन की राह कठिन नहीं होती, बस निरन्तरता और सावधानी आवश्यक है। 
उन्होंने कहा— *“जैसे बारिश के बाद रास्ता फिसलन भरा हो तो हम टिके-टिके कदम रखते हैं, वैसे ही आध्यात्मिक मार्ग पर भी मन को संभालकर चलाना पड़ता है। जो संभलकर चलता है, वह गिरता नहीं।”*
इसके बाद उन्होंने एक सुंदर उदाहरण दिया— 
*“जब आटा गूँधना शुरू करते हैं तो वह हाथों और बर्तन में चिपकता है। लेकिन थोड़ी देर में जब वह अच्छी तरह गूँध जाता है, तो न हाथों को चिपकता है और न बर्तन को।”*
मन भी ऐसा ही है— शुरू में इच्छाओं, आदतों और संसारिक बातों में चिपकता है; पर निरंतर सुमिरन से धीरे-धीरे इतना परिपक्व हो जाता है कि संसार की चिपचिपाहट स्वयं ही छूटने लगती है।

⬇️⬇️⬇️✅⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️✅⬆️⬆️⬆️

एक आश्रम में एक छोटा-सा बाग़ था। वहाँ एक बेल थी जो जैसे-जैसे बढ़ती, पेड़ के तने, बाड़ और पास की झोपड़ी—जिसे भी पाती—उसी से लिपट जाती। हर सुबह माली आता और उसे सीधा करने की कोशिश करता, पर बेल फिर तिरछी होकर किसी न किसी चीज़ से चिपक जाती।

एक दिन एक युवा शिष्य ने माली से पूछा— “तुम इसे बार-बार सीधा क्यों करते हो? यह तो रोज़ फिर उलझ जाती है।”

माली मुस्कुराया और बोला— “बेल को एक ही बार नहीं, रोज़ थोड़ा-थोड़ा सीधा करना पड़ता है। अगर कई दिनों तक छोड़ दूँ, तो यह पूरी झोपड़ी को जकड़ लेगी। लेकिन यदि प्रतिदिन इसे थोड़ा-सा भी दिशा दे दूँ, तो कुछ महीनों में यह बिल्कुल सीधी खड़ी हो जाएगी। शुरू में यह विरोध करेगी, इधर-उधर चिपकेगी, पर धीरे-धीरे अपना स्वभाव सुधार लेगी।”

शिष्य ने आश्चर्य से पूछा— “और यह कब रुकेगी?”

माली ने हँसते हुए कहा— “जब इसकी कोमल डाली कड़ी हो जाएगी—यानी जब यह परिपक्व हो जाएगी। तब इसे किसी सहारे की जरूरत नहीं रहेगी, न यह किसी चीज़ से चिपकेगी। अपने आप सीधी खड़ी रहेगी।”

यह सुनकर शिष्य समझ गया कि मन भी उसी बेल जैसा है— शुरू में कहीं भी चिपक जाता है—लालसा में, क्रोध में, आदतों में, लोगों में। लेकिन यदि रोज़ थोड़ा-सा सुमिरन और साधना से उसे सीधी राह दिखाते रहें, तो एक दिन मन भी परिपक्व हो जाता है— 
न किसी इच्छाओं से चिपकता है, न संसार के सहारों पर टिकता है।

*🌞✅✍️🔔 विशेष:- देव-शास्त्र-गुरु की भक्ति एक दिन की साधना नहीं— यह मन को रोज़-रोज़ गूँधने, सीधा करने और स्थिर करने की प्रक्रिया है। जब मन परिपक्व हो जाता है— मोह हल्का हो जाता है, इच्छाएँ शांत हो जाती हैं, और भीतर एक अद्भुत स्थिरता उतर आती है। संतों ने ठीक ही कहा है— “संसार में रहो, पर संसार को अपने मन में  मत बसने दो।”🪔*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें