सोमवार, 28 मार्च 2022

स्वंयवर

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒स्वंयवर💐💐*
एक राजा जो बहुत ही दयावान और प्रजाप्रिय था। उसकी एक बेटी थी। वह बहुत ही सुन्दर और बुद्धिमान थी। राजकुमारी जब बड़ी हुई तो राजा को उसके विवाह की चिंता सताने लगी। राजकुमारी के लिए वर ढूंढने से पहले राजा ने राजकुमारी की राय जाननी चाही।
राजकुमारी ने काफी सोच विचार कर अपने पिता से कहा– पिता जी ! जो व्यक्ति मेरी पसंद का दीपक ला देगा मै उसी से विवाह करूंगी।

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अगले दिन राजा ने राजकुमारी की शर्त के साथ स्वयंवर की घोषणा कर दी। स्वयंवर का दिन आ गया , हाथ में दीपक लिए हुए युवकों की कतार लग गई । वह भी बहुत ही लंबी कतार। कोई युवक राजकुमार था तो कोई नगर सेठ, कोई साहूकार था तो कोई साहसी बहादुर। सबके पास तरह तरह के दीपक थे । छोटे–बड़े , सोने–चांदी के हीरे–जवाहरात के जगमगाते सुन्दर नक्काशी वाले दीपक ।

राजकुमारी सबके दीपक देखती हुई कतार के अंत तक जा पहुंची मगर अबतक उसको  मनपसंद दीपक नहीं मिला । लेकिन कतार के अंत में खड़े युवक के हाथ में कोई दीपक नहीं था । राजकुमारी ने उस युवक से पूछा – आप अपने साथ दीपक नहीं लाए ?
युवक ने दाए बाए देखा , थोड़ी सी गीली मिट्टी उठाकर एक गोला बनाया और फिर उसे बाए हाथ में लेकर उसने अपने दाए कुहनी से दबा दिया । मिट्टी का दीपक तैयार हो गया ।राजकुमारी ने मुस्कुराकर वरमाला उस युवक के गले में डाल दी।
मित्रों" दीपक का काम प्रकाश देना है फिर चाहे वह सोने का हो या मिट्टी का। जिस समय प्रकाश की आवश्यकता हो तब क्या हम सोने या चांदी के दीपक को ढूंढने अथवा खरीदने निकलेंगे ?
राजकुमारी को दीपक की जरूरत नहीं थी । दरअसल वह तो सिर्फ प्रतिभा और दूरदर्शिता की परीक्षा ले रही थी।
*👩👨आज वर्तमान में लड़के व लड़की के विचार मिलते है तो शादी कर लेना चाहिये।दोनों को दोनों परिवार के साथ मिलकर धर्म का पालन करते हुए जीवन निर्वाह करना चाहिए।पति-पत्नी अकेले रहने से आने वाली पिढी मे संस्कार नहीं रहते है।यही वर्तमान मे परिवर्तन दिखाई देता है।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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