शनिवार, 2 नवंबर 2024

अन्तर्मन का प्रेम

*अंतर्मन का प्रेम*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*

*💪👩‍🚒अंतर्मन का प्रेम   ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 कार्तिक शुक्ल द्वितीया भाई-दूज,  रविवार , 03 नवम्बर 2024 कलिकाल के  नौवें तीर्थंकर  सुविधिनाथ भगवान शुक्र की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के सुखकारी वैभव प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री सुविधिनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 नवंबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  03, 07, 13,15, 25 को  कल्याणक महोत्सव है।अष्टान्हिका शाश्वत पर्व,8 से15 नवम्बर तक*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 नवंबर माह में  अष्टमी तिथि  09 व 23 को है। चतुर्दशी तिथि 14 व 30  नवम्बर को है।*
*🙆इस नवम्बर माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 12,13,16,17,18,22,23,25,26,28,29 को  है।▶️पंचक 9 से 13 नवम्बर तक है।👨‍👨‍👦‍👦↔️ग्रह प्रवेश मुहूर्त 8,13,16,18,25 नवम्बर को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
            *!! अंतर्मन का प्रेम !!*

शहर की तंग गलियों के बीच एक पुरानी ताले की दुकान थी। लोग वहां से ताला-चाबी खरीदते और कभी-कभी चाबी खोने पर डुप्लीकेट चाबी बनवाने भी आते। ताले वाले की दुकान में एक भारी-भरकम हथौड़ा भी था जो कभी-कभार ताले तोड़ने के काम आता था।

हथौड़ा अक्सर सोचा करता कि आखिर इन छोटी-छोटी चाबियों में कौन सी खूबी है जो इतने मजबूत तालों को भी चुटकियों में खोल देती हैं जबकि मुझे इसके लिए कितने प्रहार करने पड़ते हैं?

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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एक दिन उससे रहा नहीं गया, और दुकान बंद होने के बाद उसने एक नन्ही चाबी से पूछा- “बहन ये बताओ कि आखिर तुम्हारे अन्दर ऐसी कौन सी शक्ति है जो तुम इतने जिद्दी तालों को भी बड़ी आसानी से खोल देती हो, जबकि मैं इतना बलशाली होते हुए भी ऐसा नहीं कर पाता?”

चाबी मुस्कुराई और बोली- दरअसल, तुम तालों को खोलने के लिए बल का प्रयोग करते हो… उनके ऊपर प्रहार करते हो और ऐसा करने से ताला खुलता नहीं टूट जाता है… जबकि मैं ताले को बिलकुल भी चोट नहीं पहुंचाती… बल्कि मैं तो उसके मन में उतर कर उसके हृदय को स्पर्श करती हूँ और उसके दिल में अपनी जगह बनाती हूँ। इसके बाद जैसे ही मैं उससे खुलने का निवेदन करती हूँ, वह फ़ौरन खुल जाता है।

मनुष्य जीवन में भी ऐसा ही कुछ होता है। यदि हम किसी को सचमुच जीतना चाहते हैं, अपना बनाना चाहते हैं तो हमें उस व्यक्ति के हृदय में उतरना होगा। जोर-जबरदस्ती  से कोई काम कराना संभव तो है पर इस तरह से हम ताले को खोलते नहीं बल्कि उसे तोड़ देते हैं… यानि उस व्यक्ति की उपयोगिता को नष्ट कर देते हैं, जबकि प्रेम पूर्वक किसी का दिल जीत कर हम सदा के लिए उसे अपना मित्र बना लेते हैं और उसकी उपयोगिता को कई गुना बढ़ा देते हैं।

*👨‍👨‍👦‍👦⛳✅▶️भव्य आत्माओं:-  इस बात को हमेशा याद रखिये- हर एक चीज जो बल से प्राप्त की जा सकती है उसे प्रेम से भी पाया जा सकता है लेकिन हर एक जिसे प्रेम से पाया जा सकता है उसे बल से नहीं प्राप्त किया जा सकता..!!*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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1 टिप्पणी:

  1. Main chahti hun ki aap is mein roj ki bajay ek bar pure sal ki puri thiya bhi Dale jismen grah Pravesh ka Shubh muhurt aur Vivah Vivah ka Shubh muhurt bhi ho

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