*मेरी इच्छाएं*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 मेरी इच्छाएं ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी, मंगलवार , 10 दिसंबर 2024 कलिकाल के 18 वें तीर्थंकर अरनाथ बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार से सद्बुद्धि प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री अरनाथ का तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 मार्गशीर्ष शुक्ल ग्यारस, बुधवार , 11 दिसंबर 2024 कलिकाल के 19 वें तीर्थंकर मल्ली नाथ केतु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार से सद्बुद्धि प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री मल्ली नाथ का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।▶️ आज ही के दिन 21 वें तीर्थंकर नमिनाथ जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा को अनुकूल बनाकर मोक्ष मार्ग में स्थित होते है।नमिनाथ भगवानजी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 दिसंबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 10, 11, 14, 15, 17, 26,29 को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨👨👦👦🔔👉 दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 23 को है। चतुर्दशी तिथि 14 व 29 दिसम्बर को है।*
*🙆इस दिसंबर माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 04, 05, 09, 10, 14, 15 को है।▶️पंचक 7 से 11 दिसंबर तक है।👨👨👦👦↔️ग्रह प्रवेश मुहूर्त 05,11,25,28 दिसंबर को है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*🌳🦚आज की कहानी मेरी इच्छाएं 🦚🌳*
*💐💐साधु और खजूर💐💐*
एक दिन की बात है, एक साधु गाँव के बाहर वन में स्थित अपनी कुटिया की ओर जा रहा था। रास्ते में बाज़ार पड़ा. बाज़ार से गुजरते हुए साधु की दृष्टि एक दुकान में रखी ढेर सारी टोकरियों पर पड़ी। उसमें ख़जूर रखे हुए थे। ख़जूर देखकर साधु का मन ललचा गया। उसके मन में ख़जूर खाने की इच्छा जाग उठी, किंतु उस समय उसके पास पैसे नहीं थे. उसने अपनी इच्छा पर नियंत्रण रखा और कुटिया चला आया। कुटिया पहुँचने के बाद भी ख़जूर का विचार साधु के मन से नहीं निकल पाया। वह उसी के बारे में ही सोचता रहा।रात में वह ठीक से सो भी नहीं पाया।
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अगली सुबह जब वह जागा, तो ख़जूर खाने की अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए पैसे की व्यवस्था करने के बारे में सोचने लगा,सूखी लकड़ियाँ बेचकर ख़जूर खरीदने लायक पैसों की व्यवस्था अवश्य हो जायेगी, यह सोचकर वह जंगल में गया और सूखी लकड़ियाँ बीनने लगा,काफ़ी लकड़ियाँ एकत्रित कर लेने के बाद उसने उसका गठ्ठर बनाया और उसे अपने कंधे पर लादकर बाज़ार की ओर चल पड़ा। लड़कियों का गठ्ठर भारी था, जिसे उठाकर बाज़ार तक की दूरी तय करना आसान नहीं था, किंतु साधु चलता गया. थोड़ी देर में उसके कंधे में दर्द होने लगा। इसलिए विश्राम करने वह एक स्थान पर रुक गया।
थोड़ी देर विश्राम कर वह पुनः लकड़ियाँ उठाकर चलने लगा. इसी तरह रुक-रुक कर किसी तरह वह लकड़ियों के गठ्ठर के साथ बाज़ार पहुँचा। बाज़ार में उसने सारी लकड़ियाँ बेच दी। अब उसके पास इतने पैसे इकठ्ठे हो गए, जिससे वह ख़जूर खरीद सके वह बहुत प्रसन्न हुआ और खजूर की दुकान में पहुँचा। सारे पैसों से उसने खजूर खरीद लिए और वापस अपनी कुटिया की ओर चल पड़ा। कुटिया की ओर जाते-जाते उसके मन में विचार आया कि आज मुझे ख़जूर खाने की इच्छा हुई।हो सकता है कल किसी और वस्तु की इच्छा हो जाये. कभी नए वस्त्रों की इच्छा जाग जायेगी, तो कभी अच्छे घर की।
कभी स्त्री और बच्चों की, तो कभी धन की। मैं तो साधु व्यक्ति हूँ. इस तरह से तो मैं इच्छाओं का दास बन जाऊंगा। यह विचार आते ही साधु ने ख़जूर खाने का विचार त्याग दिया. उस समय उसके पास से एक गरीब व्यक्ति गुजर रहा था. साधु ने उसे बुलाया और सारे खजूर उसे दे दिए. इस तरह उसने स्वयं को इच्छाओं का दास बनने से बचा लिया।
*💐 विशेष 💐 भव्य आत्माओं :- यदि हम अपनी हर इच्छाओं के आगे हार जायेंगे, तो सदा के लिए अपनी इच्छाओं के दास बन जायेंगे। मन चंचल होता है. उसमें रह-रहकर इच्छायें उत्पन्न होती रहती हैं। एक इच्छा पूरी हो तो दूसरी इस प्रकार इच्छाएं समाप्त नहीं होती।जो उचित भी हो सकती हैं और अनुचित भी। ऐसे में इच्छाओं पर नियंत्रण रखना आवश्यक है. सोच-विचार कर इच्छाओं के आंकलन के उपरांत ही उनकी पूर्ति के लिए कदम बढ़ाना चाहिए।तभी जीवन में सफ़लता प्राप्त होगी। हमें इच्छाओं का दास नहीं बनाना है, बल्कि इच्छाओं को अपना दास बनाकर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करना है।*
*आप चाहे किसी भी समाज से हो, अगर आप अपने समाज के किसी उभरते हुए व्यक्तित्व से जलते हो या उसकी निंदा करते हो तो आप निश्चित रूप से इस पृथ्वी पर बोझ हो ।यही विचारधारा आपके पतन का भी मुख्य कारण है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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