*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 अनावश्यक खर्च ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨👨👦👦🐎🔑 मार्गशीर्ष शुक्ल 10 , 30 नवंबर रविवार 2025 कलि काल के 18 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री अरनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अरनाथ भगवान जी का तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 माह दिसंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,03,04,06,15,18 व 30 तारीख को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨👨👦👦🔔🐎इस दिसंबर माह में अष्टमी तिथि 12 व 28 दिसंबरको है। चतुर्दशी तिथि 03 व 18 दिसंबर को है।*
*👨👨👦👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त दिसंबर माह में 04,05,06 दिसंबर को है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,05,07,08,14,1517,24 व 25🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 01,05,09,10,119,20,26 ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक 1व 24 से 25 दिसंबर को है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*अनावश्यक खर्च — एक सीख*
जीवन में समझदारी केवल कमाने से नहीं, बल्कि खर्च करने से भी दिखाई देती है। आज के समय में लोग अक्सर दूसरों की देखा-देखी अपनी क्षमता से ऊपर खर्च कर देते हैं। मॉल में या सोशल साइट्स पर मिलने वाले बड़े-बड़े डिस्काउंट देखकर कई बार ऐसी वस्तुएँ भी खरीद लेते हैं जिनकी उन्हें कोई जरूरत नहीं होती। नतीजा यह होता है कि उनका बजट बिगड़ जाता है और बाद में पछताना पड़ता है। जबकि सच्ची बुद्धिमानी उसी में है कि व्यक्ति अपनी जरूरत, परिस्थिति और सामर्थ्य के अनुसार खर्च करे। यही बात इस कहानी में सुंदर ढंग से झलकती है।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
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गांव में एक बैल व्यापारी कई बैल लेकर बेचने के लिए आया। उसने बैलों के जो दाम रखे थे, वे इतने सस्ते थे कि गांव के लगभग हर किसान ने एक-एक बैल खरीद लिया। लेकिन धरमू ने एक भी बैल नहीं खरीदा। सबने सोचा कि धरमू शायद कंजूस है या उसके पास समझ नहीं।
कुछ महीने बाद, उसी गांव में एक और व्यापारी आया। इस बार बैल मजबूत, स्वस्थ और पहले वाले से कहीं बेहतर थे, किंतु कीमत भी पहले से ज्यादा थी। अब गांव के किसी व्यक्ति ने बैल नहीं खरीदा, लेकिन धरमू ने बिना झिझक एक बैल खरीद लिया।
यह देखकर गांव वाले हैरान रह गए। उन्होंने धरमू से पूछा, “जब पहले व्यापारी ने इतने सस्ते बैल दिए थे, तब तो तुमने नहीं खरीदा, और अब बढ़ी कीमत देकर खरीद लिया? इसमें तो नुकसान है!”
धरमू मुस्कुराया और बोला, “नुकसान नहीं, लाभ हुआ है । दोस्तों, जब पहले व्यापारी आया था, तब मेरे पास पैसे भी नहीं थे और बैलों की आवश्यकता भी नहीं थी। इसलिए उस वक्त मेरे लिए सस्ता भी महंगा था। लेकिन अब मेरे पास बैल खरीदने के लिये पर्याप्त पैसे हैं और आवश्यकता भी बन गई है, इसलिए यह ज्यादा कीमत वाला बैल भी मेरे लिए सस्ता है।”
वह थोड़ी देर रुका और फिर समझाते हुए बोला,
*“समय और परिस्थिति के अनुसार खर्च करना ही बुद्धिमानी है। जब पैसे कम हों, तो बचाना ही कमाई होती है। जो लोग दूसरों से उधार लेकर अनावश्यक चीज़ें खरीदते हैं, वे बाद में ब्याज समेत उसकी कीमत कई गुना चुका देते हैं। इसलिए खर्च हमेशा अपनी क्षमता देखकर ही करना चाहिए।”*
*🔔नोट:- वर्तमान में आपमें से कुछ व्यक्ति विशेष धनराशि देकर विशेषज्ञ से आनलाइन सिखते है। उसमें अनावश्यक प्रश्न करके स्वयं के साथ दुसरो का भी समय व्यर्थ में व्यतित करते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए।*
धरमू की बात सुनकर सभी गांववाले सोच में पड़ गए। उन्हें एहसास हुआ कि *सस्ता या महंगा वस्तु में नहीं, बल्कि हमारी स्थिति और जरूरत की समझ में छिपा होता है।*
*⏰🌞🐎✅विशेष : भव्य आत्माओं,फिजूल खर्च करने से बेहतर है समझदारी से खर्च करना। आज के दौर में दिखावे या डिस्काउंट के झांसे में आकर अपनी क्षमता से अधिक खर्च करना मूर्खता है। असली अमीरी धन की नहीं, बल्कि सोच की होती है — जो अपनी जरूरत, समय और परिस्थिति को समझकर निर्णय लेता है, वही सच्चा बुद्धिमान है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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