*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 कल कभी नहीं आता ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨👨👦👦🐎🔑 माघ शुक्ल दसमी , 28 जनवरी बुधवार 2025 कलि काल के 2 रें तीर्थंकर श्री अजितनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अजितनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*✅नोट :-उत्तर पुराण के अनुसार 9को तप कल्याणक और दसमी को जन्म कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जनवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 08,15,17,18,20,22,24,28 व 30( 30 को बारस+तेरस समाहित तिथि )तारीख को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨👨👦👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 11 व 26 जनवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 जनवरी को है।*
*🔔🐎षोडष कारण महापर्व 04 जनवरी से 02 फरवरी को है।*
*🎪🪔दशलक्षण महापर्व 22 से 31 जनवरी 👉30 जनवरी से 01 फरवरी रत्नत्रय व्रत*
*👨👨👦👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त जनवरी माह में नहीं है बसंत पंचमी का 23 जनवरी को स्वयं सिद्ध मुहूर्त है 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,12,14,19,21,28 व 29 जनवरी 🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 03040708,13,14,23,24 व 29 जनवरी ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
🙏 *“कल” कभी नहीं आता* 🙏
हम जीवन को अक्सर ऐसे जीते हैं, जैसे हमारे पास समय अनंत हो। जैसे हर सुबह फिर आएगी, हर रिश्ता फिर मिल जाएगा, हर अवसर दोबारा दस्तक देगा।
और हम आदतन कह देते हैं—
कल बात कर लेंगे,
कल माफ कर देंगे,
कल माँ-बाप के पास बैठ लेंगे,
कलं एक्सरसाइज शुरू कर लेंगे,
कल अपने मन की सुन लेंगे,
कल अपने सपनों के लिए समय निकाल लेंगे।
पर जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि —
“कल” कभी नहीं आता।
जो आता है, वह सिर्फ आज होता है…
और जो चला जाता है, वह लौटकर कभी नहीं आता।
मृत्युशय्या पर पड़ा मनुष्य अक्सर यही कहता है—
“मैंने बहुत कुछ पाया…
पर काश, मैंने सच में ज़्यादा जिया होता।”
काश,
मैंने रिश्तों को समय दिया होता,
मैंने क्षमा को अहंकार से पहले चुना होता,
मैंने “मैं” को थोड़ा कम और “हम” को थोड़ा ज़्यादा जिया होता,
मैंने प्रेम को टालने की जगह बाँटा होता।
जीवन की अंतिम दहलीज़ पर खड़ा इंसान अचानक बहुत स्पष्ट देख पाता है—
कि असली पूँजी पद, पैसा, पहचान या प्रशंसा नहीं होती,
बल्कि होती है —
रिश्ते, प्रेम, क्षमा, सत्य, कृतज्ञता, संवेदना,
और वर्तमान में पूरे मन से जीना।
“जो आज को जी लेता है, उसे कल की चिंता नहीं करनी पड़ती।”
“समय का सबसे बड़ा अपमान है — उसे टालते रहना।”
“जीवन लंबा नहीं, गहरा होना चाहिए।”
इसलिए आज ही—
बात कर लो,
माफ कर दो,
गले लगा लो,
धन्यवाद कह दो,
प्रेम जता दो,
और अपने मन की आवाज़ सुन लो…
क्योंकि जीवन टलने के लिए नहीं, जीने के लिए है। 🌱
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*“आज की सत्यता ”*
छोटे से शहर का शुभम, था तो बहुत मेहनती पर हर चीज़ को टालने की आदत उसकी पहचान बन चुकी थी।
माँ कहती— “बेटा, थोड़ा मेरे पास बैठ लिया कर।”
वह कहता— “माँ, कल से बैठूँगा।”
पत्नी कहती— “थोड़ा समय बच्चों को दे दो।”
वह कहता— “कल दूँगा।”
मन कहता— “थोड़ा अपने लिए भी जी ले।”
वह कहता— “कल जी लूँगा।”
एक दिन गाँव में एक दिगंबर साधु आए। उन्होंने शुभम से पूछा “तुम जीवन में सबसे ज़्यादा कौन सा शब्द बोलते हो?”
करण मुस्कुराया— “कल।”
साधु ने ज़मीन पर एक रेखा खींची और बोले—
“ये है आज, और ये है कल।”
फिर पूछा— “तुम किस पर खड़े हो?”
मोहन बोला— “आज पर।”
साधु मुस्कुराए—
“तो फिर कल पर क्यों जीते हो?”
उसी रात शुभम के पिता की अचानक तबीयत बिगड़ी और वे चल बसे। शुभम टूट गया। उसकी आँखों में एक ही वाक्य गूँज रहा था— “मैं कल बैठूँगा…”
अगले दिन उसने घर में एक दीपक जलाया और उस पर लिखा—
“आज”
अब जब भी कोई काम टालने का मन करता,
वह उस दीपक को देखता और खुद से कहता—
“अगर आज नहीं, तो कभी नहीं।”
उस दिन से उसने जीवन जीना शुरू किया—
माँ के पास बैठना,
बच्चों के साथ खेलना,
पत्नी से बात करना,
लोगों को माफ करना,
और हर दिन को अंतिम दिन समझकर जीना।
*सफलता प्राप्त करने के लिए एक शास्त्रों में कहावत है कि काल करे सो आज कर आज करे सो अब,अब करें सो विचार ना कर कार्य कर*
*✅👨👨👦👦🐎⛳विशेष :- जीवन का सबसे बड़ा धोखा है —“कल और जीवन का सबसे बड़ा सत्य है — “आज जो आज को जीना सीख गया वही जीवन को सच में समझ गया।क्योंकि कल एक भ्रम है और आज ही जीवन है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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