सोमवार, 19 जनवरी 2026

सतकर्म ही जीवन की सच्चाई है

*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सतकर्म ही जीवन की सच्चाई है ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑  माघ शुक्ल 2 तिथि, मंगलवार 20 जनवरी 2026 कलि काल के 12वें तीर्थंकर सर्व सुख कारक निधि प्रदाता श्री वासुपूज्य भगवान जी जिनकी आराधना से मंगल की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री वासुपूज्य भगवान जी का  केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑  माघ शुक्ल तिथि 4, गुरुवार 22 जनवरी 2026 कलि काल के   13 वें तीर्थंकर श्री विमलनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  विमलनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जनवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 08,15,17,18,20,22,24,28 व 30( 30 को बारस+तेरस समाहित तिथि )तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 11 व 26  जनवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 जनवरी  को है।*

*🔔🐎षोडष कारण महापर्व 04 जनवरी से 02 फरवरी को है।* 
*✅🔔 बसंत पंचमी 23 जनवरी*
*🎪🪔दशलक्षण महापर्व 22 से 31 जनवरी 👉30 जनवरी से 01 फरवरी रत्नत्रय व्रत* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  जनवरी माह में  नहीं है बसंत पंचमी का 23 जनवरी को स्वयं सिद्ध मुहूर्त है 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,12,14,19,21,28 व 29 जनवरी 🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 03040708,13,14,23,24 व 29 जनवरी ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  23 से 26 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*सतकर्म ही जीवन की सच्चाई है।* 

इस संसार में कोई भी प्राणी ऐसा नहीं जो कर्म से मुक्त हो। मनुष्य अपने शरीर, मन और वाणी से जो कुछ भी करता है, वही कर्म कहलाता है। संसार की गति, जीवन की निरंतरता और आत्मा का विकास—सब कर्म पर ही आधारित हैं। बिना कर्म के न शरीर का पोषण संभव है, न मन की शुद्धि और न ही जीवन का कोई उद्देश्य सिद्ध होता है। कर्म ही वह सेतु है जो मनुष्य को जड़ता से चेतना की ओर, 
अज्ञान से ज्ञान की ओर 
और सांसारिकता से आध्यात्मिक उन्नति की ओर 
ले जाता है।
निष्काम भाव से किया गया कर्म योगियों और संन्यासियों की सिद्धि माना गया है, किंतु सामान्य जन भी जब कर्तव्यबोध से प्रेरित होकर कर्म करता है, तब वह कर्मयोग के पथ पर अग्रसर होता है। स्वार्थ से परे होकर, केवल उत्तरदायित्व और धर्म के भाव से किया गया कर्म ही सच्चा और श्रेष्ठ है। अकर्मण्य बने रहना जीवन के प्रति अन्याय है; इसलिए भले ही किसी कर्म के पीछे कोई उद्देश्य हो, फिर भी कर्म करना अकर्म से कहीं अधिक श्रेष्ठ है। हे मनुष्य! उठो, जागो और निरंतर कर्मरत रहो—क्योंकि कर्म ही तुम्हारा धर्म है और कर्म से ही तुम्हारा कल्याण निहित है। इसलिए हमें सबसे पहले कोई भी कार्य करने से पहले विचार अवश्य ही करें कि इस कार्य से स्वयं को कितना लाभकारी या नुकसान दायक रहेगा।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 *श्रीकृष्ण और अर्जुन प्रसंग* 

महाभारत के युद्धभूमि में अर्जुन मोहग्रस्त होकर धनुष छोड़ देना चाहता है। तब श्रीकृष्ण उसे समझाते हैं— “तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में नहीं।” श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यह नहीं कहा कि युद्ध छोड़ दो, बल्कि यह सिखाया कि कर्तव्य से विमुख होना पाप है। फल की चिंता किए बिना, धर्म के पथ पर चलकर कर्म करना ही जीवन की सच्ची साधना है। अर्जुन ने जब इस सत्य को समझा, तब वही युद्ध उसके लिए मोक्ष का मार्ग बन गया। *🔔👨‍👨‍👦‍👦⏰🌞विशेष: भव्य आत्माओं , फल की आसक्ति त्यागकर किया गया कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाता। जीवन में सफलता और शांति दोनों उसी को मिलती हैं, जो कर्म को बोझ नहीं, बल्कि धर्म समझकर स्वीकार करता है।भगवद्गीता के एक श्लोक *'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन'*(कर्म करो, फल की चिंता मत करो) का *अर्थ है कि आपको अपनी जिम्मेदारियों से भागना नहीं चाहिए, बल्कि बिना फल की इच्छा किए अपना कर्तव्य निभाते रहना चाहिए,क्योंकि जिम्मेदारी लेने से ही जीवन में प्रगति होती है और यह आपके कर्मों का ही परिणाम है कि आप आज जिस स्थिति में हैं। जिम्मेदारी से भागने से सिर्फ समस्याएँ बढ़ती हैं, इसलिए उनका सामना करें और कर्म करते रहें ।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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