शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

अकेलापन

*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 अकेलापन  ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑  माघ कृष्ण चतुर्दशी तिथि, शनिवार 17 जनवरी 2026 कलि काल के   प्रथम तीर्थंकर सर्व सुख कारक संस्कार प्रदाता श्री ऋषभनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री ऋषभनाथ  भगवान जी का  मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑  माघ अमावस्या तिथि, रविवार 18 जनवरी 2026 कलि काल के   11 वें तीर्थंकर श्री श्रेयांसनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  श्रेयांसनाथ भगवान जी का  केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जनवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 08,15,17,18,20,22,24,28 व 30( 30 को बारस+तेरस समाहित तिथि )तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 11 व 26  जनवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 जनवरी  को है।*

*🔔🐎षोडष कारण महापर्व 04 जनवरी से 02 फरवरी को है।* 
*✅🔔 बसंत पंचमी 23 जनवरी*
*🎪🪔दशलक्षण महापर्व 22 से 31 जनवरी 👉30 जनवरी से 01 फरवरी रत्नत्रय व्रत* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  जनवरी माह में  नहीं है बसंत पंचमी का 23 जनवरी को स्वयं सिद्ध मुहूर्त है 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,12,14,19,21,28 व 29 जनवरी 🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 03040708,13,14,23,24 व 29 जनवरी ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  23 से 26 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

          *अकेलापन* 

अकेलापन कोई साधारण भावना नहीं, यह भीतर-ही-भीतर इंसान को खोखला कर देने वाली सबसे गहरी सज़ा है। भीड़ में रहकर भी जब मन सूना हो जाए, जब कोई अपना पास होते हुए भी दूर लगे—तब समझ आता है कि *जीवन सिर्फ साँसों से नहीं, साथ से भी चलता है*। 

प्रस्तुत कहानी उसी साथ की ज़रूरत, उसकी ताकत और उसके अभाव की पीड़ा को बड़े सहज, लेकिन गहरे भावों में कहती है।
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*अकेलापन संसार में सबसे बड़ी सज़ा है*

मेरी पत्नी ने कुछ दिनों पहले घर की छत पर कुछ गमले रखवा दिए थे। देखते-ही-देखते छत एक छोटे से गार्डन में बदल गई।
पिछले दिनों जब मैं छत पर गया, तो हैरान रह गया—कई गमलों में फूल खिल चुके थे, नींबू के पौधे पर दो नींबू 🍋🍋 झूल रहे थे और हरी मिर्चों की कतार भी मुस्कुरा रही थी।
तभी मैंने देखा कि पत्नी बांस 🎋 के एक गमले को घसीटकर दूसरे गमलों के पास ले जा रही है।
मैंने कहा, “इतना भारी गमला क्यों खिसका रही हो? पौधा सूख रहा है तो खाद डालो, पानी डालो 💦। पास रखने से क्या होगा?”
पत्नी हल्की-सी मुस्कान के साथ बोली—
“यह पौधा अकेला है, इसलिए मुरझा रहा है। इसे दूसरे पौधों के पास रख देंगे तो फिर से लहलहा उठेगा। पौधे भी अकेलेपन में सूख जाते हैं, लेकिन साथ मिल जाए तो जी उठते हैं।”
उसकी बात सुनकर मैं हँसना चाहता था, लेकिन हँसी भीतर कहीं अटक गई।
एक-एक कर कई तस्वीरें आँखों के सामने उभरने लगीं।
माँ के जाने के बाद पिताजी…
एक ही रात में बहुत बूढ़े हो गए थे।
सोलह साल तक वे हमारे साथ रहे, लेकिन सूखते हुए पौधे की तरह। माँ के रहते जिन्हें मैंने कभी उदास नहीं देखा, वे उनके जाने के बाद खामोशी की चादर ओढ़ चुके थे।
उस पल पत्नी की बात पर मुझे पूरा विश्वास हो गया—
वाकई, अकेलापन धीरे-धीरे जीवन का रस सोख लेता है।
मुझे बचपन की एक घटना याद आ गई।
मैं बाज़ार से एक छोटी-सी रंगीन मछली 🐠 लाया था। उसे शीशे के जार में रखा। खाना डाला, पानी बदला, पर वह चुप रही। दो दिन तक बस इधर-उधर तैरती रही और एक सुबह पानी की सतह पर उलटी पड़ी मिली।
काश, तब कोई मुझे बता देता कि मछलियाँ भी अकेले नहीं जी पातीं।
तो मैं एक नहीं, कई मछलियाँ लाता…
और वह मासूम यूँ तन्हा न मरती।

माँ की एक और बात याद आई—वह कहती थीं कि पुराने घरों में दीवारों में दीपक रखने के लिए दो मोखे इसलिए बनवाए जाते थे, क्योंकि अकेला मोखा भी उदास हो जाता है।
शायद सच ही है—
इस संसार में किसी को अकेलापन पसंद नहीं।
चाहे 
वह पौधा हो, 
मछली हो 
या इंसान।
*“साथ केवल सहारा नहीं होता, वह जीवन का पोषण होता है।”*
आज मन कहता है—
अगर आपके आसपास कोई अकेला दिखे, तो उसे अपना साथ दीजिए।
और अगर आप खुद अकेले हैं, तो किसी का हाथ थाम लीजिए।
मुरझाना प्रकृति नहीं, मजबूरी है।
*“अकेलापन वह सूखा है, जिसमें सबसे मजबूत जड़ें भी टूट जाती हैं।”*
गमले के पौधे को तो हाथ से खिसकाकर पास लाया जा सकता है,
लेकिन इंसान को करीब लाने के लिए रिश्तों को समझना पड़ता है, सहेजना पड़ता है…और कई बार अपने अहं को भी झुकाना पड़ता है।
अगर कभी लगे कि जीवन का रस सूख रहा है,
तो रिश्तों के प्यार का जल डालिए 💧।
कोई आपसे दूर हो गया हो, तो एक प्रयास कीजिए—
शायद वह भी किसी अपने का इंतज़ार कर रहा हो।
*“जो रिश्ते सींचे जाते हैं, वही जीवन को हरा-भरा रखते हैं।”
*विशेष :- अकेलापन सचमुच संसार की सबसे बड़ी सज़ा है। जीवन केवल अपने लिए नहीं, साथ निभाने के लिए है। रिश्ते समय माँगते हैं, समझ माँगते हैं—लेकिन वही जीवन को अर्थ देते हैं। किसी को अकेला न छोड़िए, और खुद भी अकेले मत रहिए। क्योंकि साथ में ही जीवन खिलता है।* 
सबसे महत्वपूर्ण सभी के लिए आज वर्तमान में सभी श्रावक प्रति दिन अपने षट् आवश्यक कर्म को नहीं कर रहे है जिसके कारण जीवन में उतार चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। अब मन में विचार आता है कि जब से होश संभाला है तब से जिन दर्शन व कुछ धार्मिक क्रिया कर रहे है किंतु हमें सफलता प्राप्त नहीं हो रही है।हमारी भाभी तो कभी जिन मंदिर नहीं जातीं और वह जबसे घर में आई है तब से उसका विकास हो रहा है और हमारा नहीं हो रहा। अब हम भी जिन दर्शन छोड़ कर मिथ्या दृष्टि की सेवा करेंगे। ऐसा विचार भी किसी के मन में आ सकता है। इस बात को ध्यान से समझें चौरासी लाख योनियों में सभी जीवों का उसके कर्मों से स्थान प्राप्त होता है।जो जीव आम का पेड़ बना हुआ है वह तो आम का ही फल देगा।उसी प्रकार जिस जीव का जन्म जैन कुल में हुआ है उसका आत्मकल्याण भी जैनदर्शन से ही संभव है। अगर वह दो धर्म याने दो नावों पर पैर रखकर सफर करेगा तो नियम से पानी में गिरेगा। अतः सभी अपने आत्मविश्वास को जागृत रखते हुए वीतरागी धर्म की आराधना करते हुए जीवन सार्थक करें।
*👨‍👨‍👦‍👦✅🪔कहानी में अकेलापन का सही अर्थ यह है कि जिस व्यक्ति विशेष में इंसानियत नहीं है वह आज भी असफल है और भविष्य में भी सफलता से कोसों दूर रहेगा। अतः सभी अपनी इंसानियत को समझकर जीवन सार्थक करें। बिना सच्चे धर्म के जीवन में अकेलापन ही रहता है।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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