शुक्रवार, 25 जुलाई 2025

विपरित बुद्धि

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 विपरित बुद्धि ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔   श्रावण शुक्ल  02 , रविवार 26 जुलाई  2025 कलि काल के चतुर्थ तीर्थंकर  सुमतिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करवाने वाले  श्री सुमतिनाथ  भगवान जी का  गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*

*🎪 जुलाई  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 30 व 31 तारीख को है।*
*✅🔔⏰🐎 नोट जुलाई माह से अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह + वाहन व प्रापर्टी खरीदने का शुभ मुहूर्त नहीं है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
आप सभी ने " आ बैल मुझे मार" वाली कहावत तो सुनी होगी उस कहावत को विस्तार से समझने के लिए यह विपरीत बुद्धि नामक कहानी प्रस्तुत है।
*मूर्ख बगुला और नेवला *

बहुत समय पहले की बात है। एक घना जंगल था। उस जंगल के एक विशाल वटवृक्ष की खोल (तने के अंदर) में बहुत से बगुले रहते थे। यह वृक्ष नदी के किनारे स्थित था, इसलिए बगुलों को भोजन और पानी की कोई कमी नहीं थी। वे सुख-शांति से अपने परिवार के साथ रहते थे।

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लेकिन उसी वटवृक्ष की जड़ों में एक काला, क्रूर साँप भी अपना बिल बनाकर रहता था। वह अत्यंत चालाक और हिंसक था। जब भी बगुलों के अंडों से बच्चे निकलते, वह साँप चुपचाप बिल से निकलता और बगुले के नन्हें बच्चों को खा जाता। यह दृश्य बार-बार दोहराया जाता रहा, जिससे बगुले अत्यंत दुःखी और परेशान हो गए।

इनमें से एक बूढ़ा बगुला तो इस दुख से इतना व्यथित हो गया कि उसने भोजन करना छोड़ दिया और एक दिन उदास होकर नदी किनारे बैठ गया। उसकी आँखों में आँसू थे और चेहरा चिंता से मलिन था।

उसी समय वहीं पास में एक केकड़ा पानी से बाहर निकला। उसने बगुले की यह हालत देखी और पूछा, “मामा! क्या बात है? आज इतने दुःखी क्यों हो? आँखों में आँसू क्यों हैं?”

बगुला बोला, “भैया! दुःख की बात यह है कि हर बार जब मेरे बच्चे पैदा होते हैं, तभी यह दुष्ट साँप उन्हें खा जाता है। मैं बहुत परेशान हूँ। कोई उपाय नहीं सूझता। कृपया कोई रास्ता बताओ जिससे उस साँप का नाश हो सके।”

केकड़ा बचपन से बगुले से चिढ़ता था। बगुला जब छोटा था, तब वह केकड़े का शिकार करने की कोशिश करता था। आज उसे बदला लेने का अवसर मिला था। उसने मन में सोचा — “इस बगुले को ऐसा उपाय बताऊँगा जिससे साँप का तो नाश होगा ही, साथ ही इस बगुले और इसके साथियों का भी अंत हो जाएगा।”

केकड़ा बोला, “मामा! यदि साँप से छुटकारा पाना चाहते हो तो एक सरल उपाय है। नेवला साँप का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। तुम मांस के कुछ टुकड़े नेवले के बिल के पास डाल दो और फिर मांस की एक पंक्ति साँप के बिल तक बना दो। नेवला उन टुकड़ों को खाते-खाते साँप के बिल तक पहुँचेगा और वहाँ साँप को देखकर अवश्य ही उसे मार डालेगा।”

बगुले को यह बात बहुत अच्छी लगी। उसने उसी दिन योजना के अनुसार मांस के टुकड़े पहले नेवले के बिल के पास और फिर साँप के बिल तक डाल दिए। योजना पूरी तरह सफल रही। नेवले ने मांस के टुकड़ों को खाते-खाते साँप के बिल तक पहुँचा और जैसे ही साँप को देखा, उससे युद्ध कर उसे मार डाला।

बगुला अत्यंत प्रसन्न हुआ कि अब उसके बच्चों को कोई खतरा नहीं रहेगा। लेकिन यह खुशी अधिक देर तक नहीं टिकी। साँप के मरने के बाद नेवले को वहाँ बार-बार मांस की आशा होने लगी। उसने उसी वटवृक्ष की ओर ध्यान दिया और वहाँ रहने वाले बगुलों को भी अपना शिकार बना लिया।

कुछ ही दिनों में नेवले ने उस वृक्ष पर रहने वाले लगभग सभी बगुलों को मार डाला। बगुला जिसे पहले जीत समझ बैठा था, अब अपने सारे साथियों की मृत्यु देखकर पछताने लगा।

*👨‍👨‍👦‍👦🔔सावधान आज उपरोक्त कहानी के केकड़ा जैसे लोगों की कमी नहीं है अतः आप अपनी समस्याओं को किसी योग्य मार्गदर्शक के मार्गदर्शन में ही शुरू करें वरना आपका समय व पैसा दोनों ही व्यर्थ जाएगा।*

*👨‍👨‍👦‍👦🔔✅🌞🐎विशेष :- भव्य आत्माओं,किसी समस्या को हल करने से पहले उसके परिणामों और दुष्परिणामों पर विचार अवश्य करना चाहिए। केवल वर्तमान लाभ को देखकर जल्दबाजी में किया गया निर्णय भविष्य में भारी हानि का कारण बन सकता है।💯 "बिना सोचे-विचारे किया गया उपाय, कभी-कभी विनाश का कारण बन जाता है।"*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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