*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 स्वयं का विकास ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 श्रावण कृष्ण 10 , रविवार 20 जुलाई 2025 कलि काल के 17 वें तीर्थंकर कुंथुनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करवाने वाले श्री कुंथुनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 जुलाई 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 26 ,30 व 31 तारीख को है।*
*👨👨👦👦🔔🐎 जुलाई माह में 👉चतुर्दशी तिथि 23 जुलाई को है।*
*✅🔔⏰🐎 नोट जुलाई माह से अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह + वाहन व प्रापर्टी खरीदने का शुभ मुहूर्त नहीं है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*👨👨👦👦स्वयं का विकास⏰*
*✅स्वयं के विकास के लिए आवश्यक कार्य करने वाली कहानी*
*⛳मुस्कुराहट के पीछे की खामोशी और सच्ची खुशी की तलाश*
किसी संत ने कहा है—
*"तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो,*
*क्या ग़म है जिसको छुपा रहे हो..."*
कई बार चेहरे पर हँसी होती है, लेकिन दिल में गहरा दर्द छुपा होता है। आंखों में नमी होती है, पर लब मुस्कुरा रहे होते हैं। दुनिया को लगता है —
*"वो तो खुश है",*
लेकिन कोई नहीं पूछता —
*"तू सच में ठीक है ना?"*
ज़िंदगी में अगर कोई अपना हो, जो दुख में कंधा दे सके, तो सबसे बड़ा ग़म भी हल्का लगता है। और कोई खुशी में साथ हँसे, तो छोटी सी खुशी भी उम्र भर की याद बन जाती है।
इसलिए — रिश्ते सिर्फ बनाइए नहीं, निभाइए। कभी समय निकालकर अपनों से बस पूछ लीजिए —
*"तुम ठीक हो ना?"*
क्योंकि जो सबसे ज्यादा हँसते हैं, कई बार वही सबसे ज्यादा टूटे होते हैं।
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एक व्यक्ति जिसका नाम विकास है वह अपनी ज़िंदगी से बेहद निराश था। सब कुछ होते हुए भी — ज्ञान, परिवार, सुविधा — वह भीतर से खाली महसूस करता था। उसके चेहरे पर हँसी थी, लेकिन आत्मा भीतर से बौखलाहट थी।
वह कई साधु संत, तांत्रिक - मांत्रिक , ज्योतिषाचार्य से मिला, लेकिन कोई उपाय काम नहीं आया। धीरे-धीरे उसकी निराशा आत्महत्या के विचारों में बदलने लगी। एक दिन उसने तय किया कि वह इस सबका अंत कर देगा।
वह शहर से दूर एक पहाड़ी की ओर गाड़ी लेकर निकल पड़ी। लेकिन रास्ते में एक गाँव के पास, उसने एक अधेड़ उम्र के आदमी को देखा — जो आवारा कुत्तों को रोटियाँ खिला रहा था। उसके चेहरे पर गज़ब की संतोषजनक मुस्कान थी।
विकास ने उससे बिना रुके पूछ बैठा —
"आप इतने खुश कैसे हैं? मुझे खुशी कब मिलेगी?"
वो आदमी मुस्कुराया और बोला —
"अगर तुम मुझसे छह महीने पहले मिले होते, तो तुम मुझसे ज़्यादा दुखी इंसान नहीं देखती। एक कार एक्सीडेंट में मेरा जवान बेटा मारा गया। और उसके ग़म में मेरी पत्नी भी कुछ ही महीनों में चल बसी। मैं एक ज़िंदा लाश बन गया था..."
उसने बताया कि कैसे एक सर्द रात में एक बेसहारा पिल्ला उसका पीछा करता हुआ उसके घर तक आ गया। पहले तो उसने उसे नजरअंदाज किया, लेकिन फिर उसकी ठिठुरती हालत देख कर उसका दिल पसीज गया। वह पिल्ला उसकी जिंदगी में रोशनी बनकर आया। उसने उसे दूध पिलाया, उसे कम्बल में लपेटा... और उस दिन महीनों बाद पहली बार मुस्कुराया।
"उस दिन मुझे समझ आया — सच्ची खुशी तब मिलती है, जब हम बिना स्वार्थ के किसी और के लिए कुछ करते हैं। किसी को ठंड में कम्बल देना, किसी भूखे को रोटी देना, किसी अकेले को अपनापन देना — यही असली संतोष है।"
विकास की आंखों से आंसू बह निकले। उसे अपना जवाब मिल चुका था।
वह गाड़ी घुमा कर वापस चला गई। अब उसे पता चल चुका था कि उसे क्या करना है।
*अंत की सीख:*
*• हर मुस्कुराता चेहरा खुश नहीं होता।*
*• हर संपन्न इंसान संतुष्ट नहीं होता।*
*• सच्ची खुशी तभी मिलती है जब हम बिना किसी अपेक्षा के किसी और के जीवन में रोशनी भरते हैं।*
और यदि कभी कोई हँसता-खेलता व्यक्ति मिले, तो एक बार ज़रूर पूछिए —
" *तुम ठीक हो ना?"*
क्योंकि कई बार सबसे मजबूत दिखने वाले, सबसे ज्यादा टूटे होते हैं।
*👨👨👦👦⏰🔔✅विशेष:-भव्य आत्माओं, हमें आज अपने कर्तव्यों को समझकर जीवन को संतुलित करना आवश्यक है। बिना संतुलन के सच्चा मार्ग प्राप्त नहीं होगा।🌞*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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